August 03, 2026
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    प्रार्थना में गिरे मासूम: खैरागढ़ के सरकारी स्कूल में जहरीले फल से 17 बच्चे बेहोश, स्कूल सुरक्षा पर गंभीर सवाल

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       खैरागढ़ / शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले से मंगलवार को एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया, जिसने सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करमतरा स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान अचानक 17 बच्चे एक-एक कर बीमार होकर बेहोश होने लगे। बच्चों को चक्कर आने लगे और देखते ही देखते वे जमीन पर गिरने लगे, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
    प्रारंभिक जानकारी और स्थानीय स्तर पर सामने आई आशंका के अनुसार, स्कूल खुलने से पहले कुछ बच्चों ने परिसर अथवा आसपास उगे रतनजोत के जहरीले फल खा लिए थे, जिसका असर प्रार्थना सभा के दौरान दिखाई दिया। बच्चों की हालत बिगड़ते देख शिक्षकों और ग्रामीणों की मदद से सभी प्रभावित बच्चों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जालबांधा ले जाया गया, जहां चिकित्सकों की टीम द्वारा उनका उपचार किया जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, चार बच्चों पर जहरीले पदार्थ का असर अधिक पाया गया है, जबकि शेष बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। एक बच्चे की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे खैरागढ़ रेफर किया गया है।
    इस पूरे मामले पर शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया भी सवालों के घेरे में है। जिला शिक्षा अधिकारी लालजी द्विवेदी ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है और वे पूरे मामले की जानकारी एकत्र कर रहे हैं। वहीं, स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल परिसर और आसपास जहरीले पौधों की मौजूदगी स्पष्ट लापरवाही को दर्शाती है। उन्होंने स्कूल परिसर से सभी जहरीले पौधों को तत्काल हटाने, जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
    इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि विद्यालय परिसर की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की होती है। नियमित निरीक्षण, साफ-सफाई, खतरनाक पौधों की पहचान और उन्हें हटाने की जिम्मेदारी संबंधित प्रधानपाठक, संकुल समन्वयक, शिक्षा विभाग के अधिकारियों और ग्राम पंचायत की होनी चाहिए थी, जो इस मामले में गंभीर रूप से नजरअंदाज होती दिख रही है।
    इस पूरे प्रकरण को देखते हुए अपेक्षा की जा रही है कि स्कूल शिक्षा मंत्री इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी करें। स्कूल शिक्षा मंत्री को चाहिए कि वे
    — शिक्षा विभाग को सभी स्कूल परिसरों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दें,
    — स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मामलों के लिए स्कूलों में तत्काल चिकित्सा प्रतिक्रिया प्रणाली मजबूत करने को कहें,
    — पंचायत एवं नगरीय प्रशासन विभाग को स्कूलों के आसपास मौजूद जहरीले पौधों और खतरनाक वनस्पतियों को हटाने की जिम्मेदारी सौंपें,
    — तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

    यह घटना केवल एक स्कूल तक सीमित मामला नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चेतावनी है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसे हादसे और भी गंभीर रूप ले सकते हैं।

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