Google Analytics —— Meta Pixel
May 23, 2026
Hindi Hindi

प्रतिबंध के बावजूद बाजार में खुलेआम बिक रही इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट Featured

  • rounak group

स्वास्थ्य मंत्रालय ने ई-सिगरेट पर प्रतिबंध के उल्लंघन और भारतीय बाजार में इसकी उपलब्धता के मद्देनजर जारी की सार्वजनिक सूचना

       रायपुर / शौर्यपथ / भारत सरकार द्वारा 2019 में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पर प्रतिबंध लगाये जाने के बावजूद सिगरेट-तंबाकू की दुकानों पर ई-सिगरेट आसानी से उपलब्ध हैं और 18 साल से कम के बच्चों को भी बेची जाती हैं । स्वास्थ्य मंत्रालय ने अब ई-सिगरेट प्रतिबंध 2019 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। इसके जरिये निर्देश दिया गया है कि सभी उत्पादकों, निर्माताओं, आयातकों, निर्यातकों, वितरकों, विज्ञापनदाताओं, कूरियर सहित परिवहन संचालकों, सोशल मीडिया वेबसाइट, ई-कॉमर्स वेबसाइट, ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट, दुकानदारों/खुदरा विक्रेताओं आदि को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का उत्पादन या निर्माण या आयात या निर्यात या परिवहन या बिक्री या वितरण या भंडारण नहीं करना चाहिए।
यह बिक्री एक पूर्ण उत्पाद या उसके किसी भाग के रूप में भी नहीं की जानी है और इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का विज्ञापन करना या किसी विज्ञापन में भाग लेना (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, इंटरनेट या वेबसाइट अथवा सोशल मीडिया आदि में) जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उपयोग को बढ़ावा देता है।

इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पर प्रतिबंध, हमारी युवा पीढ़ी को जहरीली लत के एक नए रूप से बचाने के लिए लगाया गया था। हालांकि, इसका प्रवर्तन कमजोर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप बाजार सस्ते और बिना ब्रांड वाली चीनी ई-सिगरेट से भर गया है। वालंट्री हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रबंधक, बिनॉय मैथ्यू कहते हैं, “सख्त प्रवर्तन, कार्यान्वयन और प्रतिबंध को प्रभावी बनाना सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक नोटिस लाना एक स्वागत योग्य कदम है।
    भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के हानिकारक प्रभावों और युवाओं में इसके प्रचलन में खतरनाक वृद्धि को देखते हुए, इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन पर रोक लगा दी है। इसमें सभी तरह के इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम, हीट नॉट बर्न उत्पाद, ई-हुक्का और इसी तरह के अन्य उपकरण शामिल हैं जो चाहे किसी भी नाम से पुकारे जाते हों और जो भी आकार, आकृति या रूप में हो। इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन) अधिनियम, 2019 को एक अध्यादेश के रूप में पेश किया गया था
और बाद में वर्ष 2019 में एक अधिनियम के रूप में औपचारिक रूप दिया गया।
     भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान होने के बावजूद, ई-सिगरेट तम्बाकू विक्रेताओं, सामान्य दुकानों और ऑनलाइन प्रदाताओं सहित कई स्रोतों पर व्यापक रूप से उपलब्ध होने की सूचना है। स्कूली बच्चों सहित युवाओं में ई-सिगरेट का बड़े पैमाने पर उपयोग देखा गया है। इस प्रकार ऐसा प्रतीत होता है कि ई-सिगरेट बेचने वाले बाजार में अवैध रूप से पैर जमाने में कामयाब हो गए हैं जो प्रतिबंध से पूरी तरह से दूर नहीं हो पाए हैं।
    ई-सिगरेट और ऐसे अन्य आकर्षक फ्लेवर वाले उत्पाद हमारी युवा पीढ़ी को निकोटिन की लत की ओर धकेलने में मददगार साबित हुए हैं। यह चिंताजनक है कि एक प्रतिबंधित उत्पाद भारतीय बाजार में इतनी आसानी से उपलब्ध है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना, प्रतिबंधित उत्पाद पर जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ पीईसीए 2019 प्रावधानों के विवरण को स्पष्ट करते हुए, इस खतरनाक उत्पाद को भारत में विपणन से रोकने के लिए सरकार के दृढ़ संकल्प को मजबूत करती है । सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रंजीत सिंह ने कहा कि राज्य सरकार को ई-सिगरेट और गर्म तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के लिए समान कदम
उठाने चाहिए।“
   केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने पहले सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देशित किया था और इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम 2019 (पीईसीए) के कमजोर कार्यान्वयन पर प्रकाश डाला। इसके साथ यह रेखांकित किया गया कि उत्पाद ऑनलाइन, खुदरा, कंवीनियंट स्टोर, स्टेशनरी की दुकानों और शैक्षणिक संस्थानों के पास आसानी से उपलब्ध है। राज्यों को पीईसीए के अनुपालन की समीक्षा करने और अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विशेष अभियान चलाने तथा स्कूलों-कॉलेजों में जब-
तब जांच आदि की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया था।
   स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशों के अनुपालन के रूप में, राज्यों ने पीईसीए को लागू करने की पहल की, उत्तर प्रदेश के बाल संरक्षण और अधिकार आयोगों के अध्यक्ष ने पीईसीए को सख्ती से लागू करने के लिए सभी जिलों को निर्देश जारी किए हैं। एडीजीपी, बेंगलुरू शहर (कर्नाटक) के अपराध ने पीईसीए के सख्त प्रवर्तन के लिए संयुक्त आयुक्त, अपराध, बैंगलोर से कहा है और उन दुकानों की एक सूची प्रदान की है जहां ई-सिगरेट बेचे जाने का संदेह है। दिल्ली पुलिस ने ई-सिगरेट के नुकसान के साथ-साथ पीईसीए के अनुपालन पर सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। नोएडा और मुंबई से चीनी निर्मित ई-सिगरेट की बरामदगी की
भी सूचना है।
   इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट - इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और ऐसे अन्य उपकरण, बैटरी से चलने वाली प्रणाली है जो एक पदार्थ (तरल या ठोस अवस्था में) को गर्म करती है, जो साँस के लिए एक एरोसोल बनाने के लिए निकोटिन और अक्सर स्वाद का भी निर्माण करती है। निकोटिन बहुत ही नशीला होता है और निर्भरता पैदा करता है। ये उत्पाद गेटवे उत्पादों के रूप में कार्य करते हैं। ई-सिगरेट डिजाइन की दृष्टि से बहुत आकर्षक हैं, आकर्षक स्वादों में आती हैं (चॉकलेट, हेज़लनट, पेपरमिंट, गमी बियर, क्रेम ब्रूल , मैंगो, क्रैनबेरी आदि) और उनके उपयोग से पारंपरिक धूम्रपान से जुड़ी दुर्गंध नहीं आती है। इसलिए, युवा आबादी, किशोर और बच्चे विशेष रूप से ई-सिगरेट के उपयोग के
माध्यम से निकोटिन की लत की शुरुआत करने के लिए असुरक्षित है। यह भारत के कई स्कूलों की रिपोर्टों से स्पष्ट होता है जहां शिक्षकों को बच्चों के स्कूल बैग में ई-सिगरेट मिली। टीन ई-सिगरेट का उपयोग विश्व स्तर पर एक महामारी बन गया है।

Rate this item
(0 votes)

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)