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आज आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। रुके हुए कार्य पूरे होने के योग हैं। परिवार का सहयोग मिलेगा।
शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 9
आर्थिक मामलों में सतर्कता जरूरी है। निवेश सोच-समझकर करें। नौकरीपेशा लोगों को अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।
शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 6
आज का दिन रचनात्मक कार्यों के लिए अनुकूल रहेगा। विद्यार्थियों को सफलता मिल सकती है। पुराने मित्र से मुलाकात संभव है।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5
परिवार में खुशियों का वातावरण रहेगा। संपत्ति या वाहन से जुड़ा लाभ मिल सकता है। भावनाओं में बहकर निर्णय लेने से बचें।
शुभ रंग: सिल्वर | शुभ अंक: 2
कार्यस्थल पर प्रभाव बढ़ेगा। व्यापार में लाभ के संकेत हैं। राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए दिन महत्वपूर्ण रहेगा।
शुभ रंग: सुनहरा | शुभ अंक: 1
नई योजनाओं पर काम शुरू कर सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 7
आज रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। नौकरी और व्यवसाय में संतुलित निर्णय लाभ देंगे। कानूनी मामलों में राहत मिल सकती है।
शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 8
प्रतिस्पर्धा में सफलता मिलने के योग हैं। विरोधियों पर विजय प्राप्त होगी। अचानक धन लाभ के संकेत हैं।
शुभ रंग: मैरून | शुभ अंक: 3
यात्रा के योग बन रहे हैं। धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। परिवार में किसी शुभ समाचार से खुशी का माहौल रहेगा।
शुभ रंग: पीला | शुभ अंक: 4
व्यापार में विस्तार की संभावना है। नौकरी में पदोन्नति के संकेत मिल सकते हैं। अनावश्यक तनाव से दूर रहें।
शुभ रंग: ग्रे | शुभ अंक: 10
नई साझेदारी लाभदायक साबित हो सकती है। तकनीकी और मीडिया क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए दिन अच्छा रहेगा।
शुभ रंग: आसमानी | शुभ अंक: 11
आज भावनात्मक संतुलन बनाए रखें। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। आर्थिक मामलों में सुधार होगा।
शुभ रंग: गुलाबी | शुभ अंक: 12
मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा एवं सुंदरकांड पाठ शुभ फलदायी रहेगा।
दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होगी।
नई दिल्ली, ।
देश के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को मजबूत करते हुए केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा पश्चिम बंगाल के साथ महत्वपूर्ण सुधार-संबंधी समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह पहल “विकसित भारत @2047” के विजन के अनुरूप ग्रामीण जल प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समुदाय आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
नई दिल्ली में आयोजित बैठकों में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल, राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना, डीडीडब्ल्यूएस सचिव श्री अशोक के.के. मीणा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
नए समझौते के तहत जल प्रबंधन प्रणाली को ग्राम पंचायत आधारित और समुदाय-केंद्रित बनाया जाएगा। ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को गांव स्तर पर जल अवसंरचना के संचालन, रखरखाव और जल शुल्क संग्रह की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे ग्रामीण जल योजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में गरिमा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण का जनआंदोलन बन चुका है। उन्होंने बताया कि मिशन की मूल समयसीमा मई 2024 थी, जिसे अब बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया गया है ताकि देश के हर ग्रामीण घर तक शत-प्रतिशत नल जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
अंडमान और निकोबार प्रशासन ने वर्ष 2021 में ही सभी ग्रामीण घरों तक 100 प्रतिशत नल जल पहुंचाने की उपलब्धि हासिल कर ली थी। उपराज्यपाल एडमिरल डी.के. जोशी ने बताया कि अब मिशन 2.0 के तहत समुदाय आधारित जल प्रबंधन और विकेंद्रीकृत परीक्षण प्रणाली को लागू किया जा रहा है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि द्वीप समूह में स्थायी नदियों और प्राकृतिक जल स्रोतों की कमी के कारण यहां जल आपूर्ति मुख्य रूप से वर्षा जल संग्रहण पर निर्भर है, इसलिए केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता बनी हुई है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री सुवेंदु अधिकारी ने केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार “हर घर जल” के लक्ष्य को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा करेगी। उन्होंने दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और पुरुलिया जैसे पिछड़े क्षेत्रों में जल परियोजनाओं को तेज करने का भरोसा दिया।
केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से जल जीवन मिशन 2.0 के कार्यान्वयन में तेजी लाने और जन शिकायतों के त्वरित समाधान पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
बैठक में जल योजनाओं के वित्तीय मिलान, नियमित पेयजल आपूर्ति, स्थानीय भागीदारी और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि मिशन का उद्देश्य केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी और भरोसेमंद जल आपूर्ति व्यवस्था स्थापित करना है।
कोलंबो/ ।
भारतीय नौसेना का हिंद महासागर पोत आईओएस सागर तीन दिवसीय सफल बंदरगाह यात्रा पूरी करने के बाद रविवार को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से रवाना हो गया। इस दौरे ने भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधों को नई मजबूती प्रदान की।
यह यात्रा भारत के “महासागर – पारस्परिक और समग्र क्षेत्रीय विकास” (MAHASAGAR) विजन के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग और मित्रता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
दौरे के दौरान आईओएस सागर के कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, सुरक्षित समुद्री मार्गों और आपसी रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की।
जहाज पर आयोजित विशेष स्वागत समारोह में दोनों देशों के नौसैनिक अधिकारियों, राजनयिकों और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। इस दौरान जहाज के बहुराष्ट्रीय दल और क्षेत्रीय सहयोग की भावना को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया।
आईओएस सागर ने आउटरीच गतिविधियों के तहत श्रीलंका नौसेना के अधिकारियों, स्थानीय स्कूली बच्चों और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों का जहाज पर स्वागत किया। आगंतुकों को जहाज की आधुनिक परिचालन क्षमताओं और नौसैनिक जीवन को करीब से जानने का अवसर मिला।
भारतीय और श्रीलंकाई नौसेना के जवानों के बीच मैत्रीपूर्ण वॉलीबॉल मैच का आयोजन भी किया गया, जिसने दोनों देशों के सैनिकों के बीच टीम भावना और आपसी संबंधों को और मजबूत किया। इसके अलावा बहुराष्ट्रीय दल ने गाले और कैंडी की सांस्कृतिक यात्राएं कर श्रीलंका की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जाना।
कोलंबो से रवाना होने के बाद आईओएस सागर ने श्रीलंका नौसेना के युद्धपोत एसएलएनएस नंदीमित्रा के साथ पासेज एक्सरसाइज (PASSEX) में हिस्सा लिया। इस अभ्यास में सामरिक युद्धाभ्यास, संचार प्रणाली और परिचालन समन्वय का अभ्यास किया गया, जिससे दोनों नौसेनाओं के बीच अंतरसंचालनीयता और समुद्री तालमेल को और मजबूती मिली।
वर्तमान में आईओएस सागर कोच्चि की ओर अग्रसर है और हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदार देशों के बीच समुद्री सहयोग, सुरक्षा और मित्रता को बढ़ावा देने के अपने मिशन को जारी रखे हुए है।
नई दिल्ली ।
देश में उभरते स्वास्थ्य खतरों, महामारी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन को और मजबूत बनाने की दिशा में नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कर्तव्य भवन-3 में आयोजित वैज्ञानिक संचालन समिति की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय के. सूद ने की।
बैठक में स्वास्थ्य, पशुपालन, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मंत्रालयों और संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इसमें विशेष रूप से पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों (Zoonotic Diseases), जलवायु-संवेदनशील स्वास्थ्य चुनौतियों और महामारी तैयारी पर व्यापक चर्चा हुई।
बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं, इसलिए किसी भी महामारी या स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए सभी क्षेत्रों के बीच समन्वित रणनीति आवश्यक है। प्रो. अजय के. सूद ने कहा कि हाल के वैश्विक स्वास्थ्य संकटों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मजबूत अंतर-क्षेत्रीय सहयोग ही भविष्य की चुनौतियों से सुरक्षा का आधार बनेगा।
राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन ने पिछले एक वर्ष में कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। इनमें—
बैठक में राज्यों में वन हेल्थ शासन को मजबूत करने के लिए तैयार मॉडल ढांचे पर आधारित एक विशेष वीडियो भी जारी किया गया।
विशेषज्ञों ने भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए AI-सक्षम रोगजनक पहचान, एकीकृत निगरानी प्रणाली, डेटा साझाकरण और आधुनिक प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया। बैठक में अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा हुई।
समापन संबोधन में प्रो. अजय के. सूद ने कहा कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना भी जरूरी है। उन्होंने नियमित मॉक ड्रिल, मजबूत तैयारी तंत्र और समय पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया।
उन्होंने सभी मंत्रालयों और विभागों से राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन के तहत किए जा रहे कार्यों का दस्तावेजीकरण करने और उन्हें व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने का आग्रह किया, ताकि भारत भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए और अधिक सक्षम बन सके।
नई दिल्ली/राजस्थान, ।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने राजस्थान स्थित हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के राजपुरा-दरीबा परिसर का दौरा करते हुए कहा कि कंपनी का आधुनिक एवं प्रौद्योगिकी आधारित परिचालन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” और “आत्मनिर्भर भारत” के विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत उदाहरण है।
दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विश्व की सबसे बड़ी चांदी उत्पादक और तकनीकी रूप से उन्नत भूमिगत खानों में शामिल सिंदेसर खुर्द खदान तथा अत्याधुनिक दरीबा स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि भारत का खनन क्षेत्र अब पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़कर आधुनिक, सुरक्षित, जिम्मेदार और तकनीक-संचालित विकास इंजन में बदल रहा है।
श्री रेड्डी ने कहा कि जस्ता, सीसा और चांदी जैसे खनिज भारत के बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रक्षा और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान जिंक जैसे बड़े और तकनीक आधारित उद्योग आयात निर्भरता कम करने और घरेलू मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार खनन भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।
केंद्रीय मंत्री ने भूमिगत खदान में जाकर टेली-रिमोट संचालन, पेस्ट फिलिंग, डिजिटल नियंत्रण प्रणाली और सुरक्षा उपायों का अवलोकन किया। उन्होंने भारत की पहली महिला खदान बचाव दल के लाइव प्रदर्शन की भी सराहना की और कहा कि यह खनन क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
हिंदुस्तान जिंक में वर्तमान में लगभग 26.3 प्रतिशत महिला कार्यबल कार्यरत है, जिसे मंत्री ने समावेशी कार्य संस्कृति की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
दौरे के दौरान श्री रेड्डी ने खदान की कैंटीन में संविदा कर्मचारियों, महिला खनन इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों के साथ भोजन कर संवाद किया। उन्होंने कर्मचारियों की मेहनत, सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और भारत के खनन विकास में उनके योगदान की सराहना की।
केंद्रीय मंत्री को कंपनी द्वारा जल संरक्षण, ऊर्जा परिवर्तन, कम कार्बन उत्सर्जन, संसाधन दक्षता और सतत खनन से जुड़े प्रयासों की जानकारी भी दी गई। चर्चा में भारत की खनिज सुरक्षा, घरेलू विनिर्माण और दीर्घकालिक आर्थिक विकास में भारतीय खनन कंपनियों की भूमिका पर विशेष फोकस रहा।
इस अवसर पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ श्री अरुण मिश्रा, खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री विवेक बाजपेई और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
ओस्लो/नई दिल्ली,
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को नॉर्वे के महामहिम सम्राट हेराल्ड पंचम द्वारा ओस्लो में आयोजित एक विशेष समारोह में ‘द रॉयल नॉर्वे ऑर्डर ऑफ मेरिट के ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया गया। यह विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को दिया जाने वाला नॉर्वे का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है।
यह प्रतिष्ठित सम्मान नॉर्वे तथा मानवता के हित में उत्कृष्ट सेवाओं और वैश्विक स्तर पर विशेष योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान भारत-नॉर्वे संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने में उनकी भूमिका के लिए दिया गया।
सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे के महामहिम सम्राट हेराल्ड पंचम और वहां की जनता के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि भारत और नॉर्वे के बीच दशकों पुरानी ऐतिहासिक मित्रता, विश्वास और पारस्परिक स्नेह का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान को दोनों देशों की जनता के बीच साझा की गई गर्मजोशी और मजबूत संबंधों को समर्पित करते हुए कहा कि यह भविष्य में भारत और नॉर्वे के बीच सहयोग, साझेदारी और मित्रता को और अधिक सशक्त बनाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सम्मान वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रधानमंत्री मोदी की अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व क्षमता का एक और महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है।
नई दिल्ली, ।
भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा नई दिल्ली स्थित ए.पी. शिंदे संगोष्ठी हॉल, NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा में एक दिवसीय “अखिल भारतीय राजभाषा समारोह-2026” का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में राजभाषा हिंदी के संवर्धन, प्रचार-प्रसार और कार्यालयीन कार्यों में उसके प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन महानिदेशक (एनएसएस) सुश्री गीता सिंह राठौर ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं की सहज एवं प्रभावी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से दैनिक शासकीय कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया।
समारोह में महानिदेशक (सीएस), अपर सचिव, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय सहित मंत्रालय और क्षेत्र संकार्य प्रभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्यरत कनिष्ठ अनुवाद अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित परिचर्चा सत्र में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के निदेशक श्री श्याम सुंदर कथूरिया ने राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के सहज, सरल और प्रभावी उपयोग के व्यावहारिक उपाय भी साझा किए। साथ ही देश के तीनों राजभाषा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे पैनल सदस्यों ने विभिन्न चुनौतियों और उनसे जुड़े समाधान प्रस्तुत किए।
समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों को यह संदेश दिया गया कि राजभाषा हिंदी देश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। जिन कर्मचारियों को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त नहीं है, उन्हें हिंदी प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को अपने अधीनस्थ उप-क्षेत्रीय कार्यालयों में हिंदी में कार्य बढ़ाने तथा राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया गया।
नई दिल्ली ।
न्यायमूर्ति श्री यशवंत वर्मा से जुड़े आरोपों की जांच कर रही न्यायाधीश जांच समिति ने सोमवार को अपनी महत्वपूर्ण रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला को सौंप दी। यह रिपोर्ट संसद भवन में औपचारिक रूप से प्रस्तुत की गई। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए तैयार की गई इस रिपोर्ट को जल्द ही संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जाएगा।
समिति के पीठासीन अधिकारी एवं सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने यह रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी। इस दौरान समिति के अन्य सदस्य — बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर तथा कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बी.वी. आचार्य — भी उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि इस जांच समिति का गठन लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला द्वारा 12 अगस्त 2025 को किया गया था। समिति को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अब इस रिपोर्ट के संसद में पेश होने के बाद राजनीतिक और न्यायिक गलियारों में इसकी व्यापक चर्चा तेज होने की संभावना है। रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आए हैं, इस पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।
नई दिल्ली /
दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल गौतम अडानी पर वर्ष 2024 में आरोप लगा था कि उन्होंने एक बड़े सौर ऊर्जा परियोजना को सफल बनाने के लिए भारी रिश्वत दी। उन पर साजिश, सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड जैसे आरोप लगाए गए थे। यह मामला अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और एक अन्य कंपनी द्वारा भारत सरकार को 12 गीगावॉट सौर ऊर्जा बेचने के समझौते से जुड़ा था, जिसका उद्देश्य लाखों घरों और व्यवसायों तक बिजली पहुंचाना था।
उस समय अडानी समूह ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया था। अडानी को इस मामले में कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और न ही उन्हें मुकदमे का सामना करने के लिए अमेरिका लाया गया। भारत में कई लोगों को पहले से उम्मीद थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (Foreign Corrupt Practices Act - FCPA) के प्रवर्तन को निलंबित किए जाने के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। यह कानून विदेशों में व्यापारिक रिश्वतखोरी पर रोक लगाता है।
आरोप वापस लेने का यह फैसला ऐसे समय आया जब अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने अडानी से जुड़े एक अन्य मुकदमे के निपटारे की जानकारी दी।
गौतम अडानी ने 1990 के दशक में कोयला कारोबार से अपनी संपत्ति बनाई थी। समय के साथ अडानी समूह ने नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में निवेश कर अपना कारोबार विविध बनाया। कंपनी ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा पोर्टफोलियो तैयार किया, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों में से एक भी शामिल है। समूह ने वर्ष 2030 तक देश की सबसे बड़ी स्वच्छ ऊर्जा कंपनी बनने का लक्ष्य रखा था। अडानी के भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीबी संबंध भी बताए जाते रहे हैं।
अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत में दायर दस्तावेज में कहा,
“न्याय विभाग ने इस मामले की समीक्षा की है और अभियोजन संबंधी अपने विवेकाधिकार का उपयोग करते हुए व्यक्तिगत आरोपियों के खिलाफ इन आपराधिक मामलों पर आगे संसाधन खर्च न करने का निर्णय लिया है।”
हालांकि, इस अनुरोध को अभी न्यायाधीश निकोलस गारौफिस की मंजूरी मिलना बाकी है।
अभियोजकों के अनुसार, अडानी और उनके सह-आरोपियों के वकीलों ने भी इस अनुरोध पर सहमति जताई है। अडानी के वकील रॉबर्ट जियुफ्रा ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
दूसरी ओर, अडानी समूह के आलोचक भी लगातार सक्रिय रहे हैं। अमेरिकी वित्तीय शोध संस्था हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी समूह पर “खुलेआम शेयर मूल्य में हेरफेर” और “लेखा धोखाधड़ी” के आरोप लगाए थे। अडानी समूह ने इन दावों को “चयनित गलत सूचनाओं और पुराने, निराधार तथा बदनाम आरोपों का दुर्भावनापूर्ण मिश्रण” बताया था।
जब 2024 में अमेरिकी अभियोजकों ने अडानी पर आरोप लगाए थे, तब उनका कहना था कि अडानी और अन्य लोगों ने सौर ऊर्जा सौदे में दोहरी रणनीति अपनाई। एक ओर उन्होंने वॉल स्ट्रीट निवेशकों को परियोजना की आकर्षक तस्वीर दिखाकर अरबों डॉलर का निवेश हासिल किया, वहीं दूसरी ओर भारतीय सरकारी अधिकारियों को लाभकारी अनुबंध पाने के लिए लगभग 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने का आरोप भी लगाया गया।
मामला सामने आने के बाद केन्या के राष्ट्रपति ने अडानी समूह से जुड़े करोड़ों डॉलर के एयरपोर्ट विस्तार और ऊर्जा समझौतों को रद्द कर दिया था। वहीं, श्रीलंका द्वारा कीमतों पर पुनर्विचार की मांग के बाद अडानी ग्रीन एनर्जी ने वहां की पवन ऊर्जा परियोजनाओं से खुद को अलग कर लिया। एक फ्रांसीसी तेल कंपनी ने भी समूह में नए निवेश अस्थायी रूप से रोक दिए थे।
विश्लेषकों का मानना है कि अडानी समूह की तेज़ी से बढ़ती सफलता का एक प्रमुख कारण उसकी कारोबारी प्राथमिकताओं का मोदी सरकार की नीतियों के अनुरूप होना रहा है। हालांकि, आलोचक अडानी पर “क्रोनी कैपिटलिज्म” यानी सत्ता से निकटता के जरिए लाभ लेने और सरकारी अनुबंधों में विशेष रियायत मिलने के आरोप लगाते रहे हैं, जिन्हें अडानी समूह लगातार खारिज करता आया है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
