
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
साभार - श्री सुधांश पंत
यह एक दृश्य अक्सर दोहराया जाता है - लगभग हर कॉलेज के छात्रावासों में, हर कार्यालय की पार्टियों में और साथ जवान हो रहे दोस्तों के हर समूह में। कुछ नशीले पदार्थ एक-दूसरे तक पहुंचाए जाते हैं। इस क्रम में एक बात काफी सहजता के साथ, लेकिन जोर देकर कही जाती है कि बाकी सब भी तो ऐसा ही कर रहे हैं। ऐसे में, मना करना कुछ ऐसा लगता है मानो आप समूह के बाकी साथियों से अलग-थलग हो रहे हों। इसके बाद एक पल की चुप्पी छाती है। और फिर एक युवा अपने साथियों के समूह को ‘ना’ कहने से पैदा होने वाली शर्मिंदगी और अलग-थलग पड़ जाने की बेचैनी के बीच जल्दी से फैसला ले लेता है। यही एक निर्णायक पल होता है, क्योंकि लत हमेशा सोच-समझकर लिए गए फैसले से नहीं लगती। अक्सर इसकी शुरुआत पीछे छूट जाने के डर से होती है।
नशीले पदार्थों को ना, जिंदगी को हां
यही वह मौन लेकिन अहम पल है, जिसको ध्यान में रखकर ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ (एनएमबीए) की शुरुआत की गई थी। इस अभियान का व्यापक उद्देश्य नशीले पदार्थों की लत के बारे में जागरूकता फैलाना रहा है। लेकिन इसकी असली चुनौती सामाजिक रही है: नशे से मुक्त रहने का फैसला लेने को आसान बनाना, उस फैसले की अभिव्यक्ति को सहज बनाना और कुल मिलाकर, इस पूरी कवायद को एक सामान्य बात के तौर पर देखना आसान बनाना।
दृढ़ संकल्प
जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को एनएमबीए की शुरुआत की, तो इस अभियान ने एक कहीं अधिक कठिन चुनौती से जूझना तय किया। यह कठिन चुनौती थी - किसी कमजोर पल में, एक अकेले व्यक्ति द्वारा अपने साथियों के समूह के सामने ‘नहीं’कहने की हिम्मत लाने की। इस दृष्टि से, इस अभियान का सबसे असरदार शब्द शायद सबसे आसान शब्द है, ‘ना!’ यह कोई नाटकीय ‘ना!’ नहीं है। यह कोई नैतिक उपदेश नहीं है। बस जब आपके आस-पास के सभी लोग जब ‘हां’ कह रहे हों, तब बिना विचलित हुए मना करने का आत्मविश्वास है।
माननीय प्रधानमंत्री ने कहा है, “विकसित भारत संकल्प अभियान के तहत ‘नशा मुक्त युवा’ नाम ही इस संकल्प को पूरी तरह स्पष्ट करता है। अब जबकि भारत एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है, तो यह जरूरी है कि हमारे युवा शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ हों, आत्मविश्वास से भरे हों और हमेशा नशे की जानलेवा लत से मुक्त रहें। यही इस अभियान का उद्देश्य है। हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हमारे युवा नशे की लत के खतरों को समझें, जागरूक रहें और इससे दूर रहें। इस संकल्प को साकार करने में ‘राष्ट्रीय नशा मुक्त युवा अभियान’ अब एक अहम भूमिका निभा रहा है।”
एनएमबीए: साझा जिम्मेदारी का एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन
छह वर्ष बाद, वह एक पहल अब एक बहुत बड़े अभियान का हिस्सा बन गई है। यह अभियान संकल्प लेने और लोगों को जोड़ने की गतिविधियों के जरिए 13.71 करोड़ से अधिक युवाओं तक पहुंचा है। साथ ही विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों में 31 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। शैक्षिक परिसरों में विद्यार्थियों का स्वैच्छिक रूप से संकल्प लेना अब एक आम बात हो गई है और ग्राम सभाएं भी अब इस मुद्दे पर नियमित रूप से चर्चा करती हैं। जहां पहले लोग अपने परिवार के किसी सदस्य की लत को निजी शर्म की बात मानकर छिपाते थे, वहीं अब 10.65 करोड़ से अधिक महिलाओं, स्वयं-सहायता समूहों (एसएचजी) और सामुदायिक नेटवर्कों के जरिए, इस बारे में खुलकर और अपनी भाषा में अपने पड़ोसियों से बात करने लगी हैं।
19 सितंबर, 2026 तक, 1.70 लाख से अधिक ‘नशा मुक्ति मित्र (एनएमएम)’ सामुदायिक स्तर पर चैंपियन बनकर उभरे हैं और 34.57 करोड़ से अधिक लोगों तक यह संदेश पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। और, यह रुझान सकारात्मक दिशा में तेजी से आगे की ओर बढ़ रहा है।
यहीं से सामाजिक व्यवहार को बदलने हेतु एक जन-अभियान की शुरुआत हुई है। एनएमबीए ने एकतरफा जागरूकता से आगे बढ़कर लगातार कई ऐसे रास्ते बनाए हैं, जिनसे लोग इस मुहिम से जुड़ सकें, जानकारी हासिल कर सकें और इसके संदेश को आगे बढ़ा सकें।
एनएमबीए पोर्टल जानकारियों, शैक्षिक संसाधनों, सर्वोत्तम कार्यपद्धतियों और नागरिकों के लिए इस अभियान से जुड़ने के अवसरों को एक साथ लाता है।
https://www.dosje.gov.in/organisation/nasha-mukt-bharat-abhiyaan
नशा-मुक्त युवा, नशा-मुक्त भारत
हाल ही में, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी में इस बड़े मिशन को आगे बढ़ाते हुए ‘नशा-मुक्त युवा, नशा-मुक्त भारत’ के लक्ष्य को फिर से दोहराया। उनकी यह अपील इसलिए भी खास थी क्योंकि इसमें केवल संस्थानों एवं सरकारी एजेंसियों को ही नहीं, बल्कि युवा संगीतकारों, विद्यार्थियों और थिएटर समूहों को भी शामिल किया गया। ऐसा यह मानते हुए किया गया कि संदेश सबसे अधिक असरदार तब होते हैं, जब वे उन लोगों की आवाज के जरिए पहुंचते हैं जिन पर युवाओं का भरोसा पहले से ही जमा होता है।
असल में, एनएमबीए ने पिछले छह वर्षों के दौरान चुपचाप नशाबंदी की दीवार ही नहीं, बल्कि अपनापन महसूस कराने वाला एक वैकल्पिक दायरा भी बनाया है। यह दायरा अब बड़ा होकर हर राज्य और केन्द्र-शासित प्रदेश के स्कूलों, कॉलेजों, पंचायती राज संस्थाओं, आशा एवं आंगनवाड़ी नेटवर्कों तथा हजारों सामुदायिक संगठनों तक जा पहुंचा है और हर जगह लोग अपने-अपने शब्दों में यही संकल्प ले रहे हैं।
जागरूकता से संकल्प तक
इतने बड़े पैमाने का आंदोलन बहुत देर तक सिर्फ आंकड़ों तक ही सीमित नहीं रहता। यह घरों, कक्षाओं और समुदायों में बातचीत का हिस्सा बनने लगता है, जिससे नशीले पदार्थों के सेवन का मुद्दा खुलकर सामने आता है और इसकी रोकथाम महज संकट के समय की चर्चा न रहकर एक सामूहिक जिम्मेदारी बन जाती है।
लेकिन ऐसी जागरूकता तो बस एक शुरुआत है। जो लोग अपने या अपने किसी करीबी के लिए मदद चाहते हैं, उनके मन में अगला सवाल यह आता है कि वे आखिर जाएं कहां? एनएमबीए ने इस कदम को भी आसान बनाने का प्रयास किया है।
राष्ट्रीय नशा-मुक्ति हेल्पलाइन, 14446, जानकारी, मार्गदर्शन और उपयुक्त नशा-मुक्ति संबंधी सेवाओं के लिए संपर्क का जरिया प्रदान करती है। यह चिंता के पल को स्वस्थ होने की दिशा में उठाए जा सकने वाले पहले कदम में बदलने में मदद करती है।
एक दोस्त के जोर देने और अपनी सही समझ के बीच फैसला करते समय कभी हिचकिचाहट भरे पल का अनुभव करने वाले एक व्यक्ति के लिए एनएमबीए की यात्रा यह भरोसा दिलाती है कि वे अकेले नहीं हैं।
भारत की उम्मीद की किरण – युवाओं - की सुरक्षा में एकजुट
अब नागरिकों के पास ‘नशा मुक्ति मित्र’ के तौर पर इस मिशन को आगे बढ़ाने का अवसर है। वे इस बातचीत को मात्र एक अभियान तक सीमित न रखकर उन जगहों तक ले जा सकते हैं, जहां रोजमर्रा के फैसले लिए जाते हैं।
क्योंकि कोई भी स्थायी बदलाव शायद ही कभी किसी एक अभियान, एक संस्था या एक पल के जरिए आता है। यह बदलाव तभी कायम रहता है, जब जागरूकता रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन जाती है, बातचीत एक सामूहिक संकल्प में बदलती है और वह संकल्प रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाता है।
यही ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ की क्षमता और उसका नतीजा है। यह नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ एक ऐसा अभियान है, जिसके साथ पूरा देश एकजुट होकर खड़ा है।
आइए, भारत की उम्मीद की किरण-युवाओं-की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करें।
(लेखक भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में सचिव हैं)
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
