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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
नई दिल्ली, ।
भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा नई दिल्ली स्थित ए.पी. शिंदे संगोष्ठी हॉल, NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा में एक दिवसीय “अखिल भारतीय राजभाषा समारोह-2026” का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में राजभाषा हिंदी के संवर्धन, प्रचार-प्रसार और कार्यालयीन कार्यों में उसके प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन महानिदेशक (एनएसएस) सुश्री गीता सिंह राठौर ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं की सहज एवं प्रभावी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से दैनिक शासकीय कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया।
समारोह में महानिदेशक (सीएस), अपर सचिव, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय सहित मंत्रालय और क्षेत्र संकार्य प्रभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्यरत कनिष्ठ अनुवाद अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित परिचर्चा सत्र में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के निदेशक श्री श्याम सुंदर कथूरिया ने राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के सहज, सरल और प्रभावी उपयोग के व्यावहारिक उपाय भी साझा किए। साथ ही देश के तीनों राजभाषा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे पैनल सदस्यों ने विभिन्न चुनौतियों और उनसे जुड़े समाधान प्रस्तुत किए।
समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों को यह संदेश दिया गया कि राजभाषा हिंदी देश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। जिन कर्मचारियों को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त नहीं है, उन्हें हिंदी प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को अपने अधीनस्थ उप-क्षेत्रीय कार्यालयों में हिंदी में कार्य बढ़ाने तथा राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया गया।
नई दिल्ली ।
न्यायमूर्ति श्री यशवंत वर्मा से जुड़े आरोपों की जांच कर रही न्यायाधीश जांच समिति ने सोमवार को अपनी महत्वपूर्ण रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला को सौंप दी। यह रिपोर्ट संसद भवन में औपचारिक रूप से प्रस्तुत की गई। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए तैयार की गई इस रिपोर्ट को जल्द ही संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जाएगा।
समिति के पीठासीन अधिकारी एवं सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने यह रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी। इस दौरान समिति के अन्य सदस्य — बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर तथा कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बी.वी. आचार्य — भी उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि इस जांच समिति का गठन लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला द्वारा 12 अगस्त 2025 को किया गया था। समिति को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अब इस रिपोर्ट के संसद में पेश होने के बाद राजनीतिक और न्यायिक गलियारों में इसकी व्यापक चर्चा तेज होने की संभावना है। रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आए हैं, इस पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।
जगदलपुर/बस्तर ।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने रविवार को छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के नेतानार गांव में “शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केन्द्र” का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि दशकों तक हिंसा और भय से जूझते बस्तर में विकास, विश्वास और नई शुरुआत का प्रतीक बनकर सामने आया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, केंद्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन, इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक श्री तपन डेका सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि बस्तर की यह धरती केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव और प्रेरणा का केंद्र है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1910 में वीर गुण्डाधुर ने भूमकाल विद्रोह के माध्यम से अंग्रेजी शासन के खिलाफ आदिवासी अस्मिता और स्वतंत्रता की लड़ाई छेड़ी थी।
शाह ने कहा—
“शहीद वीर गुण्डाधुर की जन्मभूमि और कर्मभूमि हर भारतीय के लिए तीर्थ समान है। उन्हीं की प्रेरणा से आज सुरक्षा कैंप को सेवा कैंप में बदला जा रहा है।”
अमित शाह ने भावुक स्वर में कहा कि यही वह क्षेत्र है जहां नक्सल हिंसा में 6 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या हुई थी। स्कूल, अस्पताल और विकास कार्यों को नष्ट किया गया, आदिवासियों को शिक्षा, रोजगार और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं से दूर रखा गया।
उन्होंने कहा—
“आज उसी स्थान पर गरीब आदिवासियों की सेवा का तीर्थ बनाया जा रहा है। यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक परिवर्तन है।”
केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल नक्सलियों का सफाया करना नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासियों तक शहरों जैसी सुविधाएं पहुंचाना है।
उन्होंने बताया कि अब गांवों में—
जैसी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं।
अमित शाह ने नक्सलवाद को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा—
“नक्सलियों ने वर्षों तक यह भ्रम फैलाया कि विकास न होने के कारण उन्होंने हथियार उठाए। सच्चाई यह है कि विकास इसलिए नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने हथियार उठा रखे थे।”
उन्होंने कहा कि रायपुर जैसे शहरों में जो विकास हुआ है, वही सुविधाएं अब एक-एक गांव तक पहुंचाई जाएंगी।
गृह मंत्री ने घोषणा की कि बस्तर क्षेत्र में मौजूद लगभग 200 कैंपों में से 70 कैंपों को अगले डेढ़ वर्षों में इसी प्रकार के आधुनिक जनसेवा केंद्रों में बदला जाएगा।
इन केंद्रों में उपलब्ध होंगी—
एक ही स्थान पर।
अमित शाह का सबसे चर्चित बयान तब सामने आया जब उन्होंने कहा—
“देशभर में आजादी 1947 में आई थी, मगर बस्तर में 31 मार्च 2026 के बाद आजादी का सूर्योदय हुआ है।”
उन्होंने कहा कि दशकों की हिंसा और पिछड़ेपन से हुए नुकसान की भरपाई अगले पांच वर्षों में करने का लक्ष्य सरकार ने तय किया है।
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार केवल सुरक्षा और सड़क तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आदिवासी संस्कृति, खेल और परंपराओं को भी विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का काम करेगी।
इसी उद्देश्य से—
जैसी पहल शुरू की गई हैं, जिनके माध्यम से आदिवासी खेल, साहित्य, संगीत, भाषा, कला और खानपान को बढ़ावा दिया जा रहा है।
नेतानार में शुरू हुआ यह जन सुविधा केंद्र बस्तर में उस परिवर्तन की तस्वीर बनकर उभरा है, जहां कभी भय और बंदूकें थीं, वहां अब विकास, सेवाएं और लोकतंत्र की पहुंच दिखाई दे रही है।
सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में बस्तर केवल नक्सलवाद से मुक्त क्षेत्र नहीं, बल्कि देश के सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले आदिवासी क्षेत्रों में शामिल होगा।
रायपुर / शौर्यपथ /
कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में सुशासन तिहार के तहत ग्राम पंचायत झापरा में सुशासन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और शासन की विभिन्न योजनाओं तथा प्रशासनिक सेवाओं का लाभ प्राप्त किया।
शिविर में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और कई मामलों का मौके पर ही समाधान किया। साथ ही लोगों को शासकीय योजनाओं, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी भी दी गई।
सुकमा तहसीलदार श्री गिरीश निम्बालकर, सरपंच श्रीमती मुन्नी मड़कामी और उपसरपंच श्री प्रवीण बारसे की मौजूदगी में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न प्रमाण पत्र वितरित किए गए। शिविर में 8 जाति प्रमाण पत्र, 12 निवास प्रमाण पत्र, 8 किसान किताब तथा 2 नामांतरण आदेश प्रदान किए गए। इससे ग्रामीणों, विद्यार्थियों और किसानों को बड़ी राहत मिली।
शिविर की एक खास उपलब्धि किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ना भी रही। यहां 5 किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन किया गया। इससे किसानों को भविष्य में डिजिटल कृषि सेवाओं और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
ग्रामीणों ने शिविर में त्वरित समाधान और एक ही स्थान पर विभिन्न सेवाएं मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविरों से गांव में ही जरूरी काम पूरे हो रहे हैं, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है।
सुशासन तिहार के तहत आयोजित ये शिविर शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रहे हैं।
बस्तर की शांति, सुरक्षा और विकास के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को किया नमन
शहीद जवानों के परिवारों के बीच बैठकर केंद्रीय गृहमंत्री ने बंधाया ढांढस, हरसंभव सहयोग का दिलाया भरोसा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जवानों के अदम्य साहस को किया नमन
रायपुर / शौर्यपथ / केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान आज जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचकर माओवाद के विरुद्ध संघर्ष में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले एक हजार से अधिक अमर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय उपस्थित थे ।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर की धरती पर शांति, सुरक्षा और विकास स्थापित करने में हमारे जवानों का बलिदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर जवानों का त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार बस्तर में स्थायी शांति स्थापित करने, विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और माओवाद के समूल उन्मूलन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीजापुर नक्सली हमले में शहीद हुए जवान कालेन्द्र प्रसाद नायक एवं पवन कुमार मंडावी के परिजनों से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने परिवारजनों के बीच बैठकर उनका दुख साझा किया, ढांढस बंधाया तथा सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सुरक्षाबलों के जवानों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया और उनके साहस एवं समर्पण की सराहना की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शहीद जवानों का बलिदान छत्तीसगढ़ कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहीद परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अब शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसमें सुरक्षाबलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण देव सहित जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
राजनांदगांव/शौर्यपथ /जिले को नशा मुक्त बनाने के लिए पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में चौकी चिखली पुलिस ने अवैध शराब बिक्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से बड़ी मात्रा में देशी शराब और बिक्री रकम जब्त की गई है।
चिखली चौकी प्रभारी से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर के मार्गदर्शन एवं नगर पुलिस अधीक्षक श्रीमती वैशाली जैन के पर्यवेक्षण में जिलेभर में अवैध गांजा, शराब बिक्री, असामाजिक तत्वों और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
इसी अभियान के तहत 17 मई 2026 को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम बोईरडीह स्थित प्राथमिक शाला भवन की बाउंड्री के पास एक व्यक्ति अवैध रूप से शराब बिक्री कर रहा है। सूचना मिलते ही चौकी चिखली पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और चारों तरफ से घेराबंदी कर कार्रवाई की। मौके पर पुलिस ने आरोपी उगेश पारधी पिता संतलाल पारधी उम्र 33 वर्ष निवासी बोईरडीह, ओपी चिखली जिला राजनांदगांव को शराब बेचते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। तलाशी लेने पर आरोपी के कब्जे से 43 पौवा सवा शेरा देशी शराब बरामद हुई, जिसकी कुल मात्रा 7.740 बल्क लीटर एवं कीमत लगभग 3440 रुपये आंकी गई। इसके अलावा शराब बिक्री से प्राप्त 200 रुपये नकद भी जब्त किए गए।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 34(2) आबकारी एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की। बाद में आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध पूर्व में भी आबकारी एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं। लगातार कार्रवाई के चलते क्षेत्र में अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। इस पूरी कार्रवाई में चौकी चिखली पुलिस की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले — “जनहित और सुशासन की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल”
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में नागरिक सुरक्षा और त्वरित राहत व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ‘नेक्स्ट जेन CG डायल-112’ सेवा के माध्यम से अब प्रदेश के सभी 33 जिलों में जरूरतमंद नागरिकों को आपात परिस्थितियों में तेज, सुरक्षित और प्रभावी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इस अत्याधुनिक सेवा के अंतर्गत आज भारत सरकार के माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आधुनिक इमरजेंसी एवं हाईवे वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह पहल सड़क दुर्घटनाओं, मेडिकल इमरजेंसी, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण तथा अन्य संकटपूर्ण परिस्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस पहल को जनहित और सुशासन की दिशा में राज्य सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को बेहतर सुरक्षा और त्वरित सहायता उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि —
“नेक्स्ट जेन CG डायल-112 सेवा केवल एक तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास और सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल है। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को शीघ्र राहत मिलेगी और प्रदेश में सुरक्षा तंत्र पहले से अधिक प्रभावी होगा।”
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग और माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ लगातार आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और सुशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेष रूप से दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी अब बेहतर आपात सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रही है और नई डायल-112 सेवा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राज्य सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक से लैस यह व्यवस्था पुलिस, स्वास्थ्य और आपदा राहत सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी, जिससे किसी भी संकट की स्थिति में नागरिकों को कम समय में सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
‘नेक्स्ट जेन CG डायल-112’ सेवा को सुरक्षित, संवेदनशील और सशक्त छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक बड़ा और जनहितैषी कदम माना जा रहा है।
रायपुर। प्रभु श्रीराम के ननिहाल एवं माता कौशल्या की पावन धरा छत्तीसगढ़ में भारत सरकार के माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के आगमन को लेकर प्रदेशभर में उत्साह और आत्मीयता का वातावरण दिखाई दे रहा है।
प्रदेशवासियों की ओर से उनके प्रति हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन व्यक्त किया गया है। यह दौरा केवल एक औपचारिक प्रवास नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के विकास, सुरक्षा और सुशासन के संकल्प को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
प्रदेश में केंद्र सरकार के सतत सहयोग और डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। विशेषकर बस्तर क्षेत्र, जो वर्षों तक नक्सलवाद की चुनौती से प्रभावित रहा, आज विकास और विश्वास की नई दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है।
माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ नेतृत्व, स्पष्ट रणनीति और सुरक्षा बलों के मनोबल को मजबूत करने वाले निर्णयों के कारण बस्तर में शांति स्थापना और विकास कार्यों को नई गति मिली है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार जैसे क्षेत्रों में लगातार हो रहे कार्य अब आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि गृहमंत्री का यह प्रवास प्रदेश के विकास कार्यों को और अधिक गति देगा तथा सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बस्तर के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
छत्तीसगढ़ की जनता को विश्वास है कि केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से प्रदेश आने वाले समय में विकास, सुरक्षा और जनकल्याण का नया उदाहरण बनेगा।
छत्तीसगढ़ की समस्त जनता की ओर से
माननीय केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।
कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी अमित शुक्ला के निधन से शोक की लहर
बस्तर सहित पूरे पुलिस महकमे के लिए अत्यंत दुःखद समाचार सामने आया है।
बस्तर के विभिन्न थानों में अपनी सेवाएं देने वाले पुलिस अधिकारी श्री अमित शुक्ला का असमय निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पुलिस विभाग, सहयोगियों और क्षेत्रीय नागरिकों में गहरा शोक व्याप्त है।
श्री अमित शुक्ला अपने शांत स्वभाव, कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली और जनता के प्रति संवेदनशील व्यवहार के लिए जाने जाते थे। बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए पुलिस विभाग में अपनी अलग पहचान बनाई थी।
उनकी कार्यशैली में अनुशासन के साथ मानवीय संवेदनाएं भी स्पष्ट दिखाई देती थीं, यही कारण रहा कि वे अपने साथियों और आम नागरिकों के बीच सम्मानित अधिकारी के रूप में पहचाने जाते थे।
उनका असमय निधन केवल एक अधिकारी की विदाई नहीं, बल्कि पुलिस महकमे के लिए ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई लंबे समय तक संभव नहीं होगी।
विभाग के अनेक अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसे व्यक्तिगत क्षति बताया है।
शोक संदेशों का सिलसिला लगातार जारी है।
सहकर्मियों का कहना है कि अमित शुक्ला ने अपने सेवा काल में कठिन परिस्थितियों के बीच भी कर्तव्य को सर्वोपरि रखा और सदैव ईमानदारी एवं समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार को यह असीम दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति ?
राजनीतिक लेख
मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर बहस तेज हो गई है।
2020 में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद जो राजनीतिक भूचाल आया था, उसकी गूंज आज भी प्रदेश की राजनीति में साफ सुनाई देती है। समय बीत गया, सरकारें बदल गईं, चेहरे बदल गए, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मन में पैदा हुई टीस अब भी खत्म नहीं हुई।
राजनीति में दल बदल नया नहीं है। भारतीय लोकतंत्र ने कई बड़े नेताओं को विचारधारा बदलते देखा है। लेकिन सिंधिया का मामला केवल “पार्टी बदलने” तक सीमित नहीं माना गया। कांग्रेस के भीतर एक बड़ा वर्ग इसे उस जनादेश के टूटने के रूप में देखता है, जिसे जनता ने 2018 में भाजपा के खिलाफ दिया था।
कांग्रेस की पीड़ा: “नेता गया या भरोसा टूटा?”
कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं का एक हिस्सा आज भी यह मानने को तैयार नहीं है कि सिंधिया की विदाई केवल व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय था।
उनके लिए यह उस संघर्ष का अंत था, जिसे कार्यकर्ताओं ने वर्षों तक भाजपा के खिलाफ लड़कर खड़ा किया था।
2018 के चुनाव में कांग्रेस सत्ता तक पहुंची, लेकिन डेढ़ साल बाद सरकार गिर गई।
उसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच एक भावना गहराई से बैठ गई कि सत्ता परिवर्तन केवल राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि लाखों समर्थकों के भरोसे पर भी आघात था।
यही कारण है कि जब भी सिंधिया की संभावित वापसी या कांग्रेस से किसी तरह के राजनीतिक संवाद की चर्चा होती है, पार्टी के भीतर विरोध की आवाजें तेज हो जाती हैं।
कई कार्यकर्ता खुलकर कहते हैं कि “विश्वास एक बार टूट जाए तो राजनीतिक रिश्ते पहले जैसे नहीं रहते।”
भाजपा में भी पूरी सहजता नहीं?
दूसरी तरफ भाजपा में भी सिंधिया की स्थिति को लेकर समय-समय पर चर्चाएँ उठती रही हैं।
हालांकि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ दीं, लेकिन जमीनी स्तर पर भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं के भीतर पूरी सहजता हमेशा दिखाई दे — ऐसा भी नहीं कहा जा सकता।
भाजपा का एक परंपरागत कैडर वर्षों तक कांग्रेस और विशेष रूप से सिंधिया परिवार की राजनीति के खिलाफ संघर्ष करता रहा।
ऐसे में अचानक वही चेहरा पार्टी का बड़ा नेता बन जाए, यह बदलाव हर कार्यकर्ता सहजता से स्वीकार कर पाए — यह जरूरी नहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने सिंधिया को रणनीतिक रूप से स्वीकार किया, लेकिन भावनात्मक स्वीकार्यता का सवाल अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
“किंगमेकर” से “राजनीतिक संतुलन” तक
कभी मध्यप्रदेश की राजनीति में सिंधिया को भविष्य के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में देखा जाता था।
उनकी युवा छवि, प्रभावशाली वक्तृत्व और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में मजबूत पकड़ उन्हें कांग्रेस की बड़ी उम्मीद बनाती थी। लेकिन 2020 के बाद उनकी राजनीति की दिशा पूरी तरह बदल गई।
आज स्थिति यह है कि वे सत्ता के केंद्र में होने के बावजूद लगातार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बने रहते हैं — लेकिन अलग वजहों से।
सवाल अब यह नहीं रह गया कि सिंधिया कितने प्रभावशाली हैं, बल्कि यह बन गया है कि वे किस राजनीतिक ध्रुव पर पूरी तरह स्वीकार किए जाते हैं।
क्या “बीच की राजनीति” सबसे कठिन होती है?
भारतीय राजनीति में सबसे कठिन स्थिति अक्सर उन्हीं नेताओं की होती है जो दो वैचारिक या राजनीतिक ध्रुवों के बीच खड़े दिखाई देते हैं।
न पूरी तरह पुराने साथियों का भरोसा बचता है, न नए राजनीतिक परिवार में पूर्ण आत्मीयता तुरंत बन पाती है।
सिंधिया आज शायद उसी दौर से गुजरते दिखाई देते हैं।
कांग्रेस उन्हें “विश्वासघात” की राजनीति के प्रतीक के रूप में देखती है, जबकि भाजपा में भी उन्हें लेकर एक सतर्क दूरी समय-समय पर महसूस की जाती है।
आगे क्या?
राजनीति संभावनाओं का खेल है।
यहां स्थायी दोस्त और दुश्मन जैसी परिभाषाएँ अक्सर बदलती रहती हैं। लेकिन जनता और कार्यकर्ताओं की स्मृति सत्ता के समीकरणों से कहीं अधिक लंबी होती है।
यही वजह है कि 2020 का घटनाक्रम आज भी मध्यप्रदेश की राजनीति में केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान बहस का हिस्सा बना हुआ है।
और सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—
क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया अब ऐसी राजनीतिक स्थिति में पहुंच चुके हैं, जहाँ सत्ता तो है, लेकिन दोनों पक्षों में पूर्ण स्वीकार्यता का संकट भी साथ चल रहा है?
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
