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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर लौटे प्रतिभावान विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की सौजन्य भेंट; CWSN विद्यार्थी नुकेश को राष्ट्रपति ने बांधी राखी, छात्राओं के सुवा नृत्य की हुई सराहना
रायपुर / शौर्यपथ / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात और संवाद का यादगार अनुभव लेकर लौटे छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के साथ राष्ट्रपति भवन की अपनी यात्रा, राष्ट्रपति से हुए आत्मीय संवाद और वहां मिले सम्मान के अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है। बच्चों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आत्मीय बातचीत करते हुए उनकी यात्रा और राष्ट्रपति से मुलाकात के अनुभव जाने। विद्यार्थियों ने बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मिलना उनके जीवन का अविस्मरणीय क्षण रहा। राष्ट्रपति ने बेहद सहज और आत्मीय वातावरण में उनसे बातचीत की तथा उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य के सपनों के बारे में जाना। विद्यार्थियों ने राष्ट्रपति भवन के भ्रमण और वहां बिताए विशेष पलों की यादें भी मुख्यमंत्री के साथ साझा कीं।
नुकेश को राष्ट्रपति ने खुद बांधी राखी
रक्षाबंधन के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में हुई इस मुलाकात का सबसे भावुक और यादगार क्षण उस समय आया, जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने CWSN (Children with Special Needs) विद्यार्थी नुकेश कुमार वर्मा को स्वयं राखी बांधी। राष्ट्रपति का यह आत्मीय स्नेह नुकेश सहित वहां मौजूद सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए जीवनभर संजोकर रखने वाली स्मृति बन गया।
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। बच्चों के लिए यह मुलाकात केवल सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि अपने सपनों को नई ऊंचाई देने वाला प्रेरणादायी अनुभव भी बनी।
राष्ट्रपति भवन में गूंजा छत्तीसगढ़ का सुवा नृत्य
राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति की मनमोहक झलक भी देखने को मिली। छात्राओं ने प्रदेश के पारंपरिक सुवा नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी। लोकगीत, संगीत और पारंपरिक भाव-भंगिमाओं से सजी प्रस्तुति ने राष्ट्रपति भवन के वातावरण को छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग से भर दिया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं की प्रशंसा की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह विशेष रूप से गौरव का विषय है कि प्रदेश के बच्चों ने राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ की प्रतिभा के साथ-साथ उसकी सांस्कृतिक विरासत का भी परिचय कराया। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति हमारी पहचान और अमूल्य धरोहर है। जब नई पीढ़ी इसे आत्मसात कर राष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत करती है तो हमारी परंपराओं को नई ऊर्जा और व्यापक पहचान मिलती है।
‘बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं, अवसर मिलने की जरूरत’
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बच्चों में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। उन्हें सही अवसर, प्रोत्साहन और मंच मिले तो वे देश-दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे अवसर विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उनके सपनों को नई दिशा देते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी लगन और मेहनत से पढ़ाई जारी रखने तथा जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से मिले प्रोत्साहन और यात्रा के अनुभव को विद्यार्थी अपने जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाएं।
बस्तर से महासमुंद तक की प्रतिभाओं ने किया प्रतिनिधित्व
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट करने वाले विद्यार्थियों में नारायणपुर की राजवती पोयाम, सुकमा के हिमांशु ठाकुर, दुर्ग की पायल राजानी, महासमुंद की रागनी साहू, रायपुर के नुकेश कुमार वर्मा तथा महासमुंद के दुर्गेश साहू और डिगेश सेन शामिल रहे।
इस अवसर पर डॉ. मुक्ति बैस, राज्य नोडल अधिकारी, समग्र शिक्षा, रायपुर तथा श्री चंद्रशेखर मिथलेश, व्याख्याता (भौतिकी), शासकीय आशी बाई गोलछा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे सपने बड़े रखें, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और अपनी उपलब्धियों से परिवार, छत्तीसगढ़ तथा देश को गौरवान्वित करें।
सर्व आदिवासी समाज ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण पर दिया जोर, महिला आयोग ने महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रदेश की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता के अनुरूप प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी कड़ी में राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में मंगलवार को आयोजित परिचर्चा में बस्तर से सरगुजा तक के सामाजिक प्रतिनिधियों की आवाज समिति के सामने पहुंची। सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, राज्य महिला आयोग और राज्य फिल्म विकास निगम के पदाधिकारियों ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार और लिव-इन संबंध जैसे संवेदनशील विषयों पर अपने सुझाव रखे।
UCC समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त श्रीमती ज्योति रानी सिंह तथा सदस्य सचिव श्री श्याम धावड़े ने विभिन्न पक्षों को विस्तार से सुना। समिति की ओर से कहा गया कि संहिता तैयार करते समय छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक विविधता और स्थानीय परंपराओं को ध्यान में रखा जाएगा।
आदिवासी समाज बोला—परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की हो सुरक्षा
परिचर्चा में कंवर, गोंड, बैगा और उरांव सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की सदियों पुरानी रूढ़िगत प्रथाएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक परंपराएं उसकी विशिष्ट पहचान हैं। इसलिए प्रस्तावित कानून में इन परंपराओं और सांस्कृतिक विशिष्टताओं के संरक्षण का पर्याप्त प्रावधान होना चाहिए।
प्रतिनिधियों ने इसके साथ ही विवाह पंजीयन, महिलाओं के संपत्ति अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यावहारिक एवं वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जुड़े विषयों पर भी समिति के समक्ष अपने सुझाव दिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि समानता के उद्देश्य के साथ-साथ स्थानीय सामाजिक व्यवस्था और पारंपरिक संस्थाओं की वास्तविकताओं को भी समझा जाए।
महिला अधिकार और सामाजिक सुरक्षा पर भी जोर
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ सकारात्मक सामाजिक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार, राष्ट्रीय एकता को मजबूती देने तथा धर्म परिवर्तन पर रोक से जुड़े विषयों के संदर्भ में UCC की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और जनजातीय विरासत को संरक्षित रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विवाह एवं संपत्ति अधिकारों में समानता समाज के अंतिम छोर पर खड़ी महिलाओं को अधिक कानूनी सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान कर सकती है।
जनसंवाद के जरिए तैयार होगा प्रस्तावित प्रारूप
संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के लिए नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने का प्रावधान है। इसी संवैधानिक भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ में UCC समिति प्रदेशभर में व्यापक जनसंवाद कर रही है। प्रस्तावित संहिता के अंतर्गत विवाह एवं तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव-इन संबंधों जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
समिति जिला स्तरीय फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और प्रत्यक्ष बैठकों के माध्यम से आम नागरिकों, कानूनविदों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से सुझाव जुटा रही है। बस्तर से सरगुजा तक सामने आ रहे विभिन्न दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाने की यह प्रक्रिया इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित UCC के प्रारूप को स्थानीय सामाजिक विविधता, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन के आधार पर तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
संत गोबिंदराम शदाणी कन्या महाविद्यालय में नवप्रवेशित छात्राओं का दीक्षारंभ समारोह, प्रतिभाशाली छात्राओं का हुआ सम्मान
रायपुर / शौर्यपथ / संत गोबिंदराम शदाणी शासकीय कला एवं वाणिज्य कन्या महाविद्यालय, रायपुर में वर्ष 2026-27 की नवप्रवेशित छात्राओं के लिए आयोजित दीक्षारंभ कार्यक्रम में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने छात्राओं को शिक्षा के साथ जीवन-मूल्यों, विवेक और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ने का संदेश दिया। मुख्य अतिथि के रूप में छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में प्रवेश उनके जीवन के नए अध्याय की शुरुआत है। यह यात्रा केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें जागरूक, सशक्त और संवेदनशील नागरिक बनाने वाली होनी चाहिए।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि इस महाविद्यालय में प्रवेश के साथ छात्राएं उस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनी हैं, जिसने दशकों से बालिकाओं को शिक्षा और ज्ञान का प्रकाश प्रदान किया है। महिलाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पानी के बिना जीवन अधूरा है, उसी प्रकार महिलाओं के बिना समाज की कल्पना भी अधूरी है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि जीवन में उपलब्धियों के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं। किसी एक क्षेत्र में सफलता न मिलने पर निराश होने के बजाय दूसरे अवसरों को तलाशते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
तकनीक ज्ञान का साधन, विवेक का विकल्प नहीं
राज्यपाल ने छात्राओं को सतत सीखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन स्वयं एक निरंतर चलने वाली पाठशाला है और व्यक्ति जीवनभर विद्यार्थी बना रहता है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी इंटरनेट युग की विद्यार्थी है और तकनीक ने ज्ञान के नए द्वार खोल दिए हैं, लेकिन तकनीक पर पूरी तरह निर्भर रहना उचित नहीं है। इंटरनेट से व्यापक जानकारी प्राप्त की जा सकती है, लेकिन वह मानव बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता का स्थान नहीं ले सकता। ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से जीवन और समाज को बेहतर बनाने के लिए किया जाए।
उन्होंने छात्राओं से कहा कि जीवन में केवल यह सवाल नहीं होना चाहिए कि समाज ने हमें क्या दिया, बल्कि यह भी विचार करना चाहिए कि हम अपने समाज, पड़ोस और देश की बेहतरी के लिए क्या योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन अनमोल है, इसलिए अनावश्यक चिंताओं में इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करते हुए मेहनत और निरंतर प्रयास करने से भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
शिक्षकों का आचरण विद्यार्थियों के लिए बने प्रेरणा
श्री डेका ने विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक का योगदान अमूल्य है और इसे धन से नहीं आंका जा सकता। शिक्षकों को अपने ज्ञान के साथ-साथ आचरण और व्यवहार से भी विद्यार्थियों के सामने ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे छात्राएं प्रेरणा लेकर जीवन में आगे बढ़ सकें।
राज्यपाल ने छात्राओं से समाज के प्रति सकारात्मक सोच रखने और अपने स्तर पर छोटे-छोटे रचनात्मक योगदान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर किए गए ऐसे छोटे प्रयास जब सामूहिक रूप लेते हैं तो समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।
मेहनत और प्रतिभा के लिए छात्राओं का सम्मान
दीक्षारंभ कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल श्री रमेन डेका ने महाविद्यालय की उन प्रतिभाशाली छात्राओं को सम्मानित किया, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा से महाविद्यालय का नाम रोशन किया। सम्मान से छात्राओं का उत्साहवर्धन हुआ और अन्य विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिली।
कार्यक्रम में विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, संत श्री युधिष्ठिर लाल, महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती उषा किरण अग्रवाल, जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष, प्राध्यापकगण तथा बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से उच्च शिक्षा को मिली नई दिशा; सेक्टर-18 में 40 एकड़ में बनेगा अत्याधुनिक संस्थान, 2-3 वर्षों में शुरू होगा पहला बैच
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल से देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) अब नवा रायपुर अटल नगर में अपना कैंपस स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में संस्थान की स्थापना के लिए लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही नवा रायपुर में राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक उच्च शिक्षा के लिए बड़े महानगरों की ओर जाने की आवश्यकता न पड़े, राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। NMIMS की स्थापना इसी संकल्प की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसरों के माध्यम से प्रदेश की युवा शक्ति को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, आवास एवं पर्यावरण सचिव श्री अंकित आनंद तथा नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री चंदन कुमार उपस्थित रहे।
40 एकड़ में आकार लेगा अत्याधुनिक कैंपस
NMIMS का अत्याधुनिक कैंपस नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-18 में लगभग 40 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। संस्थान का संचालन करने वाले श्री विले पार्ले केलवणी मंडल (SVKM) को यह भूमि 90 वर्षों की लीज पर प्रदान की गई है। राज्य मंत्रिपरिषद ने 21 जनवरी 2026 को संस्थान के लिए भूमि आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद प्रशासनिक प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाते हुए अब लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
संस्थान की स्थापना की संपूर्ण प्रक्रिया आगामी सात वर्षों में पूर्ण करने का लक्ष्य है, लेकिन विद्यार्थियों को इसका लाभ इससे काफी पहले मिलने लगेगा। दो से तीन वर्षों के भीतर पहला शैक्षणिक बैच शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद कैंपस में लगभग 10 हजार विद्यार्थी अध्ययन कर सकेंगे।
महानगरों की ओर पलायन कम होगा, प्रदेश में ही मिलेंगे बड़े अवसर
NMIMS की स्थापना छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसर लेकर आएगी। प्रबंधन, कौशल विकास और आधुनिक रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों में युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा अपने ही प्रदेश में प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए मुंबई, दिल्ली, पुणे, बेंगलुरु जैसे बड़े शिक्षा केंद्रों की ओर जाने की आवश्यकता कम होगी। वहीं देश के अन्य हिस्सों से भी विद्यार्थी नवा रायपुर में अध्ययन के लिए आएंगे। इससे शहर में बहुआयामी और समृद्ध शैक्षणिक वातावरण विकसित होने की संभावना है।
शिक्षा के साथ रोजगार, नवाचार और उद्यमिता को भी मिलेगी रफ्तार
NMIMS की मौजूदगी का असर केवल कक्षाओं और डिग्री तक सीमित नहीं रहेगा। संस्थान के माध्यम से कौशल विकास, रोजगार, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होंगे। विद्यार्थी, शिक्षक, शोधकर्ता और उद्योग जगत एक-दूसरे से जुड़ेंगे, जिससे उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप दक्ष मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की मौजूदगी से अकादमिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ने की संभावना है। विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, शोध, नवाचार और स्टार्टअप से जुड़ने के अवसर मिलेंगे। इससे प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों को भी कुशल मानव संसाधन उपलब्ध होगा।
नवा रायपुर बनेगा एजुकेशन और नॉलेज हब
राज्य सरकार नवा रायपुर अटल नगर को आधुनिक अधोसंरचना और बेहतर कनेक्टिविटी वाले शहर के साथ-साथ एजुकेशन एवं नॉलेज हब के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। NMIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के नवा रायपुर आने से शहर का शैक्षणिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक वातावरण समृद्ध होगा। शिक्षा से जुड़ी आवास, परिवहन, खान-पान, सेवाओं और अन्य सहायक गतिविधियों में भी रोजगार एवं आर्थिक अवसर बढ़ेंगे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की युवा-केंद्रित विकास नीति में शिक्षा, कौशल, नवाचार और रोजगार को एक साथ जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। NMIMS की स्थापना इसी दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने वाला महत्वपूर्ण कदम है। लीज और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने के साथ छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। आने वाले वर्षों में यह संस्थान हजारों युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ नवा रायपुर को देश के प्रमुख शिक्षा एवं ज्ञान केंद्रों में स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
प्रमोद रूसिया को कुम्हारी, युवराज साहू बने पाटन थाना प्रभारी; यातायात की जिम्मेदारी ओम प्रकाश पटेल को
दुर्ग। जिले की पुलिस व्यवस्था में बड़ा फेरबदल करते हुए एसपी विजय अग्रवाल ने पांच पुलिस अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। तबादला सूची में थाना प्रभारियों के साथ यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है।
आदेश के अनुसार पाटन थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश मिश्रा को पदमनाभपुर थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं पदमनाभपुर थाना प्रभारी निरीक्षक प्रमोद रूसिया को हटाकर कुम्हारी थाना प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसी क्रम में निरीक्षक युवराज साहू को यातायात शाखा से हटाकर पाटन थाना प्रभारी बनाया गया है। रिजर्व केंद्र दुर्ग में पदस्थ निरीक्षक ओम प्रकाश पटेल को यातायात की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं उप निरीक्षक पुरुषोत्तम कुर्रे को कुम्हारी थाना प्रभारी के पद से हटाकर यातायात शाखा में पदस्थ किया गया है।
एसपी विजय अग्रवाल ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को तत्काल नवीन पदस्थापना स्थल पर आमद देने के निर्देश दिए हैं। पुलिस महकमे में हुए इस फेरबदल को जिले की कानून-व्यवस्था और थाना स्तर पर प्रशासनिक कसावट के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जंतर-मंतर से निकली नई पीढ़ी की आवाज अब स्कूलों के दरवाजे तक पहुंची, शिक्षा व्यवस्था की हर कमी पर नजर—गजेंद्र यादव के राजनीतिक भविष्य की भी होगी परीक्षा
शौर्यपथ विशेष /रायपुर/दुर्ग।
कभी शिक्षा विभाग की खबरें सरकारी विज्ञप्तियों, परीक्षा परिणामों और नियुक्तियों तक सीमित रहती थीं। लेकिन बदलते भारत में तस्वीर तेजी से बदल रही है। अब स्कूल शिक्षा केवल विभागीय फाइलों का विषय नहीं रह गई है, बल्कि अखबारों, सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और युवाओं की सीधी आवाज का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
जंतर-मंतर और देश के विभिन्न हिस्सों में Gen Z के आंदोलनों के बाद अब Gen Alpha भी शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल पूछने सड़क तक पहुंच रही है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार से लेकर छत्तीसगढ़ तक छात्रों की आवाज में एक समान सवाल दिखाई दे रहा है—स्कूल में शिक्षक कहां हैं, मूलभूत सुविधाएं कब मिलेंगी और व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन लेगा?
छत्तीसगढ़ में इसकी सबसे ताजा तस्वीर दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में देखने को मिली, जहां Gen Alpha से जुड़े विद्यार्थियों और अभिभावकों के आंदोलन के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव स्वयं स्कूल पहुंचे और छात्रों की समस्याएं सुनीं। आंदोलन में शिक्षकों की कमी और अन्य प्रशासनिक समस्याओं को लेकर सवाल उठाए गए थे।
अब शिक्षा विभाग की हर कमी मोबाइल कैमरे की नजर में
आज का विद्यार्थी केवल शिकायत नहीं करता—वह उसे रिकॉर्ड करता है, सोशल मीडिया पर डालता है और कुछ ही घंटों में वह मुद्दा हजारों लोगों तक पहुंच जाता है।
कहीं शिक्षकों की कमी, कहीं स्कूल भवन की समस्या, कहीं मध्यान्ह भोजन को लेकर शिकायत, कहीं परीक्षा और पेपर से जुड़े विवाद, तो कहीं विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल—शिक्षा व्यवस्था की छोटी से छोटी कमी अब बड़ी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन सकती है।
यही बदलाव स्कूल शिक्षा विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी है और सबसे बड़ा अवसर भी।
क्योंकि अब सरकार के सामने केवल विभागीय रिपोर्ट नहीं है, बल्कि जमीन पर खड़ा विद्यार्थी और उसके हाथ में मोबाइल कैमरा भी है।
गजेंद्र यादव के सामने दो रास्ते—आलोचना या समाधान?
छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मंत्री गजेंद्र यादव के पास है। हाल के दिनों में शिक्षा विभाग को लेकर उनकी सक्रियता और विभागीय समीक्षा लगातार चर्चा में रही है। 25 अगस्त को भी उनकी अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में शैक्षणिक गतिविधियों, अधोसंरचना, डिजिटल शिक्षा और विभागीय योजनाओं की समीक्षा की गई।
ऐसे समय में Gen Alpha का मैदान में उतरना उनके लिए सामान्य राजनीतिक चुनौती नहीं है।
यह वह दौर है जब मंत्री के सामने यह साबित करने का अवसर है कि शिक्षा विभाग केवल योजनाओं और घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले बदलावों से चलता है।
अगर किसी स्कूल में शिक्षक नहीं हैं और मंत्री वहां शिक्षक पहुंचा देते हैं, अगर भवन जर्जर है और उसका समाधान होता है, अगर किसी व्यवस्था में गड़बड़ी है और उस पर कार्रवाई होती है—तो उसका प्रभाव केवल उस स्कूल तक सीमित नहीं रहेगा।
उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर जाएगी, उसका वीडियो वायरल होगा और जनता यह देखेगी कि सरकार सवाल सुनती ही नहीं, उनका समाधान भी करती है।
यही गजेंद्र यादव के लिए राजनीतिक अवसर है।
पिछली सरकारों का हिसाब या वर्तमान सरकार की जिम्मेदारी?
राजनीति में यह आसान रास्ता होता है कि वर्तमान समस्या के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार बता दिया जाए।
छत्तीसगढ़ में भाजपा की मौजूदा सरकार से पहले भूपेश बघेल सरकार का लगभग पांच वर्ष का कार्यकाल रहा। उससे पहले डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा सरकार करीब 15 वर्षों तक सत्ता में रही। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था की कमियों की पूरी जिम्मेदारी किसी एक सरकार पर डालना आसान नहीं है।
लेकिन जनता का सवाल भी उतना ही सीधा है—
“गलती किसी की भी रही हो, अब सुधार कौन करेगा?”
यहीं से गजेंद्र यादव की राजनीतिक परीक्षा शुरू होती है।
यदि मंत्री हर समस्या के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार बताते हुए दिखाई देंगे, तो सवाल उठेगा कि वर्तमान सरकार आखिर कब तक अतीत का हिसाब गिनाएगी?
इसके विपरीत यदि वे पुराने विवादों को किनारे रखकर समस्याओं के समाधान पर फोकस करते हैं, तो यही शिक्षा विभाग उनके राजनीतिक भविष्य के लिए सबसे मजबूत मंच बन सकता है।
नरेंद्र मोदी का उदाहरण—छोटे अवसर से बड़ी मंजिल तक
राजनीति में अवसर हमेशा बड़े मंच पर नहीं मिलता। कई बार किसी नेता को ऐसा विभाग या जिम्मेदारी मिलती है, जहां उसके काम का सीधा असर जनता पर दिखाई देता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर इसका बड़ा उदाहरण है। संगठन में लंबे समय तक जमीन पर काम करने के बाद वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने और फिर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे।
यानी राजनीति में अवसर वही बड़ा बनता है, जिसे नेता अपनी कार्यक्षमता से बड़ा बना दे।
आज गजेंद्र यादव के सामने भी ऐसा ही अवसर दिखाई देता है।
स्कूल शिक्षा विभाग प्रदेश के लाखों बच्चों, अभिभावकों और हजारों शिक्षकों से सीधे जुड़ा हुआ विभाग है। यदि यहां सुधार दिखाई देता है, तो उसका राजनीतिक लाभ भी व्यापक हो सकता है।
लेकिन Gen Alpha को नजरअंदाज करना भारी भी पड़ सकता है
दूसरी तरफ तस्वीर का दूसरा पहलू भी है।
Gen Alpha वह पीढ़ी है जो सूचना के लिए सरकारी दफ्तरों की प्रतीक्षा नहीं करती। उसके पास मोबाइल है, इंटरनेट है और अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम है।
इसीलिए स्कूल शिक्षा मंत्री के सामने चुनौती अब केवल विधानसभा, विपक्ष या मीडिया की नहीं है—एक ऐसी पीढ़ी भी सामने है जो सवाल पूछने से नहीं डरती।
हाल के छत्तीसगढ़ आंदोलन ने यह संकेत दे दिया है कि यदि स्कूल की समस्या का समाधान समय पर नहीं हुआ तो विद्यार्थी और अभिभावक अपनी आवाज सामूहिक रूप से उठा सकते हैं।
और इस आवाज को सोशल मीडिया की ताकत मिल जाए तो किसी छोटे गांव की समस्या भी पूरे प्रदेश की चर्चा बन सकती है।
धर्मेंद्र प्रधान का घटनाक्रम भी देता है बड़ा राजनीतिक संदेश
शिक्षा के मुद्दे की राजनीतिक संवेदनशीलता का राष्ट्रीय उदाहरण भी सामने है। 25 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा स्वीकार किया, जिसके बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रल्हाद जोशी को सौंपा गया।
इस घटनाक्रम से यह संदेश जरूर निकलता है कि शिक्षा जैसा विभाग केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बेहद संवेदनशील राजनीतिक जिम्मेदारी भी है।
हालांकि किसी मंत्री के पद से हटने के कारणों को केवल छात्र आंदोलन या किसी एक मुद्दे से जोड़ना उचित नहीं होगा। लेकिन इतना जरूर है कि शिक्षा से जुड़े विवाद जब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक दबाव बनाते हैं, तो उसका असर सत्ता और नेतृत्व के फैसलों तक पहुंच सकता है।
गजेंद्र यादव के लिए फैसला जनता की नजरों के सामने होगा
आज गजेंद्र यादव के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि Gen Alpha उनके समर्थन में है या विरोध में।
बड़ा सवाल यह है कि—
क्या Gen Alpha को यह महसूस होगा कि उसकी आवाज सत्ता तक पहुंच रही है?
यदि बच्चों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होती है, शिक्षक पहुंचते हैं, स्कूल सुधरते हैं, भवन बनते हैं, योजनाओं में पारदर्शिता आती है और विभागीय जवाबदेही तय होती है, तो आज जो आंदोलन चुनौती दिखाई दे रहा है, वही कल गजेंद्र यादव की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि बन सकता है।
लेकिन यदि शिकायतों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझा दिया गया, समस्याओं के लिए केवल पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया गया और जमीन पर बदलाव दिखाई नहीं दिया, तो यही डिजिटल पीढ़ी सरकार के कामकाज का सबसे बड़ा आईना भी बन सकती है।
क्योंकि Gen Alpha को न किसी नेता को वोट देना है, न किसी दल का झंडा उठाना है। उसे सिर्फ बेहतर स्कूल, पर्याप्त शिक्षक और बेहतर शिक्षा चाहिए।
और यही बात इस पूरे घटनाक्रम को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बनाती है।
अवसर भी, चुनौती भी… और फैसला काम करेगा
राजनीति में हर नेता को अपने आपको साबित करने के लिए बार-बार मौका नहीं मिलता।
गजेंद्र यादव के पास आज प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक की जिम्मेदारी है। शिक्षा व्यवस्था पर पूरे प्रदेश की नजर है। मीडिया देख रहा है, अभिभावक देख रहे हैं और सबसे महत्वपूर्ण—नई पीढ़ी खुद देख रही है।
अब आने वाला समय तय करेगा कि Gen Alpha का आंदोलन—
गजेंद्र यादव के लिए राजनीतिक चुनौती बनता है या उनके राजनीतिक करियर को नई ऊंचाई देने वाला अवसर।
फिलहाल गेंद स्कूल शिक्षा मंत्री के पाले में है।
सवाल आंदोलन का नहीं, अब जवाब कार्रवाई का है।
आर्थिक संबल से कम हुई अभिभावकों की चिंता, पढ़ाई से विवाह तक भविष्य को लेकर बढ़ा भरोसा
रायपुर / शौर्यपथ / बेटियों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की चिंता हर अभिभावक के मन में होती है। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सारबहरा की श्रीमती आकांक्षा भी अपनी बेटी की अच्छी शिक्षा और सुरक्षित भविष्य को लेकर चिंतित रहती थीं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच बेटी के भविष्य के लिए पर्याप्त प्रबंध करना उनके लिए चुनौती था। ऐसे में नोनी सुरक्षा योजना उनके लिए उम्मीद और आर्थिक संबल बनकर सामने आई।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से बेटी का योजना में पंजीयन कराने के बाद आकांक्षा को भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिला है। उनका कहना है कि योजना से मिलने वाली सहायता बेटी की पढ़ाई, आगे के महत्वपूर्ण पड़ाव और विवाह जैसे अवसरों पर परिवार के लिए उपयोगी साबित होगी। इससे उन्हें बेटी के भविष्य को लेकर मानसिक राहत भी मिली है।
सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, भविष्य का भरोसा
आकांक्षा चाहती हैं कि उनकी बेटी बिना आर्थिक बाधा के अपनी पढ़ाई पूरी करे और आत्मनिर्भर बने। उनके लिए नोनी सुरक्षा योजना केवल सरकारी सहायता नहीं, बल्कि बेटी के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक भरोसेमंद सहारा है।
उन्होंने कहा कि बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने वाली सरकारी योजनाएं परिवारों का संबल बढ़ाती हैं। इससे अभिभावकों में बेटियों की शिक्षा, बेहतर परवरिश और उन्हें आगे बढ़ाने का विश्वास मजबूत होता है।
मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
आकांक्षा ने बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की ऐसी योजनाएं बेटियों के भविष्य को लेकर परिवारों में उम्मीद और सुरक्षा का भाव पैदा कर रही हैं।
आकांक्षा के लिए नोनी सुरक्षा योजना अब सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि बेटी के सुरक्षित, आत्मनिर्भर और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद बन चुकी है।
दंतेवाड़ा के दूरस्थ छिंदनार में पहली बार पूरे गांव ने सुनी प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’; मंत्री, सांसद और विधायक भी रहे मौजूद
दंतेवाड़ा/ शौर्यपथ / नक्सलवाद के साए से बाहर निकलते बस्तर की बदलती तस्वीर रविवार को दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल छिंदनार में नजर आई। कुछ समय पहले तक जहां धमाकों की आवाज लोगों में दहशत पैदा करती थी, वहीं आज उसी गांव में ग्रामीण उत्साह के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ सुनने के लिए एकत्र हुए। गांव के कई लोगों के लिए यह पहला अवसर था, जब उन्होंने प्रधानमंत्री को रेडियो पर सुना।
ग्रामीणों के साथ वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप और दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी ने भी कार्यक्रम सुना। प्रधानमंत्री के संदेश को ग्रामीणों ने बेहद तल्लीनता से सुना और इसे देश को एक सूत्र में जोड़ने वाला कार्यक्रम बताया। ग्रामीणों का कहना था कि ‘मन की बात’ देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे सकारात्मक कार्यों, नवाचारों और जनभागीदारी की पहल को सामने लाकर लोगों को प्रेरित करती है।
बदलते बस्तर की नई तस्वीर
छिंदनार में ग्रामीणों का इस तरह एकत्र होकर प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सुनना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर में बदलते माहौल का प्रतीक माना जा रहा है। नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सरकार सड़क, मोबाइल कनेक्टिविटी, स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
दशकों तक विकास से दूर रहे दुर्गम गांवों तक शासन की योजनाएं और नागरिक सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास तेज किए गए हैं। ऐसे में छिंदनार की तस्वीर यह संदेश देती नजर आई कि जहां कभी बंदूक और धमाकों का भय था, वहां अब विकास, संवाद और रेडियो की आवाज सुनाई दे रही है।
धमाकों से ‘मन की बात’ तक का यह सफर बदलते बस्तर की सबसे बड़ी कहानी है।
राज्य स्तरीय UCC समिति को दिए जाएंगे सुझाव, शहर काजी और वरिष्ठ अधिवक्ता रहेंगे मौजूद
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) कानून लागू करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और इसके लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है। उक्त समिति को सुझाव देने के लिए रायपुर मुस्लिम समाज की ओर से एक दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया है। यह जानकारी छ.ग. राज्य वक्फ बोर्ड (कैबिनेट मंत्री दर्जा) के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने दी है।
1 सितंबर को गुरु घासीदास ऑडिटोरियम में होगी बैठक
मुस्लिम समाज की यह बैठक 01 सितंबर 2026, मंगलवार को स्थान- गुरु घासीदास ऑडिटोरियम, कार्यालय छ.ग. राज्य वक्फ बोर्ड के सामने, कलेक्ट्रेट चौक, रायपुर में आयोजित की जाएगी। बैठक में मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए गए सुझावों को एकत्रित किया जाएगा। इसके लिए रायपुर की समस्त मस्जिदों में जुमा को ऐलान के माध्यम से सूचना दी गई है।
दो प्रतियों में लिखित सुझाव लाने की अपील
आयोजकों ने अपील की है कि UCC के संबंध में सुझाव लिखित में अध्यक्ष, समान नागरिक संहिता समिति, छत्तीसगढ़ के नाम से संबोधित करते हुए दो प्रतियों में प्रस्तुत करें। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में शहर काजी जनाब कारी डॉ. मोहम्मद इमरान अशरफी साहब और अध्यक्षता के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता जनाब फैसल रिजवी साहब उपस्थित रहेंगे। मुस्लिम समाज द्वारा दिए गए सुझावों को बैठक में एकत्रित कर शाम 04:00 बजे समान नागरिक संहिता (UCC) समिति, छत्तीसगढ़ के माननीय सदस्यों के समक्ष उपस्थित होकर प्रस्तुत किया जाएगा।
टनल रेस्क्यू टीम और बेली ब्रिज लेकर पहुंचा भारत; 88 भारतीय सुरक्षित निकाले, 287 नागरिक अब भी संपर्क से बाहर
नई दिल्ली / एजेंसी(पीआईबी) / नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के बीच भारत ने ‘पड़ोसी पहले’ की नीति के तहत राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। भारत की चौथी विशेष उड़ान 11 टन अतिरिक्त राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंची। इसके साथ नेपाल को भेजी गई कुल आपातकालीन राहत सामग्री 68.5 टन हो गई है। भारत ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन मैत्री 2.0’ के तहत व्यापक रूप दिया है।
टनल रेस्क्यू टीम मैदान में
नेपाल के नुवाकोट जिले के त्रिशूली क्षेत्र में हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में श्रमिकों के फंसे होने की आशंका के बीच भारत की विशेष टनल रेस्क्यू टीम अत्याधुनिक मलबा हटाने वाले उपकरणों और लाइफ-डिटेक्टर सेंसर के साथ बचाव अभियान में जुटी है।
बाढ़ में बह चुके पुलों के कारण प्रभावित क्षेत्रों से संपर्क बहाल करने के लिए भारत से 16 ट्रक बेली ब्रिज उपकरण नेपाल पहुंच चुके हैं। इनसे करीब 230 फीट लंबा सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज तैयार किया जाएगा। इसके अलावा सात और बेली ब्रिज भेजने की तैयारी है।
88 भारतीय सुरक्षित, सैकड़ों अब भी संपर्क से बाहर
भारत ने अब तक 88 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला है, जिनमें नागपुर और कर्नाटक के तीर्थयात्री भी शामिल हैं। लापता लोगों की पहचान और शवों के DNA परीक्षण में सहायता के लिए भारत की छह फोरेंसिक विशेषज्ञ टीमें काठमांडू में स्थानीय प्रशासन के साथ काम कर रही हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार करीब 287 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के 128 लोग अभी संपर्क से बाहर हैं। भारतीय दूतावास नेपाल सेना के साथ मिलकर उनकी तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रहा है।
आपात स्थिति में इन नंबरों पर करें संपर्क
भारतीय दूतावास, काठमांडू कंट्रोल रूम:
? +977-9851107021
? +977-9851312456
विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली 24x7:
? +91-11-23012113
? +91-11-23014104
बिहार आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम:
? 0612-2217305 | टोल-फ्री: 1070
नेपाल की त्रासदी के बीच राहत सामग्री, विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम, पुल निर्माण उपकरण और नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत की बहुआयामी सहायता ने ‘पड़ोसी पहले’ नीति को जमीन पर प्रभावी रूप से सामने रखा है।
5,967 पदों की भर्ती पूरी करने और सेकंड लिस्ट जारी करने की मांग; कवर्धा-रायपुर में दिन-रात धरना, विजय शर्मा बोले—‘मामला कैबिनेट के निर्णय से होगा’
कवर्धा/रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती में विज्ञापित 5,967 पदों को पूरी तरह भरने और 1,940 रिक्त पदों के लिए सेकंड लिस्ट जारी करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज हो गया है। अगस्त के अंतिम सप्ताह में बड़ी संख्या में युवा उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के कवर्धा स्थित निवास/कार्यालय और रायपुर स्थित कार्यालय के बाहर लगातार धरने पर बैठे हैं। अभ्यर्थी रात भी सड़क और कार्यालय के बाहर गुजार रहे हैं और उनका कहना है कि जब तक सेकंड लिस्ट को लेकर सरकार लिखित निर्णय नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार पुलिस भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है और निर्धारित 5,967 पदों में से 1,940 पद अभी रिक्त हैं। उनका कहना है कि पात्र अभ्यर्थियों को मौका देने के लिए दूसरी प्रतीक्षा सूची जारी कर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। 23-24 अगस्त के दौरान कवर्धा में गृह मंत्री के कार्यालय के घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस की स्थिति भी बनी।
‘आश्वासन नहीं, आदेश चाहिए’
अभ्यर्थियों का आरोप है कि वे गृह मंत्री, अन्य मंत्रियों और मुख्यमंत्री से पहले भी मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन उन्हें ठोस निर्णय के बजाय आश्वासन ही मिले। उनका कहना है कि यदि पद स्वीकृत और विज्ञापित हैं तो उन्हें खाली रखने के बजाय भर्ती प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।
गृह मंत्री ने दिया बातचीत का भरोसा
आंदोलन के बीच उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा स्वयं अभ्यर्थियों से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे उनकी मांग के प्रति संवेदनशील हैं और इस संबंध में अपनी ओर से सरकार को लिखकर भेज चुके हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सेकंड लिस्ट जारी करने का अंतिम निर्णय कैबिनेट स्तर पर ही लिया जा सकता है।
विजय शर्मा ने आंदोलनकारी युवाओं को मुख्यमंत्री द्वारा गठित समिति के समक्ष ले जाने तथा मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात कराने का प्रस्ताव भी दिया है, ताकि अभ्यर्थी सीधे अपनी मांग रख सकें।
‘लिखित फैसला नहीं तो आंदोलन जारी’
फिलहाल कवर्धा और रायपुर में प्रदर्शन जारी है। अभ्यर्थी मांग पर अड़े हैं और उनका कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। दूसरी सूची जारी करने को लेकर आधिकारिक आदेश या ठोस लिखित निर्णय आने तक धरना जारी रखने की चेतावनी दी गई है।
अब नजर इस बात पर है कि 5,967 पदों की भर्ती में शेष 1,940 पदों को लेकर कैबिनेट क्या फैसला करती है—और क्या वर्दी की उम्मीद लगाए बैठे इन युवाओं को सेकंड लिस्ट के रूप में राहत मिलती है?
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
