August 03, 2026
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    जन्मदिन विशेष : “नक्सलवाद से विकास तक: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नया छत्तीसगढ़” Featured

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    नक्सलवाद की छाया से बाहर निकलता छत्तीसगढ़, विकास की राह पर बस्तर

    (मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के जन्मदिवस विशेष)

    लेखक : शरद पंसारी
    संपादक – शौर्यपथ दैनिक समाचार


    21 फरवरी—छत्तीसगढ़ के वर्तमान मुख्यमंत्री माननीय विष्णु देव साय का जन्मदिन—सिर्फ एक राजनीतिक व्यक्तित्व का जन्मदिवस नहीं, बल्कि उस नेतृत्व का उत्सव है जिसने बीते ढाई वर्षों में छत्तीसगढ़ की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नए सिरे से परिभाषित किया है।

    आज से लगभग ढाई वर्ष पूर्व जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश की कमान संभाली, तब उनके सामने अनेक चुनौतियाँ थीं—किसानों की उम्मीदें, महिलाओं का सशक्तिकरण, आवासहीन गरीबों की पीड़ा और सबसे बड़ी चुनौती, वर्षों से नक्सलवाद की छाया में जी रहा बस्तर।

    चुनावी वादों से आगे, भरोसे की सरकार

    मुख्यमंत्री साय की सरकार ने सत्ता संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया कि यह सरकार केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि कार्यान्वयन की सरकार होगी।

    • किसानों से ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर अन्नदाता के सम्मान को पुनर्स्थापित किया गया।

    • महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को प्रतिमाह ₹1000 की आर्थिक सहायता देकर महिला सशक्तिकरण को जमीनी मजबूती दी गई।

    • प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से हजारों परिवारों को पक्की छत का सपना साकार हुआ।

    ये सभी वादे केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि धरातल पर उतरते हुए सरकार की नीयत और नेतृत्व की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

    नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक नेतृत्व

    परंतु इन उपलब्धियों के बीच एक ऐसा ऐतिहासिक कार्य है, जो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व को अमर पहचान दिलाता है—
    ? छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में ठोस और निर्णायक पहल।

    वर्षों तक छत्तीसगढ़ के नागरिकों को अन्य राज्यों में एक ही सवाल का सामना करना पड़ता था—
    “आप छत्तीसगढ़ में कैसे रह लेते हैं? वह तो नक्सली क्षेत्र है।”

    मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने इस मानसिकता को जड़ से बदलने का काम किया। सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाना, विकास को सुरक्षा के साथ जोड़ना और संवाद व आत्मसमर्पण नीति को प्रभावी बनाना—इन सभी कदमों ने नक्सलवाद के मजबूत किले को कमजोर किया है।

    बस्तर: भय से विश्वास की ओर

    जो बस्तर कभी “नक्सलगढ़” कहा जाता था, आज वही बस्तर विकास की नई कहानी लिख रहा है।

    • दूरदराज के गांवों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की योजनाएं पहुंच रही हैं।

    • बड़ी संख्या में नक्सलियों का आत्मसमर्पण, समाज की मुख्यधारा में लौटने की ऐतिहासिक प्रक्रिया का प्रमाण है।

    • सड़क, संचार, मोबाइल नेटवर्क और प्रशासनिक पहुंच ने दशकों पुरानी दूरी को समाप्त किया है।

    यह सब संभव हुआ है मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उस सोच से, जिसमें सुरक्षा और संवेदनशीलता दोनों का संतुलन है।

    पर्यटन और संस्कृति का नया केंद्र बनता बस्तर

    आज बस्तर केवल शाही दशहरे तक सीमित नहीं रहा।
    प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, जलप्रपात, वन संपदा और शांत वातावरण—बस्तर अब देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना रहा है।
    यह बदलाव बताता है कि बस्तर अब बंदूक नहीं, भविष्य की संभावनाओं से पहचाना जाएगा।

    इतिहास में दर्ज होगा यह नेतृत्व

    निस्संदेह, भविष्य में जब छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद के अंत की चर्चा होगी, तो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा।
    उन्होंने यह सिद्ध किया कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, संवेदनशील प्रशासन और विकासोन्मुख दृष्टि से असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी संभव हो सकते हैं।

    जन्मदिन पर बस्तर की दुआएं

    आज, मुख्यमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर, बस्तर की धरती—जिसने सबसे अधिक दर्द सहा—उन्हें सबसे अधिक दुआएं दे रही है।
    यह दुआ कि शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे,
    यह दुआ कि विकास की यह यात्रा कभी न रुके,
    और यह दुआ कि छत्तीसगढ़ हमेशा शांति, समृद्धि और सम्मान के मार्ग पर आगे बढ़ता रहे।

    21 फरवरी केवल जन्मदिन नहीं,
    यह उस नेतृत्व का उत्सव है जिसने छत्तीसगढ़ को नई पहचान दी।

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