August 19, 2026
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    रायपुर

    रायपुर (6096)

     रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अगुवाई में प्रदेश में सुशासन तिहार की शुरुआत की गई है, जो कि सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों और योजनाओं की व्यापक सफलता का प्रतीक बन चुका है। इस तिहार का उद्देश्य है आम जनता तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुँचाना और उन्हें सशक्त बनाना। वास्तव में निराकरण से जनता के दिलों में खुशियों की बयार बहने लगी है। जनता से सरोकार और संवाद करने वाली सरकार जनता की हितों के लिए उनके द्वारा दिए गए आवेदनों का गम्भीरता से निराकरण कर रही है, जिसका असर दिखाई दे रहा है।
    पतेरापाली के युगेश्वरी को मिला नया आशियाना
     महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखण्ड की ग्राम पंचायत अमलीडीह के आश्रित ग्राम पतेरापाली की निवासी श्रीमती युगेश्वरी ध्रुव ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्के मकान के लिए सुशासन तिहार के दौरान आवेदन प्रस्तुत किया। उनकी इस आवश्यक मांग को प्रशासन ने प्राथमिकता से संज्ञान में लिया। “मोर द्वार साय सरकार“ अभियान के तहत जिले की टीम तुरंत उनके घर पहुँची। त्वरित सर्वेक्षण के बाद यह स्पष्ट हुआ कि वे योजना की पात्र हैं। उनका नाम आवास प्लस सर्वे 2.0 में दर्ज कर लिया गया है। जल्द ही उनके मकान का निर्माण शुरू हो जाएगा। वर्षों से एक पक्के घर का सपना संजोए बैठी श्रीमती ध्रुव की आंखों में अब उम्मीद की चमक है। वह सपना, जो कभी दूर और धुंधला लगता था, अब सरकार की पहल से एक नई सुबह की तरह उनके जीवन में उजाला भरने को तैयार है। अब वह दिन दूर नहीं जब उनका आशियाना केवल एक कल्पना नहीं, बल्कि जीती-जागती सच्चाई होगा। गौरतलब है कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन पूरी सजगता और तत्परता से कार्य कर रहा है।
    दीपा को मिलेगा मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण का लाभ
    इसी बीच सुशासन तिहार 2025 के दौरान आयोजित एक शिविर में महासमुंद के वार्ड नं. 25 कुम्हार पारा की रहने वाली कु. दीपा साहू ने मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के तहत आवेदन किया। आवेदन क्रमांक 25270180824120 के माध्यम से उनकी पात्रता की जांच की गई और वे इस योजना के लिए पात्र पाई गईं। जिले के श्रम पदाधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही इस विशेष योजना के अंतर्गत दीपा को 20,000 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जो 01 मई 2025 को सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी। इस सहायता से अब दीपा अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख पाएंगी। उनका सपना है कि वे शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ें और भविष्य में एक प्रेरणादायक शिक्षिका बनें ताकि वे और भी बेटियों को शिक्षा के महत्व से जोड़ सकें।

    दुर्ग जिला अंतर्गत ग्राम जामगॉव (एम) में 110 एकड़ में स्थापित किया जा रहा है प्रसंस्करण ईकाई
     रायपुर/शौर्यपथ /प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने आज दुर्ग जिले के पाटन विकासखण्ड  अंतर्गत ग्राम जामगांव (एम) में केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई का अवलोकन कर अद्यतन कार्यों का जायजा लिया। वनमंत्री ने यथाशीघ्र गुणवत्ता पूर्ण निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा करने संबंधितों को निर्देशित किया। इस अवसर पर सांसद विजय बघेल व जिला एवं जनपद पंचायत के प्रतिनिधि भी साथ मौजूद थे। लघु वनोपजों के प्रसंस्करण हेतु लगभग 23 करोड़ की लागत से 110 एकड़  क्षेत्र में विभिन्न प्रसंस्करण इकाई स्थापित किया जा रहा है।
     वन मंत्री कश्यप ने इन इकाई में प्रसंस्करण होने वाले उत्पाद तथा गोदामों में भंडारित वनोपज, मिलेट्स फसल, प्रसंस्करण पश्चात् वितरण आदि की भी जानकारी ली। वन मंत्री कश्यप ने सम्पूर्ण इकाई परिसर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को एक पेड़ माँ के नाम पर लोगों से पौध रोपण करने की अपील की। इस अवसर पर डीएफओ चंद्रशेखर परदेशी, एसडीएम लवकेश ध्रुव एवं अन्य विभाग के अधिकारी तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

       रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) के नव नियुक्त अध्यक्ष दीपक म्हस्के के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए और मुख्य अतिथि की आसंदी से उन्हें शुभकामनाएं दी। इस दौरान मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने सीजीएमएससी सप्लाई चैन मैनेजमेंट एसओपी का विमोचन किया।
           मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) की स्थापना वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के कार्यकाल में हुई थी। इस संस्था की भूमिका राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और आवश्यक दवाओं व उपकरणों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। आज यह कॉरपोरेशन केवल आपूर्ति एजेंसी नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
       मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि दीपक म्हस्के  पूर्व में केमिस्ट्री विषय के शिक्षक रहे हैं। यह अनुभव अब उनके नेतृत्व में सीजीएमएससी के कार्यों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बल देगा, जिससे प्रदेश की जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस वर्ष अपनी राज्य स्थापना का रजत जयंती मना रहा है। वर्ष 2000 में जब राज्य का गठन हुआ, तब से लेकर अभी तक प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार बेहतर हुई हैं। प्रदेश में एम्स जैसे संस्थान कार्यरत है और 13 मेडिकल कॉलेजों की भी स्थापना हो चुकी है, जो राज्य सरकार की स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
       मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य किसी भी नागरिक की सबसे बड़ी पूंजी होती है और इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई आयुष्मान भारत योजना ने देश के करोड़ों गरीब परिवारों को निःशुल्क इलाज की सुविधा दी है। छत्तीसगढ़ में भी लाखों परिवार इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्वास्थ्य मंत्री स्वयं ऊर्जावान और सक्रिय हैं और अब कॉरपोरेशन की जिम्मेदारी श्री दीपक महस्के जैसे कर्मठ और योग्य व्यक्ति को मिली है, तो निश्चित रूप से सीजीएमएससी प्रदेश के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने संबोधन के अंत में महस्के को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि उनका कार्यकाल छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को और अधिक प्रभावशाली, पारदर्शी एवं जनहितैषी बनाएगा।
        विधानसभा अध्यक्ष  डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जेनेरिक दवाइयां, सर्जिकल सामग्री, मेडिकल उपकरणों की समय से उपलब्धता और आधारभूत स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती के उद्देश्य के साथ वर्ष 2010 में इस कॉर्पोरेशन का गठन हुआ था। डॉ. सिंह ने कहा कि श्री म्हस्के  जैसे योग्य, ईमानदार, दूरदर्शी और काबिल हाथों में इस कॉर्पोरेशन की जिम्मेदारी दी गई और वे अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में सफल होंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ सिंह ने श्री म्हस्के को नए दायित्व मिलने पर अपनी शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने संबोधित कर सीजीएमएससी के कार्य, स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं, गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी साझा की।
       इस अवसर पर विधायक मोतीलाल साहू, विधायक किरण देव, विधायक अमर अग्रवाल, विधायक सुनील सोनी, विधायक रोहित साहू, विधायक इंद्र कुमार साव, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, मुख्यमंत्री के सचिव पी दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया सहित निगम मंडलों के अध्यक्ष गण, जनप्रतिनिधिगण और अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य में अब गैर संचारी रोग (नॉन-कम्युनिकेबल डिज़ीज़- एनसीडी) जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ , कैंसर के स्क्रीनिंग , इलाज और मॉनिटिरिंग  में डिजिटल तकनीक का उपयोग बड़े स्तर पर किया जा रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत शुरू की गई आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) आईडी इस दिशा में गेमचेंजर साबित हो रही है।
      आभा आईडी के माध्यम से मरीज अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी से आसानी से साझा कर सकते हैं। इस आईडी की मदद से अस्पतालों, क्लीनिकों और लेबोटरी के बीच जानकारी साझा करना भी आसान हो गया है, जिससे इलाज की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
      छत्तीसगढ़ में आभा आईडी को राष्ट्रीय एनसीडी पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे मरीजों की स्क्रीनिंग, डायग्नोसिस, इलाज और मॉनिटरिंग की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो गई है।  एएनएम और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर  के लिए मोबाइल और टैबलेट आधारित ऐप्स तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए वेब पोर्टल उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे काम करना आसान हो गया है।
      संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. प्रियंका शुक्ला का कहना है कि आभा आईडी बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इससे एनसीडी जैसी बीमारियों की रोकथाम और प्रबंधन में मदद मिलेगी। दुर्ग जिले में इस पहल का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। जनवरी 2024 से फरवरी 2025 के बीच, 12,627 आभा आईडी को एनसीडी मरीजों के रिकॉर्ड से जोड़ा गया। इसके परिणामस्वरूप, आभा से जुड़े मरीजों में फॉलोअप रेट 68 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि बिना आभा आईडी वाले मरीजों में यह केवल 37 प्रतिशत रहा। इसी तरह, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ नियंत्रण में भी आभा से जुड़े मरीजों में सुधार देखा गया। 49 प्रतिशत मरीज नियंत्रण में रहे, जबकि गैर-जुड़े मरीजों में यह आंकड़ा 29 प्रतिशत रहा। डब्ल्यूएचओ की मदद से स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है।
      राज्य सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम इस पूरी प्रक्रिया पर सतत निगरानी रख रही है। आभा आईडी को आधार की डेमोग्राफिक जानकारी से जोड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डब्ल्यूएचओ ने हिंदी में प्रशिक्षण वीडियो भी बनाया है। छत्तीसगढ़ में यह डिजिटल पहल ना सिर्फ बीमारियों के रोकथाम में मददगार साबित हो रही है, बल्कि इससे स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ा है।

    अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने की दिशा में बड़ा कदम
       रायपुर /शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनकल्याण के संकल्प के साथ काम कर रही है, और हमारा उद्देश्य है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुलभ, सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज मंत्रालय नवा रायपुर में डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर में चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार के सम्बन्ध में आयोजित बैठक में अधिकारियों को दिशानिर्देश देते हुए यह बात कही। बैठक में स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में अस्पताल की संरचना और सेवाओं को आधुनिक और जनसुलभ बनाने के लिए विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
    बैठक में मंत्री  जायसवाल ने निर्देश दिए कि चिकित्सालय में आवश्यक सभी चिकित्सा उपकरण, तकनीकी संसाधन, और मरीजों की सुविधाओं की उपलब्धता को प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने  कहा कि अस्पताल में  विस्तारीकरण और विद्युतीकरण के कार्यों में विभागीय समन्वय मजबूत किया जाए, ताकि निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण परिणाम प्राप्त हो सकें।
    बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा सुश्री किरण कौशल, चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर के डीन, अस्पताल प्रबंधन प्रतिनिधि एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

    मनरेगा श्रमिकों को पानी पिलाकर कर रहे जीवन यापन
    रायपुर/शौर्यपथ /महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना बनी दिव्यांग दंपति का सहारा। यह कहानी ग्राम पंचायत खजुरी जनपद पंचायत प्रतापपुर जिला सूरजपुर के दिव्यांग पति व पत्नी की है। जो जन्म से ही आंखों की रोशनी खो चुके हैं  विवाह के बाद जीवन यापन में आई आर्थिक तंगी मे मनरेगा योजना सहारा बना है। जन्म से ही इस दिव्यांगता के अभिशाप को ढोकर चल रहे दंपत्ति के सामने आर्थिक मदद के तौर पर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के पहल से जिला प्रशासन के द्वारा इनकी जीवन शैली में सुधार हेतु कई योजनाओं का लाभ देते हुए इस दंपत्ति का मनरेगा में जॉब कार्ड बनाया गया और दंपत्ति कार्यस्थल पर मजदूरों को पानी पिलाकर अपने कर्तव्य का निर्वहन भी कर रहे हैं। ग्राम पंचायत खजुरी में श्यामसाय पैकरा एवं उनकी पत्नी निरपति दोनो आंखों से दिव्यांग है। इनके पास कोई काम नहीं होने की स्थिति में सोसायटी से मिलने वाला राशन एवं निरपति को मिलने वाला पेंशन ही इनके जीवन निर्वाह करने का साधन था। बढ़ती महंगाई में दम्पत्ति को आर्थिक समस्याओं का सामना कर पड़ रहा था, जिससें जिला प्रशासन के सामने गुहार लगाकर अपने लिए रोजगार सृजन किया व मनरेगा में जाबकार्ड बनवा कर मजदूरों को पानी पिलाकर जीवनयापन कर रहे हैं। आर्थिक और कई समस्याओं से जूझ रहे इस दिव्यांग जोड़े के नाम जॉबकार्ड जारी होने तथा अब मजदूरी मिलने के बाद इनके सामने भरण पोषण की समस्या खत्म हो गई है।
        जिला प्रशासन के नजर में आने से इनको जिला प्रशासन की ओर से प्रोत्साहन राशि भी प्रदान किया जा रहा हैं। बहरहाल जन्म से ही इस दिव्यांग दंपत्ति के सामने आर्थिक मदद के तौर पर मनरेगा जॉंबकार्ड जारी कर रोजगार उपलब्ध करा दिया गया है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि इस दम्पत्ति ने विकट परिस्थिति में भी भीख मांगकर गुजारा करने की बजाय अपने लिए रोजगार का सृजन किया है और कार्यस्थल पर मजदूरों को पानी पिलाकर अपने कर्तव्य का निर्वहन भी कर रहे हैं। शासन की मंशानुरूप मनरेगा इस बेसहारा परिवार के लिए बड़ा सहारा बन गया है।

     रायपुर/शौर्यपथ /जंगलों से घिरे कोरबा जिले के लेमरू ब्लॉक के घोंघीबहरा गांव की श्रीमती दिलेशरी मंझुवार के घर हाल ही में खुशियों की लहर दौड़ गई। बेटी अनुष्का की छठी का आयोजन ऐसे समय हुआ, जब यह परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। लेकिन इन खुशियों के पीछे एक मजबूत सहारा बनी छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना, जिसके तहत श्रीमती दिलेशरी को हर महीने एक हजार की आर्थिक मदद मिल रही है।
        गर्भावस्था के दौरान श्रीमती दिलेशरी को कई तरह की चिंताएं सताती थीं। घर की माली हालत ऐसी नहीं थी कि बच्चे के जन्म के बाद कोई खास आयोजन कर सकें। लेकिन जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा महतारी वंदन योजना की शुरुआत की गई, तो श्रीमती दिलेशरी ने भी आवेदन किया। योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ और गर्भावस्था के दौरान यह राशि उनके लिए राहत बन गई।
        बेटी अनुष्का के जन्म के बाद जब छठी का समय आया, तो खाते में जमा योजना की राशि ने उनकी सारी चिंता दूर कर दी। श्रीमती दिलेशरी ने खुशी-खुशी छठी का आयोजन किया। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के लिए किसी से उधार नहीं लेना पड़ा, न ही किसी से मदद मांगनी पड़ी। मजदूरी पर आधारित आय वाले इस परिवार के लिए यह योजना अब केवल एक सहायता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया गया कदम है। श्रीमती दिलेशरी अब घर से लगे जमीन को समतल कर खेत बनाना चाहती हैं और इसके लिए भी योजना की राशि बचा रही हैं।
        महतारी वंदन योजना हमारे जैसे गरीब परिवारों के लिए जीवन की सबसे बड़ी ताकत बनकर आई है, श्रीमती दिलेशरी कहती हैं। यह योजना हमें आत्मसम्मान के साथ जीने का हक देती है। जरूरत के समय अब हमें किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता। राज्य सरकार की यह योजना न सिर्फ आर्थिक सहायता का माध्यम बन रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास और स्वावलंबन की भावना भी जगा रही है।

    रायपुर /शौर्यपथ /हर घर जल योजना के तहत् महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखण्ड का ग्राम गबोद, में तस्वीर बदल गई है। उल्लेखनीय है कि ग्राम गबोद हरियाली और स्वच्छता के लिए “ग्रीन गाँव” के नाम से प्रसिद्ध है। जल जीवन मिशन के द्वारा हर घर नल हर घर जल योजना से हुए सफलता पूर्वक कार्यों के कारण अब गबोद एक और बड़ी उपलब्धि के साथ नई पहचान बना रहा है।
    यह गांव अब “हर घर जल ग्राम“ घोषित हो चुका है। 14 जनवरी 2025 को गबोद गांव को यह उपाधि तब मिली जब प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना के तहत यहां हर घर में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई। यहां गांववासियों का अनुशासन और देशभक्ति भी तारीफे काबिल है। हर सुबह 7ः30 बजे गांव का हर नागरिक अपने घर के बाहर आकर राष्ट्रगान में भाग लेता है।
    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 89.39 लाख रुपये की लागत से गांव में 40 किलोलीटर की उच्चस्तरीय जलागार और 760 मीटर पाइपलाइन के साथ 138 घरों में नल कनेक्शन प्रदान किए गए। इस योजना के तहत अब गांव के हर घर तक शुद्ध जल पहुंच रहा है। इससे पहले महिलाओं और बच्चों को गांव के 5 हैंडपंप और कुछ कुओं से पानी लाना पड़ता था। बरसात के समय पानी लाने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था, और कभी-कभी विवाद भी हो जाते थे। अब यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
    महिलाओं को स्वच्छ जल मिलने से स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और समय की बचत होने से वे अब आर्थिक गतिविधियों में भाग ले रही हैं। बच्चों को पढ़ाई का समय मिलने लगा है और गर्भवती महिलाओं को भी विशेष लाभ मिला है, जिससे गर्भपात जैसी समस्याएं कम हुई हैं। गांव के लोग अब जल संरक्षण और पौधारोपण जैसे कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। ग्रीन गाँव का यह उदाहरण अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन रहा है।
    गांव की महिला श्रीमति पूजा सिंह ठाकुर ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि, “अब पानी की वह समस्या नहीं रही जो पहले होती थी। हम सब सरकार के आभारी हैं।” गबोद ग्राम के समस्त नागरिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को इस उपलब्धि के लिए धन्यवाद दिया है।

    बिहान ने संवारी नीलबती की जिंदगी
    रायपुर/शौर्यपथ /राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित ‘बिहान’ योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत महिलाओं और युवतियों को सशक्त व आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना से जुड़कर जिले की कई महिलाएं आज अपने पैरों पर खड़ी हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं। इन्हीं में से एक हैं माकड़ी विकासखंड के ग्राम गुमड़ी की श्रीमती नीलबती नाग, जिन्होंने ‘बिहान’ से जुड़कर न केवल अपने परिवार को संबल दिया, बल्कि अपनी नई पहचान भी बनाई।
    पहले नीलबती नाग के परिवार को जीवनयापन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। वे और उनके पति रामदयाल नाग मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। कठिन आर्थिक हालात और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वर्ष 2014 में नीलबती ‘बिहान’ योजना से जुड़ीं और महिला बचत स्व-सहायता समूह की सदस्य बनीं। आज वे समूह में सचिव के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
    माकड़ी विकासखंड की टीम के मार्गदर्शन में उन्होंने समूह की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया और उन्हें बिहान से जोड़ा। समूह से ऋण प्राप्त कर नीलबती ने अपने गांव में एक किराना दुकान की शुरुआत की। उन्होंने दुकान को सुव्यवस्थित ढंग से सजाया और स्थानीय जरूरत के अनुसार आवश्यक वस्तुओं को रखीं, जिससे गांववासियों को सुविधा मिली। आज नीलबती को किराना दुकान से प्रतिमाह लगभग 8,000 रुपये की आय हो रही है। इसके अलावा महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें हर महीने 01 हजार रूपए प्रतिमाह लाभ भी मिल रहा है। शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर न केवल आत्मनिर्भर हुईं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार किया। उनकी यह सफलता उन तमाम ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है, जो जीवन में बदलाव लाने की इच्छा रखती हैं। नीलबती नाग ने यह साबित किया कि महिलाएं अपनी दृढ़ संकल्प से अपने परिवार के जीवन को नई दिशा दे सकती हैं।

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