August 03, 2026
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    विकास की वीरांगना और बदहाल शहर , कैसे कह दूँ कि शहर में विकास हो रहा है?

    • rounak group

    (एक संपादकीय दृष्टि)

    कैसे स्वीकार कर लूँ कि विकास की वीरांगना हैं दुर्ग नगर निगम की महापौर श्रीमती अलका बाघमार?

    यह अलग बात है कि 31 जनवरी को महापौर श्रीमती अलका बाघमार का जन्मदिन है और समर्थकों द्वारा अतिशयोक्ति से भरे पोस्टर शहर भर में लगाए जा रहे हैं। राजनीतिक दल से जुड़ी होने के कारण यह उनका राजनीतिक धर्म भी हो सकता है, लेकिन प्रश्न यह है कि शहर की जनता इन पोस्टरों पर आखिर किस आधार पर विश्वास करे?

    कचरे, बदबू और बदहाली का विकास मॉडल

    शहर के मध्य सुराना कॉलेज के सामने कचरों का अंबार और उससे उठती दुर्गंध आज भी जनता को मुंह ढकने पर मजबूर कर रही है। भारतीय जनता पार्टी के ही शासनकाल में बनी चौपाटी आज बदहाली की मिसाल बन चुकी है।

    सड़कों पर अवैध बाजार लगातार अपने आकार का विस्तार कर रहा है। बस स्टैंड क्षेत्र में संचालित राम रसोई सड़क पर कब्जा कर खुलेआम व्यापार कर रही है। व्यापार में नफा हो या नुकसान—वह अलग विषय है—लेकिन तथ्य यह है कि व्यापार जारी है, और वह भी शहरी सरकार की मौन स्वीकृति के साथ।

    अनुबंध समाप्त, कार्रवाई शून्य

    बस स्टैंड स्थित राम रसोई का निर्धारित अनुबंध समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद नगर निगम द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे भी अधिक आपत्तिजनक यह है कि शहरी सरकार की मुखिया उसी संचालक के साथ मंच साझा करती नजर आती हैं।

    मंच से यह जरूर कहा जा रहा है कि “शहरी सरकार ईमानदारी से काम कर रही है”, लेकिन यह ईमानदारी शहर में बढ़ते अतिक्रमण के सामने पूरी तरह अदृश्य हो जाती है।

    अतिक्रमण में भेदभाव के आरोप

    अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई में भेदभाव अब छिपा नहीं रह गया है।

    कपड़ा लाइन में एक विशेष समुदाय पर निरंतर कार्रवाई

    वहीं, कपड़ा लाइन के समीप चौक पर अतिक्रमण की भरमार पर चुप्पी

    वार्ड क्रमांक 59 में रोहित जैन के ठेले पर की गई तथाकथित कार्रवाई को कई लोग महापौर की निजी जिद का प्रत्यक्ष उदाहरण बता रहे हैं। सवाल यह है कि नियम सबके लिए एक समान क्यों नहीं?

    पोस्टर वार में ठेकेदारों की एंट्री

    इस बार महापौर के जन्मदिन पर एक नया दृश्य देखने को मिल रहा है—नगर निगम के ठेकेदारों की फौज भी पोस्टर वार में शामिल हो चुकी है।

    सभी की अपनी-अपनी राजनीतिक और व्यावसायिक मजबूरियाँ हो सकती हैं, लेकिन शहर की जनता आज जिन समस्याओं से जूझ रही है, वे किसी पोस्टर से छिप नहीं सकतीं।

    जमीनी हकीकत बनाम मंचीय भाषण

    आज शहर की वास्तविक तस्वीर यह है—

    जगह-जगह कचरे के ढेर

    अंधेरे रास्ते

    सफाई व्यवस्था बदहाल

    जल व्यवस्था चरमराई

    अतिक्रमण से अस्त-व्यस्त शहर

    आवारा पशुओं से आमजन त्रस्त

    विकास कार्य कई स्थानों पर ठप

    ऐसे में विकास की बात करना कहीं न कहीं चुनावी वादों से जनता को ठगने जैसा प्रतीत होता है, जो महापौर प्रत्याशी के रूप में श्रीमती अलका बाघमार ने किए थे।

    निजी संस्थाओं के भरोसे शहर

    यदि कुछ निजी संस्थाएँ चौराहों और चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी न उठातीं, तो आज शहर की स्थिति और भी भयावह होती।

    वित्त आयोग से मिलने वाले फंड से सड़कों का संधारण हो रहा है, लेकिन यह कोई निजी उपलब्धि नहीं बल्कि एक सतत प्रशासनिक प्रक्रिया है—सरकार किसी की भी हो, यह राशि आती ही है।

    शहरी सरकार की कोई ठोस, मौलिक उपलब्धि आज भी ढूंढे नहीं मिलती।

    एक अपवाद: नरेन्द्र बंजारे

    हाँ, वित्त विभाग प्रभारी नरेन्द्र बंजारे ने उपादान जैसे मामलों में निगम के पूर्व कर्मचारियों के लिए पहल कर एक सकारात्मक उदाहरण जरूर प्रस्तुत किया है। लेकिन समग्र व्यवस्था आज भी शर्मसार नजर आती है।

    प्रोटोकॉल और किराए की गाड़ी

    विडंबना यह भी है कि महापौर के लिए निगम वाहन आवंटित होने के बावजूद किराए के वाहन में यात्रा की जा रही है—मानो प्रोटोकॉल का आनंद भी सत्ता का एक अलग ही सुख हो।

    जन्मदिन, भव्य आयोजन और मीडिया प्रबंधन

    सूत्रों के अनुसार, 31 जनवरी का जन्मदिन समारोह अत्यंत भव्य बनाया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों को सौंप दी गई है।

    कुछ तथाकथित पत्रकारों को साधकर झूठी वाहवाही वाली खबरें भी प्रकाशित कराई जा सकती हैं—ऐसी चर्चाएँ शहर में आम हैं।

    20–25 साल में सबसे बदहाल दौर

    यदि जमीनी हकीकत देखी जाए, तो शहर पिछले 20–25 वर्षों में अपने सबसे बदहाल दौर से गुजर रहा है।

    इस स्थिति की जिम्मेदारी से नगर निगम प्रशासन और शहरी सरकार दोनों नहीं बच सकते।

    शहरी सरकार और निगम प्रशासन के बीच समन्वय की कमी साफ दिखाई देती है। वहीं स्थानीय विधायक—जो कि प्रदेश के शिक्षा मंत्री भी हैं—के साथ बढ़ती दूरी भी शहरी सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

    एक ओर बस स्टैंड को नया स्वरूप देने की योजना, दूसरी ओर बस स्टैंड में राम रसोई के अवैध अनुबंध पर पुरानी सरकार को दोष देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश—यह विरोधाभास शहर की जनता भली-भांति समझ रही है।

    अंत में…

    खैर, जैसा भी हो—

    महापौर हैं, तो जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाएगा।

    जब सत्ता है, तो उसका लाभ भी उठाया जाएगा।

    फिर भी औपचारिकता निभाते हुए—

    महापौर श्रीमती अलका बाघमार को जन्मदिन की अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएँ।

    बस इतना निवेदन है कि अगला जन्मदिन पोस्टरों में नहीं, बल्कि शहर की सूरत में विकास के रूप में नजर आए।

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