September 13, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    लगभग 60 लाख रुपये के कथित नगद लेनदेन और अनियमित गुमटियों की शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, सवाल—अभ्युदय मिश्रा निष्क्रिय हैं या किसी राजनीतिक संरक्षण में? दुर्ग। दुर्ग नगर निगम…

    मुख्यमंत्री साय ने कहा—“आज मेरा घर आप सभी बहनों का मायका है”; 13 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, 31 किस्तों में 20 हजार करोड़ से अधिक की महतारी वंदन राशि

    रायपुर । नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास शनिवार को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारिवारिक आत्मीयता और मातृशक्ति के उल्लास से सराबोर नजर आया। अवसर था तीजा-पोरा तिहार का। प्रदेशभर से बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं, बहनों और बेटियों के स्वागत के लिए मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव और मायके की थीम पर सजाया गया था। बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, लोक शिल्प और ग्रामीण परिवेश के बीच फुगड़ी, रस्साकशी, कुर्सी दौड़, मेहंदी और झूलों ने पूरे परिसर को उत्सव के रंग में रंग दिया।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माताओं-बहनों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा, “आज मेरा घर आप सभी बहनों का मायका है। आपका अपने भाई के घर आना मेरे लिए सौभाग्य और आनंद की बात है।” मुख्यमंत्री के इस संबोधन के साथ पूरा परिसर तालियों की गूंज से भर उठा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा-पोरा केवल त्योहार नहीं, बल्कि माटी, परिवार, रिश्तों, खेती-किसानी, पशुधन और लोकजीवन से जुड़ा जीवंत उत्सव है। हरेली से शुरू होने वाली छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहारों की श्रृंखला हमारी लोक परंपराओं और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करती है।

    शिव-पार्वती की पूजा, प्रदेश की खुशहाली की कामना

    कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री ने भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना से की। उन्होंने प्रदेश की माताओं-बहनों सहित सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा माता पार्वती की तपस्या, समर्पण और अटूट आस्था का पर्व है, जबकि पोरा छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और पशुधन के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का प्रतीक है।

    ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत

    तीजा-पोरा के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशव्यापी ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का शुभारंभ किया और अभियान के लोगो का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि मुनगा पोषक तत्वों और आवश्यक मिनरल्स से भरपूर है और विशेष रूप से महिलाओं तथा बच्चों के बेहतर पोषण में उपयोगी हो सकता है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घरों और आसपास मुनगा लगाने तथा इसके पोषण गुणों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

    राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ, सुपोषण रथ को हरी झंडी

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने पोस्टर का विमोचन कर माताओं-बहनों को सुपोषण की शपथ दिलाई और सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

    9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चलने वाले पोषण माह के दौरान महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

    बच्चों को खीर खिलाकर कराया अन्नप्राशन

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने नन्हे बच्चों को अपने हाथों से खीर खिलाकर अन्नप्राशन संस्कार कराया। बच्चों को स्नेह और आशीर्वाद देते हुए उन्होंने उनके स्वस्थ, खुशहाल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    तीजा-पोरा के पारिवारिक उल्लास के बीच अन्नप्राशन और पोषण संबंधी गतिविधियों ने कार्यक्रम को सुपोषण के संदेश से भी जोड़ दिया।

    महतारी वंदन की 31 किस्तों में 20 हजार करोड़ से अधिक पहुंचे खातों में

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 31 किस्तों में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है।

    उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग महिलाएं बेटियों के भविष्य, स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों के लिए कर रही हैं। किसी ने सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा की, तो किसी ने सिलाई मशीन खरीदी। अनेक महिलाएं सब्जी-भाजी, किराना दुकान और अन्य छोटे व्यवसायों के माध्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

    लखपति दीदी से ड्रोन दीदी तक—बदल रही मातृशक्ति की तस्वीर

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। प्रदेश में 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जबकि निर्धारित लक्ष्य 8 लाख महिलाओं का था।

    उन्होंने कहा कि महिलाएं अब पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर डीलर दीदी, रानी मिस्त्री और ड्रोन दीदी के रूप में भी अपनी पहचान बना रही हैं। कई ड्रोन दीदियां एक दिन में 20 से 25 एकड़ तक खेतों में छिड़काव कर लगभग 7 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम दानसरा की महिलाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां माताओं-बहनों ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम का मंदिर बनाने का प्रेरणादायी संकल्प लिया है।

    महिलाओं के नाम संपत्ति को बढ़ावा, रजिस्ट्री में मिल रही छूट

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उन्हें संपत्ति में स्वामित्व देने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है। महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत की छूट दी जा रही है।

    उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को अवसर, सम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय लेने में भागीदारी देना है।

    हर जरूरतमंद परिवार को पक्की छत देने का संकल्प

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण हो रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं और इनमें से साढ़े 11 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

    उन्होंने बताया कि केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान प्रदेश के लिए 3 लाख 65 हजार नए प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि कोई भी जरूरतमंद परिवार पक्के मकान से वंचित न रहे।

    मुख्यमंत्री निवास में दिखा गांव का जीवंत स्वरूप

    तीजा-पोरा के लिए मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव की थीम पर विशेष रूप से सजाया गया। बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, पारंपरिक खिलौने और ग्रामीण परिवेश के बीच लोकसंस्कृति जीवंत नजर आई। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को और भी रंगीन बना दिया।

    माताओं-बहनों ने फुगड़ी, रस्साकशी और कुर्सी दौड़ में उत्साह से हिस्सा लिया। मेहंदी और झूलों का भी आनंद लिया। पूरा मुख्यमंत्री निवास ऐसा प्रतीत हुआ मानो छत्तीसगढ़ के अलग-अलग अंचलों की लोक परंपराएं एक ही आंगन में उतर आई हों।

    ‘विष्णु भैया’ के घर बहनों का मायके जैसा अपनापन

    तीजा-पोरा के इस आयोजन ने मुख्यमंत्री निवास को महज एक सरकारी परिसर नहीं, बल्कि भाई-बहन के आत्मीय रिश्ते और छत्तीसगढ़ी पारिवारिक परंपरा के प्रतीक मायके में बदल दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उनकी कामना है कि प्रदेश की हर माता और बहन के सपनों को नई उड़ान मिले, उनके परिवारों में सुख-समृद्धि बनी रहे और मातृशक्ति की भागीदारी से छत्तीसगढ़ विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।

    महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने भी प्रदेश की माताओं-बहनों को तीजा-पोरा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं और मातृशक्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान को पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

    जनभागीदारी से सूरजपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में आयोजित हुए विभिन्न कार्यक्रम
    न्योता भोजन के साथ बच्चों ने लिया उत्साहपूर्वक हिस्सा

    रायपुर / बैगलेस डे (Bagless Day) पर विद्यालयों में बच्चों को बस्ते के बोझ से मुक्त रखकर स्वच्छता, रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से आनंदमय शिक्षा दी जाती है। बैगलेस डे के अंतर्गत बच्चों को पारंपरिक पढ़ाई के अतिरिक्त खेल, चित्र, चर्चा, स्वतंत्रता जागरूकता एवं मौलिक विचारधारा की स्थापना में शामिल किया जाएगा। इससे बच्चों में नेतृत्व क्षमता, निर्देशन, सहयोग एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित होगी।
    कलेक्टर सूरजपुर श्रीमती रेना जमील और जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन तथा जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में शनिवार को जिले के सभी शासकीय विद्यालयों में बैगलेस डे के अवसर पर विभिन्न रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। जनप्रतिनिधियों, पालकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता में विद्यार्थियों ने स्वच्छता अभियान, खेलकूद और कलात्मक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

    स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का पाठ
    बैगलेस डे के तहत विद्यालय परिसरों में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। बच्चों ने गाजर घास उन्मूलन, परिसर व शौचालयों की साफ-सफाई, पाउच-पन्नी का सुरक्षित निस्तारण और पेयजल स्रोतों की स्वच्छता का कार्य किया। इन गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया, जिससे वे स्वच्छ और सुंदर विद्यालय के महत्व को समझ सकें।

    रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को मिला नया आयाम
    विद्यार्थियों के बौद्धिक और सृजनात्मक विकास के लिए कई दिलचस्प गतिविधियां आयोजित की गईं। कल्पनात्मक निबंध पेड़ बोल सकते तो क्या कहते विषय पर बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता के आधार पर सुंदर निबंध लिखे। पेपर क्राफ्ट और कला के माध्यम से कागज को मोड़ने और काटने की तकनीक से बच्चों ने नाव, हवाई जहाज, तितली और मेंढक जैसी आकर्षक आकृतियां बनाईं। बेस्ट आउट ऑफ़ वेस्ट के द्वारा विद्यार्थियों ने कागज से ग्रीटिंग कार्ड और कबाड़ से जुगाड़ यानी अनुपयोगी सामग्री से उपयोगी कलात्मक वस्तुएं तैयार कीं।

    सामुदायिक सहभागिता से हुआ न्योता भोजन
    इस विशेष दिन पर विद्यालयों में समुदाय आधारित न्योता भोजन का भी आयोजन किया गया। माध्यमिक शाला कन्या रामानुजनगर में स्थानीय व्यवसायी श्री श्रवण कुमार गुप्ता ने अपने जन्मदिन के अवसर पर संकुल समन्वयक श्री जयप्रकाश बरेठा के साथ मिलकर बच्चों को न्योता भोजन कराया। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे। वहीं, भैयाथान विकासखंड के प्राथमिक शाला शिवप्रसाद नगर में समुदाय के सहयोग से बच्चों को कॉपियां वितरित की गईं और विद्यालय परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया।
    बैगलेस डे के तहत विद्यालयों में आयोजित सभी गतिविधियों की मॉनिटरिंग एडी शिक्षा, एडीपीओ समग्र, सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बीआरसीसी, संकुल प्राचार्य और संकुल समन्वयकों द्वारा की गई। अधिकारियों ने स्कूलों का दौरा कर गतिविधियों का अवलोकन किया और बच्चों व शिक्षकों का मार्गदर्शन किया।

      रायपुर / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष की सेवा, समर्पण और जनकल्याणकारी नेतृत्व की यात्रा के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर प्रदेशभर में तैयारियां तेज हो गई हैं। आगामी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस एक माह के अभियान के अंतर्गत विभिन्न जनसेवा, सामाजिक सहभागिता और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    राजस्व एवं जिला प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धमतरी जिले में अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान को जनभागीदारी का व्यापक स्वरूप देते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। समीक्षा के दौरान जिला प्रशासन ने बताया कि अभियान के सफल संचालन के लिए टास्क फोर्स समिति का गठन कर विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। सभी विभागों द्वारा निर्धारित कार्यक्रमों के अनुरूप आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

    धमतरी में 10 लाख दीयों से होगा सेवा और समर्पण का संदेश

    अभियान के प्रथम दिवस 17 सितंबर को आयोजित होने वाले ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत धमतरी जिले में लगभग 10 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्य आयोजन रुद्री स्थित रुद्रेश्वर महादेव मंदिर एवं महानदी घाट में होगा। इसके साथ ही कर्णेश्वर महादेव मंदिर सिहावा, अंगारमोती माता मंदिर गंगरेल, विंध्यवासिनी माता मंदिर धमतरी सहित जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में दीप प्रज्ज्वलन किया जाएगा। इसके अलावा पीएम जनमन आवासों, अटल आवासों तथा आम नागरिकों के घरों में भी दीप जलाकर सेवा एवं समर्पण का संदेश दिया जाएगा। प्रशासन ने इसे जन-जन की सहभागिता वाला कार्यक्रम बनाने की दिशा में व्यापक तैयारी की है।

    जनभागीदारी से अभियान को मिलेगा व्यापक स्वरूप

    राजस्व एवं जिला प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे 17 सितंबर को अपने घरों में दीप प्रज्ज्वलित कर सेवा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प में सहभागी बनें। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिला समूहों और विभिन्न सामाजिक वर्गों से अभियान के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के सभी कार्यक्रमों का आयोजन गरिमापूर्ण, सुव्यवस्थित एवं समयबद्ध ढंग से किया जाए ताकि सेवा, समर्पण और जनकल्याण का संदेश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

    रटगा में खराब हैंडपंप की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई, ग्रामीण संत राम बोले—समय पर हुआ समाधान, शासन-प्रशासन पर बढ़ा भरोसा

    रायपुर, / राज्य शासन की सुशासन नीति और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। शासन की इसी प्रतिबद्धता का प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ‘विष्णु का सुशासन’ केवल एक संकल्प नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में प्रत्यक्ष सकारात्मक बदलाव लाने वाली व्यवस्था के रूप में साकार हो रहा है।

    इसी सुशासन की प्रभावी मिसाल मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत रटगा में देखने को मिली, जहां एक ग्रामीण की पेयजल संबंधी समस्या का समाधान शिकायत दर्ज होने के महज 24 घंटे के भीतर कर दिया गया। ग्राम रटगा निवासी श्री संत राम ने अपने आसपास खराब पड़े हैंडपंप की समस्या को लेकर सीएम हेल्पलाइन नंबर 1076 पर शिकायत दर्ज कराई थी।

    शिकायत प्राप्त होते ही जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मैदानी अमले ने बिना विलंब मौके पर पहुंचकर खराब हैंडपंप का निरीक्षण किया और आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू किया। विभागीय टीम की तत्परता से महज 24 घंटे के भीतर हैंडपंप को दुरुस्त कर पुनः चालू कर दिया गया।

    हैंडपंप के चालू होने से श्री संत राम सहित आसपास के ग्रामीणों को अब आसानी से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। पेयजल की समस्या दूर होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। साथ ही, त्वरित निराकरण से ग्रामीणों के बीच शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।

    शिकायत करने के बाद इतनी जल्दी समाधान होगा, इसकी उम्मीद थी, लेकिन 24 घंटे में ही हैंडपंप चालू हो गया

    समस्या के शीघ्र समाधान से प्रसन्न श्री संत राम ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हैंडपंप खराब होने से हम लोगों को पानी के लिए काफी परेशानी हो रही थी। मैंने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद विभाग के कर्मचारी तुरंत पहुंचे और 24 घंटे के अंदर हैंडपंप ठीक कर दिया गया। अब हम लोगों को फिर से आसानी से पानी मिल रहा है। इतनी जल्दी समस्या का समाधान होने से हमें बहुत खुशी हुई है। सीएम हेल्पलाइन आम लोगों के लिए बहुत उपयोगी व्यवस्था है। मैं मुख्यमंत्री जी और जिला प्रशासन का धन्यवाद करता हूं।

    शिकायत के साथ ही हरकत में आया विभाग

    ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से जुड़ी समस्याओं का समय पर निराकरण आम नागरिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रटगा में सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर संबंधित विभाग द्वारा तत्काल कार्रवाई किए जाने से यह स्पष्ट हुआ कि शिकायतों के निराकरण के लिए प्रशासनिक तंत्र लगातार सक्रिय है।

    सीएम हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से ग्रामीणों को अपनी समस्याएं सीधे शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का सरल माध्यम उपलब्ध हुआ है। शिकायत दर्ज होने के बाद उसे संबंधित विभाग तक पहुंचाने और उसके निराकरण की प्रक्रिया सुनिश्चित करने से आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता भी कम हुई है।

    सुशासन का असर, ग्रामीणों को मिला सीधा लाभ

    रटगा की यह घटना इस बात का उदाहरण है कि शासन की जनसुनवाई और शिकायत निराकरण व्यवस्था किस तरह आम नागरिकों के दैनिक जीवन में बदलाव ला रही है। एक ओर जहां शिकायत के माध्यम से ग्रामीण की आवाज प्रशासन तक पहुंची, वहीं दूसरी ओर संबंधित विभाग ने तत्परता दिखाते हुए समस्या का समाधान किया। शिकायत दर्ज होने से लेकर समाधान तक की यह पूरी प्रक्रिया ‘सुशासन’ की उस भावना को प्रदर्शित करती है, जिसमें नागरिकों की समस्याओं का समाधान संवेदनशीलता और समयबद्धता के साथ किया जाता है।

    सीएम हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से रटगा के ग्रामीणों को मिली यह राहत शासन की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जिसमें हर नागरिक की समस्या को सुना जाए, उसका समाधान किया जाए और शासन की योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए।

    रायपुर में 60 करोड़ की आर्चरी अकादमी, पंडरापाठ में 20–25 करोड़ से बनेगी तीरंदाजी अकादमी; 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी के लिए प्रयास करेगा छत्तीसगढ़

    रायपुर । छत्तीसगढ़ के गांवों, वनांचलों और दूरस्थ अंचलों में छिपी खेल प्रतिभाओं को अब बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए संसाधनों और अवसरों की कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ प्रतिभा पहचान, प्रशिक्षण और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने पर विशेष फोकस कर रही है।

    रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आयोजित छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की एग्जीक्यूटिव बॉडी एवं जनरल काउंसिल मीटिंग में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में खेलों के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने का सशक्त साधन भी हैं।

    रायपुर में 60 करोड़ की आर्चरी अकादमी, पंडरापाठ में भी बनेगा बड़ा केंद्र

    मुख्यमंत्री साय ने बताया कि प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। रायपुर में लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक आर्चरी अकादमी का निर्माण किया जा रहा है।

    वहीं जशपुर के पंडरापाठ में 20 से 25 करोड़ रुपये की लागत से आर्चरी अकादमी स्थापित की जा रही है। इससे जशपुर सहित आसपास के वनांचल के खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र में ही आधुनिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध होंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर में तीरंदाजी की समृद्ध परंपरा है। विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा समुदाय में यह खेल जीवन और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसी प्राकृतिक प्रतिभाओं को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण से जोड़कर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं।

    बस्तर-सरगुजा ओलंपिक से मिल रहा दूरस्थ प्रतिभाओं को मंच

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर और सरगुजा में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं। बस्तर ओलंपिक ने दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया है और राज्य सरकार इसका आयोजन हर वर्ष करेगी। सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी स्थानीय खिलाड़ियों को आगे आने का मंच मिल रहा है।

    उन्होंने कहा कि खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से प्रदेशभर में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। लक्ष्य स्पष्ट है कि खिलाड़ी चाहे बड़े शहर से हो या किसी दूरस्थ गांव और वनांचल से, उसे आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।

    उद्योगों को खेल संघों से जोड़ने की पहल

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न खेल संघों को उद्योग समूहों से जोड़ने की पहल में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कार्यरत बड़े उद्योग समूह यदि अलग-अलग खेलों और खेल संघों के साथ जुड़कर सहयोग करें तो खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, प्रतियोगिताओं के आयोजन और खेल अधोसंरचना के विस्तार में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।

    ओलंपिक संघ के साथ समन्वय के लिए वरिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी

    मुख्यमंत्री साय ने शासन और छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के बीच बेहतर तालमेल के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को विशेष जिम्मेदारी देने की बात कही। इससे खेल संघों की आवश्यकताओं, प्रस्तावों और शासन स्तर की प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों से जुड़े विषयों का समयबद्ध समाधान और खिलाड़ियों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने के लिए शासन एवं खेल संगठनों के बीच निरंतर संवाद जरूरी है।

    40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी पर छत्तीसगढ़ की नजर

    बैठक में 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को दिलाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विस्तार के बाद अब बड़े राष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए गंभीरता से प्रयास किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि यदि मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिलती है तो प्रतियोगिताओं को बस्तर से भी जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। इससे बस्तर में बन रहे शांति, विकास और विश्वास के नए वातावरण को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

    वनांचल में तीरंदाजी और मलखम्ब की बड़ी संभावनाएं

    वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के वनांचलों में तीरंदाजी जीवन और संस्कृति का हिस्सा है। यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण और सही मार्गदर्शन देने की है। उन्होंने बताया कि बस्तर के जनजातीय युवा मलखम्ब में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों खेलों में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है।

    खेल अलंकरण की वापसी से बढ़ा खिलाड़ियों का मनोबल

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेल अलंकरण समारोह की पुनः शुरुआत की गई है। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मान और आर्थिक सहायता देने के साथ उन्हें शासकीय सेवा में अवसर देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे खिलाड़ियों का उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा है।

    अन्य जिलों में भी बनेंगे जिला ओलंपिक संघ

    छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया ने संघ की पिछली बैठक का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए प्रदेश में खेल गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। बैठक में ओलंपिक दिवस, नेशनल गेम्स, विभिन्न खेल संघों की आवश्यकताओं और बजटीय प्रावधानों पर चर्चा हुई।

    प्रदेश के वर्तमान जिला ओलंपिक संघों के अलावा अन्य जिलों में भी जिला ओलंपिक संघ गठित करने के लिए समिति बनाने पर सहमति बनी। विभिन्न खेल संघों की गतिविधियों और प्रदेश में खेलों के विस्तार से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    बैठक में सांसद विजय बघेल, वन मंत्री केदार कश्यप, ओलंपिक संघ के पदाधिकारी, विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधि और अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

    सोलर वेंडर के रूप मे कराया पंजीयन, छतो पर लगा रही सोलर पैनल

    ​“सोलर दीदी हर घर रोशनी, हर हाथ को रोजगार” के सेवा संकल्प के साथ आर्थिक सशक्तिकरण की ओर

    रायपुर, / छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में ग्रामीण स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा पहलों के तहत सोलर दीदी के रूप में अपनी एक मजबूत पहचान बना रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाएं अब सोलर दीदी के रूप में पहचान बना रही हैं। ​“​“सोलर दीदी हर घर रोशनी, हर हाथ रोजगार” के संकल्प के साथ यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूती प्रदान करेगा।े सेवा संकल्प को आदर्श मानकर यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूती प्रदान करेगा।

    बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के विकासखंड बलौदाबाजार के ग्राम दसरमा में हितग्राही तारनी घृतलहरे के घर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है।​ यह पूरी कार्ययोजना कलेक्टर कुलदीप शर्मा एवं जिला पंचायत बलौदाबाजार के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को केवल योजनाओं के लाभ तक सीमित न रखकर, उन्हें सौर ऊर्जा आधारित तकनीकी कार्यों में रोजगार व उद्यमिता से जोड़ना है।

    ​संकुल संगठन ने स्वयं कराया वेंडर पंजीयन

    इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बिहान के तहत गठित संकुल स्तरीय संगठन ने स्वयं को आधिकारिक सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत कराया है। वेंडर पंजीयन के बाद अब बिहान की प्रशिक्षित सोलर दीदियां सीधे ग्राउंड लेवल पर जाकर हितग्राहियों के घरों में सोलर पैनल लगाने का कार्य संभाल रही हैं।

    ​पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक सशक्तिकरण

    सोलर दीदियों द्वारा किए जा रहे इस कार्य से ग्रामीण महिलाओं में तकनीकी दक्षता और व्यावसायिक कौशल का विकास हो रहा है। इससे एक ओर जहां स्वच्छ ऊर्जा एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों को बिजली बिल में राहत मिल रही है।

    तकनीकी अड़चनों के बीच फँसा आधार हुआ अपडेट, 75 वर्षीय वासुदेव गुप्ता को मिली राहत, खुले शासकीय योजनाओं के द्वार

    रायपुर / पहचान का एक छोटा-सा दस्तावेज किसी व्यक्ति के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है, इसका जीवंत उदाहरण बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम पंचायत झलपी (पोस्ट-महाराजगंज) निवासी 75 वर्षीय श्री वासुदेव गुप्ता का प्रकरण है। पहचान पत्र न बन पाने के कारण उन्हें लंबे समय से विभिन्न शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित रहना पड़ रहा था। किन्तु यह बदलाव तब संभव हुआ जब प्रशासन की संवेदनशील सोच ने सेवा संकल्प का प्राथमिकता में रखकर कार्य किया।

    चार वर्षों की लंबी भागदौड़ और संघर्ष

    आधार कार्ड आज के समय में हर भारतीय नागरिक की पहचानए वित्तीय लेन.देन और सरकारी योजनाओं का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बन गया है। बीते चार वर्षों के दौरान श्री वासुदेव गुप्ता ने क्षेत्र के लगभग हर आधार केंद्र के चक्कर काटे और कई बार नामांकन भी करवाया। हालांकि, जब भी वे पावती से स्थिति की जांच करवाते, तो हर बार तकनीकी कारणों का हवाला देकर उनका आवेदन निरस्त कर दिया जाता था। इस समस्या के समाधान और पहचान संख्या प्राप्त करने की उम्मीद में उन्होंने अंबिकापुर स्थित सेवा केंद्र तक की दौड़ लगाई, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। लगातार आ रही इन बाधाओं के चलते उनकी उम्मीदें धीरे-धीरे टूटने लगी थीं।

    प्रशासन की संवेदनशील पहल और त्वरित समाधान

    इस मामले में नया मोड़ तब आया जब बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी की संवेदनशील पहल पर जिला प्रशासन ने आम नागरिकों की ऐसी लंबित शिकायतों को प्राथमिकता देते हुए उनके त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला टीम तथा संबंधित तकनीकी कार्यालयों (ई-डीएम, डीसी एवं एमटीओ) ने तकनीकी अड़चनों की गहराई से पड़ताल की। आपसी समन्वय से समाधान का मार्ग निकालते हुए अंततः श्री गुप्ता का दस्तावेज सफलतापूर्वक तैयार कर उन्हें सौंप दिया गया।

    खुले शासकीय और जनकल्याणकारी योजनाओं के द्वार

    दस्तावेज के तैयार होते ही वृद्ध कृषक के लिए शासन की तमाम कल्याणकारी योजनाओं के रास्ते खुल गए हैं। इसके अपडेट होने से अब श्री वासुदेव गुप्ता एग्री स्टैक पोर्टल पर अपना पंजीयन करा सकेंगे, जिससे उन्हें सुगमता से धान विक्रय करने और अन्य कृषि-हितैषी योजनाओं का लाभ मिलने लगेगा। इसके अतिरिक्त पेंशन योजना, राशन कार्ड की ई-केवायसी, बैंकिंग सेवाओं तथा ऋण संबंधी प्रक्रियाओं का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है, जिससे वृद्धावस्था में उन्हें आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का संबल प्राप्त होगा।

    प्रशासन की दूरदर्शी सोच

    जिला प्रशासन का यह प्रयास केवल एक अकेले प्रकरण के निराकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक ऐसी पुख्ता व्यवस्था विकसित करना है जहाँ पहचान से जुड़ी तकनीकी दिक्कतें किसी भी पात्र हितग्राही के अधिकारों के आड़े न आएं। इस दिशा में नामांकन व अपडेशन प्रक्रियाओं को सुगम बनाने, तकनीकी कारणों से अटके मामलों की पहचान कर उन्हें विशेष अभियान के तहत पूरा करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन के इस संवेदनशील दृष्टिकोण से दूरस्थ अंचलों और वृद्धजनों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर काटने से मुक्ति मिल रही है, जो कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

    प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत हुआ भव्य सामूहिक गृह प्रवेश, नए घरों की चौखट पर खिले हितग्राहियों के चेहरे
    पक्का आवास परिवार की सुरक्षा और सम्मान का आधार

    रायपुर / छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में ग्रामीण विकास और आवासहीन जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 अप्रैल 2026 से अब तक पूर्ण हुए कुल 6 हजार 968 नवनिर्मित आवासों का भव्य एवं सामूहिक गृह प्रवेश कार्यक्रम 11 सितंबर 2026 को पूरे जिले में बेहद उत्साह के साथ संपन्न हुआ। आगामी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान से पहले हजारों परिवारों का अपने पक्के घर में प्रवेश करना जिले के लिए एक विशेष उपलब्धि बन गया है।

    परंपरागत रीति-रिवाज के साथ सौंपी गई चाबियां

    बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के सभी विकासखंडों में पंचायत प्रतिनिधियों, स्थानीय जनप्रतनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में पारंपरिक रीति-रिवाजों और पूजा-अर्चना के साथ हितग्राहियों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपी गईं। वर्षों तक कच्चे मकानों और झोपड़ियों में जीवन बिताने वाले परिवारों के लिए यह पल बेहद भावुक और गौरव से भरा हुआ था।

    विकासखंडवार पूर्ण हुए आवासों की स्थिति

    प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत विकासखंड रामचन्द्रपुर में 2,276 आवास, विकासखंड वाड्रफनगर 1 हजार 772 आवास, विकासखंड कुसमी 1 हजार 215 आवास, विकासखंड बलरामपुर 1 हजार 142 आवास, विकासखंड राजपुर 353 आवास और विकासखंड शंकरगढ़ 210 पक्का आवास पूर्ण कराए गए हैं।

    *पक्का आवास सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य का आधार *

    गृह प्रवेश करने वाले सभी हितग्राही परिवारों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि पक्का आवास केवल ईंट-गारे का ढांचा नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि हर पात्र परिवार को तय समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण आवास मिले और शासकीय योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने हितग्राहियों को आवास के साथ-साथ अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष स्वीकृत आवासों को प्राथमिकता से पूरा किया जाए और श्सेवा संकल्प अभियानश् की तैयारियां समय पर सुनिश्चित हों।

    प्रधानमंत्री के प्रति जताया आभार

    सेवा संकज्प के इस अवसर पर लाभान्वित हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी संकल्प और आमजन के हित में उठाए जा रहे कदमों के कारण ही आज उनका अपने पक्के घर का सपना साकार हो सका है। हितग्राहियों ने सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने और विकसित भारत 2047 के सपने में अपनी सहभागिता निभाने का संकल्प लिया।

    प्रशासन के कुशल मार्गदर्शन और मैदानी अमले की लगातार निगरानी के चलते सभी निर्माण कार्य तय समय-सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए गए हैं। पक्की छत मिलने से गदगद परिवारों ने मुख्यमंत्री श्री विश्णुदेव साय का और शासन-प्रशासन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है, वहीं प्रशासन ने भी बाकी बचे स्वीकृत आवासों को जल्द और गुणवत्ता के साथ पूरा करने की बात दोहराई है।

    आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हुए शामिल
    19 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल तथा 16 विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल से सम्मानित
    504 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई

      रायपुर / राज्यपाल रमेन डेका आज आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में वर्ष 2025 एवं वर्ष 2026 शैक्षणिक सत्र के विद्यार्थियों को विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पदक प्रदान किए गए, जिनमें 19 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल तथा 16 विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया शामिल हैं। स्नातकोत्तर एवं स्नातक स्तर पर कुल 504 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई

    विद्यार्थियों को तकनीक का सदुपयोग करते हुए इसके दुष्प्रभावों से बचने सलाह
    राज्यपाल डेका ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं, जबकि हम उस दौर के विद्यार्थी हैं, जब शिक्षा चाक ,पेंसिल पुस्तकों और गुरुओं के माध्यम से प्राप्त करते थे। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज बहुत जरूरी है, लेकिन इसका उपयोग उतना ही होना चाहिए, जितना मानव समाज के हित में आवश्यक है। आज डिजिटल एडिक्शन किसी भी अन्य एडिक्शन से अधिक खतरनाक हो गया है। विद्यार्थियों को तकनीक का सदुपयोग करते हुए इसके दुष्प्रभावों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यूक्लियर एनर्जी, क्लाइमेट चेंज और माइक्रो प्लास्टिक आज दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। 21वीं सदी में विकास के साथ उसके दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा और सतत विकास को प्राथमिकता देनी होगी।

    विद्यार्थियों पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रहें
    राज्यपाल ने विद्यार्थियों को भगवत गीता के कर्मयोग का संदेश देते हुए कहा कि कर्म ही जीवन है। हमें इस बात की चिंता किए बिना कि दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं, अपने कर्म, पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपका ज्ञान कोई आपसे नहीं छीन सकता। अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और सही रास्ते पर आगे बढ़ें।

    विद्यार्थियों को अपने जीवन का रोडमैप तैयार कर योजनाबद्ध ढंग से सफलता की ओर आगे बढ़ना चाहिए
    श्री डेका ने कहा कि विद्यार्थियों ने ज्ञान और डिग्री इसलिए हासिल की है कि उसका उपयोग मानव समाज के हित में हो। विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन का उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क प्रचुर मात्रा में है और यह देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। अब छत्तीसगढ़ को एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में समाज के प्रत्येक वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को अपने जीवन का रोडमैप तैयार कर योजनाबद्ध ढंग से सफलता की ओर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने तथा मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की।
    समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य एवं डिफेंस साइंटिस्ट डॉ. वी. सतीश रेड्डी तथा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर आर.पी. कौशिक ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। स्वागत भाषण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. शिव दयाल पांडे ने दिया और विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की शासी परिषद एवं कार्य परिषद के सदस्य, अधिष्ठाता, प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं एवं उनके पालक उपस्थित थे।

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