August 05, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    एचएनएलयू रायपुर में “एआई और कानून” पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, डेटा गोपनीयता और कानूनी ढाँचे पर गहन मंथन

    • rounak group

       रायपुर / शौर्यपथ / हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HNLU), रायपुर ने “उभरती हुई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का न्यायशास्त्रीय प्रभाव: सामाजिक और कानूनी पहलू” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सम्मेलन का सफल आयोजन किया। इस सम्मेलन में न्यायाधीशों, शिक्षाविदों, प्रैक्टिशनरों और छात्रों ने एआई से संबंधित नैतिक, कानूनी और सामाजिक चुनौतियों पर विमर्श किया।

    उद्घाटन सत्र
       पूर्व मुख्य न्यायाधीश, उड़ीसा उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर ने कहा कि “राज्य और निजी संस्थाएँ अक्सर कानूनी दायरे से परे डेटा एकत्र करती हैं, जिससे ‘डेटा गोपनीयता’ अब मिथक बन चुकी है।” उन्होंने व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा पर जोर देते हुए इसे हथियार की तरह उपयोग करने के अंतरराष्ट्रीय उदाहरण साझा किए।
      एचएनएलयू के कुलपति प्रो. वी.सी. विवेकानंदन ने ‘नियामक शून्यता’, ‘सीमाहीन संचालन’ और ‘रोग तकनीकें’ जैसी चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया और कहा कि ये लोकतंत्र व न्याय प्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकती हैं।

    पैनल चर्चा – “अनियंत्रित को नियंत्रित करना”
      इस पैनल में विशेषज्ञों ने सुरक्षित और नैतिक एआई के लिए कानूनी ढाँचे की आवश्यकता पर बल दिया।
     श्री कश्यप कोम्पेला ने AIM-AI ढाँचा प्रस्तुत किया जो एआई जोखिमों की पूर्वानुमान क्षमता रखता है।
     डॉ. ऋषि राज भारद्वाज ने भारत में एआई नियमावली की धीमी प्रगति और मौजूदा आईटी अधिनियम की अपर्याप्तता पर चिंता व्यक्त की।
    डॉ. भावना महादेव ने एआई आधारित सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव के खतरों पर प्रकाश डाला।
    प्रो. होंग शुए ने बौद्धिक संपदा अधिकारों को मानव-केंद्रित बनाए रखने की आवश्यकता बताई।

    तकनीकी सत्र और शोधपत्र
       सम्मेलन में आठ तकनीकी सत्र आयोजित हुए, जिनमें न्यायालय प्रबंधन में एआई, उत्तरदायित्व, नैतिकता और डेटा सुरक्षा जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। कुल 172 शोधपत्रों में से 60 श्रेष्ठ प्रस्तुतियाँ चयनित की गईं, जिससे छात्रों और शोधकर्ताओं को सार्थक संवाद का अवसर मिला।

    समापन सत्र
      भारत उच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता सुश्री एन.एस. नप्पिनई ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम की कमियों पर चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से “राइट टू बी फॉरगॉटन” की अनुपस्थिति को उजागर किया और कहा कि “गोपनीयता केवल रहस्य नहीं बल्कि विकल्प का अधिकार है।” नप्पिनई ने यह भी जोड़ा कि मेटावर्स जैसे वर्चुअल अपराधों से निपटने के लिए कानून को लगातार गतिशील होना पड़ेगा।

    आयोजन की रूपरेखा
      इस सम्मेलन का संचालन डॉ. अतुल एस. जायभाये और डॉ. प्रियंका धर ने किया। छात्र समिति ने भी आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजन ने न केवल एआई शासन पर विमर्श को दिशा दी बल्कि कानूनी शिक्षा और तकनीकी नैतिकता को भी नया दृष्टिकोण प्रदान किया।

    Rate this item
    (0 votes)

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision