November 08, 2026
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    दंतेवाड़ा की माटी से अमेरिका तक बनाई पहचान, मुख्यमंत्री साय ने गणेश कुमार कर को लिखी स्नेहभरी पाती

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    विदेश में रहकर भी छत्तीसगढ़ की संस्कृति, भाषा और परंपराओं को सहेजने के प्रयासों की मुख्यमंत्री ने की सराहना, NACHA के माध्यम से प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को जोड़ने की पहल को बताया प्रेरणादायक

    स्वदेशी मेला से सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच और ‘उड़ान’ पहल से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा एवं छात्रवृत्ति में सहयोग; मुख्यमंत्री बोले- प्रवासी छत्तीसगढ़ियों की सहभागिता विकसित छत्तीसगढ़-2047 के संकल्प को करेगी मजबूत

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की माटी में जन्म लेकर सात समंदर पार अमेरिका तक अपनी पहचान बनाने वाले दंतेवाड़ा जिले के गणेश कुमार कर ने विदेश में रहते हुए भी अपनी जन्मभूमि, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखा है। उनके इसी सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान को सराहते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर उन्हें स्नेहभरा पत्र लिखकर शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में विदेशों में बसे छत्तीसगढ़ियों को एकजुट करने, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग देने के उनके प्रयासों की विशेष सराहना की है।

    मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत पत्र प्राप्त होने पर गणेश कुमार कर ने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने संदेश में मुख्यमंत्री का पत्र भी प्रदर्शित किया।

    दंतेवाड़ा से अमेरिका तक का सफर, अपनी जड़ों से अटूट रिश्ता

    मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पत्र में कहा कि दंतेवाड़ा से अमेरिका तक गणेश कुमार कर की यात्रा प्रेरणादायक है। विदेश में व्यस्त जीवन के बावजूद अपनी जन्मभूमि, मातृभाषा, संस्कृति और परंपराओं के प्रति उनका लगाव छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरे अपनत्व को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय है।

    NACHA के माध्यम से विदेशों में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान

    मुख्यमंत्री ने नॉर्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन (NACHA) के माध्यम से अमेरिका में बसे छत्तीसगढ़ियों को एकजुट करने के गणेश कुमार कर के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विदेशों में छत्तीसगढ़ी भाषा और बोली को जीवंत रखना, तीज-त्योहारों को सामूहिक रूप से मनाना तथा सांस्कृतिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना अपनी मातृभूमि से जुड़ाव बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

    मुख्यमंत्री ने गणेश कुमार कर द्वारा आयोजित ‘स्वदेशी मेला’ की पहल को भी सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों, कला, संस्कृति और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने का यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

    ‘उड़ान’ पहल से विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने का प्रयास

    गणेश कुमार कर की सामाजिक पहल ‘उड़ान’ की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा और छात्रवृत्ति के लिए किए जा रहे प्रयास सामाजिक संवेदनशीलता और अपनी मातृभूमि के प्रति जिम्मेदारी का परिचायक हैं। स्वयं सफलता हासिल करने के साथ जरूरतमंद विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सहयोग करना समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक मिसाल है।

    विकसित छत्तीसगढ़-2047 में प्रवासियों की भी होगी महत्वपूर्ण भूमिका

    मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पत्र में विकसित भारत-2047 और विकसित छत्तीसगढ़-2047 के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशों में निवासरत छत्तीसगढ़ियों का अनुभव, ज्ञान, कौशल और अपनी मातृभूमि के प्रति लगाव प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने गणेश कुमार कर से सभी प्रवासी छत्तीसगढ़ियों तक राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं पहुंचाने का आग्रह भी किया।

    उल्लेखनीय है कि दंतेवाड़ा जैसे आदिवासी बहुल वनांचल जिले से निकलकर अमेरिका में अपनी पहचान बनाने वाले गणेश कुमार कर आज भी अपनी जन्मभूमि और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हुए हैं। प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को संगठित करने, भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों की शिक्षा में सहयोग के उनके प्रयास सामाजिक सहभागिता का उदाहरण हैं।
    मुख्यमंत्री की यह आत्मीय पहल विदेशों में रह रहे छत्तीसगढ़वासियों के साथ राज्य के भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव को रेखांकित करती है। यह संदेश भी देती है कि छत्तीसगढ़िया चाहे दुनिया के किसी भी कोने में निवास करे, अपनी माटी, संस्कृति और प्रदेश के विकास से उसका रिश्ता हमेशा कायम रहता है।

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