September 13, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    रायपुर / बस्तर अंचल के दूरस्थ क्षेत्रों में छुपी प्रतिभाओं को तराशने और उनके प्रशासनिक सेवाओं में जाने के सपनों को साकार करने के लिए नारायणपुर में एक बेहद सराहनीय पहल की शुरुआत हुई है। जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा और वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) निधि से संचालित निःशुल्क पीएससी एवं व्यापम आवासीय कोचिंग सेंटर का विधिवत शुभारंभ किया।

    ​जिला प्रशासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले के आर्थिक रूप से कमजोर और संसाधनों के अभाव से जूझ रहे मेधावी युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक अनुकूल माहौल और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन देना है। कोचिंग सेंटर के पहले बैच के लिए पारदर्शी चयन प्रक्रिया के जरिए 50 प्रतिभावान अभ्यर्थियों का चयन किया गया है, जिनमें 26 बालिकाएं और 24 बालक शामिल हैं।

    ​शुभारंभ समारोह के दौरान मंत्रियों और अतिथियों ने सभी चयनित विद्यार्थियों को बैग, कॉपी, मानक पुस्तकें, पेन और आवश्यक स्टडी किट भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। इन अभ्यर्थियों को न केवल सर्वसुविधायुक्त निःशुल्क आवास और भोजन की सुविधा मिलेगी, बल्कि विषय विशेषज्ञों द्वारा नियमित कक्षाओं के माध्यम से राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) और व्यापम जैसी कठिन परीक्षाओं की बारीकियां भी सिखाई जाएंगी।

    ​आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त को इस योजना की क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया है, जो सेंटर की व्यवस्थाओं और गुणवत्ता पर सीधी नजर रखेगी। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, छोटेडोंगर सरपंच, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी और सहायक आयुक्त सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

       ​रायपुर / छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले क अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार नारायणपुर में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और नियमित शिक्षा की दिशा में एक नई और क्रांतिकारी शुरुआत हुई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत जिले के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत 13 हजार से अधिक विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क पौष्टिक नाश्ता योजना का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को कुपोषण से पूरी तरह मुक्त करने के उद्देश्य से पौष्टिक लड्डू वितरण कार्यक्रम की भी शुरुआत की गई। जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने इस दूरगामी पहल का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया और स्वयं अपने हाथों से नन्हे-मुन्ने बच्चों को स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नाश्ता परोसकर उनका उत्साहवर्धन किया।

    ​यह महत्वाकांक्षी पहल नारायणपुर और ओरछा (अबूझमाड़) विकासखंड के कुल 476 विद्यालयों में लागू की जा रही है, जिससे 13 हजार 15 स्कूली बच्चे सीधे लाभान्वित होंगे। योजना के तहत हर विद्यार्थी को प्रतिदिन 150 ग्राम ताजा और सेहतमंद नाश्ता दिया जाएगा। बच्चों के स्वाद और पोषण का विशेष ध्यान रखते हुए दिन के हिसाब से एक संतुलित मेन्यू तय किया गया है, जिसमें पोहा-फलीदाना, सूजी का उपमा, दलिया, चना, खड़ा मूंग और मूंगफली जैसे प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल हैं। भोजन तैयार करने वाली व्यवस्था को मजबूती देने के लिए जिले के 676 रसोइयों को 800 रुपये प्रतिमाह का अतिरिक्त मानदेय भी दिया जा रहा है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है।

    ​यह कार्यक्रम न केवल नौनिहालों को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालेगा, बल्कि दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने, ठहराव सुनिश्चित करने और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखने में मील का पत्थर साबित होगा। इस गरिमामय अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, ग्रामीण और स्कूली बच्चे मौजूद रहे।

    अंतिम दिन हिंदी नाटक और लोकनाट्य की सशक्त प्रस्तुतियों ने बांधा समां
    कलाकारों ने अभिनय के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों को दी जीवंत अभिव्यक्ति

    रायपुर । संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘रंग परब’ नाट्य श्रृंखला का अंतिम दिन हिंदी नाटक और छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य की प्रभावशाली प्रस्तुतियों के नाम रहा। मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित समापन दिवस में ‘टीस’ और ‘हण्डा’ नाटकों ने दर्शकों को भावनाओं, सामाजिक सरोकारों और लोक संस्कृति के विविध रंगों से जोड़ा। दोनों प्रस्तुतियों में कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, संवाद और मंचीय अभिव्यक्ति के माध्यम से रंगमंच की विविधता और उसकी सामाजिक भूमिका को प्रभावी ढंग से सामने रखा।

    अंतिम दिन की पहली प्रस्तुति हिंदी नाटक ‘टीस’ की रही। आचार्य रंजन मोडक, लोकेश साहू एवं साथियों द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने मानवीय संवेदनाओं और जीवन के विभिन्न पहलुओं को मंच पर प्रभावशाली ढंग से उकेरा। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से पात्रों की भावनात्मक स्थितियों को जीवंत किया। प्रस्तुति में मानवीय भावनाओं के साथ सामाजिक परिस्थितियों और जीवन से जुड़े संवेदनशील पक्षों को इस तरह सामने रखा गया कि दर्शक नाटक से भावनात्मक रूप से जुड़ते चले गए।

    ‘टीस’ की प्रस्तुति की विशेषता कलाकारों की सहज और प्रभावशाली अभिनय शैली रही। मंच पर पात्रों की भावनाओं, संवादों और घटनाक्रम के बीच बेहतर तालमेल ने नाटक को प्रभावशाली बनाया। प्रस्तुति ने यह रेखांकित किया कि रंगमंच केवल कहानी कहने का माध्यम नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को दर्शकों तक सीधे पहुंचाने वाली सशक्त कला विधा भी है।

    ‘हण्डा’ ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग

    ‘टीस’ के बाद लोकनाट्य ‘हण्डा’ की प्रस्तुति ने पूरे माहौल को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन के रंगों से सराबोर कर दिया। श्री चंद्रशेखर चकोर, दल प्रमुख एवं निर्देशक, गुड़ी चऊंरा के दल द्वारा प्रस्तुत इस लोकनाट्य में लोक जीवन, परंपरा और ग्रामीण परिवेश की जीवंत झलक देखने को मिली। कलाकारों ने लोकभाषा, अभिनय और पारंपरिक रंगमंचीय शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को मंच पर जीवंत किया।

    लोकनाट्य की प्रस्तुति के दौरान कलाकारों की ऊर्जा और पारंपरिक शैली ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। ‘हण्डा’ के माध्यम से लोक जीवन से जुड़े प्रसंगों और सांस्कृतिक परंपराओं को सहज एवं प्रभावी अंदाज में प्रस्तुत किया गया। इससे दर्शकों को मनोरंजन के साथ अपनी मिट्टी, बोली और लोक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी मिला।

    रंगमंच समाज की वास्तविक तस्वीर सामने रखने वाली सशक्त विधा : डॉ. संजय कनौजे

    इस अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कनौजे ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक तस्वीर सामने रखने वाली सशक्त विधा है। रंगमंच के माध्यम से कलाकार जीवन के विभिन्न पहलुओं, संवेदनाओं, संघर्षों और सामाजिक सरोकारों को प्रभावी ढंग से दर्शकों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि नाटक दर्शकों को केवल किसी कथा या पात्र से जोड़ता ही नहीं, बल्कि उन्हें सोचने, समझने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में प्रेरित भी करता है।

    डॉ. कनौजे ने कहा कि रंगमंच हमारी संस्कृति, परंपराओं और मानवीय मूल्यों को जीवंत बनाए रखने तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभिन्न रंग शैलियों और लोक परंपराओं को मंच मिलता है तथा कलाकारों को अपनी कला और सृजनात्मकता को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।

    एक मंच पर दिखे रंगमंच और लोक परंपरा के विविध रंग

    रंग परब नाट्य श्रृंखला के अंतिम दिन की दोनों प्रस्तुतियों ने आयोजन को सार्थक समापन दिया। एक ओर ‘टीस’ ने हिंदी रंगमंच के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया, वहीं दूसरी ओर ‘हण्डा’ ने छत्तीसगढ़ की लोकनाट्य परंपरा, लोकभाषा और ग्रामीण जीवन के रंगों को दर्शकों के सामने जीवंत कर दिया।

    इस तरह अंतिम दिन का मंचन आधुनिक रंगमंचीय अभिव्यक्ति और पारंपरिक लोकनाट्य के सुंदर संगम का साक्षी बना। प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक चिंतन का अवसर दिया तथा ‘रंग परब’ की पूरी नाट्य श्रृंखला के उद्देश्य को प्रभावी रूप से सामने रखा।

    कार्यक्रम में साहित्यकार एवं नाटककार श्री विजय मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान, सामाजिक कार्यकर्ता श्री उदयभान चौहान, संस्कृति विभाग के भानु मरकाम एवं अजय चंद्राकर सहित अन्य गणमान्यजन विशेष रूप से उपस्थित रहे।

      दुर्ग/ शौर्यपथ / नगर पालिक निगम। नगर पालिक निगम दुर्ग के वार्ड क्रमांक 54 पोटियाकला स्थित दशहरा मैदान में कर्मा भवन (सांस्कृतिक भवन) के प्रथम तल के निर्माण कार्य का भूमिपूजन महापौर अलका बाघमार द्वारा किया गया। लगभग 20 लाख रुपये की लागत से होने वाले इस निर्माण कार्य से क्षेत्रवासियों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक आयोजनों के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।
    भूमिपूजन कार्यक्रम में महापौर अलका बाघमार के साथ आयुक्त लीना कोसम, लोक कर्म प्रभारी देव नारायण चन्द्राकर, पार्षद हीरौंदी चंदानिया, सविता साहू, सजान जोसफ, मंडल अध्यक्ष कौशल साहू, लालेश्वरी साहू, कार्यपालन अभियंता विनीता वर्मा, सहायक अभियंता हरिशंकर साहू, करण यादव सहित बड़ी संख्या में वार्डवासी उपस्थित रहे।
    इस अवसर पर महापौर अलका बाघमार ने कहा कि कर्मा भवन का प्रथम तल बनने से वार्डवासियों को विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिए एक बेहतर और सुविधायुक्त स्थान मिलेगा। निगम क्षेत्र में नागरिकों की आवश्यकता के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से समय-सीमा में पूरा हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।

    -महापौर एवं आयुक्त ने वार्ड 13 एवं 25 में नाली निर्माण कार्य का किया निरीक्षण,
    -खटाल संचालक को गंदगी फैलाने पर नोटिस,पालन नहीं करने पर होगी जुर्माने की कार्रवाई,

       दुर्ग/ शौर्यपथ / नगर पालिक निगम। नगर पालिक निगम सीमा क्षेत्र अंतर्गत आज महापौर अलका बाघमार एवं आयुक्त लीना कोसम ने वार्ड क्रमांक 13 एवं 25 में आईएएम चौक से अग्रसेन चौक की ओर जाने वाले मार्ग पर पीडब्ल्यूडी, दुर्ग द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान निर्माण कार्य की प्रगति एवं मौके पर आ रही समस्याओं की जानकारी लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

    निरीक्षण के दौरान महापौर अलका बाघमार एवं आयुक्त लीना कोसम ने निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं का तत्काल निराकरण कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर उसे लंबित न रखा जाए, बल्कि संबंधित विभागों से समन्वय कर तत्काल समाधान करते हुए निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाए।
    महापौर अलका बाघमार ने क्षेत्र में खटाल संचालक द्वारा आसपास गंदगी फैलाए जाने की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित संचालक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

    उन्होंने अधिकारियों से कहा कि क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नोटिस के बाद भी आदेश का पालन नहीं करने पर संबंधित के विरुद्ध जुर्माने की कार्रवाई की जाए।

    महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नाली निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं का मौके पर ही संज्ञान लेकर उनका शीघ्र निराकरण करें, ताकि निर्माण कार्य निर्धारित गति से आगे बढ़ सके और नागरिकों को इसका लाभ जल्द मिल सके।

    निरीक्षण के दौरान लोक कर्म प्रभारी देव नारायण चन्द्राकर, राजस्व एवं बाजार विभाग प्रभारी शेखर चन्द्राकर, पार्षद मनीषा सोनी, विद्यावती सिंह, रंजीता पाटिल, सावित्री दमाहे, अरुण सिंह, सहायक अभियंता संजय ठाकुर, करण यादव, विकास दमाहे सहित संबंधित अधिकारी एवं ठेकेदार उपस्थित रहे।

    17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा अभियान; सेवा सेतु शिविरों में योजनाओं का लाभ, युवाओं के लिए रोजगार मेले और व्यापक वृक्षारोपण पर जोर

     

    रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ को जनकल्याण और जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अभियान के प्रत्येक कार्यक्रम के केंद्र में आम नागरिक और उसकी जरूरतें होनी चाहिए तथा योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने अभियान की तैयारियों को लेकर आयोजित कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों को स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। जिला कलेक्टरों को नियमित समीक्षा और विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    सेवा सेतु शिविरों में मौके पर होगा समाधान

    चयनित गांवों में ‘सेवा सेतु’ शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें स्वास्थ्य सेवाओं के साथ पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ने की कार्रवाई होगी। आवेदनों के लिए काउंटर बनाए जाएंगे और उनका डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से अनुश्रवण किया जाएगा। तत्काल निराकरण नहीं होने वाली समस्याओं की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी।

    युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

    मुख्यमंत्री ने कौशल विकास विभाग के रोजगार मेलों को भी अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। युवाओं से आवेदन लेकर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा चयनित युवाओं को शिविरों में नियुक्ति पत्र प्रदान करने की योजना है।

    पोषण, स्वच्छता और पर्यावरण बनेगा अभियान का हिस्सा

    ‘आंगन मिलन’ के तहत स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, पौष्टिक थाली, चित्रकला प्रतियोगिता, न्योता भोज सहित विभिन्न गतिविधियां होंगी। वहीं ‘सेवा मेरा योगदान’ के अंतर्गत रक्तदान, वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त अभियान और स्वच्छता सहित 25 से अधिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

    अभियान को ‘एक पेड़ मां के नाम’ से भी जोड़ा जाएगा। जल संरचनाओं, सार्वजनिक स्थलों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर वृक्षारोपण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस वर्ष प्रदेश में 2.5 करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य को पूरा करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान की सार्थकता तभी है, जब स्वास्थ्य शिविरों का लाभ जरूरतमंदों को मिले, पात्र परिवार योजनाओं से जुड़ें, युवाओं को रोजगार मिले और स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण में समाज की सक्रिय भागीदारी बढ़े।

    70 से अधिक समितियों के साथ एसपी अंकिता शर्मा ने बनाई समन्वित कार्ययोजना, बड़े व संवेदनशील पंडालों में तैनात होंगे ‘पंडाल पुलिस मित्र’

    राजनांदगांव । शौर्यपथ ।  आगामी गणेश उत्सव को शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित बनाने के लिए राजनांदगांव पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने पुलिस कार्यालय में शहर की 70 से अधिक गणेश उत्सव समितियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को लेकर विस्तृत चर्चा की।

    बैठक में ‘One Cop–One Pandal’ पहल की जानकारी देते हुए बड़े, मध्यम एवं संवेदनशील गणेश पंडालों में ‘Pandal Police Mitra’ तैनात करने की बात कही गई। ये पुलिस और समितियों के बीच निरंतर समन्वय का कार्य करेंगे तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने में सहयोग करेंगे।

    एसपी ने समितियों को पंडालों में प्रवेश-निकास, बैरिकेडिंग, दर्शन के लिए कतार, पार्किंग और यातायात की व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एंबुलेंस और फायर वाहन सहित आपातकालीन सेवाओं के लिए मार्ग हमेशा खुला रखने पर विशेष जोर दिया गया।

    पंडालों में CCTV, पर्याप्त प्रकाश, सुरक्षित विद्युत वायरिंग और अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था के साथ महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए।

    पुलिस ने स्पष्ट किया कि उत्सव के दौरान नशे में उपद्रव, हथियारों का प्रदर्शन, जुआ-सट्टा और असामाजिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया पर अफवाह या भ्रामक जानकारी प्रसारित नहीं करने तथा संदिग्ध गतिविधि की तत्काल पुलिस को सूचना देने की अपील की गई।

    एसपी अंकिता शर्मा ने कहा कि गणेश उत्सव आस्था और उत्साह का पर्व है। पुलिस और उत्सव समितियां आपसी समन्वय से कार्य करेंगी, ताकि प्रत्येक श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में गणेश दर्शन कर सके और उत्सव शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न हो।

    शासकीय बंगलों में कार्यालय या सत्ता का विशेषाधिकार? स्व. हेमचंद यादव के परिवार के कब्जे वाले आवास पर भी सवाल

    दुर्ग// जिला मुख्यालय दुर्ग की सिविल लाइन और आसपास का इलाका अधिकारियों के लिए बनाए गए शासकीय आवासों के कारण जाना जाता है। दूसरे जिलों से पदस्थ होकर आने वाले अधिकारियों के लिए ये आवास प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लेकिन जब यही शासकीय आवास जनप्रतिनिधियों के कार्यालय अथवा ऐसे लोगों के कब्जे में दिखाई दें, जिनकी पात्रता पर सवाल उठ रहे हों, तो व्यवस्था और नियम दोनों पर प्रश्न खड़े होना स्वाभाविक है।

    सबसे ज्यादा चर्चा दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर को लेकर है। ग्रामीण क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे विधायक का कार्यालय जिला मुख्यालय की सिविल लाइन स्थित शासकीय आवासीय परिसर में संचालित होना अब ग्रामीण क्षेत्र में भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। स्थानीय चर्चाओं में सवाल उठ रहा है कि जिस जनता ने ग्रामीण क्षेत्र से अपना प्रतिनिधि चुना, उसके बीच कार्यालय खोलने के बजाय शहरी क्षेत्र के शासकीय परिसर को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है?

    बताया जा रहा है कि सिविल लाइन में लगभग तीन बंगलों के बड़े भूभाग को कार्यालय के रूप में उपयोग किए जाने की स्थिति बनी हुई है। यदि यह वास्तव में शासकीय आवासीय परिसरों का उपयोग है, तो बड़ा सवाल यह है कि क्या नियमों के तहत किसी विधायक को इस प्रकार शासकीय आवासीय संपत्ति का कार्यालय के लिए उपयोग करने की अनुमति है? यदि अनुमति है तो उसका आधार, अवधि और शर्तें क्या हैं? और यदि अनुमति नहीं है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

    मामला केवल विधायक के कार्यालय तक सीमित नहीं है। जिला मुख्यालय में वर्षों से कुछ शासकीय आवास ऐसे भी बताए जाते हैं, जिनका आवंटन स्थानांतरित हो चुके अधिकारियों के नाम पर बना हुआ है। सवाल यह है कि जब कोई अधिकारी दूसरे जिले में पदस्थ हो चुका है, तो उसके नाम पर दुर्ग का शासकीय आवास कितने समय तक रखा जा सकता है? ऐसे आवास खाली नहीं होने से नए पदस्थ होने वाले अधिकारियों को किराए के मकान में रहने की मजबूरी क्यों आती है?

    इसका उदाहरण नगर निगम के पूर्व आयुक्त के मामले से भी जुड़ता है, जिन्हें पदभार ग्रहण करने के बाद शुरुआती दौर में किराए के आवास का सहारा लेना पड़ा और बाद में प्रयासों के बाद शासकीय आवास उपलब्ध हो सका। अब नए अधिकारियों की पदस्थापना के साथ फिर वही स्थिति सामने आने की आशंका प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

    इसी कड़ी में स्वर्गीय हेमचंद यादव को आवंटित शासकीय आवास को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वर्षों बाद भी उक्त आवास उनके परिवार के उपयोग में है। यदि वर्तमान में परिवार का कोई सदस्य शासकीय आवास की पात्रता रखने वाले संवैधानिक अथवा विभागीय पद पर नहीं है, तो प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि आवास किस नियम और किस आदेश के आधार पर अब तक आवंटित है।

    चार आवास खाली हों तो कितने अधिकारियों को मिल सकती है सुविधा?

    यदि सिविल लाइन के ऐसे शासकीय आवास, जिनका उपयोग वर्तमान पात्र अधिकारियों के बजाय अन्य प्रयोजनों के लिए हो रहा है, नियमानुसार मुक्त कराए जाएं तो जिला मुख्यालय में पदस्थ कई वरिष्ठ अधिकारियों को आवास की सुविधा मिल सकती है। इससे अधिकारियों को किराए के मकान की तलाश से राहत मिलेगी और शासन द्वारा निर्मित आवासों का वास्तविक उद्देश्य भी पूरा होगा।

    सबसे बड़ा सवाल यही है कि शासकीय आवास अधिकारियों के लिए हैं या सत्ता से जुड़े लोगों के प्रभाव के लिए?

    चुनाव के दौरान जनता, व्यवस्था और सिद्धांतों की बात करने वाले जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि सत्ता में आने के बाद भी वे उन्हीं सिद्धांतों का पालन करें। ग्रामीण क्षेत्र से चुने गए प्रतिनिधि का जिला मुख्यालय के शासकीय परिसर में कार्यालय होना यदि नियमसम्मत है तो प्रशासन को आदेश सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि नियमसम्मत नहीं है तो कार्रवाई कौन करेगा?

    ग्रामीण जनता के बीच अब यह सवाल भी उठने लगा है—विधायक ग्रामीण क्षेत्र से जीते हैं, लेकिन कार्यालय के लिए पसंद शहरी सिविल लाइन ही क्यों?

    दुर्ग प्रशासन को अब शासकीय आवासों के आवंटन, कब्जे, पात्रता और वर्तमान उपयोग की निष्पक्ष समीक्षा कर स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शासकीय संपत्ति का उपयोग नियमों के अनुसार हो रहा है या फिर सत्ता और प्रभाव के चलते नियमों की परिभाषा बदल रही है।

    निगम के अपने पत्र में किराये पर देने पर रोक, फिर भी ‘शंभवी कंप्यूटर’ का संचालन—अभ्युदय मिश्रा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

    दुर्ग। सरकारी संपत्ति के आवंटन में नियम इसलिए बनाए जाते हैं ताकि व्यवस्था पारदर्शी रहे और किसी व्यक्ति विशेष को नियमों से परे लाभ न मिल सके। लेकिन दुर्ग नगर पालिक निगम के बाजार विभाग में सामने आया इंदिरा मार्केट की एक दुकान का मामला इन तमाम व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा कर रहा है।

    इंदिरा मार्केट के सी-ब्लॉक में सीढ़ी के नीचे स्थित 60 वर्गफीट की दुकान को लेकर नगर निगम द्वारा जारी दस्तावेज में आवंटन की शर्तें साफ-साफ दर्ज हैं। निगम के पत्र में स्पष्ट है कि आवंटी स्वयं दुकान में व्यवसाय करेगा और किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर नहीं देगा। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में निगम को दुकान खाली कराकर कब्जा लेने का अधिकार भी दिया गया है।

    इसके बावजूद वर्तमान में उक्त परिसर में ‘SHAMBHAVI COMPUTER’ के नाम से व्यवसाय संचालित होता दिखाई दे रहा है।

    छह महीने पहले शिकायत, फिर भी दुकान जस की तस!

    मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि यह कोई नई जानकारी नहीं है। शिकायतकर्ता द्वारा करीब छह माह पहले ही बाजार विभाग को मामले की जानकारी और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने का दावा किया जा रहा है। इसके बाद भी यदि वर्तमान तस्वीर में दुकान उसी तरह संचालित दिखाई दे रही है, तो सवाल सीधे बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की कार्यप्रणाली पर उठना स्वाभाविक है।

    आखिर छह महीने का समय किसी मामले की जांच के लिए पर्याप्त नहीं है तो कितना समय चाहिए?

    यदि दुकान का संचालन नियमसम्मत है तो विभाग स्पष्ट करे कि वर्तमान संचालक की स्थिति क्या है।

    यदि दुकान किराये पर दी गई है तो निगम की स्पष्ट शर्त के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

    और यदि कार्रवाई की जा चुकी है तो उसका परिणाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?

    मामला सिर्फ दुकान का नहीं, ‘मौन’ का है

    सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि दुकान में कंप्यूटर का कारोबार कौन कर रहा है। बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायतकर्ता के अनुसार दस्तावेज छह महीने पहले ही विभाग के सामने रखे जा चुके थे, तब बाजार विभाग ने इस मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया?

    लगातार शिकायत के बावजूद यदि स्थिति जस की तस बनी रहती है, तो स्वाभाविक रूप से किसी को संरक्षण दिए जाने अथवा पर्दे के पीछे किसी प्रकार के लेनदेन की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हालांकि इसकी सच्चाई निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकती है।

    अभ्युदय मिश्रा की चुप्पी अब सवाल बन गई

    बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा को यह बताना चाहिए कि छह माह से उनके संज्ञान में बताए जा रहे इस मामले में अब तक क्या जांच हुई? किस अधिकारी ने स्थल निरीक्षण किया? मूल आवंटी कौन है? वर्तमान संचालक का मूल आवंटी से क्या संबंध है? क्या दुकान किराये पर दी गई है? और यदि आवंटन शर्तों का उल्लंघन मिला है तो दुकान खाली कराने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

    निगम के दस्तावेज में नियम काले अक्षरों में लिखे हैं, दुकान सामने दिखाई दे रही है और शिकायत भी पुरानी है—फिर बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा की कार्रवाई आखिर दिखाई क्यों नहीं दे रही?

    अब जांच से ही खुलेगा ‘मौन’ का राज

    मामले में यह जांच का विषय है कि छह माह पहले जानकारी मिलने के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हुई और कहीं किसी व्यक्ति को अनुचित लाभ तो नहीं पहुंचाया गया। निगम प्रशासन को चाहिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवंटन से लेकर वर्तमान संचालन तक के दस्तावेजों की जांच करे और जिम्मेदारी तय करे।

    क्योंकि सवाल एक 60 वर्गफीट की दुकान का नहीं है।

    सवाल यह है कि निगम की संपत्ति पर नियम भारी हैं या फिर बाजार अधिकारी का मौन?

    वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने पांच जिलों की वर्चुअल बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की; ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘सेवा ज्योति यात्रा’ सहित होंगी विविध गतिविधियां

    रायपुर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा, नेतृत्व एवं समर्पण के प्रति आभार व्यक्त करने तथा विकसित भारत-2047 के संकल्प को जनभागीदारी का स्वरूप देने के उद्देश्य से 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जाएगा। अभियान के माध्यम से केंद्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के साथ समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। अभियान की तैयारियों की समीक्षा के लिए वित्त मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सरगुजा, जशपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़ तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की प्रशासनिक बैठक ली।
    उन्होंने नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, कार्ययोजना, विभागीय दायित्वों तथा प्रस्तावित गतिविधियों की जानकारी लेते हुए सभी कार्यक्रमों का समयबद्ध और बेहतर विभागीय समन्वय के साथ क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम, वार्ड, विकासखंड एवं जिला स्तर पर अधिकतम जनभागीदारी हो तथा जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थाओं, स्व-सहायता समूहों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को अभियान से जोड़ा जाए।

    17 सितंबर की शाम हर घर जलेगा ‘आशीर्वाद का दीया’

    अभियान का शुभारंभ 17 सितंबर की शाम ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से होगा। प्रत्येक परिवार को दीप प्रज्वलन से जोड़ते हुए इसे 25 वर्षों की जनसेवा के प्रति आभार और विकसित भारत-2047 के संकल्प का प्रतीक बनाया जाएगा। मैदानी टीमें घर-घर पहुंचकर नागरिकों को सहभागी बनने के लिए प्रेरित करेंगी।

    बच्चों के सपनों से सामने आएगा विकसित भारत का विजन

    17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक शासकीय एवं निजी विद्यालयों में ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ पहल के तहत विकसित भारत और 25 वर्षों की सेवा यात्रा पर आधारित ड्राइंग एवं भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा तथा बच्चों की कल्पनाओं को प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।

    ‘नमो सेवा गाथा’ बताएगी सेवा और बदलाव की कहानी

    ‘नमो सेवा गाथा’ के तहत 17 सितंबर से गांव-गांव नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से 25 वर्षों की सेवा यात्रा, जनकल्याणकारी योजनाओं और उनसे आए बदलाव की कहानियां प्रस्तुत की जाएंगी। 2 अक्टूबर को देश के 100 प्रमुख स्थलों पर विशेष मंचन प्रस्तावित है।

    ‘आंगन का उत्सव’ में माताओं से संवाद, कार्यकर्ताओं का सम्मान

    25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘आंगन का उत्सव’ आयोजित होगा। इसमें माताओं एवं बच्चों की सहभागिता के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाएगा। पोषण, मातृ सहायता, टीकाकरण तथा महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।

    ‘कहानी बदलाव की’ से सामने आएंगी सफलता की कहानियां

    शासकीय योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की वास्तविक सफलता की कहानियां ‘कहानी बदलाव की’ पहल के तहत संकलित की जाएंगी। इनका डिजिटल डेटा बैंक तैयार किया जाएगा, जिसमें हितग्राही, स्थान, जिला, संबंधित योजना और जीवन में आए बदलाव की जानकारी दर्ज होगी।

    ‘सेवा ज्योति यात्रा’ से जुड़ेगा जन-जन

    25 वर्षों की सेवा के प्रति आभार और विकसित भारत-2047 के संकल्प को मजबूत करने के लिए गांव, जिला एवं राज्य स्तर पर ‘सेवा ज्योति यात्रा’ आयोजित की जाएगी। इसके साथ ‘सेवा मेरा योगदान’ पहल के तहत नागरिकों और संस्थाओं को स्वच्छता सहित विभिन्न सेवा गतिविधियों में भागीदारी का अवसर मिलेगा।

    ‘सरकार आपके द्वार’ पहुंचाएगा योजनाओं का लाभ

    ‘सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार’ के तहत विधानसभा एवं विकासखंड स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता में पात्र नागरिकों को शासकीय योजनाओं की जानकारी देने, उन्हें योजनाओं से जोड़ने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

    विविध गतिविधियों से अभियान को मिलेगा जनआंदोलन का स्वरूप

    अभियान में ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’, ‘जल जन सेवा संकल्प’, ‘रंगोली राष्ट्र/भारत मंडल’, ‘राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज’ तथा ‘जनसेवक महाकुंभ-पंचायत से पार्लियामेंट’ जैसी गतिविधियां भी प्रस्तावित हैं। ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के अंतर्गत परिवर्तनकारी स्थलों का भ्रमण तथा 7 अक्टूबर को सेवा ज्योति यात्रा आयोजित करने की रूपरेखा है। बैठक में संबंधित जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

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