August 03, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    Uncategorised

    Uncategorised (35145)

    अन्य ख़बर

    अन्य ख़बर (5876)

    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    अदम्य साहस, धैर्य और त्याग की प्रतिमूर्ति थीं सावित्रीबाई फूले दुर्ग, शंकर नगर। अखिल भारतीय एससी-एसटी-ओबीसी संयुक्त मोर्चा, छत्तीसगढ़ द्वारा भारत की प्रथम शिक्षिका माता…

    शून्य दुर्घटना लक्ष्य को लेकर कर्मचारियों को किया गया प्रेरित

    भिलाई, ।
    सेल–भिलाई इस्पात संयंत्र के स्टील मेल्टिंग शॉप–2 (एसएमएस-2) द्वारा सुरक्षा माह के अंतर्गत वर्क्स बिल्डिंग–26 में एक व्यापक सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कार्यस्थल पर सुरक्षा संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ करना तथा कर्मचारियों एवं श्रमिकों को सुरक्षित कार्य पद्धतियों के प्रति जागरूक और प्रेरित करना रहा।

    कार्यक्रम को मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) श्री डी. सत्पथी तथा कार्यकारी विभागाध्यक्ष (एसएमएस-2) श्री एस. देबसिकदार ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कार्यस्थल पर सुरक्षा प्रक्रियाओं के कठोर अनुपालन, जोखिमों की पूर्व पहचान (प्रो-एक्टिव हैज़र्ड आइडेंटिफिकेशन) तथा सुरक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कर्मचारियों से सुरक्षित कार्य व्यवहार को दैनिक कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाने और शून्य दुर्घटना के लक्ष्य में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा संदेश को प्रभावी रूप से प्रसारित करने के लिए सुरक्षा विषयक लघु नाट्य प्रस्तुति, सुरक्षा पर आधारित कविताओं का सस्वर पाठ तथा ‘नियर मिस’ घटनाओं की रिपोर्टिंग करने वाले कर्मचारियों का सम्मान किया गया। इन रचनात्मक गतिविधियों ने कार्यक्रम को संवादात्मक और जीवंत बनाते हुए प्रतिभागियों में सुरक्षा के प्रति सजगता, सहभागिता और व्यवहारगत सीख को और मजबूत किया।

    क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर गांव में जश्न, नेशनल प्रतियोगिता चयन से बढ़ाया मान

    डुन्डेरा (दुर्ग)।
    ग्राम डुन्डेरा की होनहार बेटी खुशी ने क्षेत्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर न केवल अपने गांव बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर दुर्ग ग्रामीण विधायक श्री ललित चंद्राकर के विधायक प्रतिनिधि श्री गोविंद साहू के नेतृत्व में ग्रामवासियों द्वारा भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया।

    बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में दिखाया दम

    इस अवसर पर विधायक प्रतिनिधि गोविंद साहू ने कहा कि ग्राम डुन्डेरा की बेटी ने क्रिकेट के क्षेत्र में अपनी माना-बढ़त प्रतिभा का लोहा मनवाया है। खुशी ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर क्षेत्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में अपनी अलग पहचान बनाई है, जो समस्त ग्रामवासियों के लिए गर्व की बात है।

    संघर्ष, मेहनत और सपनों की जीत

    खुशी एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। उनके पिता ठेका श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद खुशी ने कठोर परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। वर्तमान में वे ग्राम डुन्डेरा में कक्षा 12वीं की छात्रा हैं।
    गौरव का विषय यह है कि खुशी का चयन नेशनल खेल प्रतियोगिता के लिए हुआ है। उनका सपना भविष्य में भारतीय क्रिकेट टीम की ओर से देश का प्रतिनिधित्व करना है।

    खुली जीप में गांव भ्रमण, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत

    खुशी की सफलता पर ग्राम डुन्डेरा में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने खुशी को खुली जीप में गांव भ्रमण कराया। जगह-जगह पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और तालियों की गूंज के साथ बेटी का अभिनंदन किया गया।

    सैकड़ों ग्रामवासी बने गवाह

    इस भव्य स्वागत कार्यक्रम में विधायक प्रतिनिधि गोविंद साहू, दुर्गेश साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी, युवा खिलाड़ी, महिलाएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने खुशी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ते रहने के लिए शुभकामनाएं दीं।

    पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम में होगा भव्य आयोजन, झांकी-परेड और सम्मान समारोह होंगे आकर्षण

    दुर्ग, ।
    प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस का जिला स्तरीय मुख्य समारोह पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम, दुर्ग में गरिमामय एवं हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में आयोजित किया जाएगा। मुख्य कार्यक्रम प्रातः 09.00 बजे से प्रारंभ होगा।

    समारोह के सफल आयोजन हेतु कलेक्टर अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अधिकारियों को विभागवार दायित्व सौंपे गए। संपूर्ण कार्यक्रम के प्रभारी के रूप में अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी अभिषेक अग्रवाल को नियुक्त किया गया है।

    झांकी, परेड और गार्ड ऑफ ऑनर होंगे मुख्य आकर्षण

    समारोह में विभिन्न विभागों द्वारा आकर्षक विभागीय झांकियों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसका समन्वय मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बजरंग कुमार दुबे करेंगे।
    परेड एवं गार्ड ऑफ ऑनर का आयोजन सुरक्षा एवं अनुशासन का प्रतीक होगा, जिसकी जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्ग, कमांडेंट होमगार्ड एवं कमांडेंट सीआईएसएफ भिलाई को सौंपी गई है।

    मैदान, मंच और दर्शक व्यवस्थाएं सुनिश्चित

    मैदान की तैयारी, अतिथियों एवं आमजन के लिए पृथक सेक्टर, बेरिकेटिंग, चबूतरा निर्माण एवं ध्वजदंड की व्यवस्था नगर निगम दुर्ग एवं लोक निर्माण विभाग द्वारा की जाएगी।
    साफ-सफाई, पेयजल, मोबाइल टॉयलेट, वॉटरप्रूफ शामियाना, कुर्सियां एवं लाउडस्पीकर की व्यवस्था भी इन्हीं विभागों द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।
    बेरिकेटिंग हेतु बांस-बल्लियों की व्यवस्था वनमंडलाधिकारी करेंगे।

    रोशनी, सजावट और विद्युत व्यवस्था

    मंच की साज-सज्जा फूलों एवं गमलों से उद्यानिकी विभाग द्वारा की जाएगी।
    निर्बाध विद्युत आपूर्ति एवं जनरेटर की व्यवस्था विद्युत विभाग एवं छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी द्वारा की जाएगी।
    शासकीय भवनों, राष्ट्रीय स्मारकों और प्रमुख स्थलों को रोशनी से सजाया जाएगा

    प्रशासनिक, सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल व्यवस्था

    समारोह स्थल एवं प्रवेश द्वारों पर कार्यपालिक दंडाधिकारियों की तैनाती एडीएम दुर्ग द्वारा तथा सुरक्षा व्यवस्था हेतु पुलिस अधिकारियों की तैनाती पुलिस अधीक्षक द्वारा की जाएगी।
    अतिथियों के प्रवेश एवं बैठक व्यवस्था का दायित्व एसडीएम दुर्ग को दिया गया है।

    सम्मान, उद्घोषणा और मीडिया प्रबंधन

    समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। इसकी व्यवस्था सहायक आयुक्त आदिवासी विकास करेंगे तथा वितरण का दायित्व डिप्टी कलेक्टर हितेश पिस्दा को सौंपा गया है।
    कार्यक्रम के संचालन के लिए शिक्षा, पर्यावरण एवं आदिवासी विकास विभाग से उद्घोषकों की नियुक्ति की गई है।
    मुख्यमंत्री के संदेश वाचन की पुस्तिका, मीडिया प्रचार-प्रसार एवं वीडियोग्राफी की जिम्मेदारी जनसंपर्क विभाग एवं खनिज विभाग को दी गई है।

    अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं

    • गुब्बारे छोड़ने की व्यवस्था : जिला उद्योग केंद्र

    • शील्ड व्यवस्था (झांकी व परेड विजेता) : आदिवासी विकास एवं शिक्षा विभाग

    • पार्किंग व्यवस्था : अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात

    • एंबुलेंस एवं प्राथमिक उपचार : मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

    • अग्निशमन व्यवस्था : कमांडेंट होमगार्ड

    • देशभक्ति गीतों का प्रसारण एवं स्मारक सफाई : नगर निगम

    • पंचायत स्तरीय जय स्तंभों की सफाई : जनपद पंचायत सीईओ

    हॉकी मैच भी होगा आयोजित

    26 जनवरी को पुलिस ग्राउंड में कलेक्टर एकादश एवं नागरिक एकादश के बीच हॉकी मैच आयोजित किया जाएगा, जिसकी व्यवस्था नगर निगम दुर्ग द्वारा की जाएगी।

    24 जनवरी को अंतिम रिहर्सल

    कलेक्टर ने निर्देश दिए कि 21 जनवरी तक सभी तैयारियां पूर्ण कर ली जाएं तथा 24 जनवरी 2026 को प्रातः 09.00 बजे मुख्य समारोह की अंतिम रिहर्सल अनिवार्य रूप से कराई जाए।

    बैठक में एडीएम, जिला पंचायत सीईओ, अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, नगर निगम आयुक्तगण, सभी एसडीएम एवं समस्त विभागों के जिला प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे।

    यादव छात्रावास पचरीपारा में होगा सामाजिक समरसता और गीता जयंती का आयोजन दुर्ग। दुर्ग नगर यादव महासभा द्वारा 11 जनवरी 2026, रविवार को दोपहर 1.00…

      शौर्यपथ व्यंगात्मक लेख / दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था। माहौल गंभीर होना चाहिए था—आंकड़े, योजनाएँ, भविष्य की दिशा। लेकिन 6 जनवरी 2026 को अचानक इतिहास ने ऐसा पलटा खाया कि भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव भी शायद सेलुलर जेल से झांककर पूछ बैठे हों—“भाई, ये नया सिलेबस कब आया?”
    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूरे आत्मविश्वास के साथ विधानसभा में ऐलान किया कि शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने “बहरी कांग्रेस की सरकार” को जगाने के लिए असेंबली में बम फेंका था।
    इतिहास की किताबें हड़बड़ा गईं, अध्यापक चुपचाप पानी पीने लगे और गूगल सर्च ने एक साथ लाखों बार “Central Legislative Assembly 1929” सर्च होते देखा।
    असल इतिहास थोड़ा जिद्दी किस्म का है। वह बताता है कि 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बम फेंका था—कांग्रेस सरकार तब न सत्ता में थी, न अस्तित्व में। लेकिन राजनीति में जब आत्मविश्वास ऊँचा हो, तो तथ्य अक्सर बौने लगने लगते हैं।
    बयान आते ही सोशल मीडिया ने बिना बजट सत्र बुलाए ही आपात बैठक कर ली।
    X (पूर्व ट्विटर) पर इतिहास “रीमिक्स मोड” में चला गया।
    AAP नेताओं ने तंज कसते हुए कहा—“इतिहास अब OTT पर आ गया है, हर एपिसोड में नया प्लॉट।”
    किसी ने मुख्यमंत्री को “दिल्ली की पप्पू CM” बताया, तो किसी ने पूछा—“मैडम, अगली बार 1857 की क्रांति भी Wi-Fi से लड़ी जाएगी क्या?”
    ट्रोलर्स को याद आ गया कि यह वही मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने कभी AQI को तापमान समझ लिया था और दिल्ली की लंबाई 1483 किलोमीटर घोषित कर दी थी। जनता ने राहत की सांस ली—कम से कम दिल्ली अब तक अमेरिका से लंबी घोषित नहीं हुई।
    मीम्स की ऐसी बाढ़ आई कि भगत सिंह की टोपी में Wi-Fi सिग्नल लग गए, असेंबली में डीजे बजने लगे और कैप्शन लिखा गया—
    “बहरी सरकार थी, इसलिए बम फेंका गया।”

    विपक्ष ने भी मौके को हाथ से जाने नहीं दिया।
    AAP ने इसे “इतिहास का अपमान” बताया, कांग्रेस ने कहा—“अब भगत सिंह भी कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल किए जा रहे हैं।”
    इतिहासकारों ने चुपचाप सिर पकड़ लिया—क्योंकि वे जानते थे, अब कोई भी किताब खोलने वाला नहीं।
    बाद में मुख्यमंत्री ने वर्षांत संदेश में कहा कि कुछ लोग “AQI और AIQ” जैसे मुद्दों पर बहस करके सरकार का ध्यान भटका रहे हैं, जबकि वह गवर्नेंस पर फोकस कर रही हैं।
    यह बयान सुनकर जनता ने तय कर लिया कि आने वाले समय में शायद इतिहास भी “वर्क फ्रॉम होम” करेगा।
    कुल मिलाकर, दिल्ली ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहाँ सिर्फ प्रदूषण ही नहीं, बयान भी हाई लेवल के होते हैं।
    और इतिहास?
    वह अब किताबों में नहीं, सोशल मीडिया के मीम टेम्पलेट में सुरक्षित है।

       रायपुर/नई दिल्ली। वेदांता समूह के चेयरमैन एवं प्रख्यात उद्योगपति श्री अनिल अग्रवाल के पुत्र अग्निवेश अग्रवाल का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उनका निधन अचानक आए कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ। इस दुखद घटना से न केवल अग्रवाल परिवार बल्कि उद्योग जगत में भी शोक की लहर दौड़ गई है।

    परिजनों के अनुसार अग्निवेश पूरी तरह स्वस्थ थे और जीवन को लेकर उत्साह एवं सपनों से भरे हुए थे। उनके अचानक चले जाने से परिवार गहरे सदमे में है। वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका प्रिय पुत्र उन्हें बहुत जल्दी छोड़कर चला गया।

    अग्निवेश अग्रवाल को एक सौम्य, संवेदनशील और सरल व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता था। वे सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों के प्रति भी सजग थे। उनके असामयिक निधन को एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

    इस दुखद समाचार के बाद देश-विदेश से उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों और शुभचिंतकों द्वारा शोक संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

    शौर्यपथ लेख /

      डिजिटल मीडिया के दौर में पॉडकास्ट संवाद का एक सशक्त मंच बन चुके हैं, जहां जटिल सामाजिक विषयों पर खुलकर चर्चा होती है। लेकिन हाल ही में शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में शामिल हुईं लेखिका और मिथकशास्त्री सीमा आनंद के कुछ बयानों ने एक तीखा विवाद खड़ा कर दिया है। यह विवाद केवल किसी एक वक्तव्य तक सीमित नहीं, बल्कि सहमति, नैतिकता, नाबालिगों की सुरक्षा और यौन शिक्षा की जिम्मेदारी जैसे गहरे सवालों को सामने लाता है।

    विवाद की जड़: एक अनुभव, अनेक व्याख्याएं

    पॉडकास्ट के दौरान सीमा आनंद ने एक घटना साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष एक 15 वर्षीय लड़के ने उन्हें “अप्रोच” किया था। उन्होंने इस प्रसंग को सामान्य अनुभव के तौर पर रखा, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। कई लोगों ने इस बयान को ग्रूमिंग और नाबालिगों के प्रति असंवेदनशीलता से जोड़ते हुए सवाल उठाए कि क्या इस तरह की बातों को सार्वजनिक मंच पर कहना उचित है।

    सहमति बनाम कानून: नैतिकता की कसौटी

    इसी बातचीत में सीमा आनंद ने “ग्रुप सेक्स” जैसे विषयों पर भी अपनी राय रखी और कहा कि किसी भी क्रिया को तब तक “अच्छा” या “बुरा” नहीं कहा जाना चाहिए, जब तक वह आपसी सहमति (Mutual Consent) से हो रही हो। यहीं से विवाद ने कानूनी और नैतिक मोड़ ले लिया। आलोचकों का कहना है कि 15 वर्ष का नाबालिग कानूनन सहमति देने में सक्षम नहीं होता, ऐसे में सहमति का तर्क इस संदर्भ में न केवल अवैध है, बल्कि सामाजिक रूप से भी अस्वीकार्य है। इस बहस ने यह स्पष्ट कर दिया कि सहमति की अवधारणा उम्र, संदर्भ और शक्ति-संतुलन से अलग नहीं की जा सकती।

    सीमा आनंद: लेखन, विचार और पहचान

    सीमा आनंद लंदन स्थित एक जानी-मानी मिथकशास्त्री और कथावाचक हैं। वे स्वयं को “आनंद की संरक्षक” (Patron Saint of Pleasure) कहती हैं। उनकी चर्चित पुस्तकों में The Arts of Seduction और हालिया रिलीज Speak Easy: A Field Guide to Love, Longing and Intimacy शामिल हैं। वे अपने लेखन और वक्तव्यों में प्राचीन भारतीय ग्रंथों—विशेषकर कामसूत्र और अन्य कामुक साहित्य (Erotology)—का संदर्भ देती रही हैं।

    प्राचीन ग्रंथों का संदर्भ और आधुनिक समाज

    सीमा आनंद का तर्क है कि प्राचीन भारत में यौन शिक्षा और आनंद को जीवन का स्वाभाविक और महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था, जिसे आधुनिक समाज ने नैतिकता के नाम पर कलंक बना दिया है। उनके अनुसार, खुली बातचीत और शिक्षा से ही स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ऐतिहासिक संदर्भों की व्याख्या करते समय आधुनिक कानून और सामाजिक जिम्मेदारियों की अनदेखी नहीं की जा सकती

    ट्रोलिंग, अभिव्यक्ति और डिजिटल जिम्मेदारी

    सीमा आनंद पहले भी यह बता चुकी हैं कि उन्हें अपने काम के कारण सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है, यहां तक कि उनके पति को लेकर भी टिप्पणियां की जाती हैं। लेकिन इस बार का विवाद अलग है। इसने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यौन शिक्षा पर बातचीत की सीमाएं क्या हों, और सार्वजनिक मंचों पर बोलते समय वक्ताओं की जिम्मेदारी कितनी होनी चाहिए।

    बहस का निष्कर्ष नहीं, एक चेतावनी

    यह विवाद किसी एक व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में खड़े होने से अधिक, एक व्यापक चेतावनी है। यह याद दिलाता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है—खासतौर पर तब, जब बात नाबालिगों, सहमति और संवेदनशील विषयों की हो।
    डिजिटल युग में संवाद आवश्यक है, लेकिन उतना ही आवश्यक है संदर्भ, संवेदनशीलता और कानून की समझ। सीमा आनंद के बयानों ने भले ही तीखी बहस छेड़ दी हो, पर इस बहस का सबसे अहम परिणाम यही है कि समाज को अब यह तय करना होगा कि खुली चर्चा और जिम्मेदार अभिव्यक्ति के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

       रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन सुशासन, दक्षता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन के संकल्प को निरंतर मजबूती दे रहा है। पारदर्शिता, कार्यकुशलता और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नवंबर 2025 माह के लिए मंत्रालय महानदी भवन के अधिकारियों के ई-ऑफिस प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया।
    डिजिटल गवर्नेंस को नई दिशा देने वाली इस पहल के अंतर्गत मुख्य सचिव श्री विकास शील ने ई-ऑफिस में श्रेष्ठ कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित करते हुए उन्हें शासन-प्रशासन में गति, पारदर्शिता और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए प्रोत्साहित किया। यह पहल शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और सेवा-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
    सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मंत्रालय स्थित महानदी भवन, नवा रायपुर के अधिकारियों के लिए ई-ऑफिस प्रदर्शन मूल्यांकन पूर्णतः आधिकारिक डिजिटल डेटा के आधार पर किया गया। इस मूल्यांकन प्रणाली का उद्देश्य अधिकारियों को स्व-मूल्यांकन का अवसर देना, रचनात्मक प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार करना, कार्य-प्रबंधन में सुधार लाना तथा फाइलों के समयबद्ध निस्तारण को प्रोत्साहित करना है।
    मूल्यांकन विभिन्न संवर्गों—संयुक्त सचिव, उप सचिव, अवर सचिव एवं अनुभाग अधिकारी—के लिए पृथक-पृथक किया गया। अधिकारियों द्वारा माह के दौरान किए गए कार्यभार, फाइल निस्तारण की गति और दक्षता को प्रमुख मानदंड बनाया गया।
    6 जनवरी 2026 को मंत्रालय, महानदी भवन के पंचम तल सभागार में आयोजित समारोह में मुख्य सचिव श्री विकास शील ने नवंबर 2025 के लिए चयनित श्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ताओं को प्रशंसा पत्र प्रदान किए। सम्मानित अधिकारियों में श्रीमती जयश्री जैन, श्री गजपाल सिंह सिकरवार, श्री भुपेन्द्र सिंह राजपूत, श्री विजय कुमार चौधरी, श्री राहुल कुमार, डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, श्री रनबहादुर ज्ञवाली, श्री अरुण कुमार मिश्रा, श्री पूरन लाल साहू, श्री मनीराम रात्रे, श्री महेश कुमार एवं श्री नागराजन शामिल हैं।
    मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कहा कि यह मूल्यांकन तंत्र अधिकारियों के बीच सकारात्मक प्रेरणा, कार्य संतुष्टि, जवाबदेही और अनुशासन को सुदृढ़ करेगा। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया को नियमित रूप से जारी रखा जाएगा और प्रत्येक माह ई-ऑफिस प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी।
    उन्होंने यह भी बताया कि समयपालन और कार्यालय उपस्थिति को बढ़ावा देने के लिए उपस्थिति आधारित पुरस्कार प्रणाली प्रारंभ करने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही उत्कृष्ट अधिकारियों को प्रोत्साहित करने के लिए “वॉल ऑफ फेम” को सामान्य प्रशासन विभाग की वेबसाइट और मंत्रालय परिसर की डिजिटल स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाएगा।
    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से प्रशासन को तेज़, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए सतत प्रयास कर रहा है। ई-ऑफिस जैसी पहलें राज्य में सुशासन की मजबूत नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

       रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर आज आस्था, अध्यात्म और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम साकार हुआ, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने गरियाबंद जिले के सिरकट्टी धाम आश्रम स्थित भव्य श्रीरामजानकी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री ने मंदिर के सर्वोच्च शिखर पर धर्मध्वजा की स्थापना कर प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद मांगा।
    मुख्यमंत्री श्री साय ने सिरकट्टी धाम को आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामाजिक समरसता का केंद्र बताते हुए आश्रम परिसर में समरसता भवन के निर्माण हेतु 50 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद देशभर में जो आध्यात्मिक ऊर्जा प्रवाहित हुई है, उसी की अखंड धारा आज सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा स्थापना के माध्यम से अनुभव की जा रही है।
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ऋषि-मुनियों, साधु-संतों और सनातन परंपराओं की भूमि है। धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय इसी भूमि पर व्यतीत किया। दंडकारण्य और अबूझमाड़ की पावन भूमि, जो कभी नक्सलवाद की पीड़ा से जूझती थी, आज शांति और विकास के पथ पर अग्रसर है।
    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आस्था और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के तहत अब तक 39 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को निशुल्क तीर्थयात्रा कराई जा चुकी है, जबकि मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के अंतर्गत 5 हजार से अधिक श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं। इसके साथ ही प्रदेश के पांच शक्तिपीठों का विकास कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। भोरमदेव क्षेत्र के समग्र विकास हेतु स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत 148 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं रतनपुर के विकास के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष राजिम कल्प-कुंभ का आयोजन भी और अधिक भव्य स्वरूप में किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने श्रीरामजानकी मंदिर को जनसहभागिता की अनुपम मिसाल बताया। लगभग 22 हजार परिवारों के सहयोग से 9 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह मंदिर बीते 10 वर्षों की साधना और समर्पण का साकार रूप है। राजस्थान के कुशल शिल्पियों द्वारा पारंपरिक शैली में बिना सीमेंट और लोहे की छड़ के निर्मित इस मंदिर की आयु लगभग एक हजार वर्ष आंकी गई है। मुख्यमंत्री ने मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले सभी श्रद्धालुओं और दानदाताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की आस्था, एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया।
    उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने धर्मध्वजा रोहण को ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि यह केवल ध्वजारोहण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में धर्म, अध्यात्म और सामाजिक समरसता की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। केबिनेट मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने इसे अलौकिक अनुभव बताते हुए कहा कि सिरकट्टी धाम आज आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया है।
    सिरकट्टी आश्रम के महामंडलेश्वर महंत संत गोवर्धन शरण व्यास ने स्वागत उद्बोधन में आश्रम की स्थापना, परंपरा और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, विधायकगण श्री रोहित साहू एवं श्री दीपेश साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री गौरीशंकर कश्यप, अनेक जनप्रतिनिधि, देशभर से आए संत-महात्मा और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
    सिरकट्टी धाम में लहराई धर्मध्वजा के साथ यह संदेश स्पष्ट रूप से गूंज उठा कि छत्तीसगढ़ अब केवल विकास ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव की नई ऊँचाइयों की ओर भी अग्रसर है।

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision