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विज्ञानसम्मत बाल साहित्य का लेखन अनिवार्य : डॉ. विकास दवे
साहित्य के बिना शिक्षा की कल्पना नहीं : श्री बलदाऊ राम साहू
रायपुर,/ रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे दिन कवि-कथाकार अनिरुद्ध नीरव मंडप में बाल साहित्य की प्रासंगिकता का सत्र ख्यातिलब्ध साहित्यकार नारायण लाल परमार को समर्पित रहा। जिसमें साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ. विकास दवे, बाल साहित्यकार श्री बलदाऊ राम साहू बतौर वक्ता परिचर्चा में शामिल हुए, जिसके सूत्रधार श्री एस के बिसेन रहे। इस अवसर पर देवभोग के कृष्ण कुमार अजनबी द्वारा लिखित बाल कविता संग्रह आंखों का तारा, श्री ओमप्रकाश जैन की पुस्तक जीवन चक्र और श्री संतोष कुमार मिरी की पुस्तक जीवन बोध का विमोचन किया गया।
परिचर्चा में अपने संबोधन में डॉ. विकास दवे ने कहा कि बाल साहित्य का पाठक एकमात्र ऐसा पाठक है जो स्वयं क्रेता नहीं होता, न ही निर्णायक होता है। एक समय था जब बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों में बच्चे अपने पालकों से बाल साहित्य खरीदने की जिद करते थे। डॉ. दवे ने कहा कि हमें बच्चों को सरल साहित्य सिखाना होगा। अंग्रेजी के नाम पर हम कितने सारे उपक्रम कर रहे हैं। उन्होंने पालकों से अपील की कि बच्चों को बाल साहित्य लेकर दें साथ ही एक हिंदी शब्दकोश भी दें ताकि जब कोई शब्द समझ न आए वह शब्दकोश में ढूंढ सके।उन्होंने आज के समय में विज्ञानसम्मत बाल साहित्य के लेखन को अनिवार्य बताया।
श्री बलदाऊ राम साहू ने कहा कि बाल साहित्य बच्चों को गढ़ता है, उन्हें विचार देता है। बाल साहित्य के बिना शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। बाल साहित्य को यदि हम पाठ्यपुस्तक से निकाल दें तो कुछ नहीं बचता। बाल साहित्य बच्चों को प्रेरित करता है। बच्चों को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि बच्चों में पढ़ने की परंपरा कम हो रही है, बाल पत्रिकाएं बंद होती जा रही हैं।
श्री साहू ने कहा कि शिक्षक बच्चों का मूल्यांकन सही ढंग से नहीं कर पाते। लोग बाल साहित्य को मनोरंजन का साधन नहीं, सद्विचारों का विचारों का संग्रह है। बच्चों को संवेदनशील मनुष्य बनाने में बाल साहित्य का बड़ा महत्व है। श्री साहू ने बाल साहित्य को जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बाल साहित्य बच्चों के लिए भाषा संस्कार की पाठशाला है। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों को बाल साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा।
परिचर्चा के सूत्रधार श्री एस के बिसेन ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि धीरे-धीरे पुस्तकों से पंचतंत्र और हितोपदेश की कहानियां गायब हो रही हैं। उन्होंने नैतिक शिक्षा के पाठ में बाल साहित्य को बहुत जरूरी बताया और कहा कि बाल साहित्य संस्कार और व्यवहार का मूल आधार है।
शासन और साहित्य विषय पर पूर्व आईएएएस अधिकारियों के साथ सूत्रधार कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने की चर्चा
प्रेमचंद, शरद जोशी, सार्त्र और वाक्लाव हैवेल जैसे साहित्यकारों विचारकों के उद्दरणों के साथ सार्थक चर्चा का हुआ आयोजन
लाला जगदलपुरी मंडप में हुआ आयोजन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय केयूर भूषण को किया गया नमन
रायपुर । शासन और साहित्य विषय पर आज लाला जगदलपुरी मंडप में दिलचस्प चर्चा हुई। सूत्रधार थे कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह और अतिथि वक्ता थे पूर्व आईएएस अधिकारी श्री बीकेएस रे, श्रीमती इंदिरा मिश्रा, डॉ. सुशील त्रिवेदी और डॉ. संजय अलंग। साहित्य में गहरी दिलचस्पी रखने वाले और अपनी प्रशासनिक क्षमता से प्रदेश में पहचान छोड़ने वाले अधिकारियों ने सूत्र बताए कि किस तरह साहित्य शासन-प्रशासन को जनकल्याण के लिए लगातार सकारात्मक दिशा में लेकर जाता है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि साहित्य समाज को जगाता है। डॉ. सिंह ने कहा कि अगर साहित्य केवल प्रशंसा करता है तो वो कमजोर हो जाता है और शासन यदि केवल नियंत्रण करता है तो वो कठोर हो जाता है इसलिए लोकतंत्र की असली ताकत यही है कि आलोचना को सुना जाए और संवेदना को नीति में बदला जाए। उन्होंने हिंदी साहित्य के इतिहास के प्रसंग बताते हुए कहा कि किस प्रकार वीरगाथा काल में कवियों ने राष्ट्रबोध जगाया और भक्तिकाल में उन्होंने वो मानक बताये जिससे शासन को चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि साहित्य हमेशा केंद्र में रहा है और साहित्यकारों ने अपने प्रखर विचारों को हमेशा रखा। इस मौके पर डॉ. सुशील त्रिवेदी ने कहा कि साहित्य की शक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता संग्राम में हमारे अनेक नेता साहित्यकार रहे। उस दौर में अंग्रेजों की आलोचना करने वाले साहित्यकारों की किताबों पर बैन लगाया गया। यह साहित्य की शक्ति है। उन्होंने दिनकर को उद्धृत करते हुए कहा कि जब राजनीति फिसलती है तो साहित्य उसे संभालता है। यह साहित्य की बड़ी शक्ति है। डॉ. संजय अलंग ने कहा कि साहित्यकार जो देखते हैं उसे लिख देते हैं यह आलोचना भी होती है और प्रशंसा भी होती है। नमक का दरोगा कहानी पढ़े तो ये ईमानदार अधिकारी की कहानी है और इस कहानी ने न जाने कितने लोगों के भीतर ईमानदारी के भाव भरे लेकिन सिस्टम में विसंगतियों को भी अनेक कहानियां अथवा निबंध सामने लाते हैं। उन्होंने शरद जोशी के लिखे व्यंग्य लेख जीप पर सवार इल्लियां का जिक्र किया। श्रीमती इंदिरा मिश्रा ने लेखिका तसलीमा नसरीन का जिक्र किया कि उन्होंने सच्चाई को सामने लाने की हिम्मत दिखाई और उन्हें निर्वासन सहना पड़ा। साहित्य सच को सामने लाता है और समाज को आइना दिखाता है। साहित्य संवेदनशीलता लाता है और जनकल्याणकारी शासन की नींव तैयार करता है। इस मौके पर बीकेएस रे ने कहा कि साहित्य हमारे मनोविज्ञान को बदलता है और एक संवेदनशील मनुष्य बेहतर प्रशासक बनता है। श्री रे ने फ्रांस के स्टूडेंट मूवमेंट का उदाहरण बताते हुए कहा कि नोबल पुरस्कार प्राप्त जीन पाल सार्त्र के नेतृत्व में हो रहे मूवमेंट को रोकने कैबिनेट के बैठक में चर्चा चली। जब किसी ने सार्त्र को गिरफ्तार करने की बात कही तो चार्ल्स डी गाव ने कहा कि हम इस सदी के वाल्तेयर को गिरफ्तार करने का जोखिम नहीं उठा सकते। यह साहित्य की शक्ति है। श्री रे ने वाक्लाव हैवल जैसे विचारकों के प्रमुख उद्दरणों को रखा और इसके माध्यम से अपनी बात कही। सूत्रधार डॉ. गौरव सिंह ने अंत में चर्चा के निष्कर्ष के रूप में कहा कि साहित्य संवेदनशीलता प्रदान करता है समझ प्रदान करता है इसलिए हर युग में वो केंद्र में रहा है। उन्होंने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव जैसे आयोजनों से साहित्य के प्रति लोगों की जागरकूता बढ़ाने में मदद मिलती है।
इस अवसर पर उप संचालक श्री सौरभ शर्मा ने शासकीय गमछा पहनाकर स्वागत किया एवं संयुक्त संचालक श्री हीरा देवांगन ने प्रतीक चिन्ह प्रदान किया। साथ ही कुछ नवोदित साहित्यकारों के पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
‘बड़ी दीदी’ बुधरी ताटी, डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले का पद्म श्री के लिए चयन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के लिए यह अत्यंत गर्व और सम्मान का अवसर है कि बस्तर की समाजसेविका, स्नेह और ममता की प्रतिमूर्ति ‘बड़ी दीदी’ के नाम से विख्यात श्रीमती बुधरी ताटी, तथा जनजातीय अंचलों में निःस्वार्थ सेवा के जीवंत प्रतीक डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले का पद्म श्री सम्मान के लिए चयन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश और देश का नाम रोशन करने वाली इन तीनों विभूतियों को हृदय से बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए उनके स्वस्थ जीवन की कामना की है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल इन तीनों विभूतियों की तपस्या और समर्पण का सम्मान है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए अपार गौरव का विषय भी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बस्तर और जनजातीय अंचलों में मानव सेवा, करुणा और समर्पण की जो मिसाल इन विभूतियों ने प्रस्तुत की है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि सेवा भाव से किया गया कार्य सीमाओं को पार कर राष्ट्रीय पहचान बन जाता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन तीनों विभूतियों ने वर्षों तक मौन साधना की तरह समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों की सेवा की है और आज देश ने उस सेवा को सम्मान दिया है। यह छत्तीसगढ़ की मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक चेतना और जनजातीय संस्कृति की शक्ति का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।
रायपुर / शौर्यपथ / जशपुर जिले को एक प्रमुख इको-पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में आयोजित कार्यक्रम में भारत के अग्रणी होमस्टे प्लेटफॉर्म होमस्टेज़ ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ शासन और जशपुर जिला प्रशासन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। इसके अंतर्गत ग्राम केरे को एक मॉडल सामुदायिक पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने ग्राम केरे में तैयार किए गए होमस्टे का शुभारंभ किया गया।
एमओयू के अंतर्गत जशपुर का पहला संगठित होमस्टे ग्राम बनाने की दिशा में कार्य होगा। एक सुव्यवस्थित एवं विस्तार योग्य होमस्टे-आधारित ग्रामीण पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना होगी। इस पहल के माध्यम से स्थानीय परिवारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, सतत आजीविका को सुदृढ़ किया जाएगा तथा क्षमता निर्माण और कौशल विकास के जरिए युवाओं एवं महिलाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस परियोजना का मूल उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, परंपराओं एवं प्राकृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन करना है, ताकि पर्यटन विकास समावेशी, समुदाय-स्वामित्व वाला और पर्यावरण की दृष्टि से सतत बना रहे तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे।
मुख्यमंत्री श्री साय की उपस्थिति में हुए इस समझौता का ज्ञापन पर कलेक्टर जशपुर श्री रोहित व्यास तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद वर्मा और होमस्टेज़ ऑफ इंडिया प्रा. लि. के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल राज्य सरकार की इको-पर्यटन, समावेशी विकास एवं समुदाय-नेतृत्व वाले आर्थिक विकास की परिकल्पना के अनुरूप है। स्थानीय संस्कृति और प्रकृति पर आधारित प्रामाणिक पर्यटन अनुभवों के माध्यम से यह परियोजना जशपुर की पहचान को सशक्त करेगी और उसे राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य पर्यटन मानचित्र में स्थापित करने में सहायक होगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समक्ष रेयर प्लेनेट संस्था से हुआ ऐतिहासिक एमओयू ,महिला स्वावलंबन को मिला नया बाजार
रायपुर / शौर्यपथ / वन विभाग की पहल पर जशपुर जिले में महिला सशक्तिकरण और वन आधारित आजीविका को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में विगत दिवस बगिया में रेयर प्लेनेट संस्था तथा जशपुर जिले की स्व-सहायता समूह—जागरण, स्माईल आरती, राखी एवं मुस्कान समूह—के मध्य जशक्राफ्ट ब्रांड के उत्पादों के विपणन हेतु अनुबंध समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।इस महत्वपूर्ण समझौते के अंतर्गत अब जशपुर की जनजातीय महिलाओं द्वारा बांस, छिंद, मिट्टी एवं लकड़ी से निर्मित हस्तशिल्प, आभूषण एवं सजावटी उत्पाद देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर संचालित रेयर प्लेनेट के बिक्री केंद्रों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्व-सहायता समूहों को स्थायी बाजार, उचित मूल्य तथा नियमित आय के अवसर प्राप्त होंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने एमओयू को जशपुर की महिलाओं के लिए एक निर्णायक उपलब्धि बताते हुए कहा कि जशक्राफ्ट जैसे ब्रांड के माध्यम से हमारी आदिवासी बहनों की कला अब देशभर के लोगों तक पहुँचेगी। यह पहल केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और स्वावलंबन की मजबूत नींव रखती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि वन एवं परंपरागत ज्ञान आधारित आजीविका को बाजार से जोड़ा जाए, ताकि महिलाएं अपने गांव में रहकर सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह एमओयू ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को साकार करता है तथा जशपुर की जनजातीय महिलाओं को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक ठोस और दूरगामी पहल है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, पत्थलगांव क्षेत्र की विधायक श्रीमती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वनमंडलाधिकारी श्री शशि कुमार सहित स्व-सहायता समूह की महिलाएं एवं रेयर प्लेनेट संस्था के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
पुस्तक विमोचन और जशक्राफ्ट उत्पादों की सराहना
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा “जशक्राफ्ट” पर आधारित विशेष पुस्तक का विमोचन किया गया। उन्होंने जशक्राफ्ट के अंतर्गत तैयार किए गए आभूषणों एवं हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन करते हुए उनकी गुणवत्ता, कलात्मकता और नवाचार की सराहना की।
स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी एवं विधायक श्रीमती गोमती साय का जशक्राफ्ट ब्रांड के पारंपरिक आभूषण पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया, जो महिला सशक्तिकरण और स्थानीय संस्कृति के सम्मान का सशक्त प्रतीक बना।
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री द्वारा जशक्राफ्ट ब्रांड के प्रचार-प्रसार हेतु तैयार वीडियो का भी विमोचन किया गया, जिससे जशक्राफ्ट को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।
जशक्राफ्ट: जशपुर की सांस्कृतिक विरासत से जन्मा सशक्त ब्रांड
उल्लेखनीय है कि जशक्राफ्ट जशपुर जिले की समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की सजीव अभिव्यक्ति है। जिले की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या जनजातीय समुदायों से आती है, जहाँ पीढ़ियों से बाँस, कांसा घास, छिंद पत्ते, लकड़ी एवं मिट्टी से हस्तनिर्मित कलाकृतियाँ तैयार की जाती रही हैं। पूर्व में संगठित व्यवस्था और बाजार की कमी के कारण कारीगरों की प्रतिभा सीमित रह जाती थी।
जिला प्रशासन की पहल से जशक्राफ्ट के रूप में ऐसा सशक्त मंच विकसित हुआ है, जो जशपुर जिले के आठों विकासखंडों के कारीगरों को एकजुट कर उनकी कला को पहचान, संरक्षण और बाजार उपलब्ध करा रहा है।
इस पहल के केंद्र में आदिवासी महिला कारीगर हैं, जिनके हाथों से बिना मशीनों के बने उत्पाद परंपरा, प्रकृति और आत्मनिर्भरता का संदेश देते हैं। जशक्राफ्ट आज स्वदेशी ज्ञान से आकार लेते हुए एक टिकाऊ और सम्मानजनक आजीविका मॉडल के रूप में उभर रहा है।
वन विभाग द्वारा संचालित यह पहल महिला स्वावलंबन, वन आधारित आजीविका और स्थानीय उत्पादों के राष्ट्रीय बाजारीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध हो रही है, जो आने वाले समय में जशपुर को हस्तशिल्प के राष्ट्रीय मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाएगी।
रायपुर साहित्य उत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल
रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि इंटरनेट से भरी इस दुनिया और न्यू जनरेशन वाले इस दौर में भी प्रिंट और साहित्य का महत्व हमेशा बना रहेगा। राज्यपाल श्री डेका ने आज नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि‘ के समापन समारोह के अवसर पर उक्त विचार व्यक्त किए। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य और कविता में हमेशा एक संदेश होना चाहिए। जिस तरह संगीत के सात स्वर हमें जोड़े रखते है उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान नई बातों का सीखने का अवसर प्रदान करता है।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन दिनों में इस मंच पर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चाएं हुईं। विचारों का खुलकर आदान-प्रदान हुआ। सबने मिलकर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े कई विषयों पर बात की। यह उत्सव सभी साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार और सीखने वाला अनुभव रहा है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। देश भर से आए नामी प्रकाशकों ने यहां किताबों का बहुत सुंदर संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई-नई किताबें देखने और पढ़ने का अच्छा मौका मिला। यह देखकर अच्छा लगता है कि आज भी लोगों में किताबों के प्रति गहरी रुचि है।
श्री डेका ने कहा साहित्य और संगीत का आदान प्रदान जरूरी है और ऐसे साहित्य का उत्सव हमेशा होना चाहिए। उन्होंने तीन दिवसीय सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन राज्य के अन्य शहरों एवं गांवांे के स्तर तक भी किया जाना चाहिए और यह आयोजन सरकारी न होकर समुदाय की भागीदारी वाले होने चाहिए।
श्री डेका ने कहा कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ के रामायण कालीन संस्कृति एवं साहित्य को भूल गयी है। हमारा राज्य बहुत सुंदर है और यहां की संस्कृति भी बहुत समृद्ध है। इसका प्रचार प्रसार होना चाहिए ताकि राज्य के बाहर के लोग यहां के बारे में जान सकें। श्री डेका ने कहा कि शब्दों में बहुत शक्ति होती है। शब्द का रूप ब्रह्म है। उन्हांेने बंकिमचंद्र चटर्जी के वंदे मातरम गीत का उल्लेख किया और कहा कि सारे देश को इन दो शब्दों ने जागृत कर दिया था। उन्होंने कहा कि साहित्य हमें जोड़ता है, हमें सोचने की नई दिशा देता है और हमें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। हम सभी साहित्य को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाएं और विचारों की यह रोशनी लगातार जलाए रखें। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो बिना किसी लेन-देन या व्यक्तिगत स्वार्थ के हो। ऐसे कार्य देश और समाज के समग्र विकास को मजबूती प्रदान करते हैं।
समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा बहती रही है। कालीदास, रविन्द्रनाथ टैगोर जैसे कवि एवं साहित्यकारों का इतिहास भी छत्तीसगढ़ से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के आयोजन अनवरत किए जाते रहेंगे।
समापन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी, नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता-निर्देशक श्री अनुराग बसु विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर कृष्णा दास, मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा , राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
बिलासपुर।
बिलासपुर पुलिस महकमे से जुड़ी एक बेहद गंभीर और संवेदनशील खबर सामने आई है। सोशल मीडिया पर प्रसारित समाचारों एवं वीडियो को संज्ञान में लेते हुए नगर पुलिस अधीक्षक (ASP – सिटी) श्री राजेंद्र जायसवाल के खिलाफ जांच के आदेश जारी किए गए हैं। यह आदेश पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज द्वारा जारी किया गया है, जिसमें पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक, निष्पक्ष और गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं।
प्राप्त आधिकारिक पत्र के अनुसार, सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो एवं आरोप सामने आए हैं, जिनमें यह दावा किया जा रहा है कि स्पा सेंटर संचालकों से अवैध रूप से धन की मांग की जा रही थी। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले को हल्के में न लेते हुए उच्च स्तर पर जांच का निर्णय लिया गया है।
SSP को सौंपी गई जांच की जिम्मेदारी
इस पूरे मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), जिला बिलासपुर को सौंपी गई है। IG कार्यालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सोशल मीडिया में वायरल वीडियो की दृश्य-श्रव्य सामग्री, उपलब्ध दस्तावेजों तथा शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की सूक्ष्म और वस्तुनिष्ठ जांच की जाए।
पूर्व में भी आई थी शिकायत
आदेश में यह भी उल्लेख है कि इससे पहले लोकेश सेन एवं अमन सेन द्वारा एक लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिसमें सिविल लाइन थाना, बिलासपुर से जुड़े कुछ मामलों में कथित अवैध वसूली, दबाव एवं व्यवसाय को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप लगाए गए थे। उक्त शिकायत पहले ही जांच हेतु अग्रेषित की जा चुकी है और अब उसे भी वर्तमान जांच से संबद्ध कर लिया गया है।
7 दिन में रिपोर्ट तलब
IG बिलासपुर रेंज ने SSP को निर्देशित किया है कि वे 7 दिवस के भीतर सभी तथ्यों की जांच कर स्पष्ट अभिमत सहित विस्तृत जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। साथ ही, जांच में प्रयुक्त समस्त साक्ष्य, दस्तावेज एवं सामग्री को विधिवत संलग्न करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
ASP स्तर के अधिकारी के विरुद्ध इस प्रकार की जांच के आदेश से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सबकी निगाहें SSP द्वारा की जाने वाली जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं।
प्रशासन का सख्त संदेश
इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और पद के दुरुपयोग के आरोप चाहे कितने भी उच्च पदस्थ अधिकारी पर क्यों न हों, जांच से कोई भी ऊपर नहीं है।
अब देखना यह होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इस मामले में आगे कोई बड़ी कार्रवाई होती है।
गृह वार्ड में ‘चयनात्मक कार्रवाई’ के आरोप: क्या दुर्ग में अतिक्रमण नीति सबके लिए समान है?
दुर्ग।
शासन-प्रशासन जब किसी शासकीय अधिकारी पर पद के दुरुपयोग का आरोप पाता है, तो निलंबन और बर्खास्तगी जैसी कड़ी कार्रवाइयाँ दिखाई देती हैं। सुशासन की दुहाई दी जाती है। लेकिन सवाल तब उठता है जब यही कसौटी जनप्रतिनिधियों पर लागू होती नहीं दिखती। दुर्ग नगर पालिका निगम के वार्ड क्रमांक 59—जो स्वयं महापौर श्रीमती अलका बाघमार का गृह वार्ड है—में हालिया अतिक्रमण कार्रवाई को लेकर भेदभावपूर्ण व्यवहार के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
वार्ड में एक ऐसी दुकान पर कार्रवाई की गई, जिसके संबंध में न तो यातायात अवरोध की शिकायतें थीं और न ही सड़क जाम जैसी स्थिति। दुकान संचालक रोहित जैन का आरोप है कि महापौर के पदभार ग्रहण करने के बाद से ही उन पर निजी द्वेष के तहत लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि बीते 6–7 महीनों से विभिन्न नीतिगत हथकंडों के जरिए दुकान खाली कराने का प्रयास हो रहा है, यहाँ तक कि खुले तौर पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
बुधवार, 21 जनवरी, को नगर निगम की टीम ने दुकान के सामने सड़क से काफी दूरी पर लगे शेड को अतिक्रमण बताकर तोड़ने की कार्रवाई की। हैरानी इस बात की है कि इसी दौरान शहर के कई अन्य इलाकों में स्पष्ट और प्रत्यक्ष अतिक्रमण प्रशासन की निगाहों से ओझल बने रहे।
स्थानीय लोगों के अनुसार,
महापौर निवास कार्यालय से मात्र 100 मीटर दूर साईं द्वार के पास बढ़ता अतिक्रमण,
चर्च रोड का अवैध बाजार,
समृद्धि बाजार के सामने हालिया कब्जे,
और गणेश मंदिर के सामने सड़क पर कब्जा कर संचालित राम रसोई—
इन सब पर कोई सख्त कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।
आरोप यह भी है कि सड़क पर कब्जा कर राम रसोई चलाने वाले व्यापारी को निगम की प्रेस विज्ञप्ति में ‘समाजसेवी’ बताकर प्रस्तुत किया गया, जबकि नियमों का उल्लंघन प्रत्यक्ष है। यदि अतिक्रमण वास्तव में जनहित और यातायात के आधार पर हटाया जाना है, तो नीति सबके लिए समान क्यों नहीं दिखती?
यह पूरा प्रकरण केवल एक दुकान या एक वार्ड तक सीमित नहीं रह जाता। यह नगर निगम की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक मुखिया सुमित अग्रवाल और जनप्रतिनिधि नेतृत्व की निष्पक्षता पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है। शहर के विकास के दावे तब खोखले प्रतीत होते हैं, जब कार्रवाई चयनात्मक और व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के आधार पर होती दिखाई दे।
राज्य में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार सुशासन की बात करती है। ऐसे में दुर्ग नगर निगम में सामने आ रही यह तस्वीर कहीं सरकार के लिए “काला अध्याय” न बन जाए—यह चिंता स्वाभाविक है। शहर की जनता आज यही पूछ रही है:
क्या कानून केवल कुछ के लिए है, या सबके लिए समान?
यदि जवाब दूसरा है, तो फिर निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमसम्मत कार्रवाई की शुरुआत गृह वार्ड से क्यों नहीं होती?
दुर्ग। शौर्यपथ
छत्तीसगढ़ में सरकारी गोदामों से करोड़ों रुपये मूल्य के धान के कथित रूप से "मुसवा (चूहा)" द्वारा नष्ट किए जाने के भाजपा सरकार के दावे के खिलाफ दुर्ग में कांग्रेस ने ऐसा प्रतीकात्मक और राजनीतिक प्रतिकार किया, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान खींच लिया। किसानों की मेहनत पर पर्दा डालने और धान घोटाले की जिम्मेदारी चूहों पर डालने के आरोपों के बीच जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के नेतृत्व में मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को एक अनोखा "मुसवा प्रदर्शन" आयोजित किया गया।
राजीव भवन से कलेक्टर कार्यालय तक ढोल-नगाड़ों, नारों और प्रतीकात्मक झांकियों के साथ निकली यह रैली पूरी तरह राजनीतिक संदेश से भरी रही। प्रदर्शन का केंद्र बनी "चूहा झांकी", जिसमें चूहे के वेश में सजे कार्यकर्ता नाचते-गाते आगे बढ़े और हाथों में धान लेकर यह जताते रहे कि भाजपा सरकार अपनी नाकामी और भ्रष्टाचार को "चूहा खा गया" कहकर छुपाने की कोशिश कर रही है।
इस प्रदर्शन में दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल की भूमिका सबसे प्रमुख रही। उन्होंने कहा कि धान किसानों की मेहनत का प्रतीक है और उसे चूहों के खाते में डालना सरकार की असफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। "यदि सरकार का दावा है कि धान चूहे खा गए, तो आज कांग्रेस वही चूहे सरकार को सौंप रही है। अब जवाब सरकार दे," उन्होंने तीखे शब्दों में कहा। धीरज बाकलीवाल ने इसे केवल आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि किसानों के आत्मसम्मान पर सीधा हमला बताया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने प्रतीकात्मक रूप से पिंजरे में बंद चूहे प्रशासन को सौंपे। इन चूहों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि असल जिम्मेदारी किसी जानवर की नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की है। कलेक्टर कार्यालय परिसर में भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश और किसान आक्रोश साफ दिखाई दिया।
इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष ने कहा कि सरकार धान खरीदी की समय-सीमा नहीं बढ़ा रही है और टोकन व्यवस्था को सीमित रखकर किसानों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है और बड़ी मात्रा में धान खरीदी से बाहर रह जाने का खतरा है।
प्रदर्शन के बाद दुर्ग कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें करोड़ों के धान घोटाले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों व मंत्रियों पर कड़ी कार्रवाई, किसानों का शत-प्रतिशत धान खरीदी सुनिश्चित करने, टोकन सीमा बढ़ाने और खरीदी की समय-सीमा में विस्तार की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।
कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार ने किसानों के हित में तुरंत निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेशव्यापी और उग्र रूप लेगा। दुर्ग में निकली यह "मुसवा बारात" अब भाजपा सरकार की कथित विफलता, भ्रष्टाचार और किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ एक मजबूत राजनीतिक प्रतीक बनकर सामने आ गई है।
विधायक ललित चंद्राकर एवं महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
दुर्ग / शौर्यपथ / श्री रामलला दर्शन (अयोध्या धाम) योजनाÓ के तहत आज दुर्ग जिले से रामभक्तों का एक बड़ा जत्था स्पेशल ट्रेन से अयोध्या के लिए रवाना हुआ। जय श्री राम नारों से गूंजता दुर्ग रेलवे स्टेशन से 182 श्रद्धालुओं को ट्रेन के माध्यम से रवाना किया गया।
दुर्ग रेलवे स्टेशन से श्रद्धालुओं से भरी स्पेशल ट्रेन को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व विधायक श्री ललित चंद्राकर, महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम के दौरान स्टेशन परिसर में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था। यात्रा से पहले सभी यात्रियों को भोजन, पेयजल, चिकित्सकीय सुविधा एवं आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं। प्रशासन द्वारा पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा और सुविधा की विशेष व्यवस्था की गई है। इस अवसर पर गणमान्य नागरिक एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
