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May 13, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

जनसंपर्क अधिकारियों को जिम्मेदारी से कार्य करने के निर्देश, परिणाम आधारित मूल्यांकन की चेतावनी

रायपुर ।
जनसंपर्क आयुक्त श्री रजत बंसल ने कहा है कि वर्तमान डिजिटल युग में जनसंपर्क अधिकारियों के लिए न्यू एज मीडिया की सभी विधाओं में दक्ष होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते समय के साथ नई तकनीकों और संचार माध्यमों को अपनाना ही प्रभावी जनसंपर्क की कुंजी है।

आयुक्त श्री बंसल आज नवा रायपुर स्थित संवाद कार्यालय में जनसंपर्क संचालनालय एवं जिला जनसंपर्क अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क का कार्य अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण है और इसे पूरी गंभीरता के साथ निभाना चाहिए। शासन और जनता के बीच जनसंपर्क अधिकारी एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक अधिकारी के कार्यों का मूल्यांकन उनके परिणामों के आधार पर किया जाएगा।

बैठक में उन्होंने मंत्रिगणों, विभागीय सचिवों, विभागाध्यक्षों तथा जिला कलेक्टरों के साथ नियमित संपर्क और समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे सूचनाओं का समयबद्ध और प्रभावी आदान-प्रदान संभव होगा, जो शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रचार-प्रसार के लिए अत्यंत आवश्यक है।

आयुक्त श्री बंसल ने आगामी एक मई से प्रारंभ होने वाले प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के प्रचार-प्रसार की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार सुनिश्चित करने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माध्यम का प्रभावी उपयोग करते हुए योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है।

उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि राज्य में संचालित विकास कार्यों और योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के वास्तविक अनुभवों को वीडियो पोस्ट और समाचारों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जाए, ताकि अन्य नागरिक भी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित हो सकें। साथ ही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के साथ सतत संपर्क एवं समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक के दौरान जनसंपर्क आयुक्त ने प्रचार-प्रसार कार्य में लापरवाही बरतने पर तीन जिला जनसंपर्क अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को सक्रिय और जिम्मेदार तरीके से कार्य करते हुए शासन की योजनाओं को आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंचाने का आह्वान किया।

बैठक में अपर संचालक सर्वश्री उमेश मिश्रा, संजीव तिवारी, आलोक देव तथा श्रीमती हर्षा पौराणिक सहित संचालनालय और जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारी उपस्थित रहे।

सूचना प्रौद्योगिकी पर राज्य स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न, अधिकारियों को नई तकनीकों से अपडेट रहने के निर्देश

रायपुर ।
मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा है कि शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ आम जनता तक शीघ्र और प्रभावी रूप से पहुंचाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग किया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से नई और उभरती तकनीकों को अपनाते हुए नागरिक सेवाओं को अधिक सरल और सुलभ बनाने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव आज मंत्रालय महानदी भवन में उभरती नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सूचना एवं संचार से जुड़े संस्थानों को अपने मोबाइल ऐप, वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिक केन्द्रित और उपयोग में आसान बनाने चाहिए, ताकि आम लोगों को योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) के अधिकारियों को नई आईटी तकनीकों से हमेशा अपडेट रहना चाहिए, जिससे शासन की योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक तेजी से पहुंचाया जा सके।

सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद ने राज्य स्तरीय सूचना केन्द्र और जिला सूचना विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों से उनके संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों, उपकरणों और आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र, नई दिल्ली के उप महानिदेशक श्री दयानंद साहा ने कहा कि विभिन्न नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों के माध्यम से सरकारी योजनाओं के जरिए नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं।

कार्यशाला में ट्रिपल आईटी के संचालक एवं कुलपति प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग और उसके संभावित लाभों पर विस्तार से जानकारी दी। इसके अलावा एनआईसी छत्तीसगढ़ के संयुक्त संचालक श्रीकांत पाण्डे ने साइबर सुरक्षा पर अपने विचार साझा किए। संयुक्त संचालक श्री अभिजीत कौशिक, श्री उपेन्द्र सिंह सहित अन्य आईटी विशेषज्ञों ने भी प्रतिभागियों को विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।

कार्यशाला में राज्य के विभिन्न जिलों से आए जिला सूचना विज्ञान अधिकारियों तथा राज्य स्तरीय अधिकारियों के बीच नागरिक सेवाओं में सूचना प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग और शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक शीघ्र पहुंचाने के विषय में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

 

रायपुर ।
काटाबहरा (नगवाही) निवासी समलू मरकाम अपनी पत्नी कपूरा मरकाम, जो थायराइड कैंसर के चौथे स्टेज से पीड़ित हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं, को बाइक में लिटाकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने तुरंत संज्ञान लिया और एम्बुलेंस बुलवाकर पीड़िता को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी को महिला के समुचित उपचार के निर्देश दिए। महिला को बेहतर इलाज के लिए रायपुर स्थित मेकाहारा में भर्ती कराया जाएगा।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि 11 नवंबर को ग्राम कांटाबहरा (नगवाही) निवासी समलू मरकाम द्वारा अपनी पत्नी को बाइक में लिटाकर उपचार के लिए ले जाने की सूचना प्राप्त होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम 12 नवंबर को उनके घर पहुंची। टीम ने पीड़िता को 108 एम्बुलेंस के माध्यम से बेहतर उपचार हेतु रायपुर भेजा, जहां मेकाहारा के कैंसर रिसर्च यूनिट में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इलाज किया गया।

अधिकारी ने बताया कि पूर्व में गले में गांठ और दर्द की शिकायत होने पर पीड़िता को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रेगांखार जंगल ले जाया गया था। वहां पदस्थ चिकित्सक ने जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर महिला को रायपुर रेफर किया। वर्ष 2024 में करीब एक वर्ष तक महिला का इलाज रायपुर स्थित एम्स, मेकाहारा, डीकेएस अस्पताल सहित कुछ निजी अस्पतालों में चला।

इसके बाद जनवरी 2025 में महिला को एक माह के लिए मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कर उपचार कराया गया। उपचार उपरांत उन्हें घर लाया गया, लेकिन परेशानी दोबारा बढ़ने पर 12 नवंबर 2025 को स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें फिर रायपुर ले जाया गया। 12-13 नवंबर को मेकाहारा तथा 14 से 19 नवंबर 2025 तक एम्स में भर्ती कर कीमोथेरेपी दी गई। 20 नवंबर को उन्हें घर लाया गया, जहां वे स्वास्थ्य लाभ ले रही थीं।

वर्तमान में महिला की तबीयत पुनः बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रायपुर में भर्ती कर आगे का उपचार कराया जाएगा।

दुर्ग/ राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर जिले के सभी 300 ग्राम पंचायतों एवं उनके आश्रित ग्रामों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। इन ग्राम सभाओं में ‘नवा तरिया आय के जरिया’, जनगणना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकारियों को ग्राम सभाओं में अनिवार्य रूप से शामिल होने के निर्देश दिए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता देखने को मिली।

ग्राम सभाओं में ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ‘संपदा’ ऐप में परिसंपत्तियों का अपलोड, ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान के अंतर्गत जल संरक्षण एवं आजीविका संवर्धन, तथा ‘नवा तरिया आय के जरिया’ जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही जनगणना के लिए स्वयं गणना पत्रक भरने की प्रक्रिया एवं उससे संबंधित जानकारियों के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया गया।

कलेक्टर दुर्ग श्री अभिजीत सिंह द्वारा पूर्व में ही सभी ग्राम पंचायतों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। निर्देशानुसार ग्राम सभाओं में जनप्रतिनिधियों एवं सम्मानित नागरिकों को आमंत्रित कर शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी साझा की गई।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि ग्राम सभाओं में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ अंतर्गत लखपति दीदियों एवं उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया गया। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जल संरक्षण एवं आजीविका बढ़ाने के उपायों पर ग्रामीणों से सुझाव लिए गए।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में संचालित “मोर गांव मोर पानी महाअभियान” के अंतर्गत एक अभिनव पहल की गई है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचायत भवन की दीवारों पर गांव के जलस्तर (वॉटर लेवल) की जानकारी प्रदर्शित की जा रही है, जिससे आम नागरिक अपने क्षेत्र के भू-जल स्तर से अवगत हो सकें।

‘जल-दूत’ मोबाइल ऐप के माध्यम से जलस्तर से संबंधित आंकड़े संकलित कर पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं तथा एकरूपता के साथ दीवार लेखन कार्य किया जा रहा है। इस पहल से ग्रामीणों में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

ग्राम पंचायत रसमड़ा में आयोजित ग्राम सभा में भी ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। ग्राम सभा में सरपंच श्रीमती मोतीराम निषाद, उपसरपंच बालकिशन निषाद, ग्राम पंचायत सचिन कमिनी चंद्राकर, पंच बसंत निर्मलकर, कौशल्या साहू, संजू कुमार निषाद एवं प्रीति शिक्का सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि 73वें संविधान संशोधन के तहत पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। प्रत्येक वर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। जिले के ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे ग्राम सभाओं में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर योजनाओं का लाभ उठाएं तथा अपने गांव के विकास में सक्रिय सहभागिता निभाएं।

 

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नई दिल्ली | 

भारतीय राजनीति के गलियारों में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के किले में अब तक की सबसे बड़ी सेंध लगी। राज्यसभा में पार्टी के 10 सांसदों में से 7 ने बागी रुख अख्तियार करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस बड़े राजनीतिक उलटफेर का नेतृत्व पार्टी के कद्दावर नेता राघव चड्ढा कर रहे हैं।

दो-तिहाई का जादू: दलबदल कानून से बचाव

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने स्पष्ट किया कि यह केवल कुछ सांसदों का जाना नहीं, बल्कि विधिवत 'विलय' है।

संवैधानिक ढाल: चूंकि अलग होने वाले सांसदों की संख्या कुल संख्या (10) की दो-तिहाई (70%) है, इसलिए संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत इन सांसदों की सदस्यता पर खतरा कम रहने की संभावना है।

शक्ति प्रदर्शन: इस कदम से राज्यसभा में AAP की ताकत अब सिमट कर केवल 3 सांसदों तक रह गई है।

भाजपा का दामन थामने वाले दिग्गज चेहरे

भाजपा में शामिल होने वाले सात सांसदों की सूची ने राजनीतिक विशेषज्ञों को चौंका दिया है:

राघव चड्ढा (नेतृत्वकर्ता)

संदीप पाठक (संगठन के रणनीतिकार)

अशोक मित्तल

स्वाति मालीवाल

हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)

विक्रमजीत सिंह साहनी

राजेंद्र गुप्ता

बगावत की पटकथा: आखिर क्यों टूटी पार्टी?

सूत्रों की मानें तो इस बड़े विद्रोह की नींव कुछ दिन पहले ही रखी गई थी। राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त करना इस पूरे घटनाक्रम का तात्कालिक कारण माना जा रहा है। पार्टी के भीतर पद और प्रतिष्ठा को लेकर पनपा यह असंतोष आज एक बड़े विभाजन के रूप में सामने आया।

AAP का पलटवार: 'पंजाब के साथ गद्दारी'

इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी ने हमलावर रुख अपना लिया है। पार्टी नेतृत्व ने इसे लोकतंत्र की हत्या और जनादेश का अपमान बताया है:

"यह पंजाब की जनता के पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। जो लोग छोड़कर गए हैं, वे पंजाब के हितों के लिए 'गद्दार' साबित हुए हैं।" > — संजय सिंह, सांसद (AAP)

भगवंत मान: पंजाब के मुख्यमंत्री ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे अनैतिक बताया है।

अरविंद केजरीवाल: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने एक बार फिर पंजाबियों के साथ "धक्का" (अन्याय) किया है।

निष्कर्ष

2026 का यह घटनाक्रम न केवल आम आदमी पार्टी के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि राज्यसभा के समीकरणों को भी पूरी तरह बदलने वाला है। अब देखना यह होगा कि क्या सदन में इन सांसदों की सदस्यता बरकरार रहती है या कानूनी पेचीदगियां नया मोड़ लेकर आएंगी।

विशेष रिपोर्ट

भिलाई/दुर्ग: किसी भी नगर निगम की 'शहरी सरकार' का अस्तित्व जनसुविधाओं और पारदर्शिता की नींव पर टिका होता है। पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य और बिजली जैसे विभाग अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन वर्तमान में बाघमार सरकार का बाजार विभाग भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का नया 'कमीशन केंद्र' बनता जा रहा है। सवाल यह है कि इस लूट की जड़ में आखिर कौन है? निगम प्रशासन के अधिकारी अभ्युदय मिश्रा, जनप्रतिनिधि शेखर चंद्राकर, या फिर खुद महापौर अलका बाघमार की चुप्पी?

पार्किंग के नाम पर खुली लूट: बोर्ड गायब, वसूली बेहिसाब

बाजार विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा कलंक इंदिरा मार्केट की पार्किंग व्यवस्था है। नियम कहते हैं कि निगम द्वारा तय शुल्क की पट्टिका (बोर्ड) सार्वजनिक रूप से लगनी चाहिए, ताकि जनता को पता चले कि उन्हें कितना भुगतान करना है। बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा महीनों से बोर्ड लगाने का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन धरातल पर सन्नाटा है।

इस सन्नाटे की आड़ में ठेकेदार जनता से दो गुनी-तीन गुनी वसूली कर रहे हैं। क्या यह महज प्रशासनिक लापरवाही है या फिर जनता की जेब से निकलने वाले इस अतिरिक्त पैसे का एक हिस्सा विभाग के गलियारों तक पहुँच रहा है? अधिकारी की निष्क्रियता उनकी कार्यक्षमता पर नहीं, बल्कि उनकी निष्ठा पर सवाल खड़ा करती है।

मौन 'प्रभारी': कर्तव्य से विमुख शेखर चंद्राकर

जनप्रतिनिधि जनता और प्रशासन के बीच की कड़ी होते हैं। बाजार प्रभारी के रूप में शेखर चंद्राकर को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन भ्रष्टाचार के इतने गंभीर मामलों पर उनका 'मौन' रहस्यमयी है।

क्या प्रभारी जी इतने 'निष्क्रिय' हैं कि उन्हें अपने विभाग की लूट दिखाई नहीं दे रही?

या फिर यह मौन किसी बड़े 'राजनीतिक संरक्षण' और 'आर्थिक साझेदारी' का हिस्सा है?

चुनावी समय में जनता के सामने हाथ जोड़ने वाले प्रतिनिधि अगर कुर्सी मिलते ही ठेकेदारों के हितों के रक्षक बन जाएं, तो यह जनता के जनादेश के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात है।

प्रदेश सरकार के 'सुशासन' पर बाघमार सरकार का 'दाग'

एक तरफ प्रदेश की वर्तमान सरकार नक्सलियों के खात्मे, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के लिए सराही जा रही है। बड़े-बड़े अधिकारियों पर गाज गिर रही है। लेकिन उसी प्रदेश की नाक के नीचे चल रही बाघमार सरकार अपनी ही छवि को धूमिल करने में लगी है।

महापौर अलका बाघमार एक तरफ विकास के दावे करती हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी नाक के नीचे उनके जिम्मेदार अधिकारी और पार्षद जनता को लूटने की खुली छूट दे रहे हैं। सामान्य सभा में मामला उठने के बावजूद कार्रवाई न होना यह सिद्ध करता है कि नगर निगम प्रशासन आम जनता के बजाय ठेकेदारों के लिए 'कल्याणकारी' बना हुआ है।

 पेवर ब्लॉक में विकास ढूँढती महापौर, बदहाली में सिसकती जनता

विडंबना देखिए, जिस जनता ने भरोसा कर अलका बाघमार को सत्ता सौंपी, आज वही जनता अवैध कब्जों और ठेकेदारों की मनमानी से त्रस्त है। महापौर पेवर ब्लॉक की गुणवत्ता में भ्रष्टाचार तलाश रही हैं, जबकि उनके बाजार विभाग ने पूरी व्यवस्था को ही भ्रष्टाचार के पेवर ब्लॉक से ढक दिया है।

अगर समय रहते इस 'सफेदपोश' लूट पर लगाम नहीं कसी गई, तो जनता आने वाले समय में न केवल इस शहरी सरकार से हिसाब मांगेगी, बल्कि इसका खामियाजा उस प्रदेश सरकार को भी भुगतना पड़ सकता है जिसकी साफ-सुथरी छवि पर ये स्थानीय कारिंदे कालिख पोत रहे हैं।

 

नोट: आपको यह समाचार कैसा लगा हमें रेटिंग देकर जरूर बताएं एवं समाचार के संदर्भ मैं आपकी राय जरूर बताएं हो सकता है हमसे कहीं चुप हो गई होगी तो हमें इस बारे में अवगत जरूर करें हमारे चैनल की पूरी कोशिश है कि भ्रष्टाचाका के मामलों का उजागर करे जिसमें आपकी राय काफी अहमियत रखती हैं। 

रायपुर / शौर्यपथ /

बीजापुर जिले में प्रधान अध्यापक की आत्महत्या से जुड़ी हालिया मीडिया रिपोट्र्स को लेकर जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा बीजापुर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अधूरे निर्माण कार्य के भुगतान के दबाव जैसी खबरें तथ्यहीन एवं भ्रामक हैं। जिला मिशन समन्वयक, समग्र शिक्षा बीजापुर द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग निष्पक्ष रूप से पुलिस जांच में पूर्ण सहयोग कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पालनार अंतर्गत प्राथमिक शाला मझारपारा में पदस्थ प्रधान पाठक श्री राजू पुजारी का 22 अप्रैल 2026 को निधन हो गया, जो एक अत्यंत दुखद घटना है। पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच के दौरान मृतक के पास से कुछ पत्र बरामद किए गए हैं, जिनके आधार पर जांच की कार्यवाही जारी है।
समग्र शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक शाला भवन एवं अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कार्य शाला प्रबंधन समिति के माध्यम से कराया गया था, जिसमें प्रधान अध्यापक पदेन अध्यक्ष होते हैं। निर्माण कार्यों के लिए स्वीकृत राशि के अनुरूप प्रथम किस्त का भुगतान नियमानुसार किया गया तथा कार्य पूर्ण होने के पश्चात माप पुस्तिका, पूर्णता प्रमाण पत्र, हस्तांतरण प्रमाण पत्र एवं फोटोग्राफ्स प्राप्त होने पर प्रगति के आधार पर रनिंग बिलों के माध्यम से राशि जारी की गई।
विभाग के अनुसार, प्राथमिक शाला भवन एवं अतिरिक्त कक्ष दोनों का निर्माण फरवरी 2026 में पूर्ण हो चुका था तथा शेष 60 प्रतिशत राशि राज्य स्तर से प्राप्त होना लंबित है। भुगतान की प्रक्रिया में किसी प्रकार का दबाव या अनियमितता नहीं पाई गई है।
जिला मिशन समन्वयक ने कहा कि कुछ समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में बिना तथ्यों की पुष्टि के प्रकाशित खबरें भ्रामक हैं, जिससे आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने अपील की है कि आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही समाचारों का प्रकाशन किया जाए।
विभाग ने पुन: स्पष्ट किया है कि इस दुखद घटना के सभी पहलुओं की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और शिक्षा विभाग द्वारा हर स्तर पर सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

10 दिनों में 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग, दुर्गम अंचलों तक पहुंचीं टीमें; हजारों मरीजों को मिला नि:शुल्क उपचार
रायपुर / शौर्यपथ / बस्तर संभाग के घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाडिय़ों और दूरस्थ बसाहटों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक साफ महसूस की जा रही है। जहां कभी इलाज के लिए लंबी दूरी और अनिश्चितता ही विकल्प थी, वहां अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद लोगों के द्वार तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के दस दिन पूरे होते-होते यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सफल हो रही है, बल्कि सुदूर अंचलों में रहने वाले लोगों के मन में भरोसे की नई किरण भी जगा रही है।
अभियान के तहत अब तक 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बड़ी संख्या में मरीजों को मौके पर ही नि:शुल्क दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में तत्काल राहत मिली है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिकता के साथ चिन्हित कर त्वरित रेफरल की व्यवस्था की गई है। अब तक 8055 मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में भेजकर विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित किया गया है।
जांच के दौरान मलेरिया के 1125, टीबी के 3245, कुष्ठ के 2803, मुख कैंसर के 1999, सिकल सेल के 1527 और मोतियाबिंद के 2496 मामलों की पहचान की गई है। समय पर पहचान और उपचार शुरू होने से इन बीमारियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल रही है, साथ ही गंभीर स्थितियों को टालने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों तक एक समन्वित व्यवस्था बनाई गई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए उन इलाकों तक भी सेवाएं पहुंच रही हैं, जहां पहले इलाज की सुविधा सीमित थी।
इसके साथ ही लोगों के डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल (आभा) तैयार किए जा रहे हैं, ताकि आगे भी इलाज की निरंतरता बनी रहे और जरूरत पडऩे पर तुरंत स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध हो सके। अब बस्तर के सुदूर गांवों में भी लोग इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं खुद उनके द्वार तक पहुंच रही हैं। यही बदलाव इस अभियान को खास बना रहा है।

आयुष्मान कार्ड से लाखों का मुफ्त इलाज, पुनर्वासित युवाओं में दिखा उत्साह

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विशेष पहल पर माओवाद छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे पुनर्वासित युवाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं का व्यापक लाभ मिल रहा है। इन युवाओं को राशन कार्ड, आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ तेजी से उपलब्ध कराए जा रहे हैं । इसी तरह प्रशासन द्वारा इन युवाओं को आयुष्मान कार्ड बनाकर लाखों रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है ।इन प्रयासों से युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और उन्हें आत्मनिर्भर व सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढऩे का अवसर मिल रहा है ।

दस्तावेजों से लेकर स्वास्थ्य तक पूरा सहयोग

पुनर्वासित युवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से उन्हें राशन कार्ड, आधार कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज सुगमता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से जोडऩे के लिए आयुष्मान कार्ड भी बनाए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक चिंता के बिना इलाज करा सकें।

आयुष्मान योजनाओं से व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा

जिला चिकित्सालय बीजापुर में आयोजित कार्यक्रम में पुनर्वासित युवाओं को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए। इस कार्ड के माध्यम से विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के तहत उन्हें बड़ा लाभ मिलेगा—
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एवं शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत
बीपीएल परिवारों को 5 लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज
एपीएल परिवारों को 50 हजार रुपये तक का इलाज लाभ
मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत
दुर्लभ एवं गंभीर बीमारियों के लिए 25 लाख रुपये तक की मुफ्त चिकित्सा सहायता
साथ ही लाभार्थियों को योजनाओं के उपयोग और प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी भी दी गई।

युवाओं में दिखा नया आत्मविश्वास

आयुष्मान कार्ड प्राप्त करने के बाद पुनर्वासित युवाओं में उत्साह और आत्मविश्वास साफ नजर आया। उन्होंने शासन और प्रशासन के इस प्रयास की सराहना करते हुए बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढऩे की इच्छा जताई।

समावेशी विकास की ओर मजबूत कदम

यह पहल न केवल पुनर्वासित युवाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए भी प्रेरित कर रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि ऐसे सभी युवाओं को योजनाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।

काठमांडू, ।
नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने वित्तीय अनियमितताओं और विवादित कारोबारी संबंधों के गंभीर आरोपों के बीच 22 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हैरानी की बात यह है कि उनकी नियुक्ति को महज 26 दिन ही हुए थे, जिससे यह मामला नई सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका बन गया है।

क्या है पूरा विवाद?

गुरुंग पर आरोप है कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के घेरे में चल रहे व्यवसायी दीपक कुमार भट्ट की कंपनियों—लिबर्टी माइक्रो लाइफ इंश्योरेंस और स्टार माइक्रो इंश्योरेंस—में निवेश किया।
बताया गया कि उन्होंने दोनों कंपनियों में 25-25 हजार ‘फाउंडर शेयर’ खरीदे, जो सामान्य निवेश की तुलना में अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।

जांच में सामने आए लेनदेन ने मामले को और गंभीर बना दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार:

  • मई 2023 में उनके खाते में अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा बड़ी रकम जमा कराई गई
  • चांग अग्रवाल ने ₹22.5 लाख और विजय कुमार श्रेष्ठ ने ₹37.5 लाख जमा किए
  • इसके अगले ही दिन इन पैसों का इस्तेमाल शेयर खरीद में किया गया

इस पैटर्न ने संभावित बेनामी निवेश और फंड रूटिंग की आशंकाओं को जन्म दिया।

संपत्ति छिपाने का भी आरोप

आलोचकों का कहना है कि गुरुंग ने इन ‘अनलिस्टेड’ फाउंडर शेयरों को अपनी संपत्ति घोषणा में स्पष्ट रूप से अलग नहीं दिखाया, बल्कि सामान्य प्रतिभूतियों के साथ जोड़ दिया।
नेपाल के कानून के तहत मंत्रियों के लिए पारदर्शिता अनिवार्य है, ऐसे में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया।

गुरुंग का बचाव

सुदन गुरुंग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा:

  • शेयर उन्होंने वैध ऋण (Loan) के माध्यम से खरीदे
  • उनकी घोषित संपत्ति ₹2 करोड़ से अधिक है
  • किसी भी प्रकार की जानकारी छिपाने का उनका कोई इरादा नहीं था

इस्तीफे की वजह

गुरुंग ने अपने इस्तीफे में कहा कि:

“मैं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और किसी भी तरह के हितों के टकराव से बचने के लिए पद छोड़ रहा हूं।”

उनके इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) ने गृह मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार खुद संभाल लिया है।

राजनीतिक असर: ‘एंटी-करप्शन’ छवि पर सवाल

यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि:

  • सुदन गुरुंग ‘Gen Z’ आंदोलन के प्रमुख चेहरे थे
  • यह आंदोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ जन समर्थन के साथ उभरा था
  • बालेन शाह की सरकार ने साफ-सुथरे शासन का वादा किया था

ऐसे में सरकार बनने के कुछ ही हफ्तों में इतना बड़ा विवाद सामने आना उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है।

विपक्ष का हमला और आगे की राह

नेपाल के विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है और उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • अगर जांच पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं हुई, तो यह मुद्दा सरकार के लिए लंबी राजनीतिक परेशानी बन सकता है
  • वहीं, कड़ी और निष्पक्ष कार्रवाई सरकार की साख बचाने का एकमात्र रास्ता हो सकती है

निष्कर्ष:
सुदन गुरुंग का इस्तीफा केवल एक मंत्री का पद छोड़ना नहीं, बल्कि उस राजनीतिक वादे की परीक्षा है, जिसमें भ्रष्टाचार-मुक्त शासन का दावा किया गया था। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और क्या बालेन शाह सरकार अपनी साख को बचा पाती है या नहीं।

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