August 01, 2026
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    अंबिकापुर अग्निकांड: गंभीर धाराएं न लगाने पर उठे सवाल, आईजी ने मांगा जवाब — 7 दिन में स्पष्टीकरण तलब Featured

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    अंबिकापुर/शौर्यपथ। शहर के बीचों-बीच स्थित एक अवैध पटाखा गोदाम में लगी भीषण आग के मामले ने अब प्रशासनिक और पुलिसीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक स्तर पर दर्ज अपराध में अपेक्षित गंभीर धाराएं नहीं जोड़े जाने को लेकर सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) ने सख्त रुख अपनाया है और इस संबंध में एसएसपी सरगुजा से जवाब तलब किया है।

    प्राप्त आधिकारिक पत्र के अनुसार, थाना अंबिकापुर में दर्ज अपराध क्रमांक 259/2026 (धारा 125, 270, 287 बीएनएस) के प्रकरण में प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ है कि 23 अप्रैल 2026 को ब्रह्मपारा क्षेत्र में एक रिहायशी इलाके में अवैध रूप से भारी मात्रा में पटाखों का भंडारण किया गया था। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए कथित तौर पर वेल्डिंग कार्य के दौरान उठी चिंगारी से विस्फोटक सामग्री में आग लगी, जिससे आसपास के मकानों और लोगों को भारी नुकसान पहुंचा।

    गंभीर धाराएं क्यों नहीं जोड़ी गईं?

    आईजी कार्यालय ने अपने पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया है कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 324, 326(छ) के साथ-साथ विस्फोटक अधिनियम, 1984 की धारा 9(ख) भी प्रथम दृष्टया लागू होती है। इसके बावजूद प्रारंभिक कार्रवाई में इन धाराओं को शामिल नहीं किया गया, जिसे लापरवाही माना जा रहा है।

    थाना प्रभारी पर भी सवाल

    पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रकरण की विवेचना और धाराएं जोड़ने में थाना स्तर पर गंभीर चूक हुई है, जो कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही को दर्शाती है। आईजी ने निर्देश दिए हैं कि:

    संबंधित थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण लिया जाए

    विवेचक की भूमिका की समीक्षा की जाए

    7 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब आईजी कार्यालय को भेजा जाए

    साथ ही, प्रकरण में आवश्यक धाराएं जोड़कर आगे की विवेचना सुनिश्चित की जाए

    जनता में आक्रोश, उठ रहे बड़े सवाल

    अंबिकापुर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में पटाखों का अवैध भंडारण और उसके बाद हुई इतनी बड़ी घटना ने आम नागरिकों में भय और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि:

    यदि समय रहते सख्त कार्रवाई होती तो इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी

    प्रारंभिक FIR में हल्की धाराएं लगाना पुलिस की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है

    प्रशासनिक सख्ती के संकेत

    आईजी का यह पत्र न केवल इस मामले में जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि उच्च स्तर पर अब लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि:

    किन अधिकारियों पर कार्रवाई होती है

    क्या प्रकरण में नई धाराएं जोड़कर गिरफ्तारी या अन्य सख्त कदम उठाए जाते हैं

    निष्कर्ष

    अंबिकापुर अग्निकांड अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और पुलिस की कार्यशैली की परीक्षा बन गया है। आईजी के हस्तक्षेप के बाद यह मामला नई दिशा में बढ़ता दिख रहा है, जिससे कई जिम्मेदारों की भूमिका पर से पर्दा उठ सकता है।

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