August 02, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    पृथ्वी दिवस पर भारत के युवाओं का 20 शहरों में अभियान- डेयरी उ‌द्योग की पर्यावरणीय कीमत पर सवाल

    • rounak group

    भिलाई, छत्तीसगढ़ । शौर्यपथ । इस पृथ्वी दिवस पर भारत के युवाओं ने देश के डेयरी उ‌द्योग की पर्यावरणीय और नैतिक लागत के विरुद्ध आवाज़ उठाई। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और साथ ही गोमांस निर्यात में भी अग्रणी एक ऐसा तथ्य जो प्रायः सार्वजनिक विमर्श से ओझल रहता है। भिलाई में युवा प्रतिनिधियों ने सूर्या टी आई मॉल, भिलाई में एक सार्वजनिक प्रतिष्ठापन के माध्यम से डेयरी के पर्यावरणीय दुष्प्रभावों और उसके गोमांस उ‌द्योग से गहरे संबंध को उजागर किया। इस समय देशभर के 20 शहरों में युवा इस सच्चाई की ओर ध्यान दिला रहे हैं कि "दूध और गोमांस एक ही जानवर से आते हैं", और नागरिकों से आग्रह कर रहे हैं कि वे डेयरी आपूर्ति श्रृंखला में पशुओं की यात्रा और उनके अंततः गोमांस उद्योग में पहुँचने की वास्तविकता पर विचार करें।

    दूध और गोमांस के बीच के संबंध पर भारत में जो दीर्घकालीन मौन रहा है, वह अब टूटने लगा है। @animalsaveindia के एक इंस्टाग्राम रील में कौन बनेगा करोड़पति की एक क्लिप साझा की गई, जिसमें प्रतियोगी सिद्धार्थ शर्मा द्वारा डेयरी पशुओं के भविष्य का वर्णन सुनकर प्रस्तोता अमिताभ बच्चन स्पष्ट रूप से चौंके हुए दिखे। यह रील वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक देखे गए रीलों में से एक बन गई 1.2 अरब से अधिक बार देखी गई और 65 लाख लाइक्स अर्जित किए। बाद में बच्चन ने स्वयं भी इस बात को दोहराया कि गाय का दूध वास्तव में उसके बछड़े के लिए होता है, न कि मनुष्यों की चाय के लिए।इस प्रतिष्ठापन में जनता को डेयरी उ‌द्योग के पर्यावरणीय परिणामों पर भी विचार करने का आह्वान किया गया।

    भारत में एक लीटर दूध उत्पादन के लिए 1,078 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। यह राजस्थान, उत्तर प्रदेश,कर्नाटक, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे प्रमुख डेयरी राज्यों में पहले से गहराते भूजल संकट पर एक अतिरिक्त बोझ है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी उ‌द्योग वर्गीकरण अधिसूचना 2025 में डेयरी और वधशालाओं को "रेड" श्रेणी में रखा है: अर्थात इन्हें सर्वाधिक प्रदूषणकारी उ‌द्योगों में गिना जाता है। यह वर्गीकरण दूध-गोमांस के अंतःसंबंध को और पुख्ता करता है तथा इन उ‌द्योगों में संलग्न किसानों की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

    इसके साथ ही, पशुपालन से उत्सर्जित मीथेन को अब निकट भविष्य में वैश्विक तापमान वृ‌द्धि के एक प्रमुख कारक के रूप में मान्यता मिल रही है। भारत प्रतिवर्ष लगभग 1.27 करोड़ टन मीथेन उत्सर्जित करता है। ये दुष्प्रभाव गोमांस उ‌द्योग से अलग नहीं किए जा सकते, क्योंकि डेयरी और गोमांस एक ही तंत्र के परस्पर जुड़े हिस्से हैं। जब गाय और भैंसें दूध देना बंद कर देती हैं, तो उनमें से अनेक को गोमांस आपूर्ति श्रृंखला में बेच दिया जाता है।

    प्राणी प्रोटेक्शन फाउंडेशन की प्रबंध न्यासी प्रांजलि शुक्ला ने कहा, "हमारा शहर गर्मियों के चरम महीनों में जलता रहता है और हर बीतते वर्ष के साथ यह असह्य होता जा रहा है। इसके बावजूद राज्य लाखों गायों और भैंसों के अंधाधुंध प्रजनन को बढ़ावा देता है, और दूध उत्पादन के लिए उपयोगिता समाप्त होते ही उन्हें बेसहारा छोड़ दिया जाता है। इस अनियंत्रित प्रजनन और परित्याग के चक्र से मीथेन उत्सर्जन निरंतर बढ़ता जा रहा है। रोज़मर्रा के आहार में डेयरी की केंद्रीय भूमिका के बावजूद, उसके जलवायु प्रभाव को लेकर समाज में व्यापक अज्ञानता बनी हुई है।"

    जैसे-जैसे छत्तीसगढ़ में लू और जलसंकट गहराता जा रहा है, खाद्य सुरक्षा की माँगों को अब स्वयंसिद्ध नहीं माना जा सकता। प्रश्न अब नीति-निर्माताओं, संस्थाओं और उ‌द्योग की ओर मुड़ता है- भारत की खाद्य प्रणालियाँ उन जलवायु और नैतिक चुनौतियों का सामना कैसे करेंगी जो वे स्वयं उत्पन्न कर रही हैं?

    Rate this item
    (0 votes)

    Latest from शौर्यपथ

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision