August 05, 2026
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    बम्हनी पंचायत में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा 'रोकड़ मिलानÓ और खरीदी के नाम पर लाखों रुपये का गबन — जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल Featured

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    कोंडागांव विशेष संवाददाता दीपक वैष्णव की रिपोर्ट
    कोंडागांव / शौर्यपथ /

      कोंडागांव जिले की बम्हनी ग्राम पंचायत में एक बड़ा वित्तीय घोटाला उजागर हुआ है। आरोप है कि पंचायत सचिव द्वारा रोकड़ मिलान, बर्तन खरीदी और सिलाई मशीन खरीदी जैसे मदों के नाम पर लाखों रुपये का गबन किया गया।
    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब मामले की जांच की गई, तो जिला पंचायत स्तर के अधिकारियों ने कथित रूप से एक झूठी जांच रिपोर्ट तैयार कर सचिव को बचाने का प्रयास किया।

      रोकड़ मिलान के नाम पर 11.80 लाख रुपये का आहरण
     सूत्रों के अनुसार, ग्राम पंचायत बम्हनी के सचिव गजेंद्र पोयाम ने वित्तीय वर्ष के दौरान ?11,80,137 रुपये रोकड़ मिलान के नाम पर आहरित किए।
    स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह राशि योजना के खातों से निकाल ली गई, परंतु खर्च का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
    जांच रिपोर्ट में इसे मात्र "कंप्यूटर ऑपरेटर की त्रुटि" बताया गया — जिससे ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में आक्रोश है।

      खरीदी में भी गड़बड़ी के संकेत

    जिला पंचायत की जांच रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत द्वारा सिलाई मशीन और बर्तन क्रय पर ?17,09,950 का भुगतान किया गया था।
    परंतु, जांच के दौरान न तो मशीनें मिलीं, न बर्तन।
    किसे वितरण किया गया या सामग्री कहाँ गई — इस पर रिपोर्ट मौन है।
    ग्रामीणों का कहना है कि यह "कागज़ी खरीदी" का मामला प्रतीत होता है।

      जांच टीम पर उठे सवाल

    इस मामले की जांच गजेंद्र कुमार साहू (जिला समन्वयक, जिला पंचायत), नितिन कुमार मिश्रा (कंप्यूटर प्रोग्रामर, मनरेगा), और बी.आर. मोरे (उप संचालक, पंचायत) की टीम द्वारा की गई।
    ग्रामीणों का आरोप है कि इन अधिकारियों ने सचिव को बचाने के लिए पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट तैयार की।
    स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में तथ्यों की जांच नहीं की गई, बल्कि पहले से तय निष्कर्ष प्रस्तुत कर दिया गया।
      ग्रामीणों की मांग — "स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए"

    गांव के कई निवासियों ने मांग की है कि

    "मामले की जांच जिला पंचायत के बजाय किसी स्वतंत्र टीम या सतर्कता विभाग से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।"
    उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं के लिए जारी फंड का दुरुपयोग न केवल आर्थिक अपराध है बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं की आत्मा के साथ छल भी है।

      सवाल प्रशासन से
     बम्हनी जैसी छोटी पंचायतों में यदि लाखों रुपये का हेरफेर जांच के बावजूद "त्रुटि" बताकर बंद कर दिया जाए, तो यह पूरे जिला प्रशासन की जवाबदेही पर प्रश्न खड़ा करता है।
    पंचायत सचिव और संबंधित अधिकारियों की संपत्ति जांच की मांग भी ग्रामीणों द्वारा की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गबन की राशि का उपयोग कहां हुआ।

     

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