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जनशिकायतों का बढ़ता अंबार, आयुक्त से मुलाकात की स्पष्ट व्यवस्था नहीं, लंबित मामलों पर कार्रवाई की प्रतीक्षा; प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवाल।
दुर्ग/ शौर्यपथ विशेष /
दुर्ग नगर पालिक निगम के आयुक्त सुमित अग्रवाल को कुछ माह पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नति (Award of IAS) प्राप्त होना न केवल उनके व्यक्तिगत प्रशासनिक जीवन की उपलब्धि है, बल्कि दुर्ग नगर निगम के लिए भी गौरव का विषय माना गया। पूर्व आयुक्त लोकेश चंद्राकर और प्रकाश सर्वे के बाद वे ऐसे तीसरे आयुक्त हैं जिन्हें यह सम्मान प्राप्त हुआ है।
हालांकि, इस उपलब्धि के साथ ही नगर निगम की वर्तमान कार्यप्रणाली को लेकर कई प्रशासनिक और जनसरोकार से जुड़े प्रश्न भी सामने आ रहे हैं। शासन की सामान्य प्रक्रिया के अनुसार आईएएस अवार्ड प्राप्त अधिकारियों को प्रशिक्षण सहित अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना होता है, लेकिन फिलहाल श्री अग्रवाल दुर्ग नगर निगम आयुक्त का दायित्व संभाल रहे हैं। ऐसे में शहर में यह चर्चा भी है कि क्या वे अपने संभावित स्थानांतरण अथवा आगामी प्रशासनिक प्रक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं, अथवा नगर निगम के कार्यों को पहले की तरह गति देने की दिशा में कोई ठोस पहल करेंगे।
शहर के नागरिकों और शिकायतकर्ताओं की प्रमुख शिकायत यह है कि आयुक्त से मुलाकात की कोई स्पष्ट एवं व्यवस्थित व्यवस्था दिखाई नहीं देती। पिछले दिनों आयुक्त के निजी सहायक (पीए) से जुड़े विवाद के बाद उन्हें सेवा से पृथक कर दिया गया। इसके बाद से अब तक उस पद पर नियमित व्यवस्था नहीं होने के कारण आम नागरिकों को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि आयुक्त किस समय कार्यालय में उपलब्ध रहेंगे अथवा जनसुनवाई कब होगी। परिणामस्वरूप प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग निगम कार्यालय पहुंचकर भी बिना मुलाकात लौटने को विवश हो रहे हैं।
नगर निगम से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मामलों की जांच और निर्णय भी लंबे समय से लंबित बताए जा रहे हैं। शहर में अवैध अतिक्रमण, बाजार व्यवस्था, स्वच्छता, बदबू, विभिन्न निर्माण कार्यों तथा कथित अनियमितताओं से संबंधित शिकायतें लगातार उठ रही हैं, लेकिन इन पर अपेक्षित गति से कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। इससे प्रशासनिक सक्रियता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
इसी क्रम में शौर्यपथ दैनिक समाचार पत्र द्वारा भी पूर्व में कथित गुमटी आवंटन, आश्रय स्थल संचालन तथा बकरी पालन परियोजना से जुड़े मामलों में नगर निगम आयुक्त को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। समाचार पत्र ने आश्रय स्थल के आवंटन में पारदर्शिता तथा संबंधित समूह के पूर्व कार्यों की जांच की भी मांग उठाई थी। समाचार पत्र के अनुसार इन शिकायतों की जांच की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सकी है।
शौर्यपथ समाचार पत्र द्वारा उक्त मामलों को उठाने के बाद संबंधित पक्ष के एक व्यक्ति द्वारा संपादक को कथित रूप से धमकी दी गई, जिसकी शिकायत पुलिस में की गई है। यह मामला कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय है और इसकी जांच संबंधित एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में है। इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्थापित होगा।
वहीं यह भी चर्चा का विषय है कि आश्रय स्थल के संचालन हेतु निविदा प्रक्रिया प्रारंभ होने के काफी समय बाद भी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। यदि ऐसा है तो संबंधित विभाग द्वारा प्रक्रिया में हो रही देरी के कारणों को सार्वजनिक किया जाना पारदर्शिता की दृष्टि से आवश्यक माना जा रहा है।
नगर निगम क्षेत्र में लगातार लंबित शिकायतों, प्रशासनिक निर्णयों में विलंब तथा नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों के बीच जनप्रतिनिधियों के स्तर पर भी अपेक्षित समाधान नहीं निकल पाने की स्थिति में नागरिकों की निगाहें स्वाभाविक रूप से निगम आयुक्त पर टिकती हैं। ऐसे में यह अपेक्षा की जा रही है कि नगर निगम प्रशासन शिकायतों के निराकरण, जनसुनवाई की नियमित व्यवस्था, लंबित जांचों की स्थिति तथा विकास कार्यों की प्रगति को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या आईएएस अधिकारी बनने के बाद आयुक्त सुमित अग्रवाल अपने संभावित प्रशासनिक बदलाव तक वर्तमान व्यवस्था को इसी प्रकार संचालित होने देंगे, या फिर वे नगर निगम प्रशासन को नई गति देते हुए जनशिकायतों के त्वरित निराकरण, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस एवं प्रभावी कदम उठाएंगे। इसका उत्तर आने वाले दिनों में निगम प्रशासन की कार्यशैली से स्पष्ट होगा।
कोंडागांव। जिला मुख्यालय स्थित डाकघर में पदस्थ कर्मचारी शेख रूहुल ताज पर लगे गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक विभागीय कार्रवाई न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और व्यापारियों में इस मामले को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार शेख रूहुल ताज के खिलाफ अब तक तीन अलग-अलग शिकायतें सामने आ चुकी हैं। पहला मामला एक डॉक्टर से दुर्व्यवहार का है, जिसमें डॉक्टर ने संभागीय अधीक्षक को लिखित शिकायत दी थी। हालांकि, आरोप है कि इस मामले को झूठी रिपोर्ट बनाकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
दूसरा मामला कोपाबेड़ा निवासी सुमित्रा नेताम से जुड़ा है। आरोप है कि उनसे खाते में जमा करने के नाम पर 20 हजार रुपये लिए गए, लेकिन एक साल तक राशि खाते में जमा नहीं की गई। बाद में रकम लौटा दी गई, पर खाते में जमा नहीं की गई, जिसे ठगी की श्रेणी में माना जा रहा है।
तीसरा मामला कोंडागांव के 20 से अधिक व्यापारियों से जुड़ा है। व्यापारियों को पोस्टर लगाने के नाम पर 6 महीने से 1 साल तक विज्ञापन का आश्वासन दिया गया, लेकिन पोस्टर एक महीने के भीतर ही हटा दिए गए। जब इस संबंध में डाकघर में जानकारी ली गई, तो पता चला कि ऐसी कोई योजना विभाग में थी ही नहीं। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि व्यापारियों को गुमराह कर ठगी की गई।
इन तीनों मामलों की जांच के बाद यह बात सामने आ रही है कि संबंधित कर्मचारी पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं। मामले को लेकर जब जगदलपुर के संभागीय अधीक्षक से चर्चा की गई, तो उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन 15 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इस देरी से लोगों में विभागीय मिलीभगत की आशंका भी गहराने लगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि डाकघर जैसे भरोसेमंद संस्थान में इस प्रकार की घटनाएं होती हैं, तो आम जनता का विश्वास कमजोर होना स्वाभाविक है।
वहीं, कोंडागांव डाकघर के मुख्य अधिकारी श्री मिश्रा ने इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार करते हुए बताया कि उनका स्थानांतरण हो चुका है और इस विषय में उनके वरिष्ठ अधिकारी ही जवाब देंगे।
रायपुर स्थित उच्च अधिकारी अजय सिंह चौहान से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया।
अब सवाल यह उठता है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण इस मामले में शामिल है, या फिर इसे जानबूझकर दबाया जा रहा है? आम जनता अब इस मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
आम जनता उठा रही दोहरे मानदंड का मुद्दा; स्थानीय सरकारी बंगलों के आवंटन और उपयोग पर नियम स्पष्ट करने की मांग
शौर्यपथ लेख । नकटी गांव में विधायक निवास के लिए भूमि खाली कराए जाने को लेकर जारी विवाद के बीच अब एक नया सवाल राजनीतिक और जनचर्चा का विषय बन गया है। आम नागरिक यह जानना चाहते हैं कि यदि गांव की जमीन पर सरकारी आवास निर्माण के लिए कार्रवाई की जा रही है, तो ऐसे विधायक और मंत्री जो पहले से राजधानी रायपुर में शासन द्वारा आवंटित सरकारी बंगले में रह रहे हैं, वे अपने स्थानीय विधानसभा क्षेत्र में सरकारी आवास या बंगलों का उपयोग किस नियम के तहत कर रहे हैं।
इस पूरे मामले में स्थानीय विधायक अनुज शर्मा का कहना है कि प्रभावित 75 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास आवंटित कर दिए गए हैं और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, इस बयान के बावजूद स्थानीय स्तर पर यह बहस तेज हो गई है कि जनप्रतिनिधियों के लिए सरकारी आवासों के आवंटन संबंधी नियमों का पालन समान रूप से हो रहा है या नहीं।
चर्चा का केंद्र यह है कि यदि छत्तीसगढ़ शासन के नियमों के अनुसार विधायक एवं मंत्रियों को राजधानी में सरकारी आवास उपलब्ध कराया जाता है, तो क्या उन्हें अपने ही विधानसभा क्षेत्र में भी सरकारी बंगले के उपयोग की अनुमति है? यदि है, तो उसका कानूनी आधार क्या है, और यदि नहीं, तो ऐसे मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई है?
जनता का कहना है कि कानून और नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। यदि आम नागरिकों के अतिक्रमण या शासकीय भूमि से जुड़े मामलों में बुलडोजर और सख्त कार्रवाई की जाती है, तो जनप्रतिनिधियों द्वारा स्थानीय स्तर पर सरकारी बंगलों के उपयोग की भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विषय पर सरकार को स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए। यदि स्थानीय सरकारी आवासों का आवंटन किसी विशेष नियम, प्रशासनिक आदेश या सुरक्षा कारणों से किया गया है, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
अब सबकी नजर राज्य सरकार पर है। देखना होगा कि सरकार स्थानीय विधानसभा क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों द्वारा उपयोग किए जा रहे सरकारी आवासों की स्थिति स्पष्ट करती है या नहीं। यदि किसी प्रकार का नियम उल्लंघन पाया जाता है, तो क्या समान मानदंड अपनाते हुए कार्रवाई होगी, या फिर यह विवाद केवल राजनीतिक बहस तक ही सीमित रह जाएगा।
नोट: इस समाचार में व्यक्त प्रश्न और दावे सार्वजनिक चर्चा एवं जनभावनाओं पर आधारित हैं। यह आवश्यक है कि संबंधित नियमों, आवंटन आदेशों और शासन के आधिकारिक अभिलेखों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाए।
3 पीड़ितों से 5.50 लाख की धोखाधड़ी की शिकायत पर कार्रवाई, पूछताछ में सामने आया बड़ा फर्जी नौकरी रैकेट; लाखों रुपये साथी के खातों में ट्रांसफर करने का खुलासा।
बालोद ।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक कथित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। बालोद पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार किया है, जो स्वयं को छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव से परिचित बताकर लोगों को सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देती थी। आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त वीवो कंपनी का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान लता धीवर (36 वर्ष), पति आकाश धीवर, निवासी पाण्डेपारा, वार्ड क्रमांक-05, थाना एवं जिला बालोद के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, 28 जून 2026 को डामिन साहू निवासी मरारपारा, बालोद ने शिकायत दर्ज कराई कि करीब डेढ़ वर्ष पहले उसकी मुलाकात योगेश साहू से हुई थी। योगेश ने बताया कि उसने कंप्यूटर शिक्षक की नौकरी के लिए लता धीवर को 3.50 लाख रुपये दिए हैं और सरकारी नौकरी के लिए उसी से संपर्क करने की सलाह दी।
इसके बाद 5 मार्च 2026 को डामिन साहू, बिंदु दुबे और ललिता गजेन्द्र आरोपी के घर पहुंचे। वहां लता धीवर ने दावा किया कि उसकी मुख्य सचिव से सीधी पहचान है और वह कृषि विभाग तथा जिला अस्पताल में नौकरी लगवा सकती है। इसके एवज में उसने प्रत्येक से दो-दो लाख रुपये की मांग की।
शिकायत के अनुसार, डामिन साहू ने 2 लाख रुपये, बिंदु दुबे ने 1.50 लाख रुपये तथा ललिता गजेन्द्र ने 2 लाख रुपये आरोपी को नकद दिए। बाद में न तो किसी की नौकरी लगी और न ही रकम वापस की गई। इस तरह तीनों से कुल 5.50 लाख रुपये की ठगी की गई।
पूछताछ में बड़ा खुलासा
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने अपने एक साथी के साथ मिलकर 7 लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर कुल 25.50 लाख रुपये वसूले। आरोपी के मुताबिक, इस राशि में से 23.92 लाख रुपये साथी द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए, जबकि करीब 1.57 लाख रुपये उसने कमीशन के रूप में अपने पास रखे।
पुलिस ने आरोपी को 29 जून 2026 को शाम 4:10 बजे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
पुलिस की अपील
बालोद पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धन की मांग करने वाले व्यक्तियों से सावधान रहें। किसी भी सरकारी भर्ती प्रक्रिया में केवल आधिकारिक माध्यमों पर ही भरोसा करें और संदेह होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें।
कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम
इस कार्रवाई में निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा, उप निरीक्षक सुरज साहू, प्रधान आरक्षक योगेश सिन्हा, आरक्षक लक्ष्मण साहू, महिला आरक्षक ममता ठाकुर एवं जागृति ठाकुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कांग्रेस नेता ने कथित चोरी की तुलना महमूद गजनवी के हमलों से की; ट्रस्ट और भाजपा की ओर से आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
नई दिल्ली/अयोध्या।
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रेस वार्ता के दौरान पवन खेड़ा ने दावा किया कि इतिहास में महमूद गजनवी ने 27 वर्षों में 17 बार मंदिरों पर हमले किए थे, जबकि राम मंदिर में कथित रूप से 42–45 दिनों के भीतर 70 बार चढ़ावा चोरी होने की बात सामने आई है। उन्होंने इस तुलना के जरिए मामले की गंभीरता को रेखांकित किया।
खेड़ा ने कहा कि धार्मिक शास्त्रों के अनुसार 'देव द्रव्य' (भगवान की संपत्ति) की चोरी अक्षम्य मानी जाती है। उनका आरोप है कि मामले में केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई कर वास्तविक जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस कथित अनियमितता के पीछे "असल जिम्मेदार" कौन हैं और उनकी भूमिका की जांच क्यों नहीं हो रही।
कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
इस बीच, राम मंदिर के चढ़ावा प्रबंधन और ट्रस्ट से जुड़ी खबरों के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। हालांकि, पवन खेड़ा के आरोप उनके राजनीतिक बयान हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में जांच एवं कानूनी प्रक्रिया जारी है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, भाजपा या आरएसएस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर उसे भी समान प्रमुखता से शामिल किया जाएगा ।
सुरक्षित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने दो दिवसीय आयोजन, उत्कृष्ट टीमें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में करेंगी बीएसपी का प्रतिनिधित्व
भिलाई ।
भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग द्वारा कार्यस्थल पर सुरक्षित कार्य संस्कृति, नवाचार और सतत सुधार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दो दिवसीय एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिता ‘सुरक्षा-2026’ का आयोजन 27 एवं 29 जून को मानव संसाधन विकास विभाग के सभागार में किया गया। प्रतियोगिता में संयंत्र के विभिन्न विभागों की 47 सेफ्टी सर्किल टीमों ने सुरक्षा से जुड़े नवाचारों और केस स्टडी प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता का शुभारंभ मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (मार्केटिंग एंड यूटिलिटीज) बी.के. बेहरा ने किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। दुर्घटनारहित कार्यस्थल के निर्माण के लिए नवाचार और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और अजय टल्लू द्वारा प्रतिभागियों को सुरक्षा शपथ दिलाने के साथ हुई। स्वागत उद्बोधन में मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) डी. सत्पथी ने बताया कि वर्ष 2024 में जहां 35 सेफ्टी सर्किल टीमों से यह पहल शुरू हुई थी, वहीं 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 83 हो गई। उन्होंने बताया कि ‘सुरक्षा-2026’ के लिए कुल 47 केस स्टडी प्राप्त हुईं, जो कर्मचारियों की बढ़ती सुरक्षा जागरूकता और सहभागिता का प्रमाण हैं।
प्रतियोगिता के पहले दिन 20 टीमों और दूसरे दिन 27 टीमों ने अपने केस स्टडी चार मूल्यांकन पैनलों के समक्ष प्रस्तुत किए। प्रत्येक पैनल में दो विशेषज्ञ निर्णायक शामिल थे। प्रस्तुतियों में कार्यस्थल पर संभावित जोखिमों की पहचान, दुर्घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षित कार्य प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विकसित नवाचारी उपायों का प्रदर्शन किया गया।
आयोजकों के अनुसार, प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों का चयन उच्च स्तरीय एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिताओं में भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाएगा।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के मुख्य महाप्रबंधक, वरिष्ठ अधिकारी, निर्णायक, मेंटर, सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सेफ्टी सर्किल टीमों के सदस्य उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु
भिलाई इस्पात संयंत्र में आयोजित हुई ‘सुरक्षा-2026’ एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिता।
47 सेफ्टी सर्किल टीमों ने सुरक्षा नवाचारों और केस स्टडी प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता का उद्देश्य कार्यस्थल पर सुरक्षित कार्य संस्कृति और नवाचार को बढ़ावा देना।
उत्कृष्ट टीमों को उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा।
सुरक्षित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने दो दिवसीय आयोजन, उत्कृष्ट टीमें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में करेंगी बीएसपी का प्रतिनिधित्व
भिलाई ।
भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग द्वारा कार्यस्थल पर सुरक्षित कार्य संस्कृति, नवाचार और सतत सुधार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दो दिवसीय एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिता ‘सुरक्षा-2026’ का आयोजन 27 एवं 29 जून को मानव संसाधन विकास विभाग के सभागार में किया गया। प्रतियोगिता में संयंत्र के विभिन्न विभागों की 47 सेफ्टी सर्किल टीमों ने सुरक्षा से जुड़े नवाचारों और केस स्टडी प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता का शुभारंभ मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (मार्केटिंग एंड यूटिलिटीज) बी.के. बेहरा ने किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। दुर्घटनारहित कार्यस्थल के निर्माण के लिए नवाचार और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और अजय टल्लू द्वारा प्रतिभागियों को सुरक्षा शपथ दिलाने के साथ हुई। स्वागत उद्बोधन में मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) डी. सत्पथी ने बताया कि वर्ष 2024 में जहां 35 सेफ्टी सर्किल टीमों से यह पहल शुरू हुई थी, वहीं 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 83 हो गई। उन्होंने बताया कि ‘सुरक्षा-2026’ के लिए कुल 47 केस स्टडी प्राप्त हुईं, जो कर्मचारियों की बढ़ती सुरक्षा जागरूकता और सहभागिता का प्रमाण हैं।
प्रतियोगिता के पहले दिन 20 टीमों और दूसरे दिन 27 टीमों ने अपने केस स्टडी चार मूल्यांकन पैनलों के समक्ष प्रस्तुत किए। प्रत्येक पैनल में दो विशेषज्ञ निर्णायक शामिल थे। प्रस्तुतियों में कार्यस्थल पर संभावित जोखिमों की पहचान, दुर्घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षित कार्य प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विकसित नवाचारी उपायों का प्रदर्शन किया गया।
आयोजकों के अनुसार, प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों का चयन उच्च स्तरीय एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिताओं में भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाएगा।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के मुख्य महाप्रबंधक, वरिष्ठ अधिकारी, निर्णायक, मेंटर, सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सेफ्टी सर्किल टीमों के सदस्य उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु
भिलाई इस्पात संयंत्र में आयोजित हुई ‘सुरक्षा-2026’ एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिता।
47 सेफ्टी सर्किल टीमों ने सुरक्षा नवाचारों और केस स्टडी प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता का उद्देश्य कार्यस्थल पर सुरक्षित कार्य संस्कृति और नवाचार को बढ़ावा देना।
उत्कृष्ट टीमों को उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा।
CBI जांच की मांग, आरोपियों की पैरवी करने वाले वकीलों पर ₹5 लाख जुर्माने का प्रस्ताव; ट्रस्ट की ओर से आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
अयोध्या।
राम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित हेराफेरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अयोध्या (फैजाबाद) बार एसोसिएशन ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। बार एसोसिएशन ने सार्वजनिक रूप से तीनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने जैसी चेतावनी दी है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा के अनुसार, यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो अधिवक्ता आंदोलन तेज करेंगे। उन्होंने शहरव्यापी विरोध और चक्का जाम की भी चेतावनी दी है।
आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे वकील
बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा है कि इस कथित चढ़ावा घोटाले के आरोपियों की ओर से कोई अधिवक्ता अदालत में पैरवी नहीं करेगा। प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई वकील इस निर्णय का उल्लंघन करता है तो उस पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। एसोसिएशन का कहना है कि यह राशि मामले की कानूनी लड़ाई में उपयोग की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद राम मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे की नकदी की कथित हेराफेरी से जुड़ा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नकदी की गिनती से जुड़े आठ आरोपियों को पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। बार एसोसिएशन का आरोप है कि इतने बड़े स्तर की कथित अनियमितता बिना उच्च स्तर की लापरवाही या संरक्षण के संभव नहीं हो सकती, इसलिए ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
CBI जांच की मांग
बार एसोसिएशन ने पूरे प्रकरण की CBI जांच कराने की मांग की है। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की भी बात कही है।
इस्तीफे की चर्चाएं, आधिकारिक पुष्टि नहीं
कुछ मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्टों में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की चर्चाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, इस संबंध में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
महत्वपूर्ण तथ्य
अयोध्या बार एसोसिएशन ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
तीन दिन के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन और चक्का जाम की चेतावनी।
आरोपियों की पैरवी करने वाले वकीलों पर ₹5 लाख जुर्माने का प्रस्ताव।
पूरे मामले की CBI जांच की मांग।
ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों पर लगे आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं, और इस संबंध में सक्षम एजेंसियों की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
रायपुर ।
छत्तीसगढ़ सरकार की सरस्वती साइकिल वितरण योजना बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। योजना के तहत हाई स्कूल में अध्ययनरत छात्राओं को निःशुल्क साइकिल उपलब्ध कराई जाती है, जिससे दूरदराज क्षेत्रों से स्कूल तक उनका आवागमन आसान हो सके, पढ़ाई में निरंतरता बनी रहे और स्कूल छोड़ने की दर कम हो।
इसी योजना से सूरजपुर जिले के शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्रा वैष्णवी कसेरा को भी निःशुल्क साइकिल मिली है, जिसने उसके शिक्षा के सपनों को नई उड़ान दी है।
पैदल सफर से साइकिल तक का सफर
सूरजपुर के बाजारपारा की रहने वाली वैष्णवी ने बताया कि पहले वह प्रतिदिन पैदल विद्यालय आती-जाती थी। इससे समय अधिक लगता था और पढ़ाई भी प्रभावित होती थी। अब निःशुल्क साइकिल मिलने से स्कूल पहुंचना आसान हो जाएगा और वह नियमित रूप से पढ़ाई कर अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकेगी।
वैष्णवी ने कहा,
"अब मेरे सपनों को नया पंख मिल गया है। पहले पैदल विद्यालय आती थी, अब साइकिल से विद्यालय जाऊंगी और मन लगाकर पढ़ाई कर अपने लक्ष्य को प्राप्त करूंगी।"
सरकार के प्रति जताया आभार
वैष्णवी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
राज्य सरकार के अनुसार, सरस्वती साइकिल योजना से छात्राओं में शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़ा है और दूरस्थ क्षेत्रों की बालिकाओं के लिए स्कूल तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हुआ है।
मुख्य बिंदु
सरस्वती साइकिल योजना के तहत हाई स्कूल की छात्राओं को निःशुल्क साइकिल उपलब्ध कराई जा रही है।
सूरजपुर की छात्रा वैष्णवी कसेरा को योजना का लाभ मिला।
पहले पैदल स्कूल जाने वाली वैष्णवी अब साइकिल से नियमित रूप से विद्यालय जा सकेगी।
योजना का उद्देश्य बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना, आवागमन सुगम बनाना और ड्रॉप-आउट दर कम करना है।
सहकारिता सप्ताह का हुआ भव्य शुभारंभ, किसानों और ग्रामीणों को मजबूत बनाने पर जोर
सहकारिता आंदोलन के जनक पंडित वामनराव बलिराम लाखे को दी गई श्रद्धांजलि
रायपुर / सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सहकारिता सप्ताह के शुभारंभ आज जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, रायपुर में सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप के मुख्य आतिथ्य मंे सम्पन्न हुआ। सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि लोगों को साथ लेकर विकास करने की एक मजबूत सोच है। सरकार का मुख्य लक्ष्य सहकारिता को एक जनआंदोलन बनाकर प्रत्येक ग्रामीण परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना है।
सहकारिता क्षेत्र को मिली नई पहचान
मंत्री कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद, केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश में सहकारिता क्षेत्र को एक नई और मजबूत पहचान मिली है। पिछले पांच वर्षों में सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए कई ऐतिहासिक व महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
गांव-गांव तक सहकारिता को मजबूत कर रही सरकार
राज्य सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सहकारिता को गांव-गांव तक मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। प्राथमिक कृषि साख समितियों को सशक्त बनाया जा रहा है, किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है तथा सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
साथ मिलकर विकास ही सहकारिता का मूल मंत्र
मंत्री कश्यप ने कहा कि साथ मिलकर विकास ही सहकारिता का मूल मंत्र है और इसी भावना से आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण संभव होगा। उन्होंने सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारियों और कर्मचारियों से पूरी सेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करने का आग्रह किया, ताकि सहकारी व्यवस्था पर जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके। उन्होंने आगे कहा कि यह सहकारिता सप्ताह केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि सहकारिता की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने का महाअभियान है। सप्ताहभर चलने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को सहकारिता से जोड़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति देने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभारंभ सहकारिता आंदोलन के जनक पंडित वामनराव बलिराम लाखे की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर की।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित के अध्यक्ष केदारनाथ गुप्ता, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के अध्यक्ष निरंजन सिन्हा, उपाध्यक्ष अभिनेष कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सहकारी संस्थाओं के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित थे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
