August 03, 2026
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    जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास का संकल्प, संस्कृति-परंपराओं के संरक्षण के साथ आगे बढ़ रही सरकार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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       कोरबा । शौर्यपथ । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कोरबा जिले के महर्षि वाल्मीकि आश्रम, आईटीआई रामपुर में आयोजित गौरा पूजा महोत्सव एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने गौरा-गौरी पूजन और बैगा पुजारी सम्मेलन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनजातीय समाज का गौरवशाली इतिहास, विशिष्ट संस्कृति और समृद्ध परंपराएं रही हैं। बैगा और पुजेरी समाज आज भी इन परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
    मुख्यमंत्री ने आईटीआई चौक से बालको रोड का नाम ‘जनजातीय गौरव पथ’ रखने तथा मार्ग के प्रारंभिक बिंदु पर जनजातीय महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन इसलिए किया गया ताकि जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। जनजातीय समाज के सम्मान और उत्थान के लिए 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया गया है तथा धरती आबा उत्कर्ष योजना और पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के प्रयास किए जा रहे हैं।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आसीन हैं और छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री भी एक साधारण किसान परिवार से आने वाला जनजातीय समाज का बेटा है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के लिए 80 हजार करोड़ रुपये तथा पीएम जनमन योजना के लिए 24 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे प्रदेश के 6,691 गांव लाभान्वित हो रहे हैं। पहाड़ी कोरवा, बिरहोर सहित अन्य पीवीटीजी समुदायों के उत्थान के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। आदिवासी अंचलों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।
    मुख्यमंत्री ने अपने जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने स्वयं वनवासी कल्याण आश्रम में कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया है। उन्होंने बताया कि जनजातीय समाज आदिकाल से भगवान गौरागौरी के रूप में शिव-पार्वती का उपासक रहा है। जनजातीय महापुरुषों के योगदान को सहेजने और नई पीढ़ी को उनसे परिचित कराने के उद्देश्य से नवा रायपुर में डिजिटल जनजातीय संग्रहालय स्थापित किया गया है, जहां उनके जीवन और संघर्षों का सचित्र वर्णन किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए बैगा, गुनिया और सिरहा को प्रतिवर्ष 5,000 रुपये की सम्मान निधि दी जा रही है। सरना स्थलों के संरक्षण से न केवल सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित होगी, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

    सम्मेलन को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। जिले के प्राचीन देवी-देवताओं के स्थलों को विकसित कर पर्यटन के रूप में नई पहचान दी जा रही है।
    कार्यक्रम में कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी पनतराम भगत एवं बीरबल सिंह, महापौर संजू देवी राजपूत, पूर्व मंत्री ननकी राम कंवर, जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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