August 01, 2026
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    डौंडीलोहारा में खुलेआम 'हरियाली का कत्ल' : प्रतिबंधित अर्जुन के लट्ठों का अंबार, ट्रैक्टर से ढो रहे तस्कर, सो रहा राजस्व एवं वन विभाग

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    बालोद शौर्यपथ
    संवाददाता लोकेश कुमार साहू

      बालोद - डौंडीलोहारा विकासखंड के भंवरमरा, कंमकापार, अरजपूरी, रेंगाडबरी, देवरी के आस-पास भरनाभाट, रीवागहन, आलीवारा, सुरसुरी, फरदफोड, घीना, सुरेगाँव, भीमकंहार में पंचायत के द्वारा भी पेड़ों को लकड़ी ठेकेदारों को बेचा जा रहा है क्षेत्र में पर्यावरण की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं और जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। खुले मैदान में प्रतिबंधित अर्जुन वृक्ष की लकड़ी का जखीरा पड़ा है, मानो तस्करों ने वन विभाग और राजस्व विभाग को खुली चुनौती दे दी हो।
    कैमरे में कैद तस्वीरें चीख-चीख कर गवाही दे रही हैं - भरानाभाट और रीवागहन के इलाके में दर्जनों की संख्या में कटे हुए कीमती अर्जुन के लट्ठे बेखौफ डंप किए गए हैं। हैरानी की बात ये है कि भंवरमरा, कंमकापार, अरजपूरी से लेकर देवरी तक के जगहों से लकड़ी तस्कर दिनदहाड़े ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादकर इस प्रतिबंधित लकड़ी का परिवहन कर रहे हैं। ना कोई रोकने वाला, ना कोई टोकने वाला।

    ये वही अर्जुन वृक्ष है जिसे छत्तीसगढ़ वन अधिनियम में 'प्रतिबंधित' श्रेणी में रखा गया है। इसकी एक टहनी काटना भी गैर-कानूनी है, यहाँ तो रेंगाडबरी-देवरी बेल्ट में पूरा जंगल साफ कर दिया गया और अब ट्रैक्टर भर-भर कर माल पार किया जा रहा है।

    दोनों विभाग कटघरे में जबकि रेंगाडबरी और माटरी मोड दोनों स्थानों पर वन विभाग का बेरियल होने के बाद भी आराम से लकड़ी से लदा हुआ ट्रैक्टर पार हो जाता है।
    सवाल सीधा है - डौंडीलोहारा ब्लॉक में इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित और बिना अनुमति के लकड़ी खुले आम रोजाना निकल जाते हैं, और खुले आसमान के नीचे कैसे पहुंची और ट्रैक्टर से कैसे ढोई जा रही है?

    1. वन विभाग की नाकामी: अरजपूरी-कंमकापार रेंज में बिना वन विभाग की TP यानी ट्रांजिट परमिट के लकड़ी का एक लट्ठा भी नहीं हिल सकता। फिर ट्रैक्टरों में भरकर अर्जुन वृक्ष एवं अन्य दूसरे प्रजाति की लकड़ी भंवरमरा से भरानाभाट तक कैसे दौड़ रही है? क्या डौंडीलोहारा रेंज के बीट गार्ड से लेकर रेंजर तक सबकी मिलीभगत है?
    2. राजस्व विभाग की लापरवाही: रीवागहन, भरानाभाट की राजस्व जमीन पर खड़े पेड़ काटने के लिए तहसीलदार की अनुमति जरूरी है। क्या पटवारी-RI ने आंखें बंद कर लीं? या फिर 'नजराना' लेकर देवरी-रेंगाडबरी मार्ग से ट्रैक्टरों को हरी झंडी दे दी गई?

    स्थानीय ग्रामीणों का फूटा गुस्सा - "ये कोई पहली घटना नहीं है। डौंडीलोहारा के इन गांवों में महीनों से अवैध कटाई और ट्रैक्टर से ढुलाई का खेल चल रहा है। मुख्य सड़क से ट्रैक्टर गुजरते हैं, सब देखते हैं, पर विभाग को नहीं दिखता। शिकायत करो तो फाइल दबा दी जाती है। विभागों की ये उदासीनता नहीं, खुली सांठगांठ है।"

    औषधीय खजाने की लूट
    अर्जुन सिर्फ पेड़ नहीं, आयुर्वेद का खजाना है। हार्ट के मरीजों के लिए संजीवनी माने जाने वाले इस पेड़ को तस्कर चंद रुपयों के लिए भंवरमरा-कंमकापार के जंगलों से काट रहे हैं और ट्रैक्टर से बेच रहे हैं। पर्यावरण को हो रहे नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

    जनता की मांग - अब सिर्फ कार्रवाई नहीं, जवाबदेही तय हो
    ग्रामीणों ने दो टूक कहा है:
    1. वन विभाग तत्काल FIR दर्ज कर डौंडीलोहारा के तस्कर गिरोह और ट्रैक्टर मालिकों को बेनकाब करे।
    2. राजस्व विभाग बताए कि भरानाभाट, रीवागहन की जमीन पर ये 'लकड़ी का पहाड़' कैसे खड़ा हुआ और ट्रैक्टर कैसे चल रहे हैं?
    3. भंवरमरा, अरजपूरी, देवरी बीट के लापरवाह अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई हो। जिन रास्तों से ट्रैक्टर निकले, वहाँ के बीट गार्ड और कोटवार से जवाब तलब हो।

    डौंडीलोहारा क्षेत्र में ट्रैक्टर जब्त कर ठोस कार्रवाई करें। अब देखना है कि खबर छपने के बाद भी विभागों की नींद टूटती है या फिर 'सब चलता है' की तर्ज पर ट्रैक्टर से हरियाली का कत्लेआम चलता रहेगा।

     

    डौंडीलोहारा से लोकेश कुमार साहू की खास रिपोर्ट

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