August 02, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने आज पुलगांव नाका स्थित वृद्धाश्रम का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और बुजुर्गों से बातचीत की। वहां पर उपलब्ध सुविधाओं से उन्होंने संतोष जताया। उन्होंने कहा कि अभी सफाई व्यवस्था पूरी तरह मुकम्मल नहीं है। अभी मानसून आने से पूर्व पूरे कैंपस की अच्छे से सफाई कराइये और हर दिन बेहतर सफाई होनी चाहिए। अधिकारी इसकी लगातार मानिटरिंग करें।
    कलेक्टर ने बुजुर्गों से पूछा कि आप लोगों को यहां सभी सुविधाएं मिल रही हैं न। बुजुर्गों ने सुविधाओं से संतोष जताया। कलेक्टर ने पूछा कि नाश्ता और खाना किस समय पर मिलता है और इसकी गुणवत्ता कैसी रहती है। बुजुर्गों ने बताया कि खाना समय पर मिल जाता है और अच्छा रहता है। इस संबंध में हम लोग संतुष्ट हैं। विभागीय अधिकारी समय-समय पर आते रहते हैं और व्यवस्था के बारे में पूछते रहते हैं। यहां हमारी देखभाल करने वाला स्टाफ भी काफी अच्छा है। स्वास्थ्यगत परेशानी हो तो यहां कार्यरत नर्स से कह देते हैं।
    कलेक्टर ने बुजुर्गों से कहा कि आप सभी कोरोना संक्रमण के संबंध में भी सजग रहें। बीच-बीच में हाथों को सैनिटाइज करते रहें। मास्क हमेशा लगाए रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का हमेशा ध्यान रखें रहें। कलेक्टर ने अधिकारियों से आश्रम में रह रहे बुजुर्ग जनों के स्वास्थ्य जांच के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि महीने में तीन बार स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता है। इसके अतिरिक्त यहां एक नर्स भी रहती हैं जो हमेशा बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर नजर रखती है। किसी तरह की दिक्कत आने पर तुरंत अस्पताल भेजे जाने की कार्रवाई की जाती है।
    कलेक्टर ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों से कहा कि वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्ग नागरिक अच्छा समय बिताएं। हम उनका पूरा ख्याल रख पाए, इस बाबत जिस तरह से प्रयास किए जा सकते हैं। वे सुनिश्चित कराएं। इसके अतिरिक्त कैंपस काफी सुंदर हो, साफ सुथरा हो। इसके अतिरिक्त बुजुर्गों के आराम से बैठने के लिए एक बहुत छोटा सा गार्डन भी बनाने के निर्देश उन्होंने दिए। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वे नियमित रूप से संस्था की मानिटरिंग करते हैं और बुजुर्गों से पूछकर उनकी सुविधा का पूरा ध्यान रखते हैं। कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर आश्रम में सैनिटाइजेशन के साथ ही इस संबंध में लगातार जागरूकता फैलाने की दिशा में हम काम कर रहे हैं। इस दौरान एसडीएम खेमलाल वर्मा, नजूल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर अरुण वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    दुर्ग / शौर्यपथ / नीलामी में अधिक ऑफर मूल्य होने के बाद भी दुर्ग नगर पालिका निगम द्वारा परिवादियों को दुकान का आवंटन नहीं किया गया और जमा की गई अमानत राशि की मांग करने पर अमानत राशि का भुगतान भी नहीं किया। इसे आचरण को व्यवसायिक कदाचार ठहराते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने दो अलग-अलग मामलों में नगर पालिक निगम दुर्ग के आयुक्त पर 6 लाख 43 हजार रुपये हर्जाना लगाया।
    अनावेदक का जवाब
    नगर पालिक निगम दुर्ग ने सिर्फ परिवादिनी डॉ. प्राची मिश्रा के मामले में ही अपना जवाब प्रस्तुत किया जिसमें उसने कहा कि परिवादिनी ने अपनी जमा राशि जानबूझकर वापस नहीं ली है और वह किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति राशि पाने की हकदार नहीं है।

    फोरम का फैसला
    प्रकरण में पेश दस्तावेजों एवं प्रमाणों तथा दोनों पक्षों के तर्को के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने यह सिद्ध पाया कि परिवादिनी द्वारा प्रस्तुत निविदा को मेयर इन काउंसिल द्वारा दिनांक 20 जून 2012 को निरस्त करके इसकी सूचना परिवादिनी को दी गई तब परिवादिनी ने छत्तीसगढ़ नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 के तहत अपील प्रस्तुत की जिसका निराकरण दिनांक 30 अक्टूबर 2015 को किया गया और परिवादिनी ने इसके बाद 27 अगस्त 2016 को आयुक्त नगर निगम दुर्ग के समक्ष पुनर्विचार आवेदन दायर किया और दिनांक 3 नवंबर 2017 को अपनी अमानत राशि की मांग की। मांगे जाने पर भी अमानत राशि का भुगतान ना कर अनावेदक ने व्यवसायिक कदाचार किया है और परिवादिनी को क्षति पहुंचाई गई है।
    जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने नगर निगम दुर्ग आयुक्त पर 6 लाख 43 हजार रुपये हर्जाना अधिरोपित किया, जिसके तहत पहले मामले में अमानत राशि 486350 रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति स्वरूप 20000 रुपये, वाद व्यय के रूप में 1000 रुपये देना होगा और दूसरे मामले में अमानत राशि 125000 रुपये, मानसिक कष्ट के एवज में 10000 रुपये एवं वाद व्यय के रुप में 1000 देना होगा। साथ ही अमानत राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी भुगतान करना होगा।

    पहला मामला
    कादंबरी नगर दुर्ग निवासी नेत्र चिकित्सक डॉ. श्रीमती प्राची अरोरा ने दिनांक 13 सितंबर 2011 को दुर्ग नगर निगम द्वारा आमंत्रित निविदा में भाग लेते हुए दो दुकानों के लिए निविदा भरकर प्रति दुकान 243175 रुपये के हिसाब से कुल रकम 486350 रुपये अमानत राशि के रूप में जमा कराई। निविदा खोलने पर परिवादिनी का ऑफर मूल्य सबसे अधिक था और उसे दुकान पाने की पात्रता थी। परिवादिनी द्वारा बार-बार दुर्ग नगर निगम से संपर्क करने पर भी मात्र आश्वासन दिया जाता रहा लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई और दिनांक 28 मई 2012 को दुकानों की दर कम होने के आधार पर निविदा अस्वीकार कर दी गई। इसके बाद दिनांक 06 जून 2012 को परिवादिनी को यह जानकारी दी गई कि लिपिकीय त्रुटिवश निविदा निरस्त होने की सूचना जारी हो गई थी, अब दुकान आवंटन का निर्णय एवं विचार एमआईसी में किया जाएगा।
    दिनांक 25 जून 2012 को परिवादिनी की निविदा अस्वीकार कर दी गई। परिवादिनी ने 12 सितंबर 2012 को नगर निगम की अपील समिति के समक्ष अपील प्रस्तुत की जिसका निराकरण लंबे समय तक नहीं किए जाने के कारण परिवादी ने उच्च न्यायालय बिलासपुर में रिट याचिका प्रस्तुत की जिसमें माननीय उच्च न्यायालय ने अपील कमेटी के समक्ष मामले का निराकरण कराने के निर्देश दिए। दिनांक 30 अक्टूबर 2015 को परिवादिनी की अपील को नगर निगम की अपील समिति ने निरस्त कर दिया किंतु परिवादिनी द्वारा जमा कराई गई अमानत राशि 486350 को वापस नहीं किया।

    दूसरा मामला
    इसी प्रकार दूसरा मामला परिवादिनी अनीता अरोरा का है जिसने सुभाष नगर प्राथमिक शाला दुर्ग स्थित दुकान क्रमांक 9 के संबंध में अमानत राशि 125000 जमा करके दिनांक 22 जून 2011 को नगर निगम द्वारा आमंत्रित निविदा में भाग लिया था। इस मामले में भी पहले मामले की तरह ही नगर निगम द्वारा व्यवहार किया गया।

    कोरबा / शौर्यपथ / कोरबा जिले में अन्य प्रांतों से आये सभी प्रवासी श्रमिकों को कोरोना जांच की रिपोर्ट आ जाने पर ही क्वारेंटाइन सेंटरों से रिलीज किया जायेगा। जांच रिपोर्ट पाजिटिव आने पर संक्रमित श्रमिक को ईलाज के लिए विशेष कोविड अस्पताल भेजा जायेगा। 14 दिन की क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर चुके श्रमिकों की जांच रिपोर्ट निगेटिव मिलने पर ही उन्हें घर जाने दिया जायेगा। ऐसे सभी श्रमिकों को घर में भी अगले 14 दिनों तक होम क्वारेंटाइन में रहने का शपथ पत्र भरना होगा। कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल ने इस संबंध में जरूरी निर्देश भी जारी किये हैं। श्रीमती कौशल ने कोविड प्रोटोकाल के अनुसार 14 दिन की क्वारेंटाइन अवधि पूरी करने के बाद क्वारेंटाइन सेंटर में रखे गये लोगों को रिलीज करने के लिए प्राधिकृत अधिकारियों की भी नियुक्ति की है। नगर निगम कोरबा क्षेत्र में स्थित क्वारेंटाइन सेंटरों से लोगों को रिलीज करने के लिए नगर निगम आयुक्त श्री एस. जयवर्धन प्राधिकृत अधिकारी होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में क्वारेंटाइन सेंटरों से 14 दिन की अवधि पूरी करने वाले जांच रिपोर्ट प्राप्त लोगों को रिलीज करने के लिए संबंधित अनुभाग के एसडीएम प्राधिकृत अधिकारी बनाये गये हैं। पाली तहसील के क्वारेंटाइन सेंटरों से लोगों को घर जाने के लिए छोडऩे का निर्णय तहसीलदार पाली करेंगे।
    कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल ने आज यहां बताया कि अन्य राज्यों से कोरबा लौटे लोगों को कोविड प्रोटोकाल के आधार पर 14 दिन क्वारेंटाइन में रखा गया है। इस अवधि में ऐसे सभी लोगों और श्रमिकों का आरटीपीसीआर पद्धति से कोरोना टेस्ट कराया जाता है। 14 दिवस क्वारेंटाइन अवधि पश्चात भी यदि किसी श्रमिक का आरटीपीसीआर का रिपोर्ट जांच उपरांत प्राप्त नहीं हुआ है तो रिपोर्ट प्राप्त होने तक ऐसे श्रमिकों को किसी भी स्थिति में घर नहीं जाने दिया जायेगा। क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे लोगों को निगेटिव रिपोर्ट प्राप्त होने पर ही अगले 14 दिवस के लिए होम क्वारेंटाइन का शपथ पत्र भरवाकर ही छोड़ा जायेगा। क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे जिन लोगों का क्वारेंटाइन अवधि के भीतर आरटीपीसीआर टेस्ट नहीं हो पाया है उनकी 14 दिन बाद रैपिड टेस्ट किट से जांच की जायेगी और रिपोर्ट निगेटिव प्राप्त होने पर ही अगले 14 दिवस के लिए होम क्वारेंटाइन का शपथ पत्र भरवाकर छोड़ा जायेगा। 14 दिन के बाद क्वारेंटाइन अवधि पूरा करने के बाद छोड़े गये सभी श्रमिकों की निगरानी संबंधित क्षेत्र के सचिव, रोजगार सहायक, मितानीन-एक्टिव सर्विलेंस टीम के माध्यम से की जायेगी।

        रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आज उनके निवास कार्यालय में अनिल कुमार चंद्रा के नेतृत्व में आये जैजैपुर विधानसभा के किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू करने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया और कोरोना महामारी का संक्रमण रोकने और जरूरतमंदों की सहायता के लिए 95 हजार रूपए की राशि का चेक सौंपा। यह राशि मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने किसानों द्वारा दिए गए इस योगदान की सराहना की। इस अवसर पर बलराम चंद्रा,  ज्ञान चंद्रा,  राजेश लहरे तथा  जगत कुर्रे उपस्थित थे

    दुर्ग / शौर्यपथ / अमृत मिशन के तहत शहर में बिछाये जा रहे पाइप लाइन पर विपक्षी पार्टी के द्वारा की जा रही राजनीती पर पलटवार करते हुए सत्ता पक्ष के एमआईसी मेंबर ने सयुक्त रूप से ब्यान जारी करते हुए कहा कि कोरोना काल के समय से विधायक अरुण वोरा के मार्गदर्शन और महापौर धीरज बाकलीवाल के दिशा निर्देश पर अमृत मिशन योजना के तहत् पेयजल व्यवस्था का निरंतर कार्य चल रहा है। जहॉ पानी की गंभीर समस्या बनी हुई थी वहॉ के समस्या का भी निदान किया जा रहा है । इस विषम परिस्थितियों में भी निरंतर कार्य के बाद भी योजना और कार्य की आलोचना बिलकुल नहीं होना चाहिए।
    कोरोना महामारी के कारण सभी तरफ कार्य बंद हो गये थे और कार्य के लिए श्रमिक ही नहीं मिल रहा था एैसे समय में भी नगर निगम दुर्ग द्वारा अमृत मिशन के कार्य को प्रभावित हुये बिना पूरी निगरानी के साथ व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। निगम महापौर परिषद के सदस्यों ने संयुक्त रुप से कहा कि दुर्ग नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा पार्षद द्वारा अमृत मिशन के अंतर्गत चल रहे पाइप लाईन बिछाने व अन्य कार्यो के संबंध में भेदभाव पूर्व कार्य किय जाने का भ्रामक आरोप लगाया जाना पूरी तरह से निराधार व राजनीति से प्रेरित है।
    इस संबंध में एमआईसी मेम्बर ने संयुक्त रुप से कहा कि नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा पार्षदों का बयाना हताशा का परिचायक है उनके भ्रामक बयान की हम सभी निंदा करते हैं। उन्होनें आगे कहा कि शहर के अनेक वार्डो में अमृत मिशन के पाइप लाईन में पानी चालू हो गया है वहॉ नल कनेक्शन देने का काम और रोड निर्माण का कार्य लगातार किया जा रहा है। इसमें किसी भी प्रकार से कोई भेदभव नहीं बरती जा रही है। पूर्व जलकार्य प्रभारी श्री देवनारायण चंद्रारक स्वयं अपने वार्ड को पूर्ण कराने ध्यान पूर्वक कार्य अमृत मिशन से कराने आये थे शेष वार्डो का कोई सूची नहीं था। वर्तमान में इस परिषद में एैसा बिलकुल भी नहीं किया जा रहा है।
    जबकि शहर विधायक वोरा और महापौर धीरज बाकलीवाल द्वारा बहुजन हिताये, बहुजन सुखाय के साथ पूरे शहर में पूरी योजना के अनुसार व्यवस्थित ढंग से ही कार्य करवाया जा रहा हैं। हमारी परिषद में कांग्रेस, भाजपा वाली कोई बात नहीं है। दुर्ग विधायक तो पूरे 60 वार्डो के ही विधायक हैं उन्हें पूरा शहर देखना और समस्याओं का निराकरण करना होता है। वही महापौर और सभी एमआआईसी प्रभारी लगातार दौरा कर पूरे कार्यो की निगरानी भी कर रहे हैं। उन्होनें जानकारी देते हुये कहा वार्ड क्रं0 1,2,3,4,56 और वार्ड क्रं0 39,17,18 इन सभी क्षेत्रों मेें अमृत मिशन का कार्य पूर्ण हो गया है व पानी की समस्या नहीं है लगभग यह सभी वार्ड भाजपा पार्षदों का ही है।
    उन्होनें आगे कहा नगर निगम दुर्ग में योजना के कार्य को जल्द से जल्द पूर्ण कराये जाने का प्रयास जारी है। अनेक वार्डो में अमृत मिशन का कार्य लगभग 75 से 80 प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। कुछ स्थानों पर पानी टंकियों का निर्माण पूर्णत: की ओर है कुछ जगहों पर कार्य में तीव्रता लाई गयी है। इस योजना के कार्यो में किसी भी प्रकार का व्यवधान होता है तो विधायक द्वारा स्वयं तत्काल शासन स्तर पर चर्चा कर त्वरित निदान करवाते हैं। इस कारण विगत दिनों कार्य में विलंब हो रहा था तो शासन स्तर से निर्देश लिये गये। मार्केट एरिया के तरफ भी निरंतर कार्य जारी है जिसे शीघ्र पूर्ण कर लिया जावेगा। उन्होनें अंत में कहा अमृत मिशन का कार्य केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और नगरीय निकाय के संयुक्त सहयोग से राशि उपलब्ध कराकर किया जा रहा है इस योजना की राशि केवल अकेले केन्द्र सरकार की राशि नहीं है।

    रायपुर /शौर्यपथ / मजदूरो को राज्य में आने की अनुमति में गलत समय के फैसले पर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मो. असलम ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि कोरोना वायरस से व्याप्त महामारी की स्थिति देश में अब कम्युनिटी ट्रांसमिशन के खतरे की ओर बढ़ रही है, जो बेहद खतरनाक एवं डरावनी है। हालांकि छत्तीसगढ़ में स्थिति राज्य सरकार की सतर्कता के कारण बेहद व्यवस्थित, नियंत्रित और संतुलित है। जिस तरह से महामारी के कारण देश में सामुदायिक संक्रमण की स्थिति निर्मित हो रही है उससे यही लगता है कि करोना पर काबू पाना फिलहाल मोदी सरकार के लिये संभव नहीं है। केंद्र सरकार नागरिकों पर बोझ डालकर और महामारी को नजरअंदाज करते हुए जिम्मेदारियों से मुक्त होना चाहती है। प्रारंभ में कोरोना वायरस को लेकर केंद्र सरकार ने सारी बागडोर और जवाबदेही खुद ही संभाली हुई थी। अब बीमारी के विस्तार से हड़बड़ाहट में आलम यह है कि राज्यों को जिम्मेदारी हस्तांतरित कर कोरोनावायरस के फैलाव का ठीकरा फोडऩे की तैयारी की जा रही है।
    मोहम्मद असलम ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव भेजकर 30 हजार करोड़ मांगे थे, जिसमें 10,000 करोड़ तत्काल प्रदान करने की मांग की गई थी, वहीं राज्यों की सीमा नहीं खोलने का आग्रह किया गया था और विमान सेवाएं निलंबित रखने का सुझाव दिया गया था। किंतु केन्द्र सरकार द्वारा राज्य की एक भी बात नहीं सुनी गई। अब केंद्र सरकार द्वारा जवाबदारी से बचने का मौका ढूंढा जा रहा है, जो चिंताजनक है। शुरूआत में लाकडाउन क्रूर था और अब लापरवाह बन चुका है। अचानक सख्ती में कमी, नीतियों के समन्वय में कमी और अब जल्दबाजी में लाकडाउन खोलकर दी जा रही, खुली छूट से मिल रही विफलता की कीमत निर्दोष गरीबों, मजदूरों, मजलूमों, सहित बेबस नागरिकों को चुकानी पड़ रही है।
    जब संक्रमण की रफ्तार कम थी तब मजदूरों को घर जाने की अनुमति एवं सुविधा नहीं दिया जाना सबसे बड़ी चूक साबित हुई है। अब प्रवासी मजदूर केंद्र सरकार पर अविश्वास करते हुए जमी हुई घर गृहस्थी को छोड़कर, सब कुछ उजाड़ कर लुटाकर, जीवन दांव पर लगाकर अपने राज्यों की ओर जा रहे हैं। जीवन भर की कमाई से बेदखल हो गए हैं, तब भी केंद्र सरकार की आंख बंद है और उनको सीधे सहायता पहुंचाने के लिए राशि प्रदान नहीं करना चाहती है और सब कुछ विपक्ष पर आरोप लगाकर पीछा छुड़ाने से बाज़ नहीं आ रही है।
    सुझावों को तहरीर नहीं दिए जाने के बारे में प्रवक्ता असलम ने कहा है की केंद्र सरकार द्वारा विपक्ष के सकारात्मक सुझावों और सहयोग को तरजीह नहीं दिए जाना और महामारी की गंभीरता को लेकर संक्रमण विशेषज्ञों से मशविरा नहीं लिया जाना सरकार की अदूरदर्शिता है। वहीं मेडिकल क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा भी महामारी पर नियंत्रण के लिए अपनाए गए तरीकों की आलोचना की गई है, जो सरकार की विफलता को स्पष्ट दर्शाती है।
    विश्व में भारत ऐसा देश है जहां कोरोना वायरस से संक्रमण नियंत्रित भी नहीं हुआ है और निरंतर बढ़ोतरी की ओर है फिर भी मोदी सरकार को अनलॉक करने की जल्दबाजी है। अभी भारत की स्थिति विश्व में छठवें स्थान पर हैं। यही हालत रही तो कोरोना संक्रमण अगर और बढ़ता है तो बेहद खौफनाक होगा। जिसकी आशंका विशेषज्ञों ने भी जताई है।

    0 नाराज अभ्यर्थियों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
    0 भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग

       राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती वर्ष दो हजार सत्रह अ_ारह की भर्ती प्रक्रिया अब तक अटकी हुई है। भाजपा सरकार में छत्तीसगढ़ आरक्षक भर्ती तकरीबन 22 पदों पर निकाली गई थी जिस पर 1.5 अभ्यार्थियों ने भाग लिया था, फिजिकल परीक्षा होने के बाद भी सरकार ने अब तक के इस भर्ती को अटका रखा है, जबकि हाईकोर्ट में 90 दिनों के भीतर भर्ती प्रक्रिया को शुरू करने के निर्देश दिए थे।
    छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षक भर्ती सन 2017 और 18 के बीच तकरीबन 22 पदों पर वैकेंसी निकाली गई थी, लेकिन आज तक इन पदों पर भर्ती नहीं हो सकी है, इससे बेरोजगार युवक आप सलाह सा महसूस कर रहे हैं। जिले में तकरीबन 30,000 ऐसे अभ्यर्थी हैं जो इस भर्ती प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं, लेकिन अब तक राज्य शासन ने इस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया को शुरू करने की तैयारी नहीं की है, जबकि हाईकोर्ट ने इसके लिए स्पष्ट तौर पर 90 दिनों के भीतर भर्ती करने के निर्देश दिए थे। इस मामले को लेकर के बेरोजगार युवक-युवतियों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
    बेरोजगार युवक-युवतियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार जल्द से जल्द आरक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू करें। लंबे समय से इंतजार करके बेरोजगार थक चुके हैं और उनकी माली हालत भी खराब हो चुकी है। कोरोना काल में भी कई लोग पूरी तरीके से बेरोजगार हो गए हैं। प्राइवेट नौकरियों के चलते उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, ऐसी स्थिति में अब आरक्षक भर्ती में भी वह पात्र होने के बाद नौकरी का इंतजार कर रहे हैं। बेरोजगार युवक-युवतियों का कहना है कि राज्य शासन जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करें। ज्ञापन सौंपने के दौरान आशा ज्योति साहू, गैंद, नूतन सेन, आराधना, टीकम, दयाराम, युवराज, ममता, उत्तरा, आरती रजक सहित अन्य मौजूद रहे।

    छत्तीसगढ़ सरकार के गृह मंत्रालय को इस मामले की पूरी जानकारी भेजी जा रही है, जल्दी सरकार इस पर बेहतर फैसला लेगी। बेरोजगार युवक-युवतियां निश्चित रहे। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बेरोजगारों के साथ है और उन्हें रोजगार देने में पूरे देश में अव्वल है।

    महेन्द्र साहू, पूर्व सभापति-जनपद पंचायत डोंगरगांव

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार पूरे प्रदेश में एक जुलाई से स्कूलों को संचालित करने की अनुमति दे सकती है जिसको लेकर राज्य स्तर पर लगातार जिम्मेदार उच्च अधिकारीयों व जनप्रतिनिधीयों की मिटिंग भी हो रही है।
    लेकिन वंही छत्तीसगढ़ पैरेंटस एसोसियेशन सरकार के इस निर्णय को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि प्राईवेट स्कूलों के द्वारा बसों और अन्य वाहनों में जिस प्रकार बच्चों को ठूंस-ठूंस कर कई किलोमीटर दूर -दूर से स्कूल लाया व ले जाया जाता है और क्लास रूम में भी जरूरत से ज्यादा बच्चों को बैठाया जाता है ऐसे स्थिति में स्कूल खोलने की जल्दबाजी किया जाना उचित नही होगा क्योंकि कोरोना का कोई वैक्सिन देश में नही है और बच्चे इस महामारी से जल्द संक्रमित हो सकते है। इसलिये सरकार को पूरी तैयारी और पूरी जिम्मेदारी के साथ कोई निर्णय लिया जाना चाहिए सिर्फ प्राईवेट स्कूलों के दबाव में आकर यदि सरकार कोई निर्णय लेगी तो एसोसियेशन के द्वारा इस निर्णय को हाईकोर्ट में चैलेंज किया जाएगा।
    फीस और टीचरों के वेतन को लेकर पहले ही प्रदेश में हहाकार मचा हुआ है और मामला हाईकोर्ट तक पंहुच चूका है और अब स्कूल आरंभ करने को लेकर भी मामला गर्म होते जा रहा है। कब क्या खुलेगा, कितने समय क्या बंद होगा, ई-पास लेना पड़ेगा, कि नही लेना पड़ेगा, सरकार के हर एक दिन नये-नये फरमान से जनता पहले ही परेशान है।

    दुर्ग / शौर्यपथ / रजिस्ट्री ऑफिस का प्रस्तावित नया भवन पूरी तरह से हाईटेक होगा। इसके लिए भूमि चिन्हांकन की कार्रवाई की जा रही है। आज इस सिलसिले में कलेक्टर डाक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे कातुलबोड़ एवं पुलगांव पहुंचे। वहां अधिकारियों ने इन्हें प्रस्तावित साइट दिखाये। इनमें से किसी एक का चयन रजिस्ट्री ऑफिस के लिए होगा। कलेक्टर ने वहां मौजूद एसडीएम खेमलाल वर्मा, नजूल अधिकारी अरुण वर्मा एवं जिला पंजीयक भूआर्य से प्रस्तावित भवन के संबंध में विस्तृत चर्चा की।
    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकारी कार्यालयों में लोगों को सभी जरूरी सुविधाएं देने निर्देशित किया है तथा नवीनतम तकनीक से अधिकतम अपडेट करने निर्देशित किया है, इसी क्रम में रजिस्ट्री आफिस का नया भवन भी बनाया जाएगा जो पूरी तरह हाइटेक होगा। कलेक्टर ने कहा कि प्रस्तावित भवन में ऐसी सभी सुविधाएं रखी जाएं जिससे रजिस्ट्री कराने आए नागरिकों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। रजिस्ट्री आफिस में काफी संख्या में रोज रजिस्ट्री होते हैं इसलिए थोड़ा समय तो सभी को इंतजार करना ही पड़ता है। ऐसे में इंतजार करने में, प्रक्रिया के दौरान इंतजार करने में किसी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए सीटिंग अरेंजमेंट बेहतर तरीके से करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त हाइटेक आफिस की जरूरतों के मुताबिक तकनीकी सुविधा से पूरी तरह दक्ष आफिस बनाये जाने को भी सुनिश्चित करने के निर्देश उन्होंने दिए।
    जिला पंजीयक ने बताया कि हाइटेक ऑफिस में दो बातों पर ध्यान दिया जाएगा। पहला तो आम नागरिकों की सुविधा पर, इसमें पर्याप्त संख्या में सीटिंग की सुविधा पर ध्यान दिया जाएगा। यह इस तरह होगा कि अधिकतम भीड़भाड़ वाले दिनों में भी लोगों को पर्याप्त रूप से बैठने की आरामदायक जगह मिल जाए। इसके अतिरिक्त बुनियादी सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। हाईटेक आफिस में जिस तरह की सुविधाएं होती हैं सभी सुविधाएं यहां पर सुनिश्चित कराई जाएगी। दूसरा तकनीक में भी ध्यान दिया जाएगा। रजिस्ट्री कार्य हाईटेक हो गया है। इस हाइटेक कार्य के मुताबिक कार्यालय में टेक्नालाजी भी सुनिश्चित की जाएगी।

    भिलाई स्टील प्लांट के आस-पास स्टील फैब्रिकेशन क्लस्टर विकास के रोडमैप के लिए की चर्चा



           भिलाई / शौर्यपथ / इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्पात मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय, आईएनएसडीएजी इन्सडॉग स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड और सेल के आस-आस के स्टील फैब्रिकेटर्स के अधिकारियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये एक बैठक की ।
    इस बैठक का आयोजन भिलाई स्टील प्लांट के आस-पास स्टील फैब्रिकेशन क्लस्टर विकसित करने की विस्तृत कार्ययोजना की रूपरेखा तैयार करने और स्टील फैब्रिकेटर्स की स्टील जरूरतों को पूरा करने मेँ आ रही दिक्कतों पर बातचीत करने के लिए आयोजित किया गया। स्टील फैब्रिकेशन क्लस्टर के विकास की यह संकल्पना इस क्षेत्र मेँ माइक्रो, स्माल एवं मीडियम इंटरप्राइजेज को बढ़ावा देगी, रोजगार पैदा करने मेँ सहायक होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगी। यह प्रधानमंत्री की आत्मनिर्भर भारत बनाने की भावना के अनुकूल है। प्रधान ने भिलाई स्टील प्लांट के सीईओ को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि दुर्ग जिले में स्टील फैब्रिकेटर की स्टील प्लेट की जरूरतों को पूरी तरह सुनिश्चित किया जाय और इस तरह की खरीद के दौरान आने वाली किसी भी तरह की रुकावट का निदान किया जाय।
    प्रधान ने रेलवे की तर्ज पर, जो कि बड़े पैमाने पर इस्पात पुलों का उपयोग कर रहा है; एमओआरटीएच मॉर्थ द्वारा निर्मित पुलों में इस्पात के उपयोग को बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा की।

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