August 05, 2026
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    संपादकीय: “जोगी युग” – विरासत, विवाद और राजनीति का अधूरा अध्याय

    • rounak group

    छत्तीसगढ़ की राजनीति में “जोगी” नाम केवल एक व्यक्ति या परिवार का प्रतीक नहीं, बल्कि एक पूरे दौर, एक सोच और एक राजनीतिक प्रयोग का प्रतिनिधित्व करता है। अजीत जोगी ने जिस राज्य को जन्म के शुरुआती वर्षों में दिशा दी, उसी राज्य में उनके परिवार की राजनीति आज अस्तित्व के संकट और कानूनी लड़ाइयों के बीच खड़ी है। यह कहानी सिर्फ उत्थान और पतन की नहीं, बल्कि सत्ता, संघर्ष और विवादों के जटिल संगम की है।


    नींव के शिल्पकार: अजीत जोगी

    जब छत्तीसगढ़ का गठन हुआ, तब प्रशासनिक ढांचा कमजोर था, संसाधन सीमित थे और उम्मीदें आसमान छू रही थीं। ऐसे समय में अजीत जोगी ने एक मजबूत प्रशासक के रूप में राज्य की नींव रखी।

    उन्होंने किसानों के लिए समर्थन मूल्य, गरीबों के लिए “काम के बदले चावल”, आदिवासियों के लिए भूमि सुरक्षा और जल प्रबंधन के लिए “जोगी डबरी” जैसी योजनाओं से एक जन-नेता की छवि बनाई। यह वह दौर था जब जोगी को छत्तीसगढ़ का “निर्माता मुख्यमंत्री” कहा जाने लगा।

    लेकिन राजनीति में केवल योजनाएं ही पर्याप्त नहीं होतीं—विश्वास और पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी होती है।


    सत्ता का केंद्रीकरण और गिरती साख

    जोगी सरकार पर सबसे बड़ा आरोप था—सत्ता का केंद्रीकरण
    सरकार के फैसले कुछ लोगों और परिवार के इर्द-गिर्द सिमटते नजर आए। इसी दौरान “सुपर सीएम” जैसी उपाधियों ने जन्म लिया, जिसने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

    कांग्रेस के भीतर गुटबाजी, वरिष्ठ नेताओं का अलग होना और “जोगी टेप कांड” जैसे विवादों ने जनता के बीच यह संदेश दिया कि सत्ता सेवा से ज्यादा नियंत्रण का माध्यम बनती जा रही है।

    परिणाम स्पष्ट था—2003 में सत्ता हाथ से निकल गई, और 15 साल तक वापसी नहीं हो सकी।


    अमित जोगी: विवादों की परछाई में राजनीति

    जहां अजीत जोगी ने संघर्ष से पहचान बनाई, वहीं अमित जोगी का राजनीतिक सफर शुरुआत से ही आरोपों और विवादों से घिरा रहा।

    “केबल वॉर” हो या प्रशासनिक हस्तक्षेप के आरोप—इन सबने उनकी छवि को एक आक्रामक और प्रभावशाली लेकिन विवादित नेता के रूप में स्थापित किया।

    सबसे बड़ा झटका तब लगा जब रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाई कोर्ट ने 2026 में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
    हालांकि अंतिम फैसला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम चरण (सुप्रीम कोर्ट) पर निर्भर करेगा, लेकिन इस निर्णय ने जोगी परिवार की राजनीतिक जमीन को हिला कर रख दिया है।


    झीरम घाटी: सवाल जो आज भी जिंदा हैं

    2013 का झीरम घाटी कांड छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे काला अध्याय रहा।
    इसमें जोगी परिवार पर सीधे आरोप सिद्ध नहीं हुए, लेकिन राजनीतिक संदेह और आरोपों ने उनकी छवि को प्रभावित जरूर किया।

    राजनीति में कभी-कभी सिर्फ दोषी होना जरूरी नहीं होता, संदेह भी काफी होता है।


    जनता कांग्रेस (जे): एक प्रयोग, जो सिमट गया

    अजीत जोगी ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई—जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)।
    2018 में यह पार्टी “किंगमेकर” बनी, लेकिन 2023 तक पूरी तरह हाशिए पर चली गई।

    आज स्थिति यह है कि:

    • संगठन कमजोर
    • नेता बिखर चुके
    • और अस्तित्व बचाने के लिए कांग्रेस में विलय की कोशिश

    यह दिखाता है कि व्यक्ति आधारित राजनीति, संगठन के बिना लंबे समय तक टिक नहीं पाती।


    निष्कर्ष: विरासत बनाम वास्तविकता

    जोगी परिवार की कहानी हमें एक बड़ा राजनीतिक सबक देती है—

    ? विकास की योजनाएं विरासत बनाती हैं, लेकिन विवाद उसे कमजोर कर देते हैं।
    ? सत्ता का केंद्रीकरण अल्पकालिक लाभ देता है, लेकिन दीर्घकाल में नुकसान करता है।
    ? और सबसे महत्वपूर्ण—जनता अंततः छवि और विश्वास के आधार पर फैसला करती है।

    आज जोगी परिवार एक ऐसे मोड़ पर है जहां:

    • अतीत की उपलब्धियां सम्मान दिलाती हैं
    • लेकिन वर्तमान के विवाद भविष्य तय कर रहे हैं

    छत्तीसगढ़ की राजनीति में “जोगी युग” एक अधूरा अध्याय बन चुका है—जिसमें उपलब्धियों की चमक भी है और विवादों की छाया भी।


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