September 13, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    टूरिज्म बोर्ड के रोड शो में 130 से अधिक टूर ऑपरेटरों की भागीदारी, तमिल भाषा में पहली बार हुआ छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का प्रभावी प्रस्तुतीकरण

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के पर्यटन को दक्षिण भारत के बड़े पर्यटन बाजार से जोड़ने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। फिक्की के सहयोग से चेन्नई में आयोजित “छत्तीसगढ़ टूरिज्म रोड शो” में 130 से अधिक ट्रैवल एजेंट एवं टूर ऑपरेटरों ने भाग लिया। B2B बैठकों में छत्तीसगढ़ और चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों के बीच सीधे संवाद से पर्यटक समूहों को छत्तीसगढ़ लाने और कारोबारी साझेदारी बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुईं।

    रोड शो में छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थल, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन उत्पाद और निवेश की संभावनाएं चेन्नई के पर्यटन कारोबारियों के सामने प्रस्तुत की गईं। आयोजन में मिले उत्साहजनक रिस्पॉन्स ने दक्षिण भारतीय बाजार में छत्तीसगढ़ पर्यटन के लिए नए अवसरों की उम्मीद जगाई है।

    तमिल भाषा में पहली बार पर्यटन का प्रभावी प्रस्तुतीकरण

    रोड शो का सबसे खास आकर्षण रहा छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का पहली बार तमिल भाषा में प्रस्तुतीकरण। स्थानीय भाषा में जानकारी दिए जाने से चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों और संभावित पर्यटकों के साथ बेहतर भावनात्मक जुड़ाव बनाने की पहल को मजबूती मिली।

    पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन (आईएएस) ने तमिल और अंग्रेजी में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं विरासत संपदा की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पर्यटन संपदा को देश के प्रमुख पर्यटन बाजारों से जोड़ने पर जोर दिया।

    नीलू शर्मा ने किया पर्यटन कारोबारियों को प्रोत्साहित

    कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों को छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं से जोड़ने और राज्य में पर्यटक गतिविधियों को बढ़ाने की दिशा में सहयोग का आह्वान किया।

    टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे (आईएएस) ने छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों, पर्यटन उत्पादों और राज्य में उपलब्ध निवेश संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

    व्यापारिक साझेदारी के साथ दिखी सांस्कृतिक आत्मीयता

    रोड शो में छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के.सी. देवासेनापति और एलेक्स पॉल मेनन, जो वर्तमान में चेन्नई में पदस्थ हैं, विशेष रूप से शामिल हुए। दोनों अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ से अपने आत्मीय जुड़ाव और राज्य की पर्यटन संभावनाओं पर विचार साझा किए। उनकी मौजूदगी ने आयोजन को भावनात्मक और सांस्कृतिक आयाम भी दिया।

    कार्यक्रम में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की सहायक निदेशक एस. पद्मावती, फिक्की छत्तीसगढ़ टूरिज्म कमेटी के चेयरपर्सन एवं फिक्की छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष जसप्रीत सिंह भाटिया, फिक्की तमिलनाडु स्टेट काउंसिल के को-कन्वीनर श्रीहरन बालन तथा तमिलनाडु पर्यटन के निदेशक डॉ. वी.पी. जयसीलन (आईएएस) सहित पर्यटन क्षेत्र के अनेक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

    B2B बैठक से नए कारोबारी अवसरों की उम्मीद

    रोड शो में हुई B2B बैठकों ने दोनों राज्यों के पर्यटन कारोबारियों को संभावित व्यावसायिक सहयोग, पर्यटक समूहों के आवागमन तथा पर्यटन उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए सीधा मंच उपलब्ध कराया। इससे दक्षिण भारतीय बाजार में छत्तीसगढ़ के पर्यटन को नई पहचान मिलने के साथ पर्यटन कारोबार में नए अवसर पैदा होने की उम्मीद बढ़ी है।

    चेन्नई रोड शो ने यह भी संकेत दिया कि छत्तीसगढ़ अब केवल घरेलू पर्यटन बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि देश के प्रमुख पर्यटन बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में रणनीतिक विस्तार कर रहा है। आयोजन पर्यटन प्रचार से आगे बढ़कर छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु के बीच पर्यटन, व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया।

    मितानिन बहनें छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र की मजबूत और महत्वपूर्ण कड़ी: श्री राजेश अग्रवाल

    रायपुर । छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मितानिन बहनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे स्वास्थ्य तंत्र और ग्रामीण समुदाय के बीच मजबूत कड़ी के रूप में कार्य करते हुए लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। मितानिन बहनें हमारे छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र की मजबूत और महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। यह बात पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कही।

    विधानसभा अंबिकापुर अंतर्गत विकासखंड उदयपुर के रामगढ़ में आज मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने मितानिन बहनों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने मितानिन बहनों से आत्मीय चर्चा कर उनके कार्यों, अनुभवों, समस्याओं और आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने में उनके योगदान को सराहा।

    ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में मितानिनों की अहम भूमिका

    मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने और लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मितानिन बहनें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे गांव-गांव में लोगों के साथ सीधे संपर्क में रहती हैं और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर समुदाय के बीच जागरूकता का कार्य करती हैं।

    उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत बनाने में जमीनी स्तर पर कार्य करने वाली मितानिन बहनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उनकी सक्रियता और सेवाभाव के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सेवाओं का लाभ अधिक लोगों तक पहुंच रहा है।

    आत्मीय संवाद में सुनी समस्याएं और आवश्यकताएं

    रामगढ़ में आयोजित संवाद के दौरान मंत्री श्री अग्रवाल ने मितानिन बहनों से सीधे बातचीत की और उनके कार्यों से जुड़े अनुभवों को जाना। उन्होंने उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना तथा उनके कार्यों और सेवाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की।

    मंत्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर सेवा देने वाली मितानिन बहनों के अनुभव और सुझाव महत्वपूर्ण हैं। उनके साथ संवाद के माध्यम से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े वास्तविक अनुभवों और आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलता है।

    सेवा, समर्पण और योगदान को किया नमन

    श्री राजेश अग्रवाल ने मितानिन बहनों की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि वे कठिन परिस्थितियों में भी ग्रामीण समुदाय के साथ निरंतर जुड़ी रहती हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनका सेवा भाव, समर्पण और जमीनी योगदान सराहनीय है।
    उन्होंने कहा कि मितानिन बहनों का कार्य केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ग्रामीण परिवारों के बीच विश्वास और जागरूकता का माध्यम भी बनती हैं। मंत्री ने उनके सेवा और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि स्वस्थ और जागरूक छत्तीसगढ़ के निर्माण में मितानिन बहनों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रहेगी।

    पीडब्ल्यूडी सचिव मुकेश बंसल ने पुल-पुलियों और राष्ट्रीय राजमार्गों की समीक्षा कर अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

    रायपुर / शौर्यपथ / बरसात खत्म होते ही प्रदेश में निर्माणाधीन पुल-पुलियों और राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों को युद्धस्तर पर गति देने की तैयारी शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अक्टूबर में प्रदेश के हर निर्माणाधीन स्थल पर काम होता हुआ दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सभी निर्माणाधीन कार्यों का एक सप्ताह के भीतर ठेकेदारों के साथ स्थल निरीक्षण कर कार्य शुरू करने की अग्रिम तैयारी पूरी करने को कहा।

    नवा रायपुर स्थित पीडब्ल्यूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आयोजित समीक्षा बैठक में सचिव ने वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के प्राथमिकता वाले कार्यों के प्राक्कलन 20 सितंबर तक जमा करने के निर्देश दिए। बारिश से क्षतिग्रस्त पुलों की मरम्मत के साथ रेलिंग एवं दीवारों की पेंटिंग का काम 30 नवंबर तक पूरा करने को कहा।

    सप्ताह में दो दिन साइट पर पहुंचें अधिकारी

    सचिव बंसल ने कार्यपालन अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं को सप्ताह में कम से कम दो दिन निर्माण स्थलों का अनिवार्य निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। धीमी गति से काम करने अथवा लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।

    उन्होंने कार्यपालन अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों को बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ने तथा अपने कार्यक्षेत्र में रहकर निर्माण स्थलों की समस्याओं का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने को कहा।

    नवंबर तक निविदा, जनवरी तक शुरू हों नए काम

    मुकेश बंसल ने नए कार्यों की निविदा प्रक्रिया नवंबर तक पूरी करने और जनवरी तक हर हाल में कार्य प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों को समय पर ले-आउट, ड्राइंग-डिजाइन और कार्यस्थल उपलब्ध कराने तथा निर्माण में आ रही बाधाओं का तत्काल समाधान करने को कहा। कार्यों की नियमित और गंभीर मॉनिटरिंग पर भी जोर दिया गया।

    हर माह भुगतान, तीन माह में अनुबंध क्लोज

    निर्माण कार्यों की गति प्रभावित न हो, इसके लिए ठेकेदारों को हर महीने भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कार्य पूर्ण होने के बाद तीन माह के भीतर दस्तावेजी प्रक्रिया एवं भुगतान पूरा कर अनुबंध क्लोज करने को कहा गया।

    10 सितंबर तक गतिशक्ति पोर्टल पर अपलोड हो जानकारी

    सचिव ने भारत सरकार के गतिशक्ति पोर्टल पर प्रदेश के सभी पुल-पुलियों की जानकारी 10 सितंबर तक अपलोड करने के निर्देश दिए। निर्धारित समय में जानकारी अपलोड नहीं करने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने को कहा गया।

    उन्होंने CPGRAMS और सीएम हेल्पलाइन से प्राप्त शिकायतों एवं मांगों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण करने तथा न्यायालयीन मामलों, अनुकंपा नियुक्ति और पेंशन प्रकरणों की हर माह समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।

    एनएचएआई और केंद्र के साथ बेहतर समन्वय पर जोर

    बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र और एनएचएआई के अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सचिव बंसल ने एनएचएआई तथा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाने को कहा।

    उन्होंने रायपुर एमएमआई चौक से शदाणी दरबार खंड, बेमेतरा बायपास, कोंडागांव-नारायणपुर राष्ट्रीय राजमार्ग खंड तथा रतनपुर-पेंड्रा रोड राष्ट्रीय राजमार्ग के कार्यों को अगले वर्ष मार्च तक पूरा करने के निर्देश दिए।

    बैठक में लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, अपर सचिव एस.एन. श्रीवास्तव, सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता एस.के. कोरी, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता ज्ञानेश्वर कश्यप सहित दोनों परिक्षेत्रों के अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी और एनएचएआई के अधिकारी उपस्थित रहे।

    प्रदेशभर में मदिरा दुकानें, बार, होटल-बार और क्लब रहेंगे बंद
    अवैध मदिरा के परिवहन और विक्रय पर कड़ी निगरानी, जांच दल करेंगे कार्रवाई

    रायपुर / राज्य शासन ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को संपूर्ण छत्तीसगढ़ में ‘शुष्क दिवस’ घोषित किया है। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने कहा गया है।

    जारी आदेश के अनुसार शुष्क दिवस के दौरान प्रदेश की समस्त देशी एवं विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानें बंद रहेंगी। इसके साथ ही रेस्टोरेंट बार, होटल-बार, क्लब, अहाता तथा मदिरा बेचने अथवा परोसने वाले सभी प्रकार के लाइसेंसी प्रतिष्ठानों को भी बंद रखा जाएगा। भांग एवं भांगघोटा की फुटकर दुकानें भी इस दिन बंद रहेंगी।

    राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि शुष्क दिवस के दौरान किसी भी होटल, रेस्टोरेंट, क्लब अथवा अन्य प्रतिष्ठान या व्यक्ति को मदिरा बेचने और परोसने की अनुमति नहीं होगी। गैरमालिकाना क्लबों, रेस्टोरेंट और स्टार होटलों पर भी यह प्रतिबंध समान रूप से लागू रहेगा।

    शुष्क दिवस की अवधि में मदिरा के व्यक्तिगत भंडारण तथा गैर-लाइसेंसी परिसरों में मदिरा के भंडारण पर भी सख्ती से रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर मदिरा जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    अवैध मदिरा के परिवहन, संग्रहण और विक्रय की रोकथाम के लिए जिला कार्यालयों के साथ संभागीय एवं राज्य स्तरीय उड़नदस्तों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जांच दल गठित कर अवैध मदिरा के संभावित संग्रहण स्थलों और संदिग्ध वाहनों की जांच की जाएगी तथा दोषियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

    एम्स रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का बड़ा बयान—छत्तीसगढ़ अतीत के अंधकार से निकलकर विकास के नए युग की ओर अग्रसर

    रायपुर / शौर्यपथ / अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अब अतीत के अंधकार से निकलकर समृद्धि, विकास और प्रगति के नए युग की ओर बढ़ रहा है।

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का भी क्षण है। आज विद्यार्थियों को डिग्री मिल रही है, लेकिन कल उन्हें इससे भी बड़ी जिम्मेदारी—भारत की जनता के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की जिम्मेदारी—सौंपी जाएगी। समारोह में कुल 689 विद्यार्थियों को डिग्री प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जिनमें 376 महिलाएं और 313 पुरुष शामिल हैं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 16 विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

    “जिन इलाकों की पहचान हिंसा से थी, अब वहां विकास की चर्चा”

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2012 में स्थापना के बाद एम्स रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान की क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कम समय में यह छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों के लिए प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र बनकर उभरा है और ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचा रहा है।

    उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, कमजोर आवागमन और वामपंथी उग्रवाद ने लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में विकास की राह रोकी। भय और हिंसा के कारण सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार प्रभावित हुआ। आज परिस्थितियां बदल रही हैं। जिन क्षेत्रों को कभी हिंसा के लिए जाना जाता था, वे अब सड़क, स्कूल, अस्पताल, कनेक्टिविटी, निवेश और अवसरों के लिए पहचाने जा रहे हैं।

    उन्होंने इस बदलाव का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व को दिया।

    एम्स रायपुर में तेजी से सुलभ हो रही उन्नत चिकित्सा

    उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को नए छत्तीसगढ़ का उत्कृष्ट प्रतीक बताते हुए संस्थान की चिकित्सा उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में हुए पहले किडनी प्रत्यारोपण, किडनी ट्रांसप्लांट में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर, कॉर्नियल एवं कान प्रत्यारोपण जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

    उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर का विकास यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ किस तरह स्वास्थ्य, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।

    उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

    उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत के लक्ष्य के लिए संतुलित विकास को आवश्यक बताते हुए कहा कि प्रत्येक राज्य, जिला और गांव का विकास जरूरी है। उन्होंने उच्च शिक्षा को विकसित भारत की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन 1.57 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया। यह 42.2 प्रतिशत वृद्धि है।

    उन्होंने युवा चिकित्सकों से नशे को दृढ़ता से ना कहने और ऐसा भारत बनाने में योगदान देने का आह्वान किया, जहां तकनीक प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे और हर युवा बेहतर भविष्य का सपना देख सके। उन्होंने कहा—“आपका ज्ञान स्वास्थ्य प्रदान करे, आपका शोध नवाचार लाए और आपकी सेवा प्रेरणा बने।”

    राज्यपाल ने कहा—चिकित्सक के लिए करुणा और नैतिकता भी जरूरी

    राज्यपाल रमेन डेका ने नव-स्नातक चिकित्सकों को बधाई देते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल ज्ञान और कौशल तक सीमित नहीं है। इसमें धैर्य, करुणा और जिम्मेदारी की भावना भी जरूरी है। चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य मानवता की सेवा है और चिकित्सक की श्रेष्ठता केवल उसकी पेशेवर दक्षता से नहीं, बल्कि मरीज के साथ उसके व्यवहार, विश्वास और सम्मान से भी निर्धारित होती है।

    उन्होंने युवा चिकित्सकों से स्वास्थ्य सेवाओं के विकास, चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर की बढ़ती प्रतिष्ठा छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।

    केंद्रीय राज्यमंत्री ने सेवा और नैतिकता को दी प्राथमिकता

    केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए आयुष्मान भारत, PM-JAY, ABHA और e-Sanjeevani जैसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने युवा डॉक्टरों से चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ करुणा, नैतिकता, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, शोध और समाज सेवा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

    एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने संस्थान की प्रगति और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए चिकित्सा शिक्षा, शोध, नवाचार और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं में उच्च मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    689 डिग्रियां, 16 मेधावियों को पुरस्कार

    दीक्षांत समारोह में विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों के सफल विद्यार्थियों को 689 डिग्री प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले 16 विद्यार्थियों को पुरस्कार दिए गए। समारोह में विद्यार्थियों को “नशे को ना कहें” की शपथ भी दिलाई गई।

    इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, एम्स रायपुर अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा, कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल सहित एम्स के चिकित्सक, अधिकारी, शिक्षक, विद्यार्थी और उनके परिजन उपस्थित रहे।

    सहसपुर लोहारा के हिमांशु देवांगन ने 50 एमबीबीएस सीटों वाले मेडिकल कॉलेज के प्रथम सत्र में लिया प्रवेश, जिले के लिए बना गौरव का क्षण

    कवर्धा / शौर्यपथ / कवर्धा मेडिकल कॉलेज के प्रथम सत्र में प्रवेश लेने वाले जिले के पहले छात्र सहसपुर लोहारा निवासी हिमांशु देवांगन को उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने फोन कर बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। खास बात यह है कि कवर्धा मेडिकल कॉलेज में इसी शैक्षणिक सत्र से 50 एमबीबीएस सीटों के साथ चिकित्सा शिक्षा की शुरुआत हो रही है और पहले ही सत्र में प्रवेश पाने वाला विद्यार्थी भी कवर्धा जिले का ही है।

    उप मुख्यमंत्री शर्मा ने हिमांशु से बातचीत के दौरान उसकी स्कूली शिक्षा, नीट की तैयारी और काउंसलिंग प्रक्रिया की जानकारी ली। हिमांशु ने बताया कि उसने कक्षा 12वीं में 83 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं तथा नीट परीक्षा में 512 अंक प्राप्त किए। नीट की तैयारी के लिए उसने भिलाई में कोचिंग भी ली। बातचीत में हिमांशु ने मेडिकल शिक्षा के प्रति अपनी रुचि और भविष्य की योजनाएं भी साझा कीं।

    “मेहनत और अनुशासन से आगे बढ़ें, जिले का नाम रोशन करें”

    उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने हिमांशु का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने छात्र को पूरी लगन, मेहनत और अनुशासन के साथ पढ़ाई करने तथा अपने माता-पिता एवं परिवार के सपनों को पूरा करने के साथ जिले का नाम रोशन करने की शुभकामनाएं दीं।

    उन्होंने कहा कि डॉक्टर के रूप में शिक्षा पूरी करने के बाद अच्छे संस्थानों एवं अस्पतालों में कार्य कर अनुभव हासिल करें। साथ ही अपने क्षेत्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव बनाए रखें। अपनी शिक्षा और अनुभव का उपयोग जरूरतमंदों की सेवा में करने का प्रयास करें, ताकि व्यक्तिगत सफलता का लाभ समाज और स्थानीय लोगों तक भी पहुंच सके।

    विशेष पहल से इसी सत्र में शुरू हुआ मेडिकल कॉलेज

    उल्लेखनीय है कि उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की विशेष पहल से कवर्धा मेडिकल कॉलेज का संचालन इसी शैक्षणिक सत्र से 50 एमबीबीएस सीटों के साथ शुरू हो रहा है। मेडिकल कॉलेज के प्रारंभ होने से कवर्धा और आसपास के विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का नया अवसर मिला है।

    अब जिले के विद्यार्थियों को मेडिकल शिक्षा के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी और अपने क्षेत्र में ही चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। कवर्धा मेडिकल कॉलेज के पहले सत्र में जिले के ही छात्र हिमांशु देवांगन का प्रवेश इस नई शुरुआत को और भी खास बना गया है। कवर्धा में चिकित्सा शिक्षा के नए अध्याय की शुरुआत जिले के प्रतिभावान विद्यार्थी के प्रवेश के साथ होना पूरे जिले के लिए गौरव का विषय है।

    एनएचएआई रायपुर में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत कार्यशाला, अधिकारियों और इंजीनियरों को दिए व्यवहारिक दिशा-निर्देश

    रायपुर / शौर्यपथ / भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर द्वारा सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। “सत्यनिष्ठा से समृद्धि” थीम पर आयोजित कार्यशाला में आचरण नियमों, सतर्कता प्रक्रियाओं और मुख्य तकनीकी परीक्षक (सीटीई) निरीक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    कार्यशाला को संबोधित करते हुए एनएचएआई के मुख्य सतर्कता अधिकारी आशीष नाथ ने कहा कि सतर्कता केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यप्रणाली में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसियों से अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ करने का आह्वान किया।

    मेट्स यूनिवर्सिटी रायपुर के कुलपति प्रो. डॉ. के.पी. यादव ने कार्यस्थल पर नैतिकता, ईमानदारी और जिम्मेदार आचरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की दीर्घकालिक सफलता के लिए व्यावसायिक दक्षता के साथ नैतिक मूल्यों का पालन भी जरूरी है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के सेवानिवृत्त अतिरिक्त महानिदेशक श्याम सुंदर पोरवाल ने अनुशासन, ईमानदारी और जवाबदेही को प्रभावी कार्यप्रणाली का आधार बताया।

    गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता

    एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी रायपुर आलोक कुमार ने कहा कि सड़क एवं राजमार्ग निर्माण जैसे बड़े सार्वजनिक कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता का विशेष महत्व है। इसके लिए प्रोजेक्ट डायरेक्टर, कन्सेशनायर, अथॉरिटी इंजीनियर और कांट्रेक्टर सहित सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय और स्पष्ट जवाबदेही आवश्यक है।

    उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्तर पर निर्धारित प्रक्रियाओं, तकनीकी मानकों और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। सतर्कता जागरूकता से अधिकारियों एवं संबंधित एजेंसियों में दायित्वबोध मजबूत होता है और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है। सतर्कता का उद्देश्य केवल अनियमितताओं को रोकना नहीं, बल्कि ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है, जिसमें ईमानदारी और जवाबदेही के साथ परियोजनाएं समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरी हों।

    शिकायतों के निपटारे और सीटीई निरीक्षण पर भी चर्चा

    कार्यशाला में एनएचएआई मुख्यालय के सतर्कता विभाग द्वारा सतर्कता मामलों की प्रक्रियाओं, शिकायतों के प्रभावी निपटारे तथा मुख्य तकनीकी परीक्षक के निरीक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों एवं इंजीनियरों को सतर्कता संबंधी दिशा-निर्देशों के व्यवहारिक अनुपालन और आवश्यक सावधानियों से भी अवगत कराया गया।

    कार्यशाला में धर्मेंद्र कुमार राघव, जीएम विजिलेंस, एनएचएआई, डॉ. अनिल दीक्षित, ज्वाइंट डायरेक्टर, आईसीएआर, डॉ. अर्जुन कदम, डीएसपी, सीबीआई तथा संजय गौर, डीआईजी, बीएसएफ सहित क्षेत्रीय कार्यालय एवं सभी पीआईयू के अधिकारी-कर्मचारी, अथॉरिटी इंजीनियर्स, टीम लीडर्स, विशेषज्ञ और संबंधित कांट्रेक्टरों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

    मूलभूत सुविधाएं पहली प्राथमिकता; लंबित मामलों और निगम की बदहाल व्यवस्थाओं पर अब नई आयुक्त की नजर

    शौर्यपथ विशेष
    दुर्ग/3 सितंबर। नगर पालिक निगम दुर्ग को गुरुवार को नई आयुक्त के रूप में वर्ष 2020 बैच की आईएएस अधिकारी लीना कोसम मिलीं। दोपहर 1.30 बजे निवर्तमान आयुक्त मोहेंद्र साहू ने उन्हें विधिवत प्रभार सौंपा। कार्यभार संभालते ही लीना कोसम ने निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया और विभागवार संचालित योजनाओं, निर्माण कार्यों तथा लंबित प्रकरणों की स्थिति की जानकारी ली।

    आयुक्त ने स्पष्ट किया कि शहरवासियों तक मूलभूत सुविधाओं की बेहतर उपलब्धता उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि निगम के कामकाज को समझने के साथ शहर की जरूरतों और नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्यों को गति दी जाएगी। उन्होंने कर्मचारियों के वेतन भुगतान, ट्रांसफर, ग्रेच्युटी एवं पेंशन प्रकरणों की स्थिति की जानकारी लेने के साथ स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। विभागवार लंबित कार्यों पर चर्चा करते हुए उन्होंने अधिकारियों से समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने पर जोर दिया। सोमवार को विभागवार विस्तृत समीक्षा बैठक लेने की बात भी उन्होंने कही।

    नई आयुक्त के सामने चुनौतियों की लंबी फेहरिस्त

    लीना कोसम के सामने दुर्ग निगम की जिम्मेदारी ऐसे समय आई है, जब निगम से जुड़े कई संवेदनशील और विवादित मामले जांच तथा कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इनमें निगम की जमीन आवंटन के नाम पर लाखों रुपये की कथित नगद वसूली, विस्थापित वेंडरों को बाजार विभाग के संज्ञान के बिना दोबारा गुमठी आवंटन करने वाले पूर्व प्लेसमेंट अधिकारी मुक्तेश की कार्यप्रणाली की जांच और बुजुर्ग दंपत्ति के मुख्य द्वार पर कब्जा कर खुले शौचालय के मामले की जांच प्रमुख हैं।

    इसके अलावा शासकीय कर्मचारियों और प्लेसमेंट कर्मचारियों को गुमठी आवंटन, बिना निविदा लगातार एक ही संस्था को आश्रय स्थल संचालन दिए जाने, इंदिरा मार्केट की बदहाल व्यवस्था, सुराना कॉलेज के सामने कचरा डंपिंग स्थल, धमधा नाका शासकीय अस्पताल के सामने कचरा स्थल तथा शहर के चौक-चौराहों पर अतिक्रमण जैसे मुद्दे भी नई आयुक्त के लिए बड़ी चुनौती हैं।

    सड़क पर कब्जा कर संचालित राम रसोई को हटाने तथा बस स्टैंड की बेशकीमती शासकीय जमीन पर राम रसोई के कथित नियम विरुद्ध अनुबंध को समाप्त कर जमीन को कब्जामुक्त कराने का मुद्दा भी निगम प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में मौजूद है।

    पदभार के साथ बना नया रिकॉर्ड

    लीना कोसम के दुर्ग नगर निगम आयुक्त का पद संभालते ही निगम के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। वह दुर्ग नगर निगम के इतिहास में पहली महिला आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने आयुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभाली है। ऐसे में शहर की मूलभूत सुविधाओं से लेकर निगम की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और लंबे समय से लंबित विवादित मामलों के निराकरण तक उनकी कार्यशैली पर शहरवासियों की नजर रहेगी।

    महापौर अलका बाघमार से की सौजन्य मुलाकात

    पदभार ग्रहण करने के बाद आयुक्त लीना कोसम ने महापौर अलका बाघमार से सौजन्य मुलाकात की। महापौर कक्ष में पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। इस दौरान एमआईसी सदस्य, पार्षद एवं एल्डरमेन मौजूद रहे।

    नए आयुक्त के स्वागत के अवसर पर निवर्तमान आयुक्त मोहेंद्र साहू, कार्यपालन अभियंता विनीता वर्मा, मोहम्मद सलीम सिद्दीकी, सहायक अभियंता गिरीश दिवान, हरिशंकर साहू, पंकज साहू, आर.के. बोरकर, दुर्गेश गुप्ता, संजय मिश्रा, अनिल सिंह सहित निगम के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

    गदा चौक–सुपेला चौक पर विकास की बहस में उलझा जनहित; संडे मार्केट हटाने के बजाय फ्लाईओवर का सवाल क्यों?

    भिलाई। वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र में गदा चौक से सुपेला चौक के बीच प्रस्तावित फ्लाईओवर अब महज सड़क और यातायात का मुद्दा नहीं रह गया है। करीब 72 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच राजनीतिक बहस और सोशल मीडिया पर समर्थकों की खींचतान ने इसे एक बड़े सवाल में बदल दिया है—क्या फ्लाईओवर वास्तव में क्षेत्र की यातायात समस्या का स्थायी समाधान है या फिर मौजूदा समस्या के मूल कारण को नजरअंदाज कर महंगा समाधान तलाशा जा रहा है?

    विधायक रिकेश सेन की ओर से फ्लाईओवर को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, इसे लेकर विरोध करने वालों का तर्क है कि इतने बड़े सरकारी निवेश से पहले यह देखा जाना चाहिए कि जिस मार्ग पर यातायात का दबाव पैदा हो रहा है, उसकी बड़ी वजह क्या है।

    एक रास्ता, कई इलाकों की परेशानी

    गदा चौक–सुपेला चौक के बीच का मार्ग हाउसिंग बोर्ड, वैशाली नगर, शांति नगर, कोहका, कुरुद और कैलाश नगर सहित कई इलाकों के लोगों के आवागमन का महत्वपूर्ण रास्ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मार्ग पर लगने वाले संडे मार्केट के कारण कई बार यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती है।

    सबसे गंभीर सवाल आपातकालीन सेवाओं को लेकर उठता है। स्थानीय दावों के मुताबिक बाजार के दौरान फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और शव वाहन तक के लिए रास्ता बाधित हो जाता है। यदि ऐसा है तो यह केवल ट्रैफिक जाम का विषय नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है।

    फ्लाईओवर से सवाल खत्म होगा या समस्या का स्वरूप बदलेगा?

    फ्लाईओवर बनने से निश्चित रूप से मुख्य मार्ग पर यातायात को सुगमता मिल सकती है। लेकिन करीब एक किलोमीटर के इस मार्ग पर वर्षों से कारोबार कर रहे व्यापारियों की चिंता भी कम महत्वपूर्ण नहीं है।

    फ्लाईओवर निर्माण और उसके बाद यातायात के स्वरूप में बदलाव से स्थानीय दुकानदारों के व्यापार पर असर पड़ सकता है। सवाल यह है कि यदि किसी बड़े प्रोजेक्ट के कारण स्थानीय व्यापार प्रभावित होता है तो उसकी भरपाई कौन करेगा?

    यही वह बिंदु है जहां कुम्हारी और सोमनी जैसे क्षेत्रों का उदाहरण चर्चा में आता है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर फ्लाईओवर और सड़क संरचना में बदलाव के बाद इन क्षेत्रों के पुराने व्यापारिक स्वरूप पर असर पड़ने की बात स्थानीय स्तर पर कही जाती रही है। हालांकि वहां बेहतर यातायात के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की सीमाएं अलग थीं, लेकिन गदा चौक–सुपेला चौक की परिस्थितियां उससे अलग होने का तर्क दिया जा रहा है।

    ‘सस्ती लोकप्रियता’ के आरोप पर भी सवाल

    फ्लाईओवर को लेकर यदि किसी राजनीतिक नेता ने इसे ‘सस्ती लोकप्रियता’ बताया है, तो यह सवाल भी स्वाभाविक है कि क्या 72 करोड़ रुपये के प्रस्तावित प्रोजेक्ट का मूल्यांकन केवल राजनीतिक चश्मे से होना चाहिए?

    वास्तविक सवाल यह होना चाहिए कि—

    क्या इस फ्लाईओवर की जरूरत वैज्ञानिक यातायात अध्ययन से साबित होती है?

    क्या संडे मार्केट को स्थानांतरित कर यातायात समस्या कम की जा सकती है?

    क्या स्थानीय व्यापारियों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का सर्वे हुआ है?

    और क्या 72 करोड़ रुपये खर्च करने से पहले कम लागत वाले विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया गया है?

    अगर बाजार अवैध है तो कार्रवाई कौन करेगा?

    पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है।

    यदि संडे मार्केट वास्तव में अनधिकृत या अवैध रूप से संचालित हो रहा है, तो सवाल केवल फ्लाईओवर का नहीं रह जाता। तब सवाल यह है कि प्रशासन उस बाजार को नियमित क्यों नहीं करता अथवा उसे किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित क्यों नहीं करता?

    एक ओर आपातकालीन वाहनों के रास्ते बाधित होने की शिकायतें हों और दूसरी ओर उसी बाजार के कारण करोड़ों रुपये की स्थायी सड़क परियोजना की आवश्यकता बताई जाए, तो प्रशासन से जवाबदेही तय होना स्वाभाविक है।

    एक दिन लगने वाले बाजार की समस्या का समाधान बाजार को व्यवस्थित करना है या करोड़ों रुपये की स्थायी संरचना खड़ी करना—इस पर खुली और तथ्य आधारित बहस जरूरी है।

    व्यापारियों की खुशी ने भी दिया अलग संदेश

    फ्लाईओवर प्रोजेक्ट को हटाए जाने अथवा आगे न बढ़ने की खबर के बाद स्थानीय व्यापारियों द्वारा खुशी जताए जाने और सांसद विजय बघेल के प्रति आभार व्यक्त किए जाने की बात भी सामने आई है।

    यह घटनाक्रम इस बात का संकेत माना जा सकता है कि स्थानीय व्यापारियों का एक वर्ग फ्लाईओवर को अपने व्यापार के लिए संभावित खतरे के रूप में देख रहा था।

    यहीं से राजनीतिक बहस और तीखी हो गई है। एक ओर विधायक समर्थक इसे क्षेत्र की यातायात समस्या का समाधान मान रहे हैं, तो दूसरी ओर सांसद समर्थक व्यापारियों के हित और वैकल्पिक समाधान को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया बना राजनीतिक अखाड़ा

    फिलहाल इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा गर्मी सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही है। विधायक रिकेश सेन के समर्थक फ्लाईओवर को विकास और यातायात समाधान से जोड़ रहे हैं, जबकि सांसद विजय बघेल के समर्थक इसे स्थानीय व्यापारियों के हित से जोड़कर देख रहे हैं।

    लेकिन सवाल यह है कि क्या वैशाली नगर की जनता को दो जनप्रतिनिधियों के समर्थकों की सोशल मीडिया लड़ाई चाहिए या फिर समस्या का व्यावहारिक समाधान?

    जनता के सामने विकल्प स्पष्ट होना चाहिए—

    संडे मार्केट को व्यवस्थित किया जाए, उसका स्थान बदला जाए, यातायात व्यवस्था सुधारी जाए और यदि इसके बाद भी फ्लाईओवर आवश्यक साबित हो तो उसके निर्माण पर गंभीरता से विचार किया जाए।

    जनप्रतिनिधियों से जनता का सीधा सवाल

    राजनीति का उद्देश्य किसी प्रोजेक्ट को केवल अपनी उपलब्धि बताना या किसी दूसरे के प्रयास को ‘सस्ती लोकप्रियता’ बताना नहीं होना चाहिए।

    यदि 72 करोड़ रुपये खर्च होने हैं तो उसका लाभ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचना चाहिए। वहीं यदि उसी समस्या का समाधान कम खर्च में बाजार को स्थानांतरित कर, सड़क को व्यवस्थित कर और यातायात प्रबंधन सुधारकर हो सकता है तो करोड़ों रुपये खर्च करने से पहले उस विकल्प को भी परखा जाना चाहिए।

    वैशाली नगर की जनता को फ्लाईओवर चाहिए या बेहतर यातायात व्यवस्था—यह सवाल अब सोशल मीडिया की बहस से आगे निकलकर विशेषज्ञों, व्यापारियों, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने रखा जाना चाहिए।

    क्योंकि सवाल किसी एक नेता की लोकप्रियता का नहीं, 72 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन और हजारों नागरिकों के भविष्य का है।

    अब फैसला राजनीति नहीं, तथ्य करें—फ्लाईओवर जरूरी है तो कारण सामने आएं, और अगर संडे मार्केट समस्या की जड़ है तो पहले उस पर कार्रवाई क्यों नहीं?

    भिलाई / शौर्यपथ / सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र की प्लेट मिल और यूनिवर्सल रेल मिल (यूआरएम) ने अगस्त 2026 में उत्पादन एवं प्रेषण के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। प्लेट मिल ने पांच नए रिकॉर्ड बनाए, जबकि यूआरएम ने पहली बार एक माह में 100 से अधिक श्वक्र (लॉन्ग रेल) रेक का प्रेषण कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
    प्लेट मिल ने अगस्त में 1,25,214 टन उत्पादन किया, जो अगस्त 2025 के 1,20,448 टन के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है। मिल ने डायरेक्ट प्रेषण में 85,101 टन,हाई टेंसाइल प्रेषण में 40,050 टन, दैनिक रोड प्रेषण में 1,699 टन एवं 52 ट्रॉलियों तथा कुल 1,28,159 टन प्रेषण का नया रिकॉर्ड बनाया।
    यूआरएम ने पहली बार भेजे 102 लॉन्ग रेल रेक
    यूआरएम ने अगस्त 2026 में 260 मीटर रेल पैनल के 102 श्वक्र रेक का प्रेषण कर पहली बार 100 रेक का आंकड़ा पार किया। इससे पहले जून और जुलाई 2026 में 94 श्वक्र रेक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया गया था। मई 2026 से यूआरएम लगातार चौथे माह निर्धारित क्षमता के अनुरूप प्राइम उत्पादन कर रहा है।
    लॉन्ग रेल के कुल प्रेषण में भी बीएसपी ने सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाया। अगस्त में संयंत्र से कुल 119 श्वक्र रेक भेजे गए, जो जून 2026 के 111 रेक के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है। खास बात यह है कि अब केवल यूआरएम से ही एक माह में 100 से अधिक लॉन्ग रेल रेक का प्रेषण संभव हुआ है।
    टीम भावना और परिचालन उत्कृष्टता को मिली सराहना
    उपलब्धियों के अवसर पर निदेशक प्रभारी, बीएसपी चित्तरंजन महापात्र ने प्लेट मिल एवं यूआरएम का दौरा कर दोनों टीमों को बधाई दी। उन्होंने अधिकारियों एवं कार्मिकों के समर्पण, टीम भावना और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए भविष्य में भी नए कीर्तिमान स्थापित करने का विश्वास जताया।
    प्लेट मिल और यूआरएम की उपलब्धियां संयंत्र में उच्च उत्पादकता, परिचालन दक्षता, मूल्यवर्धित उत्पादों, डिजिटलीकरण एवं ऑटोमेशन को बढ़ावा देने के प्रयासों को मजबूती देती हैं। साथ ही यह प्रदर्शन सेल के महत्वाकांक्षी 'रूद्बह्यह्यद्बशठ्ठ 10्य ष्टह्म् क्कक्चञ्जÓ लक्ष्य की दिशा में भिलाई इस्पात संयंत्र के योगदान को भी सुदृढ़ करता है।

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