August 03, 2026
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    “‘लोगों को सुनें, सुनाएं नहीं’: मुख्यमंत्री साय का सख्त संदेश—शालीनता और संवेदनशीलता से ही बनेगा सुशासन” Featured

    • rounak group

    रायपुर, शौर्यपथ।
    छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को स्पष्ट और दो टूक संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि आम जनता के साथ शालीन, धैर्यपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार ही एक सच्चे प्रशासनिक अधिकारी की पहचान होनी चाहिए।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका व्यवहार सीधे तौर पर सरकार की छवि को प्रभावित करता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा—“लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं।” उनका स्पष्ट मत है कि संवाद तभी सार्थक होता है, जब उसमें संवेदना हो और समाधान की नीयत झलकती हो।
    जनसमस्याओं के समाधान पर हो फोकस
    मुख्यमंत्री साय ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जनसमस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया को सरल, प्रभावी और भरोसेमंद बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जब कोई नागरिक शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह अनुभव होना चाहिए कि उसकी बात गंभीरता से सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार हो रहा है। यही अनुभव शासन के प्रति विश्वास को मजबूत करता है।
    जमीनी स्तर पर सक्रियता जरूरी
    उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और लोगों से सीधे संवाद स्थापित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अनुभव से मापी जाती है। इसलिए प्रशासन को लोगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप काम करना चाहिए।
    पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही सरकार की सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ व्यवहार में विनम्रता भी जरूरी है।
    सुशासन तिहार में होगी व्यवहार की भी परीक्षा
    मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया कि “सुशासन तिहार 2026” के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण करेंगे। इस दौरान अधिकारियों के कार्य के साथ-साथ उनके व्यवहार और संवेदनशीलता का भी आकलन किया जाएगा।
    उल्लेखनीय है कि 1 मई से 10 जून तक आयोजित इस अभियान के तहत प्रदेशभर में समाधान शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां पंचायत और वार्ड स्तर पर आमजन की समस्याओं के आवेदन लेकर उनका त्वरित निराकरण किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी और मुख्यमंत्री के सीधे निरीक्षण के चलते इस अभियान को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
    मुख्यमंत्री का यह संदेश केवल निर्देश नहीं, बल्कि प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का संकेत है—जहां सुशासन का आधार केवल योजनाएं नहीं, बल्कि संवेदनशील व्यवहार और जनता के प्रति सम्मान होगा।

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