August 17, 2026
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    डीजीपी का फरमान दुर्ग जिले में बेअसर बल की कमी से थानों में कामकाज पर पड़ रहा प्रभाव

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    दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी का फरमान जिले के आईजी और एसपी कार्यालय में बेअसर है। जिला बल के अधिकारी व जवानों को इन कार्यालयों में संलग्न रखे जाने से ऐसा हो रहा है। इसके चलते थानों सहित अन्य इकाईयों में पर्याप्त बल का टोटा बना हुआ है। इसका असर मैदानी कामकाज में भी पड़ रहा है।
    दुर्ग जिले के थानों व चौकियों के साथ ही पुलिस के अन्य महत्वपूर्ण इकाईयों में पर्याप्त बल की कमी से कानून व्यवस्था से लेकर मामलों के विवेचना में प्रतिकूल असर पड़ रहा है। संबंधितों की ओर से आला अधिकारियों का ध्यानाकर्षण कराये जाने के बावजूद बात बन नहीं रही है। दूसरी तरफ आईजी दुर्ग रेंज और जिले के एसपी कार्यालय में दो दर्जन से भी अधिक जिला बल से ताल्लुक रखने वाले उप निरीक्षक, सहायक उपनिरीक्षक, प्रधान आरक्षक और आरक्षकों को संलग्न रखा गया है। जबकि पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी का स्पष्ट निर्देश है कि जिला बल के अधिकारी या जवानों से कार्यालयीन कामकाज नहीं कराया जाये।
    बताते हैं आईजी व एसपी कार्यालय में वहां की जरुरत के अनुसार अनुसचिवीय बल पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है। इसके बाद भी सामान्य ड्यूटी करने वाले जिला बल के उपनिरीक्षक से लेकर आरक्षकों को आईजी व एसपी कार्यालय में संलग्न रखा गया है। पुलिस महानिदेशक के निर्देश के बावजूद ऐसे अधिकारी व जवानों में अपने मूल काम में संलग्न किए जाने के लिए रवानगी नही दी जा रही है।
    गौरतलब रहे कि दुर्ग जिला मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू का गृह इलाका है। पीएचई मंत्री गुरू रुद्र कुमार का निर्वाचन क्षेत्र में इसी जिले में है। इस लिहाज से यह वीआईपी जिले की श्रेणी में आता है। ऐसे में थानों में पदस्थ अधिकारियों और जवानों को अपने मूल कार्य के अलावा वीआईपी सुरक्षा में भी भूमिका निभानी पड़ती है। इसका असर शहर की कानून व्यवस्था बनाए रखने और विभिन्न मामलों के विवेचना में पड़ रहा है। आईजी और एसपी कार्यालय में संलग्न उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक, प्रधान आरक्षक व आरक्षकों को वहां से हटाकर बल की कमी का सामना कर रहे थानों सहित विभिन्न इकाईयों में पदस्थ किया जा सकता है।
    यहां पर यह बताना भी लाजिमी होगा कि आईजी व एसपी कार्यालय में अनुसचिवीय बल के अधिकारी व कर्मचारी कार्य करते हैं। ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों की पदस्थापना थानों, चौकी अथवा यातायात विभाग में नहीं की जा सकती। इसी तरह जिला बल के अधिकारी-कर्मचारियों से भी कार्यालयीन काम लिए जाने का प्रावधान नहीं है। आईजी व एसपी कार्यालय में सेटअप के अनुसार अनुसचिवीय बल पदस्थ है। ऐसे में जिला बल से अतिरिक्त अधिकारी व कर्मचारियों को संलग्न कर कार्यालयीन कामकाज लिया जाना समझ से परे माना जा रहा है।

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