September 14, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    दिव्यांग बालिका से मिलने पहुँचे एसडीओपो नीतीश ठाकुर,हुए भावुक

    धमतरी/नगरी शौर्यपथ

    उमर गांव की दिव्यांग बालिका संध्या जो 90 प्रतिशत विकलांग है और बचपन से चलने फिरने में पूरी तरह असमर्थ है।
    इस बालिका से मिलने नगरी एसडीओपी नीतीश कुमार ठाकुर बच्ची के घर पहुँचे ।
    जहाँ बच्ची से मिलने और उसके बारे में जानकर वे भावुक हो उठे।भावुकता के चलते जेब मे रखे सारे पैसे उस बच्ची के पालन पोषण करने वाले उनके मामा मामी को देकर किसी और सहयोग कर लिए हमेशा तत्पर रहने की बात कही, साथ में गए समाजसेवी सन्नी छाजेड़ व अंकित बोहरा ने बच्ची के लिए राशन सामग्री व टेबल पंखा भेंट किया।
    ज्ञात हो कि दिव्यांग संध्या को उसकी मामी ने बचपन से पाला है।
    90 प्रतिशत दिव्यांग बच्ची न चल सकती है और न ही अपना कोई कार्य करने सक्षम है।
    एसडीओपी नीतीश ठाकुर ऐसे बच्चो की सेवा के लिए सदा तत्पर रहते हैं, पूर्व में घटूला की बच्ची पूर्वी,उमरगांव की ही बच्ची मायावती का हाल जानकर उनकी भी मदद की थी।
    इसी कड़ी में नन्ही संध्या को एसडीओपी नीतीश ठाकुर के रूप में एक मसीहा मिल गया है और इस मसीहे ने ठान लिया है कि इस बच्ची का हर सम्भव मदद कर उसे अपने पैरों पर खड़े होने के काबिल बनाएंगे।
    शासन ने दिव्यांगों के लिए अनेक योजनाएं संचालित की है, विकलांग पेंशन सहित उनके जीवन यापन के लिए शासन स्तर पर अनेक सहयोग करने का दम्भ भरा जाता है,किन्तु हकीकत की धरातल पर यह तश्वीर कुछ अलग ही नजर आती है। योजनाएं कागजो तक सीमित रह जाती हैं और लाचार व्यक्ति अपनी किस्मत की मार समझ कर अपने आप से समझौता कर लेता है।

    इस सम्बंध में जनपद सीईओ
    पी.आर. साहू ने कहा कि जनपद से दिव्यांग बालिका के घर अधिकारीयो को भेजकर सम्पूर्ण जानकारी ली जाएगी व शासन की हर योजना का लाभ दिलाने का हर सम्भव प्रयास किया जावेगा।

    नई दिल्ली/ शौर्यपथ / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन झेल रहे देश की आर्थिक हालत सुधारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का…
    शौर्यपथ / स्वास्थ्य / धूम्रपान आपको कोरोना संक्रमण से नहीं बचाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ऐसी सभी रिपोर्ट को खारिज कर दिया है जिसमें दावा किया गया था कि धूम्रपान…

    धमतरी शौर्यपथ

    मंगलवार को पूर्व कैबिनेट मंत्री माननीय अजय चंद्राकर ने देवेंद्र नगर स्थित नारायणा अस्पताल पहुँचकर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के से भेंट की एवं चिकित्सकों से उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली.
    छत्तीसगढ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के मस्तिष्क को ऑडियो थेरेपी के द्वारा जागत करने की कोशिश की जा रही है आज जारी मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक उन्हें उनके पसंदीदा गाने सुनाकर उनके मस्तिष्क को जागत करने की कोशिश चल रही है।

    छत्तीसगढ प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी (उम्र 74 वर्ष), की स्थिति अभी भी बेहद गंभीर बनी हुई है। उनका हृदय, ब्लड प्रेशर और यूरिन आउटपुट नियंत्रित है।

    अजीत जोगी को अभी वेंटीलेटर के माध्यम से सांस दी जा रही है। मेडिकल प्रोटोकॉल्स के तहत उपचार जारी है और डॉक्टरों द्वारा उनके दिमाग को क्रियाशील ( एक्टिवेट ) करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।

    ऑडियो थेरेपी द्वारा भी उनके पसंदीदा गाने उन्हें कान में सुनाकर उनके मस्तिष्क को जागत करने की कोशिश चल रही है। आज शाम 4 बजे उनके दिमाग का ईईजी टेस्ट किया गया जिसमें उनके दिमाग में बहुत थोड़ी सी हलचल देखी गयी है।

     

    धमतरी शौर्यपथ

    मंगलवार को पूर्व कैबिनेट मंत्री माननीय अजय चंद्राकर ने देवेंद्र नगर स्थित नारायणा अस्पताल पहुँचकर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के से भेंट की एवं चिकित्सकों से उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली.
    छत्तीसगढ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के मस्तिष्क को ऑडियो थेरेपी के द्वारा जागत करने की कोशिश की जा रही है आज जारी मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक उन्हें उनके पसंदीदा गाने सुनाकर उनके मस्तिष्क को जागत करने की कोशिश चल रही है।

    छत्तीसगढ प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी (उम्र 74 वर्ष), की स्थिति अभी भी बेहद गंभीर बनी हुई है। उनका हृदय, ब्लड प्रेशर और यूरिन आउटपुट नियंत्रित है।

    अजीत जोगी को अभी वेंटीलेटर के माध्यम से सांस दी जा रही है। मेडिकल प्रोटोकॉल्स के तहत उपचार जारी है और डॉक्टरों द्वारा उनके दिमाग को क्रियाशील ( एक्टिवेट ) करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।

    ऑडियो थेरेपी द्वारा भी उनके पसंदीदा गाने उन्हें कान में सुनाकर उनके मस्तिष्क को जागत करने की कोशिश चल रही है। आज शाम 4 बजे उनके दिमाग का ईईजी टेस्ट किया गया जिसमें उनके दिमाग में बहुत थोड़ी सी हलचल देखी गयी है।

     

    शौर्यपथ / सत्य वह नहीं है जो असत्य है। सत्य स्वयं में एक अनुभव है जो मन की कंदराओं से निकल कर आपको वास्तविकता से…
    शौर्यपथ लेख १. जीवन का सत्य- हम जन्म क्यों लेते हैं ? – प्रस्तावना प्रायः हमसे यह प्रश्‍न पूछा जाता है, ‘जीवन का सत्य क्या…

    शौर्यपथ

    यूनिसेफ, एनएचएम एवं डब्ल्यूएचओ ने संयुक्त रूप से जारी की मार्गदर्शिका
    • प्रवासी कामगारों के घर वापसी पर प्रबंधन प्रोटोकॉल की दी गयी जानकारी
    • प्रवासी कामगारों के लिए होम क्वारंटाइन के दौरान सावधानियां बरतने की दी गयी सलाह
    रायपुर 12 मई 2020। कोरोना संक्रमण के कारण हुए देशव्यापी लॉकडाउन में दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी कामगारों सहित छात्र एवं अन्य लोग अब अपने-अपने राज्य लौटने लगने लगे हैं. इन्हें सुरक्षित अपने घर पहुँचाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों ने कई स्तर पर व्यवस्थाएं की हैजिसमें इनके आवाजाही के लिए स्पेशल ट्रेन सहित अपने राज्य पहुँचने पर क्वारंटाइन की सुविधा शामिल है. लेकिन कोरोना संक्रमण के इस दौर में भारी संख्या में लोगों के घर वापसी पर संक्रमण प्रसार को रोकने की भी चुनौती सरकार के सामने है. इसे ध्यान में रखते हुए यूनिसेफ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिश (एनएचएम) एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संयुक्त रूप से मार्गदर्शिका जारी की है, जिसमें प्रवासी कामगारों के घर वापसी पर प्रबंधन प्रोटोकॉल, प्रवासी कामगारों के लिए होम क्वारंटाइन के दौरान जरुरी सावधानियां एवं कोरोना से बचाव को लेकर विशेष वर्गों के लोगों के लिए सावधानी इत्यादि के विषय में विस्तार से जानकारी दी गयी है|
    प्रवासी कामगारों के घर वापसी पर बनाये गए प्रबंधन प्रोटोकॉल:
    प्रवासी कामगारों के घर वापसी पर कुछ प्रबंधन प्रोटोकॉल बनाये गए हैं, जिसमें बाहर से घर लौटने पर सभी प्रवासियों का जिला प्रशासन द्वारा पंजीकरण एवं स्क्रीनिंग की जानी है. जिन प्रवासियों में कोविड-19 के लक्षण मिलेंगे उन्हें कुछ तय प्रोटोकॉल के अनुपालन करने होंगे. जबकि जिन प्रवासियों में कोविड-19 के लक्षण नहीं भी मिलते हैं, उन्हें भी कुछ सावधानियों का अनुपालन करना अनिवार्य होगा.
    1. कोविड-19 के लक्षण पाए जाने पर:
     सरकार द्वारा ऐसे प्रवासियों को सरकार द्वारा प्रबंधित क्वारंटाइन फैसिलिटी में रखा जाएगा
     प्रबंधित क्वारंटाइन फैसिलिटी में कोविड-19 की जांच होगी
     जांच में संक्रमण पाए जाने पर अस्पताल में भर्ती किया जाएगा
     जांच में संक्रमण नहीं पाए जाने पर 7 दिन क्वारंटाइन में रख दोबारा जांच की जाएगी
     7 दिन के बाद भी संक्रमण न होने पर घर भेज दिया जाएगा जहाँ खुद को 14 दिन होम क्वारंटाइन में रहना होगा
    2. कोविड-19 के लक्षण नहीं होने पर
     ऐसे में प्रवासी को घर भेज दिया जाएगा
     घर में खुद को 21 दिन होम क्वारंटाइन में रहना होगा
     होम क्वारंटाइन के दौरान यदि खांसी, बुखार या सांस लेने में कोई कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देंम तो तुरंत आशा या सरकार की हेल्पलाइन नंबर ( 1800-180-5145) पर संपर्क करने की सलाह दी गयी है |
    बनें ज़िम्मेदार, होम क्वारंटाइन में प्रवासी बरतें सावधानियाँ:
    होम क्वारंटाइन में प्रवासी सावधानी बरतकर संक्रमण प्रसार को रोका सकते हैं. इसके लिए मार्गदर्शिका में जरुरी जानकारी दी गयी है :
    • घर पहुंचते ही 21 दिन होम क्वारंटाइन में रहें. इस दौरान अलग कमरे में ही रहें
    • क्वारंटाइन में रहते हुए अनिवार्य रूप से मास्क/गमछा / दुपट्टे से मुँह एवं नाक को ढँक कर रखें
    • मास्क/गमछा / दुपट्टे को साबुन एवं गर्म पानी से धोकर धूप में सुखाएं
    • सिर्फ एक बार के उपयोग के लिए बने मास्क का दोबारा इस्तेमाल न करें
    • हाथों को साफ़ पानी एवं साबुन से बार-बार धोते रहें
    • किसी से भी हाथ मिलाने से परहेज करें
    • घर का सामान जैसे बर्तन, पानी का ग्लास, बिस्तर, तौलिया या अन्य उपयोग की जाने वाली चीजों को घर के दूसरे सदस्य के साथ साझा न करें
    • संक्रमित व्यक्ति के लिए अलग से थाली रखें एवं इसे अलग से गर्म पानी से अच्छी तरह धोएं
    • अपने मोबाइल फोन में आरोग्य सेतु एप्प का उपयोग करें
    • किसी भी अन्य व्यक्ति का प्रवेश अपने घर में नहीं होने दें
    • आपको या आपके परिवार के किसी भी सदस्य में यदि कोविड-19 के लक्षण दिखाई देते हैं तो इसकी सूचना आशा को तत्काल दें
    • आपके घर से केवल एक व्यक्ति ही जरुरी सामानों की खरीदारी के लिए घर से बाहर जाए
    • घर से निकलते समय मास्क/गमछा/दुपट्टा का प्रयोग करें एवं वापस लौटने पर हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं ।

    धमतरी शौर्यपथय

    जिले में पशुओं की संक्रामक बीमारी गलघोंटु एवं एक टंगिया से सुरक्षा के लिये कलेक्टर श्री रजत बंसल के निर्देश अनुसार पशु चिकित्सा विभाग द्वारा पशुओं में आगामी 15 मई से 15 जून तक सघन गलघोंटु एवं एक टंगिया रोग टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत गाय, भैंस, बकरी एवं सूकर में गलघोंटु एवं एक टंगिया रोग का टीकाकरण किया जावेगा। उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं डाॅ.महेश सिंह बघेल से मिली जानकारी के मुताबिक इसके लिये जिले में 43 दल एवं 15 सेक्टर बनाए गए हैं, ताकि माॅनिटिरिंग एवं रिपोर्टिंग किया जा सके। बताया गया है कि गलघोंटु एवं एक टंगिया रोग के टीकाकरण के बीच 15 दिन का अंतराल रखा जाएगा, जिससे पशुओं में प्रतिरोधक क्षमता अच्छी तरह विकसित हो सके। इसके लिए जिला स्तर पर डाॅ. जी.पी.सूर्यवंशी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिनका मोबाईल नम्बर 94242-92616 है। किसी प्रकार की समस्या होने पर पशुपालक द्वारा उक्त नम्बर पर सम्पर्क किया जा सकता है।
    डाॅ.बघेल ने बताया कि गलघोंटु एवं एक टंगिया बहुत ही संक्रामक बीमारी है। इसका समय पर उपचार नहीं मिलने से पशुओं की अकाल मृत्यु हो जाती है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक हानि का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में गौठान ग्राम और दूसरे चरण में शेष ग्रामों के पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा। टीकाकरण के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार एवं संबंधित ग्राम में टीकाकरण के एक दिन पूर्व मुनादी कराने और शीत श्रृंखला प्रबंधन करने के लिए संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है। साथ ही टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए सभी पशुपालकों एवं जन प्रतिनिधियों से सहयोग करने अपील किया गया है।

    हमारा शौर्य

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    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
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