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June 13, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

राजनीति का बदलता स्वरूप और बढ़ती जनअपेक्षाएं

लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि केवल कानून बनाने या सरकारी योजनाओं की घोषणा करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे जनता की आशाओं, अपेक्षाओं और विश्वास के केंद्र भी होते हैं। समय के साथ राजनीति का स्वरूप बदला है और अब जनता केवल चुनावी वादों या मंचीय भाषणों से संतुष्ट नहीं होती। आम नागरिक ऐसे जनप्रतिनिधियों को पसंद कर रहा है जो उसकी दैनिक जरूरतों, सामाजिक समस्याओं और जीवन की वास्तविक चुनौतियों को समझते हुए सीधे समाधान प्रस्तुत करें।

छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में आज राजनीति का मूल्यांकन विकास कार्यों के साथ-साथ जनसरोकारों के आधार पर भी होने लगा है। जनता अब यह देख रही है कि उसका प्रतिनिधि केवल सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कर रहा है या फिर उससे आगे बढ़कर समाज की आवश्यकताओं को समझते हुए नवाचार और जनहित के नए मॉडल भी प्रस्तुत कर रहा है।

जब जनप्रतिनिधित्व बन जाए जनसेवा का माध्यम

दुर्ग जिले के वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र में विधायक रिकेश सेन द्वारा किए जा रहे विभिन्न सामाजिक प्रयासों की चर्चा लगातार बढ़ रही है। सीमित संसाधनों में आम नागरिकों की मूलभूत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कम लागत या प्रतीकात्मक शुल्क पर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

चाहे गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह सीजन में मेहंदी की व्यवस्था हो, कम लागत में चश्मा उपलब्ध कराना हो, सामाजिक आयोजनों के लिए पेयजल सहायता हो, दिव्यांगजनों के लिए कृत्रिम अंग और तीन पहिया साइकिल की व्यवस्था हो अथवा विभिन्न वर्गों के लिए सहयोगात्मक योजनाएं—इन पहलों ने राजनीति में जनसहभागिता के एक नए मॉडल की चर्चा शुरू की है।

इन प्रयासों का प्रभाव केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे यह संदेश भी गया है कि जनप्रतिनिधि यदि इच्छाशक्ति रखे तो सामाजिक सहयोग और प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से कई सकारात्मक पहलें संभव हैं।

जनता की अपेक्षाएं अब और बढ़ चुकी हैं

यही कारण है कि एक क्षेत्र में दिखाई देने वाले सकारात्मक प्रयास अन्य क्षेत्रों के लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बनते हैं। स्वाभाविक रूप से नागरिक अपने क्षेत्र के विधायक, सांसद, मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी ऐसी ही सक्रियता और नवाचार की अपेक्षा करने लगते हैं।

दुर्ग जिले में भी विभिन्न राजनीतिक पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों से जनता की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। नागरिक यह चाहते हैं कि विकास कार्यों के साथ-साथ ऐसे जनहितकारी प्रयास भी दिखाई दें जो सीधे आम व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करें। सड़क, भवन और अधोसंरचना विकास आवश्यक हैं, लेकिन आम परिवार के दैनिक जीवन में राहत पहुंचाने वाली पहलें लोगों के मन में स्थायी स्थान बनाती हैं।

पद बड़ा नहीं, प्रभाव बड़ा होना चाहिए

राजनीति में पद और अधिकार महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन जनता अंततः उस कार्य को याद रखती है जिसका सीधा लाभ उसे मिला हो। इतिहास गवाह है कि अनेक जनप्रतिनिधि अपने पद के कारण नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण और जनहितकारी कार्यों के कारण लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बने रहते हैं।

आज आवश्यकता इस बात की है कि जनप्रतिनिधि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ स्थानीय आवश्यकताओं को समझें, समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित करें और ऐसे नवाचारों को बढ़ावा दें जो आम नागरिक के जीवन को सरल और सम्मानजनक बना सकें।

लोकतंत्र की असली शक्ति जनता की उम्मीदों में है

वर्तमान दौर की राजनीति में जनता केवल प्रतिनिधित्व नहीं चाहती, बल्कि सहभागिता और संवेदनशीलता भी चाहती है। नागरिक ऐसे जनप्रतिनिधियों की तलाश में हैं जो उनके सुख-दुख में सहभागी बनें, समस्याओं को सुनें और समाधान के लिए निरंतर प्रयास करें।

दुर्ग से लेकर प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों तक एक संदेश स्पष्ट दिखाई दे रहा है—जनता अब उन नेताओं को अधिक महत्व दे रही है जो सत्ता के केंद्र में नहीं, बल्कि समाज के बीच दिखाई देते हैं। राजनीति का भविष्य भी संभवतः उसी दिशा में आगे बढ़ेगा जहां जनप्रतिनिधि अपने पद की शक्ति से अधिक अपनी जनसेवा की पहचान से जाने जाएंगे।

नई दिल्ली:

इतिहास की घड़ी में कुछ तारीखें ऐसी होती हैं, जो सिर्फ दिन बदलने के लिए नहीं, बल्कि नए युग की शुरुआत के लिए जानी जाती हैं। 2 जून भी भारतीय इतिहास का एक ऐसा ही ऐतिहासिक पड़ाव है। आज ही के दिन देश के नक्शे में दो बड़े बदलावों की नींव रखी गई थी—एक जिसने देश को विभाजन का दर्द दिया, और दूसरा जिसने एक नए राज्य के उदय की खुशी दी।

आइए नज़र डालते हैं 2 जून की उन दो सबसे प्रमुख राजनीतिक घटनाओं पर, जिन्होंने भारत के मानचित्र और राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया:

1. माउंटबेटन योजना (1947): जब तय हुआ अखंड भारत के विभाजन का खाका

"2 जून 1947 को ब्रिटिश हुकूमत ने भारत के विभाजन की उस ऐतिहासिक योजना को सामने रखा, जिसने देश की तकदीर और भूगोल दोनों को बांट दिया।"

साल 1947 में आज ही के दिन भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने देश के विभाजन की आधिकारिक योजना प्रस्तुत की थी, जिसे इतिहास में 'माउंटबेटन योजना' (या 3 जून प्लान की पूर्व संध्या) के नाम से जाना जाता है। इस घोषणा ने यह साफ कर दिया था कि सदियों पुराना अखंड भारत अब दो स्वायत्त देशों—भारत और पाकिस्तान—में विभाजित होने जा रहा है। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने न केवल सत्ता के हस्तांतरण का रास्ता साफ किया, बल्कि आधुनिक भारत के इतिहास की सबसे दर्दनाक विस्थापन की कहानी भी लिखी।

2. तेलंगाना का उदय (2014): भारत के मानचित्र पर चमका 29वां राज्य

"लंबे संघर्ष और आंदोलन के बाद, 2 जून 2014 को आंध्र प्रदेश का पुनर्गठन हुआ और तेलंगाना आधिकारिक तौर पर भारत का नया राज्य बना।"

ठीक 12 साल पहले, 2 जून 2014 को भारतीय लोकतंत्र ने एक नया इतिहास रचा। संसद द्वारा 'आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक' पारित होने के बाद, इस दिन तेलंगाना विधिवत रूप से भारत के 29वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

एक नए युग की शुरुआत: राज्य के गठन के साथ ही, आंदोलन के मुख्य सूत्रधार के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने नए राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और हैदराबाद को अगले 10 वर्षों के लिए दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी घोषित किया गया।

सांस्कृतिक अस्मिता की जीत: तेलंगाना का गठन केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं था, बल्कि यह दशकों पुराने जन-आंदोलन और क्षेत्रीय अस्मिता की एक बड़ी जीत थी।

निष्कर्ष: बदलाव का साक्षी है यह दिन

2 जून की तारीख भारतीय इतिहास में दो विपरीत छोरों को जोड़ती है। जहाँ 1947 का 2 जून विभाजन की त्रासदी का संकेत था, वहीं 2014 का 2 जून लोकतांत्रिक तरीके से जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने और नए राज्य के निर्माण का उत्सव था। भारत की राजनीतिक यात्रा को समझने के लिए यह दिन हमेशा बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।

शौर्यपथ राशिफल। 

आज बुधवार का दिन ग्रहों की विशेष चाल के कारण सभी 12 राशियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण और मिला-जुला रहने वाला है। आज के दिन जहाँ मेष राशि के जातकों को सितारों का भरपूर साथ मिलेगा और नौकरी में तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे, वहीं वृश्चिक और मकर राशि वाले जातकों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। इन राशियों को लंबे समय से फंसा हुआ धन वापस मिल सकता है।

सभी 12 राशियों का विस्तृत और सटीक दैनिक राशिफल नीचे दिया गया है:

मेष (Aries)

मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन भाग्यशाली रहने वाला है। नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रमोशन (पदोन्नति) की प्रबल संभावना बनी हुई है और कार्यक्षेत्र में आपके सितारों का पूरा साथ मिलेगा। इसके साथ ही आपके पुराने चल रहे विवाद या झगड़े सुलझ सकते हैं। हालांकि, किसी भी बड़े काम को शुरू करने से पहले अच्छी तरह से सोच-विचार अवश्य कर लें।

वृषभ (Taurus)

वृषभ राशि वालों के लिए आज का दिन प्रगतिशील रहेगा। पिछले काफी समय से रुके हुए या अटके हुए कार्यों में पुनः कार्यवाही शुरू हो जाएगी। विशेषकर फैशन, डिजाइनिंग और कला के क्षेत्र से जुड़े लोगों को आज करियर में कोई बेहतरीन और बड़ा अवसर प्राप्त हो सकता है।

मिथुन (Gemini)

मिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन आर्थिक रूप से मजबूती लाने वाला है। आज आपके द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण आर्थिक फैसले भविष्य में बेहद फायदेमंद साबित होंगे। इसके अलावा, मार्केटिंग और सेल्स से जुड़े लोगों के काम आज तेजी से रफ्तार पकड़ेंगे।

कर्क (Cancer)

कर्क राशि के जातकों को आज पैसों के मामले में थोड़ा धैर्य रखना होगा। यदि आपकी कोई पेमेंट या पैसा कहीं अटका हुआ है, तो उसे निकालने के लिए आपको आज अतिरिक्त प्रयास या भागदौड़ करनी पड़ सकती है। फाइनेंस और मार्केटिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आज अपने लक्ष्यों (Targets) को प्राप्त करने का सही दिन है।

सिंह (Leo)

सिंह राशि के जातकों के लिए आज का दिन व्यापारिक उन्नति लेकर आया है। बिजनेस में आज किसी नए और बड़े समझौते या सौदों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन काफी प्रगतिशील और लाभ कमाने वाला रहेगा।

कन्या (Virgo)

कन्या राशि के जातकों को आज के दिन थोड़ा संभलकर रहने की सलाह दी जाती है। कार्यस्थल या घर में बातचीत के दौरान अपनी वाणी पर संयम रखना बेहद आवश्यक है। किसी भी कार्य को जल्दबाजी या हड़बड़ाहट में करने से बचें और अपने स्वास्थ्य व सेहत का विशेष ख्याल रखें।

तुला (Libra)

तुला राशि वालों के लिए आज का दिन सफलताओं से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपको अपने सीनियर और सहकर्मियों का साथ मिलेगा, जिससे सफलता के मार्ग खुलेंगे। जो लोग विदेश जाने या विदेश से जुड़े व्यापार की कोशिशों में लगे हैं, उन्हें आज कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।

वृश्चिक (Scorpio)

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए आज का दिन आर्थिक राहत लेकर आएगा। लंबे समय से अटका हुआ या डूबा हुआ पैसा आज अचानक प्राप्त हो सकता है, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति पहले से काफी ज्यादा मजबूत और बेहतर बनेगी।

धनु (Sagittarius)

धनु राशि वाले जातकों के करियर के लिए आज का दिन शानदार अवसर लेकर आया है। नौकरीपेशा हो या कारोबारी, आज आपको कार्यक्षेत्र या बिजनेस में कोई नया और अत्यधिक लाभदायक ऑफर मिल सकता है, जो आपके भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

मकर (Capricorn)

मकर राशि के जातकों के लिए आज का दिन मनमुताबिक परिणाम देने वाला है। व्यापार में रुकी हुई पुरानी पेमेंट प्राप्त होने से मन प्रसन्न रहेगा। इसके साथ ही आज आपको अपनी पसंद का कोई बड़ा प्रोजेक्ट या नया ऑर्डर मिलने की पूरी संभावना बनी हुई है।

कुंभ (Aquarius)

कुंभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन पारिवारिक खुशियां लेकर आएगा। आज आपको हर कार्य में अपने परिवार का भरपूर सहयोग और स्नेह मिलेगा। इसके साथ ही घर-परिवार या रिश्तेदारों की तरफ से कोई बेहद अच्छी और सुखद खबर सुनने को मिल सकती है।

मीन (Pisces)

मीन राशि के जातक आज मानसिक रूप से काफी शांत और तनावमुक्त अनुभव करेंगे। पैसों के लेन-देन या धन निवेश (Investment) के मामले में आज का दिन सामान्य रहने वाला है। हालांकि, कहीं भी पैसा लगाने से पहले बाजार की स्थिति को अच्छे से समझ लें और सोच-समझकर ही कदम बढ़ाएं।

विस्थापन के नाम पर आवंटन, फिर किराए और बिक्री का खेल! बाजार विभाग को सब पता, फिर भी कार्रवाई शून्य
दुर्ग नगर निगम का गुमटी आवंटन मामला: भ्रष्टाचार की फाइलों में दबा सच या कार्रवाई से बचते जिम्मेदार?
दुर्ग / शौर्यपथ विशेष /
दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल के दौरान जिला अस्पताल परिसर के सामने और चर्चगेट मार्ग पर एनयूएलएम विभाग के माध्यम से गुमटियों का आवंटन किया गया था। उस समय इसे स्ट्रीट वेंडरों के पुनर्वास और शहर की यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया था। मगर आज वही योजना गंभीर सवालों के घेरे में खड़ी दिखाई दे रही है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि गुमटी आवंटन के दौरान लाखों रुपये के कथित लेनदेन का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड आखिर निगम प्रशासन के पास क्यों नहीं है? यदि राशि ली गई थी तो वह किस मद में जमा हुई, किस खाते में गई और उसका लेखा-जोखा कहां है? यह सवाल आज भी जवाब मांग रहा है।
विस्थापन के नाम पर दुकान, फिर किराए और बिक्री का खेल
शासन की मंशा स्पष्ट थी कि जिन स्ट्रीट वेंडरों को पुनर्वास के तहत गुमटी दी जाए, वे स्वयं उसका संचालन करें ताकि सड़क किनारे अतिक्रमण कम हो और यातायात व्यवस्था बेहतर बने। मगर वर्तमान स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आती है।
कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां गुमटी आवंटन प्राप्त करने वाले व्यक्ति आज भी सड़कों पर व्यवसाय कर रहे हैं, जबकि आवंटित गुमटियां किराए पर चल रही हैं या कथित रूप से बेची जा चुकी हैं। यदि ऐसा है तो यह योजना की मूल भावना के साथ सीधा खिलवाड़ नहीं तो और क्या है?
जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि नगर निगम के बाजार विभाग को इन शिकायतों और दस्तावेजों की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती।
बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा और बाजार प्रभारी शेखर चंद्राकर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि दस्तावेज सामने आने के बाद भी जांच या निरस्तीकरण जैसी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
जिम्मेदारी पिछली सरकार की या वर्तमान प्रशासन की?
इस मामले पर चर्चा के दौरान बाजार प्रभारी द्वारा जिम्मेदारी पूर्ववर्ती सरकार पर डाले जाने की बात सामने आई। लेकिन सवाल यह है कि यदि भ्रष्टाचार पूर्व सरकार के समय हुआ था, तो वर्तमान व्यवस्था का दायित्व क्या है?
आखिर जनता ने नई शहरी सरकार को इसलिए चुना था कि पुरानी व्यवस्थाओं की खामियां दूर हों, न कि उन्हें फाइलों में दबाकर छोड़ दिया जाए।
महापौर और आयुक्त के सामने बड़ी चुनौती
शहर की प्रथम नागरिक महापौर अलका बाघमार लगातार विकास कार्यों और नई परियोजनाओं की बात करती रही हैं। वहीं निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन के पक्षधर माने जाते हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या गुमटी आवंटन से जुड़े दस्तावेजों और आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? क्या अवैध रूप से किराए पर दी गई अथवा बेची गई गुमटियों के आवंटन निरस्त होंगे? और क्या लाखों रुपये के कथित लेनदेन की जांच होगी?
शौर्यपथ का सवाल
यदि दस्तावेज मौजूद हैं, यदि अनियमितताओं की जानकारी अधिकारियों को है, यदि नियमों का उल्लंघन स्पष्ट दिखाई दे रहा है, तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों?
दुर्ग की जनता जानना चाहती है कि आखिर गुमटी आवंटन योजना गरीब और जरूरतमंद स्ट्रीट वेंडरों के पुनर्वास के लिए थी या फिर कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया बन गई?
अब निगाहें महापौर, आयुक्त और नगर निगम प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह है कि यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह धूल खाता रहेगा या फिर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर वास्तव में कोई कठोर कार्रवाई होगी।
कटाक्ष
"विकास के दावे बुलंद हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या भ्रष्टाचार की फाइलें भी विकास की चमक में कहीं दब तो नहीं गईं?"

  रायपुर / शौर्यपथ / कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल बन रही हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है। सूरजपुर जिले के पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम की शांत जलराशि पर दौड़ती नावें अब केवल पर्यटकों को सैर नहीं करातीं, बल्कि महिलाओं के संघर्ष, साहस और सफलता की कहानी भी सुनाती हैं।
यह कहानी है मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसलों को पतवार बनाकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की। समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सिंह और सचिव श्रीमती यशोदा दास के नेतृत्व में 10 महिलाओं ने पर्यटन क्षेत्र में कदम रखा और बोटिंग गतिविधि शुरू कर अपनी पहचान बना ली।
शुरुआत आसान नहीं थी। संसाधनों की कमी, तकनीकी जानकारी का अभाव और संचालन से जुड़ी अनेक चुनौतियां सामने थीं। लेकिन इन महिलाओं ने हार मानने के बजाय चुनौतियों को अवसर में बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने बोटिंग संचालन, सुरक्षा प्रबंधन और पर्यटकों की सुविधाओं की जिम्मेदारी स्वयं संभाली और धीरे-धीरे अपने प्रयासों को सफलता में बदल दिया।
आज पिलखा डैम आने वाले पर्यटक उत्साह के साथ बोटिंग का आनंद लेते हैं। इस पहल से समूह ने अब तक 74 हजार रुपये की आय अर्जित की है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
समूह की सदस्य बताती हैं कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे पर्यटन गतिविधियों का संचालन करेंगी और स्वयं रोजगार सृजित करेंगी। आज वे अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह सफलता दर्शाती है कि अवसर और विश्वास मिलने पर ग्रामीण महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। पिलखा डैम की लहरों पर चल रही यह नाव अब केवल पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त पहचान बन चुकी है।

  रायपुर / शौर्यपथ / सुशासन एवं अभिसरण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आज मंत्रालय (महानदी भवन) नवा रायपुर में सीएम हेल्पलाइन (1076) के विभागीय नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में शासन के सभी विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण पर जोर

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव श्री राहुल भगत ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन आम नागरिकों तक सुशासन पहुँचाने का सबसे सशक्त और सुलभ माध्यम है। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आम जनता की शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु

अधिकारियों को आधुनिक शिकायत प्रबंधन प्रणाली (Grievance Redressal System) के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई। शिकायतों का समय पर निराकरण न होने की स्थिति में उन्हें प्रक्रिया, एल-1 से एल-4 स्तर तक स्वचालित रूप से ट्रांसफर करने की तकनीकी प्रक्रिया समझाई गई। नागरिकों से उनकी संतुष्टि का फीडबैक लेने की पारदर्शी प्रक्रिया के बारे में बताया गया।

इन माध्यमों से दर्ज होगी शिकायत

सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव श्री मयंक अग्रवाल ने बताया कि इस सिस्टम से शिकायत निवारण दर और नागरिक संतुष्टि दोनों में तेजी से सुधार आएगा। आगामी लॉन्चिंग के बाद नागरिक टोल-फ्री नंबर 1076 पर कॉल करके, वेब पोर्टल, समर्पित मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी शिकायतें सीधे दर्ज करा सकेंगे।

“Month of Solar” अभियान में बेहतर प्रदर्शन के लिए मिलेगा पीएम सूर्यघर एक्सीलेंस अवार्ड
मध्यम उपभोक्ता आधार वाले राज्यों की श्रेणी में सर्वाधिक वेंडर रजिस्ट्रेशन में देश में दूसरा स्थान

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर : मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत आयोजित “Month of Solar” अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना राज्य के लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और जनहितकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मध्यम उपभोक्ता आधार वाले राज्यों की श्रेणी में सर्वाधिक वेंडर रजिस्ट्रेशन के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है, जिसके लिए राज्य का चयन पीएम सूर्यघर एक्सीलेंस अवार्ड हेतु किया गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की सक्रियता, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनसहभागिता का सकारात्मक परिणाम है।
मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए ऊर्जा विभाग, क्रेडा, विद्युत वितरण कंपनियों, सभी अधिकारियों, कर्मचारियों तथा सहयोगी संस्थाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि टीमवर्क, प्रतिबद्धता और बेहतर समन्वय के कारण छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भर, पर्यावरण अनुकूल और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले ऐसे प्रयास प्रदेश के नागरिकों को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ स्वच्छ एवं सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने हितग्राहियों को वितरित किए विभिन्न योजनाओं के लाभ: ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद
सुशासन का संदेश लेकर गांव-गांव पहुंच रही सरकार, योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने स्वयं पहुंचे मुख्यमंत्री

रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं, योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति जानी तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी जरूरतमंद को अपने अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। इसी भावना के साथ सरकार स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके समाधान का प्रयास कर रही है।
जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया तथा हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम कार्ड, किसान हितग्राही योजनाओं सहित विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ वितरित किए। उन्होंने लाभार्थियों से चर्चा कर योजनाओं के प्रभाव और उनके अनुभवों की जानकारी भी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचे और आमजन को शासन की संवेदनशीलता का अनुभव हो।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में विकास की नई धारा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन लोगों के द्वार तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है, बल्कि शासन के प्रति आमजन का विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर बना आधुनिक बेली ब्रिज: कनेक्टिविटी और विकास को मिली नई गति

 जहां कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां विकास की राह में चुनौती बनती थीं, वहां आज आधुनिक अधोसंरचना नए अवसरों के द्वार खोल रही है।

     रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचकर बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज का निरीक्षण किया। उन्होंने पुल की निर्माण तकनीक, उपयोगिता और क्षेत्र के विकास में उसकी भूमिका की जानकारी लेते हुए इसे बदलते बस्तर की नई तस्वीर का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि वे दूरस्थ क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाले मजबूत माध्यम हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक हो।

कम समय, कम लागत और अधिक मजबूती की तकनीक
भारतीय सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बेली ब्रिज पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक किफायती, मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इनका निर्माण सामान्य पुलों की अपेक्षा लगभग पांच गुना कम लागत में किया जा सकता है तथा इन्हें मात्र एक माह के भीतर तैयार किया जा सकता है। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए यह तकनीक अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।

बीजापुर में 21 बेली ब्रिज बने विकास के वाहक
उल्लेखनीय है कि बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण किया जा चुका है। इन पुलों के निर्माण से दूरस्थ गांवों तक आवागमन सुगम हुआ है तथा लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में बड़ी राहत मिली है। इन संरचनाओं ने क्षेत्र में विकास और जनसेवाओं के विस्तार को नई गति प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के श्रमिक और युवा ही विकास यात्रा के वास्तविक निर्माणकर्ता हैं। उन्होंने श्रमिकों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके अनुभव भी साझा किए।

बदलते बस्तर की नई पहचान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में अधोसंरचना विकास के माध्यम से नई संभावनाओं का निर्माण हो रहा है। कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सुशासन का सशक्त प्रतीक है। यह उस नए बस्तर की पहचान है, जहां विकास अब दूरस्थ गांवों और दुर्गम अंचलों तक मजबूती से पहुंच रहा है तथा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पुनर्वास नीति का असर, आत्मसमर्पित दंपत्ति की किराना दुकान बनी विकसित छत्तीसगढ़ की नई पहचान

रायपुर/बीजापुर / शौर्यपथ /
कभी शासन व्यवस्था के खिलाफ हथियार उठाने वाले हाथ आज मेहनत और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुके हैं। जिन आंखों में कभी व्यवस्था के प्रति अविश्वास और संघर्ष की छाया थी, उन्हीं आंखों में अब सम्मानजनक जीवन, रोजगार और बेहतर भविष्य के सपने दिखाई दे रहे हैं। बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल स्थित कोण्डापल्ली गांव में सोमवार को देखने को मिला यह दृश्य केवल एक भावनात्मक क्षण नहीं था, बल्कि बदलते बस्तर और विकसित छत्तीसगढ़ की उस सोच का जीवंत प्रमाण था जिसे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार धरातल पर साकार करने का दावा करती रही है।
प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जब कोण्डापल्ली में आयोजित चौपाल के लिए जा रहे थे, तभी उनका काफिला अचानक एक छोटी-सी किराना दुकान के सामने रुक गया। बाहर से सामान्य दिखने वाली इस दुकान के भीतर संघर्ष, परिवर्तन और पुनर्वास की एक ऐसी कहानी मौजूद थी, जिसने मुख्यमंत्री को भी प्रभावित कर दिया।
यह दुकान आत्मसमर्पित दंपत्ति मासा तामो और जयमोती की थी, जिन्होंने कभी नक्सल संगठन का हिस्सा रहते हुए वर्षों तक जंगलों में जीवन बिताया था। आज वही दंपत्ति मुख्यधारा में लौटकर स्वरोजगार के माध्यम से सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने खरीदी पानी की बोतल, बढ़ाया आत्मविश्वास
मुख्यमंत्री दुकान के भीतर पहुंचे और दोनों से आत्मीयता के साथ बातचीत की। उन्होंने उनके संघर्ष, आत्मसमर्पण और वर्तमान जीवन के बारे में जानकारी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री ने दुकान से पानी की बोतल खरीदी और कहा कि आत्मनिर्भरता ही नए जीवन की सबसे बड़ी पहचान है।
यह दृश्य प्रतीकात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था। यह केवल एक ग्राहक और दुकानदार का संवाद नहीं था, बल्कि शासन और समाज के बीच विश्वास की उस नई डोर का प्रतीक था जो वर्षों के संघर्ष के बाद बस्तर में मजबूत होती दिखाई दे रही है।

बंदूक से रोजगार तक का कठिन सफर
मासा तामो का जीवन बचपन से ही कठिनाइयों से भरा रहा। कम उम्र में पिता का निधन हो गया और आर्थिक अभावों के कारण शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके। वर्ष 2007 में परिस्थितियों के दबाव में वह नक्सली संगठन से जुड़ गए।
दूसरी ओर जयमोती का जीवन भी संघर्षों से अछूता नहीं रहा। बचपन में माता-पिता को खोने के बाद जीवन की विषम परिस्थितियों ने उन्हें भी उसी राह पर पहुंचा दिया। संगठन में दोनों की मुलाकात हुई और वर्ष 2021 में उन्होंने विवाह किया।
समय के साथ दोनों ने महसूस किया कि हिंसा का रास्ता न तो उनके जीवन को बेहतर बना सकता है और न ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित कर सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने अक्टूबर 2025 में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।

पुनर्वास केंद्र ने बदली जिंदगी की दिशा
आत्मसमर्पण के बाद बीजापुर पुनर्वास केंद्र ने दोनों के जीवन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां उन्हें पहली बार अक्षर ज्ञान प्राप्त हुआ, कौशल विकास प्रशिक्षण मिला और विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ा गया।
शासन द्वारा उनके लिए राशन कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, बैंक खाता सहित आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग की सक्षम योजना के तहत जयमोती को एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ।
इसी सहायता के बल पर कोण्डापल्ली में एक छोटी-सी किराना दुकान की शुरुआत हुई, जो आज उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख आधार बन चुकी है।

अब हथियार नहीं, मेहनत और सम्मान है पहचान
मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान मासा और जयमोती ने बताया कि अब वे सामान्य नागरिकों की तरह सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं। दुकान से होने वाली आय से परिवार का खर्च चल रहा है और भविष्य को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। उन्होंने कहा कि कभी कल्पना भी नहीं की थी कि जीवन में ऐसा परिवर्तन आएगा, लेकिन सरकार की पुनर्वास नीति, प्रशासनिक सहयोग और समाज के विश्वास ने उन्हें नई पहचान और नया जीवन दिया है।

मुख्यमंत्री बोले— यह सिर्फ दो लोगों की कहानी नहीं, बदलते बस्तर की कहानी है
"मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मासा तामो और जयमोती की कहानी केवल दो व्यक्तियों के जीवन परिवर्तन की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे बस्तर के बदलते स्वरूप का प्रतिबिंब है।"
उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति को अवसर, विश्वास, सुरक्षा और सम्मान मिलता है तो वह हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सकता है। यही राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का उद्देश्य भी है।

संपादकीय दृष्टि: विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी तस्वीर
कोण्डापल्ली की यह छोटी-सी दुकान शायद आर्थिक दृष्टि से बहुत बड़ी न हो, लेकिन सामाजिक और मानवीय दृष्टि से यह विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी तस्वीरों में से एक है। यह वह परिवर्तन है जिसमें बंदूक की जगह रोजगार ने ली है, भय की जगह विश्वास ने और संघर्ष की जगह सम्मानजनक जीवन ने।
बस्तर में सड़क, बिजली, पानी और भवन निर्माण विकास के महत्वपूर्ण संकेतक हैं, लेकिन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी सफलता तब मानी जाती है जब हिंसा छोड़कर लोग स्वेच्छा से विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा में लौटें।
कोण्डापल्ली में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का एक छोटी-सी दुकान पर रुकना और वहां से पानी खरीदना केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि नया बस्तर अब बंदूक नहीं, व्यापार; संघर्ष नहीं, विश्वास; और अलगाव नहीं, विकास की भाषा बोल रहा है।

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