August 06, 2026
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    बिलासपुर की पहचान है राउत नाच महोत्सव - मुख्यमंत्री बघेल 43वें राउत नाच महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री Featured

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    बिलासपुर / शौर्यपथ / राउत नाच और काक्षन सोहाई तो पूरे प्रदेश में अलग अलग जगहों में होता है लेकिन बिलासपुर में इसका भव्य आयोजन करते हुए इसे महोत्सव की तरह मनाया जाता है। बिलासपुर का राउत नाच महोत्सव प्रदेश में ही नहीं प्रदेश के बाहर भी अपनी खासियत के लिए जाना जाता है। यह महोत्सव बिलासपुर की पहचान है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज बिलासपुर में 43वें राउत नाच महोत्सव का शुभारंभ करते हुए यह बात कही।
    मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि बिलासपुर में राउत नाचा उत्सव की शुरूआत छोेटे से बाजार के रूप में हुई लेकिन पूर्व मंत्री स्व. श्री बी.आर.यादव एवं श्री कालीचरण यादव के प्रयासों से यह महोत्सव 43वें वर्ष में आ पहुंचा है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के समय से ही गौ-पालन प्रचलित है। गौ का महत्व धार्मिक पुराणों में भी मिलता है लेकिन वर्तमान समय में देश में गायों की दुर्दशा हो रही है साथ ही चरवाहों की स्थिति भी खराब हो रही है। इनकी दुर्दशा को रोकने के लिए छ.ग.सरकार ने गोठान की व्यवस्था और चरवाहांे की व्यवस्था बनाई है। गोठान में चारा, पानी, चरवाहे की व्यवस्था के साथ साथ गोबर खरीदने की शुरूआत भी छत्तीसगढ़ में की गई। आज सरकार 2 रूपये किलो में गोबर खरीद रही है और एक रूपये किलों में चावल गरीबों को दिया जा रहा है। गोठानों में उपलब्ध गोबर को बेचकर आज चरवाहे हजारों रूपए कमा रहे हैं। यह उनके आय का स्त्रोत बन गया है। गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाकर महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है। रासायनिक खाद के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से जैविक खेती की ओर बढेंगे और बीमारी से दूर होंगे। इस सोच के साथ छत्तीसगढ़ सरकार कार्य कर रही है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राउत नाच महोत्सव का यह 43वां वर्ष यह सतत् रूप से चलता रहे, इसके लिए हर संभव मदद की जाएगी। उन्होंने महोत्सव में भाग लेेने वाले प्रत्येक नर्तक दल को 5-5 हजार रूपए देने और पशु औषाधालय निर्माण की घोषणा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लोक निर्माण मंत्री एवं जिले के प्रभारी ताम्रध्वज साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, वेशभूषा, खाना, रीति-रीवाज को आगे बढ़ाने का कार्य छत्तीसगढ़ सरकार कर रही है। छत्तीसगढ़ के पारम्परिक पकवानों की खुशबू देश की राजधानी तक महक रही है।
    कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में लोक कला, संस्कृति, परम्परा को जीवंत करने का कार्य छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर संसदीय सचिव एवं तखतपुर विधायक श्रीमती रश्मि सिंह, बिलासपुर विधायक शैलेष पाण्डेय, अपेक्स बैंक के अध्यक्ष बैजनाथ चंद्राकर, नगर निगम के महापौर रामशरण यादव, भिलाई के महापौर एवं विधायक देवेन्द्र यादव, अटल श्रीवास्तव ने संबोधित किया। इस अवसर पर स्वागत उद्बोधन कृष्ण कुमार यादव ने दिया। आभार प्रदर्शन राउत नाचा महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. कालीचरण यादव ने किया।
    पारम्परिक वेशभूषा में राउत नाचा का आनंद लिया मुख्यमंत्री ने
    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को यादवों के पारम्परिक वेशभूषा से संवारा गया। मुख्यमंत्री बघेल कलगी, पागा, जैकेट, कौड़ी पहनकर लाठी लेकर नृतकों के गोल घेरे में पहुंचे और उनके साथ गड़वा बाजा और मुरली के धुन में दोहा पढ़ते हुए नृत्य का आनंद उठाया। उनके साथ नृत्य में अन्य अतिथि भी शामिल हुए।
    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, विनोद वर्मा, खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, जिला पंचायत अध्यक्ष अरूण सिंह चौहान सहित जनप्रतिनिधि, नागरिकगण एवं प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आये हुए राउत नर्तक दल उपस्थित थे।

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