July 31, 2026
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       शौर्य की दुनिया / कुदरत ने फुर्सत के पलों में कई जीवों में जान फूंकी है. ज़रा अपने दायरे से बाहर निकल कर देखिए, दुनिया की हज़ारों ऐसी प्रजाती हैं जिन तक सिर्फ़ National Geographic या Discovery Channel वाले ही पहुंच सकते हैं. इन प्रजातियों का जिक्र किताबों में मिलना भी​ मुश्किल है. कुछ महासागर की गहराई में पाए जाते हैं, तो कुछ घने जंगलों के बीच बसे हैं. ऐसे ही दुर्लभ जीवों की सूची पेश है आपके लिए.

    1. Okapi

    ये जानवर ज़ेब्रा और जिराफ का मिश्रण है. ये मध्य अफ्रीका में पाया जाता है.

    2. समुद्री सुअर या Sea Pig

    Sea Pig को ज़्यादातर लोग Scotoplanes के नाम से भी जानते हैं. ये अटलांटिक, प्रशांत और हिंद महासागर की 1000 मीटर गहराई में पाए जाते हैं.

    3. Shoebill

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    इनकी चोंच जूते के आकार की होती है. इसी वजह से इनका नाम Shoebill पड़ा है.

    4. Thorny Dragon

    ये छिपकली आसानी से रेगिस्तान की मिट्टी में छिप जाती है. इसका एक नकली सिर होता है जिसे ये लोगों को धोखा देने के लिए निकालती है.

    5. The Blue Parrotfish

    ये नीली मछली अटलांटिक महासागर में पायी जाती है.

    6. Indian Purple Frog

    भारत में पाई जाने वाली मेंढ़कों की ये एक विचित्र प्रजाती है. इनका शरीर अजीब सा मोटा होता है. ये साल भर धरती के अंदर रहते हैं और संभोग के लिए सिर्फ़ दो हफ़्ते धरातल पर बिताते हैं.

    7. The Saiga Antelope

    ये साइगा हिरण अपनी अजीब नाक के लिए जाना जाता है.

    8. The Bush Viper

    ये सांप अफ्रीका के ट्रॉपिकल जंगलों में पाया जाता है और अपना ज़्यादातर शिकार रात के अंधेरे में करता है.

    9. The Pacu Fish

    इस मछली को Ball Cutter भी कहते हैं. इसके दांत कुछ-कुछ इंसानों जैसे होते हैं और ये अपने शिकार को काटने से चूकती नहीं हैं.

    10. Glaucus Atlanticus

    इसे ब्लू ड्रैगन भी कहते हैं. इसके पेट में गैस भरी होती जिसकी वजह से ये समुद्र के गुनगुने पानी की सतह पर तैरते दिखाई देते हैं.

    11. Hummingbird Hawk-Moth

    ये कीट फीलों के पराग खा कर जीवत रहते हैं और ​इनकी आवाज़ भी Hummingbird की तरह होती है.

    12. Venezuelan Poodle Moth

    ये पतंगा और मधुमक्खी जैसा दिखने वाला अजीब सा जीव साल 2009 में Venezuela में पाया गया था. इस जीव की कोई खास जानकारी नहीं है जीव वैज्ञानिकों के पास.

    13. Umbonia Spinosa

    ये कीड़े अपने चोंच से फूल के तने में छेद करके खाना खाते हैं. वैज्ञानिकों को इनके बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है.

    14. Mantis Shrimp

    इस जीव को Sea Locusts, Prawn Killer या Thumb Splitters भी कहते हैं. ये ट्रॉपिकल और सब-ट्रॉपिकल पानी में पाए जाते हैं. ये अधिक्तर वक्त अपने बिल में छिपे रहते हैं.

    15. The Panda Ant

    इन चीटों के शरीर पर सफेद और काले रोए होते हैं. जिसकी वजह से इन्हें Panda Ant कहते हैं. ये Chile में पाए जाते हैं और इनके रेशे काफी नोकीले होते हैं.

    16. Penis Snake

    इस जानवर को वास्तव में Atretochoana Eiselti कहते हैं. इसका अगला हिस्सा Penis जैसा दिखता है.ये एक चपटे सिर वाला बड़ा जीव है, जिसका शरीर काफी चिकना होता है.

    17. Red-lipped Batfish

    ये लाल होठों वाली मछली Galápagos Islands में पाई जाती है. ये मछली तैर नहीं पाती इसलिए समुद्री तल पर चलती है.

    18. Goblin Shark

    Goblin Shark लगभग पूरी दुनिया में पाई जाती है, पर समुद्री सतह के 100 मीटर की गहराई में. ये लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती है.

     शौर्य की दुनिया / किसी बात की आदत होना गलत बात नहीं, लेकिन लत यानी एडिक्शन कई बार बहुत हानिकारक हो सकता है. दिल्ली में एक ऐसे ही हानिकारक एडिक्शन की बात पता चली है. दिल्ली के नजफगढ़ इलाके के रहने वाले सनी को एक ऐसे ड्रग की आदत लग गई थी जिसे घोड़ों को दिया जाता था. ये ऐसा ड्रग था जो परफॉर्मेंस बढ़ाता था और सनी को बॉडीबिल्डिंग का शौख था. धीरे-धीरे कर इंजेक्शन लेने लगे और इसके कारण ही अब उन्हें अस्पताल जाना पड़ा. वहां उनका इलाज हो रहा है.

    एडिक्शन कई बार इतने अजीब हो जाते हैं कि बाकी सभी चीज़ें आम लगने लगती हैं. ये विक्स वेपोरब सूंघने या वीडियो गेम के दीवाने हो जाने जैसे एडिक्शन नहीं बल्कि कुछ तो इतने भयावह हैं कि उनके बारे में सोचकर ही डर लग जाए. दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो इतने अजीबो-गरीब एडिक्शन का शिकार हैं कि वो आम लोगों की तरह न जिंदगी जी सकते हैं और न ही अपने रोजमर्रा के काम कर सकते हैं.

    1. कार के साथ सेक्स

    एक इंसान जो कार के साथ सेक्शुअल रिलेशनशिप में है और उसी में अपना पार्टनर खोजता है. एरिजोना के निएंड्रिथल असल में Mechanophilia के मरीज हैं. इस बीमारी के मरीज मशीनों से खास तौर पर आकर्षित होते हैं और उनके साथ सेक्शुअल रिलेशनशिप भी रखते हैं.

    2. तकिए का एडिक्शन

    जोहानसबर्ग में रहने वाली टैमरा असल में अपने तकिए की एडिक्ट हैं. वो चाय पीने, खाना खाने, बाहर जाने, शॉपिंग करने हर काम के लिए अपने तकिए के साथ रहती हैं. उनके अनुसार उनके इस बॉन्ड को सिर्फ वही जान सकती हैं.

    3. बिल्ली के बाल खाने वाली महिला

    अमेरिका के मिशिगन राज्य के डेट्रॉइट शहर में रहने वाली लीज़ा की लत बेहद अजीब है. उन्हें अपनी बिल्ली के बाल खाना पसंद है. वो दिन में तीन हेयरबॉल (बालों का गुच्छा) खा लेती हैं और 20 साल से ये कर रही हैं. इतना ही नहीं वो अपनी बिल्ली के बाल उसी तरह से निकालती हैं जैसे जानवर एक दूसरे को जुबान से चाटते हैं.

    बिल्ली के बाल खाती लीजाबिल्ली के बाल खाती लीजा

    4. अपने पति की चिता की राख खाने वाली महिला

    केसी के पति की मौत 2011 में हो गई थी और तब से लेकर अब तक वो अपने पति की मौत का दुख नहीं भुला पा रही हैं. वो एक बर्तन में अपने पति की राख संजो कर रखे हुए हैं और उन्हें उसे खाने का एडिक्शन है. वो अपनी उंगलियां बर्तन में डालती हैं. उनपर थोड़ी सी राख लग जाती है और फिर उसे चाट लेती हैं.

    केसी अपने पति की राख हर रोज थोड़ी-थोड़ी कर खाती हैं.केसी अपने पति की राख हर रोज थोड़ी-थोड़ी कर खाती हैं.

    5. हवा भरे हुए खिलौनो से प्यार

    खिलौनों का प्यार अधिकतर बच्चों में पाया जाता है, लेकिन अगर कोई आपसे बोले कि एक आदमी अपने खिलौनो से इतना प्यार करे कि उनके साथ सेक्स भी करे तो? मार्क अपने 15 हवा भरने वाले खिलौनो के साथ रिलेशनशिप में हैं और वो नाहाने, सोने से लेकर दिन के हर काम को उन खिलौनो के साथ ही करते हैं.

    6. शवों को सूंघने का एडिक्शन

    लुइस स्क्वारिसी ब्राजीलियन नागरिक हैं. पिछले 35 सालों से वो एक अजीबोगरीब सनक के शिकार हैं. उन्हें शवों को सूंघना अच्छा लगता है और इस एडिक्शन के कारण वो कई बार अपनी नौकरी भी छोड़ चुके हैं. उन्हें शवों को सूंघना और लोगों की शवयात्रा में जाना बहुत पसंद है. 1983 में उनके पिता की मृत्यु हो गई थी और तब से ही वो ब्राजील के Batatais शहर की हर शवयात्रा में जाते हैं.

    लुइस को अपनी नौकरी सिर्फ इस एडिक्शन के कारण छोड़नी पड़ी.लुइस को अपनी नौकरी सिर्फ इस एडिक्शन के कारण छोड़नी पड़ी.

    7. इंसान और सुअर का खून पीने वाली महिला

    कैलिफोर्निया की मिशेल असल मायने में वैंपायर की तरह हैं. उन्हें इंसान और सुअर का खून पीने की आदत है. पिछले 15 सालों में वो इतना खून पी चुकी हैं कि 23 बाथटब पूरे भर जाएं.

    मिशेल ने धोखे से एक बार सुअर का खून पी लिया था और फिर उन्हें उसकी भी आदत लग गई.मिशेल ने धोखे से एक बार सुअर का खून पी लिया था और फिर उन्हें उसकी भी आदत लग गई.

    8. घर की दीवारें खाने वाली महिला

    किसी को ईंठ खाने का इतना शौख हो कि वो अपने घर की दीवारों पर ही छेद कर दे ऐसा सोचकर ही अजीब लगेगा. Patrice Benjamin-Ramgoolam असल में इतनी ही दीवानी हैं. उन्होंने 18 साल की उम्र से ही ये खाना शुरू किया और एक समय पर वो इतनी दीवानी हो गईं थीं कि उन्होंने अपने घर की दीवारों पर ही छेद कर दिया था.

    9. सोफे और गद्दे खाने वाली महिला

    अब ये एडिक्शन भी खाने से ही जुड़ा है. एक महिला सोफे और गद्दे के कुशन खाने की इतनी आदी है कि वो कई गद्दे और सोफे खा चुकी हैं.

    10. टॉयलेट पेपर खाने का एडिक्शन

    प्रेग्नेंसी में महिलाओं को अचार खाने का मन करता है, लेकिन ब्रिटेन की जेड सिल्वेस्टर को बेहद अजीब एडिक्शन होता है. जेड 5 बच्चों की मां हैं और प्रेग्नेंसी के वक्त वो टॉयलेट पेपर सूंघती हैं और खाती हैं. जेड एक दिन में प्रेग्नेंसी के दौरान पूरा एक रोल टॉयलेट पेपर खा जाती थीं.

    जेड पांच बच्चों की मां हैं.

    जेड पांच बच्चों की मां हैं.

    साभार ( एजेंसी )

     

        शौर्यपथ / राजतंत्र के जमाने में नेपाल में एक तंजतारी चलती थी, ‘मुखे कानून छ’ यानी जो मुंह से निकल गया, वही कानून है। 28 मई, 2008 को राजशाही खत्म कर नेपाल में लोकशाही की घोषणा कर दी गई, मगर शासन का ढब वहां बदला नहीं। विगत बुधवार को सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने बयान दिया था कि नेपाल भी नक्शा जारी करेगा। उनके इस बयान के पांच दिन बाद सोमवार को नए नेपाल का राजनीतिक नक्शा मंत्रिपरिषद ने जारी भी कर दिया। जो काम पिछले 26 साल में नहीं हो सका था, प्रधानमंत्री ओली ने पांच दिन में कर दिया? 
    इस नए राजनीतिक नक्शे में लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी से लगे भारतीय इलाकों को भी नेपाल का हिस्सा बता दिया गया है। नए नक्शे में गुंजी, नाभी और कुटी जैसे गांवों को भी नेपाली इलाके में दिखाया गया है। यह दीगर है कि 1975 में नेपाल ने जो नक्शा जारी किया था, उसमें लिंपियाधुरा के 335 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र नहीं दर्शाए गए थे। मंगलवार 19 मई, 2020 से यह नेपाली संविधान की अनुसूची, सरकारी निशान और उसके पाठ्यक्रम का हिस्सा हो गया। सवाल यह है कि क्या इस नए नक्शे को हेग स्थित ‘आईसीजे’ या दुनिया की कोई भी न्यायपालिका मान लेगी? 
    ब्रिटिश भारत में 1798 से लेकर 1947 तक जो नक्शे समय-समय पर जारी किए गए, उन पर नेपाल को कोई आपत्ति नहीं थी। प्रोफेसर लोकराज बराल 1996 में नई दिल्ली में नेपाल के राजदूत रह चुके थे। पिछले हफ्ते एक बातचीत में उन्होंने माना कि नेपाल उस दौर में भी ब्रिटिश इंडिया के नक्शे पर आश्रित था। भारत-नेपाल संयुक्त प्राविधिक समिति ने 26 वर्षों का समय लगाकर 182 स्ट्रीप मैप के साथ 98 प्रतिशत रेखांकन का कार्य संपन्न किया है। इसमें दो फीसदी कार्य कई वर्षों से बाकी है। इस पर भारतीय पक्ष की मुहर भी नहीं लगी है। नया विवाद 2 नवंबर, 2019 को शुरू हुआ, जब भारत ने कश्मीर-लद्दाख को लेकर नक्शा पुनर्प्रकाशित किया था। उसमें पड़ोसी मुल्कों को बांटती सीमाओं में कोई रद्दो-बदल नहीं हुआ था, पर भारतीय विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बावजूद नेपाल मानने को तैयार नहीं था। वह विदेश सचिव स्तर पर इसे सुलझाना चाहता था। 
    नए विदेश सचिव हर्षवद्र्धन शृंखला 29 जनवरी, 2020 को चार्ज लेने के साथ नेपाल से इस विषय पर संवाद करते, यह संभव नहीं था। उसके अगले पखवाडे़ इसकी तैयारी हो, तब तक कोरोना महामारी प्रारंभ हो चुकी थी। प्रश्न यह है कि यदि लिपुलेख मुद्दा ओली सरकार के लिए इतना ही महत्वपूर्ण था, तो 28 मार्च, 2019 को विदेश सचिव स्तर की बैठक में इसे शामिल क्यों नहीं किया गया? काठमांडू में आहूत उस बैठक में तत्कालीन भारतीय विदेश सचिव विजय कृष्ण गोखले व उनके नेपाली समकक्ष शंकरलाल वैरागी क्रॉस बॉर्डर रेलवे, मोतिहारी-अमलेखगंज तेल पाइपलाइन व अरुण-तीन जल विद्युत परियोजना पर सहमति बना रहे थे। 
    दो-तीन बातें ध्यान में रखने की हैं। 1962 में युद्ध के समय से ही यहां पर इंडो-तिब्बतन फोर्स की तैनाती भारत ने कर रखी है। नेपाल इसे हटाने की मांग कई बार कर चुका है। कायदे से नेपाल को ऐसा कोई पत्र दिखाना चाहिए, जिसमें तत्कालीन भारत सरकार ने लिपुलेख ट्राइजंक्शन पर इंडो-तिब्बतन फोर्स की तैनाती का कोई अनुरोध किया था। सितंबर 1961 में जब कालापानी विवाद उठा था, उससे काफी पहले 29 अप्रैल, 1954 को भारत-चीन के बीच शिप्ला-लिपुलेख दर्रे के रास्ते व्यापार समझौता हो चुका था। सन 1954 से लेकर 2015 तक चीन ने कभी नहीं माना कि लिपुलेख वाले हिस्से में, जहां से उसे भारत से व्यापार करना था, नेपाल भी एक पार्टी है या यह ‘ट्राइजंक्शन’ है। 2002 में एक ज्वॉइंट टेक्नीकल कमेटी भी बनी। उन दिनों नेपाल की कोशिश थी कि चीन को इसमें शामिल करें। चीनी विदेश मंत्रालय ने 10 मई, 2005 को एक प्रेस रिलीज द्वारा स्पष्ट किया कि कालापानी भारत और नेपाल के बीच का मामला है, इसे इन दोनों को ही सुलझाना है। 
    नेपाल, 1950 की संधि को भी ध्यान से नहीं देखता है। 31 जुलाई, 1950 को हुई भारत-नेपाल संधि के अनुच्छेद आठ में स्पष्ट कहा गया है कि इससे पहले ब्रिटिश इंडिया के साथ जितने भी समझौते हुए, उन्हें रद्द माना जाए। यह एक ऐसा महत्वपूर्ण बिंदु है, जो कालापानी के नेपाली दावों पर पानी फेर देता है। दरअसल, ओली सरकार कालापानी-लिपुलेख विवाद में फंसी हुई है। स्वयं सरकार के मंत्रियों को नहीं मालूम कि जिस सड़क का उद्घाटन 8 मई, 2020 को विडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया है, वह सड़क कब से बननी शुरू हुई थी। 
    विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावाली कहते हैं, ‘भारत, लिपुलेख में 2012 से सड़क बना रहा था, यह मीडिया रिपोर्ट से मुझे मालूम हुआ।’ यह कुछ अजीब नहीं लगता कि जो विवादित इलाका नेपाल की राजनीति का ‘एपीसेंटर’ बना हुआ है, वहां की जमीनी गतिविधियों से ओली और ज्ञावाली अनभिज्ञ थे? पुराने टेंडर  व दस्तावेज बताते हैं कि शिप्किला-लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली 75 किलोमीटर दुर्गम सड़क 2002 से निर्माणाधीन थी। यह परियोजना 2007 में ही पूरी हो जानी थी, जो बढ़ते-बढ़ते 2020 में पहुंच गई। 
    सोचने वाली बात है कि प्रधानमंत्री ओली इस पूरे मामले को राष्ट्रीय अस्मिता की ओर क्यों धकेल रहे हैं? सर्वदलीय बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री व जनता समाजवादी पार्टी के नेता बाबुराम भट्टराई ने यूं ही नहीं कहा था कि राष्ट्रवाद का भौकाल खड़ा करने की बजाय सरकार पुराने दस्तावेजों को जुटाए और कालक्रम को व्यवस्थित करे, तभी इस लड़ाई को वह अंतरराष्ट्रीय फोरम पर ले जा सकेगी। 
    परिस्थितियां बता रही हैं कि लिपुलेख विवाद में पीएम ओली ने जान-बूझकर पेट्रोल डाला है। कालापानी के छांगरू गांव में नेपाली अद्र्धसैनिक बल, आम्र्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) की तैनाती ओली का खुद का फैसला था। उसके बारे में बुधवार को हुई सर्वदलीय बैठक में चर्चा तक नहीं हुई थी। ओली चाहते हैं कि सीमा पर तनाव बढ़े, ताकि देश का ध्यान उधर ही उलझा रहे। 29 मई, 2020 को बजट प्रस्ताव के बाद ओली पद पर रहें न रहें, कहना मुश्किल है। 44 सदस्यीय स्टैंडिंग कमेटी में प्रधानमंत्री ओली के पक्ष में केवल 14 सदस्य हैं। प्रचंड गुट के 17 और माधव नेपाल के 13 सदस्य मिलकर कोई नया गुल खिलाने का मन बना चुके हैं। 
    (ये लेखक के अपने विचार हैं)

    उसके परिजनों के खातें में भी दिये 11 हजार रूपये आर्थिक मदद

            दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग थाना अंतर्गत अंजोरा बाइपास पर विनोद हेम्ब्रोम पिता रसिक हेम्ब्रोम नामक नव युवक का शव मिला था। जो ग्राम गरंग थाना भेलवाघाटी देवरी, जिला गिरिडीह, झारखंड का निवासी था। उक्त युवक के निवास क्षेत्र अंतर्गत पडऩे वाले थाने भेलवाघाटी से दुर्ग पुलिस द्वारा संपर्क कर उनके रिश्तेदारों परिजनों से बात की गई] उन्हें यह बताया गया कि अगर वे चाहें तो मृत शरीर को झारखंड हमारे द्वारा भेजा जा सकता हैं, या वे स्वयं आना चाहे तो हमारे द्वारा उनका इंतजार किया जाएगा। उनके परिजनों द्वारा कहा गया कि वह तो कोरोना महामारी के चलते स्वयं दुर्ग आने में असमर्थ हैं।
    ऐसे में उन्होंने दुर्ग पुलिस प्रशासन को अनुरोध किया कि उनके पुत्र का पीएम एवं अंतिम संस्कार दुर्ग में ही कर दिया जाए। ऐसे में दुर्ग जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव एवम अतरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर रोहित झा द्वारा मृतक का ससम्मान अंतिम संस्कार करने हेतु नगर पुलिस अधीक्षक दुर्ग एवं थाना प्रभारी को निर्देशित किया गया। तत्पश्चात परिजनों से संपर्क कर उनके यहां प्रचलित अंतिम संस्कार के विधि विधान की जानकारी ली गई।
    पी एम पश्चात मृतक को रायपुर नाका स्थित मुक्तिधाम ले जाया गया वहां संपूर्ण अंतिम संस्कार को वीडियो कॉल के माध्यम से उनके परिजनों को दिखाया गया। पुलिस के द्वारा मजदूर का पीएम एवं अंतिम संस्कार उनके परिजनों से पूछ कर उनके रीति रिवाज के अनुरूप कराया गया। परिवार की निम्न आर्थिक स्थिति को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग के द्वारा मृतक के मां के खाते में 11000 की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। अंतिम संस्कार में नगर पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला दुर्ग थाना प्रभारी राजेश बागड़े एवं तहसीलदार पार्वती पटेल तथा आस्था संगठन के सदस्य उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर कार्ययोजना तैयार करने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित
    समिति दो माह में तैयार करेगी विस्तृत कार्ययोजना का प्रस्ताव

        रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के भूमिहीन कृषि मजदूरों को ‘न्याय’ योजना के द्वितीय चरण में शामिल करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री बघेल ने इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित कर दी गई है, यह समिति दो माह में विस्तृत कार्ययोजना का प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करेगी।
    मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित समिति में अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त, अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय, प्रमुख सचिव ग्रामीण विकास, श्रम विभाग के सचिव तथा अनुसूचित जाति-जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के सचिव इस समिति के सदस्य हैं।

    रायपुर / शौर्यपथ  / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में आज हुए सड़क हादसे से छत्तीसगढ़ की दो महिला श्रमिकों की हुई मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सड़क दुर्घटना में मृत श्रमिकों के परिजनों को 4-4 लाख रूपए और घायलों को 50-50 हजार रूपए की सहायता राशि प्रदान करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने दुर्घटना में घायल 6 श्रमिकों के बेहतर उपचार के लिए अधिकारियों को आवश्यक पहल करने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि ये मजदूर राज्य के  बिल्हा क्षेत्र के रहने वाले है जो महाराष्ट्र यवतमाल से बस द्वारा छत्तीसगढ़ लौट रहे थे।

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा राज्य की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विगत दिनों शिक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण निर्णय अंग्रेजी माध्यम की उत्कृष्ट शालाओं की योजना है। उत्कृष्ट शालाएं सभी जिला मुख्यालय, नगर पालिका एवं नगर निगम क्षेत्र में न्यूनतम एक होंगी। इस प्रकार पूरे प्रदेश में आगामी शैक्षणिक सत्र में लगभग 40 उत्कृष्ट शालाएं खोली जाएंगी।
       राज्य शासन द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार बड़े शहरों में अंग्रेजी माध्यम के उत्कृष्ट स्कूल आगामी शिक्षा सत्र से प्रारंभ किया जाना है। इस संबंध में कोई न्यूनतम संख्या निर्धारित नहीं है। ऐसे स्कूल अधिक से अधिक संख्या में हो, परन्तु प्रत्येक जिले में कम से कम एक ऐसा स्कूल अनिवार्य रूप से होगा।
    प्रदेश में प्रत्येक जिले, नगर पालिका और नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम की उत्कृष्ट शालाओं का संचालन पंजीकृत सोसायटी के माध्यम से किया जाना है। संस्था संचालन के लिए पृथक से नियमावली तैयार की जानी है। हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम की उत्कृष्ट शालाओं के संचालन के लिए प्रत्येक जिले में प्रत्येक शाला के लिए पृथक-पृथक सोसायटी का गठन किया जाएगा। शाला के संचालन के लिए गठित सोसायटी के पदेन अध्यक्ष जिला कलेक्टर और पदेन सदस्य एवं सचिव जिला शिक्षा अधिकारी होंगे। इस समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग, आयुक्त नगर निगम/मुख्य नगर पालिका अधिकारी और संस्था के प्राचार्य सदस्य होंगे।
    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना के लिए स्थल और स्कूल का चयन कर लिया गया है। जिला बालोद में शासकीय हाई स्कूल आमापारा, बलौदाबाजार जिले में मनोहर दास वैष्णव शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बलरामपुर जिले में तीन स्कूलों में से कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल (प्रज्ञा माध्यमिक शाला) रामानुजगंज, बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय वाड्रफनगर बलरामपुर (शासकीय प्रज्ञा प्राथमिक शाला) और शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बलरामपुर (शासकीय प्रज्ञा माध्यमिक शाला) का चयन उत्कृष्ट विद्यालय की स्थापना के लिए किया गया है। बस्तर जिले में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय विवेकानंद जगदलपुर, बेमेतरा जिले में शासकीय शिवलाल राठी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेमेतरा, बीजापुर जिले में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बीजापुर (लाइवलीहुड कॉलेज का रिक्त भवन), बिलासपुर जिले में शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला तारबहार, लाला राजपतराय उच्चतर माध्यमिक शाला खपरगंज और शासकीय हाई स्कूल मंगला का चयन किया गया है। दंतेवाड़ा जिले में शासकीय नवीन पूर्व माध्यमिक शाला दंतेवाड़ा, धमतरी जिले में शासकीय मेहतरू राम धीवर नवीन कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बथेना धमतरी, दुर्ग जिले में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुम्हारी धमधा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जंजगिरी धमधा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भिलाई-03, पाटन, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेक्टर-6 दुर्ग, शासकीय हाई स्कूल बालाजी नगर, खुर्शीपार दुर्ग और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाटन को उत्कृष्ट विद्यालय बनाया जाएगा। गरियाबंद जिले में शासकीय नवीन बालक शाला गरियाबंद, जांजगीर-चांपा जिले में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-1 जांजगीर, आदर्श शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सक्ती, जशपुर जिले में संकल्प शिक्षण संस्थान जशपुर, कवर्धा जिले में शासकीय नवीन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कवर्धा, कांकेर जिले में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नरहरदेव कांकेर, कोण्डागांव जिले में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामकोटपारा कोण्डागांव, कोरबा जिले में शासकीय हाई स्कूल पम्प हाऊस कोरबा, कोरिया जिले में उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महलपारा, महासमुंद जिले में शासकीय हाई स्कूल नयापारा महासमुंद, मुंगेली जिले में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दाऊपारा मुंगेली, नारायणपुर जिले में शासकीय हाई स्कूल सिंगोडीतराई, रायपुर जिले में आर.डी. तिवारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आमापारा रायपुर, बी.पी. पुजारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजातालाब और शहीद स्मारक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फाफाडीह का चयन उत्कृष्ट विद्यालय की स्थापना के लिए किया गया है।
    इसी प्रकार रायगढ़ जिले में सरदार वल्लभ भाई पटेल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रायगढ़, राजनांदगांव जिले में सर्वेस्वर दास माध्यमिक शाला राजनांदगांव, सुकमा जिले में शासकीय हाई स्कूल सुकमा पावारास, सूरजपुर जिले में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रतापपुर (ई. संवर्ग), सरगुजा जिले में शासकीय हाई स्कूल ब्रम्हपारा और पेण्ड्रा जिले में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेमरा का चयन उत्कृष्ट विद्यालय की स्थापना के लिए किया गया है।

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की सीमा में प्रवेश के बाद आज दो प्रवासी गर्भवती श्रमिक माताओं ने सुरक्षित प्रसव के जरिये स्वस्थ कन्याओं को जन्म दिया। दोनों ही माताएं अलग-अलग समय में अपने परिजनों के साथ राजनांदगांव जिले के बागनदी बार्डर पहुंची थीं, जहां उन्हें प्रवस पीड़ा शुरू हो गई। प्रशासन ने उन्हें तुरत स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाकर सुरक्षित प्रसव का इंतजाम किया।
    मूलतः कटई बेमेतरा निवासी श्रीमती त्रिवेणी साहू ने बागनदी बार्डर के उपस्वास्थ्य केंद्र में बच्ची को जन्म दिया। वहीं महाराष्ट्र के पुणे से आईं 28 वर्षीय सुरेखा पति कुमार सिंह निषाद ने छुरिया स्थित स्वास्थ्य केंद्र में बच्ची को जन्म दिया। छत्तीसगढ़ की सीमा में सुरेखा को प्रसव पीड़ा शुरु होने पर उन्हें पहले निकट के अस्तपाल पहुंचाया गया, जहां से छुरिया रेफर कर दिया गया। सुरेखा मूलतः दुर्ग जिले के सुखरीकला गांव की निवासी है।
        दोनों ही मामलों में सुरक्षित प्रसव कराने में राजनांदगांव जिले के स्वास्थ्य विभाग के अमले ने तत्परता से कार्य किया। जिला कलेक्टर मौर्य ने स्वयं स्वस्थ्य केंद्र पहुंचकर जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की जानकारी ली।
    छत्तीसगढ़ की विभिन्न सीमाओं से हर रोज प्रवेश कर रहे हजारों मजदूरों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए शासन ने बसों के इंतजाम किए हैं। बसों की रवानगी से पहले मजदूरों के भोजन-पानी, चरणपादुका के प्रबंध के साथ-साथ उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाता है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि प्रवासी श्रमिक परिवारों में शामिल महिलाओं तथा बच्चों के स्वास्थ्य की विशेष देखभाल की जाए। क्वारेंटीन सेंटर में भी उनका विशेष ध्यान रखा जाए।

    अब तक 15 ट्रेनों से 22 हजार श्रमिकों को की हुई सकुशल वापसी
    वाहन एवं अन्य माध्यमों से 83 हजार 172 श्रमिक लौटे छत्तीसगढ़

       रायपुर / शौर्यपथ / नोवेल कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण छत्तीसगढ़ के बाहर अन्य राज्यों में फंसे प्रदेश के श्रमिकों तथा अन्य लोगों को लगतार वापसी जारी हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल एवं निर्देशन पर राज्य एवं राज्य के बाहर फंसे लगभग 3 लाख लोगों को त्वरित राहत पहुंचाई गई है। साथ ही प्रदेश के श्रमिकों को वापस लाने के लिए राज्य सरकारों से समन्वय कर 45 ट्रेनों की सहमति प्रदान की गई हैं।
            श्रम मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने बताया कि भवन एवं अन्य सन्ननिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा प्रवासी श्रमिकों को वापस छत्तीसगढ़ लाने के लिए स्पेशल ट्रेन के लिए विभिन्न रेल मण्डलों को श्रमिकों के यात्रा व्यय के लिए आवश्यक राशि का भुगतान किया जा रहा है। वर्तमान में 34 हजार 284 यात्रियों को 23 ट्रेनों से वापस लाने के लिए एक करोड़ 99 लाख 58 हजार 360 रूपए का भुगतान किया गया है।
    राज्य सरकार इसके अलावा लॉकडाउन के कारण श्रमिकों एवं अन्य लोगों को जो छत्तीसगढ़ राज्य के सीमाओं पर पहुंच रहे है एवं राज्य की ओर से गुजरने वाले सभी श्रमिकों के लिए नाश्ता, भोजन, स्वास्थ्य परीक्षण एवं परिवहन की निःशुल्क व्यवस्था ने श्रमिकों कोे काफी राहत पहुंचा रही है। मुख्यमंत्री श्री बघेल के निर्देश पर छत्तीसगढ़ के सभी सीमाओं पर पहुंचने वाले प्रवासी श्रमिकों को, चाहें वो किसी भी राज्य के हो, उन्हें छत्तीसगढ़ का मेहमान मान कर शासन-प्रशासन के लोग उनके हरसंभव मदद कर रहे है।
            मंत्री डॉ. डहरिया ने बताया कि लॉकडाउन से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण देश के अन्य राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के 2 लाख 51 हजार 867 श्रमिक तथा 22 हजार 168 अन्य लोगों इस तरह कुल 2 लाख 73 हजार 935 लोगों ने अब तक वापस अपने गृहग्राम आने के लिए राज्य शासन द्वारा जारी लिंक के माध्यम से ऑनलाईन पंजीयन करवाया है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा अन्य प्रदेशों में छत्तीसगढ़ के संकटापन्न प्रवासी श्रमिकों को वापस लाने के लिए लगभग 45 ट्रेनों की सहमति राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई है। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा 34 हजार 284 श्रमिकों को छत्तीसगढ़ वापस लाने 23 ट्रेनों के लिए विभिन्न रेल मण्डलों को लगभग 2 करोड़ का भुगतान किया गया है। अब तक 15 ट्रेनों के माध्यम से लगभग 22 हजार प्रवासी श्रमिकों को वापस लाया जा चुका है। वाहन एवं अन्य माध्यमों से अन्य राज्यों में फंसे लगभग 83 हजार 172 श्रमिक सकुशल अपने गृहग्राम लौट चुके है। छत्तीसगढ़ में अन्य राज्यों के फंसे हुए लगभग 30 हजार से अधिक श्रमिकों को उनके गृह राज्य भेजा गया है। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ के भीतर ही 11 हजार से अधिक श्रमिकों को एक जिले से अपने गृह जिला तक पहुंचाया गया है।
            छत्तीसगढ़ के 2 लाख 51 हजार 867 प्रवासी श्रमिक सहित तीन लाख से अधिक लोगों को जो देश के अन्य राज्यों में होने की सूचना मिलने पर उनके द्वारा बतायी गई समस्याओं का त्वरित निदान करते हुए उनके लिए भोजन, राशन, नगद, नियोजकों से वेतन तथा रहने एवं चिकित्सा आदि की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। इसके साथ ही श्रम विभाग के अधिकारियों का दल गठित कर विभिन्न औद्योगिक संस्थाओं, नियोजकों एवं प्रबंधकों से समन्वय कर (राशन एवं नगद) आदि की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रदेश के 26 हजार 102 श्रमिकों को 36 करोड़ रूपए बकाया वेतन का भुगतान कराया गया है। लॉकडाउन के द्वितीय चरण में 21 अप्रैल से शासन द्वारा छूट प्रदत्त गतिविधियों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 98 हजार श्रमिकों को पुनः रोजगार उपलब्ध कराया गया है। वहीं छोटे-बड़े 1246 कारखानों में पुनः कार्य प्रारंभ हो गया है।

        शौर्यपथ धर्म / कर्म का सिद्धांत क्या है ? कर्मफल क्या है? इसे जानने के पहले हमें कर्म को जानना होगा, कि कर्म क्या है? कर्म किसे कहेंगे? कर्म अच्छे हैं या बुरे? कर्म का फल स्वयम के कर्म के अनुसार मिलता है कि हिस्सेदारी सबकी होती है? इन सब प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए आइए धरमचंद और करमचंद की कहानी पढ़ लें।
    करमचंद और धरमचंद दोनो बचपन के साथी थे जन्म भी एक ही दिन हुआ था, कद काठी और देखने में लगभग एक जैसे ही लगते थे, कोई अजनबी यदि अलग अलग समय में करमचंद और धरमचंद से मिलेगा तो धोखे में रहेगा कि दोनों व्यक्ति जिससे वह मिला है एक ही है कि अलग अलग दो व्यक्ति हैं। कम उम्र में ही जब दोनों प्राथमिक विद्यालय में पढ़ते थे तभी उनके गुरुजी ने करमचंद और धरमचंद को मितान बनवा दिया था। तब से इनकी अधिक गाढ़ी दोस्ती हो गई थी, दोनो एक दूसरे के अनन्य मित्र हो चुके थे। इनकी मित्रता कुछ कुछ सुदामा के मित्रता से मिलता था, केवल असमानता इस बात की थी कि सुदामा और गोपाल सोमरस का पान नहीं करते थे जबकि करमचंद और धरमचंद सोमरस के आदी थे। इनकी मित्रता, मित्र के लिए समर्पण और सम्मान कर्ण से अधिक था भिन्नता था तो केवल इस बात की कि कर्ण ने दुर्योधन के इच्छा को अपना धर्म मान लिया था जबकि करमचंद ने धरमचंद को ही अपना मित्र बना लिया था। वैसे दूसरा भिन्नता इस बात की थी कि कर्ण कभी सोमरस को हाथ नहीं लगाया जबकि करमचंद और सोमरस का अटूट रिस्ता था सोमरस हमेशा उनके हाथ में या लुंगी के गांठ में स्वयं को सुरक्षित मानता था।
    करमचंद अपने मित्र धरमचंद के विवाह समारोह में नृत्य कर रहा था, अचानक बैंड वाले ने नागिन डांस वाला म्यूजिक बजा दिया। फिर क्या था करमचंद नागिन डान्स करने लगा, बिधुन होकर नाचते नाचते बेहोश हो गया। पता चला करमचंद के बम में पथरीले रास्ते के नुकीले पत्थर चुभ गया था, उसके बावजूद वह नाच रहा था, नीचे लुंगी खून से लथपथ हो चुका था, उसके खून से कुछ और लोग भी सना चुके थे। चस्माराम भी खून से भीग चुका था, देशी दारू की दुकान के पास किसी ने चस्माराम को बताया कि उसका कपड़ा खून से भींग चुका है। चस्माराम अपने वस्त्र के भीतर शरीर को चेक किया तब उन्हें पता चला कि उन्हें कोई चोट नही है वापस आकर चस्माराम ने बेंड रूकवाकर लोगों को बताया तब पता चला कि करमचंद को चोट लगी है, करमचंद अपने लुंगी और शरीर के खून को देखकर मूर्छित हो गया था।
    अब बताओ करमचंद को क्यों चोट लगी? क्या पिछले जन्म में उसने कोई पाप किया था? क्या उसने किसी के लिए गड्ढे खोदे थे, जिसमे वह गिरा? क्या करमचंद पापी था? क्या करमचंद का नृत्य करना पाप था? क्या करमचंद और धरमचंद में पिछले किसी जन्म में कोई दुश्मनी थी? या कभी करमचंद और धरमचंद की होने वाली पत्नी के बीच कोई पिछले जन्म की दुश्मनी थी? क्या रास्ते को बनाने वाले ठेकेदार की गलती थी? क्या सरकार की गलती थी? क्या बैंड वाले की गलती थी जो उसने नागिन डांस के लिए म्यूजिक दिया? क्या धरमचंद की गलती थी कि उसने अपने विवाह में बैंड लगवाया? क्या धरमचंद के बाप का गलती था जिसने धरमचंद का विवाह तय कर दिया? क्या महुआ दारू का गलती था जिसे करमचंद ने पी रखी थी? क्या महुआ बनाने वाले भोंदुलाल का गलती था? क्या धरमचंद के छोटे भाई मतवारीलाल का गलती था जिसने महुआ दारू खरीद लाया और करमचंद को पीने दे दिया था?
    फल का जिम्मेदारी कौन लेगा? किस या किसके कर्म पर आरोप लगाया जाए कि उसके कारण करमचंद अभी मूर्छित है? उत्तर बिल्कुल समझ और बुद्धि के पकड़ से दूर ही मिलता है हर अनुमान पहले सटीक जान पड़ता है फिर कुछ ही समय में उत्तर से दशकों प्रकाशवर्ष दूर चले जाते हैं यही प्रक्रिया अर्थात दूर और निकट का खेल बारम्बार नियमित रूप से पुनरावृत्ति होती है।
    करमचंद और धरमचंद की कहानी पढ़ने के बाद कर्मफल का जो सटीक उत्तर मिला है उसके अनुसार प्रतीत होता है कि यहां पूरा पूरा साझेदारी का गेम है, कोई अकेला व्यक्ति अथवा उसके पूर्वजन्म के कर्म ही उनके मूर्च्छा का कारण नहीं है बल्कि प्रश्न के दायरे में आने वाले सभी व्यक्ति और उनके कर्म करमचंद के कष्ट का कारण है। संभव है किसी भी कर्म और कर्मफल का अकेला कोई व्यक्ति अथवा संबंधित व्यक्ति और उनके कर्म जिम्मेदार न हों, इसलिए करमचंद के मूर्छा के लिए सभी कुछ कुछ मात्रा में जिम्मेदार हैं।
    क्या कर्म का खाता होता है? क्या कर्म का एक ही एकाउंट होता है एक जीव के लिए? क्या एक जीव के कर्म का एकाउंट सैकड़ो लाखों हो सकता है? क्या पति पत्नी का साझे का एकाउंट होता है? क्या आपके कर्म के एकाउंट से आपके निकट या दूर पीढ़ी को कुछ हिस्से मिलेंगे? क्या कर्म का एकाउंट आपके जन्म जन्मांतर तक चलता रहेगा? कर्म के एकाउंट अर्थात लेखा जोखा या खाता से संबंधित सैकड़ों प्रश्न उठते हैं; परंतु क्या इन सैकड़ों प्रश्नों का कोई अत्यंत सटीक उत्तर दे सकता है? उत्तर आता है नहीं। नहीं क्यों? क्योंकि यह अनुमान है आपका मानना है सत्य नहीं। यदि सत्यता है आपके जवाब में तो साक्ष्य भी मिलना चाहिए ठीक वैसे ही जैसे आपके याहू, हॉटमेल और जीमेल एकाउंट का साक्ष्य है, आपके सोशल मीडिया एकाउंट जैसे फेसबुक, ट्विटर, ब्लॉग, वर्डप्रेस और टिकटोक के साक्ष्य मिलते हैं। ठीक वैसे ही जैसे बैंकों के बचत खाते, जमा खाता, ऋण खाता, फिक्स डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट, जीवन बीमा, टर्म प्लान इत्यादि का एकाउंट होता है।
    कर्म का खाता तो दिखाई ही नही देता इसके साक्ष्य भी नहीं मिलते, तो क्या यह मान लिया जाए कि कर्म का एकाउंट नही होता। क्या मान लें कि कर्म का एकाउंट जैसी बात कोरी कल्पना है? इसमें थोड़ा संदेह नजर आता है क्योंकि हम हजारों वर्षों से यह मानते आ रहे हैं कि कर्म का लेखा जोखा होता है। फिर एक झटके में इन चंद प्रश्नों के झांसे में आकर अपनी बनी बनाई SOP को खारिज करके अपनी अनुशासन क्यों बदल डालें? क्यों मानने लगें कि कर्म का एकाउंट नही होता, खाता नही होता? इसे मानने के पहले भी द्वंद पैदा हो जाता है कैसा द्वंद इसे समझने के पहले हम लगभग 1,50,000 साल ईसापूर्व चलते हैं। नजूल नाथ और फजूल नाथ दो सगे भाई हैं जो रतिहारिन की संतानें हैं रतिहारिन रोमसिंग कबीला के कबीला प्रमुख की पहली पत्नी है। जब कबीला प्रमुख रोमसिंग दूसरे कबीलों को अपने कब्जे में लेने के अभियान में चल पड़े थे और लंबे बसंत तक वापस नहीं आए तो रतिहारिन को उनकी चिंता होने लगी, वे अपने रोमसिंग के तलास में निकल पड़ी। कुछ कबीला तक उनके यात्रा के दौरान उनका खूब सम्मान हुआ, आगे चलते हुए, रोमसिंग को खोजते हुए लगभग दो बसंत बीतने को आया तब वह अपने रक्षकों और अश्व के बिना नदी किनारे स्वयं को पाई, तब वह गर्भवती हो चुकी थी, उन्हें पता नहीं कि कब कैसे किसके सहयोग से वह गर्भवती हुई है। वह आसपास के काबिले में गई तो किसी ने उसे बताया कि वह कबीला प्रमुख रोमसिंग की पत्नी है, रोमसिंग को भी सूचना मिल गई वे फौरन आकर अपनी पत्नी को लेकर चल दिये। अब शोध शुरू हुई कि रतिहारिन कैसे गर्भवती हुई सबके सब जानने में असफल रहे तब एक दरबारी मंत्री ने कहा इसे प्रकृति का संतान मान लेना चाहिए अथवा शक्तिमान का आशीर्वाद मान लेना चाहिए; ठीक ऐसे ही हुआ क्योंकि दिमाक खपाने और परिणाम नहीं मिलने की संभावना को देखते हुए दरबारी मंत्री का बात मान लेना ही बेहतर विकल्प था। रतिहारिन ने दो जुड़वा संतान को जन्म दिया उनका नाम रखा गया नजूल नाथ और फजूल नाथ दोनो अत्यंत शक्तिशाली और अपने समय में विख्यात कबीला प्रमुख हुए। नजूल नाथ और फजूल नाथ के जन्म का रहस्य किसी को पता नहीं, स्वयं रतिहारिन को भी नहीं क्योंकि दीर्घकाल तक वह बेहोश रही, स्मरण शक्ति को खो चुकी थी। मगर कोई तो शक्ति है कोई क्रिया तो हुई थी जिसके कारण नजूल नाथ और फजूल नाथ का जन्म हुआ, कोई तो एकाउंट खोला होगा। प्राकृतिक अप्राकृतिक संयोग के बिना रतिहारिन का गर्भवती होना समझ से परे नहीं बल्कि स्पस्ट है। चूंकि रोमसिंग और नजूल नाथ और फजूल नाथ ही नहीं बल्कि उनके आगे के संतान भी अत्यंत शक्तिशाली हुए इसलिए किसी के पास कोई विकल्प नही था कि कोई यह कहे कि नजूल नाथ और फजूल नाथ का जन्म ठीक उनके जैसे ही सामान्य संयोग से हुआ है।
    कर्म, कर्म के सिद्धांतों और उससे जुड़े इन प्रश्नों का सटीक जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है, है भी तो वह सर्वमान्य नही। अतः जब तक आप साहस और बुद्धि से काम नही लेंगे नजूल नाथ और फजूल नाथ प्रकृति की संतान है अथवा शक्तिमान के आशीर्वाद से ही रतिहारिन गर्भवती हुई है। अंत में यह साफ कर देना चाहता हूं कि यह काल्पनिक कहानी कर्म, कर्म के सिद्धांत, कर्म का खाता जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों के सटीक उत्तर देने असफल रहा है। इस लेख को पढ़ने में आपके समय की हुई बर्बादी को रोक सकते हैं थोड़ा सोचने से, थोड़ा अधिक सोचने से अन्यथा यह लेख आपको सुलझाने के बजाय उलझा चुका है।
    आप स्वयं को अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने का प्रयास करेंगे तो संभव है समुद्र तट के नन्हे कछुआ की भांति चंद्रमा की रोशनी के बजाय आप रेस्टोरेंट के एलईडी के झांसे में आ जाएं इसलिए बुद्ध की बात मानें। बुद्ध ने कहा था "अपना दीपक खुद बनो।"

    उल्लेखनीय है कि यह लेख श्री हुलेश्वर जोशी के ग्रंथ "अंगूठाछाप लेखक" - (अभिज्ञान लेखक के बईसुरहा दर्शन) का अंश है।

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