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June 13, 2026
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दुर्ग शहर कांग्रेस: झंडे से ज्यादा कुर्सी खोजने में व्यस्त नेतृत्व, अब चाहिए राकेश ठाकुर जैसा सक्रिय सिपहसालार!

दुर्ग शहर कांग्रेस में कुर्सी ज्यादा, कार्यकर्ता कम – अब चाहिए राकेश ठाकुर जैसा जमीनी नेता! दुर्ग शहर कांग्रेस में कुर्सी ज्यादा, कार्यकर्ता कम – अब चाहिए राकेश ठाकुर जैसा जमीनी नेता!
  • rounak group

दुर्ग। शौर्यपथ। राजनितिक व्यंग
  कभी कांग्रेस की गूंज से गूंजने वाला दुर्ग शहर अब सन्नाटे की गिरफ्त में है। कांग्रेस के कार्यकर्ता खुद को सत्ता में रहकर भी यतीम महसूस कर रहे हैं और मंच पर बैठे नेता कुर्सी गिनने में व्यस्त हैं। जंबो कमेटी बनी, पर आंदोलन में दिखते हैं बस कुछ ‘फिक्स’ चेहरे—जैसे कोई बासी फिल्म का री-रन।

“विरोध” अब पोस्टर तक सीमित रह गया है, जबकि कार्यकर्ता सिर्फ व्हाट्सएप ग्रुप में सक्रिय दिखाई देते हैं।
कांग्रेस की दुर्ग शहर इकाई, कभी जोश और जूनून की मिसाल मानी जाती थी, आज निष्क्रियता और गुटबाजी की भेंट चढ़ चुकी है। चुनावी हारें—विधानसभा, लोकसभा और निगम—कह रही हैं कि संगठन में कहीं कुछ बहुत ज्यादा ‘ठहर’ गया है।
  इसी राजनीतिक जड़ता के बीच दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस के अध्यक्ष राकेश ठाकुर एक अपवाद की तरह उभरे हैं। उनके नेतृत्व में संगठन की हलचलें दिखती हैं, विरोध प्रदर्शन होते हैं, नारे लगते हैं और कार्यकर्ताओं में आत्मबल लौटता दिखता है। ऐसे में कार्यकर्ताओं की यह मांग तेजी से उभर रही है कि अब दुर्ग शहर को भी एक राकेश ठाकुर चाहिए।

जिन्होंने सत्ता में मलाई खाई, वो संगठन की लड़ाई में गायब क्यों हैं?
  कार्यकर्ता अब सवाल करने लगे हैं। जब सत्ता थी, तब स्टेज पर हीरो बनकर चमकने वाले नेता अब आंदोलन में “साइलेंट मोड” पर क्यों हैं? क्या कांग्रेस अब भी “अनुमोदन” और “चाटुकारिता” की राजनीति से बाहर नहीं निकल पाई?

राहुल गांधी का बयान—“बारात में नाचने वाले घोड़े नहीं, ज़मीन पर लड़ने वाले कार्यकर्ता चाहिए”—शहर कांग्रेस पर सटीक बैठता है। अब जरूरत है एक ऐसे अध्यक्ष की जो सोशल मीडिया के नेता नहीं, सड़कों के सिपाही हों। जो सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए नहीं, पार्टी के लिए पसीना बहाने के लिए तैयार हों।
  देखना दिलचस्प होगा कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व अब भी “कठपुतली अध्यक्ष” के भरोसे चलता है या एक सक्रिय कार्यकर्ता नेता को संगठन की कमान सौंपता है।
कांग्रेस की वापसी सिर्फ नारों से नहीं, नेतृत्व में बदलाव से ही संभव है।

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