August 02, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    खाना खजाना / शौर्यपथ / मीठे के शौकीन लोग मीठा खाने के लिए किसी त्योहार या मौके के मोहताज नहीं होते। मीठे का नाम सुनते ही मन में गाजर का हलवा,मूंग दाल हलवा या फिर लौकी के हलवे का ख्याल सबसे पहले आता है। लेकिन मीठे में एक डेसर्ट ऐसा भी है जो डाइनिंग टेबल पर आते ही स्वाद में इन सब हलवों की छुट्टी कर देता है। जी हां और वो है कद्दू का हलवा। तो देर किस बात की क्यों न आज ही घर पर परिवार के लोगों को यह मीठा सरप्राइज दिया जाए। चलिए जानते हैं कैसे बनाया जाता है कद्दू का हलवा।

    सामग्री-
    3 कप कद्दू
    1 कप पानी
    2 चम्मच खरबूज के बीज
    2 चम्मच घी
    1/2 कप चीनी
    1 मुट्ठी ड्राई फ्रूट्स
    4 हरी इलायची

    कद्दू का हलवा बनाने की वि​धि-
    कद्दू का हलवा बनाने के लिए सबसे पहले कद्दू को छिलके निकालकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। कद्दू काटने के बाद सभी ड्राई फ्रूट्स को भी बारीक काट लें। अब एक प्रेशर कुकर को गैस पर मध्यम आंच पर रख दें। कुकर में थोड़ा सा घी गर्म करके उसमें कटा हुआ कद्दू डालकर करीब 10 मिनट तक चलाएं। जब कद्दू पानी छोड़ने लगे तो उसमें थोड़ा सा पानी और डालकर उसे अच्छे से मिला लें। अब कुकर बंद करके उसमें 4 से 5 सीटी लगा लें।

    जब प्रेशर कुकर की सारी सीटी निकल जाएं तो ढक्कन खोलकर देख लें कि कद्दू पका है या नहीं। इसके बाद गैस को धीमी आंच पर करके कद्दू को मैश करके थोड़ी देर के लिए ऐसे ही रख दें।अब कद्दू में चीनी और इलायची पाउडर मिला कर तब तक चलाएं जब तक कि वह गाढ़ा न हो जाए। गाढ़ा होने के बाद खरबूजे के बीज और ड्राई फ्रूट्स डालकर हलवे को एक मिनट तक पकाते रहें। जब हलवा बन जाए तो उसे एक सर्विंग बाउल में निकालकर खरबूजे के बीज और कटे हुए ड्राई फ्रूट्स से गार्निश करके सर्व करें। अब इस हलवे को ठंडा या गर्म, हर तरह से खा सकते हैं।

     

             पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर रहस्यों से भरा हुआ है। पुराणों के अनुसार, पुरी में भगवान विष्णु ने पुरुषोत्तम नीलमाधव के रूप में अवतार लिया। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इनकी नगरी जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाई। पुरी को चार धाम में से एक माना जाता है। पुरी को धरती का बैकुंठ भी कहा गया है।

    इस मंदिर में भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ भगवान विराजमान हैं। चैतन्य महाप्रभु इस नगरी में कई साल रहे। पुरी की रथयात्रा विश्व की सबसे बड़ी रथयात्रा मानी जाती है। इस मंदिर का रसोई घर दुनिया का सबसे बड़ा रसोईघर माना जाता है। कितने भी श्रद्धालु मंदिर में आ जाएं, लेकिन यहां अन्न की कभी कमी नहीं होती है। मंदिर के पट बंद होते ही प्रसाद भी समाप्त हो जाता है। रसोईघर में चूल्हे पर एक के ऊपर एक सात बर्तन रखकर प्रसाद तैयार किया जाता है और सबसे ऊपर वाले बर्तन का प्रसाद सबसे पहले तैयार होता है। मंदिर के शिखर पर लगा पवित्र सुदर्शन चक्र अष्टधातु से निर्मित है। इसे स्‍थापित करने की तकनीक आज भी रहस्‍य है। पुरी में आप कहीं भी हों, सुदर्शन चक्र को हमेशा सामने ही पाएंगे। मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज हमेशा हवा के विपरीत लहराता है। कहा जाता है कि इस मंदिर के ऊपर से कभी कोई पक्षी या विमान नहीं उड़ पाता है। एक पुजारी मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित ध्वज को रोजाना बदलते हैं। कहा जाता है कि अगर एक दिन भी ध्वज नहीं बदला गया तो मंदिर 18 वर्षों के लिए बंद हो जाएगा। मंदिर के मुख्य गुंबद की छाया किसी भी समय जमीन पर नहीं पड़ती है। महान सिख सम्राट महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर को प्रचुर मात्रा में स्वर्ण दान किया था। उन्होंने वसीयत की थी कि कोहिनूर हीरा इस मंदिर को दान कर दिया जाए।

     

    लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / कड़ी मेहनत के बावजूद भी अगर सफलता का रास्ता आपको कोसों दूर लग रहा हैं, जिसकी वजह से आपके भीतर छिपा आत्मविश्वास कम होने लगा है तो घबराइए मत बस जीवन में कामयाबी हासिल करने के लिए अपनाएं ये 5 सक्सेस मंत्र।

    असफल होने से न डरें-
    कई बार जीवन में मिलने वाली असफलता व्यक्ति का मनोबल तोड़कर रख देती है। ऐसे में सफलता हासिल करने के लिए जरूरी है सबसे पहले अपने मन से खुद के असफल होने का डर निकाल दीजिए। असफलता का डर ही व्यक्ति को कड़ी मेहनत के बावजूद सफलता के शिखर पर नहीं पहुंचने देता है।

    लोगों से बढ़ाएं संपर्क-
    जीवन में वही व्यक्ति सफल होता है जो मेहनत के साथ-साथ लोगों के साथ अपने संपर्क भी मधुर बनाए रखता है। ऐसा करने से उसे विभिन्न बातों के बारे में जानकारी सहज रूप से प्राप्त हो जाती है जो उसे उसके लक्ष्य तक पहुंचने में उसकी मदद करती है।

    प्रतिस्पर्धा के लिए हमेशा रहें तैयार-
    सफल होने के लिए व्यक्ति को हमेशा प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके अलावा हमेशा अपने कॉम्पिटिटर से भी नई-नई चीजें सीखने की कोशिश करनी चाहिए। वह किस तरह सफल हो रहे हैं, इस बात से इंस्प्रेशन लें ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर आप भी उसी युक्ति से जीवन में सफलता हासिल कर सकें।

    जीवन में बनाएं अपने खुद के नियम-
    पर्सनल लाइफ हो या प्रोफेशनल, हर व्यक्ति को जीवन में अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए कुछ उसूल जरूर बनाने चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति अनुशासन से बंधा रहता है जो उसे सफलता की सीढ़ी चढ़ने में मदद करता है।

    निरन्तर करें प्रयास-
    हर महान व्यक्ति ने जीवन में सफलता हासिल करने के लिए कठिन परिश्रम का ही सहारा लिया है। सफल होने के लिए व्यक्ति को अपने पहले प्रयास में की गई गलती को खोजना चाहिए। उस गलती को सुधारने की कोशिश करें। धीरे-धीरे सफलता के रास्ते की बाधा बनने वाली आपकी सारी कमियां दूर हो जाएंगी।

     

      पुरी / शौर्यपथ / ओडिशा के सुप्रसिद्ध पुरी के भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा मंगलवार से शुरू हो गई है, लेकिन ऐसा यात्रा के इतिहास में पहली बार है कि इस धार्मिक यात्रा में श्रद्धालु हिस्सा नहीं ले रहे हैं. इस बार कोरोनावायरस के चलते लागू लॉकडाउन के तहत सोशल डिस्टेंसिंग नियमों को देखते हुए श्रद्धालुओं को इस यात्रा में हिस्सा लेने की मनाही है. इसके अलावा ऐसा पहली बार हुआ है, जब यात्रा पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने बीते 18 जून को इस यात्रा पर रोक लगा दी थी लेकिन सोमवार को हुई सुनवाई में इसे सशर्त मंजूरी दे दी गई थी.
    मंगलवार की सुबह पुरी की यह जगन्नाथ यात्रा शुरू हो गई, जिसके लिए यहां बड़ी संख्या में पुजारी और मंदिर में काम करने वाले सेवायत इकट्ठा हुए. लेकिन इस बार श्रद्धालु नहीं आए हैं. श्रद्धालुओं के लिए रथयात्रा का लाइव टेलीकास्ट किया जाना है. रथयात्रा के मौके पर मंदिर को सजाया गया है, वहीं पूजा-पाठ शुरू होने से पहले मंदिर परिसर को सैनिटाइज़ भी किया गया है.
    रथयात्रा के आरंभ होने के दौरान के कुछ विजुअल्स आए हैं, जिसमें मौके पर पुजारियों और सेवायतों की बड़ी भीड़ दिखाई दे रही है. न्यूज एजेंसी ANI की ओर से शेयर किए गए एक वीडियो में देखा जा सकता है कि कई सेवायत भगवान बालभद्र की मूर्ति को रथ तक गाते-बजाते हुए ले जा रहे हैं. वहीं एक दूसरे वीडियो में देखा जा सकता है कि रथ पर भगवान को विराजमान किया जा रहा है और रथ के चारों ओर भीड़ लगी हुई है.
    बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 जून के अपने ऑर्डर में रथयात्रा को मंजूरी देते हुए कहा था कि यात्रा कोविड-19 के गाइडलाइंस के तहत हो, इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार पर होगी. कोर्ट ने शर्त रखी कि जहां-जहां भी रथयात्रा निकाली जाएगी, वहां रथ को 500 से ज्यादा लोग नहीं खींचेंगे और इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाएगा. जिन लोगों को कोरोनावायरस टेस्ट निगेटिव आया है, वहीं यात्रा में हिस्सा ले पाएंगे. कोर्ट ने कहा कि दो रथों के बीच में एक घंटे का अंतर होना चाहिए. वहीं रथ को खींचने वाले सेवायतों के बीच में रथ खींचने से पहले, इस दौरान और इसके बाद सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखना होगा.

    धर्म संसार / शौर्यपथ / हमारे देश में देवी को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। नवरात्र भी इनमें से एक है, लेकिन ज्यातादर लोग सिर्फ दो नवरात्र (चैत्र व शारदीय नवरात्र) के बारे में ही जानते हैं। बहुत कम लोग ही यह जानते हैं कि एक वर्ष में चार नवरात्र आते हैं। चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र सामान्य रहते हैं, जबिक माघ और आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त रहते हैं। गुप्त नवरात्र में विशेष रूप से तंत्र-मंत्र से संबंधित उपासना की जाती है।

    आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र 22 से 29 जून तक रहेंगे। पंडित राजकुमार शास्त्री के अनुसार इन दिनों दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है। ये दस महाविद्याएं हैं- काली, तारा देवी, त्रिपुर-सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरी भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मातंगी व कमला देवी। महाविद्याओं की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ ही की जानी चाहिए, अन्यथा पूजा का विपरीत असर भी हो सकता है। इसीलिए किसी योग्य ब्राह्मण के मार्गदर्शन में ही गुप्त नवरात्र की पूजा करनी चाहिए।

    गुप्त नवरात्र का महत्व
    आपको जानकर आश्चर्य होगा कि गुप्त नवरात्र का महत्व प्रकट नवरात्र से अधिक होता है। ये नवरात्र साधकों के लिए खास होते हैं। इन समय साधक को सिद्धिया मिलती हैं। इन नवरात्रों में दस महाविद्याओं की साधना करके साधक मनोवांछित फल पा सकते हैं।

    गुप्त नवरात्र में संहारकर्ता देवी-देवताओं के गणों एवं गणिकाओं अर्थात भूत-प्रेत, पिशाच, बैताल, डाकिनी, शाकिनी, खण्डगी, शूलनी, शववाहनी, शवरूढ़ा आदि की साधना की जाती है। ऐसी साधनाएं शाक्त मतानुसार शीघ्र ही सफल होती हैं। दक्षिणी साधना, योगिनी साधना, भैरवी साधना के साथ पंच मकार (मद्य, मछली, मुद्रा, मैथुन, मांस) की साधना भी इसी नवरात्र में की जाती है।

    गुप्त नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ
    नवरात्र के दौरान श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ को अत्‍यधिक महत्‍वपूर्ण माना गया है। इस दुर्गा सप्‍तशती को ही शतचण्डि, नवचण्डि अथवा चण्डि पाठ भी कहते हैं और रामायण के दौरान लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान श्रीराम ने इसी चंडी पाठ का आयोजन किया था, जो कि शारदीय नवरात्र के रूप में आश्विन मास की शुक्‍ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक रहती है।

    इसीलिए नवरात्र के दौरान नव दुर्गा के नौ रूपों का ध्‍यान, उपासना व आराधना की जाती है तथा नवरात्र के प्रत्‍येक दिन मां दुर्गा के एक-एक शक्ति रूप का पूजन किया जाता है। ब्रह्मदेव ने कहा कि जो मनुष्‍य दुर्गा सप्तशती का पाठ करेगा उसे सुख मिलेगा।

    तांत्रिक क्रिया के लिए उपयुक्त समय
    आम नवरात्र में सात्विक और तांत्रिक दोनों तरह की पूजा होती है लेकिन गुप्त नवरात्र में अधिकतर तांत्रिक पूजा होती है। तांत्रिक सिद्धियां पाने के लिए यह एक अच्छा अवसर है। इसके लिए किसी सूनसान जगह पर जाकर दस महाविद्याओं की साधना करें। नवरात्र तक माता के मंत्र का 108 बार जाप भी करें। यही नहीं सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का 18 बार पाठ करें।. ब्रम्ह मुहूर्त में श्रीरामरक्षास्तोत्र का पाठ आपको दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्त करता है।

    इन बातों का रखें ध्यान:

    सर्वप्रथम एक स्वच्छ स्थान चुनकर देवी की स्थापना करें। स्थान ऐसा हो, जहां किसी का आना जाना न हो।
    स्वयं के साथ घर-परिवार में भी तामसिक भोजन का उपयोग न करें। किसी भी स्त्री को देवी के रूप में ही देखें।
    अच्छे परिणाम के लिए गुप्त नवरात्र में साधना की गोपनीयता अनिवार्य है। जो साधना कर रहा हो और जो (ब्राह्मण) साधना करा रहा हो को ही यह बात हो तो अतिउत्तम है।
    साधना के समय पूजा सामग्री का विशेष तौर पर ध्यान रखें, कुछ भी कम या छूटे नहीं।
    गुप्त नवरात्र तांत्रिक साधनाएं करने के लिए जाना जाता है। इस साधना से देवी प्रसन्न होती हैं तथा मनचाहा वर देती हैं।

    खेल / शौर्यपथ / अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने सोमवार को दावा किया कि ऑस्ट्रेलिया में इस साल खेले गए टी20 विश्व कप को रिकॉर्ड लोगों ने देखा और इस वैश्विक संस्था के डिजीटल चैनलों के जरिये रिकॉर्ड एक अरब एक करोड़ बार इससे जुड़े वीडियो देखे गए। यह आंकड़ा 2018 में खेली गई प्रतियोगिता की तुलना में 20 गुना अधिक है। आईसीसी ने विज्ञप्ति में कहा कि फरवरी-मार्च में आयोजित किए गए टूर्नामेंट के वीडियो को महिला क्रिकेट की पूर्व की सबसे सफल प्रतियोगिता वनडे विश्व कप 2017 की तुलना में 10 गुना अधिक बार देखा गया।

    इन दोनों टूर्नामेंट में भारत उप विजेता रहा था, लेकिन दर्शकों की संख्या के मामले में उसने अहम योगदान दिया। आईसीसी ने कहा, ''विश्व कप के इन आंकड़ों से यह (2020 महिला टी20) विश्व कप 2019 (पुरुष वनडे) के बाद आईसीसी की सबसे सफल प्रतियोगिता बन गई और फाइनल को विश्व भर में सर्वाधिक दर्शकों ने देखा।''

    इसमें कहा गया है, ''भारत के फाइनल में पहुंचने से दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ी, क्योंकि 2018 की तुलना में नाकआउट चरण की दर्शक संख्या 423 प्रतिशत अधिक थी। विज्ञप्ति के अनुसार, ''भारत में कुल आठ करोड़ 61 लाख 50 हजार घंटे टूर्नामेंट देखा गया जो कि 2018 के टूर्नामेंट की तुलना में 152 प्रतिशत अधिक है। भारत के फाइनल में पहुंचने और प्रसारक स्टार स्पोर्ट्स के भारतीय मैचों का पांच भाषाओं (अंग्रेजी, हिन्दी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़) में प्रसारण करने से यह सफलता मिली।
    बता दें कि दोनों टूर्नामेंट में भारत उप विजेता रहा था, लेकिन दर्शकों की संख्या ने आंकड़ों में प्रमुख योगदान दिया। यह आंकड़े आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप 2019 के बाद आईसीसी का दूसरा सबसे सफल इवेंट है। भारत के फाइनल में पहुंचने से दर्शकों के उत्साह में वृद्धि आई और 2018 की तुलना में नॉकआउट चरण की दर्शक संख्या 423 प्रतिशत अधिक थी।

     

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / भारत में पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 14,993 नए मामले सामने आए हैं और 312 लोगों की मौत हुई है.स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी ताज़ा आँकड़ों के बाद भारत में संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 4 लाख 40 हज़ार हो गई है.मरने वालों की संख्या बढ़कर 14,011 हो गई है.
    भारत में संक्रमण के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र में हैं जहाँ संक्रमित लोगों की संख्या एक लाख 35 हज़ार से अधिक है.वहाँ छह हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. राजधानी दिल्ली संक्रमण के लिहाज़ से दूसरे स्थान पर है. वहाँ कुल 62 हज़ार से अधिक लोग संक्रमित हैं. 2,233 हो गई है. संक्रमण के लिहाज़ से तमिलनाडु तीसरे स्थान पर है.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तीन दिवसीय रूस यात्रा पर हैं. इस दौरान वे रूस के उच्च सैन्य अधिकारियों के साथ वार्ता करेंगे और दूसरे विश्व युद्ध में नाज़ी जर्मनी पर सोवियत विजय की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य सैन्य परेड में शामिल होंगे.
    कोविड-19 महामारी के मद्देनज़र चार महीने तक यात्रा पर लगे प्रतिबंध के बाद किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री की यह पहली विदेश यात्रा है.रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह रूस यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब लद्दाख में चीन के साथ भारत का गतिरोध बरक़रार है.
    सोमवार को मॉस्को रवाना होने से पहले राजनाथ सिंह ने एक ट्वीट किया था. उन्होंने लिखा कि "तीन दिवसीय यात्रा पर मॉस्को रवाना हो रहा हूँ. यह यात्रा भारत-रूस रक्षा और सामरिक साझेदारी को मज़बूत करने के लिए बातचीत का अवसर देगी."
    भारतीय रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि 'चीन के साथ सीमा पर तनाव होने के बावजूद रक्षा मंत्री ने रूस की यात्रा स्थगित नहीं की क्योंकि रूस के साथ भारत के दशकों पुराने सैन्य संबंध हैं और रक्षा मंत्री रूस के उच्च अधिकारियों के साथ दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने को लेकर कई बैठकें करने वाले हैं.'भारतीय मीडिया में रक्षा मंत्री के इस दौरे को भारत की सैन्य क्षमता बढ़ाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. कई अख़बारों ने लिखा है कि 'लद्दाख एलएसी पर चीन के साथ जारी कशीदगी के दरमियान भारत के रक्षा मंत्री अपने हथियारों को पूरी तरह से कारगर बनाने और मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए रूस गए हैं ताकि चीन को हड़काया जा सके.' मगर विश्लेषकों का मानना है कि 'भारत सरकार देर से जागी है, और कोविड-19 महामारी की वजह से अब रूस से भारत को मिलने वाले हथियारों और डिफ़ेंस सिस्टम की डिलीवरी में अतिरिक्त समय लगेगा. पर जल्द से जल्द इनकी डिलीवरी के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस से तक़ादा ज़रूर करेंगे.'
    रूस से रक्षा सौदों में देरी
    मॉस्को में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार विनय शुक्ल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि "भारत बहुत लंबे समय से कई महत्वपूर्ण रक्षा सौदों को टालता आ रहा है. कभी कहा जाता है कि पैसे नहीं हैं, कभी कोई अन्य कारण बता दिया जाता है. जैसे मल्टी-यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों के मामले में हुआ, रूस ने कहा था कि 60 हेलीकॉप्टर तैयार ले लीजिए और 140 हेलीकॉप्टर हम इंडिया में बना देंगे. लेकिन भारतीय ब्यूरोक्रैट्स सौदेबाज़ी में लग गये, कहने लगे तैयार हेलीकॉप्टर 40 ही लेंगे, फिर क़ीमत को लेकर चर्चा चलती रही और 2014 से अब तक इन पर निर्णय नहीं हो पाया."
    विनय शुक्ल के अनुसार "अगर भारत के पास ये (एंबुलेंस) हेलीकॉप्टर होते, तो जो सैनिक गलवान घाटी में मेडिकल हेल्प ना मिल पाने की वजह से मारे गए, उन्हें बड़ी आसानी से बचाया जा सकता था." उन्होंने बताया, "हेलीकॉप्टर वाला अकेला रक्षा सौदा नहीं है, रूस के साथ राइफ़लें बनाने का करार हुआ, तो रूस ने फ़टाफ़ट जॉइंट वेंचर की कार्यवाही पूरी की, अमेठी के पास फ़ैक्ट्री भी बनाई, वो भी ब्यूरोक्रेसी में फंस गई. सुखोई और मिग विमान भारतीय वायु सेना की रीढ़ हैं, पर उनकी ख़रीद की प्रक्रिया भी अटकी हुई है. और जब तक मुसीबत नहीं आ जाती, ये अटकी ही रहती हैं. तो जो निवेश कर रहा है और अपनी तकनीक दे रहा है, उसकी कद्र नहीं है. ये बात रूस की ओर से भारत की मौजूदा सरकार के सामने रखी जा चुकी है और निवेशकों ने सरकार की गंभीरता पर भी सवाल उठाये हैं. इसलिए जो देरी है, वो भारत सरकार की वजह से है."
    रूस का एस-400 डिफ़ेंस सिस्टम
    भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के रूस रवाना होने के बाद से ही एस-400 डिफ़ेंस सिस्टम की भी चर्चा हो रही है.कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि 'रूस ने इस डिफ़ेंस सिस्टम की डिलीवरी डेट आगे खिसका दी है जो भारत के लिए चिंता का विषय है.'रूस में बनने वाले 'एस-400: लॉन्ग रेंज सरफ़ेस टू एयर मिसाइल सिस्टम' को भारत सरकार ख़रीदना चाहती है. ये मिसाइल ज़मीन से हवा में मार कर सकती है. एस-400 को दुनिया का सबसे प्रभावी एयर डिफ़ेंस सिस्टम माना जाता है. इसमें कई ख़ूबियाँ हैं. जैसे एस-400 एक साथ 36 जगहों पर निशाना लगा सकता है.
    पर भारत को यह डिफ़ेंस सिस्टम मिलने में देरी क्यों? इसे समझाते हुए विनय शुक्ल ने कहा, "अमरीका ने धमकी दी थी कि अगर भारत ने रूस से यह सिस्टम खरीदा तो वो भारत पर प्रतिबंध लगायेगा. इससे भारतीय बैंक डर गये, ख़ासकर वो बैंक जिनका पैसा अमरीका से होने वाले व्यापार में लगा है. इसलिए उन भारतीय बैंकों से बात करनी पड़ी जिन्हें अमरीका से ख़तरा ना हो. इससे काफ़ी वक़्त ख़राब हुआ और एस-400 की एडवांस पेमेंट देर से हुई. हालांकि रूस ये कह रहा है कि वो अब भी जल्द से जल्द भारत को इसे देने का प्रयास करेगा."
    शुक्ल ने बताया कि "चीन से पहले रूस ने भारत को अपना लॉन्ग रेंज सरफ़ेस टू एयर मिसाइल सिस्टम 'एस-400' ऑफ़र किया था. लेकिन भारत इसे ख़रीदने के लिए तभी राज़ी हुआ जब चीन ने इसे ख़रीद लिया. हथियारों के मामले में चीन की रूस पर काफ़ी निर्भरता है. चीन ने रूस में बनने वाले फ़ाइटर जेट के इंजन कॉपी करने की बहुत कोशिश की, मगर वो वैसे नहीं बन पाये, जैसे रूस वाले बनाते हैं. इसलिए चीन को इनका लाइसेंस लेना पड़ता है. और रूस यह कंट्रोल हमेशा अपने हाथ में रखेगा."
    "मसलन, रूस ने चीन को एस-400 दिया तो है, पर वो वैसा सिस्टम नहीं है, जैसा वो भारत को देना वाला है. रूस कहता है कि चीन को उसने एस-400 अमरीका से अपनी रक्षा करने के लिए दिया है, उनकी रेंज कम है. मगर भारत को एस-400 की सबसे लंबी रेंज वाली मिसाइलें दी जाएंगी." ऐसी उम्मीद की जा रही है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस दौरे के अंत में 'भारत को एस-400 डिफ़ेंस सिस्टम मिलने के बारे में' कोई आधिकारिक सूचना दी जाएगी. ( साभार बीबीसी )

    मनोरंजन / शौर्यपथ / फिर दूसरे ने पूछा कि क्या न्यासा का फिल्मों में आने का मन है तो काजोल ने इसका जवाब भी ना में ही दिया।

    बता दें कि न्यासा अभी 17 साल की हैं और उनकी बॉलीवुड में कोई दिलचस्पी नहीं है। लेकिन फिर भी न्यासा की काफी अच्छी फैन फॉलोइंग है। सोशल मीडिया पर उनकी फोटोज आते ही वायरल हो जाती हैं। हालांकि न्यासा को लाइमलाइट पसंद नहीं है।

    बेटी के ट्रोल होने पर काजोल ने कही थी यह बात

    दरअसल, न्यासा को कई बार उनके आउटफिट्स को लेकर ट्रोल किया जा चुका है जिससे काजोल और अजय दोनों को काफी दुख पहुंचा था। काजोल ने एक इंटरव्यू में इस बारे में कहा था, 'मैं सोचती हूं कि मेरी बेटी का सोशल मीडिया पर ट्रोल होना काफी दुखद और परेशान करने वाला है। एक पेरेंट के नाते हम हमेशा अपने बच्चों को प्रोटेक्ट करते हैं। तो जब सोशल मीडिया पर न्यासा ट्रोल होती हैं तो काफी बुरा लगता है'।

    काजोल ने आगे कहा था, 'सच कहूं, तो अच्छी बात है कि न्यासा यहां नहीं है। उसे इन सभी के बारे में कुछ पता ही नहीं है। न्यासा जब ट्रोल हुईं तो वह सिंगापुर में थीं, लेकिन सोशल मीडिया तो सोशल मीडिया होता है। यह हर कहीं है। तब आपको अपने बच्चों को समझाना होता है कि ट्रोलर्स सोसाइटी के वो गिने-चुने लोग होते हैं जिनके कुछ भी करने से आपको फर्क पड़ना ही नहीं चाहिए। अगर मैं अपने बेटे को यह सिखा रही हूं कि लड़कियों की इज्जत करो तो बेटी को मैं यह सिखा रही हूं कि आपकी खुद की इज्जत खुद से ही शुरू होती है'।

     

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षण सत्र 2020-21 में प्रयास आवासीय विद्यालय में कक्षा 9वीं में और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं में प्रवेश के लिए चयन परीक्षा की तिथियों में संशोधन किया गया है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार प्रयास आवासीय विद्यालयों के कक्षा 9वीं में प्रवेश के लिए परीक्षा 14 जुलाई को सुबह 10.30 से 1.00 बजे तक आयोजित की जाएगी। इसी प्रकार एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा संशोधित तिथि के अनुसार 16 जुलाई को प्रातः 10.30 से 12.30 बजे तक आयोजित होगी। 
        राज्य शासन के आदिम जाति तथा अनुसूचित जनजाति विकास विभाग द्वारा इस संबंध में सभी जिलों के सहायक आयुक्तों को प्रवेश हेतु चयन परीक्षा के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए है। उल्लेखनीय है कि प्रयास आवसीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए पूर्व में चयन परीक्षा 24 जून को और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा 26 जून को होनी थी। इन परीक्षाओं की तिथियों में संशोधन किया गया है। अब संशोधित कार्यक्रम के अनुसार प्रयास आवासीय विद्यालय में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा 14 जुलाई को और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में प्रवेश हेतु चयन परीक्षा 16 जुलाई को निर्धारित की गई है।  

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision