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May 23, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

रायपुर, | शौर्यपथ

दुर्ग जिले के ग्राम भरर (जामगांव-आर) में आयोजित तहसील स्तरीय विशाल कर्मा महोत्सव एवं सामूहिक आदर्श विवाह कार्यक्रम सामाजिक समरसता और परंपरा का जीवंत उत्सव बनकर उभरा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 13 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखमय दांपत्य जीवन और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

विकास को गति देने वाली घोषणाएं

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं—

  • साहू समाज भवन, पाटन में शेड निर्माण हेतु 50 लाख रुपये
  • ग्राम भरर पंचायत में शौचालय व शेड निर्माण तथा सीसी रोड के लिए 10 लाख रुपये

इन घोषणाओं से स्थानीय आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।

माता कर्मा के आदर्शों का स्मरण

मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज को छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और गौरवशाली समाज बताते हुए माता कर्मा के त्याग, भक्ति और सेवा भावना को प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने स्वर्गीय ताराचंद साहू को नमन करते हुए उनके साथ अपने कार्यकाल के अनुभव भी साझा किए।

सरकार की उपलब्धियां और योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 28 महीनों में राज्य सरकार ने सुशासन स्थापित करते हुए “मोदी की गारंटी” को जमीन पर उतारने की दिशा में ठोस कार्य किए हैं। उन्होंने प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया—

  • 18 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ
  • किसानों को बकाया बोनस और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी
  • महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता, जिससे वे स्वरोजगार की ओर बढ़ रही हैं
  • रामलला दर्शन योजना से दो वर्षों में करीब 42 हजार लाभार्थी

ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं में पहल

ऊर्जा क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 का जिक्र करते हुए बताया कि बकाया बिल पर 100% सरचार्ज छूट दी जा रही है।
साथ ही “मोर बिजली ऐप” के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल केंद्रों के जरिए गांव-गांव में डिजिटल सेवाएं सुलभ बनाई जा रही हैं और सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है।

नक्सल उन्मूलन और विकास पर जोर

मुख्यमंत्री ने बस्तर क्षेत्र में नक्सल समस्या के नियंत्रण और विकास कार्यों में आई तेजी को राज्य की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि सरकार सुशासन और भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए प्रतिबद्ध है।

जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में सांसद श्री विजय बघेल, कमिश्नर श्री सत्यनारायण राठौर, कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, जिला साहू संघ के अध्यक्ष श्री नंदलाल साहू, तेलघानी बोर्ड अध्यक्ष श्री जितेंद्र साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे।


सामाजिक एकता का संदेश

भरर का यह सामूहिक विवाह कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, परंपरा और सामूहिक सहयोग का सशक्त संदेश बनकर सामने आया, जहां संस्कार और विकास—दोनों का सुंदर संगम देखने को मिला।

गुंडरदेही। क्षेत्र में चल रहे गो सम्मान आह्वान अभियान को ग्रामीण स्तर पर व्यापक समर्थन मिल रहा है। इसी कड़ी में परिक्षेत्र साहू समाज कांदूल द्वारा ग्राम सनोद में आयोजित भक्त माता कर्मा जयंती समारोह जनजागरण का प्रभावी मंच बन गया, जहां गौ सेवकों को विभिन्न जनप्रतिनिधियों और सामाजिक पदाधिकारियों का खुला समर्थन प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम में अनुसूचित जाति प्राधिकरण के अध्यक्ष डोमन लाल कोरसेवाड़ा, विधायक कुंवर सिंह निषाद, जिला पंचायत सदस्य मीना साहू, जनपद अध्यक्ष पुरुषोत्तम चंद्राकर, सहित गुलशन साहू, कौशल किशोर साहू, टोमन लाल साहू, उमा शंकर साहू (तहसील अध्यक्ष), खिलावन साहू (पूर्व जिला अध्यक्ष), केशव राम साहू (पूर्व तहसील अध्यक्ष), सरपंच हिलेश्वर निषाद, परिक्षेत्र अध्यक्ष धनेश्वर साहू, ग्रामीण अध्यक्ष सेतराम साहू समेत 20 से अधिक गांवों के पदाधिकारी व ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर अभियान के समर्थन में अपने विचार व्यक्त करते हुए राजमहंत डोमन लाल कोरसेवाड़ा ने कहा कि “सतनामी समाज लंबे समय से गो हत्या प्रतिबंध के पक्ष में रहा है। वर्तमान समय में इस विषय पर जनजागरण अत्यंत आवश्यक है। गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा मिलना चाहिए।”

समारोह के दौरान वक्ताओं ने गौ संरक्षण, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एक स्वर में अभियान को समर्थन देते हुए इसे समाजहित में महत्वपूर्ण पहल बताया।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक जागरूकता और जनसमर्थन के विस्तार का सशक्त माध्यम भी साबित हुआ।

नई दिल्ली, । भारत निर्वाचन आयोग के अंतर्राष्ट्रीय निर्वाचन आगंतुक कार्यक्रम (IEVP) 2026 के तहत तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल (चरण-1) के विधानसभा चुनावों ने वैश्विक मंच पर भारतीय लोकतंत्र की…
आगरा । भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर से ठीक पहले आगरा में आयोजित उद्योग संवाद ने इस समझौते को केवल टैरिफ कटौती तक सीमित न मानकर एक व्यापक…

नई दिल्ली ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम की 133वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित करते हुए विज्ञान, स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और जनभागीदारी को विकसित भारत की नींव बताया। उन्होंने देश की हालिया उपलब्धियों और जन-आंदोलनों को रेखांकित करते हुए नागरिकों से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।


? परमाणु ऊर्जा में ऐतिहासिक उपलब्धि

प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल करने को भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा का बड़ा मील का पत्थर बताया।

  • पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित
  • ऊर्जा उत्पादन के साथ नया ईंधन तैयार करने की क्षमता
  • औद्योगिक, कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलेगा लाभ

?️ पवन ऊर्जा में भारत की छलांग

पीएम मोदी ने बताया कि भारत की विंड एनर्जी क्षमता 56 गीगावाट से अधिक हो चुकी है और देश दुनिया में चौथे स्थान पर है।

  • गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान जैसे राज्य अग्रणी
  • रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के नए अवसर
  • स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने का आह्वान

?️ बुद्ध पूर्णिमा और वैश्विक सांस्कृतिक प्रभाव

प्रधानमंत्री ने बुद्ध पूर्णिमा की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा कि

  • शांति और करुणा आज के वैश्विक तनाव में और अधिक प्रासंगिक
  • चिली और कर्नाटक में बौद्ध परंपरा से जुड़े प्रेरक प्रयासों का उल्लेख

? ‘बीटिंग रिट्रीट’ अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर

  • पहली बार WAVES OTT पर उपलब्ध
  • भारतीय संगीत परंपरा और सशस्त्र बलों की झलक
  • नागरिकों से इसे सुनने और जुड़ने की अपील

? पर्यावरण संरक्षण की प्रेरक कहानियां

प्रधानमंत्री ने देशभर से उदाहरण साझा किए:

  • कच्छ में Flamingo City
  • यूपी में ‘गज मित्र’ पहल
  • छत्तीसगढ़ में ब्लैकबक की वापसी
  • गोडावण संरक्षण के प्रयास

? नॉर्थ-ईस्ट का ‘बांस क्रांति’

  • 2017 में कानून बदलाव के बाद बांस उद्योग में उछाल
  • महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को लाभ
  • नागरिकों से नॉर्थ-ईस्ट उत्पाद खरीदने की अपील

? डिजिटल इंडिया: 20 करोड़ ऐतिहासिक दस्तावेज ऑनलाइन

  • National Archives द्वारा डिजिटाइजेशन
  • 7वीं-8वीं सदी की पांडुलिपियां, 1857 के दस्तावेज
  • पोर्टल: abhilekh-patal.in

? बेटियों की वैश्विक उपलब्धि

European Girls Mathematical Olympiad में:

  • भारत 6वें स्थान पर
  • गोल्ड, सिल्वर, ब्रॉन्ज पदक
  • बेटियों और उनके अभिभावकों की सराहना

? जनगणना 2027: पूरी तरह डिजिटल

  • मोबाइल ऐप और self-enumeration की सुविधा
  • अब तक 1.2 करोड़ घरों का सूचीकरण
  • नागरिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील

? ‘लोकल से ग्लोबल’ हो रहा भारतीय चीज

  • अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारतीय ब्रांड सम्मानित
  • कलारी, छुरपी, सुरती चीज जैसे पारंपरिक उत्पाद
  • डेयरी सेक्टर में वैल्यू एडिशन और वैश्विक पहचान

?? समापन संदेश

प्रधानमंत्री ने रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को नमन किया और युवाओं से छुट्टियों में कुछ नया सीखने का आग्रह किया।

“विकसित भारत का सपना जनभागीदारी से ही साकार होगा।”

इस संदेश के साथ प्रधानमंत्री ने नागरिकों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने, प्रकृति संरक्षण और राष्ट्रीय अभियानों में भाग लेने का आह्वान किया।

नई दिल्ली/विशाखापत्तनम ।
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन 27-28 अप्रैल, 2026 को आंध्र प्रदेश के दौरे पर रहेंगे।

इस दौरान वे 27 अप्रैल को विशाखापत्तनम पहुंचकर प्रतिष्ठित आंध्र विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में भाग लेंगे।

आंध्र विश्वविद्यालय, जो देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक है, अपने 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। उपराष्ट्रपति की उपस्थिति इस ऐतिहासिक अवसर को और अधिक महत्वपूर्ण बनाएगी।

यह दौरा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संस्थागत उपलब्धियों को सम्मानित करने और शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

नई दिल्ली/लॉस एंजिल्स । भारत को आने वाले दशकों में वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व अनिवार्य है। यह बात केंद्रीय…

गंगटोक ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27-28 अप्रैल को सिक्किम के दौरे पर रहेंगे, जहां वे राज्य स्थापना के 50वें वर्ष (स्वर्ण जयंती) के समापन समारोह में शामिल होंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और शुभारंभ करेंगे।

स्वर्ण जयंती समारोह में भागीदारी

28 अप्रैल को सुबह प्रधानमंत्री पालजोर स्टेडियम, गंगटोक में आयोजित समापन समारोह में शामिल होंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इससे पहले वे गंगटोक स्थित ऑर्किडेरियम का दौरा कर राज्य की समृद्ध पारिस्थितिक और पुष्प विरासत का अवलोकन करेंगे।

हर क्षेत्र में विकास की बड़ी पहल

प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की जाने वाली परियोजनाएं कई अहम क्षेत्रों को कवर करती हैं:

  • बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी
  • स्वास्थ्य और शिक्षा
  • बिजली और शहरी विकास
  • पर्यावरण संरक्षण
  • पर्यटन और कृषि

इनका उद्देश्य सिक्किम में समग्र और समावेशी विकास को गति देना है।

स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूती

  • यांगंग में 100 बेड का आयुर्वेद अस्पताल (शिलान्यास)
  • एनआईटी देवराली में सोवा रिग्पा अस्पताल (उद्घाटन)
  • सिक्किम विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर
  • हेलेन लेपचा मेडिकल कॉलेज, डेंटम व्यावसायिक कॉलेज
  • 160 स्कूलों में आईटी-सक्षम शिक्षा परियोजना

कनेक्टिविटी और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार

  • तीस्ता नदी पर दो डबल-लेन स्टील आर्च ब्रिज
  • बिरधांग-नामची सड़क का उन्नयन
  • गंगटोक में पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण

शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण

  • मिनी सचिवालय और सिविल सेवा संस्थान
  • शहरी गरीब आवास और पुलिस आवास परियोजनाएं
  • सिंगतम में सीवरेज सिस्टम और नदी प्रदूषण नियंत्रण योजनाएं

पर्यटन और धार्मिक अवसंरचना को बढ़ावा

  • रिज प्रीसिंक्ट का पुनर्विकास
  • कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़ी सुविधाएं
  • इको-टूरिज्म और तीर्थ स्थलों का विकास
  • कृष्णा प्रणामी मंगलधाम में यात्री निवास

कृषि और युवाओं के लिए पहल

  • IFFCO प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन
  • रंगपो में इंडोर क्रिकेट सुविधाएं

पूर्वोत्तर विकास का संकेत

प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल परियोजनाओं का उद्घाटन नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर सिक्किम के सतत और तेज विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का संकेत है।

स्वर्ण जयंती वर्ष में यह पहल सिक्किम को बुनियादी ढांचे, पर्यटन, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

श्रीनगर, ।
भारत के खेल भविष्य को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ‘श्रीनगर खेल संकल्प’ का शुभारंभ किया। तीन दिवसीय चिंतन शिविर के समापन अवसर पर जारी इस दस्तावेज़ ने खिलाड़ी-केंद्रित, समन्वित और सहयोगात्मक खेल व्यवस्था के निर्माण के लिए केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एकजुट प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

खिलाड़ी केंद्र में, सरकार सहयोग में

‘श्रीनगर खेल संकल्प’ का मूल फोकस एक ऐसे खेल पारिस्थितिकी तंत्र पर है, जहां

  • खिलाड़ी विकास प्राथमिकता हो
  • केंद्र और राज्य मिलकर संसाधनों का समन्वय करें
  • खेल निकायों में पारदर्शिता और पेशेवर ढांचा विकसित हो

डॉ. मांडविया ने स्पष्ट किया कि खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, सामाजिक एकता और युवा सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम है।

खेल संस्कृति से आर्थिक विकास तक

संकल्प में खेलों को बहुआयामी विकास के इंजन के रूप में प्रस्तुत किया गया है:

  • खेल अवसंरचना का विस्तार
  • प्रतिभा पहचान और पोषण
  • क्षेत्रीय खेल क्लस्टर का विकास
  • खेल पर्यटन और रोजगार सृजन
  • भारत को वैश्विक खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए तैयार करना

यह दृष्टिकोण खेलों को स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिष्ठा से सीधे जोड़ता है।

विविधता ही ताकत: राज्यों को मिली भूमिका

संकल्प में भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को ताकत मानते हुए राज्यों को अपने-अपने क्षेत्र के अनुसार खेल मॉडल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
इससे स्थानीय प्रतिभाओं को उभरने का अवसर मिलेगा और ग्रासरूट स्तर पर खेल संस्कृति मजबूत होगी।

प्रशासनिक सुधार और ‘माय भारत’ से युवा सहभागिता

चिंतन शिविर के अंतिम दिन तीन प्रमुख बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई:

  • खेल प्रशासन में सुधार: पारदर्शिता, जवाबदेही और पेशेवर ढांचा
  • खेल सामग्री निर्माण: भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा
  • युवा सहभागिता: ‘माय भारत’ प्लेटफॉर्म के जरिए नेतृत्व और भागीदारी बढ़ाना

फिट इंडिया का संदेश

समापन दिवस की शुरुआत “संडे ऑन साइकिल” साइक्लोथॉन से हुई, जिसमें डॉ. मांडविया और राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने भाग लेकर फिटनेस और जनभागीदारी का संदेश दिया।

निष्कर्ष: एकीकृत प्रयास, वैश्विक लक्ष्य

‘श्रीनगर खेल संकल्प’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का खेल भविष्य खंडित प्रयासों से नहीं, बल्कि एकीकृत और समन्वित रणनीति से तय होगा।

यह पहल केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, सशक्त और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारत के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

चंडीगढ़, ।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर चंडीगढ़ में एक स्पष्ट संदेश के साथ संपन्न हुआ—अब सामाजिक न्याय केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समयबद्ध, मापनीय और जमीनी परिणामों के रूप में दिखाई देगा। “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब – विकसित भारत@2047” थीम पर केंद्रित इस शिविर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने व्यापक और कार्रवाई योग्य सिफारिशों पर सहमति दी।

नीतियों से आगे, व्यावहारिक समाधान पर फोकस

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि यह शिविर “इरादों से क्रियान्वयन” की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
उन्होंने कहा कि चर्चा केवल नीति निर्माण तक सीमित नहीं रही, बल्कि

  • छात्रवृत्ति वितरण
  • नशामुक्ति
  • वरिष्ठ नागरिक कल्याण
  • दिव्यांगजनों के प्रमाणन
  • ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास

जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधान तलाशे गए।

पांच थीमेटिक समूहों में बना ठोस एक्शन प्लान

शिविर के दौरान पांच समूहों ने अलग-अलग आयामों पर गहन मंथन किया:

  • अंत्योदय से आत्मनिर्भरता: SC समुदायों के कौशल विकास, आजीविका और पीएम-अजय के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
  • समावेश, पहचान और एकीकरण: डीएनटी/एनटी/एसएनटी समुदायों के लिए SEED योजना और सटीक पहचान प्रणाली
  • आर्थिक सशक्तिकरण: SC, OBC और वंचित वर्गों के लिए ऋण और उद्यमिता तक आसान पहुंच
  • सुगमता (Accessibility): 2027-28 तक बाधा-मुक्त मानकों और सार्वजनिक ढांचे में सार्वभौमिक डिजाइन लागू करने की योजना
  • दिव्यांगजनों का प्रमाणन: तकनीक आधारित, तेज और पारदर्शी प्रमाणन प्रणाली

2027 जनगणना और ट्रांसजेंडर कल्याण पर विशेष ध्यान

शिविर में कुछ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर के निर्णयों पर सहमति बनी:

  • जनगणना-2027 में दिव्यांगजनों का समुचित समावेश
  • SEED योजना को और मजबूत करना
  • SC/OBC वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण को गति देना
  • SMILE योजना के तहत ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास, गरिमा गृह और संरक्षण तंत्र को विस्तार

“जागरूकता से सुलभता” और प्रक्रिया सरलीकरण पर जोर

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने यह स्वीकार किया कि योजनाओं की सफलता का मूल आधार है:

  • जागरूकता बढ़ाना
  • प्रक्रियाओं को सरल बनाना
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिक उपयोग
  • स्पष्ट समयसीमा तय करना

इस दिशा में छात्रवृत्ति, पेंशन, पुनर्वास और अन्य लाभों को बिना देरी और बाधाओं के सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया गया।

टेक्नोलॉजी और समन्वय बनेगा गेमचेंजर

केंद्रीय मंत्री ने टेक्नोलॉजी-सक्षम सुशासन, बेहतर मॉनिटरिंग और केंद्र-राज्य समन्वय को सामाजिक न्याय के प्रभावी क्रियान्वयन की कुंजी बताया।

निष्कर्ष: इरादों से परिणाम की ओर

तीन दिवसीय यह चिंतन शिविर एक स्पष्ट दिशा देकर समाप्त हुआ—

सामाजिक न्याय को अब केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि सबसे गरीब और कमजोर वर्गों के जीवन में वास्तविक, मापनीय बदलाव लाने पर फोकस किया जाएगा।

इस साझा संकल्प के साथ देश ने 2047 तक एक समावेशी, सशक्त और न्यायसंगत विकसित भारत की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिए हैं।

हमारा शौर्य

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