August 02, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    तीस हजारी फैमिली कोर्ट में भावनाओं का अनोखा दृश्य, कानूनी लड़ाई के बीच मानवता की मिसाल बनी पति की संवेदनशीलता, टूटता परिवार फिर हुआ एक

    नई दिल्ली। कभी एक-दूसरे के खिलाफ अदालत में खड़े शिखा सिंह और सौरभ की कहानी ने दिल्ली के तीस हजारी फैमिली कोर्ट में मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं। तलाक की दहलीज तक पहुंच चुके इस दंपति के रिश्ते को आखिरकार किसी कानूनी दलील ने नहीं, बल्कि इंसानियत, संवेदना और परिवार के प्रति जिम्मेदारी ने बचा लिया।

    वर्ष 2020 में विवाह बंधन में बंधे शिखा और सौरभ के रिश्तों में समय के साथ खटास बढ़ती गई। विवाद इतना गहरा गया कि शिखा ने सौरभ के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज करा दिया और मामला अदालत तक पहुंच गया। दोनों के बीच संवाद लगभग समाप्त हो चुका था और तलाक की प्रक्रिया चल रही थी।

    इसी बीच परिस्थितियों ने अचानक ऐसा मोड़ लिया, जिसने दोनों के जीवन की दिशा बदल दी। शिखा के पिता को गंभीर हार्ट अटैक आया और उनकी हालत बेहद नाजुक हो गई। जब यह खबर सौरभ तक पहुंची, तो उन्होंने पुराने विवाद, आरोप और अदालत की लड़ाई को एक तरफ रख दिया। बिना किसी हिचकिचाहट के वे अस्पताल पहुंचे और अपने ससुर के इलाज की जिम्मेदारी संभाली।

    सौरभ ने उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए गुरुग्राम के प्रतिष्ठित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया तथा इलाज में हर संभव सहयोग किया। समय पर मिले उपचार और देखभाल के कारण शिखा के पिता की जान बच गई।

    इसके बाद जब अगली सुनवाई के लिए दोनों तीस हजारी फैमिली कोर्ट पहुंचे, तो माहौल पूरी तरह बदल चुका था। शिखा ने महसूस किया कि रिश्ते केवल विवादों और आरोपों से नहीं, बल्कि मुश्किल समय में निभाए गए साथ और संवेदनाओं से भी परिभाषित होते हैं। सौरभ की मानवता और परिवार के प्रति उनके समर्पण ने उनके मन में जमी नाराजगी को पिघला दिया।

    अदालत परिसर में ही भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। शिखा ने तलाक से जुड़े दस्तावेज फाड़ दिए और सौरभ को गले लगाकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। दोनों ने अपने सारे मतभेद भुलाकर एक नई शुरुआत करने और साथ रहने का निर्णय लिया।

    यह घटना केवल एक दंपति के पुनर्मिलन की कहानी नहीं, बल्कि इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कभी-कभी रिश्तों को बचाने के लिए कानूनी फैसलों से अधिक जरूरी इंसानियत, संवेदनशीलता और मुश्किल वक्त में दिया गया साथ होता है। प्रेम जब करुणा और जिम्मेदारी के रूप में सामने आता है, तो टूटते हुए रिश्तों को भी फिर से जोड़ सकता है।

    चार दुकानों की जांच में भारी स्टॉक कमी उजागर, जिला खाद्य विभाग की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

    दुर्ग। दुर्ग नगर निगम क्षेत्र की शासकीय उचित मूल्य दुकानों में सामने आ रही करोड़ों रुपये के राशन घोटाले जैसी गंभीर अनियमितताओं ने जिला खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विडंबना यह है कि विभागीय जांच प्रतिवेदनों में बार-बार एक ही व्यक्ति का नाम सामने आने, लाखों रुपये मूल्य के खाद्यान्न की कमी पाए जाने और स्वयं जांच अधिकारियों द्वारा अनियमितताओं की पुष्टि किए जाने के बावजूद अब तक किसी भी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

    जिला खाद्य विभाग के रिकॉर्ड में उपलब्ध चार अलग-अलग जांच प्रतिवेदनों का अध्ययन करने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं। इन सभी मामलों में किसी न किसी रूप में नवीन राजपूत का नाम दुकान संचालन और खाद्यान्न वितरण से जुड़ा हुआ पाया गया है।

    पहली जांच : 490 क्विंटल से अधिक चावल का अंतर

    24 जनवरी 2025 को आईडी 431001006 की आकस्मिक जांच में ऑनलाइन स्टॉक और भौतिक स्टॉक के बीच भारी अंतर पाया गया। जांच प्रतिवेदन के अनुसार लगभग 490.66 क्विंटल चावल तथा 14 लीटर केरोसिन भौतिक रूप से कम पाया गया। विक्रेता ने इस संबंध में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और बताया कि वह केवल नवीन राजपूत के निर्देश पर खाद्यान्न वितरण करता है।

    दूसरी जांच : 1169 क्विंटल चावल का अंतर

    7 दिसंबर 2024 को आईडी 431001025 की जांच में स्थिति और भी गंभीर मिली। विभागीय प्रतिवेदन के अनुसार 1169.72 क्विंटल चावल, 1.12 क्विंटल शक्कर, 4.19 क्विंटल नमक तथा 21 लीटर केरोसिन स्टॉक में कम पाया गया।

    जांच के दौरान विक्रेता ने स्वीकार किया कि वह केवल खाद्यान्न वितरण का कार्य करता है और संचालन संबंधी निर्देश नवीन राजपूत द्वारा दिए जाते हैं।

    तीसरी जांच : मोहन नगर पश्चिम दुकान में 431 क्विंटल चावल कम

    20 फरवरी 2025 को आईडी 431001017 की जांच में भी 431.03 क्विंटल चावल भौतिक रूप से कम पाया गया। यहां स्वयं नवीन राजपूत का कथन दर्ज किया गया जिसमें उन्होंने तकनीकी कारणों और एपीएल-बीपीएल स्टॉक के मिश्रित प्रदर्शन का तर्क दिया।

    प्रश्न यह है कि यदि वास्तव में तकनीकी समस्या थी तो इसकी सूचना तत्काल विभाग को क्यों नहीं दी गई? और यदि दी गई थी तो उसका रिकॉर्ड कहां है?

    चौथी जांच : दुकान का पूरा संचालन नवीन राजपूत के हाथ में होने की स्वीकारोक्ति

    आईडी 431001073 की जांच रिपोर्ट सबसे गंभीर मानी जा रही है।

    प्रतिवेदन में उल्लेख है कि:

    दुकान की अध्यक्ष को स्टॉक और रिकॉर्ड की जानकारी नहीं थी।

    नियुक्त विक्रेता कार्य नहीं कर रही थी।

    किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल पर OTP प्राप्त कर ई-पॉस मशीन संचालित की जा रही थी।

    नवीन राजपूत ने स्वीकार किया कि दुकान का पूर्ण संचालन उनके द्वारा किया जाता है।

    उन्होंने कम पाए गए खाद्यान्न की भरपाई दो माह में करने की बात भी कही।

    यह स्वीकारोक्ति अपने आप में कई गंभीर प्रशासनिक और आपराधिक प्रश्न खड़े करती है।

    आखिर एफआईआर क्यों नहीं?

    यदि कोई सामान्य नागरिक हजार या दो हजार रुपये की चोरी के आरोप में पकड़ा जाता है तो पुलिस तत्काल अपराध दर्ज कर कार्रवाई करती है। लेकिन यहां विभागीय रिकॉर्ड में सैकड़ों-हजारों क्विंटल खाद्यान्न की कमी दर्ज होने, बार-बार अनियमितताएं सामने आने और लाखों रुपये मूल्य के सरकारी राशन का हिसाब नहीं मिलने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होना आश्चर्यजनक है।

    जानकारी के अनुसार अप्रैल 2025 तक जिले में लगभग 9 करोड़ रुपये मूल्य के खाद्यान्न की कमी से संबंधित मामलों का संज्ञान विभाग द्वारा लिया जा चुका था। यदि यह तथ्य सही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतने बड़े वित्तीय नुकसान के मामलों में आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

    क्या कलेक्टर को पूरी सच्चाई बताई जा रही है?

    जिले में लगातार सामने आ रही जांच रिपोर्टों और विभागीय नोटशीटों के बावजूद यदि कार्रवाई केवल नोटिस, जवाब-तलब और फाइलों तक सीमित है तो यह भी जांच का विषय है कि कहीं जिला प्रशासन और कलेक्टर स्तर तक मामलों की गंभीरता को कम करके तो प्रस्तुत नहीं किया जा रहा।

    क्योंकि उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि अनियमितताएं कोई एक बार की घटना नहीं बल्कि लगातार सामने आ रही हैं।

    नई दुकानों का आवंटन और पुराने सवाल

    इसी बीच नई राशन दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। ऐसे समय में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिन मामलों में जांच प्रतिवेदन तैयार हो चुके हैं, वहां जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध क्या दंडात्मक कार्रवाई होगी?

    क्या लाखों रुपये मूल्य के राशन की कमी को केवल विभागीय नोटिसों तक सीमित कर दिया जाएगा?

    क्या दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होगी?

    क्या राशन घोटाले की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी?

    क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होगी?

    जनता जानना चाहती है जवाब

    दुर्ग शहर प्रदेश के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों का राजनीतिक केंद्र माना जाता है। ऐसे में सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में सामने आई गंभीर अनियमितताओं पर यदि कठोर कार्रवाई नहीं होती तो इससे पूरे तंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित होगी।

    अब निगाहें जिला प्रशासन, कलेक्टर दुर्ग और खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं। जनता यह जानना चाहती है कि सरकारी राशन के लाखों रुपये के इस कथित खेल में आखिर जिम्मेदार कौन है और उन पर कार्रवाई कब होगी?

    क्योंकि जांच प्रतिवेदन तो बहुत कुछ कह रहे हैं, लेकिन कार्रवाई अब भी सवालों के घेरे में है।

    दिल्ली के उमराव सिंह ज्वैलर्स में 2023 की सनसनीखेज चोरी का खुलासा, दुर्ग और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 18.5 किलो सोना-हीरा बरामद, आरोपी लोकेश श्रीवास गिरफ्तार।

    दुर्ग/नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में वर्ष 2023 की सबसे चर्चित और दुस्साहसिक ज्वेलरी चोरी की वारदातों में शामिल ‘उमराव सिंह ज्वैलर्स मेगा हेइस्ट’ का खुलासा करते हुए दुर्ग और दिल्ली पुलिस ने महज चार दिनों के भीतर मास्टरमाइंड लोकेश श्रीवास को भिलाई के स्मृति नगर से गिरफ्तार कर लिया था। करीब 20 से 25 करोड़ रुपये मूल्य के सोने, हीरे के आभूषण और नकदी की चोरी करने वाले इस शातिर अपराधी को पकड़कर पुलिस ने लगभग शत-प्रतिशत माल बरामद कर लिया था।

    यह मामला न केवल चोरी की बड़ी वारदात के कारण बल्कि आरोपी की पेशेवर कार्यशैली, डिजिटल ट्रैकिंग और पुलिस के तेज़ एवं समन्वित ऑपरेशन के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बना था।


    24 सितंबर 2023 की रात रची गई करोड़ों की चोरी की पटकथा

    पुलिस जांच के अनुसार, 24 सितंबर 2023 (रविवार) की रात लगभग 10:45 बजे लोकेश श्रीवास दिल्ली के भोगल इलाके में स्थित प्रतिष्ठित उमराव सिंह ज्वैलर्स के समीप पहुंचा। उसने पहले से की गई रेकी के आधार पर शोरूम के बगल की इमारत की छत से प्रवेश का रास्ता चुना।

    हाथ में हथौड़ी, छीनी और कटर मशीन लेकर वह छत से नीचे उतरा और शोरूम की मजबूत कंक्रीट दीवार में बड़ा सुराख कर अंदर प्रवेश कर गया। अंदर पहुंचते ही उसने सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा अलार्म सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया ताकि उसकी गतिविधियां रिकॉर्ड न हो सकें।


    सोमवार का अवकाश बना चोरी का सबसे बड़ा हथियार

    25 सितंबर 2023 (सोमवार) को पूरा बाजार बंद था। इसी का फायदा उठाकर लोकेश करीब 15 से 18 घंटे तक शोरूम के भीतर ही मौजूद रहा।

    उसने स्ट्रॉन्ग रूम की दीवार काटकर अंदर प्रवेश किया और बेहद सुनियोजित तरीके से सोने के आभूषण, हीरे-जवाहरात तथा नकदी समेटता रहा। पुलिस के अनुसार आरोपी ने अकेले ही इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।

    शोरूम के भीतर कई घंटे बिताने के बाद वह करोड़ों रुपये का माल लेकर फरार हो गया और बस के माध्यम से छत्तीसगढ़ की ओर निकल पड़ा।


    26 सितंबर को खुला करोड़ों की चोरी का राज

    26 सितंबर 2023 (मंगलवार) को सुबह लगभग 10:30 बजे जब शोरूम के संचालक दुकान खोलने पहुंचे तो स्ट्रॉन्ग रूम में सेंधमारी और करोड़ों के माल की चोरी का पता चला।

    घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस की कई टीमें सक्रिय हो गईं। शोरूम के कैमरे बंद होने के कारण शुरुआती जांच चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन पुलिस ने तकनीकी जांच का सहारा लिया।


    एक सीसीटीवी फुटेज और गूगल सर्च ने पहुंचाया आरोपी तक

    हालांकि आरोपी ने शोरूम के सभी कैमरे बंद कर दिए थे, लेकिन भागते समय वह कश्मीरी गेट आईएसबीटी के एक बाहरी सीसीटीवी कैमरे में दिखाई दे गया।

    दिल्ली पुलिस ने फुटेज से प्राप्त तस्वीरों का तकनीकी विश्लेषण किया। जांच के दौरान आरोपी की तस्वीर पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और छत्तीसगढ़ पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी तस्वीरों से मेल खा गई।

    इसके बाद मोबाइल सर्विलांस, कॉल डिटेल्स और डिजिटल लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए पुलिस को यह महत्वपूर्ण सुराग मिला कि आरोपी दिल्ली छोड़कर छत्तीसगढ़ पहुंच चुका है।


    स्मृति नगर में पुलिस चौकी के पास छिपा था मास्टरमाइंड

    जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर दिल्ली पुलिस की टीम छत्तीसगढ़ पहुंची। दुर्ग पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी ने भिलाई के स्मृति नगर क्षेत्र में पुलिस चौकी के पास ही किराए का कमरा लिया हुआ है।

    29 सितंबर 2023 की सुबह दुर्ग जिला पुलिस और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने उसके ठिकाने पर दबिश दी।

    पुलिस को देखते ही लोकेश श्रीवास ने खिड़की से कूदकर भागने का प्रयास किया, लेकिन पहले से घेराबंदी कर चुकी पुलिस टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।


    सूटकेस और बोरों में छिपाकर रखा था करोड़ों का खजाना

    गिरफ्तारी के बाद की गई तलाशी में पुलिस ने आरोपी के कब्जे से लगभग 18.5 किलोग्राम सोना, बड़ी मात्रा में हीरे के आभूषण और करीब 12.5 लाख रुपये नकद बरामद किए।

    चोरी का अधिकांश माल सूटकेस और बोरों में भरकर छिपाया गया था। बरामदगी की मात्रा इतनी अधिक थी कि इसे देश की हालिया सबसे बड़ी और सफल रिकवरी में शामिल माना गया।


    दुर्ग पुलिस की भूमिका बनी सफलता की कुंजी

    इस हाई-प्रोफाइल मामले में दुर्ग पुलिस की सक्रियता और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई खुफिया जानकारी निर्णायक साबित हुई। दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर आरोपी को पकड़ने और करोड़ों का माल बरामद करने में दुर्ग पुलिस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    महज 96 घंटे के भीतर देशभर में चर्चा का विषय बनी इस चोरी का खुलासा कर पुलिस ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की थी।


    प्रमुख घटनाक्रम एक नजर में

    ? 24 सितंबर 2023, रात 10:45 बजे – लोकेश श्रीवास शोरूम में दाखिल हुआ।
    ? 25 सितंबर 2023 – बंद बाजार का फायदा उठाकर स्ट्रॉन्ग रूम से करोड़ों की ज्वेलरी चोरी की।
    ? 26 सितंबर 2023, सुबह 10:30 बजे – शोरूम खुलने पर चोरी का खुलासा।
    ? 29 सितंबर 2023, तड़के – भिलाई के स्मृति नगर से आरोपी गिरफ्तार।
    ? 18.5 किलो सोना, हीरे और ₹12.5 लाख नकद बरामद।
    ? कुल चोरी का मूल्य: लगभग ₹20 से ₹25 करोड़।

    नई दिल्ली, ।
    दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने प्रमुख क्षेत्रों में चल रहे उपायों की व्यापक समीक्षा करते हुए राज्यों और संबंधित एजेंसियों को सख्त एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग की सुरक्षा एवं प्रवर्तन उप-समिति की 25वीं बैठक में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब सरकारों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया गया।

    बैठक में वाहन प्रदूषण नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1 अक्टूबर 2026 से बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों को ईंधन उपलब्ध नहीं कराने की व्यवस्था लागू करने हेतु पेट्रोल पंपों एवं सीएनजी स्टेशनों पर एएनपीआर कैमरे लगाने की समीक्षा की गई। साथ ही स्वच्छ परिवहन, बीएस-III और उससे पुराने वाहनों पर कार्रवाई तथा यातायात जाम वाले क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

    सड़क धूल एवं निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन के तहत दिल्ली में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले 5,500–6,000 मीट्रिक टन सीएंडडी कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने और मैकेनिकल रोड स्वीपिंग को तेज करने पर जोर दिया गया।

    पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लक्ष्य के साथ पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तैयारियों की समीक्षा की गई। आयोग ने ईंट भट्टों में पराली आधारित बायोमास पेलेट्स के उपयोग को चरणबद्ध रूप से बढ़ाकर 1 नवंबर 2026 तक न्यूनतम 30 प्रतिशत सुनिश्चित करने के निर्देशों के पालन पर विशेष जोर दिया।

    नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, खुले में कचरा जलाने की रोकथाम, लैंडफिल स्थलों पर आग नियंत्रण और प्रदूषण निगरानी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में भी प्रगति की समीक्षा की गई।

    बैठक में उद्योगों के लिए नए उत्सर्जन मानकों के अनुपालन को लेकर स्पष्ट चेतावनी दी गई कि निर्धारित पीएम उत्सर्जन सीमा का पालन नहीं करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर बंदी सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी एजेंसियां सख्त प्रवर्तन, नियमित समीक्षा और त्वरित सुधारात्मक कदमों के साथ निर्धारित समयसीमा में निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

    प्रदेश कांग्रेस सचिव अय्यूब खान ने की जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग

    दुर्ग। जिला अस्पताल दुर्ग में एक चिकित्सक की कथित लापरवाही और मरीज को गलत जानकारी देकर गुमराह करने का मामला सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी छत्तीसगढ़ के सचिव अय्यूब खान ने इस संबंध में सिविल सर्जन को लिखित शिकायत सौंपकर दोषी डॉक्टर के खिलाफ विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार 5 जून की रात लगभग 11 बजे आलिया खान नामक छात्रा, जो नीट परीक्षा की तैयारी कर रही है, तेज बुखार की शिकायत के चलते जिला अस्पताल दुर्ग पहुंची थी। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने बिना समुचित जांच किए छात्रा के परिजनों को बताया कि उसकी किडनी और लीवर खराब हैं तथा उसका उपचार जिला अस्पताल में संभव नहीं है। डॉक्टर ने तत्काल मरीज को रायपुर स्थित मेकाहारा अस्पताल रेफर करने की सलाह दी।

    परिजनों के अनुसार डॉक्टर की बात सुनकर वे घबरा गए और छात्रा को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकीय जांच के बाद पता चला कि उसे केवल सामान्य बुखार था। उपचार के बाद छात्रा पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट आई।

    मामले की जानकारी मिलने पर प्रदेश कांग्रेस सचिव अय्यूब खान पीड़ित परिवार के साथ जिला अस्पताल पहुंचे और सिविल सर्जन डॉ. मिंज से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। उन्होंने इस संबंध में लिखित शिकायत भी सौंपी। शिकायत प्राप्त होने के बाद सिविल सर्जन ने दो दिनों के भीतर मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

    अय्यूब खान ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित डॉक्टर पर मरीज को गलत जानकारी देकर गुमराह करने, परिजनों से दुर्व्यवहार करने तथा बिना पर्याप्त जांच के रेफर करने के आरोप में कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से गरीब और सामान्य मरीजों का सरकारी अस्पतालों पर से भरोसा उठ सकता है। जिला प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना चाहिए।

    सिविल सर्जन से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में मो. रफीक, अज्जू वाजिद, श्रीमती रुक्कैया, अनीस अकील चौहान तथा अख्तर चौहान भी शामिल थे।

    (नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत शिकायत के एवं उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच एवं संबंधित पक्ष का पक्ष आना शेष है।)

    भिलाई। भिलाई टाउनशिप क्षेत्र में लीज, सब-लीज, रिटेंशन एवं लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क से संबंधित नई नीति लागू होने के बाद सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं में खुशी का माहौल है। इसी क्रम में हिन्दू मिलन मंदिर प्रगति नगर रिसाली, भारत सेवा आश्रम एवं काली बाड़ी समिति के पदाधिकारियों ने Vijay Baghel से उनके सेक्टर-5 स्थित निवास कार्यालय में सौजन्य भेंट कर अभिनंदन किया तथा इस महत्वपूर्ण पहल के लिए आभार व्यक्त किया।

    प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लीज एवं सब-लीज नवीनीकरण शुल्क में हुई भारी वृद्धि के कारण सामाजिक, धार्मिक एवं जनसेवा से जुड़ी संस्थाओं के समक्ष आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई थीं। नई नीति के तहत ऐसी संस्थाओं के लिए मात्र एक रुपये की प्रतीकात्मक राशि पर लीज आवंटन एवं नवीनीकरण का प्रावधान किए जाने से उन्हें बड़ी राहत मिली है।

    हिन्दू मिलन मंदिर प्रगति नगर रिसाली एवं भारत सेवा आश्रम के पदाधिकारियों ने बताया कि इस विषय को सांसद विजय बघेल ने लगातार गंभीरता से उठाया। उन्होंने केंद्रीय इस्पात मंत्रालय एवं संबंधित अधिकारियों के समक्ष सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं की समस्याओं को प्रभावी ढंग से रखा और समाधान के लिए लगातार प्रयास किए। उनके निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि नई नीति लागू हो सकी, जिससे अनेक संस्थाओं को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

    नई नीति लागू होने पर काली बाड़ी समिति सेक्टर-6 के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भी सांसद का अभिनंदन करते हुए इसे सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के लिए ऐतिहासिक राहत बताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से संस्थाओं की आर्थिक चिंता कम होगी और वे समाजसेवा, सांस्कृतिक तथा धार्मिक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेंगी।

    इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सांसद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता क्षेत्र के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।

    अभिनंदन के दौरान सांसद विजय बघेल ने सभी पदाधिकारियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सामाजिक, धार्मिक एवं जनसेवा संस्थाएं समाज की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उनके हितों की रक्षा तथा क्षेत्र की जनसमस्याओं के समाधान के लिए वे भविष्य में भी निरंतर प्रयासरत रहेंगे।

    नई नीति से भिलाई टाउनशिप की सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं को मिली राहत को क्षेत्र में जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

    राज्यसभा नामांकन विवाद में कांग्रेस की अगली रणनीति पर नजर, 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प खुला

    नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव से जुड़े बहुचर्चित नामांकन विवाद में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी रिट याचिका खारिज किए जाने के बाद अब राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा इस बात की है कि कांग्रेस की अगली रणनीति क्या होगी और क्या मीनाक्षी नटराजन चुनाव याचिका दायर कर इस मामले को आगे बढ़ाएंगी।

    हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज ही आया है और फिलहाल मीनाक्षी नटराजन द्वारा चुनाव याचिका दायर किए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में कांग्रेस की विधिक टीम सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अध्ययन कर आगे की कानूनी रणनीति तय कर सकती है।

    हाई कोर्ट में चुनौती देने का रास्ता खुला

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मीनाक्षी नटराजन के पास चुनाव याचिका के माध्यम से मामले को आगे बढ़ाने का विकल्प उपलब्ध है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की जा सकती है।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कांग्रेस इस मामले को आगे बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर नामांकन निरस्तीकरण की वैधता को चुनौती दी जा सकती है।

    राज्यसभा चुनाव का परिणाम पूरी तरह बदल गया

    मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने और न्यायालय से तत्काल राहत नहीं मिलने का सीधा असर राज्यसभा चुनाव की दिशा पर पड़ा। कांग्रेस की प्रमुख दावेदार के चुनावी मैदान से बाहर होने के बाद मध्य प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बदल गए और भारतीय जनता पार्टी के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने का मार्ग प्रशस्त हो गया।

    कांग्रेस ने लगाए लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के आरोप

    कांग्रेस नेताओं ने पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। पार्टी के कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया से विपक्षी प्रतिनिधित्व प्रभावित हुआ है और लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचा है। वहीं भाजपा ने निर्वाचन प्रक्रिया को नियमसम्मत और वैधानिक बताते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है।

    अब सबकी नजर कांग्रेस के अगले कदम पर

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक राज्यसभा सीट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया, नामांकन की वैधता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका से जुड़े व्यापक सवाल भी इससे जुड़े हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस हाई कोर्ट का रुख करती है या नहीं, इस पर पूरे देश की राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।

    फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा को तत्काल राजनीतिक लाभ मिला है, जबकि कांग्रेस के सामने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी रणनीति तय करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

    नवनियुक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ की बैठक में हड़ताल की रणनीति पर मंथन, कर्मचारी हितों की लड़ाई तेज करने का ऐलान

    दुर्ग। दुर्ग नगर निगम में कर्मचारियों के बीच बढ़ते असंतोष और कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर नवनियुक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ (छत्तीसगढ़) ने संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में दुर्ग नगर निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कर्मचारियों ने निगम प्रशासन की कार्यशैली, लगातार हो रही प्रशासनिक कार्यवाहियों तथा कर्मचारी हितों की कथित उपेक्षा को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।

    बैठक में संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश सोनी, प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, प्रदेश सचिव ऋषभ सिंह ठाकुर, प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश तिवारी सहित प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन जिला अध्यक्ष राजूलाल चन्द्राकर के नेतृत्व में किया गया।

    बैठक के दौरान कर्मचारियों ने प्रदेश पदाधिकारियों को बताया कि निगम प्रशासन के कुछ निर्णयों और कार्यप्रणाली को लेकर कर्मचारियों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है। कर्मचारियों का कहना था कि हाल के समय में हुई प्रशासनिक कार्यवाहियों ने कर्मचारियों के बीच असुरक्षा का माहौल पैदा किया है, जिससे कार्यस्थल का वातावरण प्रभावित हो रहा है।

    प्रदेश पदाधिकारियों ने कर्मचारियों की समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वस्त किया कि कर्मचारी हितों से जुड़े सभी मुद्दों को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव तथा शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि संगठन विस्तार रही। सदस्यता अभियान के दौरान 45 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नवनियुक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ की सदस्यता ग्रहण की, जिससे संगठन को नई ऊर्जा और मजबूती मिली। प्रदेश नेतृत्व ने इसे कर्मचारियों के बढ़ते विश्वास का प्रतीक बताते हुए कहा कि मजबूत संगठन ही कर्मचारी हितों की प्रभावी लड़ाई लड़ सकता है।

    बैठक में आगामी आंदोलन और प्रस्तावित हड़ताल की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रदेश संयोजक संजय शर्मा ने बताया कि 13 जुलाई 2026 से रायपुर के तूताग्राउंड में प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को सफल बनाने के लिए प्रदेशभर में कर्मचारियों को संगठित किया जा रहा है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समय पर वेतन भुगतान, चुंगी क्षतिपूर्ति राशि का नियमित भुगतान, शासन से प्राप्त अनुदान की उपलब्धता तथा कर्मचारियों को ट्रेजरी (कोषालय) प्रणाली से जोड़ना शामिल है।

    प्रदेश अध्यक्ष राजेश सोनी ने कर्मचारियों का आह्वान करते हुए कहा कि अधिकार और सम्मान की लड़ाई एकजुटता से ही जीती जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारी एक मंच पर संगठित होकर अपनी बात रखते हैं तो उनकी समस्याओं के समाधान की संभावनाएं और मजबूत होती हैं।

    बैठक में शुभम गोईर, चित्ररेखा चन्द्राकर, नरेंद्र मनहरे, महेंद्र धर्मकार, तरुण चन्द्राकर, शिवा परिहार, साक्षी चौहान, सत्येंद्र, गंगाधर ठाकरे, गुमान निर्मलकर, हर्ष चन्द्राकर, नीरज, रतनदीप, राजदीप, निखिल, अनुपम, विनीत वर्मा, गुलशन यादव, कविता कश्यप, नेहा यादव, सोमलता साहू, संजू जाटव, निक्की बंछोर, रूपेश नायक, युवराज, मनोज सोनी, सिद्धांत शर्मा, गंगा यादव, राखी कुंडे, बलदाऊ पटेल, विजेंद्र पटेल सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

    बैठक के अंत में उपस्थित कर्मचारियों ने संगठन को और अधिक मजबूत बनाने, कर्मचारी हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने तथा आगामी अनिश्चितकालीन हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया। कर्मचारियों का मानना है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आने वाले समय में आंदोलन और व्यापक स्वरूप ले सकता है।

    रूसी तेल खरीद, हथियार आपूर्ति और पश्चिमी दोहरे मापदंडों पर विदेश मंत्री का तीखा जवाब

    नई दिल्ली। फिनलैंड में आयोजित कुल्तारंता टॉक्स के मंच से भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिमी देशों के दोहरे रवैये पर तीखा प्रहार करते हुए स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी विदेश नीति किसी बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों और 140 करोड़ नागरिकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तय करता है।

    रूसी तेल खरीद को लेकर यूरोपीय पत्रकारों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत ऊर्जा सुरक्षा के प्रश्न पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाता है। उन्होंने याद दिलाया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपीय देशों ने स्वयं मध्य-पूर्व के ऊर्जा बाजारों की ओर रुख किया, जिससे भारत को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़े। ऐसे में रूस से तेल खरीदना भारत की आवश्यकता और आर्थिक हितों के अनुरूप निर्णय था।

    विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों की हथियार नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि दशकों से ऐसे हथियार बेचे जाते रहे हैं जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी यूरोप की सुरक्षा को चुनौती नहीं दी, इसलिए भारत की नीतियों पर नैतिकता का पाठ पढ़ाना उचित नहीं है।

    जयशंकर ने यह भी कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके अनुसार, भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों को नियंत्रण में रखने में योगदान दिया।

    अमेरिका और पश्चिमी देशों की नीतियों में विरोधाभास की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में स्वयं वॉशिंगटन ने भारत से ऊर्जा बाजार को संतुलित रखने के लिए रूसी तेल खरीद जारी रखने का आग्रह किया था। ऐसे में आज भारत की आलोचना करना पश्चिमी देशों के दोहरे मापदंडों को उजागर करता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान भारत की नई कूटनीतिक सोच का प्रतीक है, जिसमें देश किसी गुट विशेष के दबाव में आने के बजाय अपनी संप्रभुता, रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। भारत का संदेश स्पष्ट है—मित्रता सभी से, लेकिन निर्णय केवल राष्ट्रीय हित में।

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