October 27, 2026
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    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर दशहरा को बताया छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव और सामूहिक आस्था का प्रतीक

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    जगदलपुर में राष्ट्रपति का संदेश—जनजातीय समाज की प्रकृति-पोषक जीवनशैली से सीखें; समावेशी विकास और विकसित भारत के लक्ष्य पर दिया जोर

    जगदलपुर। शौर्यपथ। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बस्तर दशहरा के अवसर पर जगदलपुर में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, जनजातीय समाज की प्रकृति के प्रति संवेदनशील जीवनशैली और सामूहिक सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय की प्रकृति-पोषक जीवन पद्धति से सभी को मूल्यवान शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए।

    राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बस्तर दशहरा को छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव और सामूहिक आस्था का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस उत्सव में समाज के विभिन्न वर्गों की व्यापक सहभागिता और लोगों को आत्मीयता से जोड़ने वाले अनुष्ठान इसे विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है।

    जनजातीय जीवनशैली में प्रकृति संरक्षण का संदेश

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय प्रकृति को जीवनदायिनी मानते हुए उसकी पूजा और संरक्षण की परंपरा का पालन करते हैं। विकास की यात्रा में समाज को इस जीवन पद्धति से उपयोगी सीख लेनी चाहिए। उन्होंने प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विकास के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी आवश्यक है।

    उनका संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। जनजातीय समाज की पारंपरिक जीवनशैली प्राकृतिक संसाधनों के महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता को समझने का अवसर प्रदान करती है।

    नक्सलवाद से आगे बढ़ते बस्तर में विकास की उम्मीद

    राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आए हैं और बस्तर अब प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने और उन्हें बाजार से जोड़ने की पहलों पर प्रसन्नता व्यक्त की। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि ऐसे प्रयास जनजातीय समुदायों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और समतामूलक एवं समावेशी विकास को गति देने में सहायक होंगे। उन्होंने इन पहलों को वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से भी जोड़ा।

    मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन, मुरिया दरबार में संवाद

    सार्वजनिक कार्यक्रम से पहले राष्ट्रपति ने जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने मुरिया दरबार में स्थानीय मांझी और चालकी समुदाय के प्रतिनिधियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और जनजातीय समाज से जुड़े लोगों के साथ संवाद किया।

    राष्ट्रपति ने जगदलपुर में आयोजित रंगोली और दशहरा प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। बस्तर दशहरा के अवसर पर उनका यह दौरा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं, प्रकृति संरक्षण और समावेशी विकास के महत्व को रेखांकित करने वाला रहा।

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