August 03, 2026
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    दुर्ग। शौर्यपथ विशेष

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जहां प्रदेश में सुशासन का ढोल पीट रहे हैं, वहीं दुर्ग नगर पालिक निगम में आयुक्त सुमित अग्रवाल की कार्यप्रणाली जमीनी हकीकत को पूरी तरह झुठलाती नजर आ रही है। शहर में अवैध कब्जाधारियों और गैर अनुमति प्राप्त बाजारों पर जिस तरह निगम प्रशासन ने मौन समर्थन की मुद्रा अपना ली है, वह न केवल प्रशासनिक निष्क्रियता का प्रमाण है बल्कि आने वाले समय में एक बड़े शहरी विवाद की पटकथा भी लिख रही है।
    दुर्ग जिले के नागरिक सुपेला संडे बाजार की कहानी से भलीभांति परिचित हैं—जब बाजार छोटा था तब प्रशासन ने आंख मूंद ली, और जब वह विकराल हो गया तो हटाने में जिला प्रशासन और भिलाई नगर निगम को पसीने आ गए। व्यापारियों में विवाद हुआ, कानून व्यवस्था प्रभावित हुई, लेकिन आज भी वह बाजार वैधानिक अनुमति के बिना संचालित होता दिखाई देता है।
    अब वही गलती दुर्ग में दोहराई जा रही है
    दुर्ग नगर निगम मुख्य कार्यालय के पीछे चर्च रोड क्षेत्र में शनिवार को बिना किसी अनुमति के अवैध बाजार का संचालन प्रारंभ हो चुका है। महज दो महीनों में यह बाजार चर्च चौक से सुराना कॉलेज मार्ग तक फैल चुका है। शुरुआत छोटे स्तर पर हुई, लेकिन अब इसमें भिलाई के व्यापारियों का दखल लगातार बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय व्यापार और यातायात दोनों पर असर पडऩे लगा है।
    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निगम प्रशासन को इस अवैध बाजार की पूरी जानकारी होने के बावजूद अतिक्रमण विभाग द्वारा व्यापारियों से गंदगी के नाम पर ?50 शुल्क वसूली शुरू कर दी गई है। सवाल यह उठता है कि जब बाजार अवैध है, तो निगम किस अधिकार से शुल्क वसूल रहा है? क्या यह अवैध गतिविधियों को वैधानिक जामा पहनाने की कोशिश नहीं है?
    छोटे कर्मचारियों पर सख्ती, बड़े अतिक्रमण पर मौन
    शहर में यह चर्चा आम है कि निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल छोटी-छोटी बातों पर कर्मचारियों को नोटिस थमाने में अपनी प्रशासनिक व संवैधानिक शक्तियों का भरपूर उपयोग करते हैं, लेकिन अवैध बाजार और बढ़ते अतिक्रमण के मामलों में उनकी भूमिका पूरी तरह निष्क्रिय दिखाई देती है।
    पिछले छह महीनों से कपड़ा लाइन का अतिक्रमण हटाने में निगम प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है, जबकि 'मोर शहर मोर जिम्मेदारीÓ योजना के तहत सौंदर्यीकरण कार्य कर रही संस्था को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहर के लगभग हर क्षेत्र में अतिक्रमण का बोलबाला है, लेकिन प्रेस विज्ञप्तियों में "सख्त कार्रवाई" के दावे किए जा रहे हैं।
    आखिर किसे गुमराह कर रहे हैं आयुक्त?
    सवाल यह है कि निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल इन दावों से किसे गुमराह कर रहे हैं—शहर की जनता को, जिला प्रशासन को या प्रदेश सरकार को? एक प्रशासनिक अधिकारी का कार्यकाल भले ही अधिकतम तीन वर्ष का हो, लेकिन इस दौरान जो अतिक्रमण जड़ जमा लेगा, उसे हटाने में आने वाले समय में प्रशासन को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
    राजनीतिक मौन भी सवालों के घेरे में
    और भी आश्चर्यजनक यह है कि जब शहर में भाजपा की शहरी सरकार है, स्थानीय विधायक प्रदेश सरकार में मंत्री हैं, तब भी अतिक्रमण के बढ़ते स्तर पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले विधानसभा चुनावों में यही अतिक्रमण सत्ताधारी दल के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
    सुशासन की कसौटी पर दुर्ग नगर निगम
    यदि मुख्यमंत्री का सुशासन केवल फाइलों और मंचों तक सीमित नहीं है, तो दुर्ग नगर निगम में आयुक्त सुमित अग्रवाल की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा अनिवार्य है। अन्यथा यह कहा जाना गलत नहीं होगा कि दुर्ग में सुशासन नहीं, बल्कि 'मौन समर्थन का शासनÓ चल रहा है, जहां अवैध कब्जाधारी फल-फूल रहे हैं और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।

    दुर्ग / शौर्यपथ

    छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार जहां सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को अपनी प्राथमिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं दुर्ग नगर पालिक निगम से सामने आया एक प्रकरण इन दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। मामला न केवल प्रशासनिक निर्णयों की असंगतता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार छोटे कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई और वरिष्ठ अधिकारियों पर महज औपचारिक माफी की नीति अपनाई जा रही है।

    दो साल बाद पदोन्नति निरस्त : पीडि़त कौन, दोषी कौन?
    दुर्ग नगर निगम में वर्षों से पंप अटेंडेंट के रूप में कार्यरत कर्मचारी राजू लाल चंद्राकर को तत्कालीन आयुक्त लोकेश चंद्राकर के कार्यकाल में विभागीय पदोन्नति समिति (ष्ठक्कष्ट) की संस्तुति पर जल कार्य निरीक्षक के पद पर पदोन्नति प्रदान की गई थी। यह पदोन्नति किसी एक अधिकारी के व्यक्तिगत निर्णय से नहीं, बल्कि विधिवत गठित समिति की अनुशंसा पर हुई थी।
    इस समिति में —
    दिनेश नेताम, कार्यपालन अभियंता
    जितेंद्र सोमैया, सहायक अभियंता (वर्तमान में सेवानिवृत्त)
    राजकमल बोरकर, कार्यालय अधीक्षक
    जावेद अली, तत्कालीन स्वास्थ्य अधिकारी
    भूपेंद्र गोईर, सहायक ग्रेड-3
    शामिल थे। स्थापना प्रभारी बंजारे द्वारा आवश्यक अभिलेख समिति के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे। समिति ने उपलब्ध पद, सेवा अभिलेख और नगरीय निकाय नियमों के आधार पर राजू लाल चंद्राकर को पदोन्नति देने का निर्णय लिया।

    वर्तमान आयुक्त का आदेश और उठा विवाद
    लगभग दो वर्ष तक जल कार्य निरीक्षक के पद पर कार्य करने के बाद, जुलाई 2025 में वर्तमान आयुक्त सुमित अग्रवाल ने एक आदेश जारी कर न केवल राजू लाल चंद्राकर की पदोन्नति निरस्त कर दी, बल्कि उन्हें पुन: पंप अटेंडेंट के पद पर डिमोशन दे दिया। साथ ही, पदोन्नति समिति के सभी सदस्यों को नोटिस जारी किया गया।
    नोटिस के जवाब में समिति के सभी सदस्यों ने स्पष्ट किया कि —पदोन्नति नगरीय निकाय नियमों के अनुरूप थी,पद की उपलब्धता मौजूद थी,पूर्व में भी इसी प्रकार की पदोन्नतियां हो चुकी हैं। इसके बावजूद, समिति के उत्तरों को अस्वीकार कर दिया गया। परिणाम यह रहा कि — समिति के सदस्यों को केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया,जबकि कर्मचारी राजूलाल चंद्राकर को पदावनत कर दिया गया।यही बिंदु आज दुर्ग निगम में सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

    सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक मामला
    राजू लाल चंद्राकर ने वेतन और पद से जुड़े विवाद को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। एक शपथ पत्र में स्वयं आयुक्त सुमित अग्रवाल ने यह स्वीकार किया कि राजू लाल चंद्राकर उनके अधीनस्थ कर्मचारी हैं और जल कार्य निरीक्षक के रूप में कार्यरत रहे हैं।
    प्रशासनिक कानून के जानकारों का कहना है कि — यदि पदोन्नति अवैध थी, तो दो वर्षों तक कार्य क्यों कराया गया? और यदि अवैध नहीं थी, तो डिमोशन का आधार क्या है? यही प्रश्न अब माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।

    नियम विरुद्ध पदोन्नति थी तो अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
    इस पूरे प्रकरण का दूसरा और अधिक गंभीर पहलू यह है कि — यदि मान लिया जाए कि पदोन्नति नियमों के विरुद्ध थी, तो फिर:पदोन्नति समिति के सदस्यों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं? ,स्थापना शाखा और फाइल आगे बढ़ाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं?
    सिर्फ एक कर्मचारी को दंडित कर देना और निर्णय लेने वाले अधिकारियों को "चेतावनी का गुलदस्ता" थमा देना, प्रशासनिक न्याय की अवधारणा पर सवाल खड़े करता है। निगम के भीतर इसे निजी द्वेष और भेदभावपूर्ण नीति के रूप में देखा जा रहा है।

    चयनात्मक कार्रवाई का लंबा इतिहास
    दुर्ग निगम में यह पहला मामला नहीं है। वर्तमान आयुक्त के कार्यकाल में उच्च अधिकारियों की प्रताडऩा से त्रस्त कर्मचारियों द्वारा आत्महत्या के मामले सामने आए,बाद में नियमों को शिथिल कर आनन-फानन में परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति दी गई,जबकि अन्य समान मामलों में कर्मचारी महीनों से निलंबन झेल रहे हैं।
    इसी तरह, सहायक राजस्व निरीक्षक थान सिंह यादव पर पार्किंग घोटाले में पेनल्टी लगने और लॉलीपॉप विज्ञापन घोटाले में भौतिक सत्यापन के दौरान अनियमितता बरतने के आरोप हैं। इन मामलों में निगम को राजस्व हानि हुई, परंतु कार्रवाई का दायरा ठेकेदार तक सीमित रहा — कर्मचारी फिर बच निकले।

    सुशासन पर आईना
    दुर्ग नगर निगम की यह कार्यप्रणाली अब केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं रही। यह मामला सीधे तौर पर राज्य सरकार के सुशासन के दावों पर असर डाल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बार-बार सुशासन की बात करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ अधिकारी यदि अपनी संवैधानिक शक्तियों का चयनात्मक और मनमाना प्रयोग करते हैं, तो उसकी आंच सरकार तक पहुंचना स्वाभाविक है।
    अब सबकी निगाहें माननीय उच्च न्यायालय के फैसले पर टिकी हैं। यह फैसला न केवल राजू लाल चंद्राकर के भविष्य का निर्धारण करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि प्रशासनिक निर्णयों की जवाबदेही किसकी होगी?और क्या वास्तव में दुर्ग निगम में 'कानून सबके लिए समानÓ है?फिलहाल, दुर्ग में चर्चा का बाजार गर्म है और सवाल एक ही है — क्या यह सुशासन है, या सत्ता की छाया में पनपता भेदभाव?

    बड़ेकनेरा के स्वास्थ्य केंद्र की एम्बुलेंस जून 2024 से सीएमएचओ दफ्तर में खड़ी, कागजों में फंसी जनसेवा
    ग्रामीणों ने विधायक, कलेक्टर से लेकर सीएमएचओ तक लगाई गुहार, लेकिन ‘सुधार’ के नाम पर मिली सिर्फ तारीखें
    स्वास्थ्य मंत्री के दावे हकीकत से कोसों दूर, मरीज अब भी खुद का ‘रोगी वाहन’ बनने को मजबूर

        कोंडागांव / शौर्यपथ / एक तरफ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल बड़े गर्व से कह रहे हैं कि “स्वास्थ्य सुविधाओं में तेजी से सुधार हो रहा है”, वहीं हकीकत यह है कि ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डेढ़ साल से एम्बुलेंस नाम की कोई चीज नहीं है।
       2019-20 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय रूर्बन मिशन योजना के तहत बड़ेकनेरा को मिली एम्बुलेंस जून 2024 में आरटीओ, इंश्योरेंस और सर्विसिंग के नाम पर सीएमएचओ कार्यालय कोंडागांव में जमा कर दी गई। तब से अब तक यह "कागजों की गाड़ी" वहीं अटकी पड़ी है।
       ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधि थक-हारकर कभी विधायक से, कभी सीएमएचओ से और कभी कलेक्टर से गुहार लगाते रहे, लेकिन फाइलें आगे बढ़ने की रफ्तार घोंघे की चाल से भी धीमी रही। आखिरकार बड़ेकनेरा के सरपंच प्रकाश चुरगियां और प्रतिनिधि मंडल ने सीएमएचओ कार्यालय पहुंचकर सीधे पूछा—

    अगर आरटीओ, इंश्योरेंस और फिटनेस पूरी है तो एम्बुलेंस क्यों नहीं लौटा रहे?
    अगर पूरी नहीं है तो जिम्मेदार कौन है?
    और उन पर कार्रवाई कब होगी, जिन्होंने लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया?

      प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं ‘तेजी से सुधार’ के दावे कर रही हैं, लेकिन कोंडागांव में यह ‘तेज रफ्तार’ इतनी धीमी हो गई कि डेढ़ साल में भी एक एम्बुलेंस बड़ेकनेरा वापस नहीं पहुंच पाई।
    अब सवाल सीधा है—क्या यह स्वास्थ्य विभाग का सुधार है या लोगों की जान को भगवान भरोसे छोड़ देने की नई सरकारी नीति?
    "लगता है स्वास्थ्य विभाग के लिए एम्बुलेंस भी ‘आपातकालीन’ नहीं, बस एक लंबी दूरी की सरकारी कहानी है—जिसका गंतव्य कभी आता ही नहीं!"

    हजारों बहनों ने बांधी राखी, विधायक बोले   'भिलाई मेरा परिवार है, यही मेरा सबसे बड़ा धन हैÓ

       भिलाई / शौर्यपथ / रक्षाबंधन के अवसर पर भिलाई नगर विधायक ने एक बार फिर अपने अनोखे और भावनात्मक आयोजन से लोगों के दिल जीत लिए। सेक्टर-5 स्थित एक विशाल पंडाल में भव्य रक्षाबंधन पर्व का आयोजन किया गया, जहां पूरे विधानसभा क्षेत्र से हजारों महिलाएं और युवतियां विधायक को राखी बांधने के लिए उमड़ीं।
      यह आयोजन हर साल की तरह इस वर्ष भी विधायक द्वारा स्वयं के स्तर पर आयोजित किया गया था, जिसमें राखी बांधने के साथ-साथ महिलाओं के लिए विशेष भोजन, मनोरंजन, गीत-संगीत, और छत्तीसगढ़ी सुआ नृत्य की भी आकर्षक प्रस्तुति हुई।

    विधायक के हाथों में बंधीं हजारों राखियाँ
       विधायक का पूरा हाथ राखियों से भर गया था। बहनों के स्नेह और आशीर्वाद से अभिभूत विधायक ने भावुक होते हुए कहा –पूरा भिलाई मेरा परिवार है। यह रक्षाबंधन सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि हमारे विश्वास और प्रेम का प्रतीक है। यह परंपरा सालों से चल रही है, और इसे मैं हर साल अपनी बहनों के साथ मनाता हूं।

    जेल में भी नहीं टूटा बहनों का रिश्ता
    विधायक ने याद करते हुए कहा -
      "पिछले साल जब मैं जेल में था, तब भी मेरी बहनें राखी लेकर वहां पहुंचीं थीं। यह सिर्फ धागा नहीं, बल्कि प्यार, विश्वास और आशीर्वाद का प्रतीक है। यही मेरा सबसे बड़ा धन है।"

    बहनों ने दी लंबी उम्र की कामना
      राखी बांधने पहुंची महिलाओं ने विधायक को तिलक कर रक्षा सूत्र बांधा और उनकी लंबी उम्र, सफलता और स्वस्थ जीवन की कामना की। कई बहनों ने कहा कि विधायक से उनका रिश्ता सिर्फ एक जनप्रतिनिधि का नहीं, बल्कि भाई जैसा है, जो हर समय उनके साथ खड़ा रहता है।

    आयोजन स्थल पर उमड़ी भारी भीड़
      रक्षाबंधन पर्व के इस आयोजन में सुबह से ही महिलाओं की भीड़ लगने लगी थी। आयोजन समिति द्वारा पंडाल में बैठने, खाने और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की गई थी। छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य और गीत-संगीत ने माहौल को और भी उल्लासमय बना दिया।

    समाचार सार

    *प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 20वीं किश्त की राशि जारी*

    *प्रदेश के 25.47 लाख से अधिक किसानों के खातों में 553 करोड़ 34 लाख रुपये का हुआ अंतरण*

    *राज्य के अन्नदाताओं को अब तक पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत मिली 9 हजार 700 करोड़ रुपये की राशि*

    *छत्तीसगढ़ के 2.34 लाख वन पट्टाधारी और 32,500 विशेष पिछड़ी जनजाति के किसानों को भी मिल रहा है योजना का लाभ*

     

    रायपुर / शौर्यपथ/ सावन के पवित्र महीने में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी (उत्तर प्रदेश) से देशभर के 9.7 करोड़ से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की 20वीं किश्त के रूप में 20500 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर स्थित उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के सभागार से प्रदेश के किसानों के साथ वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वृहद किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत 2019 से अब तक देशभर के किसानों को 3.75 लाख करोड़ रुपये की राशि सीधे उनके खातों में भेजी जा चुकी है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर काम कर रही है और पीएम किसान निधि इसका सशक्त उदाहरण है। श्री मोदी ने कहा कि कृषि विकास में पिछड़े जिलों के लिए ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना’ की शुरुआत की गई है और इसके लिए 24 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि सिंचाई योजनाओं पर भी सरकार बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है ताकि खेतों तक पानी पहुंच सके और उत्पादन में वृद्धि हो। प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को राहत देने के उद्देश्य से ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ संचालित है, जो उन्हें संकट से उबारने का कार्य करती है। प्रधानमंत्री ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि 1.5 करोड़ से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और 3 करोड़ के लक्ष्य में से आधा काम हमने पूरा कर लिया है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को पवित्र श्रावण मास की शुभकामनाएं देते हुए भगवान महादेव से छत्तीसगढ़ के सतत् कल्याण, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से छत्तीसगढ़ के लगभग 25 लाख से अधिक किसानों को 553 करोड़ 34 लाख रुपये की धनराशि प्राप्त हुई है।

    मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अन्नदाताओं को आर्थिक संबल देकर उनके परिश्रम का सम्मान किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार “मोदी की गारंटी” के अनुरूप किसानों की उन्नति के लिए निरंतर समर्पित भाव से कार्य कर रही है। हमने किसानों से जो वादा किया था, उसे पूरा किया है। आज छत्तीसगढ़ में किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की कीमत दी जा रही है, जो उनकी आय को और सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार गठन के दस दिनों के भीतर ही 3716 करोड़ रुपये की 2 वर्ष की बकाया बोनस राशि का भुगतान कर हमने किसानों के भरोसे को और मजबूत किया। पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में ‘किसान क्रेडिट कार्ड योजना’ की शुरुआत हुई, जिसने खेती-किसानी को लाभकारी व्यवसाय में परिवर्तित कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले किसान भारी ब्याज दरों पर उधार लेकर खेती करते थे, लेकिन आज केसीसी (KCC) के माध्यम से शून्य ब्याज दर पर ऋण मिल रहा है, जिससे खेती-किसानी और आसान हो गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए तेज़ी से कार्य किया जा रहा है। बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और हम बोधघाट परियोजना, महानदी और इंद्रावती नदी को जोड़ने जैसी योजनाओं के माध्यम से बस्तर को सिंचित और समृद्ध क्षेत्र बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। श्री साय ने कहा कि दलहन-तिलहन फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए 10 हजार रुपये की सहायता राशि का प्रावधान किया गया है। साथ ही, भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी 10 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार खेती ही नहीं, बल्कि मत्स्यपालन, दुग्ध उत्पादन और पशुपालन जैसे सहायक कृषि कार्यों को भी सशक्त करने में जुटी है। ‘दुधारू पशु वितरण योजना’ को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रदेश के 6 जिलों से प्रारंभ किया गया है, जिसे नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इससे दूध का उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को उसकी उचित कीमत मिलेगी।

    श्री साय ने कहा कि मिलेट्स (श्री अन्न) जैसे पौष्टिक अनाजों का उत्पादन, कोदो, कुटकी और रागी जैसी पारंपरिक फसलों की खेती को बढ़ावा देकर किसानों को बाजार में बेहतर दाम दिलाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार निरंतर किसानों को इस योजना के तहत राशि सीधे उनके खाते में हस्तांतरित कर रही है। उन्होंने इस मौके पर कहा कि नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में गांव-गांव में पक्की सड़कें बन गई हैं। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अब किसानों को बिना ब्याज के अल्पकालिक ऋण उपलब्ध हो रहा है। हमारी सरकार ने अनेक योजनाएं धरातल पर लाकर किसानों की बेहतरी के लिए कार्य किया है।

    कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि आज इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 25.47 लाख से अधिक किसानों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 20वीं किश्त की राशि 553 करोड़ 34 लाख रुपये अंतरित की गई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार जय-जवान, जय-किसान, जय-विज्ञान और जय-अनुसंधान की परिकल्पना के साथ आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों का उपयोग कर खेती-किसानी को नई दिशा दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वृहद रूप से ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ चलाया गया। इस अभियान में कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक लाख से अधिक किसानों से मुलाकात कर खेती-किसानी के तरीकों और उनके फायदों की जानकारी दी।

    कार्यक्रम में हितग्राहियों को कृषि उपकरणों एवं योजनाओं के तहत अनुदान राशि के चेक प्रदान किए गए।

    कार्यक्रम में विधायकगण सर्वश्री सुनील सोनी, पुरंदर मिश्रा, गुरु खुशवंत साहेब, इंद्रकुमार साहू, रायपुर संभाग के आयुक्त महादेव कावरे, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लि. के प्रबंध संचालक श्री अजय अग्रवाल, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.आर. सक्सेना सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

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