
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
सेहत / शौर्यपथ / पुदीना एक ऐसा पौधा है, जिसका उपयोग भारतीय रसोईघरों में मुख्य रूप से चटनी के रूप में किया जाता है। इसकी अनेक खूबियां हैं। यह भोजन को पचाने में तो कारगर है ही, पेट में होने वाले काफी रोगों के उपचार में भी उपयोगी साबित होता है। इसके अधिकतम लाभ के लिए कब, कैसे और कितने पुदीने का इस्तेमाल करना चाहिए, बता रही हैं प्राची गुप्ता
पुदीने में मेंथोल, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन-ए, रिबोफ्लेविन, कॉपर, आयरन आदि पाये जाते हैं। पुदीना के पत्तों का सेवन कर उल्टी को रोका जा सकता है और पेट की गैस को दूर किया जा सकता है। यह जमे हुए कफ को बाहर निकालता है। इसकी तासीर गर्म होने के कारण यह शरीर से पसीना निकालकर बुखार को दूर करता है। इसमें शरीर में किसी कीड़े के काटे जाने पर उसके जहर को नष्ट करने का भी गुण होता है।
बड़े काम की है पुदीने की चटनी
पुदीने की चटनी बड़े काम की होती है। पुदीने के साथ अनारदाना, हरा कच्चा टमाटर, नीबू, अदरक, हरी मिर्च, सेंधा नामक, काली मिर्च, अजवाइन को मिलाकर इसकी चटनी बनाई जाती है। इसका सेवन पेट के लिए काफी फायदेमंद होता है।
पेट के रोगों को करे दूर
पेट से जुड़ी सभी तरह की समस्या को दूर करने के लिए पुदीने को सबसे अच्छा माना गया है। आजकल खान-पान की वजह से पेट में तरह-तरह की तकलीफें हो जाती हैं। एक चम्मच पुदीने के रस में एक कप गुनगुना पानी और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से पेट के रोगों में आराम मिलता है। जंक फूड खाने या मसालेदार खाना खाने से बदहजमी हो जाती है और पेट में दर्द होने लगता है। पुदीने को उबालकर इसमें शहद मिलाकर सेवन करने से पेट की समस्या दूर होती है।
उल्टी से राहत दिलाए
उल्टी रोकने के लिए पुदीना का सेवन लाभकारी साबित होता है। इसके लिए पुदीने के पत्तों में दो बूंद शहद मिलाकर पीना चाहिए।
’पुदीने के पत्तों की लुग्दी बनाकर इसे हल्का गर्म करके किसी भी तरह के जख्म या किसी कीड़े के काटने वाले स्थान पर रखने से जख्म व कीड़े का काटा ठीक होता है, साथ ही उसका दर्द और सूजन भी ठीक हो जाती है।
’पुदीने का रस काली मिर्च और काले नमक के साथ चाय की तरह उबालकर पीने से जुकाम, खांसी और बुखार में राहत मिलती है। सिर दर्द में ताजी पत्तियों का लेप माथे पर लगाने से आराम
मिलता है।
’हैजा रोग से पीड़ित व्यक्ति को पुदीना के रस के साथ प्याज के रस में नीबू और सेंधा नमक मिलाकर सेवन करना चाहिए, लाभ होता है।
’पुदीने की पत्ती और तुलसी की पत्ती के रस में दो बूंद शहद मिलाकर पीने से लगातार आ रही हिचकियां तुरंत बंद हो जाती हैं।
’पुदीने की पत्तियों को सुखाकर बनाए गए चूर्ण को मंजन की तरह प्रयोग करने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है और मसूढ़े मजबूत होते हैं।
’पुदीने के रस को नमक के पानी के साथ मिलाकर कुल्ला करने से गले का भारीपन दूर होता है और आवाज साफ होती है।
’प्यास अधिक लगने पर नीबू का शर्बत बनाकर इसमें पुदीने के पत्तों का रस मिलाकर पीने से प्यास बार-बार नहीं लगती, शरीर में पानी की कमी भी नहीं
हो पाती।
बरतें सावधानी
पुदीने के पत्तों का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका अधिक सेवन गुर्दे और आंतों के लिए नुकसानदेह साबित होता है। अगर इसका अधिक सेवन किया गया है, तो उसे ठीक करने के लिए मुलेठी का सत्व और गोंद कतीरा मिलाकर सेवन करना चाहिए।
सेहत / शौर्यपथ / पुदीना एक ऐसा पौधा है, जिसका उपयोग भारतीय रसोईघरों में मुख्य रूप से चटनी के रूप में किया जाता है। इसकी अनेक खूबियां हैं। यह भोजन को पचाने में तो कारगर है ही, पेट में होने वाले काफी रोगों के उपचार में भी उपयोगी साबित होता है। इसके अधिकतम लाभ के लिए कब, कैसे और कितने पुदीने का इस्तेमाल करना चाहिए, बता रही हैं प्राची गुप्ता
पुदीने में मेंथोल, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन-ए, रिबोफ्लेविन, कॉपर, आयरन आदि पाये जाते हैं। पुदीना के पत्तों का सेवन कर उल्टी को रोका जा सकता है और पेट की गैस को दूर किया जा सकता है। यह जमे हुए कफ को बाहर निकालता है। इसकी तासीर गर्म होने के कारण यह शरीर से पसीना निकालकर बुखार को दूर करता है। इसमें शरीर में किसी कीड़े के काटे जाने पर उसके जहर को नष्ट करने का भी गुण होता है।
बड़े काम की है पुदीने की चटनी
पुदीने की चटनी बड़े काम की होती है। पुदीने के साथ अनारदाना, हरा कच्चा टमाटर, नीबू, अदरक, हरी मिर्च, सेंधा नामक, काली मिर्च, अजवाइन को मिलाकर इसकी चटनी बनाई जाती है। इसका सेवन पेट के लिए काफी फायदेमंद होता है।
पेट के रोगों को करे दूर
पेट से जुड़ी सभी तरह की समस्या को दूर करने के लिए पुदीने को सबसे अच्छा माना गया है। आजकल खान-पान की वजह से पेट में तरह-तरह की तकलीफें हो जाती हैं। एक चम्मच पुदीने के रस में एक कप गुनगुना पानी और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से पेट के रोगों में आराम मिलता है। जंक फूड खाने या मसालेदार खाना खाने से बदहजमी हो जाती है और पेट में दर्द होने लगता है। पुदीने को उबालकर इसमें शहद मिलाकर सेवन करने से पेट की समस्या दूर होती है।
उल्टी से राहत दिलाए
उल्टी रोकने के लिए पुदीना का सेवन लाभकारी साबित होता है। इसके लिए पुदीने के पत्तों में दो बूंद शहद मिलाकर पीना चाहिए।
’पुदीने के पत्तों की लुग्दी बनाकर इसे हल्का गर्म करके किसी भी तरह के जख्म या किसी कीड़े के काटने वाले स्थान पर रखने से जख्म व कीड़े का काटा ठीक होता है, साथ ही उसका दर्द और सूजन भी ठीक हो जाती है।
’पुदीने का रस काली मिर्च और काले नमक के साथ चाय की तरह उबालकर पीने से जुकाम, खांसी और बुखार में राहत मिलती है। सिर दर्द में ताजी पत्तियों का लेप माथे पर लगाने से आराम
मिलता है।
’हैजा रोग से पीड़ित व्यक्ति को पुदीना के रस के साथ प्याज के रस में नीबू और सेंधा नमक मिलाकर सेवन करना चाहिए, लाभ होता है।
’पुदीने की पत्ती और तुलसी की पत्ती के रस में दो बूंद शहद मिलाकर पीने से लगातार आ रही हिचकियां तुरंत बंद हो जाती हैं।
’पुदीने की पत्तियों को सुखाकर बनाए गए चूर्ण को मंजन की तरह प्रयोग करने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है और मसूढ़े मजबूत होते हैं।
’पुदीने के रस को नमक के पानी के साथ मिलाकर कुल्ला करने से गले का भारीपन दूर होता है और आवाज साफ होती है।
’प्यास अधिक लगने पर नीबू का शर्बत बनाकर इसमें पुदीने के पत्तों का रस मिलाकर पीने से प्यास बार-बार नहीं लगती, शरीर में पानी की कमी भी नहीं
हो पाती।
बरतें सावधानी
पुदीने के पत्तों का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका अधिक सेवन गुर्दे और आंतों के लिए नुकसानदेह साबित होता है। अगर इसका अधिक सेवन किया गया है, तो उसे ठीक करने के लिए मुलेठी का सत्व और गोंद कतीरा मिलाकर सेवन करना चाहिए।
सेहत / शौर्यपथ / भारत में लगातार कोरोना वायरस का खतरा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों द्वारा सलाह दी जा रही है कि कोरोना वायरस से लड़ने में हमारी इम्यूनिटी यानी बीमारियों से लड़ने की ताकत मजबूत होगी, तभी इस वायरस से बच पाएंगे। गौर करने वाली बात यह है कि घर में रखी हुई कई चीजों में विटामिन 'सी' पाया जाता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सक्षम होता है। वैसे भी खट्टी चीजों में भरपूर विटामिन 'सी' होता है और घर में रखी खट्टी-मीठी इमली तो सभी को पसंद है। इमली कई गुणों से भरपूर भी होती है।
डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला के अनुसार, इसमे विटामिन 'सी' के अलावा विटामिन ए, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, पोटेशियम, मैंग्नीज और फायबर जैसे कई तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। अक्सर बड़े बुजुर्ग भी इमली खाने की सलाह देते हैं। तो आइए जानते हैं इमली खाने के क्या-क्या फायदे होते हैं -
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है इमली
इमली में विटामिन 'सी' के अलावा यह एंटीऑक्सिडेंट तत्वों से भरपूर होती है। इमली प्रतिरक्षा प्रणाली को तो मजबूत बनाती ही है, साथ ही यह किसी भी प्रकार के संक्रमण को विकसित होने से रोकती है। एंटीसेप्टिक गुण घाव को जल्द ठीक करते हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ने में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाली इमली काफी मददगार साबित हो सकती है।
किडनी और लिवर के लिए फायदेमंद
इमली में मौजूद पॉलीफेनोल्स में एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण लिवर के लिए फायदेमंद होते हैं। इमली के बीज का अर्क पीने से लिवर की बीमारियां ठीक होती हैं। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण लिवर खराब होने से बचाते हैं। इसके सेवन से वजन भी कम होता है।
सर्दी जुकाम की समस्या से छुटकारा
इमली में थियामिन और राइबोफ्लेविन तत्व पाया जाता है, जो सर्दी-जुकाम को ठीक करने में मदद करता है। इसके लिए एक बर्तन में एक गिलास पानी उबालें और ताजी कटी हुई आधा कप इमली की पत्तियां डालें, अब यदि चाहें तो स्वाद के लिए थोड़ा सा नींबू, थोड़ा शहद और इलाइची भी डाल सकते हैं। इस मिश्रण को पीने से खांसी, जुकाम और गले की समस्या ठीक हो जाती है। डॉ. अजय मोहन के अनुसार, सर्दी, जुकाम और खांसी ही कोरोना वायरस के प्रमुख लक्षण हैं।
दिल के रोगियों के लिए फायदेमंद
इमली के एंटीऑक्सीडेंट गुण दिल के लिए फायदेमंद होते हैं। इमली में मौजूद फ्लेवोनोइड जैसे पॉलीफेनोल्स गुण दिल को सभी बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। इसके नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल का लेवल भी नियंत्रित होता है। इमली में कुछ ऐसे यौगिक तत्व होते हैं, जो दिल की कोशिकाओं को मजबूत बनाते हैं।
आंखों के लिए भी गुणकारी है इमली
इमली में विटामिन 'ए' भी काफी मात्रा में पाया जाता है, जो आंखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। विटामिन ए का अधिक सेवन करने से आंखों का कार्निया सुरक्षित रहता है। इसके अलावा यह मैक्यूलर डिजनरेशन के विकास के जोखिम को भी कम करने में सहायक होता है। इमली के रस में पाए जाने वाले कई पोषक तत्व आंखों में होने वाले संक्रमण से बचाने में भी मदद करते हैं।
पाचन की मजबूती में सहायक
इमली में फाइबर भी भरपूर होता है, जिससे पाचन तंत्र ठीक होता है। यदि रोज एक इमली का सेवन किया जाए तो पाचन तंत्र मजबूत होगा और पेट की छोटी व बड़ी दोनों आंतें साफ रहेंगी। साथ ही इससे कब्ज, अपच, गैस, एसिडिटी जैसी पेट से संबंधित बीमारियां भी नहीं होगी।
सेहत / शौर्यपथ / वर्कआउट रूटीन में शरीर के बड़े मांसपेशी समूहों के लिए कई व्यायाम हैं। पर छोटी मांसपेशियां जैसे कि पैरों से जुड़े व्यायामों की अक्सर अनदेखी हो जाती है। हम तलवे की सेहत के बारे में तब तक गंभीरता से नहीं सोचते, जब तक इसमें दर्द न होने लगे। ये तीन व्यायाम करके आप पैर के तलवे के वक्रभाग को मजबूत बना सकते हैं और लिगमंट में सुधार ला सकते हैं।
गोल्फ बाल रोल
यह व्यायाम करने के लिए कुर्सी पर सीधे बैठ जाएं। फर्श पर गोल्फ गेंद रखें और तलवे का मध्यभाग उस गेंद पर रख दें। अब दो मिनट तक गेंद के ऊपर तलवे को चारों ओर घुमाएं। तलवे को इस तरह घुमाना है कि गेंद से उसकी मसाज होती रहे। इस दौरान सांस की गति सामान्य रखें। इसी व्यायाम को दूसरे पैर से भी दोहराएं।
लाभ: तलवे के लिगमंट में ताकत और खिंचाव लाने के लिए इस व्यायाम को रोज किया जा सकता है। इससे तलवे के वक्र भाग के दर्द में राहत मिलती है। हर दिन इसे करना लाभकारी होगा।
टिप-टो वॉक
उंगली और अंगूठे के बल चलने से तलवा मजबूत होता है और सपाट तलबे का असर भी कम करता है। पहली बार यह व्यायाम करने वाले लोग तीस से साठ सेकंड तक पंजे की उंगलियों के बल खड़े होने की कोशिश करें। फिर धीरे-धीरे आगे, पीछे और साइड में चलने की कोशिश करें। धीरे-धीरे उंगलियों और अंगूठे से चलने की क्षमता बढ़ाएं। जब तक आपके पैरों की ताकत नहीं बढ़ जाती, तब तक वर्कआउट के बीच एक दिन का अंतर रखें।
लाभ: पैर की उंगलियों, टखनों, घुटनों और जांघों के लचीलेपन में सुधार लाता है और मसल को मजबूत करता है।
रेंज ऑफ मोशन
जोर देकर अपने पैर और टखने को गति में घुमाने से तलवे मजबूत बनते हैं। यह व्यायाम करने के लिए अपने पैरों को लटकाकर ऊंची कुर्सी पर बैठ जाएं। अपने पैर की उंगलियों को नीचे की ओर इंगित करें और इस तरह घुमाएं कि आप अंग्रेजी वर्णमाला का हर अक्षर उनसे बना रहे हों। यह व्यायाम तेजी से करना है पर ध्यान रहे कि पैर लयबद्ध हो ताकि मांसपेशियों में अनावश्यक खिंचाव न आए। प्रत्येक पैर के साथ वर्णमाला के दो सेट करें।
लाभ: यह व्यायाम करने से आप टखने और पैर को उसकी अधिकतम गति से घुमा पाएंगे।
सेहत / शौर्यपथ / अपने नियमित कामकाज के लिए सदस्य देशों की मदद पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की निर्भरता समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए डब्ल्यूएचओ फाउंडेशन के नाम से बुधवार को एक नये संगठन की स्थापना की गयी। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. तेद्रोस गेब्रियेसस और डब्ल्यूएचओ फाउंडेशन के संस्थापक प्रो. थॉमस जेल्टनर ने कोविड-19 पर आयोजित नियमित प्रेस वातार् में इसकी घोषणा की। दोनों संगठनों के प्रमुखों ने एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये।
डॉ. तेद्रोस ने बताया कि कानूनी रूप से डब्ल्यूएचओ फाउंडेशन विश्व स्वास्थ्य संगठन से अलग संस्था है जो स्विटजरलैंड में पंजीकृत है। यहीं जिनेवा में डब्ल्यूएचओ का मुख्यालय भी है। वह डब्ल्यूएचओ के कामकाज के लिए गैर-पारंपरिक स्रोतों से पैसे जुटायेगा। ये पैसे आम लोगों और बड़े दानदाताओं से जुटाये जाएंगे। सहमति पत्र के जरिये दोनों संगठन एक-दूसरे से संबद्ध होंगे।
अमेरिका द्वारा पिछले दिनों डब्ल्यूएचओ को दी जाने वाली मदद रोकने के परिप्रेक्ष्य में डब्ल्यूएचओ फाउंडेशन की स्थापना महत्वपूर्ण है। इससे संयुक्त राष्ट्र के तहत काम करने वाला वैश्विक स्वास्थ्य संगठन अपने खर्चे और परियोजनाओं के लिए सदस्य देशों की मदद पर निर्भर नहीं रहेगा हालाँकि एक प्रश्न के उत्तर में डॉ. तेद्रोस ने नये फाउंडेशन की स्थापना और अमेरिकी मदद रोके जाने की घटना के बीच कोई संबंध होने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इसकी अवधारणा दो साल पहले तैयार हुई थी तथा इस दिशा में पिछले साल मार्च में ही काम शुरू हो गया था। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि फाउंडेशन से मिलने वाली राशि सदस्य देशों से मिलने वाली मदद के अतिरिक्त होगी। इससे नयी परियोजनाओं पर काम शुरू करने में मदद मिलेगी और इस प्रकार डब्ल्यूएचओ के कामकाज का दायरा बढ़ सकेगा। शुरुआत में फाउंडेशन द्वारा जुटाई गयी राशि का इस्तेमाल कोविड-19 महामारी से लड़ने में किया जायेगा।
खाना खजाना / शौर्यपथ / मूंग दाल प्रोटीन से भरपूर होती है. ऐसे में आपको मूंग दाल का किसी न किसी रूप में सेवन जरूर करना चाहिए। आज हम आपको बता रहे हैं मूंग दाल के कबाब बनाने की रेसिपी-
सामग्री :
धुली मूंग दाल- 1 कप
दही- 1 कप
घी- 2 चम्मच
जीरा- 1 चम्मच
नमक- 1 चम्मच
लाल मिर्च पाउडर- 1 चम्मच
गरम मसाला- 1/2 चम्मच
लहसुन पेस्ट- 1 चम्मच
घी- आवश्यकतानुसार
विधि :
दाल को तीन से चार घंटे के लिए पानी में भिगोएं। पानी से निकालकर एक ओर रख दें। कड़ाही में दो चम्मच घी गर्म करें और उसमें जीरा डालें। जब जीरा पक जाए तो कड़ाही में दाल डालें और उसे धीमी आंच पर लगभग पांच मिनट पकाएं। गैस ऑफ करें और दाल को ठंडा होने दें। दाल को ग्राइंडर में बिना पानी डालें पीस लें। उसमें नमक, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला और लहसुन डालकर मिलाएं। अब इस मिश्रण में दही मिलाकर गूंद लें। इस मिश्रण को 12 हिस्सों में बांटें और कबाब का आकार दें। पैन में घी गर्म करें और धीमी आंच पर कबाब को पकाएं। जरूरत के मुताबिक घी डालते हुए कबाब को पकाएं। धनिया पत्ती से सजा कर पेश करें।
खाना खजाना / शौर्यपथ / आपका मन अगर रोजाना गेंहू की रोटी खाने से भर गया है और किसी दूसरे ऑप्शन की तलाश में हैं, तो आप रुमाली रोटी ट्राई कर सकते हैं। इसे बनाना बहुत ही आसान है।
सामग्री :
1 कप गेहूं का आटा
आधा कप मैदा
2 चुटकी बेकिंग सोडा
आटा गूंथने के लिए दूध
मैदा
तेल रिफाइंड
विधि :
रुमाली रोटी बनाने के लिए सबसे पहले आटा में मैदा, नमक और एक चम्मच तेल या घी डालकर उसे दूध से गूथ लें। इसके बाद आटे को गीले कपड़े में रखकर 15 से 20 मिनट तक रखकर छोड़ दें। इसके बाद आटे की लोई बना लें और इसे बेलें इसे बेलने के बाद एक परत पर तेल लगाएं। इसके बाद इसमें मैदा छिड़कें इसके बाद एक और बनाई हुई पूड़ी उसके ऊपर रख दें और दोनों को मिलाकर बेलें। तवें पर हल्की आंच पर इन्हें सेकें। गरमागरम रोटियां तैयार हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / भगवान श्रीकृष्ण को पूर्णावतार माना जाता है। 64 कलाओं में दक्ष श्रीकृष्ण ने हर क्षेत्र में अपने व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है। वैसे तो भगवान श्रीकृष्ण के सैकड़ों रूप और रंग हैं लेकिन आओ हम जानते हैं कि उनके 13 रूप-
1. बाल कृष्ण : भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अद्भुत परिस्थितियों में हुआ और उनकी बाल लीलाओं पर हजारों किताबें लिखी जा चुकी हैं। श्रीमद्भागवत पुराण में उनकी बाल लीलाओं का वर्णन मिलता है। श्रीकृष्ण का बचपन गोकुल और वृंदावन में बीता। श्रीकृष्ण ने ताड़का, पूतना, शकटासुर आदि का बचपन में ही वध कर डाला था। बाल कृष्ण को 'माखन चोर' भी कहा जाता है।
2. गोपाल कृष्ण : भगवान श्रीकृष्ण एक ग्वाले थे और वे गाय चराने जाते थे इसीलिए उन्हें 'गोपाल' भी कहा जाता है। ग्वाले को गोप और गवालन को गोपी कहा जाता है। हालांकि यह शब्द अनेकार्थी है। पुराणों में गोपी-कृष्ण लीला का वर्णन मिलता है। इसमें गोप और गोपिकाएं डांडिया रास करते हैं।
3. रक्षक कृष्ण : भगवान श्रीकृष्ण ने किशोरावस्था में ही चाणूर और मुष्टिक जैसे खतरनाक मल्लों का वध किया था, साथ ही उन्होंने इंद्र के प्रकोप के चलते जब वृंदावन आदि ब्रज क्षेत्र में जलप्रलय हो चली थी, तब गोवर्धन पर्वत अपनी अंगुली पर उठाकर सभी ग्रामवासियों की रक्षा की थी।
4. शिष्य कृष्ण : भगवान श्रीकृष्ण के गुरु सांदीपनी थे। उनका आश्रम अवंतिका (उज्जैन) में था। कहते हैं कि उन्होंने जैन धर्म में 22वें तीर्थंकर नेमीनाथजी से भी ज्ञान ग्रहण किया था। श्रीकृष्ण गुरु दीक्षा में सांदीपनी के मृत पुत्र को यमराज से मुक्ति कराकर ले आए थे।
5. सखा कृष्ण : भगवान श्रीकृष्ण के हजारों सखा थे। सखा मतलब मित्र या दोस्त। श्रीकृष्ण के सखा सुदामा, श्रीदामा, मधुमंगल, सुबाहु, सुबल, भद्र, सुभद्र, मणिभद्र, भोज, तोककृष्ण, वरूथप, मधुकंड, विशाल, रसाल, मकरन्द, सदानन्द, चन्द्रहास, बकुल, शारद, बुद्धिप्रकाश, अर्जुन आदि थे। श्रीकृष्ण की सखियां भी हजारों थीं। राधा, ललिता आदि सहित कृष्ण की 8 सखियां थीं।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार सखियों के नाम इस तरह हैं- चन्द्रावली, श्यामा, शैव्या, पद्या, राधा, ललिता, विशाखा तथा भद्रा। कुछ जगह ये नाम इस प्रकार हैं- चित्रा, सुदेवी, ललिता, विशाखा, चम्पकलता, तुंगविद्या, इन्दुलेखा, रंगदेवी और सुदेवी। कुछ जगह पर ललिता, विशाखा, चम्पकलता, चित्रादेवी, तुंगविद्या, इन्दुलेखा, रंगदेवी और कृत्रिमा (मनेली)। इनमें से कुछ नामों में अंतर है। इसके अलावा भौमासुर से मुक्त कराई गईं सभी महिलाएं कृष्ण की सखियां थीं। द्रौपदी भी श्रीकृष्ण की सखी थीं।
6. प्रेमी कृष्ण : कृष्ण को चाहने वाली अनेक गोपियां और प्रेमिकाएं थीं। कृष्ण-भक्त कवियों ने अपने काव्य में गोपी-कृष्ण की रासलीला को प्रमुख स्थान दिया है। पुराणों में गोपी-कृष्ण के प्रेम संबंधों को आध्यात्मिक और अति श्रांगारिक रूप दिया गया है। महाभारत में यह आध्यात्मिक रूप नहीं मिलता, लेकिन पुराणों में मिलता है। उनकी प्रेमिका राधा, रुक्मिणी और ललिता की ज्यादा चर्चा होती है।
7. कर्मयोगी कृष्ण : गीता में कर्मयोग का बहुत महत्व है। कृष्ण ने जो भी कार्य किया, उसे अपना कर्म समझा, अपने कार्य की सिद्धि के लिए उन्होंने साम-दाम-दंड-भेद सभी का उपयोग किया, क्योंकि वे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पूर्ण जीते थे और पूरी जिम्मेदारी के साथ उसका पालन करते थे। न अतीत में और न भविष्य में, जहां हैं वहीं पूरी सघनता से जीना ही उनका उद्देश्य रहा।
8. धर्मयोगी कृष्ण : भगवान श्रीकृष्ण ने ऋषि वेदव्यास के साथ मिलकर धर्म के लिए बहुत कार्य किया। गीता में उन्होंने कहा भी है कि जब-जब धर्म की हानि होगी, तब-तब मैं अवतार लूंगा। श्रीकृष्ण ने नए सिरे से उनके कार्य में सनातन धर्म की स्थापना की थी।
9. वीर कृष्ण : भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत में युद्ध नहीं लड़ा था। वे अर्जुन के सारथी थे। लेकिन उन्होंने कम से कम 10 युद्धों में भाग लिया था। उन्होंने चाणूर, मुष्टिक, कंस, जरासंध, कालयवन, अर्जुन, शंकर, नरकासुर, पौंड्रक और जाम्बवंत से भयंकर युद्ध किया था।
महाभारत के युद्ध में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस युद्ध में वे अर्जुन के सारथी थे। हालांकि उन्हें 'रणछोड़ कृष्ण' भी कहा जाता है। इसलिए कि वे अपने सभी बंधु-बांधवों की रक्षा के लिए मथुरा छोड़कर द्वारिका चले गए थे। वे नहीं चाहते थे कि जरासंध से मेरी शत्रुता के कारण मेरे कुल के लोग भी व्यर्थ का युद्ध करें।
10. योगेश्वर कृष्ण : भगवान श्रीकृष्ण एक महायोगी थे। उनका शरीर बहुत ही लचीला था लेकिन वे अपनी इच्छानुसार उसे वज्र के समान बना लेते थे, साथ ही उनमें कई तरह की यौगिक शक्तियां थीं। योग के बल पर ही उन्होंने मृत्युपर्यंत तक खुद को जवान बनाए रखा था।
11. अवतारी कृष्ण : भगवान श्रीकृष्ण विष्णु के अवतार थे। उन्हें पूर्णावतार माना जाता है। महाभारत के युद्ध के दौरान अर्जुन को उन्होंने अपना विराट स्वरूप दिखाकर यह सिद्ध कर दिया था कि वे ही परमेश्वर हैं।
12. राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ कृष्ण : भगवान श्रीकृष्ण ने अपने संपूर्ण जीवन में कूटनीति के बल पर परिस्थितियों को अपने अनुसार ढालकर भविष्य का निर्माण किया था। उन्होंने जहां कर्ण के कवच और कुंडल दान में दिलवा दिए, वहीं उन्होंने दुर्योधन के संपूर्ण शरीर को वज्र के समान होने से रोक दिया। सबसे शक्तिशाली बर्बरीक का शीश मांग लिया तो दूसरी ओर उन्होंने घटोत्कच को सही समय पर युद्ध में उतारा। ऐसी सैकड़ों बातें हैं जिससे पता चलता है कि किस चालाकी से उन्होंने संपूर्ण महाभारत की रचना की और पांडवों को जीत दिलाई।
13. रिश्तों में खरे कृष्ण : भगवान श्रीकृष्ण की 8 पत्नियां थीं- रुक्मिणी, जाम्बवंती, सत्यभामा, मित्रवंदा, सत्या, लक्ष्मणा, भद्रा और कालिंदी। इनसे श्रीकृष्ण को लगभग 80 पुत्र हुए थे। कृष्ण की 3 बहनें थीं- एकानंगा (यह यशोदा की पुत्री थीं), सुभद्रा और द्रौपदी (मानस भगिनी)। कृष्ण के भाइयों में नेमिनाथ, बलराम और गद थे। सुभद्रा का विवाह कृष्ण ने अपनी बुआ कुंती के पुत्र अर्जुन से किया था। उसी तरह श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र साम्ब का विवाह दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा से किया था। श्रीकृष्ण के रिश्तों की बात करें तो वे बहुत ही उलझे हुए थे।
मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद प्रवासी मजदूरों के लिए बढ़-चढ़कर काम कर रहे हैं। वह पिछले कई दिनों से मजदूरों को उनके घर पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। इस बीच वह सोशल मीडिया पर उनसे संपर्क करने वालों के भी जवाब दे रहे हैं। इस बीच एक फैन्स ने उनसे एक सवाल पूछा कि आप हर समय लोगों की मदद करते रहते हैं सोते नहीं है क्या? सोनू ने इस सवाल का ऐसा जवाब दिया कि हर तरफ उनकी तारीफ हो रही है।
फैन ने सोनू को टैग करते हुए ट्वीट किया, 'सोनू सर आपको नींद नहीं आती है क्या? दिन हो या रात सभी के मैसेज का रिप्लाई करते हैं आप। लोगों की 24 घंटे सेवा करने के लिए तैयार रहते हैं आप। आज आप लोगों के लिए मसीहा बन गए हैं। धन्यवाद सर और आपको बहुत सारा प्यार।' इसके जवाब में सोनू ने कहा, 'एक बार जब सब पहुंच जाएं फिर आराम से सोएंगे।' उनके इस रिप्लाई पर यूजर्स खूब प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सोनू सूद ने बताया मैं मजदूरों का दर्द और उनके संघर्ष को अच्छी तरह समझता हूं। उन्होंने कहा कि मैं प्रवासी मजदूरों की मदद इसलिए कर रहा हूं कि क्योंकि मैं भी कभी प्रवासी था, जो अपनी आंखों ढेर सारे सपने लेकर मुंबई आया था।
उन्होंने आगे कहा कि मुझे तस्वीरों से पता चला कि वे कितनी परेशानी से गुजर रहे हैं। वे बिना खाना और पानी के हजारों किलोमीटर सड़कों पर पैदल चले जा रहा है तो मुझे अपने शुरुआती दिनों की याद आ गई। मैं पहली बार मुंबई बिना आरक्षित टिकट के ट्रेन से आया था। मैं ट्रेन के दरवाजे पर खड़े होकर और वॉशरूम बगल में सोकर मुंबई पहुंचा था। मुझे पता है कि संघर्ष क्या चीज होती है।
मनोरंजन/ शौर्यपथ / ट्विंकल खन्ना इन दिनों अपने बच्चों के साथ बहुत सारा क्वालिटी टाइम बिता रही हैं। कुछ ही दिनों पहले उनकी बेटी ने उन्हें एक फनी मेकओवर दिया था। अब उनके बेटे ने एक स्वादिष्ट केक बेक किया। ट्विंकल और अक्षय कुमार के बेटे आरव सिंगापुर मे पढ़ते हैं। लॉकडाउन के चलते वो अपने घर आये हुए हैं। ऐसे में वो भी हम सभी की तरह कुकिंग और बेकिंग मे हाथ आजमा रहे हैं। आरव ने ब्राउनी केक बनाया। उनकी मम्मी ट्विंकल के लिये ये बहुत गर्व का मौका था। ऐसा शायद इसलिये क्योंकि वो अक्सर अपने पोस्ट्स और इंटरव्यूज में बताती हैं कि उन्हें खाना बनाना नहीं आता।
केक की फोटो शेयर करते हुए ट्विंकल ने अपने मजेदार अंदाज में लिखा, “जब ये बन (आरव) मेरे ओवन (टमी) में था तो मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं एक फ्यूचर बेकर डिलीवर करूंगी। मैंने उसे बनाया और 17 साल बाद उनसे ये शानदार चॉकलेट ब्राउनी केक बनाया चेरी के साथ। प्राउड मदर।
इस फोटो पर कई लोगों ने कमेंट करते हुए कहा कि आरव में ये गुण अपने पापा से आये हैं। दरअसल फिल्मों में आने से पहले अक्षय कुमार कनाडा में एक शेफ से रूप में काम करते थे। उन्हें खाना बनाने में महारथ हासिल है और शायद उन्हीं से आरव ने भी ये चीजें सीखी हैं।
बता दें कि ट्विंकल काफी समय से फिल्मों में एक्टिंग से दूरी बना चुकी हैं। वो एक राइटर हैं और अपनी मजेदार टिप्पणियों के लिए जानी जाती हैं। वो अक्सर ही हमें अपने घर और अपने पर्सनल जीवन की झलक दिखाती रहती हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
