August 03, 2026
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    उद्यानिकी में ऐतिहासिक छलांग: चार वर्षों में बजट 125% बढ़ा, किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस

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      रायपुर / शौर्यपथ / संचालनालय, उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी द्वारा विगत दो वर्षों में प्रदेश में उद्यानिकी विकास के लिए व्यापक प्रयास किए गए हैं। प्रदेश की विविध जलवायु और तीन एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के कारण यहाँ आम, काजू, लीची, नाशपाती सहित विभिन्न उद्यानिकी फसलों की खेती सफलतापूर्वक की जा रही है। विशेष रूप से केला और पपीता जैसी एक वर्षीय फसलों का रकबा तेजी से बढ़ा है, जिससे किसानों को बेहतर आमदनी प्राप्त हो रही है।

    उद्यानिकी विभाग द्वारा फसल क्षेत्र विस्तार के अंतर्गत फल, सब्जी, मसाला, पुष्प, सुगंधित फसलों के साथ-साथ ऑयल पाम एवं बांस रोपण को बढ़ावा दिया गया है। साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की स्थापना, मशरूम उत्पादन एवं स्पॉन मेकिंग यूनिट, गुणवत्तायुक्त पौध एवं बीज उत्पादन, पॉलीहाउस व शेडनेट हाउस जैसी संरक्षित खेती अधोसंरचना, यंत्रीकरण, पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन तथा कृषकों के प्रशिक्षण और शैक्षणिक भ्रमण जैसी गतिविधियाँ निरंतर संचालित की जा रही हैं।

    प्रदेश में उद्यानिकी विकास को गति देने के लिए बजट प्रावधानों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। वर्ष 2023–24 में उद्यानिकी योजनाओं पर 215.17 करोड़ रुपये व्यय किए गए थे, जबकि वर्ष 2025–26 में 431.03 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। वर्ष 2026–27 के लिए 483.80 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे चार वर्षों में उद्यानिकी बजट में लगभग 125 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित है।

    आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना के तहत फसल विविधिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र विस्तार किया जाएगा। राज्य के प्रमुख धार्मिक तीर्थ क्षेत्रों—डोंगरगढ़, रतनपुर, दंतेवाड़ा, जांजगीर, अम्बिकापुर एवं भैयाथान—को फ्लोरीकल्चर हब के रूप में विकसित करने की योजना है, जहाँ 111 क्लस्टर विकसित कर 27,700 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती प्रस्तावित है, जिससे लगभग 70 हजार किसान लाभान्वित होंगे।

    प्रदेश में खाद्य तेलों की आत्मनिर्भरता और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से आगामी तीन वर्षों में 21 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम का विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही सीड नर्सरी, सीड गार्डन तथा राज्य स्तर पर ऑयल पाम प्रसंस्करण इकाई की स्थापना का प्रस्ताव है। सिंचाई क्षेत्र विस्तार हेतु 37 हजार हेक्टेयर में ड्रिप और 4,500 हेक्टेयर में स्प्रिंकलर प्रणाली को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    विभागीय रोपणियों के माध्यम से 22,500 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन किया जाएगा। नर्सरी विहीन क्षेत्रों में 54 नई नर्सरियों की स्थापना और 55 नर्सरियों का उन्नयन किया जाएगा। वर्ष पर्यंत खेती को बढ़ावा देने के लिए पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस और मल्चिंग हेतु किसानों को अनुदान दिया जाएगा। इसके साथ ही मशरूम उत्पादन इकाइयों, कोल्ड स्टोरेज, फार्मगेट पैक हाउस, प्रसंस्करण इकाइयों तथा ग्रामीण व खुदरा बाजारों की स्थापना भी की जाएगी।

    उद्यानिकी विभाग द्वारा नवाचार के रूप में ग्राफ्टेड बैंगन और टमाटर पौधों का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे मृदा जनित रोगों पर नियंत्रण संभव हो सके। वर्ष 2025–26 में 2356 ग्राफ्टेड पौधों के माध्यम से प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा संरक्षित खेती के अंतर्गत शेडनेट हाउस के माध्यम से किसानों द्वारा सब्जी बीज उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है, जिसमें प्रदेश के 2176 किसान 86 लाख वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में बीज उत्पादन कर रहे हैं।

    नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल–ऑयल पाम योजना के अंतर्गत वर्ष 2025–26 में 2240 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम रोपण किया गया है, जिसमें से 1042 हेक्टेयर क्षेत्र में अंतरवर्तीय फसल ली जा रही है। राज्य सरकार द्वारा केंद्र की योजना के अतिरिक्त प्रति हेक्टेयर 69,620 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी दी जा रही है, जिससे किसानों को फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई और अंतरवर्ती फसलों के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।

    उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र विस्तार में भी सतत वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2025 तक फलों, सब्जियों, मसाला और पुष्प फसलों के रकबे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। विभागीय प्रयासों से उद्यानिकी क्षेत्र प्रदेश में किसानों की आय वृद्धि, फसल विविधिकरण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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