August 07, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    दुर्ग / शौर्यपथ / भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिक्षक दिवस के अवसर पर आज 5 सितंबर 2020 पहली बार वर्चुअल तरीके से आयोजित पुरस्कार समारोह में देश भर के 47 शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने अपने भाषण में पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और स्कूली शिक्षा में गुणात्मक रूप से सुधार लाने के लिए शिक्षकों द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं है। उन्होंने शिक्षक के रूप में महिलाओं द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना की।
    शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवरा सिरसा दुर्ग की फिजिक्स की व्याख्याता सुश्री सपना सोनी इस वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित होने वाली राज्य से एकमात्र शिक्षक है तथा पूरे देश से केवल 47 शिक्षक की सूची में शामिल हुई हैं । उनका चयन विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन एवं अध्यापन कार्य में लगातार किए गए नवाचार के कारण हुआ है। उनके प्रयास से विगत 12 वर्षों से जेवरा सिरसा स्कूल के बच्चों का परीक्षा परिणाम बोर्ड परीक्षा में 93 से 100प्रतिशत तक रहा है।
    केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने सुश्री सपना को दी बधाई
    सुश्री सपना सोनी को एनएटी2020 जीतने के लिए बधाई। नवीन मॉडल और आईसीटी.आधारित शिक्षण सामग्री के आपके उपयोग ने छात्रों को एक वैज्ञानिक स्वभाव विकसित करने में मदद की है।

    दुर्ग । शौर्यपथ । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार बनने के बाद महती योजना गौठान में शहर एवम ग्रामीण इलाकों में आवारा घूमने वाले गोधन के लिए आशियाना बनाया गया किन्तु दुर्ग निगम के अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री के इस महत्त्वपूर्ण योजना की खुले आम धज्जी उड़ रही है । सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दुर्ग निगम के स्वयम्भू सर्वेसर्वा प्रभारी ईई मोहनपुरी गोस्वामी जो बिना निविदा के कार्यो को अपने मनपसंद ठेकेदारों को देने के लिए मशहूर है के द्वारा आज शहर के आवारा पशुओं के बजाए एक निजी डेयरी से कमजोर गोधन को गौठान पहुंचाया गया । जब तक इन पशुओं से डेयरी संचालक की आवक थी तब तक डेयरी संचालक ने इन्हें अपने कमाई का जरिया बनाया किन्तु जब इन पशुओं से कमाई का जरिया खत्म हो गया तो इन्हें गौठान में भेजने का प्रबंध किया जबकि शहर में अभी भी आवारा गाय बैलों की भरमार है किंतु समुचित व्यवस्था ना होने के कारण इन्हें अभी तक गौठान नही ले जाया जा सका ऐसे में निजी डेयरी के संचालकों के गोधन को गौठान में भेजने की बात समझ से परे है । वैसे भी दुर्ग निगम में मनमानी फैसले लेने के लिए मोहनपुरी गोस्वामी मशहूर है मात्र डेढ़ साल के दुर्ग निगम के कार्यकाल में मोहनपुरी गोस्वामी लगभग हर कार्य मे विवादित रहे है किंतु निगम प्रशासन के उच्चाधिकारी मौन है , महापौर मौन है , दुर्ग विधायक मौन है चाहे वो कोरोना आपदा के समय सूखा राशन खरीददारी का मामला हो , चाहे प्रतीक्षालय को तोड़कर विधायक निधि से नए प्रतीक्षालय निर्माण का मामला हो , चाहे बिना निविदा के अपने लोगो को ठेका देने का कार्य हो हर कार्य इनका विवादित ही रह । कहने को तो नियम के ज्ञाता है किंतु शायद ही कोई कार्य हो जो नियम से किये हो । उसी कड़ी में आज निजी डेयरी से गोधन को जो काफी कमजोर है और अब शायद डेयरी मालिक के काम की नही रही है को गौठान पहुंचा दिया गया । क्या मोहनपुरी गोस्वामी ऐसा ही कार्य शहर की जनता के हित मे करेंगे और आवारा पशु जो सड़को पर जीवन बिता रहे उन्हें गौठान में पहुंचाने की दिशा में त्वरित कोई कदम उठाएंगे या अभी सिर्फ निजी डेयरी मालिक की सेवा करेंगे ? क्या नियम विरुद्ध इस कार्य के लिए दुर्ग निगम के सयुक्त कलेक्टर स्तर के निगम आयुक्त मामले को संज्ञान में लेंगे ? क्या शहर में सुशां कई बात करने वाले जननायक विधायक वोरा मामले को संज्ञान में लेकर उच्च स्तर पर अधिकारियों या मंत्रियों को अवगत कराएंगे ? क्या शहर के महापौर मामले को संज्ञान में लेकर निगम आयुक्त को कार्यवाही का निर्देश देंगे या सभी जिम्मेदार अधिकारी , जनप्रतिनिधि मौन रहकर प्रभारी ईई के नियम विरुद्ध कार्य मे मौन रहकर अप्रत्यक्ष सहयोग देंगे ?

    शौर्यपथ विशेष 

    दुर्ग / शौर्यपथ / इसे दुर्ग शहर के विकास की बदकिस्मती ही कहा जाए कि दुर्ग शहर में विकाश के हर कार्य लेट हो रहे है और राशि की कमी की बात हो रही है . वही दुर्ग से लगे हुए दो निगम क्षेत्र भिलाई और नवनियुक्त निगम रिसाली में विकास के कार्यो की बौछार हो रही है किन्तु दुर्ग निगम इससे अभी भी अछुता है . कल प्रभारी मंत्री की समीक्षा बैठक में इस बात की ओर इशारा दुर्ग विधायक अरुण वोरा के द्वारा किया भी गया . दुर्ग में अभी भी विकास की गंगा कही लुप्त है . जनवरी से दुर्ग निगम में कांग्रेस की सत्ता है और प्रदेश में लगभग दो साल से कांग्रेस की सत्ता है बावजूद इसके दुर्ग में विकास के नाम पर अभी भी मुंगेरी लाल के हसीन सपने देखने को ही मिल रहे है जबकि दुर्ग के इसी निगम क्षेत्र में प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री का भी निवास स्थान है ऐसे में पीडब्ल्यूडी के कार्यो में भी देरी होना शहर के लिए शहर के विकास के लिए चिंता का विषय है .
    विकास कार्यो के लिए क्षेत्र के जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी होती है कि सरकार से फंड लाये किन्तु जिस तरह दुर्ग के विधायक का ब्यान आया उससे यही प्रतीत होता है कि दुर्ग निगम क्षेत्र को प्रदेश सरकार कोई महत्तव नहीं देती शायद यही कारण है कि देश के सबसे कद्दावर नेताओ में शुमार मोतीलाल वोरा के गृह क्षेत्र में विकास की गंगा लुप्त है . अगर विधायक वोरा की बातो को माने तो उनके अनुसार शासकीय अधिकारी भी इसके जिम्मेदार है क्योकि दुर्ग विधान सभा क्षेत्र और निगम क्षेत्र एक होने से अधिकतर विकास कार्य निगम के द्वारा होना होता है किन्तु विधायक की माने तो निगम आयुक्त विधायक की नहीं सुनते . पूर्व में भाजपा सरकार के समय भी दुर्ग के विधायक द्वारा कभी निगम आयुक्त के सन्दर्भ में इस तरह की बात नहीं कही गयी थी किन्तु आज सत्ता में होने के बाद भी अगर सत्ता पक्ष के विधायक द्वारा खुद के शहरी सरकार पर ऊँगली उठ रही है तो ये चिंता का विषय है दुर्ग की जनता के लिए . क्योकि ये जगविदित है कि शहरी सरकार की बागडौर महापौर बाकलीवाल को देने में अहम् भूमिका विधायक वोरा की ही थी उनका ही प्रयास था कि दुर्ग कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद मदन जैन को दरकिनार किया गया और बगावती तेवर अपनाने वाले पार्षद अब्दुल गनी को पीडब्ल्यूडी का प्रभार देकर शांत करवा लिया गया .
    इसमें कोई दो राय नहीं है कि निगम में अधिकारियों की मनमानी चरम सीमा पर है जिसका ज्वलंत उदहारण प्रभारी ईई मोहन पूरी गोस्वामी है जो विगत दो माह में 15-20 कार्य बिना निविदा के अपने मनपसंद ठेकेदार को दे दिए और नियमो का आवश्यक्ताओ की आड़ में लाखो का काम बिना निविदा के हो गया किन्तु विधायक द्वारा इस मामले पर कभी कोई आपत्ति नहीं उठाई गयी जो कि शहर में चर्चा का विषय है .
    ऐसे ही मामले में आयुक्त बर्मन भी कई जगह मौन रहते है जिसका ज्वलत उदहारण सब इंजिनियर भीम राव है जिसके द्वारा अमृत मिशन के कार्य में लगातार लापरवाही बरती जा रही है जिसकी आलोचना कई बार विधायक वोरा भी कर चुके है किन्तु आयुक्त बर्मन द्वारा एक कुषाण राजनेता की तरह भीम राव के कार्यो की जांच करवाने का आश्वासन बस दे रहे है किन्तु जाँच की तारीख नहीं बता रहे है वही व्ही. पी. मिश्रा को बिना प्रभार के महीनो से बैठा रखे है .
    निगम की कार्य प्रणाली को देखे तो विधायक वोरा द्वारा प्रभारी ईई मोहन पूरी गोस्वामी के कार्यो पर कभी असंतोष नहीं जताई गयी . क्या विधायक निधि के कार्यो को देखने का ये इनाम मिल रहा है वही आयुक्त द्वारा अमृत मिशन में हो रही लापरवाही पर मौन साधे बैठे है क्या अमृत मिशन के कार्यो पर लापरवाही का आरोप विधायक द्वारा लगाया जा रहा है इसलिए आयुक्त मौन है ?

    रायपुर / शौर्यपथ / स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में प्रतिदिन 22 हजार सैंपल कलेक्शन एवं जांच का लक्ष्य रखा है। कोविड-19 के बढ़ते मामलों पर नियंत्रण के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच हेतु सभी जिलों के लिए लक्ष्य तय किए गए हैं। आरटीपीसीआर और ट्रू-नाट मशीन से जांच के लिए सभी जिलों में सैंपल संकलित किए जा रहे हैं। वहीं रैपिड एंटीजन किट से भी सभी जिलों में कोरोना संक्रमण के संभावित मरीजों की जांच की जा रही है।
    स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को परिपत्र जारी कर प्रतिदिन तय लक्ष्य के अनुसार सैंपल कलेक्शन और जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रैपिड एंटीजन किट से जांच के भी निर्देश दिए हैं।
    आरटीपीसीआर एवं ट्र-नाट विधि से जांच के लिए सैंपल कलेक्शन हेतु प्रशिक्षित स्टॉफ नर्स,ए.एन.एम., एम.पी. डब्लू. फॉर्मासिस्ट, नेत्र सहायक, दंत सहायक इत्यादि की सहायता लेने कहा गया है।
    स्वास्थ्य विभाग ने रोजाना रायपुर जिले के लिए 2440, गरियाबंद के लिए 500, धमतरी, महासमुंद, कबीरधाम और बालोद के लिए 630-630, दुर्ग के लिए 1510, बेमेतरा के लिए 580, बलौदाबाजार-भाटापारा के लिए 670, रायगढ़ के लिए 1280, कोरबा और जांजगीर-चांपा के लिए 970-970, जशपुर के लिए 500, बस्तर, कांकेर और कोंडागांव के लिए 605-605, दंतेवाड़ा के लिए 590, सुकमा के लिए 490, नारायणपुर के लिए 480, बीजापुर के लिए 410, सूरजपुर और बलरामपुर-रामानुजगंज के लिए 530-530, कोरिया के लिए 570, सरगुजा के लिए 940, मुंगेली के लिए 600, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के लिए 350, बिलासपुर के लिए 1540 तथा राजनांदगांव के लिए 1340 सैंपल कलेक्शन एवं जांच का लक्ष्य रखा है।
    प्रदेश भर में प्रतिदिन आरटीपीसीआर जांच के लिए 5405 और ट्रू-नाट विधि से जांच के लिए 3520 सैंपल संकलित किए जाएंगे। वहीं रैपिड एंटीजन किट से रोज 13 हजार से अधिक सैंपलों की जांच की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, शहरी व ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए भी जिला स्तर पर प्रतिदिन रैपिड एंटीजन किट से जांच के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है।

    बिलासपुर / शौर्यपथ / प्रदेश के गृह, जेल, लोक निर्माण विभाग तथा सहकारिता मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये अस्पतालों में बेड एवं वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाने तथा होम आइसोलेशन की अच्छी व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।
    मंत्री साहू ने आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्पतालों में मरीजों की दवाईयों के अलावा भोजन, नाश्ता की अच्छी व्यवस्था रखी जाये। इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिलनी चाहिये। उन्होंने प्रतिदिन कोरोना जांच के लिये ज्यादा से ज्यादा सैम्पल लेने का निर्देश दिया। उन्होंने सिम्स के अलावा अपोलो तथा अन्य प्राइवेट अस्पताल के संचालकों की बैठक लेकर उन्हें कोरोना मरीजों के इलाज के लिये बेहतर व्यवस्था बनाने के निर्देश दिये जायें ताकि मरीजों को रायपुर रेफर न करना पड़े।
    प्रभारी मंत्री ने अस्पतालों में उपलब्ध वेंटिलेटर, बेड व अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि जिला अस्पताल में 40 तथा निजी अस्पतालों में 30 वेंटिलेटर अभी उपलब्ध हैं। अन्य प्राइवेट अस्पतालों से बात चल रही है जिससे वेंटिलेटर की संख्या बढ़कर 96 हो जायेगी। श्री साहू ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को कोविड अस्पतालों का औचक निरीक्षण करने कहा ताकि वहां की व्यवस्था निरंतर अच्छी हो सके।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने आज नगर निगम क्षेत्र को कंटेन्टमेंट जोन घोषित कर सभी व्यवसायिक संस्थानों को बंद करने के संबंध में राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य एवं नगर निगम के अधिकारियों की बैठक ली। कलेक्टर वर्मा ने कहा कि जिले में कोरोना संक्रमण से बढ़ती हुई मरीजों की संख्या चिंताजनक है। नगर निगम क्षेत्र में निरंतर कोरोना पॉजिटिव मरीज की संख्या बढ़ रही है। संक्रमण के इस चेन की कड़ी को तोडऩा जरूरी है। इसके लिए नगर निगम क्षेत्र के सभी व्यवसायिक संस्थानों को बंद किया गया है।
    उन्होंने कहा कि इस अवधि में संक्रमण से बचाव के लिए नागरिक घर पर ही सुरक्षित रहें। बिना कारण घर से निकलने पर सख्त दण्डात्मक कार्रवाई की जाए। कोई भी व्यवसायिक संस्थाएं खोले जाने पर सील बंद की कार्रवाई करें। पुलिस तथा नगर निगम की टीम पूरे क्षेत्र में कड़ी निगरानी करें। नगर निगम क्षेत्र के लिए वार्ड प्रभारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है, वे अपने टीम के साथ सभी वार्डों में निरीक्षण करेंगे तथा प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने वालों पर चालानी कार्रवाई करें।
    कलेक्टर ने कहा कि जिले की फैक्ट्रियां चालू रहेंगी। फैक्ट्री प्रबंधकों द्वारा वहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए पास की व्यवस्था की जाए। जिसमें आने-जाने का समय लिखा हो। वही शासकीय कर्मचारी भी अपना पहचान पत्र साथ रखें। कलेक्टर वर्मा ने कहा कि जिन मरीजों में कोरोना के कोई लक्षण नहीं है, उन्हेंं घर में ही आईसोलेशन में रखा जाएगा। ऐसे मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है। इन मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवाई एवं अन्य सुविधा उपलब्ध कराएंगे तथा लगातार मानिटरिंग भी करते रहेंगे। जिन घरों में कोरोना के मरीज मिलते है, वे घर से बाहर न जाए और कोई बाहर से घर में न आए। उन्होंने कहा कि सर्विलेंस टीम के माध्यम से सर्दी, खांसी, बुखार लक्षण वाले मरीजों की जानकारी ले तथा उनका सेंपल लेकर जांच कराए। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए घरों से नहीं निकलनेे, मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग तथा कोरोना के प्रोटोकाल का पालन करने कहा है। उन्होंने कोरोना के बचाव एवं सुरक्षा के लिए लोगों में जागरूकता लाने कहा है।
    कलेक्टर ने कहा नवरात्र का पर्व आने वाला है, जिसे पिछले चैत्र नवरात्र पर्व की तरह ही मनाया जाएगा। जिन स्थानों पर देवी प्रतिमा स्थापित की जाएगी, वहां प्रोटोकाल का पालन करना अनिवार्य होगा। बैठक में अपर कलेक्टर सीएल मारकंडे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी, नगर निगम आयुक्त चंद्रकांत कौशिक, एसडीएम मुकेश रावटे सहित पुलिस विभाग एवं जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।

    जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री किसान के हितग्राहियों को केसीसी प्रदाय करने के लिए आए आवेदनों के प्रकरणों को शीघ्र निराकरण करने के निर्देश जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी  तीर्थराज अग्रवाल ने गुरूवार को हुई जिला स्तरीय बैंकर्स की समीक्षा बैठक में बैंक के अधिकारियों को दिए।
    जिपं सीईओ अग्रवाल ने बताया कि कलेक्टर यशवंत कुमार के निर्देश पर बैठक का आयोजन किया गया। बैठक जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित की गई। जिसमें बताया गया कि भारत सरकार के निर्देशानुसार पीएम किसान हितग्राहियों को केसीसी प्रदाय करने के लिए विभिन्न शिविर के माध्यम से किसानों से 23 हजार 49 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 5 हजार 458 प्रकरण स्वीकृत किये गए हैं। लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने कहा। इसी तरह ऋण जमा अनुपात, वार्षिक साख योजना पर चर्चा की गई। इसके अलावा पशुपालक विभाग, उद्यानिकी विभाग के बैंको को भेजे गए प्रकरणों पर चर्चा करते हुए प्रकरणों को स्वीकृत करने कहा गया। वहीं मछली पालन विभाग, विभिन्न शासकीय योजनांतर्गत ऋण वितरण की समीक्षा की गई। जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के पीएमईजीपी योजनांतर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 65 भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसकी सूची के अनुसार प्रकरणों को स्वीकृति प्रदान करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजनांतर्गत 26 का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। खादी ग्रामोद्योग विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष में 2020-21 में 51 भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें 33 प्रकरण पर स्वीकृति मिली शेष प्रकरण बैंक के माध्यम से स्वीकृति किए जाने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना, जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति के प्रकरणों पर चर्चा की गई। इसके अलावा बीसी सखियों को ऋण प्रकरणों पर भी चर्चा करते हुए प्रकरणों का निराकरण करने कहा गया। बैठक सभी विभागीय अधिकारी, जिला स्तरीय बैंक के अधिकारी मौजूद रहे।

    नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सीआरपीएफ के अतिरिक्त बटालियन की तैनाती के साथ मोबाइल टावरों की स्थापना की मांग
    बस्तर के युवाओं के लिए विशेष भर्ती रैली और बस्तरिया बटालियन के गठन का किया आग्रह

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नक्सल उन्मूलन की कार्ययोजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए केंद्र से सहयोग मांगा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश के गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखते हुए पूर्व में आबंटित 7 सीआरपीएफ बटालियनों को राज्य को अतिशीघ्र उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने बस्तर के युवाओं के लिए विशेष भर्ती रैली एवं एक अतिरिक्त बस्तर बटालियन के गठन का भी आग्रह किया है।
    पत्र में मुख्यमंत्री ने लिखा है कि वर्ष 2018 में गृह मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के लिए 7 अतिरिक्त सीआरपीएफ बटालियन आबंटित की गई थी, जिसे दक्षिण बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया जाना था। चयनित लोकेशन पर निर्माण कार्य पूर्ण करा लिया गया है, इसलिए पूर्व में आवंटित 7 सीआरपीएफ बटालियनों को राज्य को अतिशीघ्र उपलब्ध कराया जाए।
    पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा है कि नक्सल प्रभावित जिलों में दूर संचार सुविधा में वृद्धि हेतु 1028 मोबाइल टावरों की स्थापना की स्वीकृति दी गयी थी, इसके लिए लोकेशनों का चयन कर गृह मंत्रालय को भेजा जा चुका है। टॉवरों की स्थापना जल्द किया जाए, जिसका लाभ आम लोगों के साथ ही सुरक्षा बलों को भी हो सके। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पत्र में बस्तर के युवाओं के लिए सेना द्वारा विशेष भर्ती रैली के आयोजन का आग्रह भी किया है।
    उन्होंने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की एक अतिरिक्त बस्तरिया बटालियन के गठन की भी बात कही है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होने के साथ ही नक्सल मोर्चे पर भी बेहतर परिणाम मिल सके। मुख्यमंत्री ने बस्तर संभाग में प्री फेब्रिकेटेड तकनीक से पुल पुलिया एवं उन्नत तकनीक से सड़कों के निर्माण पर विचार करने का आग्रह किया है, ताकि कम समय में उच्च गुणवत्ता से निर्माण कार्य सम्भव हो सके।
    मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में आशा जताते हुए कहा है केंद्र से सहयोग मिलने पर छत्तीसगढ़ राज्य को नक्सल समस्या से मुक्त करने की दिशा में हमें निर्णायक बढ़त प्राप्त होगी।

    दुर्ग / शौर्यपथ / यातायात विभाग और आरटीओं विभाग को लोगों की जान की परवाह बिल्कुल नही है। कहीं भी ये केवल दोपहिया वाहन वालों को कभी हेलमेट के नाम पर तो कभी कुछ के नाम पर चालान काटने तक ही सीमित है, लोग मरे तो मरे इनको क्या करना। भारी वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाना अनिवार्य है ताकि उनके तेज गति पर नियंत्रण लग सके, लेकिन आरटीओं के अधिकारियों और कर्मचारियों को केवल शहर के भारी वाहनों खासतौर से हाईवा वालों से केवल मंथली से मतलब है। लोग मरे चाहे जाये चुल्हा भाड़ में की तर्ज पर केवल ये लोग कार्य कर रहे हैं।
    पिछले कई सालों से सबसे अधिक अवैध और वैध सामानों की ढुलाई सबसे अधिक हाईवा वाहनों से ही हो रही है, और इनकी गति पर नियंत्रण नही हेै, ये ब्रेकर हो, गड्डा हो, चाहे सामने कोई हो, उनको कुचलते दबाते जल्दी निकलने से मतलब है। जबसे हाईवा वाहनों की शहरी और शहरी क्षेत्र से लगे गांवों में बाढ आई है तब से हाईवा लोगों के जान का काल बन गया है। आये दिन हाईवा के चपेट में आकर लोग मर रहे है।
    आरटीओं विभाग कभी ये देखने या जांच करने नही जाते कि जीपीएस सिस्टम लगा है कि नही लगा है तो उसमे छेड़छाड़ तो नही किया गया है, यहां तब कि जब फिटनेट चेक कराने गाड़ी आती है वहां भी आपसी लेनदेन कर बिना जीपीएस के जांच के फिटनस ओके कर दिया जा रहा है। इस लापरवाही के कारण लोगों की जान जा रही है और तेज रफ्तार हाईवा के कारण लोग असमय काल की गाल में समा रहे हैं।
    इसी प्रकार का आज फिर एक मामला सामने आया है कि पूर्व संसदीय सचिव लाभचंद बाफना के भाई अशोक कुमार बाफना की तेज रफ्तार हाईवा क्रमांक सीजी 07 बीडी 0780 ने आज प्रात: दस बजे बागडूमर के पास सायकल से जा रहे पति पत्नी को जोरदार ठोकर मार दिया जिससे घटना स्थल पर ही साठ वर्षीय मोतीन बाई की मौत हो गई वहीं उसका पति माखन सिंह दूर फेंका गया जिससे उसको मामूली चोट आई और पतिबच गया। बताया जाता है कि पति माखन सिंह अपनी पत्नी मोतिन बाई को सायकल पर बिठाकर अपनें गांव से केनरा बैंक रूपये निकालने जा रहा था।

    दुर्ग / शौर्यपथ / प्रभारी मंत्री मोहम्मद अकबर ने सृमीक्षा बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा कोविड केअर पर की। उन्होंने कहा कि कोविड मरीजों को संक्रमण के दायरे से बाहर लाना, उन्हें हर संभव सुविधा उपलब्ध कराना अभी सर्वोच्च प्राथमिकता का कार्य है। अस्पतालों में व्यवस्था मुकम्मल होनी चाहिए। साफ सफाई लगातार होती रहे। भोजन आदि का समय बिल्कुल नियमित बना रहे। गंभीर मरीजों की स्थिति पर विशेष नजर रखें। अतिरिक्त वेंटिलेटर का इंतजाम भी कर लें। सीटी स्कैन की व्यवस्था भी मुकम्मल हो। मंत्री ने कहा कि कोविड के लिए स्टीम, गर्म पानी वगैरह बहुत उपयोगी होते हैं। यह व्यवस्था होती रहे। खाने की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए। बैठक में सांसद विजय बघेल, संभागायुक्तटीसी महावर, आईजी विवेकानंद सिन्हा, सीएफ श्रीमती शालिनी रैना, कलेक्टर डॉ. सवृर्1ेश्वर नरेंद्र भुरे, एसपी प्रशांत ठाकुर, नगर निगम आयुक्त भिलाई ऋतुराज रघुवंशी, जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक एवं अपर कलेक्टर प्रकाश सर्वे, बीबी पंचभाई उपस्थित थे। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग हो रही है। खाने की गुणवत्ता देखने अधिकारी औचक निरीक्षण करते हैं। साफ सफाई के लिए टीम लगाई गई है। व्यवस्था की बेहतरी के लिए निरंतर जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों से मिले फीडबैक के मुताबिक कार्य कर रहे हैं। विधायक श्री अरुण वोरा ने टेस्टिंग बढ़ाने तथा कोविड संक्रमण को रोकने अन्य सुझाव भी दिए।
    कलेक्टर ने बताया कि कोविड वारियर इस आपदा से जूझने पूरे समय लगे हैं। हम लगातार संक्रमित क्षेत्रों का सर्वे कर रहे हैं और सैंपल ले रहे हैं। इसे तेजी से बढ़ाया गया है और आगे भी संक्रमण को थामने की दिशा में अधिकाधिक टेस्ट का लक्ष्य है। मंत्री ने कहा कि मरीजों की सुविधा और उनके बेहतर उपचार के लिए सभी प्रभावी कार्य सुनिश्चित हो। इस संबंध में जो निजी अस्पताल प्रोटोकॉल के मुताबिक कार्य करना चाहें उन्हें भी प्रोत्साहित करें। मंत्री ने कहा कि सैनिटीजशन का कार्य बेहद अहम है। इसकी मॉनिटरिंग होती रहे।
    गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू भी वीसी के माध्यम से कुछ देर के लिए बैठक से कनेक्ट हुए। उन्होंने कहा कि लॉक डाउन के दौरान कोरोना संक्रमण को रोकने में पुलिस ने बड़ी भूमिका निभाई। ऐसे संक्रमित कोरोना वारियर के इलाज पर भी लगातार नजर रखें। साथ ही जेल में भी संक्रमण की स्थिति पर नजर रखें।
    बैठक में मंत्री ने अन्य विभागों की समीक्षा भी की। उन्होंने गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन पर नजर रखने की बात कही। सुपोषण अभियान के लक्ष्यों पर नजर रखने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुपोषित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। मंत्री ने कानून एवं व्यवस्था के अतिरिक्त अन्य विषयों पर भी गहन चर्चा की। मंत्री ने कहा कि कोविड नियंत्रण के साथ ही रोजगारमूलक गतिविधि को भी बढ़ावा दिया जाए। मंत्री ने कहा कि नागरिकों की बुनियादी समस्या हल करना सबसे पहली प्राथमिकता है। कोविड काल में रेस्पॉन्स सिस्टम पर सबसे ज्यादा काम करें, इससे संक्रमण को थामने में काफी मदद मिलेगी।

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