August 10, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने धरती आबा’ में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी को किया सम्मानित

    रायपुर / शौर्यपथ / देश की राजधानी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘राष्ट्रीय कॉन्क्लेव ऑन आदि कर्मयोगी अभियान’ में छत्तीगसढ के कोरिया जिले ने एक बार फिर अपनी विकास यात्रा से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित इस भव्य समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान में उत्कृष्ट कार्यों के लिए कोरिया जिले की कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी को सम्मानित किया। इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम एवं राज्यमंत्री श्री दुर्गा दास उइके भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा को भी राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त हुआ।

    154 जनजातीय ग्रामों में विकास की नई मिसाल

              ‘धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के अंतर्गत कोरिया जिले के 154 जनजाति बहुल ग्रामों,  बैकुंठपुर ब्लॉक के 138 और सोनहत ब्लॉक के 16 ग्रामों में लगभग 38 हजार जनजातीय परिवारों को शासन की 17 विभागों की 25 योजनाओं का लाभ दिलाया गया है। शिविरों और डोर टू डोर अभियानों के माध्यम से लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड, पीएम जन धन योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम उज्जवला, जाति-निवास प्रमाण पत्र, वनाधिकार पट्टा, राशन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम आवास योजना, सिकल सेल टेस्टिंग, सुकन्या समृद्धि योजना तथा पीएम विमान बीमा योजना जैसे योजनाओं से जोड़ा गया। समयबद्ध क्रियान्वयन और मैदानी स्तर पर नवाचारों के चलते यह पहल जनसहभागिता का प्रतीक बनी है।

    राष्ट्रीय स्तर पर नवाचारों की सराहना

            छत्तीसगढ के कोरिया जिले के जनजातीय अंचलों में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना जिले के लिए गर्व की बात है। यह सम्मान नवाचार, जनसहभागिता और सतत विकास की दिशा में कोरिया की उपलब्धियों का प्रतीक है।

    बस्तर से सरगुजा तक हर जनजातीय परिवार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए-श्री साय

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा श्यह सम्मान हमारे उन कर्मयोगियों की पहचान है जिन्होंने जनजातीय सशक्तीकरण को धरातल पर साकार किया है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बस्तर से सरगुजा तक हर जनजातीय परिवार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए और उन्हें हर स्तर पर सशक्त किया जाए।

    योजनाओं की रोशनी को जन-जन तक पहुंचाना ही सुशासन

            छत्तीसगढ़ शासन में आदिम जाति विकास मंत्री एवं कोरिया जिले के प्रभारी मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा यह उपलब्धि हमारे अधिकारियों, फील्ड स्टाफ और जनप्रतिनिधियों की मेहनत का परिणाम है, जिन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद योजनाओं की रोशनी को जन-जन तक पहुँचाया है, उन्होंने कहा कि जन-जन तक योजनाओं को पहुंचाना व लाभ मिलना ही सुशासन है।

       दुर्ग / शौर्यपथ / सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के केंद्रीय यांत्रिक संगठन द्वारा “स्वच्छता ही सेवा – 2025” पखवाड़े के अंतर्गत व्यापक स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान का शुभारंभ केंद्रीय यांत्रिक संगठन के मुख्य महाप्रबंधक (यांत्रिकी) श्री प्रमोद कुमार के नेतृत्व में किया गया। अभियान का उद्देश्य कर्मचारियों में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा कार्यस्थलों और आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ बनाए रखना था।

    स्वच्छता अभियान के अंतर्गत यांत्रिकी ज़ोन के विभिन्न विभाग—सेंट्रल हेड मैटेनेंस (Central Maintenance – CHM), कोल्ड रोलिंग मिल (Cold Rolling Mill – CRM), रोड व्हीकल सेल (Road Vehicle Cell – RVC), सिविल इंजीनियरिंग विभाग (Civil Engineering Department – CED), प्लांट गैरेज और मैकेनिकल सर्विसेस (Mechanical Services)—के विभाग प्रमुख और कर्मचारी अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में सफाई एवं स्वच्छता संबंधी गतिविधियों में शामिल हुए। सभी विभागों के कर्मियों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे अपने कार्यस्थल की स्वच्छता बनाए रखने और राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान की सफलता में निरंतर योगदान देंगे।

    मुख्य महाप्रबंधक (यांत्रिकी) श्री प्रमोद कुमार ने कर्मचारियों द्वारा किए गए श्रमदान की सराहना करते हुए कहा कि “स्वच्छता और सफाई केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हमारी कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा बननी चाहिए और यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहनी चाहिए।”

    राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान-2025 के इस अवसर पर यांत्रिकी ज़ोन के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर महाप्रबंधक (सीईडी) श्री राकेश पांडे, महाप्रबंधक (सीएचएम) श्री सुनील कुमार, महाप्रबंधक (सीआरएम) श्री पी. जॉन वर्गीस, महाप्रबंधक (सीआरएम) श्री जी. श्रीनिवास राव, महाप्रबंधक (सीआरएम) श्री प्रदीप्ता भौमिक, महाप्रबंधक (प्लांट गैरेज) श्री मंदीप सिंह भोगल तथा महाप्रबंधक (यांत्रिकी सेवाएँ) सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी सक्रिय रूप से शामिल हुए। सभी ने श्रमदान करते हुए स्वच्छ और स्वस्थ कार्यपरिसर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में योगदान देने का संकल्प लिया।

    दुर्ग। शौर्यपथ।
    लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता और प्रशासन के बीच की सबसे मजबूत कड़ी माने जाते हैं। शहर की जनता ने भी इसी विश्वास के साथ शहरी सरकार की मुखिया के रूप में श्रीमती अलका बाघमार को चुना था—उम्मीद थी कि वे आने वाले पांच वर्षों तक जनता और प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करेंगी।
    परंतु अब वही जनता पूछ रही है कि क्या यह सेतु सिर्फ एक तरफ से ही जुड़ा है?

    प्रशासनिक अधिकारी आते-जाते रहते हैं, उनका स्थानांतरण सामान्य प्रक्रिया है—
    परंतु जनता का विश्वास हर बार चुनाव में तय होता है।
    इसलिए जब निगम प्रशासन बस स्टैंड पार्किंग में खुलेआम हो रही लूट पर मौन साधे रहता है और कार्रवाई केवल इंदिरा मार्केट पार्किंग तक सीमित रहती है, तब सवाल उठना लाज़मी है—
    क्या यह प्रशासनिक निष्पक्षता है या महापौर की भेदभावपूर्ण नीति?

    तक़िया पारा वार्ड के पार्षद खालिद रिज़वी ने इंदिरा मार्केट पार्किंग में तय दर से अधिक वसूली का मुद्दा उठाकर जनता के बीच चर्चा का विषय बना दिया,लेकिन सवाल यह भी है कि बस स्टैंड पार्किंग, जहां समान गड़बड़ी जारी है, वहां निगम प्रशासन आँख मूंद कर क्यों बैठा है? क्या वहां किसी जनप्रतिनिधि या प्रभावशाली व्यक्ति का हित जुड़ा है? या फिर यह मुद्दा राजनीतिक सुविधा के तराजू पर तौला जा रहा है?
       दुर्ग शहर में हर पार्किंग स्थल—चाहे वह कलेक्टर परिसर का हो या अस्पताल क्षेत्र का, तय दर से अधिक वसूली की खुली लूट चल रही है। इसके बावजूद निगम प्रशासन की कार्रवाई का निशाना सिर्फ इंदिरा मार्केट क्यों बना हुआ है?
    जनता का कहना है कि यह “न्याय नहीं, भेदभाव की नीति” है।
      वहीं, शहर के जानकार यह भी कहते हैं कि जब से ‘बाघमार सरकार’ ने सत्ता संभाली है, शहर की तस्वीर और बिगड़ी है।अतिक्रमण बढ़े हैं, यातायात अव्यवस्थित हुआ है, और आवारा मवेशियों ने सड़कों को कब्जा लिया है, परंतु महापौर का ध्यान सिर्फ “प्रोटोकॉल” वाले कार्यक्रमों तक सीमित दिखाई देता है।

    जनता का व्यंग्य भी अब चर्चा में है —
    “जहां वोट नहीं, वहां नोटिस नहीं — यही है बाघमार नीति!”
    राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि अगर आज दुर्ग में निगम चुनाव फिर से हों, तो महापौर अलका बाघमार की जमानत जब्त होना तय है। बीजेपी पार्षदों के भीतर भी इस बात को लेकर नाराज़गी है कि विकास कार्य कागजों पर हैं जमीनी स्तर पर शून्य , वही ठेकेदारों को भुगतान बिना काम के हो रहे हैं।

    जनता सवाल कर रही है —क्या महापौर बाघमार संविधान की शपथ के प्रति जवाबदेह रहेंगी या फिर सत्ता सुख के आगे संवैधानिक मूल्यों की बलि चढ़ेगी?

    दुर्ग शहर अब एक ही उम्मीद पर टिका है —कि शहरी सरकार भेदभाव की नीति से ऊपर उठकर निष्पक्षता की राह चुने,वरना आने वाला चुनाव इस मौन को जवाब में बदल देगा।

    SHOURYAPATH. मुंबई की एक सर्द होती दीवाली की शाम... जब पूरा देश दीपों के उजाले में रमा था, उसी क्षण भारतीय सिनेमा ने अपनी सबसे बड़ी मुस्कराहट खो दी। हास्य के सम्राट, शोले के अमर किरदार ‘अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर’ असरानी अब नहीं रहे। सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 की दोपहर 3:30 बजे उन्होंने जुहू के आरोग्य निधि अस्पताल में अंतिम सांस ली। 84 वर्ष की आयु में वह हमें हमेशा के लिए छोड़ गए ।

       उनके भतीजे अशोक असरानी और मैनेजर बाबू भाई ने पुष्टि की कि उन्हें फेफड़ों में पानी भरने की समस्या थी। वे पिछले चार दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। विडंबना यह रही कि अपनी अंतिम सांस लेने से कुछ घंटे पहले ही असरानी ने इंस्टाग्राम पर अपने चाहने वालों को 'हैप्पी दीवाली' की शुभकामनाएं दी थीं — यह उनके प्रशंसकों के लिए अब हमेशा की तरह यादों में दर्ज आखरी संदेश बन गया ।

       परिवार की शांति की इच्छा, शांत अंतिम विदाईउनकी पत्नी मंजू असरानी ने पति की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए किसी सार्वजनिक कार्यक्रम से बचने का निर्णय लिया। इसलिए उन्हीं की इच्छा अनुसार सांताक्रूज़ श्मशान घाट में रात आठ बजे बेहद सादगी और निःशब्द वातावरण में अंतिम संस्कार किया गया। न दीप जलाए गए, न पुष्पवर्षा हुई — बस रौशनी के बीच एक रूहानी सन्नाटा था, जैसे हँसी का कोई गीत अधूरा रह गया हो ।

       अभिनय की विरासत, हँसी का इतिहास1 जनवरी 1941 को राजस्थान के जयपुर में जन्मे गोवर्धन असरानी ने वर्षों तक हिंदी सिनेमा को अपनी अनोखी टाइमिंग, भोलेपन और व्यंग्य की छौंक से सजाया। चुपके चुपके, रफू चक्कर, बावर्ची, चल मुरारी हीरो बनने, मेरे अपने जैसी फिल्मों से उन्होंने हँसी को नया अर्थ दिया। पर 1975 की शोले में उनका संवाद — “हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं…” — भारतीय सिनेमा की स्मृतियों में अमर हो गया ।

      उनका अभिनय केवल कॉमेडी नहीं था; वह मानवता का अनुवाद था — एक ऐसी हँसी जो लोगों के दुख भुला देती थी। उनके अंदर का कलाकार हमेशा एक शरारती बच्चे की तरह जीता रहा — जो हर दृश्य में सादगी, व्यथा और करुणा के रंग बिखेर देता था।बॉलीवुड में शोक की लहरअसरानी के निधन की खबर से फिल्म जगत में गहरा सन्नाटा फैल गया। अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, अनीस बज्मी, जॉनी लीवर, शत्रुघ्न सिन्हा, परेश रावल और अन्य सितारों ने सोशल मीडिया पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अक्षय कुमार ने लिखा — “आपने हमें हँसना सिखाया सर, आज आँखें नम हैं पर दिल आभारी है।”

      एक युग का अंत -गोवर्धन असरानी वह अभिनेता थे जिन्होंने ‘कॉमेडी’ को एक कला बनाया। आज जब उनके संवादों की गूँज सिनेमा के गलियारों में सुनाई देगी — तो वह हँसी की गूँज होगी जिसमें छिपा है सिनेमा का सबसे सच्चा भाव: इंसानियत।वो चले गए, पर उनके शब्द अब भी गूंजते हैं —

    “हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं”…

    और अब शायद ऊपर स्वर्ग में भी कोई हँसी रोक नहीं पा रहा होगा।” ???

    सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा — नक्सल आत्मसमर्पण कांग्रेस के ‘विश्वास-विकास-सुरक्षा’ नीतियों का परिणाम; आरोप लगाने के लिए बस्तर की पीड़ा का राजनीतिकरण न करें

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने हालिया नक्सली आत्मसमर्पणों को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी द्वारा कांग्रेस को नक्सलवाद से जोड़कर की जा रही छींटाकशी पर कड़ा हमला बोला है। बघेल ने यह संदेश सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करते हुए कहा कि नक्सलियों के आत्मसमर्पण में कांग्रेस सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति और उनके द्वारा अपनाए गए ‘विश्वास-विकास-सुरक्षा’ सूत्रों की भूमिका निर्णायक रही है।

    भूपेश बघेल ने अपने बयान में प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा —

    “कितना छोटा दिल है प्रधानमंत्री जी!… ऐसे समय में जब माओवाद कमजोर हो रहा है, तब भी आप कांग्रेस को नक्सलवाद से जोड़कर जो छींटाकशी कर रहे हैं, वह दिखाता है कि आपके लिए देश की आंतरिक सुरक्षा से ज्यादा विपक्ष पर झूठे आरोप लगाने में दिलचस्पी है।”

    उन्होंने आगे कहा कि केंद्र में गृह मंत्री के इस प्रयास में साझेदारी के लिए कांग्रेस ने भी आभार व्यक्त किया है, परन्तु विपक्ष द्वारा छत्तीसगढ़ की जटिल स्थिति को राजनीतिक मुद्दा बनाकर प्रस्तुत करने का विरोध जताया। बघेल ने स्पष्ट रूप से कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता समझती है कि नक्सलवाद से निपटने की सफलता स्थानीय नीतियों और राज्य सरकार की पहल का नतीजा है, न कि किसी एक पक्षीय दावों का।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि नक्सलवाद और आतंकवाद की जो सबसे भारी कीमत चुकाई गई, वह कांग्रेस सरकारों ने ही चुकाई है — “हमारे कई वरिष्ठ नेता कथित नक्सल हमले में शहीद हुए” — और जो जांचें होनी चाहिए थीं, उन्हें रूकवाने वाले भी वही रहे जिनके बारे में आज आरोप लगाए जा रहे हैं। बघेल ने कहा कि बस्तर क्षेत्र को जो पीड़ा और दंश झेलना पड़ा, उसकी जिम्मेदारी 15 वर्षों तक छत्तीसगढ़ में रहे भाजपा-शासित दौर की भी है, और यह प्रश्न उठाया कि तब आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

    बघेल ने आरोप लगाया कि नक्सलवाद को राजनीतिक मुद्दा बनाकर छत्तीसगढ़ और उसके लोगों के साथ “दोहरी राजनीति” न की जाए। उन्होंने दृढ़ शब्दों में कहा —

    “बस्तर को खुशहाल बनाने का काम कांग्रेस ने शुरू किया है और आगे भी इसे जारी रखेगी… नक्सल मुक्ति के नाम पर हम आपको बस्तर बेचने नहीं बनने देंगे।”

    अपने पोस्ट में भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ की जनता और प्रदेश की वास्तविकताओं का उल्लेख करते हुए अपील की कि मुद्दों को संवेदनशीलता और सत्यपरकता के साथ देखा जाए; किसी भी तरह के दावों को राजनीतिक लाभ के साधन के रूप में प्रयोग न किया जाए।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब नक्सली आत्मसमर्पण से जुड़ी सूचनाएँ और उनके राजनीतिक अर्थ दोनों ही मुख्य राजनीतिक बहस के केन्द्र में हैं। बघेल के तीखे शब्दों ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य और केन्द्र के बीच इस मसले पर संवेदीय और राजनीतिक मतभेद अभी भी कायम हैं — और इस बहस का असर आगामी राजनीतिक और प्रशासनिक पहलों पर भी दिखेगा।

    राष्ट्रीय मंत्री अरविंद मेनन और छत्तीसगढ़ प्रतिनिधिमंडल के साथ बूथ स्तर तक जीत सुनिश्चित करने की बनी रणनीति

    पटना/छपरा / शौर्यपथ /
    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का शंखनाद होते ही भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी अभियान में संगठन और समन्वय की शक्ति को एकजुट कर दिया है।
    इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री एवं दुर्ग विधायक श्री गजेन्द्र यादव ने बिहार के सारण-छपरा क्षेत्र में पहुंचकर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार की कमान संभाली।

    मंत्री यादव ने बिहार में चुनावी अभियान को गति देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री एवं मध्यप्रदेश के पूर्व संगठन महामंत्री अरविंद मेनन की उपस्थिति में आयोजित महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में भाग लिया।
    इस बैठक में प्रत्येक बूथ पर भाजपा की जीत सुनिश्चित करने की रणनीति पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ।

    “भाजपा की ताकत कार्यकर्ताओं में है। जब प्रत्येक बूथ सशक्त होगा, तभी बिहार में पुनः डबल इंजन की सरकार बनेगी।”
    गजेन्द्र यादव, मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन

    बैठक में महाराजगंज सांसद जनार्दन सिंह सिगरीवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह, तथा सभी विधानसभा प्रभारी, संयोजक और विस्तारक उपस्थित रहे।
    सभी ने बिहार में पुनः एनडीए की प्रचंड जीत सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।

    श्रद्धांजलि और संगठन भावना

    प्रचार के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सारण पश्चिम भाजपा जिलाध्यक्ष स्व. बृजमोहन सिंह के निवास पर पहुँचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
    मंत्री यादव ने कहा —

    “भाजपा संगठन को सशक्त बनाने में स्व. बृजमोहन सिंह जी का योगदान अविस्मरणीय रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और परिवार को शक्ति दें।”

    बनियापुर और छपरा में जनसंवाद और कार्यकर्ता बैठकें

    मंत्री यादव ने बनियापुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी श्री केदारनाथ सिंह एवं समर्पित कार्यकर्ताओं से मुलाक़ात की।
    उन्होंने संगठन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि जनता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी नीतियों को पहुँचाना ही विजय की कुंजी है।

    छपरा विधानसभा क्षेत्र में मंत्री यादव ने भाजपा प्रत्याशी श्रीमती छोटी कुमारी के समर्थन में कार्यकर्ताओं की बैठक ली और भव्य नामांकन रैली में सम्मिलित हुए।
    रैली में जनता से अपील की गई कि वे विकास, विश्वास और सेवा की डबल इंजन सरकार को पुनः अवसर दें।

    कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्री सी.एन. गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित रहे।

    “बिहार की जनता का उत्साह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि इस बार भी भाजपा की प्रचंड सरकार बनने जा रही है।”
    गजेन्द्र यादव

    आईएमए दिवाली मिलन समारोह में चिकित्सकों से संवाद

    छपरा में आयोजित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) दिवाली मिलन समारोह में मंत्री यादव ने चिकित्सकों से आत्मीय संवाद किया।
    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए परिवर्तनकारी सुधारों की जानकारी साझा की और भाजपा प्रत्याशी श्रीमती छोटी कुमारी के पक्ष में समर्थन की अपील की।

    छत्तीसगढ़ से बिहार तक एकजुट भाजपा परिवार

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में छत्तीसगढ़ भाजपा की उपस्थिति ने अभियान में नई ऊर्जा भर दी है।
    18 अक्टूबर की नामांकन रैली के बाद से छत्तीसगढ़ के विधायक और मंत्री लगातार बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जिनमें कैबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव की भूमिका सबसे प्रभावशाली रही है।

    “एक राष्ट्र, एक संगठन, एक लक्ष्य — यही भाजपा की ताकत है।”

    बिहार की धरती पर अब स्पष्ट दिख रहा है —
    “डबल इंजन का इंजन फिर गरजने को तैयार है।”

      दुर्ग / शौर्यपथ / राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत संविदा भर्ती हेतु 11 जनवरी 2025 के माध्यम से 38 पद हेतु विज्ञापन प्रकाशित किया गया है। उक्त विज्ञापित पदों की अनंतिम संवर्गवार चयन सूची दुर्ग जिले के विभागीय वेबसाईट www.durg.gov.in में अपलोड की गई है। उपरोक्त चयनित अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज सत्यापन एवं पदस्थापना स्थल चयन हेतु 17 अक्टूबर 2025 को कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दुर्ग के सभागार में प्रात: 10 बजे से उपस्थित होने हेतु सूचना प्रसारित किया गया था। उक्त दिवस में ऐसे चयनित अभ्यर्थी जो किसी कारणवश उपस्थित नही हो पाये थे, उन्हें 07 नवम्बर 2025 तक कार्यालयीन दिवस व समय में पुन: उपस्थित होने हेतु अंतिम अवसर प्रदान किया जाता है। निर्धारित तिथि तक मूल दस्तावेज सत्यापन एवं पदस्थापना स्थल चयन हेतु उपस्थित नही होने की स्थिति में प्रतीक्षा सूची से अभ्यर्थी का चयन में वरीयता प्रदान की जाएगी। विस्तृत जानकारी हेतु दुर्ग जिले की वेबसाईट स्रह्वह्म्द्द.द्दश1.द्बठ्ठ में अवलोकन व डाउनलोड किया जा सकता है।

      दुर्ग / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना वर्ष 2025-26 हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है। जिसके तहत् राज्य के प्रतिभावान निम्न आय वर्ग के विद्यार्थी जो कि राष्ट्रीय स्तर के उच्च व्यवसायिक संस्थानों जैसे आईआईटी, एम्स, आईआईएम, एनएलयू, एमबीबीएस जैसे संस्थाओं में शिक्षण सत्र 2025-26 में प्रवेश प्राप्त कर अध्ययन कर रहे हैं उन्हे तात्कालिक सहायता प्रदान की जाएगी। आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त योजना के तहत् आमंत्रण करने हेतु विद्यार्थी छत्तीसगढ़ राज्य का मूल निवासी होना चाहिए। विद्यार्थी को छत्तीसगढ़ राज्य हेतु अधिसूचित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग की सूची में शामिल होना चाहिए। उल्लेखित संस्था में चयन की पात्रता के साथ ही चयन होने का प्रमाण पत्र एवं प्रवेश लेने हेतु संस्था द्वारा जारी सूचना पत्र होना चाहिए। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए पालक की वार्षिक आय रूपए 2.50 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। शासकीय सेवकों के आश्रित इस योजना के पात्र नहीं होगे किन्तु चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बच्चे इस योजना का लाभ ले सकेंगे। इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थियों से 25 अक्टूबर 2025 तक कार्यालयीन समय में ऑफलाईन आवेदन आमंत्रित किए गए है। पात्रता, शर्ते तथा आवेदन पत्र का प्रारूप जिले की वेबसाईट- कनतह.हवअ.पद से डाउनलोड की जा सकती है। अभ्यर्थी आवेदन पत्र निर्धारित प्रपत्र में जिले के सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास कार्यालय में अंतिम तिथि तक जमा कर सकते है।

    उप मुख्यमंत्री ने बस्तर ओलंपिक की तैयारियों की समीक्षा की

    खेल मैदानों की उपलब्धता, उनकी मैपिंग, भोजन, यातायात, आवास, प्राथमिक चिकित्सा, निर्णायकों एवं रेफरियों की व्यवस्था के लिए अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
    अब तक 2.72 लाख खिलाड़ियों का पंजीयन, 20 अक्टूबर तक करा सकते हैं पंजीयन

        रायपुर / शौर्यपथ / बस्तर ओलंपिक-2025 की तैयारियाँ अब अंतिम चरण में हैं। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों तथा बस्तर संभाग के सभी जिला खेल अधिकारियों की बैठक लेकर इसकी तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में बस्तर ओलंपिक के व्यापक और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए विकासखंड स्तरीय आयोजनों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने खेल मैदानों की उपलब्धता, उनकी मैपिंग, भोजन, यातायात, आवास, प्राथमिक चिकित्सा, निर्णायकों एवं रेफरियों की व्यवस्था के लिए अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करने को कहा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और संचालक श्रीमती तनूजा सलाम भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थीं। बस्तर संभाग के सभी जिला खेल अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
      उप मुख्यमंत्री साव ने बैठक में बस्तर ओलंपिक की पंजीयन प्रक्रिया एवं व्यापक प्रचार-प्रसार की समीक्षा की। उन्होंने ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर तक प्रचार-प्रसार की योजनाओं—जैसे दीवार लेखन, मशाल यात्रा, पोस्टर, बैनर, पैंपलेट वितरण, हाट-बाज़ारों में प्रचार इत्यादि की जानकारी ली। उन्होंने इसे और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बस्तर ओलंपिक के लिए अब तक 2 लाख 72 हजार से अधिक प्रतिभागियों का पंजीयन हो चुका है। 20 अक्टूबर तक पंजीयन कराया जा सकता है। इस पर श्री साव ने प्रत्येक विकासखण्ड में पंजीयन की स्थिति की समीक्षा कर जिन क्षेत्रों में पंजीयन कम हैं, वहां विशेष अभियान चलाकर ज्यादा से ज्यादा पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने महिलाओं की तुलना में पुरुष प्रतिभागियों के कम पंजीयन को देखते हुए जिला खेल अधिकारियों को पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा।
      श्री साव ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि बस्तर ओलंपिक अब केवल क्षेत्रीय आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि इसकी ख्याति पूरे देश में फैल चुकी है। अतः इसे राष्ट्रीय महत्व का आयोजन मानते हुए विकासखंड से लेकर संभाग स्तर तक उच्च गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ आयोजित किया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के निर्णायकों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को प्रेरणा स्रोत के रूप में आमंत्रित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने 25 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 5 नवंबर तक होने वाले विकासखंड स्तरीय आयोजनों के लिए सभी जिलों को समय पूर्व संपूर्ण तैयारी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
     उप मुख्यमंत्री ने फुटबॉल, हॉकी, वॉलीबॉल जैसे खेलों में पंजीयन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने तथा खेल विभाग से प्राप्त बजट के अतिरिक्त जिला कलेक्टरों के सहयोग से सीएसआर निधि से वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने को कहा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की उप संचालक श्रीमती रश्मि ठाकुर तथा खेल अधिकारी श्री गिरीश शुक्ला भी बैठक में मौजूद थे।

     बिहार चुनाव 2025: नामांकन ड्रामे में उलझे दांव

    मढ़ौरा और कुशेश्वरस्थान की सीटों पर चुनावी समीकरण बदल सकते हैं, पर क्या आयोग देगा 'दूसरा मौका'?

    पटना | विशेष रिपोर्ट —
    बिहार चुनाव 2025 में जहां नेता जनसमर्थन के लिए पसीना बहा रहे हैं, वहीं दो उम्मीदवारों की राजनीति तकनीकी गलती के जाल में फंस गई है।
    लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सीमा सिंह (मढ़ौरा) और वीआईपी पार्टी के गणेश भारती (कुशेश्वरस्थान) का नामांकन रद्द हो गया है — एक फॉर्म-B की गड़बड़ी में तो दूसरा सिंबल सिग्नेचर की कमी में।

    अब सवाल यह है कि —
    ? क्या ये दोनों उम्मीदवार अब भी मैदान में उतर सकते हैं?
    ? या फिर यह चुनाव ‘तकनीकी गलती बनाम राजनीतिक किस्मत’ की कहानी बन जाएगा?

    ? मढ़ौरा में सीमा सिंह का नामांकन रद्द — फॉर्म-B बना मुश्किल का सबब

    एलजेपी (रामविलास) की प्रत्याशी सीमा सिंह का नामांकन इसलिए रद्द हुआ क्योंकि उनके फॉर्म B — यानी पार्टी की आधिकारिक अनुमति पत्र — में त्रुटि पाई गई।
    निर्वाचन अधिकारी ने सुधार का मौका दिया, लेकिन वे निर्धारित समय में संशोधित दस्तावेज़ नहीं जमा कर सकीं।

    चिराग पासवान ने इस पर नाराज़गी जताते हुए कहा —

    “यह एक मामूली तकनीकी गलती है, हमने चुनाव आयोग से पुनर्विचार का आग्रह किया है।”

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक, सीमा सिंह के पर्चा रद्द होने से मढ़ौरा सीट पर एनडीए की स्थिति कमजोर हुई है और आरजेडी गठबंधन को अप्रत्यक्ष बढ़त मिल सकती है।

    ? कुशेश्वरस्थान में VIP उम्मीदवार गणेश भारती का नामांकन भी अमान्य

    दरभंगा जिले की कुशेश्वरस्थान सीट से गणेश भारती का नामांकन इसलिए रद्द हुआ क्योंकि पार्टी सिंबल पत्र पर वीआईपी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सहनी के हस्ताक्षर मौजूद नहीं थे।
    हालांकि गणेश भारती ने दो सेट नामांकन किए थे — एक पार्टी प्रत्याशी के रूप में और दूसरा निर्दलीय रूप में।
    पहला नामांकन रद्द होने के बावजूद अब वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में रहेंगे।

    यह फैसला महागठबंधन के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि वीआईपी पार्टी आरजेडी गठबंधन की सहयोगी है।

    ⚖️ क्या रद्द नामांकन बहाल हो सकता है? — जानिए कानूनी स्थिति

    चुनाव आयोग के नियम साफ़ कहते हैं —

    “नामांकन रद्द होने के बाद उम्मीदवारी सीधे तौर पर बहाल नहीं की जा सकती।”

    हालाँकि दो रास्ते हैं—

    1. पुनर्विचार याचिका:
      उम्मीदवार यह साबित कर सकता है कि नामांकन रद्द करने में प्रक्रिया संबंधी गलती हुई।
      आयोग चाहे तो समीक्षा कर सकता है, लेकिन आम तौर पर यह दुर्लभ होता है।

    2. हाई कोर्ट में रिट याचिका:
      उम्मीदवार न्यायिक हस्तक्षेप मांग सकता है, पर यह लंबी प्रक्रिया होती है और चुनावी शेड्यूल में बाधा नहीं डालती।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है —

    “अगर त्रुटि तकनीकी है और सुधार का अवसर दिया गया था, तो नामांकन दोबारा बहाल होने की संभावना बेहद कम होती है।”

    ? राजनीतिक असर: दो सीटें, दो झटके

    • मढ़ौरा (सरन) — एनडीए के लिए बड़ा नुकसान

    • कुशेश्वरस्थान (दरभंगा) — महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ीं

    दोनों सीटें रणनीतिक रूप से अहम हैं —
    मढ़ौरा पटना-बिहारशरीफ बेल्ट के समीकरण तय करती है,
    तो कुशेश्वरस्थान मिथिलांचल का वोट पैटर्न प्रभावित करती है।


    ?️‍♂️ विश्लेषण: “तकनीकी गलती” या “राजनीतिक नियति”?

    इन दोनों मामलों ने बिहार चुनाव 2025 में एक नया शब्द जोड़ा है —

    ‘टेक्निकल टर्निंग पॉइंट’
    जहाँ एक हस्ताक्षर या एक फॉर्म की ग़लती पूरे राजनीतिक समीकरण बदल सकती है।


    निष्कर्ष:
    सीमा सिंह और गणेश भारती की उम्मीदवारी अब आयोग या अदालत के निर्णय पर टिकी है।
    पर मौजूदा संकेत यही कहते हैं — अब मैदान में वापसी आसान नहीं होगी।
    तकनीकी गलती अब बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित ‘फैक्टर’ बन चुकी है।

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision