August 03, 2026
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    किसानों और ग्रामीण अंचलों के लिए आकाशवाणी आज भी विशेष भूमिका निभा रहा है: मुख्यमंत्री साय

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    विश्व रेडियो दिवस पर रायपुर में राष्ट्रीय स्तर का विशेष आयोजन; आकाशवाणी और यूनेस्को ने 'रेडियो और एआईÓ थीम पर साझा किया भविष्य का रोडमैप
    रायपुर / शौर्यपथ / विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आकाशवाणी और यूनेस्को द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राष्ट्रीय स्तर के एक विशेष कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस गरिमामय समारोह का उद्घाटन किया। इस वर्ष विश्व रेडियो दिवस की थीम 'रेडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसÓ (्रढ्ढ) रखी गई है, जो सूचना क्रांति के इस दौर में रेडियो की प्रासंगिकता और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर रेडियो की विश्वसनीयता और एआई की गति के संगम को जनसेवा के लिए एक नई क्रांति बताया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आकाशवाणी सूचना, शिक्षा और स्वस्थ मनोरंजन देने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचलों और किसानों के जीवन में रेडियो की भूमिका आज भी अद्वितीय है। श्री साय ने जोर देकर कहा कि तेज गति से समाचार देने की प्रतिस्पर्धा के बीच आकाशवाणी ने विश्वसनीय, संतुलित और जनहितकारी सूचना देने की अपनी परंपरा को कायम रखते हुए एक विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने एआई के उपयोग पर चिंतन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में एफ.एम. ट्रांसमीटरों के विस्तार से जल्द ही राज्य की करीब 95 प्रतिशत आबादी तक आकाशवाणी की पहुंच सुनिश्चित हो जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बातÓ जैसे लोकप्रिय कार्यक्रम के लिए रेडियो का चयन इसकी व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है।

    आकाशवाणी के महानिदेशक श्री राजीव जैन ने स्वागत भाषण देते हुए रेडियो को समाज के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि रेडियो ने न सिर्फ देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोया है, बल्कि देश की प्रगति में समाज के सभी वर्गों को जोड़ा है। श्री जैन ने जानकारी दी कि 23 भाषाओं और 182 बोलियों के माध्यम से आकाशवाणी देश के दूरदराज के हिस्सों को मुख्यधारा से जोडऩे का प्रयास कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलती तकनीक के साथ आकाशवाणी भी खुद को ढाल रहा है और अब एआई का उपयोग इस तरह किया जाएगा कि इसकी विश्वसनीयता और श्रोताओं के साथ आत्मीय रिश्ता निरंतर बना रहे।

    समारोह के दौरान यूनेस्को की क्षेत्रीय संचार और सूचना सलाहकार सुश्री हज्जाज माले ने भी रेडियो की व्यापक पहुंच और विश्वसनीयता की सराहना की। कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष स्मारक श्रृंखला 'स्वाधीनता का जयघोषÓ के अंतर्गत छह संगीत प्रस्तुतियों का डिजिटल विमोचन रहा। इस अवसर पर रेडियो की विकास यात्रा पर आधारित एक प्रदर्शनी भी लगाई गई और विशेषज्ञों द्वारा एआई के प्रभावी उपयोग पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ विशेषज्ञों ने भविष्य की संचार चुनौतियों और रेडियो की भूमिका पर मंथन किया।

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