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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
शिवराज सिंह चौहान बोले—प्रतिदिन 1600 से अधिक आवास हो रहे पूर्ण; मुख्यमंत्री साय ने कहा—कोई पात्र गरीब परिवार पक्के घर से नहीं रहेगा वंचित
रायपुर । छत्तीसगढ़ में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के पक्के मकान के सपने को साकार करने की दिशा में शुक्रवार को एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी। सक्ती में आयोजित प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के राज्यस्तरीय गृह प्रवेश समारोह में 2 लाख नवनिर्मित आवासों में हितग्राही परिवारों का गृह प्रवेश कराया गया। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से नए घरों की चाबी सौंपी गई।
समारोह में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की बड़ी सौगात दी। उन्होंने नवगठित सक्ती जिले में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की घोषणा की। साथ ही बस्तर संभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सर्वे की समय-सीमा बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 तक करने का ऐलान किया। अतिरिक्त आवासों की स्वीकृति संबंधी पत्र केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सौंपा।
छत्तीसगढ़ में हर दिन 1600 से ज्यादा पीएम आवास पूरे हो रहे : चौहान
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण इसी संकल्प को धरातल पर उतारने वाली महत्वपूर्ण योजना है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में आवास निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और प्रतिदिन 1600 से अधिक आवास पूर्ण किए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना करते हुए कहा कि दोनों सरकारों के समन्वित प्रयासों से प्रदेश के विकास को नई गति मिली है।
चौहान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल पक्के मकान ही नहीं, बल्कि सड़क, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और आजीविका जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। पीएम आवास योजना के हितग्राहियों को उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, मुफ्त राशन, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है।
सक्ती में खुलेगा कृषि विज्ञान केंद्र
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि की अपार संभावनाओं वाला राज्य है। प्रदेश धान उत्पादन के साथ अब सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं।
सक्ती में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना से क्षेत्र के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत खेती, फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक मार्गदर्शन स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा।
गरीब का पक्का घर सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति देकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी थी।
उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.50 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी पात्र गरीब परिवार पक्के मकान से वंचित न रहे।
उन्होंने बताया कि आवास सर्वे-2011 और आवास प्लस सर्वे के अंतर्गत आवासों के लक्ष्य की स्वीकृति मिल चुकी है। अब आवास प्लस-प्लस सर्वे में शामिल शेष पात्र परिवारों के लिए भी आवास स्वीकृत करने का अनुरोध केंद्र सरकार से किया गया है।
13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और बिहान के माध्यम से महिलाओं को आजीविका के नए अवसर मिल रहे हैं। प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि यह महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रहे बदलाव का प्रमाण है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को लाभ मिल रहा है और अब तक 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु पोर्टल का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि बिजली बिल समाधान योजना के अंतर्गत अब तक 750 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया बिजली बिल माफ किए जा चुके हैं।
ग्रामीण विकास के कई नए अभियानों का शुभारंभ
कार्यक्रम में 2 लाख आवासों के गृह प्रवेश के साथ ग्रामीण विकास से जुड़े कई अभियानों और नवाचारों की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत एआई आधारित जियो-टैग सत्यापन का शुभारंभ हुआ।
विकसित भारत-जी राम जी के अंतर्गत ‘धार अपार’ और ‘सुघ्घर बाड़ी’ अभियान शुरू किए गए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 270 नवीन इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टरों का विमोचन किया गया। वहीं इन्क्यूबेशन प्रोग्राम ‘अथ उद्यमिता की ओर’ के तहत चैलेंज फंड इवेंट का भी शुभारंभ हुआ।
इस अवसर पर आजीविका के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली लखपति दीदियों और डीलर दीदियों तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास में उल्लेखनीय कार्य करने वाली पंचायतों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा योजनाओं का लाभ : तोखन साहू
केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का अंत्योदय का चिंतन सरकार के लिए मार्गदर्शक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गरीब, किसान, महिला और समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से गांवों में बुनियादी सुविधाओं के साथ रोजगार और आजीविका के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
नक्सल प्रभावित और आत्मसमर्पित परिवारों के आवास की भी चिंता : विजय शर्मा
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश में सरकार बनने के बाद अब तक 11.50 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे। नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटे लोगों के आवास की भी चिंता की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है। गांवों में शिक्षा, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। 26 जनवरी 2027 तक प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय में बालिका शौचालय की सुविधा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायतों में कराए जा रहे विकास कार्यों पर बारकोड लगाया जा रहा है। नागरिक बारकोड स्कैन कर संबंधित विकास कार्य की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे ग्रामीण विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा आम नागरिक भी निगरानी में सहभागी बनेंगे।
कार्यक्रम के अंत में जिले के प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती द्रौपती कीर्तन चंद्रा सहित जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी, लखपति दीदियां, प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े विकास कार्यों से क्षेत्र में बढ़ेंगी सुविधाएं
रायपुर / केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सक्ती जिले के ग्राम जेठा में आयोजित कार्यक्रम में जिले को लगभग 122 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। दोनों अतिथियों ने 121 करोड़ 70 लाख रुपए से अधिक की लागत के कुल 38 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया।
इनमें लगभग 79.25 करोड़ रुपए की लागत के 23 विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा लगभग 42.46 करोड़ रुपए की लागत के 15 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। इन कार्यों से जिले में सड़क संपर्क के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, प्रशासनिक और ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी।
भूमिपूजन किए गए प्रमुख कार्यों में लगभग 25.82 करोड़ रुपए की लागत से देवरघटा, बरतुंगा, तुलसीडीह, अण्डा, चरौदा होते हुए सपिया नहरपार तक 22 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण तथा लगभग 15.30 करोड़ रुपए की लागत से छुहीपाली से कटेकोनी बड़े-कर्राखई-ठाकुरपाली होते हुए सेमराडीह तक 12 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण शामिल है। इसके साथ ही अण्डी-किरकार-जगमहन से सातबहिनिया तक सड़क, नगझर-नवापारा मार्ग और गुरेराडीह किरारी से केसला मुख्य मार्ग सहित विभिन्न सड़क परियोजनाओं का भूमिपूजन किया गया।
शिक्षा और युवाओं के लिए शासकीय कन्या महाविद्यालय सक्ती के नवीन भवन, बेदराम शासकीय महाविद्यालय मालखरौदा में अतिरिक्त भवन तथा नवीन लाइवलीहुड संस्थान भवन का भूमिपूजन किया गया। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए विभिन्न ग्रामों में उप स्वास्थ्य केंद्र भवन तथा महिलाओं के लिए महतारी सदनों के निर्माण कार्यों की भी आधारशिला रखी गई।
लोकार्पित प्रमुख कार्यों में लगभग 14.35 करोड़ रुपए की लागत से मालखरौदा क्षेत्र में कलमी नहरपार से चिखली, छोटेकोट, बड़ेकोट, सिंघरा होते हुए बेल्हाडीह तक सड़क तथा लगभग 11.35 करोड़ रुपए की लागत से देवरघटा से कठरापाली, निमोही, सिंघीतराई, बेनीपाली होते हुए ओड़ेकेरा मुख्य मार्ग तक पुल-पुलिया सहित सड़क निर्माण शामिल है। बुंदेली-अड़भार मार्ग का भी लोकार्पण किया गया।
इसके अलावा जल जीवन मिशन के अंतर्गत स्थापित सोलर ड्यूल पंप, चन्द्रपुर एवं हसौद के नवीन तहसील कार्यालय भवन, डभरा, चन्द्रपुर एवं जैजैपुर के नवीन पुलिस थाना भवन, अड़भार पुलिस चौकी भवन, सुलौनी हाईस्कूल भवन, गोपालपुर प्रशिक्षण भवन तथा गोबरा में महतारी सदन सहित अन्य विकास कार्य जनता को समर्पित किए गए।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
बेमेतरा, जशपुर, डोंगरगढ़ और कांकेर में सहेजे जाएंगे तालाब, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और भूजल संवर्धन को मिलेगी मजबूती
शहरी क्षेत्रों को स्वच्छ, हरित और जल-सुरक्षित बनाने सरकार प्रतिबद्ध – उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव
रायपुर / नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के 4 शहरों में तालाबों के पुनर्जीवन के लिए 22 करोड़ 18 लाख रुपए मंजूर किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद नगरीय क्षेत्रों में जल संरक्षण और पारंपरिक जल स्रोतों को सहेजने मिशन अमृत 2.0 के तहत बेमेतरा, जशपुर, डोंगरगढ़ और कांकेर के लिए यह राशि स्वीकृत की गई है। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) द्वारा चारों शहरों में इन कार्यों के लिए आज प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है।
राज्य शासन द्वारा शहरों में तालाबों को पुनर्जीवित करने और उनके जीर्णोद्धार के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मिशन अमृत 2.0 के वॉटर बॉडी रिज्यूविनेशन घटक के अंतर्गत 4 शहरों के लिए कुल 22 करोड़ 18 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। सूडा द्वारा स्वीकृत इन परियोजनाओं से शहरों के पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और भूजल संवर्धन की मजबूती के काम किए जाएंगे।
मिशन अमृत (अटल शहरी नवीकरण एवं परिवर्तन मिशन) 2.0 के तहत सूडा द्वारा जशपुर नगर पालिका के वार्ड क्रमांक-9 में सती तालाब के पुनर्जीवन के लिए 4 करोड़ 17 लाख रुपए, कांकेर नगर पालिका के वार्ड क्रमांक-19, अघननगर में दुधावा तालाब के लिए 5 करोड़ 4 लाख रुपए, अहिवारा नगर पालिका में छटवा तालाब के लिए 9 करोड़ 60 लाख रुपए तथा डोंगरगढ़ नगर पालिका में सिंघोला बांधा तालाब के पुनर्जीवन के लिए 3 करोड़ 38 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। स्वीकृत राशि में इन परियोजनाओं के 5 वर्षों के संचालन एवं संधारण (O&M) के प्रावधान भी शामिल है। इनके निर्माण कार्यों की निगरानी भारत सरकार द्वारा नियुक्त थर्ड पार्टी इंडिपेंडेंट रिव्यू एंड मॉनिटरिंग एजेंसी (IRMA) द्वारा की जाएगी।
चारों कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने के निर्देश
उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने चारों निकायों में कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार शहरी क्षेत्रों को स्वच्छ, हरित और जल-सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। 'अमृत मिशन 2.0' का मुख्य उद्देश्य हमारे पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना और नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाना है। अहिवारा, कांकेर, जशपुरनगर और डोंगरगढ़ में स्वीकृत ये 4 परियोजनाएं न केवल हमारे प्राकृतिक जल निकायों का अस्तित्व बचाएंगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव रखेंगी।
जल स्रोतों के संरक्षण और भूजल संवर्धन को मिलेगी मजबूती
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि मिशन अमृत 2.0 के माध्यम से प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। तालाब केवल जल संग्रहण के साधन नहीं हैं, बल्कि वे शहरों के पर्यावरणीय संतुलन और भूजल स्तर को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। श्री बोरा ने कहा कि इन तालाबों के पुनर्जीवन से जल संरक्षण और भूजल संवर्धन को मजबूती मिलेगी तथा नगरीय क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं और पर्यावरणीय गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। उन्होंने चारों निकायों को सभी कार्यों को निर्धारित मापदंडों और स्वीकृत प्राक्कलन के अनुसार सुनिश्चित करने को कहा है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सक्ती के जेठा में किया पौधरोपण
केंद्रीय मंत्री चौहान ने लगाया कदम और मुख्यमंत्री साय ने बादाम का पौधा
पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की प्रेरक पहल है ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान
रायपुर / पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को बढ़ावा देने और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का संदेश देते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सक्ती जिले के ग्राम जेठा स्थित कॉलेज ग्राउंड में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधरोपण किया।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कदम का पौधा और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बादाम का पौधा रोपित किया। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने भी पर्यावरण संरक्षण और हरियाली के विस्तार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान मातृ सम्मान की भावना को प्रकृति संरक्षण के संकल्प से जोड़ता है। अभियान के माध्यम से लोगों को अपनी माँ के सम्मान में पौधा लगाने के साथ ही उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पौधरोपण के साथ पौधों की देखभाल और उन्हें वृक्ष के रूप में विकसित करने की जिम्मेदारी का भाव भी इस अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
यह अभियान पर्यावरण संरक्षण को केवल शासकीय प्रयास तक सीमित न रखते हुए उसे जनभागीदारी का व्यापक स्वरूप देने की पहल है। अधिक से अधिक नागरिकों की सहभागिता से हरियाली बढ़ाने, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण का संदेश अभियान के माध्यम से दिया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से देशभर में नागरिकों को पौधरोपण से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में सक्ती जिले में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान और मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा किया गया पौधरोपण प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देता है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, जिले के प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, जांजगीर-चांपा सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, बिलासपुर संभागायुक्त श्री सुनील जैन, विकसित भारत जीरामजी के आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा, कलेक्टर श्रीमती जयश्री जैन, पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर, जिला पंचायत सीईओ श्री वासु जैन सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।
एक ही परिवार से जुड़े सदस्यों को समूह में शामिल करने और बिना निविदा प्रक्रिया के आवंटन के आरोप, अनुमति व एनओसी को लेकर भी सवाल
कोंडागांव। जिला मुख्यालय में विहान समूह के अंतर्गत संचालित किए जा रहे ‘मोर स्वाद वीआईपी रेस्टोरेंट’ को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि रेस्टोरेंट का संचालन जिस लक्ष्मी स्व सहायता समूह, पलारी को दिया गया है, उसमें एक ही परिवार से जुड़े कई सदस्य शामिल हैं। वहीं, समूह के पीछे प्रभावशाली लोगों की भूमिका होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि रेस्टोरेंट को विहान समूह के अंतर्गत लक्ष्मी स्व सहायता समूह को आवंटित किया गया है। आरोप है कि समूह में जिला पंचायत में विहान के अंतर्गत पदस्थ लेखापाल लोचन देवांगन की पत्नी, उनके बड़े भाइयों की पत्नियां तथा परिवार से जुड़े अन्य सदस्य शामिल हैं। संबंधित सदस्यों के पतियों के शासकीय संस्थानों में पदस्थ होने की बात भी सामने आ रही है।
इसी को लेकर सवाल उठ रहा है कि क्या पात्रता और पारदर्शिता के सभी मापदंडों का पालन करते हुए समूह का चयन किया गया? शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, ग्राम पंचायत के नाम समूह बनाकर सीधे शहरी छेत्र मे अलबेडा पारा वार्ड के समूह को छोड़ककर अमीर लोगो के परिवार को गरीब बता कर समूह बना कर खोला गया है, जो नियम के विरुद्ध मिलीभगत से खोला गया है।
शहरी क्षेत्र में संचालन, अनुमति को लेकर भी सवाल
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू रेस्टोरेंट के स्थान और संचालन से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि उक्त रेस्टोरेंट शहरी क्षेत्र में संचालित हो रहा है। और खाने पीने का सामानों में अत्यधिक राशि लिया जा रहा है ऐसे में स्थानीय निकाय की अनुमति, आवश्यक एनओसी और अन्य वैधानिक औपचारिकताओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि रेस्टोरेंट शुरू करने से पहले संबंधित वार्ड पार्षद की अनुमति तथा नगरपालिका से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र लिया गया था या नहीं। इस संबंध में प्रशासन और नगरपालिका स्तर से स्थिति स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
महिला सशक्तिकरण योजना पर भी उठ रहे सवाल
सरकार द्वारा महिला स्व सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में यदि किसी एक समूह को बिना पारदर्शी प्रक्रिया के लाभ पहुंचाया गया है, तो यह योजना के मूल उद्देश्य और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि समूह के सदस्यों के पारिवारिक संबंध, उनके पतियों की सरकारी सेवा में पदस्थापना और समूह को मिले कार्य की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर
मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि लक्ष्मी स्व सहायता समूह का चयन किन नियमों के तहत किया गया, चयन प्रक्रिया में कितने समूह शामिल हुए, क्या निविदा या अन्य निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई तथा रेस्टोरेंट संचालन के लिए नगरपालिका सहित संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति ली गई या नहीं।
इस सम्बन्ध मे संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे के द्वारा जिला पंचायत बिहान को सुचना का अधिकार के तहत समूह के सदस्यों के नाम पति/ पिता का नाम पता और निविदा के जानकारी चाही गई थी किंतु जानकारी प्रदाय नहीं किया गया, पुनः प्रथम अपील जिला पंचायत कोंडागांव के अपिलीय अधिकारी को किया गया। जिसपर सुनवाई 20/07/2026 को किया गया अपिलीय अधिकारी अविनाश भोई केजानकारी प्रदाय नहीं किये जाने के कारण जिला मिशन मैनेजर विनय सिंह को तत्काल निर्देशित कर समूह कि सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जिमसे विनय सिंह द्वारा सूची मै स्वयं निकाल दिया था देने के लिए पर स्टॉफ क्यों नहीं दिए मै तत्काल समूह कि सूची दे रहा हु बोला गया। किंतु दो माह होने जा रहा है आज दिनांक तक समूह कि जानकारी नहीं दिया गया। जो पारदर्शिता मे एनिमयता दिखाई दे रही है जो जाँच का विषय है
अब मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की जांच कर चयन प्रक्रिया, समूह की पात्रता, हितों के टकराव और आवश्यक अनुमतियों की जांच करे। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए जा रहे आरोप कितने सही हैं और कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। अगर उलंघन हुआ है तो दोषियों पर करवाई कब किया जायेगा।
औचक निरीक्षण में दस्तावेज, स्टॉक एवं सप्लाई व्यवस्था सही मिली; मौके पर फैक्ट्री या री-पैकिंग सामग्री भी नहीं मिली*
बालोद। Shouryapath। ग्राम कलंगपुर स्थित खाद एवं कीटनाशक दवा गोदाम को लेकर सोशल मीडिया एवं कुछ समाचार माध्यमों में फर्जी दवा निर्माण और अवैध पैकिंग से संबंधित प्रसारित की जा रही खबरों के संबंध में कृषि विभाग द्वारा जांच की गई। जांच के दौरान मौके पर फर्जी दवा निर्माण, अवैध फैक्ट्री अथवा री-पैकिंग से संबंधित कोई प्रमाण नहीं पाया गया।
सोशल मीडिया पर प्रसारित शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए 11 सितंबर 2026 को एसडीओ कृषि, बालोद एवं वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी, गुंडरदेही की संयुक्त टीम द्वारा कलंगपुर स्थित खाद एवं कीटनाशक दवा गोदाम का औचक निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने गोदाम में उपलब्ध दस्तावेजों, स्टॉक एवं कारोबार से संबंधित विभिन्न बिंदुओं की जांच की।
*दस्तावेज एवं स्टॉक का किया गया सत्यापन*
निरीक्षण के दौरान खाद एवं कीटनाशक दवाओं के आवक-जावक रजिस्टर, बिल बुक, स्टॉक रजिस्टर सहित अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। उपलब्ध रिकॉर्ड एवं मौके पर मौजूद स्टॉक का मिलान किया गया तथा जांच में दस्तावेजों में कोई ऐसी अनियमितता सामने नहीं आई, जिससे फर्जी दवा निर्माण अथवा अवैध कारोबार की पुष्टि हो।
*अधिकृत कंपनियों से सप्लाई की भी हुई पुष्टि*
जांच टीम द्वारा गोदाम में उपलब्ध कृषि सामग्री की सप्लाई व्यवस्था की भी पड़ताल की गई। जिन कंपनियों से उर्वरक एवं कीटनाशक सामग्री की आपूर्ति होने की जानकारी दी गई, उनके संबंध में भी सत्यापन किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गोदाम में कृषि सामग्री का कारोबार अधिकृत आपूर्ति व्यवस्था के माध्यम से संचालित होना पाया गया।
*मौके पर नहीं मिली अवैध फैक्ट्री या री-पैकिंग की सामग्री*
भौतिक निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने गोदाम एवं परिसर का जायजा लिया। मौके पर किसी प्रकार की अवैध दवा निर्माण फैक्ट्री, दवा बनाने की मशीनरी अथवा फर्जी पैकिंग/री-पैकिंग से संबंधित उपकरण या सामग्री नहीं पाई गई।
इस प्रकार, जांच के दौरान सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों में लगाए गए फर्जी दवा निर्माण संबंधी आरोपों की मौके पर पुष्टि नहीं हुई।
*30 वर्षों से संचालित प्रतिष्ठान, सरपंच ने भी दी लिखित जानकारी*
गोदाम संचालक द्वारा बताया गया कि संबंधित प्रतिष्ठान पिछले लगभग 30 वर्षों से ग्राम कलंगपुर में संचालित हो रहा है। इस संबंध में ग्राम पंचायत कलंगपुर के सरपंच द्वारा भी लिखित रूप से जानकारी दी गई है कि प्रतिष्ठान लंबे समय से गांव में संचालित है तथा अब तक किसानों अथवा ग्रामीणों की ओर से इसकी गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत उनके संज्ञान में नहीं आई है।
प्रतिष्ठान संचालक का कहना है कि बिना पूर्ण तथ्यों एवं विभागीय जांच के सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई खबरों से उनकी वर्षों से अर्जित प्रतिष्ठा एवं व्यवसायिक छवि को नुकसान पहुंचा है।
*बिना सत्यापन के खबरों के प्रसार से बचने की अपील*
कृषि सामग्री से संबंधित किसी भी शिकायत या संदेह की स्थिति में संबंधित विभाग से तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है। बिना विभागीय पुष्टि, मौके की जांच अथवा संबंधित पक्ष का पक्ष जाने किसी व्यक्ति या प्रतिष्ठान के विरुद्ध गंभीर आरोपों का प्रचार करना उचित नहीं है।
कृषि विभाग की अपील
कृषि विभाग ने आम जनता, किसानों एवं मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की है कि—
कृषि उत्पादों, खाद एवं कीटनाशक दवाओं से संबंधित किसी भी शिकायत की पहले अधिकृत विभाग से पुष्टि करें।
बिना सत्यापन के सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक या अपुष्ट जानकारी प्रसारित न करें।
कृषि सामग्री की गुणवत्ता अथवा बिक्री से संबंधित कोई शिकायत होने पर नजदीकी कृषि कार्यालय अथवा संबंधित अधिकारी से संपर्क करें।
किसी भी प्रतिष्ठान या व्यापारी के संबंध में तथ्यहीन जानकारी प्रसारित करने से बचें।
विभागीय जांच में फर्जी दवा निर्माण अथवा अवैध री-पैकिंग से संबंधित कोई प्रमाण सामने नहीं आने के बाद मामले को लेकर प्रसारित की जा रही अपुष्ट खबरों पर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
तेज बारिश ने नालों-नालियों से बहाया प्लास्टिक कचरा, अब प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल कर निर्णायक पहल कर सकती हैं आयुक्त
दुर्ग// पिछले शाम हुई तेज बारिश ने जहां दुर्ग शहर की जलनिकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने ला दी, वहीं इस बारिश ने नगर निगम प्रशासन को एक ऐसा अवसर भी दिया है, जिसे यदि समय रहते इस्तेमाल किया जाए तो शहर की तस्वीर बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।
तेज बारिश के कारण गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य मार्गों तक जलभराव की स्थिति बनी और कई स्थानों पर सड़क, नाली और नाले एक समान दिखाई देने लगे। तेज बहाव के साथ नालों-नालियों में जमा प्लास्टिक कचरा भी काफी हद तक बहकर निकल गया। ऐसे में नवनियुक्त नगर निगम आयुक्त IAS लीना कोसाम के सामने अब दुर्ग को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक अभियान शुरू करने का एक बेहतरीन अवसर है।
बारिश से साफ हुए नाले, अब दोबारा प्लास्टिक से भरने से रोकना चुनौती
बारिश के तेज बहाव ने नालों और नालियों में लंबे समय से जमा कचरे को बहा दिया। लेकिन यदि शहर में प्लास्टिक के अनियंत्रित उपयोग और विक्रय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाली बारिश में यही स्थिति दोबारा उत्पन्न होना तय है।
शहर के छोटे-बड़े बाजारों और गली-कूचों में प्लास्टिक गिलास, कप, पन्नियां तथा अन्य ऐसी प्लास्टिक सामग्री का उपयोग और विक्रय दिखाई देता है, जिनमें से कई सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने की स्थिति में पर्यावरण और जलनिकासी व्यवस्था के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।
यही प्लास्टिक जब कचरे के साथ नालियों तक पहुंचता है तो जलनिकासी अवरुद्ध होने का एक बड़ा कारण बनता है।
नए आयुक्त के लिए पहला बड़ा संदेश बन सकता है अभियान
नगर निगम की प्रशासनिक कमान संभालने वाली नवनियुक्त आयुक्त लीना कोसाम के लिए यह अभियान उनके कार्यकाल की एक प्रभावी और जनहितकारी शुरुआत बन सकता है।
यदि आयुक्त अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए नगर निगम के संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दें, बाजार क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कराएं, नियमों के विपरीत प्लास्टिक सामग्री के विक्रय पर कार्रवाई सुनिश्चित करें और कार्रवाई को केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित रखने के बजाय थोक विक्रेताओं तथा आपूर्ति स्रोतों तक ले जाएं, तो इसका सीधा असर शहर की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।
सिर्फ सफाई नहीं, प्लास्टिक के स्रोत पर कार्रवाई जरूरी
शहर को साफ रखने के लिए हर बारिश के बाद नालियों की सफाई करना स्थायी समाधान नहीं है। असली जरूरत यह सुनिश्चित करने की है कि प्लास्टिक कचरा नालियों और नालों तक पहुंचे ही नहीं।
इसके लिए नगर निगम को प्लास्टिक के खिलाफ लगातार अभियान चलाना होगा। दुकानों और बाजारों में जांच, नियमों के अनुरूप सामग्री के उपयोग को प्रोत्साहन, प्रतिबंधित अथवा मानकों के विपरीत सामग्री पर नियमानुसार कार्रवाई और नागरिकों में जागरूकता—इन सभी कदमों को एक साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।
निष्क्रियता के दौर से निकलकर निर्णायक कार्रवाई का समय
सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नगर निगम प्रशासन को समय-समय पर सवालों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। ऐसे माहौल में नए आयुक्त के पास केवल व्यवस्था संभालने का नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव का संदेश देने का भी अवसर है।
तेज बारिश ने जहां शहर के लिए असुविधा और जलभराव जैसी समस्या पैदा की, वहीं उसी बहाव ने नालियों से पुराने प्लास्टिक कचरे को बाहर निकाल दिया। अब यदि इसी स्थिति को आधार बनाकर नगर निगम प्लास्टिक के खिलाफ प्रभावी और निरंतर कार्रवाई शुरू करता है तो यह “आपदा में अवसर” का वास्तविक उदाहरण बन सकता है।
लीना कोसाम के लिए मौका—शहर की दशा और दिशा बदलने का
नवनियुक्त आयुक्त IAS लीना कोसाम के लिए यह सिर्फ एक सफाई अभियान नहीं, बल्कि शहर की कार्यप्रणाली में अपनी प्रशासनिक प्राथमिकता स्पष्ट करने का अवसर हो सकता है।
यदि उनके कार्यकाल की शुरुआत ही “प्लास्टिक मुक्त दुर्ग” जैसे ठोस जनहित अभियान से होती है और इसके परिणाम जमीन पर दिखाई देते हैं, तो यह पहल लंबे समय तक शहर के लिए यादगार बन सकती है।
बारिश ने नालियों से प्लास्टिक बहा दिया है, अब सवाल यह है कि क्या नगर निगम प्रशासन उसे दोबारा नालियों तक पहुंचने देगा?
जवाब और कार्रवाई—दोनों की उम्मीद अब नवनियुक्त आयुक्त लीना कोसाम से है।
रायपुर / छत्तीसगढ़ में विकास गतिविधियों को गति देने और भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, स्पष्ट एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित संशोधन में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए Negative List आधारित व्यवस्था अपनाने का प्रावधान किया गया है। यह पहल केंद्र सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के व्यापक सुधारों के अनुरूप है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए तथा विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी तथा प्रदेश में निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी।
आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नियमन को समाप्त करना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है। Negative List आधारित व्यवस्था के माध्यम से प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा, जबकि अन्य गतिविधियों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाएं कम होंगी। इससे बदलती आर्थिक एवं सामाजिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था अधिक व्यावहारिक बनेगी।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन@2047 के अनुरूप और भारत सरकार के डीरिगुलेशन एवं ईज ऑफ लिविंग से जुड़े सुधारों की दिशा में छत्तीसगढ़ लगातार नीतिगत सुधार कर रहा है। आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में ग्रामीण और शहरी विकास को गति देने के लिए अनेक सुधार किए गए हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव प्रदेश के आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक विकास को नई गति देगा।
उन्होंने कहा कि इस सुधार से मास्टर प्लान में निर्धारित विभिन्न भूमि उपयोगों को अधिक लचीला, व्यावहारिक और समयानुकूल बनाया जा सकेगा। इसका लाभ आम नागरिकों को भी मिलेगा और भूमि उपयोग से संबंधित प्रक्रियाओं में आने वाली कठिनाइयों को कम करने का मार्ग प्रशस्त होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ नियोजित विकास और आवश्यक प्रतिबंधों के बीच संतुलन स्थापित करना है।
प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्ट सूची, अन्य गतिविधियों के लिए व्यापक अवसर
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों में केवल निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी की Negative List में शामिल नहीं होने वाली गतिविधियों को अनुमत माना जाएगा। इससे वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में विकसित होने वाली नई गतिविधियों के लिए भी अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।
प्रस्ताव में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद तथा कृषि भूमि उपयोग के लिए अलग-अलग निषिद्ध गतिविधियों की सूची निर्धारित की गई है। इससे प्रत्येक क्षेत्र की प्रकृति, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और विकास की जरूरतों के अनुरूप स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था विकसित होगी।
आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता
आवासीय भूमि उपयोग के अंतर्गत प्रदूषणकारी उद्योगों, बड़े भंडारण, कबाड़खानों, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है। इससे आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा, पर्यावरणीय गुणवत्ता और बेहतर जीवन-परिस्थितियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्पष्ट नियोजन
वाणिज्यिक भूमि उपयोग में नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योगों, खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों के भंडारण सहित पशुपालन, मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन गतिविधियों को निषिद्ध करने का प्रावधान किया गया है।
वहीं औद्योगिक भूमि उपयोग में पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, अनुमत कर्मचारी आवास को छोड़कर छात्रावास एवं शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।
कृषि, सार्वजनिक और परिवहन क्षेत्रों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था
कृषि भूमि उपयोग में आवासीय अभिन्यास, किफायती जन आवास एवं एकीकृत उपनगर को छोड़कर बड़े वाणिज्यिक परिसर, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं तथा बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है।
इसी प्रकार सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन तथा आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग के लिए भी असंगत, प्रदूषणकारी, खतरनाक एवं अत्यधिक भारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निषिद्ध किया गया है। इससे निर्धारित भूमि उपयोग और संबंधित क्षेत्र की विकास आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।
नई अर्थव्यवस्था और बदलती जरूरतों के अनुरूप नियोजन
तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के साथ नई सेवाओं, संस्थाओं, व्यवसायों और तकनीकी गतिविधियों के स्वरूप भी लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में पहले से तय गतिविधियों की लंबी सूची के बजाय स्पष्ट रूप से निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों के आधार पर नियमन करने से नई और उभरती गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
प्रस्तावित व्यवस्था से अनावश्यक अनुपालन बोझ कम होने के साथ विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही निवेशकों के लिए अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमानित नियामकीय वातावरण तैयार होगा। इससे प्रदेश के शहरों और कस्बों में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं और अधोसंरचना से जुड़ी बदलती जरूरतों को पूरा करने में भी सुविधा होगी।
नागरिकों और संबंधित पक्षों से मांगे गए सुझाव
प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों एवं संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिवस की अवधि में प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमों में प्रस्तावित संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव छत्तीसगढ़ में सरल नियमन, कम अनुपालन बोझ, स्पष्ट नियोजन और विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है। इससे प्रदेश की बदलती विकास आवश्यकताओं के अनुरूप नियोजन व्यवस्था को अधिक लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद मिलेगी।
रायपुर/ उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज दन्तेवाड़ा में ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस अभियान को जनभागीदारी के साथ व्यापक स्वरूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान के अंतर्गत होने वाले कार्यक्रम केवल जिला मुख्यालय तक सीमित न रहें, बल्कि जनपद, तहसील, नगर पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर तक प्रभावी रूप से आयोजित किए जाएं।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थाओं, स्वसहायता समूहों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने विभागवार तैयारियों की जानकारी लेते हुए सभी कार्यक्रमों का समयबद्ध क्रियान्वयन और नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। अभियान के तहत ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘सेवा की कहानी’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘आंगन का उत्सव’, ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’ ‘जल जन सेवा संकल्प’ और ‘सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार’ सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। विद्यालयों में चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं, आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण जागरूकता कार्यक्रम तथा स्वच्छता एवं जनसेवा से जुड़ी गतिविधियां भी होंगी।
कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने जिले में अभियान की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि व्यापक जनभागीदारी के लिए विभिन्न स्तरों पर बैठकें आयोजित कर दिनवार एवं तिथिवार कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। उप मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के साथ नियमित समीक्षा कर तैयारियों की सतत निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ केवल शासकीय कार्यक्रमों की श्रृंखला न होकर सेवा, समर्पण और विकसित भारत-2047 के संकल्प को जनभागीदारी के माध्यम से मजबूत करने का अवसर बने। डीएफओ श्री रामाकृष्ण रंगानाथा वाय. और अपर कलेक्टर श्री राजेश पात्र सहित सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।
रायपुर / बस्तर अंचल के दूरस्थ क्षेत्रों में छुपी प्रतिभाओं को तराशने और उनके प्रशासनिक सेवाओं में जाने के सपनों को साकार करने के लिए नारायणपुर में एक बेहद सराहनीय पहल की शुरुआत हुई है। जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा और वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) निधि से संचालित निःशुल्क पीएससी एवं व्यापम आवासीय कोचिंग सेंटर का विधिवत शुभारंभ किया।
जिला प्रशासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले के आर्थिक रूप से कमजोर और संसाधनों के अभाव से जूझ रहे मेधावी युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक अनुकूल माहौल और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन देना है। कोचिंग सेंटर के पहले बैच के लिए पारदर्शी चयन प्रक्रिया के जरिए 50 प्रतिभावान अभ्यर्थियों का चयन किया गया है, जिनमें 26 बालिकाएं और 24 बालक शामिल हैं।
शुभारंभ समारोह के दौरान मंत्रियों और अतिथियों ने सभी चयनित विद्यार्थियों को बैग, कॉपी, मानक पुस्तकें, पेन और आवश्यक स्टडी किट भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। इन अभ्यर्थियों को न केवल सर्वसुविधायुक्त निःशुल्क आवास और भोजन की सुविधा मिलेगी, बल्कि विषय विशेषज्ञों द्वारा नियमित कक्षाओं के माध्यम से राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) और व्यापम जैसी कठिन परीक्षाओं की बारीकियां भी सिखाई जाएंगी।
आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त को इस योजना की क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया है, जो सेंटर की व्यवस्थाओं और गुणवत्ता पर सीधी नजर रखेगी। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, छोटेडोंगर सरपंच, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी और सहायक आयुक्त सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
रायपुर / छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले क अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार नारायणपुर में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और नियमित शिक्षा की दिशा में एक नई और क्रांतिकारी शुरुआत हुई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत जिले के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत 13 हजार से अधिक विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क पौष्टिक नाश्ता योजना का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को कुपोषण से पूरी तरह मुक्त करने के उद्देश्य से पौष्टिक लड्डू वितरण कार्यक्रम की भी शुरुआत की गई। जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने इस दूरगामी पहल का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया और स्वयं अपने हाथों से नन्हे-मुन्ने बच्चों को स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नाश्ता परोसकर उनका उत्साहवर्धन किया।
यह महत्वाकांक्षी पहल नारायणपुर और ओरछा (अबूझमाड़) विकासखंड के कुल 476 विद्यालयों में लागू की जा रही है, जिससे 13 हजार 15 स्कूली बच्चे सीधे लाभान्वित होंगे। योजना के तहत हर विद्यार्थी को प्रतिदिन 150 ग्राम ताजा और सेहतमंद नाश्ता दिया जाएगा। बच्चों के स्वाद और पोषण का विशेष ध्यान रखते हुए दिन के हिसाब से एक संतुलित मेन्यू तय किया गया है, जिसमें पोहा-फलीदाना, सूजी का उपमा, दलिया, चना, खड़ा मूंग और मूंगफली जैसे प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल हैं। भोजन तैयार करने वाली व्यवस्था को मजबूती देने के लिए जिले के 676 रसोइयों को 800 रुपये प्रतिमाह का अतिरिक्त मानदेय भी दिया जा रहा है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है।
यह कार्यक्रम न केवल नौनिहालों को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालेगा, बल्कि दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने, ठहराव सुनिश्चित करने और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखने में मील का पत्थर साबित होगा। इस गरिमामय अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, ग्रामीण और स्कूली बच्चे मौजूद रहे।
अंतिम दिन हिंदी नाटक और लोकनाट्य की सशक्त प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कलाकारों ने अभिनय के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों को दी जीवंत अभिव्यक्ति
रायपुर । संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘रंग परब’ नाट्य श्रृंखला का अंतिम दिन हिंदी नाटक और छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य की प्रभावशाली प्रस्तुतियों के नाम रहा। मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित समापन दिवस में ‘टीस’ और ‘हण्डा’ नाटकों ने दर्शकों को भावनाओं, सामाजिक सरोकारों और लोक संस्कृति के विविध रंगों से जोड़ा। दोनों प्रस्तुतियों में कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, संवाद और मंचीय अभिव्यक्ति के माध्यम से रंगमंच की विविधता और उसकी सामाजिक भूमिका को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
अंतिम दिन की पहली प्रस्तुति हिंदी नाटक ‘टीस’ की रही। आचार्य रंजन मोडक, लोकेश साहू एवं साथियों द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने मानवीय संवेदनाओं और जीवन के विभिन्न पहलुओं को मंच पर प्रभावशाली ढंग से उकेरा। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से पात्रों की भावनात्मक स्थितियों को जीवंत किया। प्रस्तुति में मानवीय भावनाओं के साथ सामाजिक परिस्थितियों और जीवन से जुड़े संवेदनशील पक्षों को इस तरह सामने रखा गया कि दर्शक नाटक से भावनात्मक रूप से जुड़ते चले गए।
‘टीस’ की प्रस्तुति की विशेषता कलाकारों की सहज और प्रभावशाली अभिनय शैली रही। मंच पर पात्रों की भावनाओं, संवादों और घटनाक्रम के बीच बेहतर तालमेल ने नाटक को प्रभावशाली बनाया। प्रस्तुति ने यह रेखांकित किया कि रंगमंच केवल कहानी कहने का माध्यम नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को दर्शकों तक सीधे पहुंचाने वाली सशक्त कला विधा भी है।
‘हण्डा’ ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग
‘टीस’ के बाद लोकनाट्य ‘हण्डा’ की प्रस्तुति ने पूरे माहौल को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन के रंगों से सराबोर कर दिया। श्री चंद्रशेखर चकोर, दल प्रमुख एवं निर्देशक, गुड़ी चऊंरा के दल द्वारा प्रस्तुत इस लोकनाट्य में लोक जीवन, परंपरा और ग्रामीण परिवेश की जीवंत झलक देखने को मिली। कलाकारों ने लोकभाषा, अभिनय और पारंपरिक रंगमंचीय शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को मंच पर जीवंत किया।
लोकनाट्य की प्रस्तुति के दौरान कलाकारों की ऊर्जा और पारंपरिक शैली ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। ‘हण्डा’ के माध्यम से लोक जीवन से जुड़े प्रसंगों और सांस्कृतिक परंपराओं को सहज एवं प्रभावी अंदाज में प्रस्तुत किया गया। इससे दर्शकों को मनोरंजन के साथ अपनी मिट्टी, बोली और लोक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी मिला।
रंगमंच समाज की वास्तविक तस्वीर सामने रखने वाली सशक्त विधा : डॉ. संजय कनौजे
इस अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कनौजे ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक तस्वीर सामने रखने वाली सशक्त विधा है। रंगमंच के माध्यम से कलाकार जीवन के विभिन्न पहलुओं, संवेदनाओं, संघर्षों और सामाजिक सरोकारों को प्रभावी ढंग से दर्शकों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि नाटक दर्शकों को केवल किसी कथा या पात्र से जोड़ता ही नहीं, बल्कि उन्हें सोचने, समझने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में प्रेरित भी करता है।
डॉ. कनौजे ने कहा कि रंगमंच हमारी संस्कृति, परंपराओं और मानवीय मूल्यों को जीवंत बनाए रखने तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभिन्न रंग शैलियों और लोक परंपराओं को मंच मिलता है तथा कलाकारों को अपनी कला और सृजनात्मकता को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
एक मंच पर दिखे रंगमंच और लोक परंपरा के विविध रंग
रंग परब नाट्य श्रृंखला के अंतिम दिन की दोनों प्रस्तुतियों ने आयोजन को सार्थक समापन दिया। एक ओर ‘टीस’ ने हिंदी रंगमंच के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया, वहीं दूसरी ओर ‘हण्डा’ ने छत्तीसगढ़ की लोकनाट्य परंपरा, लोकभाषा और ग्रामीण जीवन के रंगों को दर्शकों के सामने जीवंत कर दिया।
इस तरह अंतिम दिन का मंचन आधुनिक रंगमंचीय अभिव्यक्ति और पारंपरिक लोकनाट्य के सुंदर संगम का साक्षी बना। प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक चिंतन का अवसर दिया तथा ‘रंग परब’ की पूरी नाट्य श्रृंखला के उद्देश्य को प्रभावी रूप से सामने रखा।
कार्यक्रम में साहित्यकार एवं नाटककार श्री विजय मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान, सामाजिक कार्यकर्ता श्री उदयभान चौहान, संस्कृति विभाग के भानु मरकाम एवं अजय चंद्राकर सहित अन्य गणमान्यजन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
दुर्ग/ शौर्यपथ / नगर पालिक निगम। नगर पालिक निगम दुर्ग के वार्ड क्रमांक 54 पोटियाकला स्थित दशहरा मैदान में कर्मा भवन (सांस्कृतिक भवन) के प्रथम तल के निर्माण कार्य का भूमिपूजन महापौर अलका बाघमार द्वारा किया गया। लगभग 20 लाख रुपये की लागत से होने वाले इस निर्माण कार्य से क्षेत्रवासियों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक आयोजनों के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।
भूमिपूजन कार्यक्रम में महापौर अलका बाघमार के साथ आयुक्त लीना कोसम, लोक कर्म प्रभारी देव नारायण चन्द्राकर, पार्षद हीरौंदी चंदानिया, सविता साहू, सजान जोसफ, मंडल अध्यक्ष कौशल साहू, लालेश्वरी साहू, कार्यपालन अभियंता विनीता वर्मा, सहायक अभियंता हरिशंकर साहू, करण यादव सहित बड़ी संख्या में वार्डवासी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर महापौर अलका बाघमार ने कहा कि कर्मा भवन का प्रथम तल बनने से वार्डवासियों को विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिए एक बेहतर और सुविधायुक्त स्थान मिलेगा। निगम क्षेत्र में नागरिकों की आवश्यकता के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से समय-सीमा में पूरा हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
-महापौर एवं आयुक्त ने वार्ड 13 एवं 25 में नाली निर्माण कार्य का किया निरीक्षण,
-खटाल संचालक को गंदगी फैलाने पर नोटिस,पालन नहीं करने पर होगी जुर्माने की कार्रवाई,
दुर्ग/ शौर्यपथ / नगर पालिक निगम। नगर पालिक निगम सीमा क्षेत्र अंतर्गत आज महापौर अलका बाघमार एवं आयुक्त लीना कोसम ने वार्ड क्रमांक 13 एवं 25 में आईएएम चौक से अग्रसेन चौक की ओर जाने वाले मार्ग पर पीडब्ल्यूडी, दुर्ग द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान निर्माण कार्य की प्रगति एवं मौके पर आ रही समस्याओं की जानकारी लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान महापौर अलका बाघमार एवं आयुक्त लीना कोसम ने निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं का तत्काल निराकरण कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर उसे लंबित न रखा जाए, बल्कि संबंधित विभागों से समन्वय कर तत्काल समाधान करते हुए निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाए।
महापौर अलका बाघमार ने क्षेत्र में खटाल संचालक द्वारा आसपास गंदगी फैलाए जाने की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित संचालक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नोटिस के बाद भी आदेश का पालन नहीं करने पर संबंधित के विरुद्ध जुर्माने की कार्रवाई की जाए।
महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नाली निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं का मौके पर ही संज्ञान लेकर उनका शीघ्र निराकरण करें, ताकि निर्माण कार्य निर्धारित गति से आगे बढ़ सके और नागरिकों को इसका लाभ जल्द मिल सके।
निरीक्षण के दौरान लोक कर्म प्रभारी देव नारायण चन्द्राकर, राजस्व एवं बाजार विभाग प्रभारी शेखर चन्द्राकर, पार्षद मनीषा सोनी, विद्यावती सिंह, रंजीता पाटिल, सावित्री दमाहे, अरुण सिंह, सहायक अभियंता संजय ठाकुर, करण यादव, विकास दमाहे सहित संबंधित अधिकारी एवं ठेकेदार उपस्थित रहे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
