August 04, 2026
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    छत्तीसगढ़ सरकार ने रद्द किए कई विवादित प्रावधान; गाइडलाइन दरों में संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू Featured

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        रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश में भूमि और संपत्ति के मूल्यांकन नियमों को लेकर उठे तीव्र विरोध व व्यापक सुझावों के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने कई अहम निर्णय लिए हैं जिनका आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि ये बदलाव नगरीय विकास, रियल एस्टेट सेक्टर और आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखकर किए गए हैं ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और किफायती हो सके।

    मुख्य निर्णय — क्या बदला गया

    1400 वर्ग मीटर तक के भूखंडों पर इंक्रीमेंटल गणना समाप्त: नगरीय क्षेत्रों में 1400 वर्ग मीटर तक के भूखंडों के लिए इंक्रीमेंटल आधार पर मूल्यांकन की वर्तमान व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब पूर्व प्रचलित स्लैब प्रावधान पुनः लागू होंगे — नगर निगम क्षेत्रों में 50 डेसिमल, नगर पालिका में 37.5 डेसिमल और नगर पंचायत में 25 डेसिमल तक स्लैब दरों पर मूल्यांकन होगा।

    सुपर बिल्ट-अप एरिया की गणना विलोपित: बहुमंजिला भवनों में फ्लैट, दुकान और कार्यालय के हस्तांतरण पर अब सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर बाजार मूल्य लागू नहीं होगा; स्थानांतरण का मूल्यांकन अब बिल्ट-अप एरिया के आधार पर किया जाएगा। यह प्रावधान मध्य प्रदेश शासन के समय से चले आ रहे पुराने नियम को बदलता है और वर्टिकल डेवलपमेंट को गति देने की मांग को पूरा करता है।

    मंजिलों के आधार पर छूटें: बहुमंजिला और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के मूल्यांकन में बेसमेंट व प्रथम तल पर 10% तथा द्वितीय तल व ऊपर के तल पर 20% की कटौती लागू की गई है — इससे मध्यम वर्ग को किफायती दरों पर फ्लैट और व्यावसायिक स्थान मिलना आसान होगा।

    कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों में दूरी-आधारित छूट: किसी कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के मुख्य मार्ग से बने हिस्से से मापी गई 20 मीटर की दूरी के बाद स्थित संपत्तियों के लिए भूखंड दरों में 25% की छूट दी जाएगी। यह व्यवस्था वास्तविक स्थिति के आधार पर अधिक न्यायसंगत मूल्यांकन सुनिश्चित करेगी।

    जिला मूल्यांकन समितियों को निर्देश: बोर्ड ने निर्देश दिया है कि हाल ही में दरों में वृद्धि के बाद प्राप्त आपत्तियों, ज्ञापनों और सुझावों का परीक्षण कर 31 दिसंबर तक गाइडलाइन दरों में संशोधन के प्रस्ताव जिला स्तर से भेजे जाएं; इन प्रस्तावों के आधार पर केंद्रीय बोर्ड आगामी गाइडलाइन दरों पर अंतिम निर्णय लेगा।

    पृष्ठभूमि और प्रशासनिक कदम

    नई कलेक्टर गाइडलाइन 20 नवंबर को लागू की गई थी, जिसके बाद प्रदेश भर में तीव्र विरोध और आपत्तियाँ उठीं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संकेत के बाद सरकार ने समीक्षा के लिए कदम उठाते हुए सेंट्रल वैल्यूएशन बोर्ड की बैठक बुलाई।

    रजिस्ट्रेशन विभाग ने सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी थी। बैठक के बाद महानिरीक्षक पंजीयन एवं सुपरिटेंडेंट ऑफ स्टैंप्स, छत्तीसगढ़, रायपुर ने संशोधित गाइडलाइंस और आदेश जारी किए। अधिकारियों ने बताया कि ये प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं ताकि अस्थिरता दूर हो और रियल एस्टेट सेक्टर को स्थिर दिशा मिल सके।

    सरकार का मकसद और अपेक्षित प्रभाव
    प्रशासन का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और शहरी भूमि के समुचित उपयोग को प्रोत्साहित करना है। बिल्ट-अप एरिया पर मूल्यांकन तथा मंजिल-आधारित छूटों से वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे शहरी आवास और व्यावसायिक इकाइयों की उपलब्धता और किफायती विकल्पों में इजाफा होगा।

    आगे की प्रक्रिया
    केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा माँगे गए जिलास्तरीय प्रस्तावों के मिलने के बाद बोर्ड अंतिम गाइडलाइन दरों की घोषणा करेगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन प्रावधानों को वापस लिया गया है, वे तत्कालीन आदेशों के अनुरूप लागू माने जाएँगे, जबकि नए छूट-प्रावधान संस्थागत स्तर पर लागू होंगी।

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