August 03, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    आलेख : युतियुक्तिकरण : छत्तीसगढ़ में शिक्षा क्षेत्र की नई क्रांति की ओर एक निर्णायक कदम Featured

    • rounak group

     शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रस्तावित युतियुक्तिकरण  योजना (School Rationalization Policy) एक ऐसी पहल है, जो आने वाले समय में प्रदेश के शैक्षणिक नक्शे पर दूरगामी बदलाव लाने जा रही है। वर्तमान में भले ही यह योजना कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों के लिए विरोध का विषय बनी हो, परंतु इसके मूल में निहित उद्देश्य और लाभों पर गौर किया जाए तो यह स्पष्ट होता है कि यह योजना शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, दक्षता और समावेशिता की ओर एक सशक्त कदम है।

    ⚖️ क्या है युतियुक्तिकरण योजना?

    युतियुक्तिकरण योजना का मूल उद्देश्य ऐसे शासकीय विद्यालयों का एकीकरण करना है, जहां छात्र संख्या अत्यंत कम है—30-40 या 50 के आसपास। इस प्रक्रिया के अंतर्गत आसपास के ऐसे स्कूलों को एक केंद्रीकृत विद्यालय में विलय किया जाएगा, जहां उचित भवन, पर्याप्त शिक्षक, प्रशासनिक स्टाफ, क्लर्क और संसाधन उपलब्ध होंगे। इसके माध्यम से न केवल बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा, बल्कि शासन के खर्चों का भी समुचित उपयोग सुनिश्चित होगा।

    ? वर्तमान व्यवस्था की गंभीर चुनौतियां

    छत्तीसगढ़ के सुदूर ग्रामीण अंचलों और कस्बों में आज भी अनेक शासकीय विद्यालय ऐसे हैं, जो नाममात्र की छात्र संख्या के साथ संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों में मात्र एक शिक्षक के भरोसे स्कूल की पूरी व्यवस्था चलाना किसी संवैधानिक शिक्षा अधिकार की आत्मा के साथ न्याय नहीं है। इतना ही नहीं, स्टाफ की कमी, भवनों की मरम्मत, प्रशासनिक अभिलेखों के रख-रखाव जैसी अनिवार्य व्यवस्थाएं शासन पर प्रति विद्यालय लाखों रुपये का व्यय लाद रही हैं।

    ?? कम छात्र संख्या = कम प्रतिस्पर्धा, सीमित मानसिक विकास

    कम छात्रों की कक्षा में प्रतिस्पर्धा का वातावरण नहीं पनपता, जो बच्चों के समग्र मानसिक विकास में बाधा उत्पन्न करता है। आज जब देश NEP-2020 के तहत 21वीं सदी की प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, तब बच्चों को सीमित संसाधनों में शिक्षित करना उन्हें पीछे छोड़ने जैसा होगा।

    ? एकीकृत विद्यालय – गुणवत्ता की नई परिभाषा

    युतियुक्तिकरण के तहत अगर 5 विद्यालयों के छोटे बच्चों को मिलाकर एक उच्चतर, सुव्यवस्थित स्कूल में समाहित किया जाए, तो—

    अनुभवी शिक्षक उपलब्ध होंगे
    विज्ञान, गणित, कला, खेल आदि विषयों में विशेषज्ञता होगी
    छात्र आपसी प्रतियोगिता के माध्यम से अधिक प्रगति करेंगे
    शासन द्वारा प्रति विद्यार्थी बजट प्रभावी तरीके से गुणवत्ता पर निवेश किया जा सकेगा
    डिजिटल व स्मार्ट क्लास जैसे नवाचार संभव होंगे

    ? ग्रामीण और शहरी संतुलन की ओर एक पहल

    आज शहरी स्कूलों में छात्र संख्या अधिक व संसाधन अपेक्षाकृत बेहतर हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल संसाधनों और शिक्षकों की कमी से जूझते हैं। युतियुक्तिकरण इस असंतुलन को पुनर्संतुलित कर सकता है। जिस प्रकार से समृद्ध निजी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को लेकर प्रतिस्पर्धा होती है, उसी प्रकार सरकारी स्कूल भी आने वाले वर्षों में नवाचार, प्रतिस्पर्धा और उत्कृष्टता के मानदंड स्थापित कर सकेंगे।

    ? विपक्ष का विरोध और शासन की दूरदृष्टि

    विपक्षी दलों का यह तर्क कि ‘स्कूल बंद किए जा रहे हैं’ या ‘शिक्षा को पीछे ले जाया जा रहा है’, एक आंशिक और सतही दृष्टिकोण है। यदि 5 विद्यालयों के 40-50 छात्रों को एक उच्चतर स्कूल में लाया जाए, तो कुल लगभग 300 छात्रों के लिए एक बेहतर संस्थान विकसित किया जा सकता है। इसमें किसी प्रकार की शिक्षा की कटौती नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और प्रासंगिकता को बढ़ावा देना ही प्रमुख उद्देश्य है।

    ? यूटी युक्तिकरण : शिक्षा के माध्यम से समृद्ध समाज की ओर

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह योजना न केवल प्रशासनिक कुशलता का परिचायक है, बल्कि एक दूरदर्शी शैक्षणिक दृष्टिकोण भी प्रस्तुत करती है। शिक्षा ही समाज, प्रदेश और राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि शिक्षा सशक्त होगी तो प्रदेश की आने वाली पीढ़ी रोज़गार, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएगी।

    ? निष्कर्ष : सुनहरे भविष्य की नींव

    युतियुक्तिकरण योजना को केवल संख्या या भवन के घटाव के रूप में नहीं, बल्कि गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धा और मानसिक विकास की नींव के रूप में देखा जाना चाहिए। यह योजना छत्तीसगढ़ को शिक्षित, सक्षम और प्रतिस्पर्धी राज्य बनाने की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। आने वाले वर्षों में जब शासकीय विद्यालय भी निजी स्कूलों को टक्कर देने लगें, तब यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह विरोध नहीं, बल्कि एक भविष्यगामी क्रांति का प्रारंभ था।

    ? लेखक : शरद पंसारी
    संपादक – शौर्यपथ दैनिक समाचार

    Rate this item
    (0 votes)

    Latest from शौर्यपथ

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision