
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
नरेश देवांगन की खास रिपोर्ट
जगदलपुर, शौर्यपथ। राज्य सरकार द्वारा रेत माफियाओं पर लगाम कसने के लिए लगातार सख्त निर्देश जारी किए जा रहे हैं। अवैध उत्खनन, परिवहन और पर्यावरणीय क्षति को रोकने के उद्देश्य से समय-समय पर समीक्षा और निगरानी भी की जा रही है। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नियमों के दायरे में हो और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इसके बावजूद ताज़ा मामला ग्राम पंचायत बेलगांव का है, जहां शासन की मंशा के विपरीत गतिविधियों के सामने आने के आरोप लग रहे हैं। प्राप्त जानकारी और सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में कथित रूप से अवैध रेत उत्खनन जारी है, जहां नियमों की अनदेखी करते हुए रेत निकासी की जा रही है।
बताया जाता है कि माइनिंग विभाग द्वारा पूर्व में कार्रवाई करते हुए एक पोकलेन मशीन को सील किया गया था, लेकिन इसके बाद भी संबंधित मशीन के उपयोग में आने की बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब विभागीय टीम पुनः मौके पर पहुंची और मशीन को जब्त कर थाना ले जाने का प्रयास किया गया, तब कुछ ग्रामीणों द्वारा विरोध किए जाने की सूचना है।
सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी मिल रही है कि कुछ बाहरी प्रभावशाली लोगों द्वारा ग्रामीणों को प्रलोभन देकर अपने पक्ष में करने की कोशिश की जा रही है। कथित तौर पर ग्रामीणों से यह कहा जा रहा है कि गांव में होने वाले बाली पर्व धार्मिक आयोजन का खर्च उठाया जाएगा, जिसके बदले रेत निकालने की अनुमति दी जाए। वहीं, कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों को आगे कर यह प्रस्तुत किया जाता है कि रेत का उपयोग गांव के निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है।
बुधवार को हुई कार्रवाई के दौरान स्थिति उस समय और जटिल हो गई, जब माइनिंग विभाग की टीम सील मशीन को अपने कब्जे में लेने पहुंची और विरोध के चलते मौके पर भीड़ एकत्रित हो गई। सूचना पर तहसीलदार, एसडीएम एवं नगरनार थाना की टीम भी मौके पर पहुंची, जहां अधिकारियों द्वारा समझाइश दी गई कि यदि ग्रामीण अपने सीमित उपयोग के लिए रेत निकालते हैं तो वह नियमों के अनुरूप हो, लेकिन किसी भी स्थिति में मशीनों का उपयोग न किया जाए।
हालांकि, सूत्रों के अनुसार, इसके बाद भी कथित रूप से रात के समय मशीनों के जरिए नदी से रेत उत्खनन और बाहरी परिवहन की गतिविधियां जारी रहने की बातें सामने आ रही हैं। यदि यह तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन होगा बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई को भी चुनौती माना जाएगा।
टेंडर प्रक्रिया पर भी मंडराया संकट, राजस्व नुकसान की आशंका
इसी बीच सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि संबंधित क्षेत्र की रेत खदान को लेकर विभाग द्वारा आगामी समय में टेंडर प्रक्रिया प्रस्तावित है। ऐसे में यदि वर्तमान में कथित रूप से अवैध उत्खनन इसी प्रकार जारी रहा और रेत का अत्यधिक दोहन होता रहा, तो भविष्य में खदान का वास्तविक भंडार प्रभावित हो सकता है। इससे न केवल संभावित ठेकेदार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, बल्कि शासन को मिलने वाली रॉयल्टी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि प्रशासन पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराए और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि शासन की मंशा, पर्यावरणीय संतुलन और राजस्व हितों की प्रभावी सुरक्षा हो सके।
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
