August 03, 2026
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    मोदी सरकार का ऐतिहासिक कदम: चार नई श्रम संहिताएँ श्रमिकों को देंगी समय पर वेतन, सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण

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    रायपुर / शौर्यपथ / भारत सरकार ने 'पुराने' तंत्र—जिसमें कुछ कानून ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के समय के थे—में सुधार करने और करोड़ों श्रमिकों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से श्रम सुधारों के लिए एक ऐतिहासिक कानून बनाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 21 नवंबर, 2025 को सभी चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) को अधिसूचित किया। ये सुधार गिग वर्कर्स (gig workers) के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज, समान वेतन का वादा, महिला श्रमिकों के लिए विस्तारित अधिकार और सुरक्षा, न्यूनतम मजदूरी को वैधानिक समर्थन और निश्चित अवधि के रोजगार (fixed term employment) की शुरुआत जैसे प्रमुख बदलाव ला रहे हैं। सरकार द्वारा लागू नए श्रम कानूनों के हिस्से के रूप में, आज रायपुर के पीडब्ल्यूडी न्यू सर्किट हाउस में एक दिवसीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें मीडिया को इन 4 नए श्रम कानूनों के माध्यम से लाए गए सुधारों के प्रति संवेदनशील बनाया गया। कार्यशाला में श्रम विभाग के क्षेत्रीय श्रम आयुक्त अंकुर शर्मा, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के आयुक्त गौरव डोगरा और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के उप निदेशक धीरेंद्र पटनायक शामिल हुए। पीआईबी के उप निदेशक ने श्रम सुधारों और नए कानून द्वारा भारत के कार्यबल (workforce) के परिदृश्य को बदलने के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। क्षेत्रीय श्रम आयुक्त अंकुर शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताएं— मजदूरी संहिता (Wage Code), औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code), व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता (OSH Code), और सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code) हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये संहिताएं श्रमिकों को समय पर वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्रदान करेंगी, जबकि उद्योगों के लिए अनुपालन प्रक्रिया भी आसान होगी। उन्होंने मीडिया से इन 4 श्रम संहिताओं के माध्यम से लाए गए ऐतिहासिक सुधारों के बारे में जागरूकता पैदा करने में मदद करने का आग्रह किया। EPFO आयुक्त गौरव डोगरा ने भविष्य निधि से संबंधित प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा कि डिजिटलीकरण के माध्यम से ईपीएफ सेवाएं पहले से कहीं अधिक सरल और पारदर्शी हो गई हैं। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के माध्यम से श्रमिक अपनी पीएफ खाते की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं, क्लेम स्टेटस को ट्रैक कर सकते हैं और समय पर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसने संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। ESIC के उप निदेशक धीरेंद्र पटनायक ने कर्मचारी राज्य बीमा योजना की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह योजना न केवल श्रमिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि उनके परिवारों को चिकित्सा लाभ, मातृत्व लाभ और दुर्घटना की स्थिति में वित्तीय सहायता भी प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि ईएसआईसी नेटवर्क का निरंतर विस्तार किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक श्रमिकों को इसका लाभ मिल सके। कार्यशाला का समापन पत्रकारों और विशेषज्ञों के बीच प्रश्नोत्तरी सत्र के साथ हुआ। अधिकारियों ने कहा कि मीडिया की सक्रिय भूमिका से श्रम संहिताओं और योजनाओं की सही जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगी, जिससे श्रमिकों और उद्यमियों दोनों को सरकार की नीतियों का अधिकतम लाभ मिल सकेगा। यह संवाद कार्यक्रम श्रम सुधारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, जिससे केंद्र सरकार के सुधारात्मक प्रयासों को व्यापक जनसमर्थन मिलने की उम्मीद जताई गई। एक शानदार हेड लाइन बनकर देवे

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