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May 23, 2026
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विपक्ष के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित

  • rounak group

  नई दिल्‍ली /शौर्यपथ /संसद की सुरक्षा में चूक मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग खारिज किए जाने के बाद विपक्षी दलों ने सोमवार को राज्यसभा और लोकसभा में हंगामा किया, जिस वजह से उच्च सदन की कार्यवाही आरंभ होने के कुछ देर बाद ही 11.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. इसके बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई, तो विपक्ष ने दोबारा हंगामा शुरू कर दिया. इसके बाद सभापति जगदीप धनखड़ ने राज्‍यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्‍थगित कर दिया.
सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही सभापति जगदीप धनखड़ ने कुवैत के शासक अमीर शेख नवाफ अल-अहमद अल-जबर अल-सबा के निधन का उल्लेख किया और उसके बाद पूरे सदन ने कुछ क्षण मौन रख उन्हें श्रद्धांजलि दी.
  इसके बाद सभापति ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और बताया कि उन्हें नियम 267 के तहत चर्चा कराने के लिए कुल 22 नोटिस मिले हैं, लेकिन उन्होंने उन नोटिस को अस्वीकार कर दिया है. विपक्षी सदस्यों ने इसका विरोध किया और आसन से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने का अवसर दिया जाए.
   हालांकि, सभापति ने शून्य काल आरंभ कराया और इसके लिए पहले भारतीय जनता पार्टी की सदस्य कांता कर्दम और फिर कांग्रेस के प्रमोद तिवारी का नाम पुकारा. तिवारी ने कहा कि वह महत्वपूर्ण मुद्दा उठाना चाहते हैं, लेकिन पहले विपक्ष के नेता खरगे को बोलने का मौका दिया जाए.
     सभापति ने जब खरगे को बोलने का मौका नहीं दिया, तो विपक्षी सदस्य हंगामा और नारेबाजी करने लगे. इसी दौरान, धनखड़ ने कुछ विपक्षी सदस्यों के आचरण पर आपत्ति जताई और सदन की कार्यवाही 11.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.
  इधर, संसद की सुरक्षा में चूक के मुद्दे पर विपक्ष के सदस्यों के जोरदार हंगामे के कारण सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के करीब 15 मिनट बाद दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गत 13 दिसंबर को सदन में दो युवकों के दर्शक दीर्घा से कूदने की सुरक्षा में चूक संबंधी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से चिंता जताई थी और सदन में विभिन्न दलों के नेताओं के सुझाव के आधार पर उन्होंने कुछ सुरक्षा उपाय किए हैं और कुछ पर भविष्य में अमल किया जाएगा.
 ओम बिरला ने सदन की अवमानना के मामले में पिछले सप्ताह विपक्ष के 13 सदस्यों को निलंबित किये जाने का जिक्र करते हुए कहा कि निलंबन का सुरक्षा में चूक की घटना से कोई संबंध नहीं है और इसका संबंध संसद की गरिमा एवं प्रतिष्ठा बनाये रखने से है. उन्होंने कहा, "किसी भी सदस्य को निलंबित किया जाता है तो मुझे व्यक्तिगत पीड़ा होती है." उन्होंने विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे को लेकर निराशा प्रकट करते हुए कहा, "दुर्भाग्यपूर्ण कि हम ऐसी घटनाओं को लेकर राजनीति कर रहे हैं। यह राजनीति करने वाली घटनाएं नहीं हैं."
     बिरला ने कहा कि नए संसद भवन में कामकाज शुरू करने से पहले सभी दलों के नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई थी कि सदन में तख्तियां लेकर प्रदर्शन नहीं किया जाएगा और सदन की गरिमा एवं मर्यादा को बनाकर रखा जाएगा. उन्होंने कहा, "नई संसद में कामकाज शुरू होने से पहले यह तय हुआ था कि (सदस्य) तख्ती लेकर नहीं आएंगे, उच्चकोटि की मर्यादाओं को बनाकर रखेंगे. संसद की मर्यादा और गरिमा बनाकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है. हम सभी को संसद की परिपाटियों और परंपराओं का पालन करना चाहिए."

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