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April 05, 2026
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Naresh Dewangan

Naresh Dewangan

अजय चंद्राकर की खास रिपोर्ट 

सुकमा, शौर्यपथ। ग्राम जगरगुंडा जिला सुकमा क्षेत्र अंतर्गत खसरा नंबर 386 पर प्रस्तावित सड़क निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संबंधित भूमि के भू-स्वामी माड़वी सत्यानारायण ने आरोप लगाया है कि उनकी असहमति के बावजूद उनकी निजी भूमि पर सड़क निर्माण से संबंधित प्रारंभिक कार्य किया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सड़क निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार द्वारा भूमि की सफाई एवं मुरूम डालने का कार्य किया गया, जबकि भू-स्वामी का दावा है कि उन्होंने पूर्व में ही इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। भू-स्वामी ने मामले में स्थानीय राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

मामले को लेकर यह प्रश्न भी उठ रहा है कि क्या निर्माण कार्य से पूर्व नियमानुसार भूमि का सर्वे एवं आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया पूरी की गई थी। यदि प्रक्रिया का विधिवत पालन हुआ होता, तो विवाद की स्थिति से बचा जा सकता था।

इस संबंध में पटवारी बुधराम बघेल ने बताया कि संबंधित दिन वे कार्यालयीन कार्य से तहसील कार्यालय में थे और उन्हें मौके पर चल रहे कार्य की जानकारी नहीं थी। 

इस सम्बन्ध मे तहसीलदार योपेंद्र पात्रे से फ़ोन पे जानकारी चाही गई तो उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित भू-स्वामी भूमि उपलब्ध कराने के लिए सहमत नहीं हैं, तो वैकल्पिक रूप से अन्य शासकीय भूमि पर सड़क निर्माण कार्य किया जायेगा।

इधर, यह मुद्दा भी उभरकर सामने आया है कि यदि सड़क निर्माण अंततः अन्य भूमि पर किया जाना है, तो निजी भूमि पर किए गए प्रारंभिक कार्य में हुए व्यय की जवाबदेही किसकी होगी। इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टता सामने नहीं आई है।

भू-स्वामी का कहना है कि उनकी भूमि का सीमांकन पूर्व में किया जा चुका है और बिना अनुमति किसी भी प्रकार का कार्य किया जाना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अपनी भूमि सड़क निर्माण हेतु देने के पक्ष में नहीं हैं।

फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक प्रक्रिया, पारदर्शिता एवं नागरिक अधिकारों से जुड़ा विषय बन गया है। संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जगदलपुर, शौर्यपथ । विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल द्वारा हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर एक भव्य एवं दिव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सिरासार भवन में दीप प्रज्वलित कर की गई। इसके पश्चात सभी पदाधिकारी एवं बजरंगी कार्यकर्ता रैली के रूप में टेकरी स्थित हनुमान मंदिर पहुँचे, जहाँ सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।

प्रांत सह मंत्री रवि ब्रह्मचारी ने कहा कि हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है, और हम सभी को मिलकर सनातन एकता का परिचय देना आवश्यक है। जिलाध्यक्ष शंकर लाल गुप्ता ने कहा कि हमारे बजरंगी ही हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने धर्मांतरण कानून का समर्थन करते हुए सरकार का धन्यवाद किया और कहा, "यह कानून हमारी संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए आवश्यक है, और हम इसका स्वागत करते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि बजरंग दल इस कानून को लागू करने में सरकार का हर संभव सहयोग करेगा।

अरविंद नेताम ने संबोधन करते हुए कहा कि धर्मांतरण आज हमारे समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा बना है, "हम अपनी संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर हैं, और किसी भी प्रकार के धर्मांतरण को बर्दाश्त नहीं करेंगे।"सरकार द्वारा लाए गए कानून का समर्थन कर स्वागत करते हैं।

कार्यक्रम में राजा राम तोड़ेम, दशरथ कश्यप, जागेश्वर साहू, प्रेम चालकी, जविता मंडावी, जिला संयोजक विष्णु ठाकुर, सहसंयोजक योगेश, सेवा प्रमुख अनिल अग्रवाल, अर्चक पुरोहित पंकज मिश्रा, सेवा प्रमुख पवन राजपूत, योगेंद्र कौशिक, विभाग सह मंत्री श्रीनिवास रेड्डी विक्रम सिंह ठाकुर, प्रतिक गुरु,मनोज कुमार ठाकुर, प्रेमसागर ठाकुर ,सहित अनेक कार्यकर्ता एवं सनातनी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन योगेंद्र कौशिक द्वारा सभी अतिथियों का आभार व्यक्त कर किया गया।

नरेश देवांगन की खास रिपोर्ट 

जगदलपुर, शौर्यपथ। राज्य सरकार द्वारा रेत माफियाओं पर लगाम कसने के लिए लगातार सख्त निर्देश जारी किए जा रहे हैं। अवैध उत्खनन, परिवहन और पर्यावरणीय क्षति को रोकने के उद्देश्य से समय-समय पर समीक्षा और निगरानी भी की जा रही है। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नियमों के दायरे में हो और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके बावजूद ताज़ा मामला ग्राम पंचायत बेलगांव का है, जहां शासन की मंशा के विपरीत गतिविधियों के सामने आने के आरोप लग रहे हैं। प्राप्त जानकारी और सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में कथित रूप से अवैध रेत उत्खनन जारी है, जहां नियमों की अनदेखी करते हुए रेत निकासी की जा रही है।

बताया जाता है कि माइनिंग विभाग द्वारा पूर्व में कार्रवाई करते हुए एक पोकलेन मशीन को सील किया गया था, लेकिन इसके बाद भी संबंधित मशीन के उपयोग में आने की बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब विभागीय टीम पुनः मौके पर पहुंची और मशीन को जब्त कर थाना ले जाने का प्रयास किया गया, तब कुछ ग्रामीणों द्वारा विरोध किए जाने की सूचना है।

सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी मिल रही है कि कुछ बाहरी प्रभावशाली लोगों द्वारा ग्रामीणों को प्रलोभन देकर अपने पक्ष में करने की कोशिश की जा रही है। कथित तौर पर ग्रामीणों से यह कहा जा रहा है कि गांव में होने वाले बाली पर्व धार्मिक आयोजन का खर्च उठाया जाएगा, जिसके बदले रेत निकालने की अनुमति दी जाए। वहीं, कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों को आगे कर यह प्रस्तुत किया जाता है कि रेत का उपयोग गांव के निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है।

बुधवार को हुई कार्रवाई के दौरान स्थिति उस समय और जटिल हो गई, जब माइनिंग विभाग की टीम सील मशीन को अपने कब्जे में लेने पहुंची और विरोध के चलते मौके पर भीड़ एकत्रित हो गई। सूचना पर तहसीलदार, एसडीएम एवं नगरनार थाना की टीम भी मौके पर पहुंची, जहां अधिकारियों द्वारा समझाइश दी गई कि यदि ग्रामीण अपने सीमित उपयोग के लिए रेत निकालते हैं तो वह नियमों के अनुरूप हो, लेकिन किसी भी स्थिति में मशीनों का उपयोग न किया जाए।

हालांकि, सूत्रों के अनुसार, इसके बाद भी कथित रूप से रात के समय मशीनों के जरिए नदी से रेत उत्खनन और बाहरी परिवहन की गतिविधियां जारी रहने की बातें सामने आ रही हैं। यदि यह तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन होगा बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई को भी चुनौती माना जाएगा।

 

टेंडर प्रक्रिया पर भी मंडराया संकट, राजस्व नुकसान की आशंका

इसी बीच सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि संबंधित क्षेत्र की रेत खदान को लेकर विभाग द्वारा आगामी समय में टेंडर प्रक्रिया प्रस्तावित है। ऐसे में यदि वर्तमान में कथित रूप से अवैध उत्खनन इसी प्रकार जारी रहा और रेत का अत्यधिक दोहन होता रहा, तो भविष्य में खदान का वास्तविक भंडार प्रभावित हो सकता है। इससे न केवल संभावित ठेकेदार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, बल्कि शासन को मिलने वाली रॉयल्टी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि प्रशासन पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराए और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि शासन की मंशा, पर्यावरणीय संतुलन और राजस्व हितों की प्रभावी सुरक्षा हो सके।

जगदलपुर, शौर्यपथ। राज्य शासन की पशुधन संवर्धन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता एक बार फिर जमीन पर नजर आई, जब पशुधन विकास विभाग द्वारा ग्राम पंचायत हल्बाकचोरा (शासन कचोरा) में शनिवार को भव्य पशु मेला सह पशु प्रदर्शनी का सफल आयोजन किया गया। इस आयोजन ने न केवल पशुपालकों को नई दिशा दी, बल्कि क्षेत्र में उन्नत पशुपालन के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई।

सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी कलचा बृजमोचन देवांगन ने बताया कि विभाग लगातार पशुपालकों को आधुनिक तकनीक, उन्नत नस्ल एवं वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों को बढ़ावा दे रहा है, जिससे पशुपालकों की आय में वृद्धि हो सके।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद पंचायत अध्यक्ष पदलाम नाग रहे। उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम बघेल, कृषि एवं पशुधन सभापति भूपेंद्र ठाकुर, जनपद सदस्य श्रुति शर्मा, सरपंच जयमनी कश्यप एवं उप सरपंच लोकनाथ बघेल की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और भव्य बनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर उप संचालक डॉ. जे. तिग्गा ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां शीतला मंदिर में दीप प्रज्वलित कर देवी के आशीर्वाद के साथ किया गया, जिससे पूरे आयोजन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।

मेले में दुधारू गाय, देसी भैंस वंश, बकरी-भेड़, बतख एवं कुक्कुट वंश के साथ-साथ असील प्रजाति और हरियाणा नस्ल के बैलों की आकर्षक प्रदर्शनी ने सभी का मन मोह लिया। पशुपालकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने श्रेष्ठ पशुओं का प्रदर्शन किया।

विशेष रूप से कृत्रिम गर्भाधान से उत्पन्न उत्कृष्ट दुधारू पशु, उन्नत नस्ल के बकरों (जमुनापारी) एवं बेहतर कुक्कुट वंश के पक्षियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार देकर पशुपालकों को प्रशस्ति पत्र के साथ सम्मानित किया गया। इससे पशुपालकों में नई ऊर्जा और प्रतिस्पर्धा की भावना देखने को मिली।

कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. गीतिका ध्रुव, डॉ. योगेश देवांगन, डॉ. नंदकिशोर मांझी, डॉ. अभिषेक तिर्की, डॉ. सिन्हा सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा। साथ ही कामधेनु विश्वविद्यालय जगदलपुर के प्रशिक्षु विद्यार्थी, प्राचार्य एवं स्टाफ की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को और समृद्ध बनाया।

ग्रामीणों एवं पशुपालकों ने राज्य सरकार एवं पशुधन विकास विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

जगदलपुर, शौर्यपथ। जगदलपुर स्थित महारानी अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए लगाए गए पेयजल व्यवस्था को लेकर लापरवाही सामने आने का दावा किया गया है। जन कल्याण संघ के प्रदेश महासचिव विपिन कुमार तिवारी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि अस्पताल परिसर में लगाया गया आर.ओ. वाटर प्यूरीफायर काफी समय से बंद पड़ा हुआ है। उनके अनुसार मशीन के भीतर जमा पानी भी काफी पुराना हो चुका है, जिससे उसमें काई या अन्य प्रकार की अशुद्धियाँ पनपने की आशंका जताई जा रही है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में ग्रीष्मकाल की शुरुआत हो चुकी है और अस्पताल में आने वाले मरीजों व उनके परिजनों के लिए स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। यदि अनजाने में कोई व्यक्ति उक्त प्यूरीफायर का पानी पी लेता है, तो उसके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रशासन द्वारा समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता बताई गई है।

जन कल्याण संघ के अनुसार अस्पताल प्रबंधन को तत्काल आर.ओ. प्यूरीफायर की मरम्मत कराने या वैकल्पिक स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

संघ के प्रदेश महासचिव ने यह भी कहा कि सामान्यतः शासकीय व्यवस्थाओं में यह देखा जाता है कि यदि कोई अधिकारी लंबे समय तक एक ही पद पर बना रहता है तो कई बार व्यवस्थागत कमियों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा पाता। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि महारानी अस्पताल के अधीक्षक लंबे समय से उक्त पद पर पदस्थ बताए जाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि शासन की स्थानांतरण नीति के अनुसार समय-समय पर अधिकारियों का स्थानांतरण होने से नई कार्यशैली और जवाबदेही के साथ व्यवस्थाओं में सुधार का अवसर मिलता है। फिलहाल अस्पताल की पेयजल व्यवस्था को लेकर उठे इस मुद्दे पर प्रशासन की प्रतिक्रिया और सुधारात्मक कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

नोटिस का पालन या दिखावा? कई पोलों पर अब भी साफ पढ़ा जा रहा ‘WILD WADI’

By – नरेश देवांगन

जगदलपुर, शौर्यपथ। आड़ावाल से कुरंदी मुख्य मार्ग पर शासकीय विद्युत लाइट खंभों पर पेंट के माध्यम से निजी प्रचार लिखे जाने संबंधी खबर “शौर्यपथ” में प्रकाशित हुए लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य होती दिखाई नहीं दे रही है। खबर के प्रकाशन के बाद संबंधित विभाग ने संज्ञान लेने, नोटिस जारी करने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

मौके पर अवलोकन करने पर यह सामने आया कि खंभों पर लिखे गए प्रचार पर सफेद रंग पोतकर उसे ढकने का प्रयास किया गया है। हालांकि, कई स्थानों पर “WILD WADI” नाम अब भी स्पष्ट रूप से पढ़ा जा सकता है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि मूल पेंट को तकनीकी तरीके से हटाने के बजाय उस पर रंग चढ़ाया गया है।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार विभाग ने मामले की आंतरिक गणना कराई है, जिसमें लगभग 130 शासकीय खंभों पर उक्त नाम पेंट से लिखे जाने की जानकारी सामने आई है। यदि यह तथ्यात्मक रूप से सही है, तो यह उल्लंघन सीमित नहीं बल्कि व्यापक स्तर का माना जाएगा। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या नोटिस जारी कर आंशिक सफेदी कर देना पर्याप्त अनुपालन की श्रेणी में माना जा सकता है?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शासकीय संपत्ति पर बिना विधिवत अनुमति किसी भी प्रकार का लेखन या विज्ञापन नियमानुसार प्रतिबंधित है। इसलिए कार्रवाई भी ऐसी होनी चाहिए जो स्पष्ट, पारदर्शी और उदाहरणात्मक हो। कई खंभों पर उभरते अक्षर संकेत देते हैं कि कार्य पूर्णतः संतोषजनक नहीं हुआ है।

दूसरे मार्ग पर नए फ्लेक्स, उठे नए सवाल

इसी बीच हाटगुड़ा से माड़पाल मार्ग पर मुख्य विद्युत खंभों पर “SIDDHARTH COMPUTER ACADEMY” के फ्लेक्स लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह हालिया स्थापना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक मामले में सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई होती, तो संभवतः अन्य स्थानों पर इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं होती।

यदि संबंधित संस्थान या व्यक्ति के पास विधिवत अनुमति है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यदि अनुमति नहीं है, तो नियमानुसार समान रूप से कार्रवाई अपेक्षित है। नागरिकों का मत है कि नियमों का अनुपालन सभी पर समान रूप से होना चाहिए, अन्यथा कार्रवाई की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं।

पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा

प्रशासनिक कार्रवाई का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन होना चाहिए। यदि लगभग 130 खंभों पर उल्लंघन दर्ज हुआ है, तो सुधारात्मक और संभावित दंडात्मक कदमों की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति पर भी रोक लगेगी।

यह खबर किसी व्यक्ति या संस्था विशेष के विरुद्ध आरोप स्थापित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि शासकीय संपत्ति के संरक्षण और नियमों के समान अनुपालन की अपेक्षा को रेखांकित करने के लिए प्रकाशित की जा रही है।

अब सबकी निगाहें संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या पेंट प्रचार को पूर्णतः तकनीकी तरीके से हटाकर एक स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया जाएगा, या वर्तमान स्थिति को ही पर्याप्त मान लिया जाएगा?

सवाल सीधा है: क्या नियम व्यवहार में भी उतनी ही गंभीरता से लागू होंगे, जितनी कागज़ों में दिखाई देते हैं?

By – नरेश देवांगन

जगदलपुर, शौर्यपथ। आड़ावाल से कुरंदी जाने वाले मुख्य मार्ग पर शासकीय विद्युत लाइट खंभों पर पेंट के माध्यम से निजी प्रचार लिखे जाने का मामला सामने आया है। सड़क के दोनों ओर लगे कई सरकारी पोलों पर वाइल्ड वादी का नाम स्थायी रूप से अंकित देखा गया, जिससे शासकीय संपत्ति के उपयोग को लेकर नियमों के पालन पर प्रश्न उठ रहे हैं।

यह प्रचार किसी अस्थायी बैनर या पोस्टर के रूप में नहीं, बल्कि सीधे पेंट के माध्यम से किया गया है। जानकारों के अनुसार शासकीय परिसंपत्तियों पर बिना सक्षम अनुमति किसी भी प्रकार का लेखन या विज्ञापन नियमों के अनुरूप नहीं माना जाता। पेंट से लिखे गए ऐसे प्रचार को हटाने में समय और संसाधन दोनों की आवश्यकता पड़ सकती है।

उक्त मार्ग यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में विद्युत खंभों की मूल पहचान प्रभावित होने से संधारण, तकनीकी कार्यों अथवा आपात स्थिति में कठिनाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मामला सार्वजनिक मार्ग से जुड़ा होने के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है।

इस संबंध में सहायक अभियंता, जगदलपुर ग्रामीण, श्री खोबरागड़े ने बताया कि विद्युत खंभों पर किसी भी प्रकार के निजी प्रचार-प्रसार की अनुमति नहीं दी जाती, क्योंकि यह सुरक्षा की दृष्टि से जोखिमपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी जा रही है तथा नियमानुसार नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

नागरिकों ने अपेक्षा जताई है कि संबंधित विभाग जांच कर आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि शासकीय संपत्ति का उपयोग निर्धारित उद्देश्य तक ही सीमित रहे और भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो।

280 जोड़ों के विवाह से ‘गोल्डन बुक’ में नाम दर्ज, लेकिन व्यवस्थागत खामियों ने बिगाड़ा आयोजन का स्वाद

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक खुशहाली पहुँचाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। मंगलवार को जगदलपुर में संपन्न हुआ मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का भव्य आयोजन मुख्यमंत्री के इसी 'सुशासन' का प्रतीक था, जहाँ 280 गरीब परिवारों की बेटियों का घर बसाया गया। मुख्यमंत्री ने स्वयं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़कर पिता की तरह नवदंपत्तियों को आशीर्वाद दिया। लेकिन, अफ़सोस कि मुख्यमंत्री की इस पवित्र मंशा को जमीन पर उतारने वाले महिला एवं बाल विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी कार्यप्रणाली से सुशासन को 'कुशासन' की ओर धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी?

 मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता बनाम अफसरों की संवेदनहीनता

एक ओर साय सरकार ने प्रदेशभर में 6,412 जोड़ों का विवाह संपन्न कराकर छत्तीसगढ़ का नाम 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया, वहीं दूसरी ओर जगदलपुर के सिटी ग्राउंड में विभाग की घोर लापरवाही ने इस गौरवशाली क्षण को शर्मसार कर दिया। शासन की योजना तो बेटियों को सम्मान देने की थी, लेकिन विभाग के लापरवाह प्रबंधन ने कई नवविवाहित जोड़ों और उनके परिजनों को तपती धूप में खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठकर भोजन करने के लिए मजबूर कर दिया।

 क्या यही है सुशासन?

आयोजन स्थल पर टेंट, दरी और पानी जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं का कमी विभाग की तैयारियों की पोल खोल रहा था। जिस आयोजन को विभाग की देखरेख में यादगार और सम्मानजनक होना चाहिए था, उसे अधिकारियों की उदासीनता ने बदइंतजामी की भेंट चढ़ा दिया। बारातियों को घंटों भोजन के लिए तरसना पड़ा, जो यह सवाल खड़ा करता है कि जब सरकार ने बजट की कोई कमी नहीं रखी, तो फिर व्यवस्थाओं में यह 'कंजूसी' और 'लापरवाही' किसके संरक्षण में हुई?

 जिम्मेदारों पर कार्रवाई की दरकार

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति के बावजूद विभाग के मैदानी अमले की निष्क्रियता साफ दिखी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जहाँ अपनी योजनाओं से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ा रहे हैं, वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग के ऐसे जिम्मेदार अधिकारी अपनी लचर व्यवस्था से सरकार की छवि धूमिल करने का काम कर रहे हैं। जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या इन लापरवाह जिम्मेदारों पर गाज गिरेगी, या फिर रिकॉर्ड की आड़ में इन व्यवस्थागत खामियों को दबा दिया जाएगा?

इस कार्यक्रम मे महापौर संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन, राजस्व सभापति संग्राम सिंह राणा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी, जनपद पंचायत अध्यक्ष पदलाम नाग सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में विवाह संस्कार संपन्न हुए, पर सामने आई व्यवस्थागत कमियों ने आयोजन की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगाया।

 विभाग का पक्ष

जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री सिन्हा ने कहा कि 280 जोड़ों का सामूहिक विवाह योजनानुसार संपन्न हुआ। भोजन में दाल, चावल, पूड़ी, सब्जी और रसगुल्ला रखा गया था तथा सभी को भोजन उपलब्ध कराया गया। उनके अनुसार आयोजन स्थल पर सामूहिक रूप से भोजन कराया गया और वे स्वयं निरीक्षण किये हैं।

हालाँकि, मौके पर मौजूद कुछ नवविवाहित जोड़ों ने अव्यवस्था के चलते भोजन नहीं कर पाने की बात कही, जिससे विभागीय दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जगदलपुर, शौर्यपथ। शहर की भागदौड़, धूल और शोर-शराबे से दूर बस्तरवासियों को प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने का एक अनुपम स्थल मिल गया है। कुम्हड़ाकोट में निर्मित जनजातीय गौरव वाटिका का लोकार्पण शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप तथा विधायक किरण सिंह देव के कर-कमलों से हुआ। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह वाटिका अब आमजन के लिए समर्पित कर दी गई है, जो बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी है।

लोकार्पण समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, छत्तीसगढ़ बेवरेजेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास मद्दी, मुख्य वन संरक्षक आलोक तिवारी, संचालक कांगेर वैली सुश्री स्टायलो मंडावी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

लोकार्पण के पश्चात अतिथियों ने वाटिका का अवलोकन किया। वन मंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में फैली इस परियोजना की शुरुआत हेल्थ पार्क की अवधारणा से हुई थी, जिसे बाद में एक बहुआयामी और आकर्षक वाटिका के रूप में विकसित किया गया। उप मुख्यमंत्री ने 1700 मीटर लंबे वॉकिंग ट्रेल, योगा शेड, योगा जोन, ओपन जिम जैसी आधुनिक सुविधाओं की सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में सराहनीय पहल बताया।

वाटिका में बनाए गए गपशप जोन, पारिवारिक आयोजनों के लिए निर्मित पाँच सुंदर पगोड़ा, प्लास्टिक फ्री जोन की व्यवस्था तथा इको-फ्रेंडली अवधारणा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। परिसर के मध्य स्थित तालाब और आइलैंड ने वाटिका की सुंदरता को और निखार दिया है। आगंतुकों की सुविधा के लिए प्रवेश द्वार पर पार्किंग और प्रसाधन की समुचित व्यवस्था भी की गई है। वन विभाग द्वारा भविष्य में ट्री-हाउस और एडवेंचर गतिविधियों की योजना भी प्रस्तावित है। लोकार्पण के साथ ही जनजातीय गौरव वाटिका अब बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख आकर्षण के रूप में दर्ज हो गई है।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप द्वारा विभिन्न स्व-सहायता समूहों एवं हितग्राहियों को एक करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि के चेक वितरित किए गए। वृत्त स्तरीय चक्रीय निधि के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक करोड़ 20 लाख 13 हजार रुपये का ऋण प्रदान किया गया।

बकावण्ड की मां धारणी करणी स्व-सहायता समूह को काजू प्रसंस्करण एवं विपणन हेतु 50 लाख रुपये, आसना के गोधन स्व-सहायता समूह को गाय पालन के लिए 34 लाख रुपये, घोटिया एवं भानपुरी के समूहों को इमली संग्रहण व प्रसंस्करण के लिए 13-13 लाख रुपये तथा कोलेंग की समिति को दोना-पत्तल निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की सहायता दी गई। यह पहल स्थानीय रोजगार को मजबूती देने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना के तहत कुरंदी निवासी कमलोचन नाग को दो लाख रुपये की बीमा सहायता राशि का चेक सौंपा। यह सहायता उनकी पत्नी स्वर्गीय भारती नाग के आकस्मिक निधन के पश्चात स्वीकृत की गई थी।

उप मुख्यमंत्री ने महिला स्व-सहायता समूहों से संवाद करते हुए इमली एवं काजू प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों के विस्तार, बाजार उपलब्धता और मार्केटिंग व्यवस्था पर भी चर्चा की। यह कार्यक्रम न केवल विकास और पर्यटन को गति देने वाला रहा, बल्कि बस्तर के वनांचलों में रोजगार, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करता नजर आया।

आदिवासी-ओबीसी-माइनोरिटी समाजों ने जताई नाराज़गी

प्रमुख प्रश्न: DMFT व CSR फंड के उपयोग को लेकर पारदर्शिता की मांग

जगदलपुर, शौर्यपथ। वीर आदिवासी क्रांतिकारी गुंडाधुर की जयंती (भूमकाल दिवस) के आयोजन को लेकर बस्तर संभाग में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा कुछ प्रश्न और आपत्तियाँ सामने रखी गई हैं। सर्व आदिवासी समाज सहित एसटी-एससी-ओबीसी-माइनोरिटी समाजों का कहना है कि उन्होंने नगरनार स्टील लिमिटेड (NMDC) से कार्यक्रम के लिए सहयोग का अनुरोध किया था, लेकिन उन्हें सकारात्मक जवाब नहीं मिला।

समाज प्रतिनिधियों के अनुसार, 10 फरवरी को प्रस्तावित गुंडाधुर जयंती कार्यक्रम के संबंध में बस्तर संभाग के विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने नगरनार स्टील लिमिटेड के एडीजीएम बाबजी से मुलाकात कर औपचारिक आमंत्रण सौंपा था। इस दौरान सामाजिक सहभागिता और सहयोग का निवेदन किया गया।

समाज प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें प्रबंधन की ओर से यह जानकारी दी गई कि स्टील प्लांट आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है, जिस कारण किसी प्रकार का सहयोग फिलहाल संभव नहीं है। इसके बाद उन्हें परियोजना से जुड़े अन्य अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी गई, जहाँ से भी उन्हें कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिल पाया।

प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि कार्यकारी निदेशक से मुलाकात के प्रयास के दौरान व्यस्तता का हवाला दिया गया, जिससे वे अपनी बात सीधे रखने में असमर्थ रहे। इस स्थिति से समाजों में असंतोष व्यक्त किया जा रहा है।

इसी क्रम में समाजों की ओर से यह प्रश्न भी उठाया गया है कि जिले के लिए स्वीकृत DMFT और CSR फंड का उपयोग किन-किन कार्यों में किया जा रहा है। समाजों का कहना है कि यदि यह राशि स्थानीय विकास और सामाजिक गतिविधियों के लिए है, तो ऐसे ऐतिहासिक व सांस्कृतिक आयोजनों में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।

सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि गुंडाधुर जयंती बस्तर के आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि भविष्य में सामाजिक संवाद और समन्वय के माध्यम से ऐसे विषयों का समाधान निकाला जाएगा।

ओबीसी महासभा एवं अन्य समाज संगठनों ने मांग की है कि स्थानीय युवाओं के रोजगार, सामाजिक सहभागिता तथा DMFT-CSR फंड के उपयोग से संबंधित जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

समाज प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वे इस विषय पर संवाद और संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी बात रखना चाहते हैं।

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