September 18, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    मेलबॉक्स / शौर्यपथ / अगर अमेरिका आत्म-चिंतन करता, तो जान पाता कि उसके यहां रंगभेद को लेकर बदलाव कागजी ही हैं और जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। दुनिया के इस स्वयंभू नेता को यह समझना चाहिए कि अक्सर जमीनी सच्चाई कागजी दावों से अलग होती है। यह किसी भी देश में हो सकता है, इसलिए मानवाधिकार, धार्मिक सहिष्णुता, व्यक्तिगत आजादी जैसे मुद्दों पर दुनिया को धमकाना और उन पर अपनी राय थोपना ठीक कतई नहीं है, खासतौर से भारत जैसे लोकतांत्रिक देश पर। रही बात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की, तो चुनावी वर्ष में वह कोरोना और रंगभेद, दोनों संकटों को ठीक से संभाल नहीं पाए और अपनी खीझ चीन, विश्व स्वास्थ्य संगठन और रंगभेद विरोधियों पर अलग-अलग तरीकों से उतार रहे हैं।
    बृजेश माथुर, गाजियाबाद

    लॉकडाउन हुआ अनलॉक
    जब भारत में लॉकडाउन किया गया था, तब सभी इसके अनलॉक होने का इंतजार कर रहे थे। उस समय परिस्थितियां भी इतनी विपरीत नहीं थीं। तब कोरोना के इक्का-दुक्का मरीज ही मिल रहे थे, लेकिन आज प्रतिदिन हजारों की संख्या में नए मरीज सामने आ रहे हैं। यह सही है कि लॉकडाउन की वजह से देश को काफी आर्थिक नुकसान हुआ, लेकिन क्या अभी सही समय था अनलॉक का? अब तक सिर्फ शहर संक्रमित थे, लेकिन अनलॉक होने के बाद गांवों की हालत भी खराब हो जाएगी। सड़कों पर पहले की तरह भारी भीड़ दिखने भी लगी है। सुरक्षा उपायों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। ऐसे में, सरकार को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए। लॉकडाउन में ज्यादातर लोग मजबूरी में ही सही, घर में जरूर थे, लेकिन अनलॉक-1 की घोषणाा होते ही वे अब घरों से बाहर निकलने लगे हैं, जिससे कोरोना के फैलने का खतरा बढ़ गया है।
    मधु त्रिवेदी, नारायणा गांव, नई दिल्ली

    स्कूल न खुलें अभी
    सरकार ने अब स्कूलों को खोलने की अनुमति दे दी है। हालात देखकर इस पर फैसला लिया जाएगा। लेकिन क्या स्कूल अभी बच्चों के लिए सुरक्षित हैं? भले ही बड़े लोगों की तुलना में बच्चे कम संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन उन पर खतरा कहीं ज्यादा है, खासकर छोटे बच्चों पर। इसीलिए स्कूल खोलना अभी जोखिम भरा फैसला होगा। इस पर राज्य सरकारों को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, आखिर यह नई पीढ़ी के जीवन का सवाल है। हम चाहें, तो घर में ही बच्चों को पढ़ाने के तौर-तरीके विकसित कर सकते हैं। ऑनलाइन कक्षा के माध्यम से ऐसा किया भी गया है। ऐसी ही रणनीति आगे भी अपनाई जा सकती है। बच्चों को स्कूल बुलाना इसलिए भी जोखिम भरा होगा, क्योंकि बच्चे दो गज की दूरी का शायद ही वे पालन कर पाएंगे। फिर, वे यहां-वहां हाथ भी लगाएंगे, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। ऐसे में, किसी स्कूल में एक भी नया संक्रमण काफी सारे बच्चों को बीमार बना सकता है। लिहाजा सरकार अपने फैसले पर फिर से मंथन करे।
    रजत यादव, सुजानपुर, कानपुर

    नई उपलब्धि
    कहते हैं, रास्ते में चाहे जितनी भी परेशानी आए, यदि सफल होने की चाह रहे, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। कोरोना महामारी के बीच भी अमेरिका ने अपने अंतरिक्ष मिशन को पूरा करने की आस नहीं छोड़ी। नौ वर्षों के अथक परिश्रम और प्रयासों के बाद वह इतिहास रचने में सफल हो गया। हालांकि, पहले प्रयास की राह में मौसम बाधा बन गई, मगर 31 मई को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष की ओर रवाना कर दिया गया। यह पहला मौका है, जब कोई निजी अंतरिक्ष यान से अपने मिशन पर रवाना हुआ है। नासा ने इस मिशन को पूरा करके अमेरिका के खाते में एक नई उपलब्धि दर्ज करा दी है।
    निशा कश्यप, औरंगाबाद, बिहार

    ओपिनियन / शौर्यपथ / दुनिया की सात विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-7 के विस्तार की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल अप्रत्याशित नहीं है। कोविड-19 के कारण इस वक्त विश्व-व्यवस्था में उथल-पुथल जारी है। कोरोना से जंग जीतकर चीन दुनिया भर में अपनी हैसियत बढ़ाने में जुटा है, तो विश्व का सबसे ताकतवर देश अमेरिका अभी तक इस वायरस से पार नहीं पा सका है। इसके साथ ही कई अन्य घरेलू चुनौतियों से भी वाशिंगटन इस समय जूझ रहा है। उसकी अर्थव्यवस्था भी ढलान पर है। ऐसे में, उसे उन राष्ट्रों की जरूरत आन पड़ी है, जिनके साथ उसके अच्छे संबंध रहे हैं। यही वजह है कि सितंबर में होने वाली जी-7 की बैठक में शामिल होने के लिए उसने भारत, रूस, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को आमंत्रित किया है। रूस पहले भी इस समूह का सदस्य रह चुका है, लेकिन यूक्रेन-क्रीमिया विवाद के बाद साल 2014 में उसे इस समूह से बाहर कर दिया गया था।
    बहरहाल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने इस प्रयास में चीन से दूरी बरती है। इसका सीधा मतलब है कि वाशिंगटन और बीजिंग की तनातनी अभी खत्म नहीं होने वाली। अमेरिका कोरोना वायरस बनाने का आरोप चीन पर मढ़ता रहा है। ह्वाइट हाउस का मानना है कि अगर चीन ने समय पर इस वायरस की सूचना दुनिया को दे दी होती, तो स्थिति आज इतनी भयावह नहीं होती। इसके अलावा, दोनों देश पहले से ही व्यापारिक युद्ध में उलझे हुए हैं। चीन जिस तेजी से दुनिया में अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है, उनसे भी अमेरिकी राष्ट्रपति नाराज हैं। अमेरिका और चीन में कायम इसी दरार के कारण ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को न्योता भेजा है। वह रूस और चीन की बढ़ती नजदीकी से चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि दोनों देशों की बढ़ती दोस्ती से विश्व-व्यवस्था में अमेरिका का कद प्रभावित हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया को आगे बढ़ाने के पीछे यही वजह है। ऑस्ट्रेलिया चीन के खिलाफ काफी मुखर है। हाल ही में संपन्न विश्व स्वास्थ्य महासभा में भी उसने उस प्रस्ताव के पक्ष में अपना मत दिया था, जिसमें कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए एक स्वतंत्र जांच कमेटी बनाने पर सहमति बनी थी।
    भारत को इसलिए इस समूह में शामिल होने के लिए बुलाया गया है, क्योंकि अमेरिका के साथ हमारी अच्छी सामरिक साझेदारी बनी है। दोनों देश हाल के वर्षों में एक-दूसरे के करीब आए हैं। कोरोना संक्रमण के बावजूद भारत ने अमेरिका को पर्याप्त मात्रा में हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन जैसी जरूरी दवाई भेजी। क्वाड (भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका व जापान का समूह) और इंडो-पैसिफिक में भी भारत एक प्रभावशाली राष्ट्र बनकर उभरा है। लिहाजा, अमेरिका चाहता है कि विश्व मंच पर नई दिल्ली के बढ़ते रुतबे का उसे फायदा मिले। दक्षिण कोरिया भी चूंकि अमेरिका का अच्छा दोस्त है, इसलिए उससे भी जी-7 में शामिल होने का अनुरोध किया गया है।
    सवाल अब यह है कि क्या ये चारों देश राष्ट्रपति ट्रंप का प्रस्ताव स्वीकार करेंगे? और, यदि जी-7 का विस्तार होता है, तो विश्व-व्यवस्था किस कदर प्रभावित होगी? भारत ने जरूर इस गुट में शामिल होने पर सहमति दे दी है और ऑस्ट्रेलिया व दक्षिण कोरिया से भी शायद ही इनकार हो, लेकिन रूस को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। रूस कई वजहों से उलझन में है। हाल के वर्षों में चीन के साथ उसकी निकटता काफी ज्यादा बढ़ी है। यूक्रेन-क्रीमिया विवाद के बाद दोनों देशों ने करीब 400 अरब डॉलर का गैस-समझौता किया, जबकि गैस की कीमत को लेकर दशकों से दोनों में आम राय नहीं बन सकी थी। चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘बेल्ट रोड इनीशिएटिव’ में भी रूस पर खासा भरोसा किया गया है। इसके अलावा, पिछले साल दोनों देशों के बीच 110 अरब डॉलर का आपसी कारोबार हुआ है, जबकि 1998 के बाद से पश्चिमी देशों के साथ मास्को की दूरी बढ़ती गई है, साल 2014 के बाद से तो और भी ज्यादा। हालांकि, रूस की मुखालफत जी-7 के यूरोपीय देश भी कर रहे हैं। कनाडा ने तो खुलकर अपना विरोध जताया है।
    रही बात विश्व-व्यवस्था के प्रभावित होने की, तो इस पर तभी असर पड़ेगा, जब जी-7 (अब संभवत: जी-10 या जी-11) के सभी सदस्य देशों में आपसी तालमेल बने। यह सही है कि अभी विश्व की कुल पूंजी का आधा से ज्यादा हिस्सा इन्हीं देशों के पास है, लेकिन उनमें आपसी टकराव इस कदर है कि साल 2018 की बैठक में जो संयुक्त घोषणापत्र जारी किया गया, उसे चंद घंटों में ही अमेरिका ने खारिज कर दिया था। पिछले साल तो ऐसा कोई घोषणापत्र जारी तक न हो सका। इतना ही नहीं, यह एक ऐसा वैश्विक संगठन है, जिसकी कोई वैधानिक हैसियत नहीं है। इसका अपना सचिवालय तक नहीं है। सभी सदस्य स्वेच्छा से एक-दूसरे की मदद करते हैं। ऐसे में, यदि इसका विस्तार होता है और इन देशों में आम राय नहीं बन पाती है, तो यह गुट विश्व-व्यवस्था पर बहुत ज्यादा असर शायद ही डाल पाए। आज विभिन्न राष्ट्रों के बीच एक सोच बनाना काफी मुश्किल काम है भी। जी-20 और संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों को इसका खूब एहसास है। इसलिए अभी बहुत ज्यादा उम्मीद इससे नहीं पाली जा सकती। फिर भी, यदि सभी सदस्य देश एक-दूसरे के हितों को महत्व देंगे, जैसा कि इसके गठन के समय वायदा किया गया था, तो सितंबर की बैठक के बाद हम एक नई व्यवस्था को साकार होते देख सकते हैं।
    फिलहाल, हमारे लिए तो सुखद स्थिति ही है। चीन बेशक अमेरिका के इस कदम से नाराज है, लेकिन हमें अपने हितों को प्राथमिकता देनी होगी। अगर जी-10 या जी-11 अस्तित्व में आता है, तो चीन पर इसका दबाव अवश्य बनेगा। हो सकता है कि उसकी मौजूदा आक्रामक रणनीति में भी हमें बदलाव देखने को मिले। जी-7 एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच है। पिछले साल इसकी बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल भी हुए थे। लिहाजा इसकी सदस्यता का यह प्रस्ताव विश्व-व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत है।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं) अरविंद गुप्ता, डायरेक्टर, विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन

     

    संवाददाता कृष्णा टण्डन
    जांजगीर चाम्पा / शौर्यपथ / बम्हनीडीह विकास खण्ड के ग्राम पंचायत सेमरीया के कुछ ग्रामीणो ने पहले तो शासकीय तालाब को पाट कर खेत बना लिया था जब पंचायत द्वारा तालाब का कायाकल्प करने के लिए शासन से स्वीकृति हुई तो अब सेमरीया के कब्जा धारियों को परेशानी हो रही है इतना ही कब्जा धारी तालाब गहरी करण मे बाधा डाल रहे है और गहरी करण नही होने दे इसकी लिखित शिकायत ग्राम के 19 पंचों के साथ काफी अधिक संख्या में लोगो ने इसकी सिकायत अनुविभागीय अधिकारी राजस्व चाम्पा व जनपद पंचायत बम्हनीडीह के मुख्य कार्यालय पालन अधिकारी से की है पंचों व ग्रामीणो का आरोप है की सेमरीया के फिरात यादव, पुनी राम सतनामी, बोहारिक सतनामी, गोपाल सतनामी, खीकराम सतनामी, खेदराम कश्यप, के द्वारा बंधा तालाब के करीब 10 एकड शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर खेती कर रहे है जब की वर्तमान वह भुमि शासकीय है जिसमे मनरेगा के तहत तालाब गहरी करण कार्य स्वीकृति है कार्य मे कब्जा धारियों के द्वारा बाधा उत्पन्न किया जा रहा है
    दो ग्राम कब्जा छोडने को तैयार
    ग्रामीणो से मिली जानकारी के अनुसार फिरात यादव, और खेदराम कश्यप कब्ज़ा छोड़ने के लिये तैयार है बाकी के ग्रामीणो के द्वारा कब्जा नही छोडा जा रहा है जिससे तालाब के कायाकल्प होने से पंचायत को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है
    नही हटा तालाब से कब्जा तो होगा उग्र आंदोलन
    ग्राम पंचायत सेमरीया के ग्रामीणो बताया की अगर तालाब से कब्जा नही हटाया गया तो वह उग्र आंदोलन करेगे ग्रामीणो ने यह भी कहना है की अगर जन हित के कार्य मे लोग बाधा डालते है तो वह गलत है तालाब का अगर कायाकल्प होगा तो वह सभी के लिये अच्छा है अगर कब्जा धारी कब्जा नही हटायेगे तो उच्च अधिकारीयो से इसकी सिकायत की जायेगी
    जिम्मेदार बने है मुख दर्शक
    ग्रामीणो का यह भी आरोप है की सिकायत के बाद भी जिम्मेदार अधिकारिय कब्जा हटाने के मुड मे नही है ऐसा लग रहा है तभी तो शासकीय का पर ग्रहण सा लग गया है कुछ दिनो मे बारिश आ जायेगी जिसके बाद मनरेगा का काम ही बंद हो जायेगा अगर जल्द ही कब्जा नही हटाया गया तो तालाब गहरी करण केवल नाम का ही रह जायेगा एक ओर शासन हर हाथ मे काम देने की बात कह रही है और यहा लोगो को काम तक नही मिल पा रहा है इसका मुख्य कारण शासकीय तालाब मे कब्जा नजर आ रहा है और जिम्मेदार अधिकारी है की इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है

    वर्जन

    सेमरीया के तालाब गहरी करण मे कुछ लोगो के द्वारा बाधा डालने की सिकायत मिली है भुमि पर कुछ लोगो ने कब्जा कर रखा है पटवारी से नक्शा मंगाया गया है जिसके बाद कब्जा हटा कर कार्यवाई के साथ गहरी करण किया जायेगा
    कुबेर सिंह उरैती , सीईओ - जनपद पंचायत बम्हनीडीह

    अवधेश टंडन की रिपोर्ट
    जांजगीर चांपा / शौर्यपथ / हसौद पुलिस की बड़ी कारवाई जानकारी के मुताबिक रेलवे में नौकरी लगाने के नाम पर 10 लोगो से 9-9 लाख रुपये ठगी करने वाले 4 आरोपियों को पुलिस में गिरफ्तार कर लिया है वही एक आरोपी फरार है। मामला हसौद थाने की है जहाँ ग्राम पंचायत मिरौनी के अशोक कुमार कश्यप ने थाने में शिकायत की थी कि उससे रेलवे में नौकरी लगाने के नाम पर ग्राम पंचायत हसौद के ही भरत कश्यप,अर्जुन बर्मन,दीपक कश्यप,दिलीप कश्यप,पन्नालाल कश्यप ने रेलवे में नौकरी लगाने के नाम से उससे और उसके रिस्ते दरों से नौ नौ लाख रुपये लिए थे।और उसे दिल्ली ले जाकर फर्जी ज्वांइन लेटर,फ़र्ज़ी आईडी कार्ड देकर उससे धोका धाड़ी की है।जब इस बात की जानकारी उसे हुई तो उसने थाने में आरोपियों के विरुद्ध धोखाधाड़ी का आरोप दर्ज करवाया ।
    जिसके आधार पर हसौद पुलिस ने कल दिनांक 01/06/2020 को पांचो आरोपि भरत कश्यप पिता गेंदराम कश्यप,अर्जुन बर्मन पिता दुजराम बर्मन,दीपक कश्यप पिता भरत कश्यप, दिलीप कश्यप पिता भरत कश्यप,पन्नालाल कश्यप पिता होरीलाल कश्यप के विरुद्ध 420,120ब,468,471 के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड में जेल भेज दिया गया । वही एक आरोपी पन्नालाल कश्यप फरार बताया जा रहा है ।
    सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत हसौद के भरत कश्यप भोजनालय दुकान का संचालन करता था जिससे मोटी रकम नही आता था जिससे ओ लोगो को रेलवे में नौकरी लगाऊंगा बोल के लोगो से पैसे का मांग करता था।
    तथा अपने दोनों बेटे दीपक कश्यप और दिलीप कश्यप का नौकरी लगा दिया हूँ जो दिल्ली और कोलकत्ता में नौकरी करते है बोल के लोगो से पैसे की मांग किया करते थे ।वही अर्जुन बर्मन ट्रेडर्स का बिजनेस करता था और हसौद व्यपारी संघ का अध्यक्ष हूँ बोल के लोगो से पैसे का मांग किया करते थे ।
    जानकारी के अनुसार ये लोग हसौद क्षेत्र के लग भाग 50 लोगो से नौकरी के नाम से पैसे की ठगी किये है ।इस लिए इस गिरोह को अंतरराष्ट्रीय गिरोह माना जा रहा है।
    सूत्रों की माने तो इस गिरोह में कई बड़े बड़े लोगो का भी नाम सामने आ रहा है जो भाजपा के नेता और नेत्री है ।
    जल्द ही इस केस में और भी कई लोगो के नाम आने की संभावना है । अब देखना यह होगा कि उन पर भी क्या कार्यवाही होता है ।

    अवधेश टंडन की रिपोर्ट
    मालखरौदा/ शौर्यपथ / पंचायत सचिव द्वारा लगातार मुख्यालय में अनुपस्थित रहकर गांव के सरपंच के घर को बनाया सचिव मुख्याल ऐसे में महत्वपूर्ण दस्तावेज अनाधिकृत व्यक्ति के हाथ में होने से कभी अनियमितता होने की आशंका है। वहीं ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं के लिए ग्राम पंचायत भवन को छोड़कर सरपंच के घर में मिलना पड़ रहा है। यहां उनकी अनुपस्थिति में ग्राम पंचायत का सभी कार्य सरपंच साहब के घर में किया जाता है। इसके चलते राज्य शासन की कई महत्वकांक्षी योजनाएं पंचायत प्रतिनिधि व कर्मचारियों की भेंट चढ़ने लगा है।
    राज्य शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वकांक्षी योजना का संचालन कर इसका बेहतर ढंग से क्रियान्वयन करने का निर्देश दिया गया है
    वहीं लगातार कलेक्टर द्वारा समीक्षा बैठक में योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन करने के उद्देश्य से अधिकारियों को योजना की जानकारी लेकर उन्हें प्रत्येक नागरिकों तक लाभ पहुंचाने का निर्देश दिया जाता है, मगर शासन की महत्वाकांक्षी योजनाएं पंचायत कर्मचारियों के मनमाने रवैये की भेंट चढ़ने लगी है जनपद पंचायत मालखरौदा अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़े सीपत की जनसंख्या लगभग दो हजार से अधिक है। यहां जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र सहित अन्य कार्यों को लेकर रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण पंचायत भवन पहुंचते हैं, मगर यहां पंचायत सचिव समरू लाल मधुकर के मनमाने रवैये से ग्रामीणों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। यहां पंचायत सचिव के मनमाने रवैये के चलते कई बार पंचायत भवन में सचिव के नहीं मिलने पर ग्रामीणों को उनके गृह ग्राम तक जाना पड़ रहा है। सचिव को उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर शासकीय कार्य के लिए जनपद पंचायत कार्यालय या जिला पंचायत कार्यालय आने का हवाला दिया जाता है। यहां सचिव के मनमाने रवैये से ग्रामीण परेशान हैं।

           बिलासपुर / शौर्यपथ / बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के ठीक बाहर ग्राम पंचायत बन्नाकडीह में  मनरेगा के नियमों का लगातार उल्लंघन हो रहा है और इस खेल में सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की आपस में सांठगांठ है   इसी का परिणाम है कि अभी तक किसी भी जॉब कार्ड धारी को एक भी परिश्रमिक भुगतान नहीं हुआ जबकि मनरेगा की गाइडलाइन के अनुसार 1 सप्ताह में भुगतान होना चाहिए साथ ही जो जॉब कार्ड धारी मनरेगा का काम करने आते हैं   उन्हें सरपंच के अपशब्द भी सुनने पड़ते हैं बन्नाकडीह के   सरपंच संजय आडिल द्वारा जब कार्यस्थल पर जेसीबी से काम लगवा लूंगा मेरे को किसी का कोई डर नहीं के साथ अपशब्द का भी लगातार उच्चारण किया जा रहा है इस मुद्दे पर सचिव का कहना   है की जब सरपंच ऐसा कुछ कहा होगा तब मैं वहां नहीं था मनरेगा का काम मशीन से नहीं किया जा सकता और ऐसा नहीं होगा क्या वे सरपंच के व्यवहार की शिकायत सीईओ से करेंगे के प्रश्न पर उन्होंने गोलमोल जवाब दिया मनरेगा के काम गांव के क्वॉरेंटाइन सेंटर तथा वित्तीय मामलों पर प्रश्न पूछने पर सरपंच ने जवाब देने के स्थान पर पलायन करना उचित समझा मनरेगा की अटेंडेंस और मस्टर रोल पर जब रोजगार सहायक से बात करनी चाही गई तो उसने स्वयं को गांव से बाहर बताया और क्वारेंटाइन सेंटर पर आ रहा हूं  पर नहीं आया क्वारेंटाइन सेंटर के कर्मचारियों की  ड्यूटी के संबंध में भी काफी शिकायतें मिली किंतु एक बात साधारण तह  दिखाई दी की क्वॉरेंटाइन सेंटर पर जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है उनके बीच सामंजस्य नहीं है.बिलासपुर / शौर्यपथ / बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के ठीक बाहर ग्राम पंचायत बन्नाकडीह में  मनरेगा के नियमों का लगातार उल्लंघन हो रहा है और इस खेल में सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की आपस में सांठगांठ है   इसी का परिणाम है कि अभी तक किसी भी जॉब कार्ड धारी को एक भी परिश्रमिक भुगतान नहीं हुआ जबकि मनरेगा की गाइडलाइन के अनुसार 1 सप्ताह में भुगतान होना चाहिए साथ ही जो जॉब कार्ड धारी मनरेगा का काम करने आते हैं   उन्हें सरपंच के अपशब्द भी सुनने पड़ते हैं बन्नाकडीह के   सरपंच संजय आडिल द्वारा जब कार्यस्थल पर जेसीबी से काम लगवा लूंगा मेरे को किसी का कोई डर नहीं के साथ अपशब्द का भी लगातार उच्चारण किया जा रहा है इस मुद्दे पर सचिव का कहना   है की जब सरपंच ऐसा कुछ कहा होगा तब मैं वहां नहीं था मनरेगा का काम मशीन से नहीं किया जा सकता और ऐसा नहीं होगा क्या वे सरपंच के व्यवहार की शिकायत सीईओ से करेंगे के प्रश्न पर उन्होंने गोलमोल जवाब दिया मनरेगा के काम गांव के क्वॉरेंटाइन सेंटर तथा वित्तीय मामलों पर प्रश्न पूछने पर सरपंच ने जवाब देने के स्थान पर पलायन करना उचित समझा मनरेगा की अटेंडेंस और मस्टर रोल पर जब रोजगार सहायक से बात करनी चाही गई तो उसने स्वयं को गांव से बाहर बताया और क्वारेंटाइन सेंटर पर आ रहा हूं  पर नहीं आया क्वारेंटाइन सेंटर के कर्मचारियों की  ड्यूटी के संबंध में भी काफी शिकायतें मिली किंतु एक बात साधारण तह  दिखाई दी की क्वॉरेंटाइन सेंटर पर जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है उनके बीच सामंजस्य नहीं है.vvvvv

    बिलासपुर / शौर्यपथ /  बिलासपुर  विश्वविद्यालय शिक्षा सत्र 2020-21 के लिए प्रवेश प्रारंभ कर दिया यूनिवर्सिटी के वेवसाईट पर विश्वविद्यालय पर चल रहे पाठ्यक्रमों की पुरी जानकारी के साथ उनकी फिस की जानकारी है ओनलाइन आवेदन के साथ बाईपोस्ट आवेदन पत्र जमा की जा सकती है  किंतु यहां सवाल प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वालों का है 12वीं की जितनी भी परीक्षाएं हुई उनके परिणाम किसी भी बोर्ड ने घोषित नहीं की है ऐसे में यूनिवर्सिटी की यह सूचना की प्रवेश पत्र हेतु आवेदन पत्र प्रथम सप्ताह तक लिए जाएंगे और दूसरे सप्ताह में मेरिट जारी होगी का कोई विश्वास नहीं होता सामान्य जानकारी के आधार पर यह माना जा सकता है कि प्रवेश पत्र के आवेदन के अंतिम तिथि बोर्ड के परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद ही होगी.

       बिलासपुर / शौर्यपथ / लॉक डाउन के ठीक पहले देश के खाद्य तेलों के बाजार में बड़ा परिवर्तन हुआ देसी ब्रांड पतंजलि ने रुचि, महाकोश, स्वयम्, तुलसी खाद्य तेल की पांच यूनिट को एक साथ एक टेकओवर कर लिया बाजार सूत्र की माने तो यह सौदा 4500 करोड़ का था अपने को हर्बल ब्रांड वाला बताने वाला योग गुरु बाबा रामदेव यादव के पतंजलि ट्रस्ट ने तेल की इन भिन्न-भिन्न कंपनियों को गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र में टेकओवर किया रूचि के सोयाबीन का टिन अब पतांजलि नाम से आ रहा है किन्तु इसमे अब कही भी पतांजलि की विषेश पहचान योग गुरु का फोटो नहीं है एसा माना जा रहा है कि तेल के धंधे में पतांजलि टेकओभर हुई कम्पनी की सप्लाई चेन पर ही भरोसा करेगी जिसका सीधा अर्थ है कि ये तेल पतांजलि के पूर्व स्टोर पर नहीं मिलेगा.

    जयपुर / शौर्यपथ / राजस्थान में सरकार ने शराब पर 30 रुपये प्रति बोतल तक सरचार्ज लगाने का फैसला किया है, जिससे राज्य में शराब महंगी हो गई है. सरकार ने बाढ़, सूखा, महामारी और जन स्वास्थ्य के हालात के निपटने के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है. कोरोना वायरस संक्रमण के बाद लॉकडाउन के कारण भारी आर्थिक नुकसान झेल रहे राज्य के वित्त विभाग ने मंगलवार को इस बारे में आदेश जारी किया. इसके तहत सभी तरह की शराब पर 1.50 रुपये से 30 रुपए तक सरचार्ज प्रति बोतल लगाया गया है.
    आदेश के अनुसार भारत निर्मित विदेशी मदिरा की अलग अलग माप की बोतलों पर पांच से दस रुपये अधिभार लगाया गया है. देसी शराब व राजस्थान निर्मित विदेशी मदिरा पर प्रति बोतल 1.50 रुपये अधिभार लगाया गया है. अधिकतम अधिभार 30 रुपये प्रति बोतल लगाया गया है. इससे पहले अप्रैल में सरकार ने शराब पर आबकारी शुल्क 10 प्रतिशत तक बढ़ाया था.

         दुर्ग / शौर्यपथ / नेता प्रतिपक्ष अजय वर्मा ने कहा कि प्रत्येक वर्ष के अप्रैल माह के अंत से प्रारंभ होकर मई माह के प्रथम सप्ताह तक दुर्ग शहर के तालाबों में निस्तारी हेतु पानी भरा जाता है, जिससे नागरिक गण नहाने धोने जैसा निस्तारी का काम भी करते हैं साथ ही भूगर्भ जल में वृद्धि भी होती है जिससे हमारे अनेक माध्यमों जैसे नल बोरिंगो में पेयजल उपलब्ध हो जाता है ।
    नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राजा जगतपाल की इस नगरी में भूजल संरचना इतनी सुंदर है, कि यदि शहर के तालाबों में ग्रीष्म ऋतु में पानी भर दिया जाए तो इस शहर में कभी जल संकट आ नहीं सकता इसलिए इस शहर के तालाबों को संरक्षित एवं सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है । किंतु महापौर जी की निगम कार्य में रुचि नहीं होने के कारण दुर्ग शहर के कई तालाबों में पानी नहीं भर पाया जिससे उक्त क्षेत्र में निस्तारी के लिए जनता त्राहि-त्राहि हो रही है ।
         इस आशय की जानकारी देते हुए नेता प्रतिपक्ष अजय वर्मा सहित भाजपा के सभी पार्षदों श्रीमती गायत्री साहू, चंद्रशेखर चंद्राकर, काशीराम कोसरे, नरेंद्र बंजारे, देवनारायण चंद्राकर, चमेली साहू, नरेश तेजवानी, लीना दिनेश देवांगन , मनीष साहू , अजीत वैद्य, ओम प्रकाश सेन, हेमा शर्मा ,शशि द्वारिका साहू ,पुष्पा गुलाब वर्मा ,कुमारी बाई साहूने कहा कि कातुलबोड़ वार्ड 59 का आमा तालाब वार्ड 15 का सिकोला बस्ती तालाब वार्ड 22 का कैलाश नगर तालाब एवं वार्ड 54 पोटिया कला डबरी तालाब में निगम प्रशासन बिल्कुल भी पानी नहीं भरवा पाई साथ ही पोटिया कला का बड़ा तालाब एवं वार्ड 23 दीपक नगर का रेवा तालाब आंशिक रूप से भर पाया शहर के और जो भी तालाब नहर पानी से भरा गया है वह भी स्थानीय पार्षदों एवं सफाई कर्मियों के सहयोग से भरा गया है ।
              देश में मानसून के दस्तक देने के पश्चात विधायक जी तालाबों को भरने बैठक लेते हैं, और अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि इन तालाबों को भरा जाए साथ ही शहर वासियों को अधिकारियों के हवाले से तालाब भरने का झूठा आश्वासन देते हैं । इस विषय में नेता प्रतिपक्ष अजय वर्मा एवं भाजपा पार्षदों ने विधायक जी से मांग करते हुए कहा कि आप जनता को झूठा आश्वासन न देकर ठोस काम करें इस बार तालाब नहीं भरने की जो चूक हुई है उसकी पुनरावृत्ति ना हो ताकि आगामी वर्षों में शहर के नागरिकों को इस संकट का सामना ना करना पड़े ।

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